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Published / 2022-06-26 08:20:20
दुनिया की करीब आधी नदियां दवाओं से दूषित, यमुना और कृष्णा नदी में मिले अंश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया की लगभग आधी से ज्यादा नदियां दवाओं के कारण दूषित हो रही हैं। नदियों में दवाइयों के कारण बढ़ रहा प्रदूषण भी डराने लगा है, क्योंकि यह प्रदूषण अप्रत्यक्ष तौर पर करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। जर्नल एनवायरमेंटल टॉक्सीकोलॉजी एंड केमिकल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इन नदियों के जल का 43.5 प्रतिशत भाग दवाओं के कारण दूषित हो चुका है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ योर्क के शीर्ष अलेजांद्रा बुजस-मोनरॉय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 104 देशों में 1,052 नमूनों का विश्लेषण किया। इनमें सुरक्षित माने जाने वाले स्तरों से अधिक स्तरों पर 23 अलग-अलग दवाओं के मिश्रण मिले। भारत की स्थिति : इसी वर्ष फरवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जैसे निम्न मध्यम आय वाले देशों की नदियों में सबसे अधिक फार्मास्युटिकल प्रदूषण की मात्रा पाई गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली और हैदराबाद के वैज्ञानिकों सहित विल्किंसन और उनके सहयोगियों ने दिल्ली में यमुना नदी और हैदराबाद में कृष्णा और मुसी नदियों सहित 104 देशों में 258 नदियों के 1,052 नमूना स्थलों से नमूनों में दवाओं के अंश का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में चार दवाओं कैफीन, निकोटीन, पैरासिटामोल और निकोटिन का पता चला था। घातक सुपरबग के पनपने का खतरा : झील के अध्ययनों से पता चला है कि गर्भ निरोधक गोलियां व अन्य सिंथेटिक एस्ट्रोजेन हार्मोन जैसी दवाएं इसमें मौजूद पानी को उच्च स्तर तक दूषित करती हैं। वैज्ञानिकों को डर है कि पर्यावरण में रोगाणुरोधी यौगिकों की उपस्थिति दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के निर्माण में योगदान दे रही है, जिससे घातक सुपरबग के पनपने का भी खतरा है। तनाव, एलर्जी, दर्द निवारण और ताकत बढ़ाने वाली दवाइयों के मिले अंश : अध्ययन के दौरान नदी के पानी में तनाव, एलर्जी, मांसपेशियों में अकड़न, दर्द निवारक और ताकत बढ़ाने जैसी दवाइयों के अंश मिले हैं। ब्रिटिश नदियों के पानी में लगभग 70 प्रतिशत भाग में मिर्गी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा कार्बामाजेपिन, अकेले ब्रिटेन में 54 नमूनों की जांच में इस तरह की 50 दवाओं के अंश मिले। अध्ययन के अनुसार 43 प्रतिशत नदियों के नमूनों में केवल 23 प्रतिशत भाग ही सुरक्षित सैंपल का था।

Published / 2022-06-24 17:23:32
रिसर्च कर वैज्ञानिकों ने बताया- आखिर कैसे 100-200 साल तक जिंदा रहते हैं कुछ जीव...

एबीएन नॉलेज डेस्क। कोई इंसान कितनी लंबी आयु तक जिंदा रह सकता है? 100-125 साल तक। यही न! लेकिन दुनिया में जीवों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जो सैकड़ों साल तक जिंदा रहती हैं। सबसे पहले आपके मन में कछुए का खयाल आया होगा! क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि कुछ जीव सैकड़ों साल तक कैसे जिंदा रह जाते हैं? शायद रीढ़ की हड्डी (कशेरुकी) वाले अन्य जानवरों के जीवनकाल को समझने से इस रहस्य का खुलासा होने में मदद मिल सकती है। आप भी कछुओं को एक लंबा और धीमा जीवन जीने वाले जीव के तौर पर जानते होंगे। 190 साल की उम्र में, सेशेल्स का जोनाथन नामक विशाल कछुआ भूमि का सबसे उम्रदराज प्राणी हो सकता है। लेकिन कुछ अन्य जीव भी हैं, जो दूसरों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं। रिसर्च जर्नल साइंस में प्रकाशित फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के रिसर्चर माइक गार्डनर और उनके अन्य साथी शोधकर्ताओं की एक शोध प्रकाशित हुआ है। यह शोध उन अलग-अलग कारणों की जांच करता है, जिनकी वजह से कुछ जीवों की उम्र बहुत लंबी होती है। यह रिसर्च सरीसृप और उभयचरों में दीर्घायु यानी लंबे जीवनकाल और उम्र बढ़ने को प्रभावित करने वाले कारकों की पड़ताल करता है। 77 प्रजातियों के जीवों पर हुई स्टडी : माइक गार्डनर लिखते हैं, हमने सरीसृपों और उभयचरों की 77 विभिन्न प्रजातियों (सभी ठंडे खून वाले जानवर) के दीर्घकालिक डेटा का उपयोग किया। हमारा काम 100 से अधिक वैज्ञानिकों के बीच एक सहयोग पर आधारित है जिसमें जानवरों पर 60 साल तक का डेटा है जिन्हें पकड़ा गया, चिह्नित किया गया, छोड़ दिया गया और फिर से पकड़ा गया। इन आंकड़ों की तुलना गर्म खून वाले जानवरों की मौजूदा जानकारी से की गई, और उम्र बढ़ने के बारे में कई अलग-अलग विचार सामने आए। 1. शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने इस लोकप्रिय विचार के साथ काम किया कि ठंडे खून वाले जानवर जैसे मेढक, सैलामैंडर और सरीसृप लंबे समय तक जीवित रहते हैं क्योंकि उनकी उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी होती है। 2. इन जानवरों को अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए बाहरी तापमान पर निर्भर रहना पड़ता है। परिणामस्वरूप उनमें चयापचय प्रक्रिया धीमी होती है. चयापचय से मतलब है- जिस दर पर वे जो खाते हैं और पीते हैं उसे ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। 3. जानवर जो छोटे और गर्म खून वाले होते हैं, जैसे कि चूहे, छोटी उम्र के होते हैं क्योंकि उनका चयापचय तेज होता है और कछुए की उम्र धीरे बढ़ती है क्योंकि उनका चयापचय धीमा होता है। 4. इस तर्क से, ठंडे खून वाले जानवरों में समान आकार के गर्म खून वाले जीवों की तुलना में कम चयापचय होना चाहिए। हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया कि ठंडे खून वाले जानवर समान आकार के गर्म खून वाले जानवरों की तुलना में जल्दी बूढ़े नहीं होते हैं। 5. वास्तव में, शोधकर्ताओं ने जिन सरीसृपों और उभयचरों को देखा, उनमें उम्र बढ़ने की भिन्नता पहले की भविष्यवाणी की तुलना में बहुत अधिक थी। ऐसे में रीढ़ की हड्डी वाले जानवरों की उम्र के कारणों का पता लगाना अधिक जटिल है। एक अन्य संबंधित सिद्धांत यह है कि पर्यावरणीय तापमान भी जीवों की बड़ी उम्र के लिए एक कारण हो सकता है। उदाहरण के लिए, ठंडे क्षेत्रों में जानवर अधिक धीरे-धीरे भोजन संसाधित करते हैं और उनमें निष्क्रियता की अवधि होती है, जैसे हाइबरनेशन में, जिससे जीवनकाल में समग्र वृद्धि होती है। इस परिदृश्य के तहत, ठंडे क्षेत्रों में ठंडे और गर्म रक्त वाले दोनों जानवर गर्म क्षेत्रों के जानवरों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहेंगे। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह एक समूह के रूप में सरीसृपों के लिए सही था, लेकिन उभयचरों के लिए नहीं।

Published / 2022-06-23 16:10:38
कोरोना इफ़ेक्ट : दो साल बाद देवघर में फिर से लगेगा विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला

एबीएन सोशल डेस्क। दो साल के लंबे अंतराल के बाद झारखंड के देवघर में इस बार फिर से सावन मेला लगेगा। बाबा नगरी देवघर में इस बार श्रद्धालु भगवान शंकर का दर्शन और जलाभिषेक कर सकेंगे। श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर देवघर समाहरणालय में समीक्षात्मक बैठक की गई। इस बैठक की अध्यक्षता देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने की। बैठक के बाद देवघर डीसी ने कहा कि श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर यह बैठक की गई थी। सभी विभागों को दिए गए कार्यों की आज समीक्षा की गई और समय रहते सभी कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी ने बताया कि देवघर मंदिर सहित विभिन्न स्थलों का जायजा भी लिया गया है और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए गए हैं। देवघर बाबा मंदिर में शीघ्र दर्शन की नई व्यवस्था लागू की जाएगी वहीं कांवरिया पथ की तैयारियां भी शुरू कर दी गई है। दूसरी तरफ कांवरिया पथ में बने होल्डिंग पॉइंट में श्रद्धालुओं को रोका जाएगा। इसके अलावा देवघर बाबा मंदिर के समीप क्यू कांप्लेक्स में भी तीन कमरों में बैरिकेटिंग की गई है। देवघर डीसी ने कहा कि सभी तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। इस बार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, इसके लिए विभिन्न जगह पर होल्डिंग पॉइंट बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा देवघर नगर निगम और पेयजल स्वच्छता विभाग को पानी की समुचित व्यवस्था करने और निगम को समुचित सफाई की व्यवस्था करने का निर्देश जारी किया गया है, जिसमें स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी। डीसी ने कहा कि सभी विभागों के टेंडर हो चुके हैं और सभी के कार्य सुनिश्चित कर इन्हें फील्ड में भी भेज दिया गया है। समय रहते सभी कार्य निष्पादित कर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि 13 जुलाई से श्रावणी मेला की शुरुआत हो रही है। कोरोना महामारी के कारण 2 साल के अंतराल के बाद श्रावणी मेला का आयोजन हो रहा है, ऐसे में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है। बैठक में देवघर एसपी, एसडीओ, डीडीसी सहित सभी विभागों के अभियंता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

Published / 2022-06-19 17:16:29
योगगुरु जगदीश सिंह ने बताये स्वस्थ रहने के गुर

टीम एबीएन, रांची। हर वर्ष 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में आयुष द्वारा जारी किए गए सामान्य योग अभ्यासक्रम (कॉमन योगा प्रोटोकोल) को आठ ( 8 ) भागों में विभाजित किया गया है। पहले भाग में वंदन है यानी प्रार्थना। दूसरे भाग में चालन क्रियाएं हैं,  जिसे चार भागों में विभाजित किया गया है : 1)  ग्रीवा चालन, 2) स्कंद संचालन, 3) कटि चालन, 4) घुटना संचालन। ग्रीवा चलन के चार चरण हैं : प्रथम चरण - गर्दन को ऊपर और नीचे की ओर झुकाना, द्वितीय चरण -  दाएं एवं बाई और झुकाना, तृतीय चरण -  दाएं और बाएं घुमाना, चतुर्थ चरण - ग्रीवा घुमाना। स्कंध संचालन को दो चरणों में विभाजित किया गया है : चरण 1 -  स्कंद खिंचाव, चरण 2 - स्कंध चक्र (स्कंध चालन)। सामान्य योग अभ्यासक्रम के तीसरे भाग में योगासन है,  जिसे चार भागों में विभाजित किया गया है- पहला :  खड़े होकर किए जाने वाले आसन  - ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन,  त्रिकोणासन। दूसरा : बैठकर किए जाने वाले आसन - भद्रासन, वज्रासन, अर्ध उष्ट्रासन, उष्ट्रासन, शशांक आसन, उत्थान मंडूकासन,  वक्रासन, भुजंगासन। तीसरा :  उदर के बल लेटकर किए जाने वाले आसन -  मकरासन, शलभासन। चौथा : पीठ के बल लेट कर किए जाने वाले आसन - सेतुबंध आसन, उत्तानपादासन, अर्ध हलासन, पवनमुक्तासन शवासन। सामान्य योग अभ्यासक्रम के चौथे भाग में कपालभाति का जिक्र है : सामान्य योग अभ्यास के पांचवे भाग में प्राणायाम को रखा गया है जिसमें तीन तरह के प्राणायाम है : पहला - नाड़ी शोधन अथवा अनुलोम विलोम प्राणायाम। दूसरा - शीतली प्राणायाम। तीसरा -  भ्रामरी प्राणायाम। सामान्य योग अभ्यासक्रम के छठे भाग में ध्यान है। सातवें भाग में संकल्प एवं आठवे भाग में शांति पाठ करके समाप्त किया जाता है। (Jagdish Singh Masters in Yogic Science)

