टीम एबीएन, रांची। बिरला पब्लिक स्कूल (विद्या निकेतन) पिलानी राजस्थान 360 डिग्री होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ चाइल्ड को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। इस कार्यक्रम की पूरी जानकारी के लिए एक प्रेस वार्ता बुधवार दिनांक 12/10/2022 को शाम 4 बजे होटल लैंडमार्क लालपुर में रखा गया है। उक्त जानकारी संजय दलानिया (93344 54009) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय प्रांत मंत्री- सहमंत्री के चार दिवसीय (7से 10 अक्टूबर 2022) अभ्यास वर्ग का समापन आज 10 अक्टूबर 2022 को अपराह्न 1 बजे महाराष्ट्र के मुंबई स्थित लोनावला के महाराजा अग्रसेन भवन सभागार में हुई। समापन सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैया जी जोशी उपस्थित थे। भैया जी जोशी ने कहा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विश्वास के साथ कार्यकर्ता को निरंतर क्रियाशील रहना आवश्यक है। कार्यकर्ताओं के प्रगाढ़ विश्वास से किए गए कार्य के कारण ही हिंदू समाज में परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। उन्होंने कहा श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य के निमित्त कई कठिनाइयां आई, परंतु अब मथुरा व काशी का मार्ग हमें आसान हो जायेगा। उन्होंने कहा ईश्वरीय कार्य सदैव पूर्ण होता है, परंतु इसके लिए भी पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है। कार्यकतार्ओं का निस्वार्थ एवं प्रमाणिकता भरा कार्य से संगठन के प्रति समाज में विश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा सफलता भरा जीवन एवं सार्थक जीवन में अंतर है यदि कोई मनुष्य सफल हो जाता है तो उसका जीवन सार्थक हो गया ऐसा मानना ठीक नहीं रहेगा अर्थात एक व्यक्ति जिसे स्वयं पर विश्वास रखते हुए किसी विशेष कार्य को लक्ष्य तक पहुंचा देता है तभी उसका जीवन सार्थक होता है। उन्होंने कहा कार्यकर्ता को कार्य करने की प्रेरणा अंदर से आना चाहिए। हमें कार्यकतार्ओं की मन:स्थिति को जानकर तथा उनके उर्जा, रूचि एवं क्षमता को देखते हुए उन्हें दायित्व सौंपकर कार्य करने का प्रेरणा जगाना चाहिए। कार्यकर्ता के अंत:करण के प्रेरणा के कारण ही संगठन का विस्तार एवं समाज में एक नई जागरण को परिलक्षित करता है। उन्होंने कहा सामूहिकता, पारदर्शिता, विकासशीलता व चैतन्यशीलता संगठन के विकास के मूल मंत्र है। केंद्रीय प्रांत मंत्री अभ्यास वर्ग में 4 दिन तक पूरे भारत के लगभग 200 प्रतिनिधि के बीच आगामी 2024 में विश्व हिंदू परिषद के 60 वर्ष पूर्ण होने के निमित्त आगामी हितचिंतक अभियान, संगठन विस्तार, मठ मंदिरों की सुरक्षा एवं व्यवस्था सहित विविध आयामों के करणीय बिंदु पर गहन विचार विमर्श कर योजना बनाई गई। योजना के तहत आगामी 6 नवंबर से 20 नवंबर, 2022 तक हितचिंतक अभियान चलाया जाएगा जिसमें देश के सभी गांवों तक पहुंच कर विश्व हिंदू परिषद के हितचिंतक बनाने का लक्ष्य निर्धारण किया गया। साथ ही साथ परावर्तन (घरवापसी) का भी सभी प्रांतों ने अपना लक्ष्य निर्धारण किया। अभ्यास वर्ग में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय महामंत्री मिलिंद जी परांडे, केंद्रीय संगठन महामंत्री विनायकराव देशपांडे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय सदस्य सुरेश जी सोनी, पूर्व केंद्रीय संगठन महामंत्री दिनेशचंद्र जी, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा, केंद्रीय सहमंत्री अमरीश सिंह, केंद्रीय सह मंत्री राजेश तिवारी, केंद्रीय मंत्री बजरंग लाल बागड़ा, केंद्रीय सह मंत्री गोपाल जी सहित कई केंद्रीय अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। केंद्रीय प्रांत मंत्री अभ्यास वर्ग में पटना