टीम एबीएन, रांची। डॉक्टर कामिल बुल्के पथ स्थित संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के कक्षा नर्सरी और यूकेजी के 150 नन्हे बच्चों ने बड़े ही अनोखे अंदाज में लोगों के साथ क्रिसमस और नववर्ष की खुशियां साझा की।
लोगों के साथ इस खुशी को बांटने के लिए संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चे आज सांता क्लास की तरह लाल लाल पोशाक धारण किए खुशी और उत्साह के साथ दोनों हाथों को हिलाते हुए और मैरी क्रिसमस गाते हुए लोगों का अभिवादन कर रहे थे और खुशियां बांट रहे थे।
सांता क्लास की वेशभूषा में स्कूल के नन्हे बच्चे गेट के बाहर कतार बंद होकर सड़क पर आने जाने वाले तमाम लोगों को हैप्पी क्रिसमस एंड हैप्पी न्यू ईयर का कर उनका अभिवादन करते नजर आए उनके इस अभिवादन पर उक्त बाग से गुजरने वाले बड़े महिला पुरुष और युवक की भर्तियां रुक कर उनसे हाथ मिलाकर जवाब में हैप्पी क्रिसमस एंड हैप्पी न्यू ईयर का रहे थे।
इस कार्यक्रम में संत ऑलवेज मोंटेसरी स्कूल के सभी शिक्षक वृद्ध का विशेष योगदान रहा जिसमें मुख्य रूप से शिक्षक मिलन मेंस और सुमित बारला के संयुक्त नेतृत्व में बच्चे उच्च मार्ग से गुजरने वाले हर लोगों को क्रिसमस और नव वर्ष की बधाइयां दे रहे थे इस अवसर पर विद्यालय परिसर में जीसस क्राइस्ट के जन्म पर आधारित एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई जहां गौशाला में प्रभु यीशु मसीह का जन्म दिखाया गया।
स्कूल के प्रिंसिपल ब्रदर माइक जेत्रोम ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा क्रिसमस प्रेम शांति दया क्षमा और भाईचारे का पर्व है उन्होंने कहा किया पर मानवता को एक दूसरे के साथ प्रेम और खुशी बांटने की सीख देता है जिस तरह ईश्वर ने अपने इकलौते बेटे को इस संसार में भेज कर हमें जीवन का सही मार्ग दिखाया इस तरह हमें भी दूसरों के साथ प्रेम दया शांति और भाईचारा जी बांटने का संदेश देता है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने रंगारंग संस्कृति कार्यक्रम से उपस्थित तमाम पेरेंट्स को झूम और हाथ हिलाने को विवश किया बच्चों के पेरेंट्स सांता क्लास की टोपी पहन कर दोनों हाथ हिलाते हुए बच्चों के प्रस्तुति का आनंद ले रहे थे और उनका उत्साह भी बढ़ते हुए देखे गए इस अवसर पर शिक्षकों ने उपस्थित अभिभावकों के बीच चॉकलेट आदि बताकर उन्हें क्रिसमस की बधाइयां दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क, हस्तिनापुर (मेरठ)। भारत वर्ष की महाभारत कालीन नगरी हस्तिनापुर में विश्व हिंदू परिषद की प्रन्यासी मंडल बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए परम पूजनीय स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा कि भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में मानवता पर आधारित रामराज की पुन: स्थापना ही हमारा परम लक्ष्य है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर निर्माण केवल एक चरण है, वास्तविक उद्देश्य पूरे विश्व में रामराज की स्थापना है। संघ शताब्दी वर्ष में इसी संकल्प को लेकर प्रन्यासी मंडल बैठक प्रारंभ हुई। विश्व हिंदू परिषद की हस्तिनापुर में आज से प्रारंभ हुई प्रन्यासी मंडल बैठक का शुभारंभ ब्रह्मनाथ, संघ प्रार्थना व भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के बाद हुआ।
