एबीएन सोशल डेस्क। नीति आयोग और एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) ने देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तीकरण और अगले एक साल में देश के 104 प्रखंडों के 15,000 गांवों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने के लिए हाथ मिलाया है। इस आशय के मंतव्य पत्र (एसओआई) पर नई दिल्ली में दस्तखत किये गये।
इसके तहत अगले दो सालों में 73 जिलों के आकांक्षी प्रखंडों के इन गांवों के आर्थिक रूप से बेहद कमजोर उन परिवारों के बच्चे जो शोषण, उत्पीड़न, बाल मजदूरी या बाल विवाह दृष्टि से संवेदनशील हैं, के लिए सुरक्षित बाल ग्राम के रूप में एक सुरक्षा घेरा विकसित किया जायेगा। यह पहल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गये आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) के साथ एकरूपता और तालमेल में है, जिसका लक्ष्य देश भर के 112 सबसे अविकसित जिलों में रूपांतरकारी बदलाव लाना है।
दो-वर्षीय एसओआई के तहत देश के सबसे अविकसित व संवेदनशील इलाकों में बच्चियों के सशक्तीकरण और शिक्षा की पारिस्थितिकी को मजबूत करने के लिए एक समग्र और व्यापक रणनीति पर अमल किया जायेगा। बाल विवाह और बच्चों की ट्रैफिकिंग की निगरानी और रोकथाम के लिए सभी लक्षित गांवों में पंचायत स्तर पर लोगों की आवाजाही और विवाहों के ब्योरे दर्ज करने के लिए रजिस्टर रखे जायेंगे।
स्कूल नहीं जा पाने वाले बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों से जोड़ा जायेगा, जबकि हाशिये के व्यक्तियों और परिवारों को सरकारी जनकल्याण योजनाओं से जोड़ा जायेगा। एवीए बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए देश के 26 राज्यों के 416 जिलों में काम कर रहे 200 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) का सहयोगी है जिसने समुदायों को शोषण और बाल विवाह से मुक्ति दिलाने के लिए एक समग्र रणनीतिक ढांचा विकसित किया है।
एवीए इस रणनीतिक ढांचे पर अमल करते हुए सुरक्षित बाल ग्रामों की स्थापना करेगा। इस अवसर पर एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा कि आज समाज के सबसे कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हम गर्व और कृतज्ञता महसूस कर रहे हैं। साझा प्रयासों से हमारा लक्ष्य 2025 के अंत तक इन प्रखंडों को बाल विवाह मुक्त बनाना और दूसरों के लिए एक मिसाल कायम करना है।
यह साझेदारी प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान के अधिकार की रक्षा करने और बाल विवाह जैसे अपराधों के खात्मे की हमारी साझा प्रतिबद्धता का सबूत है। सरकारी निकायों, समुदायों और नागरिक समाज संगठनों राज्य, जिला और प्रखंड जैसे हर स्तरों पर एकजुट होकर काम करने और साझा प्रयासों से सही मायनों में बच्चों की सुरक्षा का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
नीति आयोग जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ सहयोग करेगा, जबकि एवीए संवेदनशील परिवारों की पहचान करने, समय पर हस्तक्षेप के लिए जिला प्रशासन, राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ सहयोग से वास्तविक समय में कठिनाई का सामना कर रहे प्रत्येक बच्चे और परिवार को राहत की दिशा में प्रगति पर नजर रखने के लिए मजबूत डेटाबेस तैयार करेगा।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन चयनित जिलों/ब्लॉकों में बाल मजदूरी, बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह सहित बच्चों की शिक्षा और संरक्षण से जुड़े प्रमुख संकेतकों पर जिला प्रशासन के साथ मिलकर करीबी सहयोग से काम करेगा। इस पहल में एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के सहयोगी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की भी भागीदारी होगी जिसकी साइबर जगत में बच्चों के आनलाइन यौन शोषण और ट्रैफिकिंग की निगरानी व रोकथाम में विशेषज्ञता है। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन शोध, प्रशिक्षण व निगरानी जैसे रणनीतिक हस्तक्षेपों के जरिए इस परियोजना में मदद करेगा।
टीम एबीएन, रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में संचालित दिव्य ज्योति कलश रथ-दर्शन, नमन-वंदन व अभिनंदन की भ्रमण यात्रा रांची जिला के 18 प्रखंडों, कई पंचायत व ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी हुई। सभी स्थलों में शानदार,जोरदार व भव्यरूप से स्वागत अभिनंदन श्रद्धावान, निष्ठावान साधक-शिष्यों एवं ग्रामीण क्षेत्र में श्रद्धालु भक्त जनों ने बड़े उल्लास, उत्साहपूर्वक और कई स्थलों में बैंड बाजे सहित धूमधाम से किया।
सुबह से दोपहर तक दर्शन व पूजन-अर्चन, महाकाल का संदेश और संध्याकाल में गायत्री महा दीपयज्ञ विधान से कार्यक्रम आयोजन हुए। इस बीच सभी प्रखंड समन्वय समिति के सदस्यगण एवं गांव के जनमन, गणमान्य जनों, प्रतिनिधि गणों ने श्रद्धा-सम्मान व सहयोग समर्थन किये।
दीप यज्ञ कार्यक्रम बीच टीम नायक व साधकों ने शान्तिकुञ्ज के संदेश व प्रज्ञागीत सुनाए और गुरुवर श्री आचार्य वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन की शताब्दी एवं श्रीगुरुमाता परम पूज्या भगवती देवी की जन्म शताब्दी वर्ष तथा विचार क्रांति अभियान के अनेक संकल्प सूत्रों और आयोजन संदर्भित उज्जवल भविष्य की योजनाओं पर चर्चाएं की।
जय नारायण प्रसाद ने बताया शान्तिकुञ्ज का संदेश सहित बताया कि जन जागरण के लिए, सभ्य मानव जीवन एवं उत्कर्ष के लिए जागिए, जगाइए और जुड़िए जोड़िए का अभियान हरिद्वार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज से चल पड़ा है। इन दिनों सबसे बड़ा और सबसे आवश्यक कार्य विचार क्रांति अभियान का विस्तार व व्यापक आयोजन करना है।
अवांछनीयता के विपरीत और मानवीय गरिमा के अनुरूप मयार्दाओं का पालन, वर्जनाओं का अनुशासन व अनुपालन आवश्यक है। नवयुग के अवतरण का और सतयुग की वापसी का यही एक मात्र उपाय है। संसार के समस्त भू-भाग व क्षेत्रीय इकाई में लागू होना चाहिए। इस माध्यम से हर एक को लाभान्वित होने का प्रयास करना है।
आज इसी धर्म धारणा को महाकाल श्रीप्रज्ञावतार ने प्राणवान और ऊर्जावान, भावनाशील, निष्ठावान समयदानी आध्यात्मिक जन-समूह और प्रतिभावानों को पुकारा है, आमंत्रण दिया है। रांची गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू से 42 दिन गायत्री परिवार की ज्योति कलश रथ-दर्शन भ्रमण यात्रा रांची शहर व ग्रामीण क्षेत्रों से सफल सुफल और मंगलमय यात्रा से लौटकर आज उपजोन समन्वयक महोदय डी एस पंडितजी के सानिध्य व नेतृत्व में दिव्य ज्योति-कलश रथ का पूजन-अर्चन कर खूंटी जिला के लिए रवाना की गयी। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद और डी एस पंडित ने दी।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महाकुंभ भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक मेलों में से एक है, जो हर बार 12 वर्ष में एक विशेष स्थान पर आयोजित होता है। यह मेला हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें लाखों लोग धार्मिक स्नान के लिए एकत्रित होते हैं।
महाकुंभ का आयोजन उन चार प्रमुख स्थानों पर होता है—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक—जिन्हें कुंभ स्थल के रूप में जाना जाता है। इन स्थानों का चयन भारतीय धार्मिक मान्यताओं और पुरानी कथाओं पर आधारित है। महाकुंभ का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता अत्यधिक है।
किवदंती है कि देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन से अमृत कुंभ की प्राप्ति हुई थी और इस अमृत कलश को लेकर देवता और राक्षसों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान अमृत से भरे कुंभ कलश को लेकर चार स्थानों पर बूंदें गिर पायी- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन्हीं स्थानों पर हर बार 12 वर्ष के अंतराल में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है।
महाकुंभ का आयोजन एक अद्भुत धार्मिक उत्सव है, जहां लाखों श्रद्धालु पुण्य की प्राप्ति के लिए गंगा, यमुना, सरस्वती, या अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। इसे एक पुण्य अवसर माना जाता है, जहां एक जीवन में एक बार भाग लेना अनिवार्य माना जाता है। कुंभ स्नान से यह विश्वास होता है कि व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महाकुंभ में धार्मिक अनुष्ठान, साधु-संतों की भव्य उपस्थिति, अखाड़ों के शाही स्नान और भव्य श्रद्धा आयोजन होते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। महाकुंभ के समय पूरे देश से लोग एकत्रित होते हैं, और यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक माना जाता है।
महाकुंभ की विशेषता यह है कि यह केवल धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, और एकता का अद्भुत प्रतीक भी है। यह पर्व हमें जीवन के उच्चतम आदर्शों की ओर प्रेरित करता है और समाज मे सामाजिक और सांस्कृतिक सौहार्द की भावना को प्रगाढ़ करता है। इस साल के प्रयागराज पूर्ण महाकुंभ का विशेष महत्व है क्योंकि यह 144 वर्षों के बाद हो रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुबह के करीब छह बजे थे। अमृत स्नान के लिए सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़े के संत संगम नोज के लिए निकल चुके थे। यह वह वक्त था, जब 80 लाख के करीब श्रद्धालु मेले में प्रवेश कर चुके थे और संगम अपर मार्ग होते हुए तेजी से संगम की ओर बढ़ रहे थे। हालात यह हुए कि संगम नोज टवर नंबर एक से 100 मीटर पहले ही अखाड़ा मार्ग पर बैरिकेडिंग तोड़कर श्रद्धालु अखाड़ा मार्ग पर आ गये।
यह देख अफसरों के हाथ-पांव फूल गये। बाद में आईटीबीपी के जवानों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर सुरक्षा घेरा बनाया और फिर सभी ने राहत की सांस ली। मकर संक्रांति पर भीड़ उमड़ेगी, लेकिन तड़के ही श्रद्धालुओं की संख्या 80 लाख को पार कर जायेगी। इसका अंदाजा किसी ने नहीं लगाया था। यही वजह रही कि अखाड़ों के साधु-संतों के अमृत स्नान के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किए गए सारे इंतजाम धरे रह गये।
संगम पर उमड़े आस्थावानों के ज्वार के आगे अखाड़ों के अमृत स्नान के लिए निर्धारित मार्ग की बैरिकेडिंग टिक नहीं सकी। टावर नंबर वन के पास स्थित मोड़ से लेकर संगम नोज तक कम से कम 10 जगहों से बैरिकेडिंग तोड़कर श्रद्धालुओं की भीड़ आगे बढ़ गयी। श्रद्धालु अखाड़ा मार्ग से आगे तो बढ़े ही, संगम नोज के बायें साइड में घाट पर पहुंचकर स्नान किया।
साथ ही अखाड़ों के साधु-संतों के पांव भी छुए। संतों ने भी उन्हें निराश नहीं किया। आमतौर पर संगम स्नान के लिए जाते वक्त थोड़े भी व्यवधान से नाराज होने वाले साधु-संत मंगलवार को अलग ही रूप में नजर आये। न सिर्फ स्नान के बाद, बल्कि संगम स्नान के लिए जाते वक्त भी कई नागा साधुओं ने रास्ते में रुककर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
एबीएन सोशल डेस्क। बाल अधिकारों के सवाल को देश की मुख्य धारा की मीडिया में जोरदारी से स्थापित करने वाली मीडिया और संचार एजेंसी इंडिया फॉर चिल्ड्रेन को प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा में भारतीय युवा संसद के अवसर पर केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव ने इंडिया फॉर चिल्ड्रेन को शांति श्रेणी के तहत यह पुरस्कार प्रदान किया।
ये पुरस्कार शांति, पर्यावरण और सेवा श्रेणियों में दिए जाते हैं जिनका चयन विशेषज्ञों की समिति करती है। एमिटी यूनिवर्सिटी के सहयोग से सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एसआरआरओ) ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।
सामाजिक बदलाव और बच्चों के मुद्दों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पुरस्कार विजेताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने स्वामी विवेकानंद को उद्घृत करते हुए कहा उठो! जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। उन्होंने कहा, स्वामीजी के ये शब्द आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि ये युवाओं में आत्मनिर्भरता, अनुशासन और सामूहिक विकास की भावना जगाते हैं, जो हमारे देश का भविष्य हैं।
बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली देश की एकमात्र मीडिया एजेंसी इंडिया फॉर चिल्ड्रेन के निदेशक अनिल पांडेय ने पुरस्कार के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, यह सम्मान संगठन के प्रयासों व इसकी विश्वसनीयता की पुष्टि करने के साथ ही देश के हरेक बच्चे के अधिकारों की रक्षा के लिए हमारे प्रयासों को जारी रखने की हमारी ज़िम्मेदारी को और भी बढ़ा देता है। बाल अधिकारों के मुद्दों को मुख्यधारा के मीडिया में सबसे आगे लाने का हमारा मिशन अब तक सफलता भरा रहा है। हमने एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित किया है जहां डिजिटल, प्रिंट और सोशल मीडिया मंचों पर बाल संरक्षण एक प्राथमिकता बन गया है।
उन्होंने कहा, हमारे प्रयासों के ठोस परिणाम सामने आए हैं। आज मीडिया की धारणा में उल्लेखनीय बदलाव आया है जिससे भारत में बच्चों के मुद्दों के अब ज्यादा स्थान मिलने लगा है। हमें विश्वास है कि हमारे प्रयासों से बच्चों के खिलाफ अपराध - विशेष रूप से बाल विवाह, बाल यौन शोषण, बाल मजदूरी और बच्चों की ट्रैफिकिंग की रोकथाम के प्रयासों में मदद मिलेगी।
साल 2017 में स्थापित इंडिया फॉर चिल्ड्रेन, देश भर में 250 से अधिक गैरसरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ साझेदारी में बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। इंडिया फॉर चिल्ड्रेन प्रिंट, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया मंचों पर बच्चों के मुद्दों को उजागर करने के अलावा मीडिया मीट और मीडिया कार्यशालाओं का आयोजन करने के साथ ही बाल विवाह, बच्चों की ट्रैफिकिंग, यौन शोषण और बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता के प्रसार के लिए फिल्में और वीडियो भी बनाता है। अकेले 2024 में, इंडिया फॉर चिल्ड्रेन ने इन मुद्दों पर 10,000 से अधिक मीडिया कवरेज हासिल की है जिनमें से बहुत सी खबरें अखबारों के फ्रंट पेज और टीवी चैनलों के प्राइम टाइम पर थी। ऑनलाइन पहुंच लाखों लोगों तक रही।
सम्मान समारोह में एमिटी लॉ स्कूल के अध्यक्ष डॉ डी के बंद्योपाध्याय, एडिशनल डायरेक्टर डॉ शेफाली रायजादा, समाज सुधारक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विशालानंद, सामाजिक बदलाव के वाहक आध्यात्मिक गुरु प्रदीप भैयाजी और आयोजन समिति के संयोजक प्रमोद कुमार और प्रसिद्ध टीवी पत्रकार दिनेश गौतम भी उपस्थित थे। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
टीम एबीएन, रांची। रविवार को श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची ने बेड़ो ब्लॉक के खत्री खटंगा गांव में नि:शुल्क चिकित्सा एवं दवा वितरण शिविर लगाया, जिसमें 350 रोगियों को नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श के साथ दवा वितरण किया गया। शिविर का शुभारंभ विधिवत आरती-पूजन के साथ किया गया। इसके बाद शिविर की शुरुआत की गयी, जिसमें एलोपैथिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सीय सुविधा प्रदान की गयी।
शिविर में ब्लड शुगर जांच की भी व्यवस्था की गयी थी। साथ ही जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल वितरण भी किया गया। शिविर में डॉ एसएन सिन्हा, डॉ रंजन नारायण, डॉ रोहित सिंह, डॉ शंकर रंजन, डॉ उत्पल, डॉ शांभवी, डॉ कृष्णा मुरारी सिंह, डॉ राजीव रंजन ने सेवा प्रदान किया। शिविर के सफल आयोजन में खत्री खटंगा, करांजी से कुणाल टंडन, विशाल टंडन एवं रघु खन्ना ने विशेष सहयोग प्रदान किया।
श्री सर्वेश्वरी समूह- शाखा रांची की ओर से राधेश्याम सिंह, आनंद सिंह, आशुतोष कुमार, हेमंत नाथ शाहदेव, रमेश पांडेय, अनिरुद्ध नाथ शाहदेव, गंगाधर नाथ शाहदेव, शुभम कुमार, जय शंकर सिंह, दक्ष कुमार, पवन कुमार, सौरभ राज, गिरेन्द्र नाथ शाहदेव, प्रताप आदित्य नाथ शाहदेव, रविन्द्र उरांव, निर्भय कुमार पाल, रुद्रदीप नाथ शाहदेव, अमन साहु, अनिकेत नाथ शाहदेव, आदि नाथ शाहदेव, नीतीश सिंह, अनामी नाथ शाहदेव, अनिमेष नाथ शाहदेव से लगभग 25 सदस्यगण शामिल हुए।
एबीएन सोशल डेस्क। महाकुंभ मेला 2025 कल, 13 जनवरी से प्रयागराज में शुरू हो रहा है। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे विशेष महत्व दिया जाता है। कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है और यह भारत के चार प्रमुख शहरों हरिद्वार, नासिक, प्रयागराज और उज्जैन में मनाया जाता है। माना जाता है कि इन पवित्र स्थानों के संगम में स्नान और पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
कुंभ मेला समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच 12 वर्षों तक युद्ध चला था। इस युद्ध के दौरान अमृत की कुछ बूंदें कुछ स्थानों पर गिरीं और वहीं पर कुंभ मेला आयोजित किया जाता है।
कुंभ मेला को हर बार 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है, और इसे महाकुंभ के नाम से जाना जाता है। महाकुंभ में स्नान करने को शाही स्नान कहा जाता है।
महाकुंभ 2025 खास माना जा रहा है क्योंकि 144 साल बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जो समुद्र मंथन के दौरान बनें विशेष ग्रहों की स्थिति से मेल खाता है। इस दिन सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति ग्रहों की शुभ स्थिति बन रही है, जो समुद्र मंथन के दौरान भी बनी थी।
इसके साथ ही, महाकुंभ में रवि योग का भी निर्माण होगा, जो 13 जनवरी को सुबह 7:15 बजे से शुरू होकर 10:38 बजे तक रहेगा। इस दिन भद्रावास योग भी बनेगा, जो भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास माना जाता है।
महाकुंभ का पहला शाही स्नान कल, 13 जनवरी को पूर्णिमा के शुभ अवसर पर होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, 13 जनवरी को सुबह 5:03 बजे पूर्णिमा तिथि की शुरूआत होगी, जो 14 जनवरी को रात 3:56 बजे समाप्त होगी।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट व विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मकर संक्रांति हर वर्ष 14 जनवरी को मनायी जाती है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है, जो एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है।
मकर संक्रांति भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य सूर्य देव की पूजा और सकारात्मकता का आह्वान करना है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान सूर्य बारह राशियों के भ्रमण के दौरान जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार को सकरांत, लोहड़ी, टहरी, पोंगल आदि नामों से जानते हैं।
इस दिन स्नान व दान का भी विशेष महत्व माना गया है। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करते ही सूर्यदेव उतरायण हो जाते हैं और देवताओं के दिन और दैत्यों के लिए रात शुरू होती है। खरमास खत्म होने के साथ ही माघ माह भी शुरू हो जाता है। इसी के साथ मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। सूर्य देव को मकर संक्रांति के दिन अर्घ्य के दौरान जल, लाल पुष्प, फूल, वस्त्र, गेंहू, अक्षत, सुपारी आदि अर्पित की जाती है।
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का विशेष महत्व होता है। इस पावन दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व ही शुद्ध जल से स्नान करें। स्नान के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप, सूर्य की आराधना और अपने इष्ट और गुरु मंत्र का जाप करें। कहा जाता है कि इस दिन जो भी मंत्र जाप, यज्ञ और दान किया जाता है। उसका शुभ प्रभाव 10 गुना होता है।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक विशेष खगोलीय घटना है, जिसके बाद दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। इसे उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि सूर्य उत्तर की ओर यात्रा करता है। यह समय दिन में अधिक रोशनी और ऊर्जा का प्रवेश होने का संकेत देता है, जिससे जीवन में उन्नति और सफलता का संचार होता है। इसी कारण, मकर संक्रांति का पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मकर संक्रांति को कृषि से भी गहरा संबंध है। यह समय फसलों की कटाई और नूतन फसलों की शुरूआत का होता है। किसानों के लिए यह समय खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है, क्योंकि वे अपनी मेहनत का फल प्राप्त करते हैं। इस दिन लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं, तिल और गुड़ का सेवन करते हैं,और एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजते हैं।भारत के विभिन्न हिस्सों में मकर संक्रांति अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है।
उत्तर भारत में इसे पतंगबाजी के रूप में मनाया जाता है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में इसे उत्तरायण के रूप में मनाते हैं। पंजाब में इस दिन को लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है,दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है, जो फसल की कटाई का प्रतीक है और वहां विशेष भोज बनते हैं।मकर संक्रांति का महत्व केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। इस दिन लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं और सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं।
यह पर्व जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि की कामना करता है, जिससे हर व्यक्ति का जीवन और समाज प्रगति की ओर अग्रसर होता है।मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर, कृषि, और समाजिक एकता का प्रतीक है, जो हमें जीवन में खुशियां और ऊर्जा देने का काम करता है।
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