एबीएन डेस्क। बॉलीवुड की जानीमानी पार्श्वगायिका आशा भोंसले आज 89 वर्ष की हो गयी हैं। 08 सितम्बर 1933 महाराष्ट्र के सांगली गांव में जन्मीं आशा भोंसले के पिता पंडित दीनानाथ मंगेश्कर मराठी रंगमंच से जुड़े हुए थे। नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही आशा के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी को उठाते हुए आशा और उनकी बहनलता मंगेश्कर ने फिल्मों में अभिनय के साथ साथ गाना भी शुरू कर दिया। आशा भोंसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में सावन आया फिल्म चुनरिया में गाया । सोलह वर्ष की उम्र मे अपने परिवार की इच्छा के विरूद्ध जाते हुये आशा ने अपनी उम्र से काफी बड़े गणपत राव भोंसले से शादी कर ली । उनकी वह शादी ज्यादा सफल नही रही और अंतत: उन्हे मुंबई से वापस अपने घर पुणे आना पड़ा। वर्ष 1957 में संगीतकार ओ.पी.नैय्यीर के संगीत निर्देशन में बनी निमार्ता-निर्देशक बी.आर.चोपड़ा की फिल्म नया दौर आशा भोंसले के सिने कैरियर का अहम पड़ाव लेकर आई ।वर्ष 1966 में तीसरी मंजिल में आशा भोंसले ने आर.डी.बर्मन के संगीत में आजा आजा मै हू प्यार तेरा गाना को अपनी आवाज दी जिससे उन्हे काफी प्रसिद्वि मिली।
टीम एबीएन, जमशेदपुर/रांची। घाटशिला स्थित विभूति स्मृति संसद बांग्ला के सुप्रसिद्ध कथाकार विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के नाम पर स्थापित एक सांस्कृतिक केंद्र है। इस वर्ष विभूति भूषण की 128वीं जयंती पर संस्था ने इस वर्ष से विविध साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए विविध भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित करने के निमित्त सुबर्नशिला सम्मान की शुरुआत की है। यह प्रथम सुबर्नशिला सम्मान है। यह हिंदी भाषा में देश के महत्वपूर्ण समकालीन हस्ताक्षर रणेंद्र जी को, जिनके ग्लोबल गांव के देवता, गायब होता देश, गूंगी रुलाई का कोरस जैसे महत्वपूर्ण उपन्यास समकालीन हिंदी कथा साहित्य में अपनी भाषा, विषय और विजन के लिए रेखांकित किये गए हैं, दिया जा रहा है। साथ ही बंगला भाषा के दो अन्य कथाकारों निसार आमीन और अजीत त्रिवेदी को भी इस वर्ष का सुबर्नशिला सम्मान दिया जायेगा। इस साहित्यिक आयोजन में विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के साहित्य पर विमर्श सत्र आमार चोखे बिभूति भूषण आर झारखंडे बांग्ला भाषार दोशा भी आयोजित है। विभूति भूषण के साहित्य पर वैचारिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप कोलकाता से वरिष्ठ इप्टाकर्मी मित्रा सेन मजूमदार शामिल हो रही हैं। रणेंद्र जी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भी होंगे। विभूति भूषण जयंती 12 सितंबर, 2022 को घाटशिला में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम सह सम्मान समारोह में स्थानीय प्रलेस और इप्टा के साथी भी सहयोगी की भूमिका में हैं। विभूति भूषण जयंती पर सुबह पुस्तकालय और विभूति भूषण बंद्योपाध्याय पर केंद्रित आर्ट गैलरी का उद्घाटन और शाम को चंद्रिमा चटर्जी के द्वारा प्रशिक्षित बाल और युवा कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां और नाटक महंगा सौदा (प्रेमचंद अनुदित टॉलस्टॉय की कहानी के नाट्य रूपांतरण) पेश किया जायेगा। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों, रंगकर्मियों और गणमान्य व्यक्तियों शामिल होंगे। यह जानकारी विभूति स्मृति संसद घाटशिला के सुशांत सीट (जो कार्यक्रम संयोजक हैं) ने दी है।
