टीम एबीएन, रांची। श्री जैन श्वेतांबर संघ रांची का पर्युषण उपरांत क्षमापना कार्यक्रम 15 सितम्बर को जैन मंदिर डोरंडा में मनाया जायेगा। सुबह 8 बजे से भगवान शान्तिनाथ जी की शोभायात्रा गाजे,-बाजे के साथ धूमधाम से जैन मंदिर से निकलेगी जो कि तुलसी चौक, मेकॉन चौक, हाई कोर्ट होते हुए वापस मंदिर जी में प्रवेश करेगी।
शोभायात्रा के बाद मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस दौरान 30 उपवास करने वाले तपस्वी मयंक बेगानी, 13 उपवास करने वाले विशाल दस्सानी एवं समाज के सभी तपस्या करने वालों का बहुमान भी किया जायेगा। तत्पश्चात दोपहर 1 बजे से स्वामी वात्सल्य का आयोजन है।
श्री संघ के अध्यक्ष संपतलाल रामपुरिया एवं सुभाष चंद बोथरा ने सकल श्वेतांबर समाज रांची को अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में भाग लेकर सफल बनाने का अनुरोध किया है। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अनंत चतुर्दशी पर्व 17 सितंबर को मनाया जायेगा। इस वर्ष भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 सितंबर दिन सोमवार की दोपहर 3 बजकर 10 मिनट से शुरू होगा तथा इसका समापन अगले दिन यानी 17 सितंबर दिन मंगलवार को सुबह 11 बजकर 44 मिनट पर होगा।
ऐसे मे उदया तिथि के अनुसार अनंत चतुर्दशी का पर्व 17 सितंबर को मनाया जायेगा। हिंदू सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत रूपों की आराधना करने का विधान है, अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस भी कहा जाता है। इस दिन जहां बप्पा श्री गणेश की बड़ी धूमधाम से विदाई की जाती है। दरअसल गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को घर लाया जाता है और पूरे 10 दिनों तक विधिवत उनकी पूजा अर्चना की जाती है।
अनंत चतुर्दशी के दिन श्री गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि विधान के साथ की जाती है। इस दिन अनंत सूत्र का भी विशेष महत्व माना गया है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद एक कच्ची रेशम की डोरी को हल्दी या केसर से रंग कर उसके बाद उस डोर में 14 गांठ लगाए और इसे प्रभु श्री हरि के चरणों में अर्पित करने तथा ओम अनंताय नम: मंत्र की जाप करने के बाद इस दिव्य को पुरुष अपने दाएं हाथ में बांधे तथा महिलाएं इस सूत्र को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए।
विधि विधान से पूजा अर्चना, दीपक जलाकर आरती तथा कथा का पाठ, प्रभु को फल और मिठाई समेत चीजों का भोग लगाना चाहिए। रात के समय इस रक्षा सूत्र को उतारकर रख दे और अगले दिन किसी पवित्र नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें, माना जाता है कि इस कार्य को करने से साधक के सभी प्रकार के पाप एवं दुख नष्ट होते हैं और उसे आरोग्य जीवन का आशीर्वाद तथा भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।
एबीएन सोशल डेस्क। प्रकृति पर्व करमा को झारखंड राज्य में धूम धाम से मनाया जाता है। यह पर्व भाइयों और बहनों के पवित्र प्रेम को दर्शाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों के सुख-समृद्धि और दीर्घायु होने की कामना करती हैं। इसके अलावा झारखंड के लोगों की परंपरा के अनुसार धान के खेत रोपने के बाद यह त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
जिस प्रकार सरहुल में सखुआ फूल की पूजा की जाती है, उसी प्रकार करम में करम शाखा की भी पूजा की जाती है। करम पूजा के शुभ अवसर पर, अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, भाइयों और बहनों को करम त्योहार की शुभकामनाएं दें। प्रकृति पर्व करमा पूजा की सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