क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, झारखंड प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार,सहमंत्री वीरेंद्र यादव, सहमंत्री रामनरेश सिंह, सहमंत्री रंगनाथ महतो झारखंड के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के झारखंड प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। इस साल नोबेल शांति पुरस्कार 2022 एक व्यक्ति और दो संगठनों को दिया गया है। बेलारूस के ह्यूमन राइट्स वकील एलेस बियालियात्स्की को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में इस पुरस्कार का एलान किया गया। एलेस बियालियात्स्की के अलावा रशियन ह्यमून राइट्स आॅर्गनाइजेशन मेमोरियल और यूक्रेनियन ह्यूमन राइट्स आॅर्गनाइजेशन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज को ये पुरस्कार मिला है। ये दोनों संस्थान मानवाधिकार के लिए काम करते हैं। कौन हैं आलिस बियालियात्स्की : बियालियात्स्की ने 1980 में बेलारूस की तानाशाही के खिलाफ डेमोक्रेसी मूवमेंट का आगाज किया था। वो आज तक अपने ही देश में सच्चा लोकतंत्र बहाल करने की जंग लड़ रहे हैं। रूस-यूक्रेन जंग में बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े हैं और सख्त तानाशाह माने जाते हैं। बियालियात्स्की ने विसाना नाम का संगठन तैयार किया है। यह संगठन जेल में बंद लोकतंत्र समर्थकों को कानूनी मदद मुहैया कराता है। 2011 से 2014 तक बियालियात्स्की जेल में रहे। 2020 में उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया और अब तक जेल में हैं। 14 जुलाई, 2021 से वह कथित कर चोरी के आरोप में जेल में बंद है। मानवाधिकार रक्षक इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित मानते हैं। बियालियात्स्की बेलारूसी साहित्य के विद्वान हैं और उन्होंने 1984 में होमील स्टेट यूनिवर्सिटी से रूसी और बेलारूसी भाषाशास्त्र में डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। अपने छात्र दिनों के दौरान बियालियात्स्की कई लोगों से मिले, जो बाद में प्रसिद्ध लेखक बन गए, जिनमें अनातोल सिस, एडुआर्ड अकुलिन, सियारजुक सिस और अनातोल काजलौ शामिल थे। स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद बियालियात्स्की ने लिजीसी जिला, होमिएन क्षेत्र में एक स्कूली शिक्षक के रूप में काम किया। 1985-1986 में उन्होंने येकातेरिनबर्ग (तब सेवरडलोव्स्क), रूस के पास एक एंटीटैंक आर्टिलरी बैटरी में एक बख्तरबंद वाहन चालक के रूप में सेना में नौकरी की। इन दो संगठनों को मिला शांति पुरस्कार : रूस का ह्यूमन राइट्स आॅर्गनाइजेशन मेमोरियल 1987 में सोवियत संघ के दौर में बना था। इसके फाउंडर मेंबर्स में नोबेल पीस प्राइज विजेता एंद्रेई सखारोव और ह्यूमन राइट्स वकील स्वेतलाना गनुशकिना भी थे। 90 के दशक में सोवियत संघ के 15 हिस्सों में बिखरने के बाद यह रूस का सबसे बड़ा मानवाधिकार संगठन बना। इसने स्टालिन के दौर से अब तक राजनैतिक कैदियों के लिए आवाज उठाई। रूस ने जब चेचेन्या पर हमला किया और 2009 में इस संगठन की नतालिया एस्तेमिरोवा मारी गईं तो इस संगठन ने विश्व स्तर पर आवाज उठाई और चर्चा में रही। रूसी सरकार इसे विदेशी जासूसों का संगठन बताती है। सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज का गठन यूक्रेन की राजधानी कीव में 2007 में हुआ था। इसका मकसद यूक्रेन में लोकतंत्र को मजबूत करना था। इस संगठन का कहना है कि यूक्रेन में अब भी सही मायनों में लोकतंत्र मौजूद नहीं है। इस संगठन की मांग है कि यूक्रेन को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का हिस्सा बनना चाहिए। इसी साल फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो इस संगठन ने वॉर क्राइम के मामलों की जांच की। अब यह मामले इंटरनेशनल