टीम एबीएन, लोहरदगा। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पूज्या जया किशोरी जी के कार्यक्रम स्थल व्यास मंच में आगमन होते ही भक्तों के जयकारे से वातावरण गूंज उठा, भक्तों ने ताली बजाकर स्वागत किया माहौल भक्तिमय हो गया। राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने पूज्या जयाकिशोरी जी को अंगवस्त्र प्रदान कर अभिनन्द किया। सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये, सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये। जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये। भजन से श्रीमद्भागवत कथा प्रारम्भ की गई। पूज्या जया किशोरी जी ने बतलाया कि ईश्वर को याद करते ही नहीं है, भगवान को फुर्सत मिलने पर याद करते हैं, समय मिला तो याद किये नहीं मिला तो नहीं किये लेकिन आप जब संकट में रहते हैं तब चाहे आधी रात ही क्यों न हो याद करते हैं। हमारे दुःख का कारण हमारी उम्मीद ही है, महत्वाकांक्षा का अधिक पालना दुखों का कारण है, संतुष्टि का भाव ही ईश्वर के निकट लाता है। उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत कथा श्रवण हीं प्रायश्चित का श्रेष्ठ उपाय बताया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया गया। भगवान की शरण में रहने वाले भक्तों के पाप श्री भगवान के नामोच्चारण से ऐसे नष्ट हो जाते हैं जैसे सूर्य उदय होने पर कोहरा नष्ट हो जाता है। जिन्होंने अपने भगवद गुण अनुरागी मन मधुकर को भगवान श्री कृष्ण के चरणारविन्द मकरन्द का एक बार पान करा दिया। उन्होंने सारे प्रायश्चित कर लिए वे स्वप्न में भी यमराज और उनके पाशधारी दूतों को नहीं देखते, जैसे कोई परम शक्तिशाली अमृत को उसका गुण न जान कर अनजाने में पी ले, तो भी अमृत उसे अमर बना ही देता है। वैसे ही अनजाने में उच्चारण करने पर भी भगवान का नाम अपना फल देकर ही रहता है। बुधवार के कथा में ब्रह्मा और नारद की वार्तालाप का प्रसंग सुनाया गया। जिसमें नारद जी ने ब्रह्मा से पूछा कि हरि को प्राप्त करनेवाला कौन सा मन्त्र है? तब ब्रह्मा जी ने बतलाया कि हरे राम, हरे रामा, रामा रामा हरे हरे। हरे कृष्ण, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे। मंत्र का उच्चारण करने से हरि की प्राप्ति होगी। तब नारद ने कहा कि यह तो आसान है सभी मंत्रोच्चार कर सकते हैं, तब ब्रह्मा ने बतलाया कि सभी हरि को प्राप्त कर सकते हैं। प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी हैं और उस विश्वास को पूरा करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। इस कार्यक्रम में साहू परिवार से शैफाली साहू, उदय शंकर प्रसाद, अरुणा साहू, धीरज प्रसाद साहू, मनु साहू, राहुल साहू, वंदना साहू, हर्षित साहू, रुचि साहू, राजश्री साहू, हंसा साहू, शेरी मुनी साहू, मदन मोहन शर्मा, सचिदा चौधरी, अशोक यादव, संजय बर्मन, निशिथ जायसवाल, संदीप कुमार, लाल मोहन प्रसाद केशरी, राजेंद्र प्रसाद खत्री, डॉ अजय शाहदेव, कमल प्रसाद केशरी, मोहन दुबे, कंवलजीत सिंह, अरुण राम, राहुल कुमार, बलवीर देव, कृष्ण मोहन केशरी, कैलाश केशरी, उर्मिला केशरी, प्रमोद अग्रवाल, विजय जायसवाल, सतीश जयसवाल, राकेश सिंह, अनिता पोद्दार, अनिल कुमार, सचिदानन्द पाल सिंह, बी के ब्लांजिनप्पा, सामी ब्लांजिनप्पा, देवंती गुप्ता, सुष्मिता देवी, रानी देवी, संध्या गुप्ता, अर्पिता मुखर्जी, इशानी मुखर्जी, विनीता कुमारी, शिवमंदिर राय, गोपाल साहू, बिजली महतो, विनोद कुमार, राजू महतो, ब्रज सिंह, राजकुमार प्रसाद, मनीष साहू, गीता देवी, जयगोविंद सोनी, इंदु देवी, विमल गुप्ता, सोहन पटेल, सुरेश ठाकुर, विद्या सिंह, मीरा सिंह, कल्याणी पोद्दार, संगीता देवी, कमला देवी, विनोद राय, अनुज साहू, विनय पोद्दार, मुरली अग्रवाल, अनिल मोदी, संजय मोदी, प्रेम प्रजापति, रमेश केशरी, रमेश साहू, उषा बर्मन, राजीवरंजन प्रसाद, उदय गुप्ता, विनोद सिंह, आशीष कुमार, अमित कुमार, आकाश खत्री, जयजीत कुमार चौबे, आलोक राय, दिवेश कुमार, नितिन सिंह, रोहित ओझा, नीरज साहू, निलेश