बैठक को संबोधित करते हुए स्वामी विवेकानंद जी महाराज (गुरुकुल संस्थापक भोला की झाल) ने कहा कि जब-जब असुरी शक्तियां संगठित होती हैं, तब-तब देवशक्ति का एकत्र होना अनिवार्य हो जाता है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम के वनगमन के समय राक्षसी शक्तियां संगठित हुई थीं, उसी प्रकार आज भी अधर्म का स्वरूप सामने है। ऐसे में धर्म की स्थापना के लिए वैदिक विचारधारा को मानने वालों का संगठित होना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर की से पांचजन्य की रणभेरी बजेगी तो असुर पुन: भयभीत होंगे। यह पावन धरा साक्षी रही है यहीं से धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संदेश निकला था। आज उसी ऐतिहासिक भूमि पर देश-विदेश से आए वैदिक धर्मावलंबी एकत्र हुए हैं, जो आने वाले समय में असुरी शक्तियों के अंत का कारण बनेंगे।
स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का स्मरण करते हुए कहा जब उन्होंने धर्म स्थापना के उद्देश्य से संघ की नींव रखी थी, तब एक विदेशी पत्रकार ने लिखा था कि अब विश्व को खतरा उत्पन्न हो गया है, क्योंकि वैदिक धर्म को मानने वाली शक्तियां संगठित होने लगी थीं। यह संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है।
उन्होंने कहा कि देव शक्तियों का संगठित होना स्वाभाविक रूप से असुरों के लिए भय का कारण बनता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि आज बालकृष्ण नहीं, बल्कि सुदर्शनधारी श्रीकृष्ण की आवश्यकता है, जो अधर्म का विनाश कर सकें। हस्तिनापुर वही धरा है, जहां से भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म के अंत का मार्ग प्रशस्त किया था।
स्वामी रविन्द्र कीर्ति जी ने कहा भारतीय संस्कृति में आदि काल से वैदिक परम्परा चली आ रही है जिसमे सनातन, जैन व बौद्ध इन सभी का जन्म भारत में ही हुआ है। हस्तिनापुर जैन,बौद्ध और वैदिक परंपरा के इतिहास से जुड़ा हुआ है। हस्तिनापुर में जैन परम्परा के प्रथम तीर्थकर भगवान आदिनाथ ने अयोध्या से चलकर राजा श्रेयांश से प्रथम आहार ग्रहण किया। भगवान आदिनाथ ने संसार का कल्याण करने का कार्य किया आज विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता उसी कार्य को कर रहे हैं।
विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमान बजरंग बांगड़ा जी ने कहा विश्व हिंदू परिषद के 61 वर्षों का उपक्रम यही रहा कि सम्पूर्ण विश्व में शांति हो। असुर सतयुग, त्रेता एवं द्वापर में भी थे और आज भी हैं। बस उनका स्वरूप बदल गया है, आज असुर संगठित है, हमे सुप्त अवस्था में पड़ी अपनी देवसेना (सात्विक शक्तियों) का जागरण करना है ओर संतों के आशीर्वाद से विजयी होना है।
उन्होंने कहा परिवारों में संस्कार के अभाव में श्रद्धा का भाव कम हो रहा है, परिवारों में संस्कार बढ़े इसके लिए हमारे विभिन्न कार्यक्रम चल रहे है। विश्व की अनेकों संस्कृति समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन सनातन अपनी कुटुंब व्यवस्था कारण आज भी टीका है। संस्कारों की कमी से कुटुंब टूट रहे हैं। इस दिशा में संगठन कार्य कर रहा है जिसका परिणाम शीघ्र मिलना शुरू हो जायेगा।
उन्होंने परिवारों में संख्या बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा वामपंथी विचारधारा ने कट्टरता का चोला छोड़ उदारवाद का चोला पहन पूरे विश्व को भ्रमित किया जा रहा है। हमारा जोर है किस प्रकार भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को बचाया जा सके। राम मंदिर आंदोलन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा एवं ध्वजारोहण तक समाज ने हमे अपना आशीर्वाद दिया। हमारा मथुरा काशी का विषय सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिस प्रकार हमने राममंदिर का लक्ष्य पूरा किया उसी प्रकार हम संतों के आशीर्वाद से मथुरा एवं काशी को प्राप्त करेंगे।
