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Published / 2026-04-17 20:51:34
अक्षय तृतीया अनंत पुण्य, समृद्धि और शुभारंभ का दिव्य पर्व : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है,जो इस वर्ष  20 अप्रैल को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जायेगा। कई लोग 19 अप्रैल को भी यह पर्व मनायेंगे, हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। 

अक्षय शब्द का अर्थ है- जिसका कभी क्षय न हो, अर्थात इस दिन किये गये शुभ कर्म, दान-पुण्य, जप-तप और आराधना का फल कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि वह अनंत काल तक बढ़ता रहता है। अक्षय तृतीया का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत व्यापक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। 

इसके अतिरिक्त, इसी पावन तिथि पर महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना का शुभारंभ हुआ था, जब महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश को इसका लेखन करने के लिए प्रेरित किया। यह दिन ज्ञान, सृजन और धर्म के संगम का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता को समाप्त कर उन्हें समृद्धि का आशीर्वाद दिया था। 

यह कथा न केवल मित्रता की सच्चाई को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि सच्ची भक्ति और निष्कपट भाव से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है। यही कारण है कि अक्षय तृतीया को समृद्धि, विश्वास और संबंधों की दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है। इसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। 

विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, भूमि पूजन, वाहन या आभूषण खरीदना-सभी कार्य इस दिन अत्यंत शुभ माने जाते हैं। विशेष रूप से सोना-चांदी खरीदने की परंपरा इस दिन बहुत प्रचलित है, क्योंकि यह विश्वास है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं समृद्धि में निरंतर वृद्धि करती हैं। इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष दान-पुण्य भी है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जल से भरे घड़े, अन्न, सत्तू, गुड़, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि समाज में सहयोग और सहानुभूति की भावना को भी सुदृढ़ करता है। अक्षय तृतीया का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को धर्म, परोपकार और सद्कर्म की ओर प्रेरित करना है। 

यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में किये गये अच्छे कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाते, बल्कि उनका प्रभाव दीर्घकाल तक बना रहता है। यह दिन सकारात्मक सोच, नयी शुरुआत और आत्मिक उन्नति का प्रतीक है। सामाजिक दृष्टि से भी अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। यह पर्व हमें समाज में जरूरतमंदों की सहायता करने, प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने तथा सामूहिक समृद्धि के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। 

आज के समय में, जब भौतिकता बढ़ रही है, यह पर्व हमें मानवीय मूल्यों की ओर लौटने का संदेश देता है। अंतत: अक्षय तृतीया केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक और समृद्ध बनाने का एक अवसर है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनायें, दूसरों के लिए उपयोगी बनें और अपने जीवन को अक्षय-अर्थात सदैव उन्नति, सुख और शांति से परिपूर्ण बनायें।

Published / 2026-04-16 21:57:52
चतरा : मंदिर की दीवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी से बवाल

चेतावनी के बाद बाजार बंद... छावनी में तब्दील हुआ इलाका 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, चतरा। जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। वशिष्ठ नगर  थाना क्षेत्र अंतर्गत दंतार गांव में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली एक गंभीर घटना सामने आयी है। जहां गुरुवार सुबह  उस समय तनाव फैल गया जब ग्रामीण पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे। 

उन्होंने मंदिर की दीवार पर भगवान राम और माता सीता के खिलाफ अमर्यादित भाषा लिखी देखी। इस घटना ने स्थानीय हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचायी है, जिसके विरोध में पूरे गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है। 

घटना की खबर तेजी से पूरे गांव में फैलते हुए भारी संख्या में मंदिर परिसर के पास ग्रामीण एकत्रित हो गये। जिसके बाद आक्रोशित हिंदू समाज के लोगों ने विरोध स्वरूप बाजार की दुकानों को बंद करा दिया। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह और अंचलाधिकारी (सीओ) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सबसे पहले मंदिर की दीवार पर लिखी गयी आपत्तिजनक भाषा को साफ करवाया और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जायेगा। 

घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों में से एक राहुल कुमार का ने मामले को लेकर बताया  कि इस तरह की घटना पहली बार इस इलाके में नहीं हुई है। इससे पहले भी यहां मंदिर को निशाना बनाकर ऐसी अभद्र हरकत की जा चुकी है, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 

इस बार  साफ चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक बाजार बंद रहेगा। फिलहाल गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाये हुए है और मामले की जांच में जुट गयी है।

Published / 2026-04-16 18:50:35
अडिग ईमानदारी की पहचान है अशोक खेमका का प्रेरणादायी प्रशासनिक जीवन

अशोक खेमका समाज के लिए गौरव एवं प्रेरणा स्रोत : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने मारवाड़ी समाज के गौरव, प्रख्यात आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के ईमानदार, साहसी एवं सिद्धांतनिष्ठ कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। 

