टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में 17 जनवरी 2026 शनिवार को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की बैठक का आयोजन किया जा रहा है। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के आतिथ्य में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की एक दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक रांची हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन के बहुउद्देशीय सभागार में पूर्वाह्न- 11 बजे से प्रारंभ होगी।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल एवं महामंत्री विनोद कुमार जैन ने संयुक्त रूप से बताया कि यह बैठक कई दृष्टियों से ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 40 वर्षों के उपरांत झारखंड के रांची शहर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की मेजबानी का अवसर प्राप्त हो रहा है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका, राष्ट्रीय महामंत्री केदारनाथ गुप्ता सहित देश के विभिन्न राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, दिल्ली, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आये प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक में समाज से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों, संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण, सामाजिक एकता, शिक्षा, सेवा एवं विकास से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जायेगा।
साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर भावी नीतियों के निर्धारण पर भी गंभीर चर्चा की जायेगी। उन्होंने बताया कि यह आयोजन न केवल झारखंड, बल्कि पूरे मारवाड़ी समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि इस बैठक से समाज को नयी दिशा और ऊर्जा मिलेगी।
उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी। उन्होंने समाज के सभी प्रबुद्धजनों एवं प्रतिनिधियों से इस आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।
टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में आज दिनांक 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा भक्ति के साथ उत्साह पूर्वक आयोजित किया गया। मौके पर श्री श्याम देव को प्रात: नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर गुलाब, जरबेरा, गुलदाऊदी, तुलसी दल, गेंंदा से मनमोहक श्रृंगार किया गया।
साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार और बजरंगबली का भी विशेष श्रृंगार किया गया तथा मकर संक्रांति और वर्ष की पहली एकादशी पर प्रात: से ही भक्तों की कतार बाबा के दर्शन करने हेतु लगने लगी। भक्तगण अपनी हाथों में लाल गुलाब और प्रसाद श्री श्याम प्रभु को अर्पित करने में लगे हुए थे।
रात्रि 9 बजे पावन ज्योत प्रज्वलित कर भक्तगण कतार में लगकर पावन ज्योत में आहुति प्रदान कर मनोवांछित फल की कामना कर रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने गणेश वंदना के साथ संगीतमय संकीर्तन प्रारंभ किया।
मौके पर आयो सांवलियो सरकार, हमें तो जो भी दिया श्याम बाबा ने दिया, दरबार है निराला खाटू के श्याम का, खाटू को श्याम रंगीलो रे खाटू को, किस्मत वालों को मिलता है श्याम तेरा दरबार... इत्यादि भजनों की पर भक्तगण झूमते रहे।
मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा, रबड़ी व मगही पान का भोग अर्पित किया गया। साथ ही मकर संक्रांति पर श्याम प्रभु को शुद्ध घी में बने घेवर, रेवड़ी, तिलकुट, तिल के लड्डू का विशेष भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, गोपी किशन ढांढनीयां, राजेश सारस्वत, प्रियांश पोद्दार, विकास पाड़िया, विवेक ढांढनीयां, नितेश केजरीवाल, ज्ञान प्रकाश बागला, जितेश अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। भारत ने बच्चों को निशाना बनाकर किए जाने वाले अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में स्वयं को अग्रिम पंक्ति में स्थापित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित अपनी तरह का पहला और अनोखा प्रौद्योगिकी सक्षम टूल रक्षा पेश किया है जिसे बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह तथा बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सी-सीम) की प्रभावी रोकथाम के लिए तैयार किया गया है। एआई आधारित इस टूल को 16 से 20 फरवरी 2026 के बीच आयोजित होने वाले भारत सरकार के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले लांच किया गया है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए विकसित इस क्रांतिकारी प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल रक्षा को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट में लांच किया, जो भारत सरकार के एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम है। यह सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने अपने रणनीतिक साझेदार इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के साथ मिलकर आयोजित किया।
बच्चों की सुरक्षा के लिए इस टूल रक्षा को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने तैयार किया है जिसके 250 से अधिक सहयोगी नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम, पहचान और प्रभावी प्रतिक्रिया को सशक्त बनाने के लिए देश के 451 जिलों में जमीन पर काम कर रहा है।
रक्षा देशभर के बच्चों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण करता है और उन्नत एआई क्षमताओं का उपयोग कर वास्तविक समय में बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, संवेदनशील बच्चों और समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग जैसे मुनाफे वाले संगठित अपराध में शामिल गिरोहों की निगरानी, उसके स्रोत और गंतव्य बिंदुओं की ट्रैकिंग तथा शोषण के उभरते रुझानों व नए केंद्रों का पता लगाने में सक्षम बनाता है।
बाल सुरक्षा पर अपनी तरह के पहले सम्मेलन को डिजिटली संबोधित करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन सबसे संवेदनशील तबकों व लोगों की सुरक्षा में निहित है। बच्चे हमारे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि जिस डिजिटल दुनिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को वे विरासत में पाएं, वह सुरक्षित, समावेशी और उन्हें सशक्त करने वाली हो। यह जानकर मुझे प्रसन्नता है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बच्चों की सुरक्षा, सशक्तीकरण और संरक्षण के लिए एआई-आधारित टूल की शुरुआत कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आगे कहा कि रक्षा टूल बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के मूल्यों को समाहित करने के साथ और एक सुदृढ़ बाल संरक्षण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन को इस जिम्मेदारी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने और एआई व प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से देश के बच्चों के सुरक्षित वर्तमान व समृद्ध भविष्य पर रचनात्मक विमर्श के लिए सभी पक्षों व हितधारकों को एक मंच पर लाने व इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
इस बात को रेखांकित करते हुए कि रक्षा किस प्रकार बाल संरक्षण के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित कर सकता है, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ करने और बच्चों की सुरक्षा व समृद्धि को आगे बढ़ाने में एआई के उपयोग में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। तकनीक के उपयोग से दुनिया का सबसे समग्र बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में रक्षा भारत के वैश्विक नेतृत्व का एक ऐतिहासिक पड़ाव है।
रक्षा का एक मंच के रूप में उपयोग करते हुए, भारत तकनीक के सहारे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे और हर संवेदनशील परिवार की पहचान और निगरानी कर सकता है। आंकड़ों को ज्ञान और ठोस कार्रवाई में रूपांतरित कर यह दृष्टिकोण न्याय तक पहुंच का विस्तार कर रहा है, संवेदनशील परिवारों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार ला रहा है, और बच्चों के सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ कर रहा है। साथ मिलकर हम हर बच्चे के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करेंगे।
बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम में एआई की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब कोई भविष्य का वादा नहीं रही, बल्कि मौजूदा समय की सच्चाई बन चुकी है। यह इस बात को आकार दे रही है कि हम कैसे सीखते हैं, शासन करते हैं, काम करते हैं और इससे आगे बढ़कर यह भी तय कर रही है कि हमारे बच्चे किससे और कैसे जुड़ते हैं। एआई हमें प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर रोकथाम की ओर, नुकसान के महज दस्तावेजीकरण से आगे बढ़कर जोखिम का पूवार्नुमान लगाने की क्षमता देती है। भौगोलिक परिस्थितियों, प्रवासन, स्कूलों में उपस्थिति और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों से जुड़ी बाल-संवेदनशीलता के पैटर्न पहले से ही समेकित डेटा प्रणालियों में मौजूद हैं।
एआई इन बिंदुओं को जोड़कर समय से पूर्व चेतावनियां और ऐसे हस्तक्षेप संभव बनाती है, जिनसे नुकसान होने से पहले ही उसे रोका जा सके। ऐसे तंत्र मानवीय विवेक का स्थान नहीं लेते, बल्कि उसे सशक्त करते हैं, क्योंकि रोकथाम केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि एक नैतिक अनिवार्यता है। हमारे सामने मौजूद चुनौती सरकार, तकनीक विशेषज्ञों, नागरिक समाज, शिक्षा जगत और समुदायों के बीच सहयोग की मांग करती है। लावू एमपी ज फॉर चिल्ड्रेन के संयोजक हैं जो बच्चों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाला मंच है।
रक्षा को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर रोकथाम और जांच एजेंसियों- दोनों को सुदृढ़ करे। इसके लिए यह तीन लक्ष्य केंद्रित टूल का उपयोग करता है। पहला टूल व्यापक स्तर पर परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर रोकथाम पर काम करता है, विशेषकर बाल विवाह के विरुद्ध। दूसरा टूल ट्रैफिकिंग जैसे संगठित आर्थिक अपराध से निपटता है।
यह एक तरफ अपराध के घटित होने से पहले ही उसका पूवार्नुमान और रोकथाम, व दूसरी ओर पैसे के लेनदेन की पड़ताल कर संगठित आपराधिक गिरोहों की जड़ों और उनके विस्तार की पहचान करने पर केंद्रित है। तीसरा टूल डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त करता है और यह बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, उसके अपलोड, डाउनलोड और देखने से जुड़े आनलाइन हीट जोन और आईपी पतों का पता लगाने, उनके विश्लेषण और मानचित्रण में सक्षम है।
यह शिखर सम्मेलन चार पूर्ण सत्रों में विभाजित था, जिनमें सामाजिक परिवर्तन में एआई की भूमिका, रक्षा: बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल स्पेस की रूपरेखा, टेक फॉर गुड तथा एआई, जागरूकता और कार्रवाई: भविष्य के लिए संप्रेषण और विमर्श शामिल थे। इन सत्रों के दौरान वक्ताओं ने पूर्वानुमान आधारित रोकथाम, व्यवहार विश्लेषण में एआई की भूमिका, कानून और जमीनी कार्रवाइयों के साथ उसके समन्वय, तथा डिजिटल युग में बच्चों के लिए जोखिमों, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।
दिन-भर चले इस शिखर सम्मेलन में दया शंकर, उप सचिव एवं निदेशक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय; प्रियंका ऋभु, प्रमुख, सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियरल चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब); मैथिल्द सेरियोली, मुख्य वैज्ञानिक, एवरीवन एआई, परिषद सदस्य, चैटजीपीटी; नोमिशा कुरियन, सहायक प्रोफेसर, वारविक विश्वविद्यालय; जी. के. गोस्वामी, अपर महानिदेशक एवं निदेशक, फॉरेंसिक संस्थान, उत्तर प्रदेश; हर्षवर्धन, पुलिस अधीक्षक, तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो; धनंजय टिंगल, कार्यकारी निदेशक, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन; अनिल रघुवंशी, संस्थापक एवं अध्यक्ष, चाइल्डसेफनेट; बैली सैपल, विकास प्रमुख, वी प्रोटेक्ट ग्लोबल एलायंस; अनुप्रिया मोहता, पब्लिक पॉलिसी मैनेजर, यूट्यूब; डॉ. ई. खलियाराज, निदेशक, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अनुसंधान परिषद; मयंक, अपर महानिदेशक, रेलवे पुलिस बल; व संपूर्णा बेहुरा, कार्यकारी निदेशक, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, गौरव मित्तल, प्रिंसिपल अप्लाइड साइंटिस्ट, माइक्रोसॉफ्ट यूएस और अतुल अग्रवाल, सीईओ एस्प्रिफाई एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड मौजूद थे।
नीति आयोग के साथ साझेदारी में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अकेले 2025 में आर्थिक रूप से संवेदनशील 20 लाख से ज्यादा परिवारों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा, 198,628 बाल विवाह रोके और ट्रैफिकिंग व शोषण के शिकार 55,146 बच्चों को मुक्त कराया।