इस वर्ष वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस गीत ने आजादी की लड़ाई में अनेकों वीरो को प्रेरणा देकर स्वतंत्रता संग्राम में मुख्य भूमिका निभायी है। हिंदू बहुसंख्यकों ने अल्पसंख्यकों को कभी पीड़ित नहीं किया। उस समय के अनुसार सही सोच कर उनको ये अधिकार संविधान ने दिए होंगे, लेकिन आज उनकी जनसंख्या 22 से 25 करोड़ हो गई है। अब अल्पसंख्यक के अधिकारो का दुरुपयोग किया जा रहा है। अब अल्पसंख्यकों की परिभाषा पुन: बदलने की आवश्यकता है।
संघ के 100 वर्षी के जागरण को कैसे बढ़ाया जाये। प्राचीन गौरव मथुरा एवं काशी पर समाज को संगठित करके निर्णय लिए जाये क्योंकि सामूहिक चर्चा सामूहिक निर्णय लेकर आगे बढ़ने की हमारी संस्कृति रही है। संगठन के एक वर्ष के कार्यवृत्त को देते हुए अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री ने बताया इस वर्ष हमने 263467 गौ माताओ को बचाया। 21467 लोगों को अपने मूल धर्म में वापस लेकर आए, 349927 लोगों को धर्मांतरण से बचाया,11654 युवाओ को रोजगार दिया एवं त्रिशूल दीक्षा के माध्यम से एक लाख से ज्यादा युवाओ को जोड़ा।
उद्घाटन सत्र में मंच पर पधारे परम पूज्य संत श्री स्वामी विवेकानंद जी महाराज, पूज्य संत स्वामी रविंद्र कीर्ति जी महाराज, केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय उपाध्यक्ष राम तीर्थ न्यास क्षेत्र के महामंत्री आदरणीय चंपत राय, केंद्रीय उपाध्यक्ष सुशील, केंद्रीय उपाध्यक्ष मोहन मांगनानी, डॉ विजयलक्ष्मी, केंद्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघल, केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा, केंद्रीय संगठन मंत्री मिलिंद परांडे, केंद्रीय कोषाध्यक्ष रमेश गुप्ता, मनोज अरोड़ा, दीपक राज गोयल सहित मेरठ प्रांत अध्यक्ष चौधरी अमन सिंह, मेरठ प्रांत मंत्री राजकुमार मंच पर उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र से पूर्व पहुंचे सभी केंद्रीय अधिकारियों व प्रन्यासी प्रतिनिधियों का दिगंबर जैन मंदिर जम्बूद्वीप परिसर में पगड़ी पहना व अंगवस्त्र पहनाकर, ढोल नगाड़ों व पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री दिनेश उपाध्याय, प्रांत संगठन मंत्री अरुण कुमार, प्रांत मंत्री राजकुमार डूंगर, सर्वव्यवस्था प्रमुख प्रेम कुमार, सह प्रमुख निवेश वशिष्ठ आदि ने सभी व्यवस्थाओं को संभाले रखा।
विश्व हिंदू परिषद की सुरक्षा व ध्वज व्यवस्था में लगी टोली ने प्रन्यासी मंडल की बैठक से पूर्व पूरे परिसर को भगवा ध्वज लगाकर भगवा में कर दिया गया। परिसर गेट, परिसर मार्ग, बैठक मंडप तक सैकड़ो ध्वज लगाये गये। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय प्रचार प्रसार प्रमुख विजय शंकर तिवारी ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार शाखा रांची के साधक अपने प्रवास काल में गायत्री परिवार के दो दिवसीय कार्यक्रम में भागीदारी की। इस बार की सफला एकदाशी पर आनलाइन गायत्री-परिवार साधक अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्वाध्याय पाठ संवाद समूह में 24 घंटे के गायत्री महामंत्र के अखंड जप-अनुष्ठान अभियान में शामिल हुए।
दूसरे दिन बच्चों के साथ एनसीआर में सोल्लास सोत्साह दीप यज्ञीय विधान व युग संस्कार पद्धति से पुत्र व पुत्रवधु के विवाह संस्कार दिवसोत्सव में भागीदारी की और उसमें गायत्री युग यज्ञ विधान और युग संस्कार पद्धति से सालगिरह मनाया गया।
इस क्रम में परिवार सदस्यों ने दो दिवसीय कार्यक्रम में संलग्न रखा। अगले क्रम में दंपति ने शादी सालगिरह के पावन अवसर पर अखंड दीप प्रज्ज्वलित किया, इस शुभ दिन विधिवत गायत्री सहस्रनाम का पाठ सस्वर किया गया और संध्या बेला में विधिवत संध्या वंदन में गुरु-ईश वंदना, ध्यान, पूजन-अर्चन, सर्वदेव आवाहन, पंचोपचार पूजन, स्वस्तिवाचन सहित जप-अनुष्ठान कर सायंकाल दीपयज्ञ विधान सहित युग संस्कार पद्धति अनुसार इसके एक एक सूक्ष्म सूत्र पर ध्यान आकर्षित एवं प्रकाश डालकर वैवाहिक जीवन की महिमा गरिमा तथा इसकी संबंधित प्रक्रिया में विशेषकर ग्रंथि बन्धन, पाणिग्रहण, प्रतिज्ञा व्रत, पुष्पोपहार, सप्तपदी के सूत्र निर्वाह आदि की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।
दंपति ने इस प्रक्रिया को सराहते हूए सबको इसी विधान को अपनाने, मित्र मंडली में विधान को बताने का विचार व्यक्त किया। दीपयज्ञ उपरान्त दम्पति को विधान अभिनन्दन कर वेदमंत्रों के मंगलमय आशीर्वचन पाठ, शांति पाठ व जयघोष कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक पूजा देवी और जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। सत्यपुरुष सद्गुरु बंदीछोड़ गरीब दास साहेब जी की वाणी हमें जीवन के गहरे रहस्यों को समझने और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होने का मार्ग दिखाती है। सद्गुरु जी की वाणी की यह साखी आध्यात्मिक सत्य को उजागर करता है:-
आइए, सद्गुरु जी की इस दिव्य वाणी में छिपे एक तत्व, नौ तत्व और चौबीस तत्व के मर्म को विस्तार से समझते हैं।
इस साखी में एक तत्व से अभिप्राय आत्म तत्व से है। यह हमारी चेतना का मूल स्रोत है, वह अविनाशी अंश जो हमें जीवन प्रदान करता है। इसे आत्मा, रूह, या स्वयं का सार भी कह सकते हैं। यह परम सत्ता, यानी परमात्मा का ही एक सूक्ष्म हिस्सा है।
आत्म तत्व से ही नौ तत्वों का उद्भव होता है, जिन्हें सूक्ष्म शरीर या लिंग शरीर के नाम से जाना जाता है। ये वो मानसिक और संवेदी उपकरण हैं जिनके माध्यम से आत्मा इस संसार का अनुभव करती है। ये नौ तत्व निम्नलिखित हैं:
जब यह नौ तत्वों वाला सूक्ष्म शरीर, 15 तत्वों के स्थूल शरीर को धारण करता है, तब कुल मिलकर चौबीस तत्व बनते हैं। यह हमारा भौतिक शरीर है जिसे हम देख और छू सकते हैं।
सद्गुरु गरीब दास साहेब जी के अनुसार, मोक्ष की प्रक्रिया अत्यंत सुंदर और वैज्ञानिक है: मृत्यु के समय, सूक्ष्म शरीर के नौ तत्व उसी आत्मा में विलीन हो जाते हैं जिससे वे उत्पन्न हुए थे। स्थूल शरीर के पाँच महाभूत अपने मूल तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) में समा जाते हैं।
और अंत में, आत्मा स्वयं परमात्मा में समा जाती है, क्योंकि वह उसी का अंश है। यही स्थिति मोक्ष कहलाती है – आवागमन के चक्र से मुक्ति, जन्म और मृत्यु के बंधन से परे, परम शांति और परम आनंद की अवस्था। जब कोई व्यक्ति देह त्यागता है, तो आत्मा, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर (जो अगले जन्म का कारण बनता है) तीनों एक साथ निकलते हैं। सूक्ष्म शरीर आत्मा के साथ मिलकर एक नया शरीर धारण करने का माध्यम बनता है, जब तक कि आत्मा को मोक्ष प्राप्त न हो जाए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हरियाणा के करोंथा स्थित सतलोक आश्रम में सत्संग का पुनः आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर को संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने सत्य की जीत और धैर्य का फल बताया है, जिसे इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में अंकित किए जाने वाला दिन कहा जा रहा है।