कोर्ट में दायर किए जा रहे हैं। बता दें कि नोबेल वीक तीन अक्टूबर को शुरू हुआ था और 10 अक्टूबर तक चलेगा। सात दिन में कुल छह पुरस्कारों की घोषणी होती है। सबसे आखिर में आर्थिक श्रेणी में नोबेल पुरस्कार का एलान किया जाता है। इस सप्ताह सिर्फ पुरस्कार जीतने वाले व्यक्ति या संस्थान के नामों का ऐलान होगा। दिसंबर में इन्हें पुरस्कार दिए जाएंगे। कोविड-19 की वजह से 2020-21 के विजेता स्टॉकहोम नहीं पहुंच पाए थे। कमेटी ने इस बार इन दो साल के विजेताओं को भी स्टॉकहोम में आमंत्रित किया है।
टीम एबीएन, हजारीबाग। भारतीय नाई समाज की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक जवाहर नेहरू यूथ सेंटर, दिल्ली में आठ और नौ अक्टूबर को होने वाली है। इसमें पूरे भारत से समाज के पदाधिकारी, सक्रिय सदस्य भाग लेंगे। इसी कड़ी में झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर इस बैठक में भाग लेने हजारीबाग से दिल्ली के लिए रवाना हुए। इस बैठक में जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग केंद्र सरकार से किया जायेगी। समाज के सभी तपके के लोगों का उत्थान कैसे हो, इस पर विचार विमर्श किया जायेगा। साथ ही समाज को दहेजमुक्त बनाने पर रणनीति बनाई जायेगी। साथ ही समाज में मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों को बंद करने पर विचार विमर्श किया जायेगा और इसके साथ पूरे भारत में बिखरे समाज को एक मंच पर लाने पर रणनीति बनाई जायेगी। भारतीय नाई समाज का नीति और सिद्धांत को समाज का जन-जन तक पहुंचे पर दिशा निर्देश जारी होगा। सारे पहलू पर गहन विचार विमर्श कर समाज को एक नई दिशा प्रदान करना है।
टीम एबीएन विष्णुगढ़ (हजारीबाग)। वन पर्यावरण रक्षा समिति बनासो एवं चानो के उपाध्यक्ष सुरेश राम जो 40% हैंडीकैप्ड है, जो बीते 7 सितंबर को वन पर्यावरण मेला में शरीक होकर 14वीं वर्षगांठ मनायी। लोगों में वन एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता लाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहे है। विदित हो कि दूध मटिया में झारखंड राज्य स्तरीय मेला प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है। जिसे लेकर हजारीबाग से टाटीझरिया के दूधमटिया साइकिल यात्रा कर पहुंचे। कार्यक्रम में टाटीझरिया के वन प्रेमीयों द्वारा ढोल मजीरे साथ लोक गीत गायन कर कर लोगों को वन के प्रति जागरूक किया। वहीं पत्ते और पुष्प से जल छिड़क कर आगंतुक लोगों को स्वागत किया गाया। कार्यक्रम में दिनेश खंडालवाल, मुरारी सिंह, और सत्य प्रकाश शामिल थे।
एबीएन सोशल डेस्क। साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। फ्रांसीसी लेखक एनी एरनॉक्स को नोबेल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में गुरुवार को साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार के लिए एनी एरनॉक्स के नाम की घोषणा की गई। नोबेल समिति ने कहा कि एरनॉक्स (82) के नाम की घोषणा, साहस और लाक्षणिक तीक्ष्णता के साथ व्यक्तिगत स्मृति के अंतस, व्यवस्थाओं और सामूहिक बाधाओं को उजागर करने वाली उनकी लेखनी के लिये की जाती है। एनी एरनॉक्स को इससे पहले बुकर प्राइज से भी नवाजा जा चुका है। पुरस्कार के ऐलान से पहले मुंबई में जन्मे लेखक सलमान रुश्दी को साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीतने के लिए पसंदीदा दावेदारों में से एक बताया जा रहा था। सैटेनिक वर्सेज के लेखक सलमान रुश्दी पर इस साल अगस्त में पश्चिमी न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में चाकू से हमला किया गया था। एक सितंबर 1940 को जन्मी ऐनी एरनॉक्स एक फ्रांसीसी लेखक और साहित्य की प्रोफेसर हैं। उन्होंने अपने साहित्यिक करियर की शुरुआत 1974 में एक आत्मकथात्मक उपन्यास लेस आर्मोइरेस वाइड्स से की थी। 1984 में, उन्होंने अपनी एक अन्य आत्मकथात्मक रचना ला प्लेस के लिए रेनाडॉट पुरस्कार जीता। यह वो आत्मकथात्मक उपन्यास था जो उनके पिता के साथ उनके संबंधों और फ्रांस के एक छोटे से शहर में बड़े होने के उनके अनुभवों और आगे बढ़ने की उनकी प्रक्रिया पर केंद्रित थी। बता दें, साहित्य में नोबेल पुरस्कार के ऐलान के बादनोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में पुरस्कार की घोषणा 10 अक्टूबर को की जायेगी।