उन्होंने कहा कि खेमका जैसे अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था में सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता की जीवंत मिसाल हैं। हरियाणा कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने हाल ही में 34 वर्षों की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ग्रहण की। अपने कार्यकाल के अंतिम क्षणों में उन्होंने एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपने परिवार, सहकर्मियों एवं शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। 

साथ ही उन्होंने विनम्रता का परिचय देते हुए कहा कि यदि उनके किसी निर्णय से किसी को भी कष्ट पहुंचा हो, तो वे उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। यह उनकी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। वर्ष 1991 बैच के इस जांबाज अधिकारी का प्रशासनिक जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा। 

34 वर्षों के कार्यकाल में उनका कुल 57 बार तबादला हुआ, जो औसतन हर सात माह में एक स्थानांतरण को दर्शाता है। इतना ही नहीं, कई बार उनका कार्यकाल एक माह से भी कम रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और निर्भीकता के साथ किया। 

अशोक खेमका वर्ष 2012 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आये, जब उन्होंने गुरुग्राम की एक बहुचर्चित भूमि सौदे से जुड़े मामले में तत्कालीन प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर निर्णय लेते हुए म्यूटेशन को रद्द कर दिया। इस फैसले ने उन्हें ईमानदार और निडर अधिकारी के रूप में स्थापित किया। 

कोलकाता के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे खेमका ने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनके पास पीएचडी और एमबीए जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं भी हैं। वे चाहते तो आरामदायक जीवन चुन सकते थे, किंतु उन्होंने सदैव सत्य और नैतिकता के मार्ग को प्राथमिकता दी। 

संजय सर्राफ ने कहा कि अशोक खेमका का निष्कलंक एवं साहसी प्रशासनिक सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनका जीवन संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से समझौता नहीं करना चाहिए।

Published / 2026-04-16 18:35:19
झारखंड के चतरा में आकार ले रहा पूर्वी भारत का सबसे बड़ा संकटमोचन धाम

रांची में निकली भव्य रथ यात्रा;  हज हाउस के पास मुस्लिम समुदाय ने किया जोरदार स्वागत 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के चतरा जिला अंतर्गत सिमरिया प्रखंड के पिरी में पूर्वी भारत के सबसे बड़े उदधिक्रमण संकटमोचन हनुमान धाम का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। करीब 8 एकड़ क्षेत्र में आकार ले रहे इस भव्य धाम में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के साथ 108 फीट ऊंची हनुमान जी की विराट प्रतिमा स्थापित की जानी है। इसी धाम के प्रचार-प्रसार और श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को राजधानी रांची में संकटमोचन रथ यात्रा निकाली गयी। 

रथ यात्रा सुबह 7.30 बजे अरगोड़ा स्थित हनुमान मंदिर से शुरू हुई और कडरू, चुटिया होते हुए हिनू चौक स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे मार्ग में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। इस शोभायात्रा में शहर के कई डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षाविद और व्यवसायी भी शामिल हुए। 

शोभायात्रा के दौरान कडरू स्थित हज हाउस के पास सांप्रदायिक सौहार्द्र का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को माला पहनाकर, चुनरी और अंगवस्त्र भेंट कर तथा अल्पाहार की व्यवस्था कर आपसी भाईचारे और एकता का सशक्त संदेश दिया गया।  

इसके बाद रथ कडरू हनुमान मंदिर पहुंचा, जहां मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया। कडरू से रथ चुटिया स्थित राम मंदिर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां समिति की ओर से पानी, ठंडे पेय, फल और मिठाइयों से स्वागत किया गया। दिनभर चली इस यात्रा का समापन महावीर मंडल न्यास में हुआ, जहां रथ में शामिल श्रद्धालुओं का लस्सी और फल से सत्कार किया गया। 

निर्माणाधीन संकटमोचन धाम को एक समग्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में फैल रहे इस धाम में एक एकड़ क्षेत्र में अशोक वाटिका विकसित की जा रही है, जहां 108 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होगी। इसके साथ ही 20 हजार वर्ग फीट के विशाल प्लेटफॉर्म पर राम दरबार, शिव परिवार और संकटमोचन हनुमान मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। 

परिसर में दशरथ कुंड, सीता रसोई, महर्षि वशिष्ठ आश्रम, महर्षि विश्वामित्र आश्रम और माता शबरी आश्रम जैसे पौराणिक स्थलों की स्थापना की जा रही है, जबकि 20 हजार वर्ग फीट का महर्षि वाल्मीकि सभागार भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा यहां सनातन साहित्य के लिए एक विशाल पुस्तकालय भी प्रस्तावित है। 

रथ यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं द्वारा संकल्पित मिट्टी और अक्षत एकत्र किये जा रहे हैं, जिन्हें धाम की नींव में स्थापित किया जायेगा। आयोजकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य के लोगों की आस्था इस निर्माण से सीधे जुड़ सकेगी और यह धाम भविष्य में धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।