पूर्व में, संत रामपाल जी महाराज का जो भारी विरोध हुआ था, वह झूठी अफवाहों और गलतफहमी के कारण फैलाया गया था। भक्तों के अनुसार, विरोधियों ने सत्य को दबाने का प्रयास किया, लेकिन आज यह सत्य सूर्य की तरह प्रकाशित हुआ है, जिसने विरोध के अंधकार को दूर कर दिया है।
संत रामपाल जी महाराज के बताए मार्ग पर चलने के लिए लाखों लोग जुड़ रहे हैं, जिससे उनके जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उनके मुख्य सामाजिक सुधारों ने समाज में एक नई लहर पैदा की है, लाखों लोगों ने नशीले पदार्थों का सेवन छोड़ दिया है।
सादगीपूर्ण और दहेज-रहित विवाहों की परंपरा स्थापित की जा रही है। अब वही लोग उनके ज्ञान की महत्ता को समझने लगे हैं, जो पहले उनका विरोध करते थे। उनके सिद्धांतों से प्रेरित अनुयायी अत्यंत सभ्य और साधारण जीवनशैली अपना रहे हैं, जो यह सिद्ध करता है कि सच्चा आनंद असभ्यता या नशा-पार्टियों में नहीं, बल्कि सात्विक जीवन में है।
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत जरूरतमंदों की निस्वार्थ भाव से मदद की है, जिसमें उनके कट्टर विरोधी भी शामिल थे। अनुयायियों ने बताया कि उन्होंने कभी यह भेद नहीं किया कि कौन उनका भक्त है और कौन नहीं। उनकी विचारधारा जो तो काटा बोए ताको बोतू फूल (अर्थात बुराई करने वाले के साथ भी भलाई करनी चाहिए) पर आधारित है।
यह व्यापक मुहिम रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान प्रदान करके गरीब-जरूरतमंदों की सहायता करती है, जो कि किसी भी सरकार या बड़े अमीर व्यक्ति के लिए भी चलाना एक कठिन कार्य हैसंत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित निस्वार्थ सेवा और व्यापक सामाजिक कार्यों को देखने के बाद, करोंथा गांव के निवासियों का भी हृदय परिवर्तन हुआ है।
वे अब आश्रम आकर न केवल अपनी पिछली गलतियों के लिए माफ़ी मांग रहे हैं बल्कि भंडारे में भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। मीडिया में फैली झूठी अफवाहों की सच्चाई जानने के बाद, गांव वाले भी अब उनके ज्ञान से जुड़ रहे हैं।
इस व्यापक हृदय परिवर्तन को उनकी करुणा और ज्ञान का प्रत्यक्ष प्रमाण माना जा रहा है, और अनुयायी उन्हें सबके पिता और साक्षात् भगवान के रूप में सम्मान देते हैं। सतलोक आश्रम करोथा में सत्संग होने के बाद लगभग डेढ़ सौ श्रद्धालुओं ने संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की पत्रकार कमल सिंह लोधा।
एबीएन सोशल डेस्क। अग्रेसन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 15 दिसंबर 2025 को सफला एकादशी उत्सव अत्यंत भक्तिमय वातावरण में श्रद्धा सहित आयोजित किया गया। प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर लाल पीला गुलाब, बेला, रजनीगंधा, गेंदा व तुलसीदल से श्री श्याम प्रभु का अनुपम श्रृंगार किया गया।
साथ ही मंदिर में विराजमान बजरंगबली एवं शिव परिवार का इस अवसर पर विशेष शृंगार किया गया। रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु के जयकारों के बीच पावन ज्योत प्रज्ज्वलित कर मंदिर में आये हुए भक्तगण कतारबद्ध हो पावन ज्योत में आहुति प्रदान कर रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने गणेश वंदना के साथ संगीतमय एवं भक्तिमय संकीर्तन का शुभारंभ किया गया।