झारखंड की पहचान और संस्कृति के मूल में प्रकृति की पूजा है। हमारे आदिवासी भाई-बहन प्रकृति के संरक्षक रहे हैं। हमें मिलकर झारखंड को और हरा भरा बनाना है।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि झारखंड के प्रमुख त्योहारों में से एक करमा पूजा पर्व 14 सितंबर दिन शनिवार को मनाया जायेगा। आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व करमा पूजा झारखंड बिहार के अलावे उड़ीसा बंगाल छत्तीसगढ़ एवं असम मे धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
करमा पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण करने की प्रेरणा देता है। इस पर्व में बहनें अपने भाइयों की सुख-समृद्धि की कामना करती है एवं उनके दीर्घायु के लिए पूजन करती है। महिलाएं 24 घंटे उपवास करती है इस दौरान महिलाएं कर्म डाल की पूरे विधि विधान से पूजा करती है।
करमा पर्व सृष्टि का पर्व है ये समस्त मानव, जीव जंतुओं का पर्व है क्योंकि इस संसार में कर्म ही धर्म है धर्म ही कर्म है आदिवासी समाज प्रकृति को ही आराध्य देव और भगवान मानते हैं। तथा उनका मानना है कि कर्म का वृक्ष 24 घंटा आॅक्सीजन देता है यही कारण है कि आदिवासी समुदाय करम वृक्ष को आराध्य देव के रूप में मानते हैं कर्म पूजा के दिन बांस की बनी डाली को सजाकर घर के आंगन के बीच में रखा जाता है।
उसके साथ ही कर्म वृक्ष के पेड़ को भी घर के आंगन में गाड़ा जाता है। उसके चारों तरफ घर की महिलाएं बैठकर पूजा आराधना एवं अपने भाई के सुख समृद्धि की कामना करती है। प्रकृति के साथ इनका गहरा संबंध है। प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। करमा पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण करने की प्रेरणा देने के साथ ही मानव समाज में सद्भाव और अच्छे चरित्र का निर्माण पीढ़ी दर पीढ़ी होते रहने की सीख देती है।
जिस तरह सूर्य का काम निरंतर प्रकाश देना है पेड़ का काम हमें फल और छाया देना है उसी तरह हम मानते हैं कि कर्म और धर्म एक सिक्के के दो पहलू है आदिवासी समाज करम पर्व मे पाप और पुण्य, सत्य, असत्य को अपने आराध्य देव कर्म वृक्ष के रूप में स्वीकारते हैं और उससे जो अलौकिक शक्तियां निकलती है जिसे हम सरना मां या धर्मेश कहते हैं उसमें हम उनके स्वरूप को देखते हैं क्योंकि वो संसार के किसी भी जीव जंतुओं से बैर नहीं करता है।
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज के तत्वावधान में राष्ट्र स्तरीय संचालित आनलाइन स्वाध्याय महिला मंडल, प्रज्ञामंडल के सानिध्य में पूज्यवर श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति- तपोनिष्ठ पण्डित श्रीरामशर्मा आचार्य जी की लिखित वांग्मय गायत्री महाविद्या के तत्वदर्शन पर आनलाइन स्वाध्याय पाठ व संवाद चल रहा है।
इसमें आज इसके तत्वदर्शन पर प्रकाश डालकर बताया गया कि ब्रह्मवेत्ता, योगी, अध्यात्मवादी, तत्वदर्शी भक्त वर्ग गायत्री की आद्यशक्ति के एक-एक चरण के उपासक होते हैं। गायत्री को त्रिपदा कहा गया है। उसके तीन चरण हैं। इस त्रिवेणी शक्ति की अधिष्ठात्री को त्रिपदा गायत्री कही गई है। संसार के समस्त दु:खों के प्रधान कारण हैं- अज्ञान, अभाव, अशक्ति और इससे सत, रज, तम की विविधि प्रकृति से मनुष्य का निर्माण हुआ है।
वस्तुत: सत्ता दो की है। सत और तम की। रज की उत्पत्ति तो दोनों के सम्मिश्रण से होती है। चर्चा हुई कि दु:खों के कारणों में भी प्रधान दो ही हैं- अज्ञान और अशक्ति। अभाव तो उनकी परिणति है। गायत्री की तीन शक्ति धाराएं हैं- हीं, श्रीं और क्लीं। ह्रीं सद्ज्ञान की, श्रीं वैभव की और क्लीं शक्ति की, बल की प्रतीक हैं। सत्-रज-तम से बनी काया को आवश्यकता तीनों ही शक्ति धाराओं की है। इनमें किसी का भी महत्व कम नहीं है।