Published / 2022-06-19 17:07:57
पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाना दुर्भाग्यपूर्ण : विहिप

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, झारखंड प्रांत असदुद्दीन ओवैसी के स्वागत एवं सभा के दौरान पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाया गया, जो एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। विश्व हिंदू परिषद इसकी कड़ी निंदा करता है। हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र में देश एवं राष्ट्र सर्वोपरि होता है। देश को नकारते हुए इस्लामिक एजेंडा लेकर आए नेताओं के द्वारा राष्ट्रद्रोही गतिविधि चलाने का एक षड्यंत्र चलाया जा रहा है। झारखंड के मांडर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी सभा में मुस्लिम समुदाय के बीच ओवैसी के द्वारा हिंदू विरोधी विषय को रखना और पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगाना एक चिंताजनक का विषय है। रांची का हिंदू समाज इस देश विरोधी नारे का उत्तर अवश्य देंगे। उक्त जानकारी प्रान्त मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-06-18 14:32:30
हिंदू जागरण मंच झारखंड प्रदेश ने राज्यपाल से की हिंदू धर्मस्थलों की सुरक्षा की मांग

टीम एबीएन, रांची। हिंदू जागरण मंच झारखंड, गत 10 जून को हुई हिंसा की घटना की निंदा करती है और प्राचीन काली मंदिर और हनुमान मंदिर के आसपास के हिंदू परिवारों की सुरक्षा हेतु चिंतित है। हिन्दू जागरण मंच आपसे सविनय निवेदन करती है कि प्राचीन काली मंदिर और हनुमान मंदिर की सुरक्षा हेतु समुचित प्रबंध करते हुए चर्च रोड, गुदरी, हिंदपीढ़ी और लेक रोड के हिन्दू परिवारों की विशेष चिंता की जाए। वो लोग उस घटना से अत्यंत हतोत्साहित है। विशेष कर इस क्षेत्र के हिन्दू कार्यकर्ताओं और हिन्दू जनसाधारण को जिस प्रकार से धमकी दी गयी वो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। विगत शुक्रवार को जिस प्रकार से मन्दिरों को टारगेट किया गया और धमकी दी गयी इससे और चिंता बढ़ गयी है। महाशय विदित हो कि डेली मार्केट थाना के आसपास के क्षेत्र में पुलिस विभाग की जमीन है, जिनमें पहले पुलिस कर्मियों के आवास थे, जो वर्तमान में बंद पड़े हैं । पुलिस विभाग द्वारा उनमें स्थायी पुलिस छावनी का निर्माण किया जा सकता है। जिससे क्षेत्र में विधि व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ हो सके। प्रदेश अध्यक्ष ऋषि शाहदेव ने बताया कि राज्यपाल ने मंदिरों एवं हिन्दू परिवार के सुरक्षा का आश्वासन दिया।अत: श्रीमान से नम्र निवेदन है कि प्राचीन काली मन्दिर, हनुमान मंदिर की सुरक्षा हेतु पुलिस पिकेट की व्यवस्था की जाए और क्षेत्र के अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था करने की कृपा की जाए। प्रदेश अध्यक्ष लाल ऋषि नाथ शहदेव, प्रदेश महामंत्री वाणी कुमार राय, प्रदेश उपाध्यक्ष सुजीत सिंह, प्रदेश प्रवक्ता प्रमुख संजय कुमार वर्मा, महानगर अध्यक्ष चंदन मिश्रा ने महामहिम राज्यपाल से भेंट किया। उक्त जानकारी हिंदू जागरण मंच झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष लाल ऋषि नाथ शाहदेव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-06-18 14:31:12
सत्यानंद योग मिशन के आचार्य करा रहे योग