Published / 2026-04-15 20:58:20
आश्रम में की गयी दिव्यांग, मंदबुद्धि निराश्रितों की सेवा और कराया गया भोजन

मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सान्निध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के द्वारा संचालित विगत 2 वर्षों से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज कविता गाड़ोदिया एवं उनके परिवार के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 46 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया। 

सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक 15  दिनों मे 3230 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। 

मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में अनिष्क नारायण, बिंदु वर्मा, संजय अग्रवाल, अनमोल सिन्हा, संतोष कुमार नायक, सुशील अग्रवाल, राजेंद्र सरावगी, मिलन जालान, शालिनी सिन्हा, सुरेश चौधरी, अनिमा प्रसाद, महेंद्र प्रसाद, संतोष कुमार शर्मा मनीष कुमार के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गयी। 

सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितों, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के सामान दिया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। 

अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2026-04-13 18:26:05
श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी वरूथिनी एकादशी

एबीएन सोशल डेस्क। अग्रसेन पर स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी पर्व अत्यंत श्रद्धा सहित भक्ति में वातावरण में आयोजित किया गया।  प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र ( बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया गया।

साथी मंदिर में विराजमान बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी इस अवसर पर विशेष शृंगार किया गया। प्रात: 8 बजे श्रृंगार आरती के समय से ही प्रभु के दर्शन करने के लिए भक्तों की अपार भीड़ अनवरत बनी रही। लाल गुलाब, जूही, बेला, मोगरा, रजनीगंधा व गेंदा के फूलों से श्री श्याम प्रभु का मनोहारी श्रृंगार किया गया। 

रात्रि 9 बजे से श्याम प्रभु के जयकारों के बीच अखंड पावन ज्योत प्रज्वलित की गयी। भक्तगण मंगल दर्शन कर ज्योति आहुति प्रदान कर मनोवांछित फल मांग रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने गणेश वंदना के साथ संगीत में संकीर्तन प्रारंभ किया गया।  

तुझको मनायेंगे भजन तेरा गायेंगे 

तेरा हूं दिवाना दिलदार सांवरे 

खड़ा हूं तेरी चौखट पर 

शरण में ले लो अब प्यारे 

किस्मत वाले को मिलता है श्याम तेरा दरबार 

इत्यादि भावपूर्ण भजनों ने पूरे वातावरण को श्याम मय बना दिया। इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा एवं केसरिसा दूध व मगही पान का भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।  

आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, ओम जोशी, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनीयां, अमित जलान, बालकिशन परसरामपुरिया, नितेश केजरीवाल, जीतेश अग्रवाल, नितेश लाखोटिया, विकास पाडिया का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

Published / 2026-04-12 21:06:22
मारवाड़ी समाज की संगोष्ठी में गूंजे सशक्त विचार

सामाजिक जीवन में संस्कार और शुचिता पर मंथन 

टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन एवं झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक जीवन में संस्कार और शुचिता-चर्चा एवं चिंतन जैसे अत्यंत सामयिक एवं प्रासंगिक विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन रांची के हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन परिसर में किया गया। 

इस महत्वपूर्ण आयोजन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवियों, पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के पारंपरिक स्वागत से हुआ, जिसमें पदाधिकारियों द्वारा सभी आगंतुकों को पुष्प गुच्छ प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्र अग्रवाल ने की, जबकि संचालन राजेश कौशिक एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रांतीय महामंत्री विनोद कुमार जैन ने कुशलतापूर्वक निभाया। 

मौके पर विषय प्रवर्तक के रूप में कोलकाता से पधारे डॉ. संजय हरलालका ने अपने उद्बोधन में संस्कार और शुचिता के महत्व को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भौतिकता के बढ़ते प्रभाव के कारण सामाजिक मूल्यों में गिरावट देखी जा रही है, ऐसे में संस्कारों का संरक्षण और शुचिता का पालन अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि परिवार ही संस्कारों की पहली पाठशाला होता है और यदि हम अपने बच्चों को सही दिशा देना चाहते हैं, तो हमें स्वयं आदर्श प्रस्तुत करना होगा। 

प्रमुख वक्ता के रूप में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोवर्धन गाड़ोदिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज की मजबूती उसके नैतिक मूल्यों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि संस्कार केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है, जो व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर करना सिखाती है। उन्होंने समाज में शुचिता बनाये रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया और युवाओं को इस दिशा में अग्रसर होने का आह्वान किया। 

पूर्व सांसद महेश पोद्दार ने अपने संबोधन में सामाजिक जिम्मेदारियों की चर्चा करते हुए कहा कि आज के दौर में व्यक्ति अपने व्यक्तिगत हितों में इतना उलझ गया है कि सामूहिक हितों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने कहा कि शुचिता केवल बाहरी व्यवहार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हमारे विचारों, आचरण और निर्णयों में भी परिलक्षित होनी चाहिए। 