जेआरसी की याचिका पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार सामग्री देखने, डाउनलोड करने व साझा करने को अपराध घोषित किया और चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द की जगह बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार सामग्री शब्द के उपयोग का आदेश दिया। नेटवर्क ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय से सी-सीम के 73,258 मामलों में कार्रवाई शुरू की। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के साथ समझौते के तहत यह रेल के जरिए बच्चों की ट्रैफिकिंग की रोकथाम व उन्हें मुक्त कराने में उसके साथ करीबी समन्वय से काम करता है।
भारत सरकार 16 से 20 फरवरी तक इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट का आयोजन कर रही है जो ग्लोबल साउथ में अपनी तरह का पहला आयोजन है। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेता, सीईओ और नीति निमार्ता कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इस पर विमर्श को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करेंगे। इससे पहले भारत सरकार के सहयोग से एआई पर इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। सारंग संस्था के संस्थापिका रानी राज को प्राइड ऑफ यंग हिंदुस्तान अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मुम्बई में मेज़र पवन थपालियाल के हाथों प्रदान किया गया। कार्यक्रम यंगिस्तान फाउंडेशन फाउंडेशन के मिथिलेश झा के अध्यक्षता में आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न राज्यों में समाजसेवा, जनहित एवं राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे 15 युवा समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।
सारंग संस्था की संस्थापिका रानी ने कहा कि सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, प्रेरणा का माध्यम है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह अवॉर्ड केवल एक ट्रॉफी या प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उन समाजसेवियों के प्रति कृतज्ञता, सराहना और प्रेरणा का प्रतीक है, जो बिना किसी अपेक्षा के समाज के लिए कार्य करते हैं।
गौरतलब है कि सारंग संस्था द्वारा सुदूर इलाके के असहाय बच्चे एवं ड्राप ऑउट बच्चे के लिए काम करती है साथ हीं भाषा-संस्कृति संरक्षण , पर्यावरण, नशामुक्ति अभियान, अंधविश्वास जैसे विषयों पर काम करती है।रानी राज वर्तमान में बिहार सरकार में ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का 12 जनवरी को रांची आगमन हुआ। इस अवसर पर सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न संगठनों, जाति-बिरादरी एवं समुदायों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक का उद्देश्य समाज में व्याप्त समसामयिक समस्याओं पर संवाद स्थापित करना तथा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विचार करना था।
बैठक के प्रथम सत्र में समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किये जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने अपने कार्यों के दौरान सामने आ रही सामाजिक चुनौतियों को भी साझा किया। इनमें प्रमुख रूप से धर्मांतरण, घुसपैठ, नशाखोरी, अशिक्षा, अंधविश्वास, परस्पर सहयोग की कमी, बाल-विवाह, लव-जिहाद जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया।
द्वितीय सत्र में दत्तात्रेय होसबाले जी ने समाज के प्रतिनिधियों द्वारा उठाये गये प्रश्नों एवं विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किये।
धर्मांतरण विषय पर बोलते हुए उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र, दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्य उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों में साजिशन ढंग से चर्च से जुड़े लोगों का प्रवेश कराया गया तथा हिंदू धर्मगुरुओं को रोकने का प्रयास हुआ। गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास को उन्होंने धर्मांतरण के प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में तथाकथित थ्री-डी समस्या का उल्लेख किया, जिसमें धर्मांतरण, डीजे संस्कृति और दारू को शामिल बताया। धर्मांतरण की समस्या को कम करने के उपायों पर बोलते हुए उन्होंने समाज में परस्पर सहयोग, छुआछूत एवं जातिगत भेदभाव से दूरी, ऊंच-नीच की भावना त्यागने तथा हिंदू समाज की जनसंख्या सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने घर-वापसी के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा।