कभी तेरा दामन न छोड़ेंगे हम, दरबार है निराला खाटू के श्याम का, किसने किया श्रृंगार ओ सांवरे, लो आ गया अब तो श्याम मैं शरण तेरी, मोर छड़ी लहराई रे रसिया ओ सांवरे... इत्यादि भजनों की धुन पर भक्तगण श्याम गंगा में गोते लगाते रहे। मौके पर श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान - फल - मेवा एवं रबड़ी का भोग अर्पण किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गोपी किशन ढांढनीयां, चंद्र प्रकाश बागला, रमेश सारस्वत, धीरज बंका, अभिषेक डालमिया, बालकिशन परसरामपुरिया, अरुण धनुका, जीतेश अग्रवाल, नितेश केजरीवाल, विकास पाडिया, अजय साबू, नितेश लाखोटिया का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री शिव मण्डल (राँची ) द्वारा श्री पहाड़ी बाबा का 29वाँ वार्षिक महोत्सव 21 दिसंबर को भव्य रुप से मनाया जायेगा - सर्वप्रथम प्रातः 8 बजे श्री हनुमान ध्वज पूजन के साथ प्रातः 9:30 बजे से महारुद्राभिषेक आचार्य श्याम भारद्वाज अपने 11 विद्वान पंडितों के साथ 51 किलो दूध - दही - मधु - गन्ने का रस एवं अन्य पूजन सामग्री के साथ दोपहर 2 बजे तक चलेगा।
आये हुए शिव भक्तों को किसी तरह की असुविधा न हो इसका हर संभव ख्याल रखा जायेगा। तत्पश्चात दोपहर 2 : 30 बजे से श्री पहाड़ी बाबा का भव्य श्रृंगार के साथ 56 भोग से बाबा को प्रसाद लगाया जाएगा - 3 बजे से भव्य - भजन कीर्तन नए हॉल में किया जायेगा।
साथ ही साथ विशेष भंडारा विश्वनाथ मन्दिर परिसर में आयोजित किया जायेगा , संध्या 6 बजे महाआरती के साथ महोत्सव का समापन के साथ प्रसाद वितरण किया जाएगा -- आज की बैठक मंडल के सदस्य किशोरी पोदार के आवास में एक बैठक में उपस्थित सदस्यों के बीच की गई।
बैठक में मुख्य रुप से मंडल के संयोजक प्रेम शंकर चौधरी , अमर पोद्दार , उदय शर्मा , राजेंद्र सिंह , आनंद गिरी , बासुदेव भाला , दिनेश चौधरी , अशोक झांझरिया , भोला चौरसिया , प्रदीप मोदी , प्रेमलता लाखोटिया , अनुपमा चौधरी , संगीता चौधरी एवं छाया दुबे उपस्थित थी - यह जानकारी मण्डल के मीडिया प्रभारी उदय शंकर चौधरी ने दी।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 14.12.2025 (दिन - रविवार) को श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची के महिला संगठन द्वारा ग्राम - बरगुट्टू, अलीपुर जिला - राँची स्थित श्री राधेश्याम सिंह जी के क्रशर परिसर में जरूरतमंदों के बीच कम्बल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी एवं परमपूज्य गुरुदेव गुरुपद संभव राम जी के तस्वीर की विधिवत आरती-पूजन के साथ की गई।
तत्पश्चात ग्रामीण बंधुओं के बीच एक लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में समूह का संक्षिप्त परिचय देते हुए श्री सर्वेश्वरी समूह द्वारा आयोजित किये जा रहे अनेक जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में ग्रामीण बंधुओं को अवगत कराया गया। गोष्ठी के बाद उपस्थित ग्रामीण बंधुओं के बीच 170 कंबलों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में ग्राम सोरहा, अलीपुर, सहेड़ा, बुमरो इत्यादि से ग्रामीण बन्धु सम्मलित हुए।
समस्त कार्यक्रम का आयोजन श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची के महिला संगठन के कुशल नेतृत्व में आयोजित किया गया जिसमे श्रीमती नयन मंजरी जी एवं अन्य महिला सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई।
समस्त कार्यक्रम के आयोजन में श्री विक्रान्त सिंह जी का विशेष योगदान प्राप्त हुआ। शाखा राँची की तरफ से डॉ. एस. एन. सिन्हा, श्री राधेश्याम सिंह, श्री विभूति शंकर सहाय, श्री आनन्द सिंह के साथ अन्य श्रद्धालु-सदस्यगण सम्मलित हुए।
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