टीम एबीएन, रांची। आठवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर सत्यानंद योग मिशन के आचार्य राजधानी के विभिन्न संस्थानों में योग शिविर चला रहे हैं। आज केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी कांके), पोस्टमास्टर जेनरल आॅफिस डोरंडा, सत्यानंद योग मिशन केंद्र, बसंत बिहार, आईएएस आॅफिसर्स क्लब और बिरसा मुंडा फुटबाल स्टेडियम में योगाभ्यास हुआ। सीआईपी कांके में आज बड़ी संख्या में चिकित्सक, नर्स, वहां के स्टाफ और डिप्रेशन के लोगों ने योगाचार्य गौरव कुमार और योग प्रशिक्षक अवनीश के सान्निध्य में प्राणायाम तथा योगनिद्रा का अभ्यास किया। गौरव कुमार ने बताया आज विशेष रूप से मस्तिष्क को रिलैक्स करने एवं डिप्रेशन की समस्याओं पर योग कार्यक्रम था। तनाव से जूझ रहे व्यक्ति को अवसाद, अनिद्रा, हेडेक और फोबिया की संभावना ज्यादा होती है इससे बचाव का शक्तिशाली उपाय है स्वामी सत्यानंद सरस्वती का योगनिद्रा और समग्र योग।

Published / 2022-06-16 13:21:55
मानसिक सबलता, भावनात्मक संतुलन और जीवन में आनंद लाने माध्यम है योग : डॉ बासुदेव दास (निदेशक, सीआईपी)

टीम एबीएन, रांची। सत्यानन्द योग मिशन के अध्यक्ष स्वामी मुक्तरथ जी के दिशा-निर्देशन में आज से एक सप्ताह का योगाभ्यास साधना सत्र केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) कांके में शुरू किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक बासुदेव दास, वरिष्ठ चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजय मुंडा सहित काफी संख्या में डॉक्टर्स, नर्स और संस्थान के कर्मचारी तथा स्वास्थ्य लाभ लेने वाले आवासीय मरीज योगासन, प्राणायाम एवं शिथिलीकरण का अभ्यास किये। पुरुष वर्ग में योग कक्षा का संचालन योगाचार्य गौरव कुमार और अवनीश कुमार ने किया, जबकि महिला वर्ग में योग कक्षा का संचालन योग प्रशिक्षक पियुष कुमार और अंशु कुमार ने किया। शान्ति मन्त्र से योग कक्षा की शुरूआत हुई तत्पश्चात सभी लोगों को ताड़ासन, कटि चालन, त्रिकोणासन, वृक्षासन, पाद हस्तासन, अर्ध चक्रासन, जोड़ों के सूक्ष्म अभ्यास, मेरु वक्रासन, उत्तान कुर्मासन, कंधरासन (सेतुबंध), शशांकासन/ शशकासन, उष्ट्रासन, मकरासन, उत्तान पादासन, शलभासन, भुजंगासन, शवासन तथा प्राणायाम में नाड़ीशोधन, कपालभाति, सीतली/ सीत्कारी एवं भ्रामरी को कराया गया। सीआईपी के निदेशक डॉ वासुदेव दास ने कहा योग केवल शरीर के फिटनेस के लिए नहीं है, यह योग मानसिक सबलता को लाता है और मन को तनावमुक्त रखता है। यह भावनात्मक असंतुलन को ठीक करता है तथा जीवन को आनंदमय बना देता है। सभी लोगों को अपने दिनचर्या में योग को शामिल करना बहुत जरूरी है। योगाचार्य गौरव कुमार ने कहा वर्तमान समय बिकट स्थिति के दौर से गुजर रहा है, हर तरफ अशांति, तेजी से बढ़ता डिप्रेशन, सुसाईडल केश और कम उम्र में बढ़ता रोग इन सभी को योग और ध्यान करके ठीक किया जा सकता है। अव्यवस्थित समाज को स्थिर किया जा सकता है।

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