जातिगत समस्या पर चर्चा करते हुए माननीय दत्तात्रेय जी ने कहा कि हमारा जन्म किस परिवार या जाति में होगा, यह हमारे हाथ में नहीं होता, फिर हम जातिवाद क्यों करते हैं? किसी भी जाति को नीचा या ऊंचा नहीं समझना चाहिए।
उन्होंने महिलाओं-बहनों के सम्मान पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पुरुष-महिला समानता आज की आवश्यकता है। जब पुरुष और महिलाएं साथ-साथ कार्य कर रहे हैं, तो उनके बीच असमानता का कोई औचित्य नहीं है।
दत्तात्रेय जी ने कहा कि आज सोशल मीडिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के कंटेंट से भरा हुआ है। बच्चों को इसके नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए बच्चों के साथ संवाद की प्रक्रिया अपनाने पर उन्होंने बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि मंदिर जाने से अहंकार दूर होता है और मन को शांति की प्राप्ति होती है।
उन्होंने विभिन्न पर्वों पर बनाये जाने वाले पंडालों में अत्यधिक खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे मनोरंजन की प्रवृत्ति से जोड़कर देखने की आवश्यकता बतायी।
इस सत्र में माननीय दत्तात्रेय होसबोले जी ने झारखंड प्रांत के लगभग 78+ संतों के साथ आध्यात्मिक-धार्मिक विषयों पर चर्चा की। इस बैठक में धारा 342 पर चर्चा हुई जिसमें धर्मांतरण के उपरांत जनजाति वर्ग के स्टेटस में कोई बदलाव नहीं आता तथा धर्मांतरण के उपरांत ईसाई या मुस्लिम बनने के बाद भी जनजातियों को प्रदत्त सुविधाओं का लाभ मिलता रहता है। अगर इस धारा को समाप्त कर दिया जाए तो धर्मांतरण बहुत हद तक समाप्त हो जायेगा। इस सत्र में गुरुकुल की स्थापना जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
समाज की सामाजिक, आध्यात्मिक संस्थाओं ने सेवा, साहित्य, कला, धार्मिक आदि क्षेत्रों में कार्य किया है। हजारों वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है। ऐसा एक महान लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकारें भी कई कार्यों में योगदान देती रही हैं। लेकिन बहुत सारे करणीय कार्य परिवार की भी होती हैं, जैसे— अपने बच्चों को संस्कार देना, उन्हें बड़े-बुजुर्गों का आदर करना सिखाना आदि।
समाज की एकता आवश्यक है। जंजीर की प्रत्येक कड़ी स्वयं मजबूत रहें और एक कड़ी दूसरे कड़ी से जुड़े रहे, यह जरूरी है। सरकार के समक्ष याचना की स्थिति में हमारे युवा न रहें, ऐसे समाज निर्माण पर बल देना चाहिए। संस्कृत के उपयोग पर भी जोर दिया गया।
भारत का विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ना जारी है, लेकिन स्लम की समस्या, पर्यावरण की समस्या आदि सामाजिक दृष्टि के अभाव को परिलक्षित करता है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना चाहिए। विदेशों की व्यवस्था से तुलना कर अपने यहां सुधार की बात कर सकते हैं। महिलाओं की दशा में सुधार करना आवश्यक है। अत: भारत को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाना तो आवश्यक है, लेकिन ऊपर सुझाए विभिन्न सामाजिकझ्रआध्यात्मिक मसलों पर मजबूती की उतनी ही जरूरत है।
टीम एबीएन, रांची। पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर (श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित) में आध्यात्मिक गरिमा और श्रद्धा से परिपूर्ण श्रीमद् भागवत कृष्ण कथा के समापन के उपरांत ट्रस्ट के संस्थापक एवं महान संत श्रीश्री 108 परमहंस स्वामी डॉ सदानंद जी महाराज ने ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुराधा सर्राफ को अंग वस्त्र ओढ़ाकर स्नेहपूर्वक आशीर्वाद प्रदान किया।
यह सम्मान न केवल एक परिवार के प्रति संत की कृपा का प्रतीक था, बल्कि सेवा, समर्पण और संस्कारों के प्रति श्रद्धा का भी द्योतक बना। मौके पर स्वामी जी ने ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने मंदिर के प्रचार-प्रसार एवं मीडिया के क्षेत्र में किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धर्म और संस्कृति के संरक्षण हेतु मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इस दिशा में श्री सर्राफ का योगदान प्रशंसनीय एवं प्रेरणास्पद है।