तीनों का संतुलन आवश्यक है। जीवन निर्वाह के लिए जितना महत्व ज्ञान का है, उतना ही साधनों एवं शक्ति का। एक भी पक्ष छोड़ा नहीं जा सकता।बताया गया कि गायत्री महामन्त्र में तीनों शक्ति धाराओं का समान रूप में समावेश है। साधनों के संग्रह की आपाधापी में विश्व मानस ने चेतना की महत्ता को लगभग भुला दिया है।
बताया गया कि आज जरूरत है, उसके लिए आत्मा के अन्दर प्रकाश उत्पन होना चाहिए, जिससे सत्य और असत्य का विवेक जागे। सारांश में दीदी ने बताया कि कुमार्ग को छोड़कर श्रेष्ठ मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिले, गायत्री मन्त्र में यही भावना विद्यमान है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। पर्वाधिराज पर्युषण के उपलक्ष्य पर श्री जैन श्वेतांबर साधु मार्गी संघ एवं तेरापंथ धर्म संघ का संयुक्त रूप से दिगंबर जैन भवन में विगत आठ दिनों से चल रहा था। पर्युषण एक ऐसा पर्व है जो संयम, तपस्या, और आत्म-निरीक्षण के माध्यम से आत्मिक शुद्धि की ओर मार्गदर्शन करता है। आज श्वेतांबर जैन श्री साधु मार्गी संघ द्वारा पर्युषण पर्व के अंतिम दिन क्षमा याचना कार्यक्रम एवं पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम रखा गया था एवं कार्यक्रम में मुंबई से पधारे स्वाध्यायी बंधु गौतम जी रांका और सुरेशजी बोरडिया का विदाई समारोह तथा सभी तपस्वियों का बहुमान किया गया।
पर्युषण पर्व आराधना के लिए श्री जैन श्री साधु मार्गी संघ के मुंबई से पधारें स्वाध्यायी स्वयं के आत्म उत्थान के साथ साथ आठ दिनों में जिन शासन की प्रभावना करवायी! पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म के विभिन्न आगम में, शास्त्रों में उपलब्ध ज्ञान के माध्यम से श्रावक श्राविकाओं के जीवन को नियमन करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्वेताम्बर जैन श्री साधु मार्गी संघ के सहयोग से जैन समता युवा संघ ने आज समता शाखा एवं प्रार्थना पुस्तक का विमोचन किया। समता साखा से अध्यात्म अभिवर्द्धि एवं प्रार्थना पुस्तक के माध्यम से देव गुरु धर्म की आराधना जो कि प्रत्येक मानव मात्र के जीवन का आधार है।
जिसका विमोचन आज के मुख्य अतिथि महुआ मांझी (राज्य सभा सांसद), सीपी सिंह (विधायक), समरी लाल (विधायक), संजीव विजवर्गीय (डिप्टी मेयर), रंजन यादव (युवा प्रदेश अध्यक्ष राजद), किशोर मंत्री (चेंबर अध्यक्ष), विनय अग्रवाल (चेंबर पूर्व अध्यक्ष), साधु मार्गी संघ के अध्यक्ष अशोक सुराना, साधु मार्गी जैन युवा संघ के अध्यक्ष राकेश बच्छावत, उत्तम चौरडिया, जय पिंचा, राजेश बच्छावत, संयम बच्छावत, सुरेश जैन, श्री राम, राहुल, प्रदीप, स्वराज, अनूप एवं अन्य लोग ने किया।
आज सभी तपस्वियों का बहुमान किया गया, जिसमें मुख्य रूप से छोटे लाल जी चोरड़िया के 8 उपवास, विशाल दस्सानी के 9 उपवास धर्मेंद्र बोहरा के 8 उपवास, दिशा बैंगानी, परी बैंगानी, अमन सेठिया, भव्य सुराणा के 3 उपवास,50 बयासना संगीता लोढा ने किया है। इन सभी का बहुमान साधुमार्गी जैन संघ, तेरापंथ सभा एवं युवक परिषद ने किया।
दिगंबर जैन पंचायत समाज के अध्यक्ष नरेंद्र गंगवाल, मंत्री पंकज पांड्या, दिगम्बर जैन भवन के अध्यक्ष सुरेश जैन, मंत्री अमित रारा के साथ मे समाज के अन्य लोग उपस्थित हुए। आज के कार्यक्रम में मोहन लाल पींचा, हुकमी चन्द चोरड़िया, संपतलाल रामपुरिया, सुभाष बोथरा, घेवरचंद नाहटा, मूलचंद सुराणा, देवचंद पींचा, जय पींचा, ललित पींचा, प्रकाश चन्द नाहटा आदि उपस्थित हुए।
एबीएन सोशल डेस्क। पर्वाधिराज पर्युषण श्री जैन श्वेतांबर साधु मार्गी संघ एवं तेरापंथ धर्म संघ का संयुक्त रूप से दिगंबर जैन भवन में चल रहा है।