सिंह, सुधीर अग्रवाल, संजय महाराज, प्रमोद अग्रवाल, विजय अग्रवाल, धर्मेंद्र कुमार, विजय जयसवाल, दिनेश पांडेय, शशि वर्मा, अविनाश कौर, लखन मांझी, सजल कुमार, गोपाल साहू, दुर्गा प्रजापति, रोहन श्याम केसरी, बंटू जयसवाल, प्रदीप विश्वकर्मा, दिग्गज कुमार सिंह, सतीश विश्वकर्मा, आलोक कुमार, मनीष कुमार, सुजीत राय, रमेश साहु, राम लखन प्रसाद, प्रवीण कुमार, संदीप मिश्रा, सरोज प्रजापति, दिनेश अग्रवाल, मनीष प्रसाद, विजय सिंह, पंकज जयसवाल, हिमांशु कुमार, जयप्रकाश शर्मा, संजीव शर्मा, रमेश शर्मा, सागर वर्मा, संदीप भगत, मुरारी गोस्वामी, प्रवीण प्रसाद, गुडूस गुप्ता, गुप्तेश्वर गुप्ता, मनोज जयसवाल, मनोज गुप्ता, देशराज गोयल, नवीन जयसवाल सहित शहर के भक्त जन उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। करम या करमा पर्व झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों की संस्कृति से जुड़ा लोकपर्व है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम को दर्शाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार भादो मास की एकादशी में मनाया जाने वाला पर्व करम आदिवासियों की परंपरा में बहुत ही खास महत्व रखता है। इस दिन आदिवासी पुरुष और महिलाएं मिलकर करम देवता की पूजा करते हैं। मौके पर सभी पारंपरिक परिधान लाल बार्डर के साथ सफेद रंग की साड़ी और धोती में जगह-जगह लोक नृत्य करते नजर आते हैं। आदिवासियों के साथ-साथ सनातन धर्म प्रेमी भी इस पर्व में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। झारखंड में पेड़-पौधों की पूजा की प्रथा सदियों चली आ रही है। प्रकृति के प्रति मानव समाज की यह परंपरा बहुत पुरानी है। आदि मानवों ने जब प्रकृति के उपकार को समझा तब से ही यह प्रकृति पर्व आदिवासियों के संस्कृति का हिस्सा बन गया। आज भी इसकी प्रासंगिकता है। इसमें प्रकृति का संदेश निहित है। जैसे करम में करम डाली, सरहुल में सखुआ फूल, जितिया में कतारी आदि की पूजा करते आ रहे हैं। आदिवासी करम पर्व की पूर्व संध्या से ही इसकी तैयारी में लग जाते हैं। इस पर्व का आदिवासी बड़े ही बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि करम पर्व के बाद से ही आदिवासी समाज में शादी और शुभ कार्य की शुरुआत की जाती है। पूजा के दौरान कर्मा और धर्मा नाम के दो भाइयों की कहानी भी सुनाई जाती है, जिसका सार करम के महत्व को समझाता है। इस कहानी को सुने बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। माना जाता है कि इस पर्व को मनाने से गांव में खुशहाली आती है। करम के दिन घर घर में कई प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। करम भाई-बहन के प्यार को दर्शाता है। महिलाएं खासकर अपने भाइयों की लंबी उम्र और अच्छे भविष्य के लिए व्रत रखती है।
एबीएन सोशल डेस्क। माता-पिता जहां प्यार और गुण देने के लिए जिम्मेदार हैं वहीं शिक्षक पूरा भविष्य उज्ज्वल और सफल बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। वे जीवन में शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हैं और हमारी प्रेरणा स्रोत बन कर हमें आगे बढ़ने तथा सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। वे हमें संसार भर के महान व्यक्तित्वों का उदाहरण देकर शिक्षा की ओर प्रोत्साहित करते हैं। वे हमें बहुत मजबूत और जीवन में आने वाली हरेक बाधा का सामना करने के लिए तैयार करते हैं तथा अपार ज्ञान और बुद्धि से हमारे जीवन को पोषित करते हैं। यदि हमें जीवन में सफल होना है तो हमेशा अपने शिक्षकों के आदेशों का पालन करना चाहिए और देश का योग्य नागरिक बनने के लिए उनकी सलाह का अनुकरण करना चाहिए। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन परिचय : डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद् तथा महान दार्शनिक थे। राजनीति में आने से पहले वह एक सम्मानित अकादमिक थे। वह कई कॉलेजों में प्रोफैसर रहे। वह ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में 1936 से 1952 तक प्राध्यापक रहे। कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफैसर के रूप में 1937 से 1941 तक कार्य किया। 1946 में यूनैस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वह शिक्षा में बहुत विश्वास रखते थे और उन्हें अध्यापन से गहरा प्रेम था। एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण उनमें विद्यमान थे। डॉ राधाकृष्णन जी का करियर 1908 में तब शुरू हुआ, जब उन्हें मद्रास प्रैजीडैंसी कालेज में दर्शनशास्त्र का सहायक अध्यापक चुना गया। इसके बाद वह सन 1921 तक मैसूर विश्वविद्यालय में रहे और 1921 में कोलकाता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र की पीठ के गौरवमय पद पर नियुक्त हुए। 1931 में आंध्र विश्वविद्यालय के उपकुलपति भी चुने गये। शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने पर उन्हें डी-लिट की उपाधि से भी विभूषित किया गया। 1939 में महामना मदन मोहन मालवीय जी के आग्रह पर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने और इस पद पर 1948 तक रहते हुए विश्वविद्यालय के विकास हेतु अनेक कार्य किये। देश की आजादी के बाद 1949 में डॉ राधाकृष्णन को रूस में भारत का राजदूत बनाकर भेजा गया, जहां उन्होंने विद्वता से वहां के लोगों में भी अमिट जगह बना ली। 1952 में सवसम्मति से भारत के उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हुए। अपने उपराष्ट्रपति काल में रूस, चीन, जापान आदि देशों की यात्रा करके उनसे मधुर संबंध स्थापित किए। मई 1962 में जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अवकाश ग्रहण किया तो डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पद पर नियुक्त किये गये। एक महान दार्शनिक, शिक्षक, लेखक का बाद में राष्ट्रपति पद पर सुशोभित होना न केवल भारत अपितु विश्व के लिए गौरव की बात थी। डा. राधाकृष्णन जीवन पर्यंत शिक्षा सुधार तथा समाज सुधार के कार्यों में लगे रहे। उन्होंने स्वयं को अन्य लोगों की तरह समझकर सादा जीवन व्यतीत किया। आज के शिक्षक वर्ग को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने स्तर में सुधार लाना चाहिए ताकि एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण हो सके। उनके जन्मदिन को शिक्षक दिन बनाए जाने की कहानी यह है कि देश का राष्ट्रपति बनने के बाद उनके कुछ दोस्तों और शिष्यों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी थी। इस पर उन्होंने कहा, मेरे जन्मदिन का जश्न मनाने की बजाय 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूरेशिया के सबसे ऊंचे सक्रिय ज्वालामुखी क्लाइयुचेवस्काया सोपका पर चढ़ने के दौरान हुई एक दुर्घटना में शनिवार को कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खराब मौसम के कारण बचावकर्मी क्लाइयुचेवस्काया सोपका ज्वालामुखी के छह अन्य पर्वतारोहियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि दो पर्वतारोही समुद्र तल से 3,300 मीटर (10,827 फीट) ऊपर एक शिविर में और चार अन्य 4,000 मीटर पर एक तम्बू में शरण लिए हुए हैं। बीबीसी की खबर के मुताबिक स्थानीय मीडिया का कहना है कि 12 लोगों के पर्वतारोहियों के एक समूह (जिसमें दो गाइड शामिल थे) ने मंगलवार को 4,754 मीटर शिखर पर चढ़ना शुरू किया। चढ़ाई करने के चार दिन बाद शनिवार को चार पर्वतारोही लगभग 4,000 मीटर ऊंचाई चढ़ने के बाद अचानक फिसलने लगे और गिर कर मारे गए। इसके कुछ समय बाद दो और पर्वतारोहियों के गिरने से मौत हो गई। बताया जाता है कि गाइडों में से