उनके प्रयासों से श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर की गतिविधियां समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच रहे हैं, जिससे सनातन मूल्यों का प्रचार सुदृढ़ हो रहा है। स्वामी सदानंद जी महाराज ने सभी भक्तों के कल्याण, शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
टीम एबीएन, रांची। शनिवार को निवारणपुर स्थित रांची महानगर कार्यकाल में विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर की बैठक हुई। बैठक में धर्म रक्षा निधि, समिति विस्तार एवं आने वाले आगामी कार्यक्रमों के बारे में चर्चा हुई। प्रांत अध्यक्ष माननीय चंद्रकांत रायपत जी ने कार्यकर्ताओं को एक नयी ऊर्जा और संकल्प के साथ संगठन का कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
क्षेत्र मंत्री डॉ. वीरेंद्र साहू ने कार्यकर्ताओं को सेवा संकल्प और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया और उन्होंने दायित्व बोध कराया। महानगर अध्यक्ष कैलाश केशरी ने प्रताप नगर और श्री राम नगर में कुछ नवीन घोषणा की, जिसमें श्री राम नगर में शुभम केशरी जी को सह मंत्री और प्रताप नगर में अभिषेक गुप्ता (बंटी) को मंत्री, रघुवीर रूंगटा को सत्संग प्रमुख, सुमित कुमार वर्मा को बजरंग दल संयोजक, अजीत गुप्ता को सह संयोजक धीरज साहू को सेवा प्रमुख बनाया गया।
बैठक में प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, प्रांत दुर्गा वाहिनी संयोजिका कीर्ति गौरव, विभाग सेवा प्रमुख पारस मिश्र, महानगर अध्यक्ष कैलाश केशरी, मंत्री विश्वरंजन, सह मंत्री सुमन, सत्संग प्रमुख योगेश खेड़वाल, बजरंग दल संयोजक विक्रम साहू, प्रचार-प्रसार सह प्रमुख अनिल तिवारी एवं नगर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद रांचीमहानगर के महानगर प्रचार प्रसार सह प्रमुख अनिल तिवारी ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
यह दिन महान संत, विचारक, दार्शनिक और युगद्रष्टा स्वामी विवेकानंद की जन्मतिथि है। भारत सरकार ने वर्ष 1984 में उनके विचारों और आदर्शों से युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया। तब से यह दिन युवाओं में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा की भावना जागृत करने का प्रतीक बन गया है।
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे बचपन से ही असाधारण प्रतिभा, तीव्र बुद्धि और सत्य की खोज के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया और भारतीय दर्शन, वेदांत और योग को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।
वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में उनके ओजस्वी भाषण ने भारत की आध्यात्मिक चेतना को विश्व के सामने गौरवपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़ना है। वे युवाओं को राष्ट्र की शक्ति मानते थे। उनका प्रसिद्ध कथन- उठो,जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए-आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
वे शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मनिर्भरता का माध्यम मानते थे। इस जयंती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल एक महान व्यक्तित्व की स्मृति नहीं, बल्कि युवा चेतना का उत्सव है। इस दिन देशभर में संगोष्ठियाँ, भाषण प्रतियोगिताएँ, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक सेवा गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में युवाओं को आत्मबल, अनुशासन, सेवा और नैतिक मूल्यों का महत्व समझाया जाता है।स्वामी विवेकानंद ने जाति, धर्म और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर मानवता की सेवा का संदेश दिया। उनका मानना था कि आध्यात्म और विज्ञान का संतुलन ही सशक्त भारत का आधार बन सकता है। उन्होंने नारी सम्मान, सामाजिक समरसता और गरीबों की सेवा को सच्चा धर्म बताया।
आज के बदलते समय में, जब युवा अनेक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, स्वामी विवेकानंद के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि यदि युवा सही दिशा में संगठित हों, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि विश्व को भी मार्गदर्शन दे सकता है। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश और महत्व है।
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