श्वेतांबर जैन श्री साधु मार्गी संघ के आज अंतिम आठवें दिन के कार्यक्रम में स्वाध्यायी बंधु गौतम जी रांका और सुरेशजी बोरडिया ने सुबह अंत:गढ़ सूत्र का वांचन किया एवं प्रवचन में बताया कि भगवान महावीर ने कहा है- क्षमा वीरस्य भूषणं अर्थात क्षमा ही वीरों का भूषण है क्षमा हमारे जीवन में आवश्यक है, संसार में रहते हुए कई तरह की भूलें हो जाना स्वाभाविक है ऐसी भूलों से एक दूसरे के प्रति ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती है कि जिनसे परस्पर मतभेद और द्वेष की भावना आ जाती है। ऐसे द्वेष को दूर करने के लिए सबसे सरल उपाय है क्षमा।
क्षमा मनुष्य का एक सर्वश्रेष्ठ गुण है क्षमा से हम दुश्मन को भी मित्र बना सकते हैं और दुश्मनी को सदा सदा के लिए नष्ट कर सकते हैं। संवत्सरी का पर्व क्षमा के रूप में ही जाना जाता है। यही एक मात्र ऐसा पर्व है जो हमें त्याग, क्षमा, मैत्री का भाव सिखाकर आत्म कल्याण के लिए अग्रसर करता है। क्षमा वर्तमान में जीना सिखाती है, क्षमा पारिवारिक पृष्ठभूमि होती है, क्षमा शैतान को सन्त बनाने में सक्षम होती है क्षमा हर परिस्थिति में समभाव रखने की प्रेरणा देती है। शास्त्रों में कहा गया है, खामेमि सव्व जीवा, सव्व जीवा खमन्तु में।
मिति में सव्वे भुएसु, वेरं मज्ज्झम न केणइ। अर्थात क्षमा दान देता हूं मैं सबकों सभी जीव मुझे क्षमा प्रदान करें, समस्त जगत के लोकों में किसी से मेरा बैर न रहे। प्रवचन के बाद छोटे छोटे बच्चों के द्वारा आने वाले समय में समाज मे धर्म, ज्ञान, संस्कार की विलुप्ति एवं वर्तमान में सुधार करने के बारे में नाट्य मंचन किया। तेरापंथ महिला मंडल एवं समता मंडल द्वारा संयुक्त रुप से भगवान महावीर के समय की प्रथमसती चंदनबाला जी के जीवनी के ऊपर नाट्य मंचन किये गये।
शाम में 5 बजे आलोयणा एवं 6 बजे से श्रावक एवं श्राविकाओं ने सामुहिक सांवत्सरिक प्रतिक्रमण किया प्रतिक्रमण के बाद स्वाध्यायी बन्धुओं एवं समाज के लोगों ने आपस मे एक दूसरे से क्षमा याचना की। आज छोटे लाल जी चोरड़िया, विशाल दस्सानी एवं धर्मेंद्र बोहरा के आज 8 उपवास, दिशा बैंगानी, परी बैंगानी, अमन सेठिया, भव्य सुराणा के आज 3 उपवास है, 50 बयासना संगीता लोढ़ा एवं आज सभी छोटे बड़े श्रावक श्राविकाओं का उपवास था।
कल सुबह 9 बजे से क्षमापना कार्यक्रम, स्वाध्यायी विदाई समारोह, तपस्वियों का बहुमान किया जायेगा एवं दोपहर 1:30 बजे से कन्या पाठशाला डोरंडा में स्वाध्यायी जी का प्रवचन है। दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में कल के क्षमा याचना कार्यक्रम में आप सभी पत्रकार बंधुओं को सादर आमंत्रित किया जाता है, आप सभी से निवेदन है कि समय निकाल कर अवश्य कार्यक्रम में शामिल होवें। मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में कल की क्षमा याचना कार्यक्रम में लोगों को आमंत्रित किया है।
टीम एबीएन, रांची। श्री जीण माता प्रचार समिति रांची अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल नेतृत्व अपने 31 सदस्यों के साथ दिनांक 08.09.2024 को जीण धाम की यात्रा के लिए प्रस्थान किया। यात्रा में सदस्यों द्वारा माता के जीण धाम स्थित मंदिर राजस्थान में निशान चढ़ाया जायेगा एवं माता का मंगल पाठ होगा।
यात्रा में अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल, नारायण विजयवर्गीय, बजरंग सोमानी, प्रदीप शर्मा, शशिकला, निधि, सविता, बिनोद, सरिता, संदीप, सुनीता, घनश्याम, मीनू, रौनक, मोहित, एकता, शीतल, ज्योति, सुनीता, संगीता, कुसुम, श्रवण, शकुंतला, श्यामसुंदर, संतोष देवी, लक्ष्मी, ऋतु, राशि, मीनू, सिद्धांत, गौरव शामिल हैं।
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