एबीएन सोशल डेस्क। दंडवत प्रणाम को सभी प्रकार के प्रणामों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है लेकिन हमारे शास्त्रों में स्त्रियों को दंडवत प्रणाम करने का सर्वथा निषेध है। शास्त्रानुसार स्त्रियों को कभी भी किसी के भी सम्मुख दंडवत प्रणाम नहीं करना चाहिए। आजकल अनेक स्थानों पर देखने में आता है कि स्त्रियां भी मंदिरों, पूजा स्थलों व परिक्रमा आदि में षाष्टांग दंडवत प्रणाम करती हैं, जो शास्त्रानुसार अनुचित है। ऐसा क्यों है इसका समाधान हमें "धर्मसिन्धु" नामक ग्रंथ में मिलता है, जिसमें स्पष्ट निर्देश है- ब्राह्मणस्य गुदं शंखं शालिग्रामं च पुस्तकम्! वसुन्धरा न सहते कामिनी कुच मर्दनं!! - अर्थात् ब्राह्मणों का पृष्ठभाग, शंख, शालिग्राम, धर्मग्रंथ (पुस्तक) एवं स्त्रियों का वक्षस्थल (स्तन) यदि सीधे भूमि (बिना आसन) का स्पर्श करते हैं तो पृथ्वी इस भार को सहन नहीं कर सकती है। इस असहनीय भार को सहने के कारण वह इस भार को डालने वाले से उसकी श्री (अष्ट-लक्ष्मियों) का हरण कर लेती है। ब्राह्मणों का पृष्ठभाग, शंख, शालिग्राम, धर्मग्रंथ (पुस्तक) एवं स्त्रियों के वक्षस्थल को पृथ्वी पर सीधे स्पर्श कराने वाले की अष्ट-लक्ष्मियों क्षय होने लगता है। अत: शास्त्र के इस निर्देशानुसार स्त्रियों को दंडवत प्रणाम कभी नहीं करना चाहिए। स्त्रियों को दंडवत प्रणाम के स्थान पर घुटनों के बल बैठकर अपना मस्तक भूमि से लगाकर ही प्रणाम करना चाहिए एवं ब्राह्मणों, शंख, शालिग्राम भगवान को, धर्मग्रंथ (पुस्तक) को सदैव उनके यथोचित आसन पर ही विराजमान कराना चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जिन लोगों ने दीपावली व छठ पर घर जाने के लिए ट्रेन की टिकट बुक नहीं कराई है या जिन लोगों को टिकट बुक कराने के बाद भी ट्रेन में कन्फर्म सीट नहीं मिल रही है। उन लोगों को परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि झारखंड की राजधानी रांची रेल डिवीजन की ओर से दक्षिण-पूर्व रेल मुख्यालय को इन दोनों त्योहारों के लिए पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव में 4 रूटों पर पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने को कहा गया है, जिसमें रांची जयनगर, रांची-पटना, रांची-भागलपुर व रांची गोरखपुर रूट शामिल हैं। दरअसल, त्योहारों पर ट्रेनों में काफी भीड़ होती है। जो लोग अपने घर से दूर बाहर काम कर रहे हैं वह लोग त्योहारों पर अपने घर जाते हैं तो उन्हें ट्रेन में सीट नहीं मिलती, जिसकी वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, अब हटिया व रांची से चलने वाली ट्रेनों में सीटें उपलब्ध नहीं हैं। हटिया-पूर्णिया कोर्ट, हटिया-इस्लामपुर, हटिया-पटना पाटलिपुत्र जैसी ट्रेनों में भी यात्रियों को लंबी वेटिंग मिल रही है। इसे देख रेल डिवीजन की ओर से पूजा स्पेशल ट्रेन चलाई जायेगी, जिसमें रेलयात्री आराम से ट्रेन में बैठकर अपने घर जा सकते हैं। इस मामले में डीआरएम प्रदीप गुप्ता का कहना है कि दीपावली व छठ के मौके पर बड़ी संख्या में लोग झारखंड से बिहार व उत्तर प्रदेश आते-जाते हैं। ऐसे में ट्रेनों की भीड़ को कम करने के लिए 4 रूटों पर स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse