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Published / 2026-02-20 20:59:32
धर्मांतरण के कारण आदिवासियों के आरक्षण पर ईसाइयों का कब्जा : मिलिंड परांडे

एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि जिस आदिवासी ने अपनी परंपरा और पूजा पद्धति छोड़ दी, इसाई ही जनजातियों के आरक्षण का 80 प्रतिशत हिस्सा हड़प रहे हैं और सही आदिवासियों का हक मार रहे हैं। परांडे शुक्रवार को सर्व सनातन समाज द्वारा आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।  

उन्होंने कहा कि हिन्दू ही हिंदू की आबादी  घटा रहा है, जबकि मुसलमानों  और ईसाइयों की आबादी लगातार बढ़ रही है। परांडे ने कहा कि विश्व में 50 से अधिक इस्लामिक और 120 ईसाई देश हैं, जबकि भारत और नेपाल ही ऐसे देश हैं जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं। ऐसे में हिंदू समाज को अपने अस्तित्व, परंपराओं और पहचान को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा। 

मिलिंद परांडे ने कहा कि हिंदू समाज विश्व का सबसे प्राचीन समाज है, जो हजारों-लाखों वर्षों से अस्तित्व में रहा है। उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास, राम मंदिर आंदोलन और झारखंड के लगभग दो हजार गांवों से सरनास्थलों की मिट्टी के राम मंदिर निर्माण में उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन परंपराओं की जीवंत मिसाल है। 

उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक हिंदू को अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में जनजातीय शब्द और एसटी आरक्षण का प्रावधान जनजातीय समाज की परंपरा, पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया गया था। आरोप लगाया गया कि 1947 के बाद आरक्षण का बड़ा हिस्सा ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोगों ने लिया, जबकि परंपरागत आदिवासी इससे वंचित रह गये। 

इस संदर्भ में कार्तिक उरांव द्वारा इसाई धर्म अपनाने वालों को आरक्षण से वंचित करने हेतु लाये गये विधेयक की चर्चा की गई, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया। विहिप के केंदीय संगठन महामंत्री ने कहा कि आज बड़ा संकट यह है कि हिंदू समाज द्वारा दिये गये अधिकारों का दुरुपयोग कर हिंदू परंपराओं का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को अपनी परंपरा की रक्षा का अधिकार है और इस विषय पर गंभीर विमर्श आवश्यक है। 

सम्मेलन में बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा गया कि किस प्रकार जबरन धर्मांतरण और दमन के खिलाफ आंदोलन करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनकी मृत्यु जेल में हुई। वक्ताओं ने चेताया कि आज भी गांवों में धर्मांतरण के प्रयास हो रहे हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।

अंत में वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज को आपस में लड़ाने की साजिशों से सतर्क रहना होगा और एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा करनी होगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि हिन्दू समाज केवल एक-दो वर्षों के नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के आक्रमणों का शिकार रहा है। 

आस्था के केंद्र रहे मंदिरों को तोड़ा गया, जिससे समाज का आत्मबल कमजोर हुआ। इस दीर्घ आक्रमण काल में हिन्दू समाज का विघटन हुआ, जिसके लिए कहीं न कहीं समाज स्वयं भी जिम्मेदार रहा, क्योंकि हम अपनी व्यक्तिगत चिंताओं में उलझते चले गए। समाज को संगठित करने के उद्देश्य से विजया दशमी के दिन वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। 

संघ का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना और देश व समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करना रहा है। वर्ष 2025-26 में संघ ने अपने 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं, जो हिन्दू संगठन और समाज के लिए गर्व का विषय है। प्रांत प्रचारक ने कहा कि हिन्दू इस देश के मूल आदिवासी हैं। उन्होंने कहा कि जो हमारे संविधान, मातृभूमि, परम्परा के विरुद्ध बात करेगा उन्हें पहचानना चाहिए। 

गोपाल शर्मा ने कहा कि अपनी बहू बेटियों, परम्परा की रक्षा का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि बाहरी आक्रमणकारियों ने जातियों में विभाजन पैदा किया, जिससे देश गुलाम हुआ। यदि सभी जातियों के लोग मिलकर कार्य करें, तो देश को फिर से सशक्त बनाया जा सकता है। आज भी हिन्दू समाज को तोड़ने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन संगठन और एकता से हर चुनौती का सामना करना संभव है। 

कार्यक्रम को वनवासी कल्याण केंद्र के मुसाफिर विश्वकर्मा, विहिप के जिलाध्यक्ष विनोद जायसवाल, विकास मिश्रा, सुभाष मिश्रा, संतोष जायसवाल, निखिल कंडुलना, दीपक तिग्गा, नीरज पाढ़ी, मनोज चौधरी, राजन चौधरी, नीरज जायसवाल, पूनम भेंगरा, केशव कुमार सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

Published / 2026-02-19 16:27:10
रांची की साहित्यकार निर्मला करण को विद्या वाचस्पति एवं ऋषि पिंगल पुरस्कार

  • रांची की साहित्यकार निर्मला करण विद्या वाचस्पति एवं ऋषि पिंगल पुरस्कार से सम्मानित

टीम एबीएन, रांची। रांची की लेखिका सह साहित्यकार निर्मला कर्ण को विक्रमशिला विश्वविद्यालय से विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि प्रदान की गयी। कार्यक्रम बिहार के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गया में आयोजित किया गया। जहाँ राज्य के बाहर के अनेक विद्वान व साहित्यकार मौजूद थे।

विद्या वाचस्पति (पी.एच.डी) मानंद उपाधि/ सम्मान, अनेक काव्य मनीषियों एवं साधकों की उपस्थिति में विक्रमशिला विद्यापीठ के प्रस्तावक आचार्य डॉ विजय गुंजन एवं डॉ ओम प्रकाश वर्मा (उपनिदेशक राजभाषा), अंशुमान झा, (सहायक निदेशक, प्रसार भारती), प्रो डॉ सुधा सिन्हा, अध्यक्ष दर्शन शास्त्र, डॉ राशदादा राश के द्वारा सम्मिलित रूप से प्रदान किया गया। 

इस कार्यक्रम में निर्मला कर्ण को प्रमाण-पत्र के साथ अंग वस्त्र और मोमेंटो प्रदान किया गया। छंद:शाला विद्यापीठ के द्वारा निर्मला करण को पुनः छंद लेखन के क्षेत्र में कार्य करने के लिए ऋषि पिंगल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार के रूप में अंगवस्त्र प्रमाण पत्र और मोमेंटो के साथ ग्यारह सौ रूपये नगद राशि दी गयी।

यह पुरस्कार ओम प्रकाश वर्मा, उपनिदेशक राजभाषा, अंशुमान झा, सहायक निदेशक, प्रसार भारती, आचार्य डॉ विजय गुंजन, प्रो डॉ सुधा सिन्हा, अध्यक्ष दर्शन शास्त्र, डॉ राम सिंहासन सिंह, डॉ राशदादा राश, डॉ धनंजय शरण सिंह, अनिल कुमार झा, डॉ संजय पंकज, श्याम बिहारी प्रभाकर, डॉ राजीव रंजन द्वारा प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य एवं देश के अनेक गणमान्य विद्वान छंद रचनाकार की असंख्य उपस्थिति रही।

Published / 2026-02-19 15:44:06
छत्रपति शिवाजी जयंती वीरता, स्वाभिमान और सुशासन का प्रेरक पर्व : संजय सर्राफ

  • छत्रपति शिवाजी जयंती वीरता, स्वाभिमान और सुशासन का प्रेरक पर्व : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान योद्धा एवं आदर्श शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती प्रत्येक वर्ष 19 फरवरी को मनाई जाती है। इसी दिन सन् 1630 में उनका जन्म महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।

कुछ स्थानों पर तिथि के अनुसार भी जयंती मनाई जाती है, किंतु प्रचलित रूप से 19 फरवरी को ही यह दिवस पूरे देश, विशेषकर महाराष्ट्र में, बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक दूरदर्शी, न्यायप्रिय तथा धर्मनिरपेक्ष शासक थे। उन्होंने उस समय विदेशी औरअत्याचारी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का संकल्प लिया।

सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी अद्वितीय सैन्य रणनीति, विशेषकर गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध पद्धति) के माध्यम से उन्होंने शक्तिशाली शत्रुओं को परास्त किया। उनका राज्याभिषेक सन् 1674 में रायगढ़ किले में हुआ, जिसके बाद वे औपचारिक रूप से छत्रपति की उपाधि से अलंकृत हुए।शिवाजी जयंती केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, साहस, संगठन और सुशासन की प्रेरणा का पर्व है। 

उन्होंने प्रशासन में अनुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोपरि रखा। महिलाओं के सम्मान और धार्मिक स्थलों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय थी। वे सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना रखते थे और उनकी सेना में विभिन्न जाति एवं समुदायों के लोग सम्मिलित थे। इससे उनके उदार और समावेशी दृष्टिकोण का परिचय मिलता है।

इस दिन विभिन्न स्थानों पर शोभायात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, व्याख्यान, पुष्पांजलि एवं देशभक्ति गीतों का आयोजन किया जाता है। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में उनके जीवन और आदर्शों पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया जाता है। छत्रपति शिवाजी जयंती का उद्देश्य नई पीढ़ी में आत्मसम्मान, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत करना है।

आज के समय में जब नैतिक मूल्यों और आदर्श नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है, तब शिवाजी महाराज का जीवन हमें साहस, रणनीति, न्याय और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख देता है।निस्संदेह, छत्रपति शिवाजी जयंती भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय का स्मरण है, जो हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करने और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करता है।

Published / 2026-02-18 21:00:05
आश्रम में दिव्यांग, मंदबुद्धि निराश्रितों की सेवा एवं कराया गया भोजन

सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग एवं प्रोत्साहन मिलना चाहिए : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य मे श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के द्वारा संचालित विगत 2 वर्षों से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज पायल जैन एवं उनके परिवार के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 45 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया। 

सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 1 फरवरी से 18 फरवरी तक 18 दिनों मे 3880 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। 

मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में- रेणु गोयल, शिल्पी देवी, सुभाष सिंघानिया, मदनलाल मुरारका, अनिष्क नारायण, विशाल मित्तल, मनोज कुमार यादव, आनंद मोदी, पुरुषोत्तम मोदी, अर्जुन प्रसाद वर्मा, अभिषेक नारायण, दीपिका कुमारी, आलोक सहाय, अमन कुमार, पूजा सिंह, रूपेश देवघरिया के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गई। 

सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे  निराश्रितो, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के समान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं है।अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल,सुरेश अग्रवाल,नन्द किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश भगत सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

Published / 2026-02-17 22:02:48
स्वामी रामकृष्ण परमहंस के आदर्श प्रेरणास्रोत : संजय सर्राफ

स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती हमें आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवता के मार्ग पर चलने की देती है प्रेरणा : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती हिन्दू पंचांग के अनुसार यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आती है। इस दिन महान संत, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक रामकृष्ण परमहंस के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी जयंती मनाई जाती है। 

देशभर के आश्रमों, विशेषकर रामकृष्ण मठ एवं मिशन द्वारा संचालित संस्थानों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, प्रवचन और सेवा कार्यों का आयोजन किया जाता है।रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को पश्चिम बंगाल के कामारपुकुर ग्राम में हुआ था। उनका बाल्यकाल का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। बचपन से ही वे अत्यंत सरल, करुणामय और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। 

बाद में वे दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी बने, जहाँ उन्होंने माँ काली की उपासना में गहन साधना की और अद्वैत, भक्ति तथा विभिन्न धर्मों के मार्गों का अनुभव किया। उनका मानना था कि सभी धर्म एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा था-जितने मत, उतने पथ, परंतु लक्ष्य एक ही है।स्वामी रामकृष्ण का जीवन सादगी, प्रेम और ईश्वर-भक्ति का अनुपम उदाहरण है।

उन्होंने समाज को जाति-पांति, संकीर्णता और अंधविश्वास से ऊपर उठकर मानव सेवा का संदेश दिया। उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने उनके विचारों को विश्वभर में प्रचारित किया और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया, रामकृष्ण परमहंस के विचार आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। वे कहते थे-ईश्वर की प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग निष्कपट प्रेम और सेवा है।

उनका संदेश था कि मानव की सेवा ही सच्ची ईश्वर-सेवा है। उन्होंने आत्मशुद्धि, सहिष्णुता और आध्यात्मिक एकता पर विशेष बल दिया।उनकी जयंती हमें आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। वर्तमान समय में जब समाज विभाजन और भौतिकवाद की ओर बढ़ रहा है, तब रामकृष्ण परमहंस के विचार प्रेम, सद्भाव और समरसता का प्रकाश स्तंभ बनकर मार्गदर्शन करते हैं। उनकी शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव सत्य, प्रेम और सेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देती रहेंगी।

Published / 2026-02-16 21:12:56
संत रामपाल जी के बोध दिवस के उपलक्ष्य में 21 जोड़ों का हुआ दहेज मुक्त विवाह

लाखों की तादाद में आए श्रद्धालु 

कमल सिंह लोधा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क (बेतूल)। सतलोक आश्रम उड़दन, बैतूल में संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में रविवार से शुरू हुए महाविशाल भंडारे समागम का आज दूसरा दिन था। तीन दिनों तक चलने वाले इस महाविशाल समागम में लाखों की तादाद में भक्तगण आकर भंडारा प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं समागम की शुरुआत अखंड पाठ की वाणी के साथ हुई। हर वर्ष संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में विशाल समागमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पूरे विश्व को भंडारे के लिए आमंत्रित किया जाता है। 

इस बार संत रामपाल जी महाराज जी के बोध दिवस के उपलक्ष्य में 15 से 17 फरवरी तक महाविशाल समागम मनाया जा रहा है, जिसमें 3 दिवसीय महाविशाल भंडारा व संत गरीबदास जी महाराज जी की अमृतमय वाणी का खुला पाठ आयोजित किया गया है। साथ ही अन्य कार्यक्रम जैसे रक्त दान शिविर, दहेज मुक्त विवाह का आयोजन 16 फरवरी को किया गया। 

इस बार संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में 21 जोड़ों का दहेज मुक्त विवाह संपन्न हुआ, जो महज 17 मिनट में ही गुरुवाणी के माध्यम से संपन्न हुआ। जिसमें किसी भी प्रकार का कोई बाहरी आडंबर देखने को नहीं मिला, वर व वधू ने साधारण कपड़े पहन रखे थे। किसी भी प्रकार का कोई श्रृंगार देखने को नहीं मिला। इस 3 दिवसीय समागम में आश्रम की ओर से प्रेरणादायी प्रदर्शनी भी लगायी गयी है। इस प्रदर्शनी का भी भक्तों ने बढ़ चढ़कर अवलोकन किया। 

इस प्रदर्शनी के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज जी के संघर्ष के स्थान संत और परमात्मा के मिलन के बारे में बताया गया कि किस प्रकार संत रामपाल जी महाराज को कबीर परमात्मा सतलोक से आकर मिले और उन्हें सशरीर सतलोक भेजकर स्वयं संत रामपाल जी महाराज के रूप में तत्वज्ञान लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मुहिम की शुरुआत कैसे हुई यह जानकारी भी कट आउट प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को जानने को मिली। सतलोक आश्रम बैतूल में लाखों की तादाद में श्रद्धालु भंडारा लेने के लिए पहुंच रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सतलोक आश्रम बैतूल में कई अन्य राज्यों से संगत आ रही है जिसके कारण भीड़ भाड़ में किसी को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए भी पूरी व्यवस्था की गयी है। सेवादारों ने बताया कि पूर्ण संत के सानिध्य में आदरणीय गरीबदास जी महाराज द्वारा लिखित अमर ग्रन्थ साहिब की वाणी का श्रवण करने से मन, चित्त व आत्मा के साथ वातावरण भी शुद्ध होता है और हमारे पापों का नाश होता है। 

वर्तमान में वो पूर्ण संत केवल जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही है जिनके सानिध्य में पुरे विश्व को खुला निमंत्रण देकर इस महाविशाल भंडारे का आयोजन हुआ है। समागम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चौबीसों घंटे शुद्ध देशी घी से निर्मित लड्डू, जलेबी, हलवा, सब्जी, पुड़ी, दाल, चावल का भंडारा चल रहा है साथ ही वापस घर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भंडारा प्रसाद के पैकेट भी वितरित किए जा रहे है। 

भंडारे में आने वाले श्रद्धालु प्रशंसा करते थक नहीं रहे कि ऐसा भंडारा जहाँ लाखों की तादाद में लोग आ रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो रही है, यह केवल सतलोक आश्रम में ही संभव है। और ये केवल पूर्ण परमात्मा ही करवा सकते है। शंका समाधान में अपने धर्मग्रंथों से प्रमाण देखकर इस अनमोल ज्ञान से परिचित होकर अभी तक 3221 पुण्यात्माओं ने संत रामपाल जी महाराज जी को अपना गुरु धारण कर नामदीक्षा ली है। 

संत रामपाल जी महाराज के आदेश से लगाए गए रक्तदान शिविर में बढ़-चढ़ अनुयायियों ने रक्त का दान किया, प्राप्त जानकारी अनुसार 218 यूनिट रक्त जिला चिकित्सालय बैतूल को दिया गया जिसे देखकर जिला चिकित्सालय बैतूल द्वारा एक बार पुन: संत रामपाल जी महाराज जी की संस्था को रक्तश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। देहदान शिविर में समागम के दूसरे दिन तक 2754 लोगों द्वारा देहदान के संकल्प फॉर्म भरें गए है जो चिकित्सा विभाग के लिए बच्चों की पढ़ाई में सहयोगी होंगे। कल इस महाविशाल समागम का भोग की वाणी के साथ समापन होगा

Published / 2026-02-15 20:55:46
श्रीश्री पंचदेव मंदिर परिसर, बेल टंगरा, बड़ागांई, रांची में 12 जोड़ियों का सामूहिक विवाह

12 जोड़े अपने दांपत्य जीवन में जन्म-जन्म तक रहने को हुए वचनवद्ध 

टीम एबीएन, रांची। श्री श्री पंचदेव मंदिर परिसर, बेल टंगरा, बड़ागांई, रांची में 12 जोड़ियों का सामूहिक विवाह कार्यक्रम  हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।  
पूर्वाह्न 10:30 बजे श्री श्री पंचदेव परिसर से सभी वरपक्षो के द्वारा बड़ागांई चौक तक बारात निकली। बारात पुन: श्री श्री पंचदेव मंदिर पहुंची, जहां सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। मध्याह्न 12:30 बजे वरमाला कार्यक्रम संपन्न हुआ। अपराह्न 2 शुभ विवाह एवं अपराह्न 5:30 बजे वर-कन्या एवं आये हुए अतिथियों को सुरुचि भोजन कराकर एवं वर-कन्या को उपहार देकर विदाई की गयी। 

कार्यक्रम के आयोजक समाजसेवी अशोक साहू ने कहा कि समाज में अनेक गरीब परिवार जो विवाह संस्कार करने में असमर्थ होते हैं, ऐसे जोड़ों का संपर्क उनके साथ बराबर होता रहता है। विगत 4 वर्षों में महाशिवरात्रि पूजन के पावन दिवस पर 51 वर-कन्याओं का विवाह कर चुके हैं। 

विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने आयोजक अशोक साहू को साधुवाद व वर- कन्याओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि महाशिवरात्रि के दिन दांपत्य जीवन में प्रवेश करना जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण होता है। समाज में अनेक गरीब एवं अभावग्रस्त परिवार जो विवाह नहीं कर सकते हैं उनका विवाह करना एक बहुत बड़ा सामाजिक दायित्व  है।

ऐसे कार्यों को समाज में जुड़े हुए समाजसेवी लोग पुण्य के कार्य के साथ दो परिवारों को जोड़ने का कार्य करते हैं, जिससे समाज समरस बनता है। कार्यक्रम में सैकड़ों गणमान्य उपस्थित थे। उक्त जानकारी डॉ बिरेन्द्र साहु (7033541040) ने दी।

Published / 2026-02-14 21:30:45
हिंदुत्व को कभी कोई मिटा नहीं सकता : विहिप

गोपीनाथपुर में विराट हिंदू सम्मेलन में हजारों सनातनियों ने लिया भाग 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पाकुड़। पाकुड़ जिले के गोपीनाथपुर गांव में हिंदू समन्वय समिति द्वारा आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने हिंदुत्व की अटूट शक्ति का उद्घोष किया। हिंदुत्व को कोई मिटा नहीं सकता के उद्घोष के साथ हजारों सनातनी भक्तों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरूआत पूरे गांव में भव्य कलश यात्रा से हुई, उसके बाद मुख्य सत्र का शुभारंभ किया गया। 

इस अवसर पर स्वामी परमानंद महाराज ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन, सभ्य और महान संस्कृति है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ तत्व हिंदू समाज को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें लव जिहाद सबसे बड़ा खतरा है। स्वामी जी ने सभी हिंदू भाइयों से अपील की कि बच्चों को गुरुकुल शिक्षा दिलाएं, आपसी एकता बनाए रखें, घर-घर में शंखनाद करें तथा सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ को स्वयं निभाएं। 

वहीं, रांची के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता श्री गोपाल जी ने अपने संबोधन में हिंदू मंदिरों को समाज का श्रद्धा केंद्र बताते हुए कहा कि प्राचीन काल में मंदिर गरीब बेटियों के विवाह, बीमारों के इलाज और समाज की हर समस्या के समाधान का आधार थे। आक्रमणकारियों ने समाज को विखंडित करने के लिए सबसे पहले मंदिरों पर प्रहार किया, लेकिन अब हिंदू समाज जागृत हो चुका है और भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने साधु-संतों के बलिदान का उल्लेख करते हुए महर्षि दधीचि के हड्डी दान का उदाहरण दिया। 

श्री गोपाल जी ने पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र प्रेम पर जोर देते हुए सभी से अपील की कि पेड़ लगाएं, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करें, नदियों-तालाबों को स्वच्छ रखें तथा जहां तक संभव हो स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें ताकि भारत का आर्थिक विकास हो। यह सम्मेलन हिंदू एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। हिंदू समन्वय समिति ने घोषणा की कि ऐसे आयोजन निरंतर जारी रहेंगे।

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