एक का पैर टूट गया था और शेष पर्वतारोहियों की स्थिति का तुरंत पता नहीं चल पाया है। मीडिया रिपोर्ट में कामचटका क्षेत्र के अभियोजक के कार्यालय का हवाला देते हुए कहा गया कि पर्वतारोही क्लाइयुचेवस्काया सोपका ज्वालामुखी के शीर्ष पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी यह हादसा 4,750 मीटर की ऊंचाई वाले पर्वत शिखर से लगभग 500 मीटर नीचे हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी पर्वतारोही रूसी थे। इस हादसे के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है। गौरतलब है कि रूस के सुदूर उत्तर पूर्व में कामचटका प्रायद्वीप सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखियों, गर्म झरनों और वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है। इयुचेवस्काया सोपका ज्वालामुखी को कुछ स्वदेशी समुदायों द्वारा बेहद पवित्र माना जाता है और इस पर चढ़ने को वे अपशकुन मानते हैं।
टीम एबीएन, रांची। शनिवार को श्री सर्वेश्वरी समूह- शाखा रांची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) में परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की 86वीं जयंती पर्व धूमधाम से मनाया गया। श्री सर्वेश्वरी समूह- शाखा रांची में परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की जयंती को प्रत्येक वर्ष युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत प्रात: 5.30 बजे प्रभात फेरी (नगर भ्रमण) से की गयी। उसके उपरांत 8.30 बजे से परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के तस्वीर की विधिवत पूजन एवं आरती किया गया। पूजन के बाद सद्ग्रन्थ सफल योनि का सामूहिक पाठ किया गया। उसके बाद प्रात: 10.30 बजे से युवा गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मंगलाचरण यशवन्त नाथ शाहदेव ने किया तथा शाखा के संयुक्त मंत्री अभय सहाय ने विषय प्रवेश कराया एवं परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के जीवनी एवं उनकी महिमा पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में नयन मंजरी, सौरभ भारतीय, कीर्तिमान नाथ शाहदेव, शाम्भवी शाहदेव, सीमा कुमारी, बॉबी कुमारी, गौरीशंकर षाड़ंगी, मानवेन्द्र शाहदेव, ओमकार शाहदेव, संजय कुमार, उमाशंकर नन्द, ऋषभ सिंह, शैलजा शाहदेव, उपेन्द्र नाथ शाहदेव के साथ कुल 16 लोगों ने अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन नवीन कुमार ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन हेमन्त नाथ शाहदेव ने किया। गोष्ठी के उपरान्त सामूहिक प्रसाद वितरण किया गया एवं कार्यक्रम के अंत में स्थानीय अनाथालय आंचल शिशु आश्रम में बच्चों के बीच फल वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में झारखण्ड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति माननीय दीपक रौशन भी शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने जुलाई में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 2.7 करोड़ पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई की। कंपनी ने बुधवार को अपनी मासिक पारदर्शिता रिपोर्ट में यह जानकारी दी। कंपनी ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का पालन करने के लिए फेसबुक पर 2.5 करोड़ पोस्ट और इंस्टाग्राम पर 20 लाख पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई की। कंपनी ने बताया कि फेसबुक पर 1.73 करोड़ स्पैम कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके बाद वयस्क नग्नता और यौन गतिविधि से संबंधित 27 लाख पोस्ट और हिंसक और ग्राफिक सामग्री से संबंधित 23 लाख पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई की।
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