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज में नैतिकता और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाए, तो अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान स्वत: हो सकता है। इस संगोष्ठी में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी समाज अपनी परंपराओं, संस्कारों और नैतिक मूल्यों के लिए सदैव जाना जाता रहा है और इन मूल्यों को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस प्रकार के विचार-विमर्श को समय की आवश्यकता बताते हुए आयोजकों की सराहना की। 

अध्यक्षीय उद्बोधन में सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि समाज को सशक्त बनाने के लिए संस्कारों की नींव को मजबूत करना अनिवार्य है। उन्होंने सभी वक्ताओं के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी के माध्यम से जो संदेश समाज को मिला है, वह निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होगा।अंत में, कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। यह संगोष्ठी न केवल एक विचार-विमर्श का मंच बनी, बल्कि समाज को नयी दिशा देने का भी कार्य किया, जिसमें संस्कार और शुचिता के महत्व को पुन: स्थापित करने का सार्थक प्रयास किया गया। 

मौके पर ओम प्रकाश अग्रवाल, सज्जन पाड़िया, विनोद जैन, पवन पोद्दार, प्रमोद अग्रवाल, कौशल राजगढ़िया, अनिल अग्रवाल, सुभाष पटवारी, संजय सर्राफ, निर्मल बुधिया, किशन साबू, रमन बोडा, चंडी प्रसाद डालमिया, रवि शंकर शर्मा, विनोद महलका, अशोक नारसरिया, रतन बंका, अरुण भरतिया, प्रकाश बजाज, प्रमोद बगड़िया, राजेश भरतिया, ललित पोद्दार, अरुण जोशी, राजकुमार मित्तल, अजय डीडवानिया, विकास अग्रवाल कमल खेतावत, विजय कुमार खोवाल, भरत बगड़िया, किशन अग्रवाल, रौनक झुनझुनवाला, विनीता सिंघानिया, रीना सुरेखा, छाया अग्रवाल, सीमा पोद्दार, प्रीति फोगला सहित बड़ी संख्या में सदस्य गण उपस्थित थे। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2026-04-11 22:35:45
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर फिरायलाल बैंक्वेट हॉल में हुई जन गोष्ठी

टीम एबीएन, रांची । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर आज दिनांक 11 अप्रैल 2026 को रांची के प्रतिष्ठित फिरायलाल बैंक्वेट हॉल में एक प्रमुख जन गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री रामलाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से भारत माता के पवित्र चित्र पर समस्त उपस्थितजन द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, उसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया गया। प्रांत संपर्क प्रमुख श्री राजीव कमल बिट्टू जी ने विषय-प्रवेश करते हुए सभी प्रमुख जनों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

अपने सरस, प्रेरणादायी एवं तथ्यपरक उद्बोधन में श्री रामलाल जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, विकास यात्रा, मूल उद्देश्यों एवं कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए समाज के सामने संघ का वास्तविक स्वरूप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार एक जन्मजात स्वयंसेवक थे। उनके जीवन की अनेक घटनाएं इस तथ्य को स्पष्ट करती हैं। 

उन्होंने वंदे मातरम गान किया था, जिसके कारण अंग्रेजी शासन ने उन्हें स्कूल से निष्कासित कर दिया था। डॉ. हेडगेवार का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रभाव, संगठन एवं समाज-निर्माण के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक है। संघ की स्थापना के समय से ही डॉ. हेडगेवार की दृष्टि हिंदू समाज को संगठित करने, भेदभाव रहित समाज का निर्माण करने पर केंद्रित रही।

श्री रामलाल जी ने स्पष्ट किया कि संघ का मूल ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है। श्री रामलाल जी ने कहा कि समाज में आरएसएस के विषय में अनेक गलत धारणाएं प्रचलित हैं। ऐसी प्रमुख जन गोष्ठियां उन सभी संदेहों, भ्रांतियों को स्पष्ट करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य व्यवहार और प्रवृत्ति से जाना जाता है, न कि प्रचार से।

देश विभाजन (1947) के कालखंड का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उस विकट समय में द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) ने स्वयंसेवकों को निर्देश दिया था - हर हिंदू जब तक विभाजन से दूसरे भाग (पाकिस्तान) में न पहुंचे, तब तक तुम सभी यहीं रहना। आखिरी हिंदू के निकलने के बाद ही तुम जाओ। ऐसी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी संघ स्वयंसेवकों ने पीड़ित हिंदुओं की सहायता, सुरक्षा और सुरक्षित पुनर्वास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया। सेवा कार्यों का विशेष उल्लेख करते हुए श्री रामलाल जी ने कहा कि संघ स्वयंसेवक किसी भी भेदभाव के बिना समाज के प्रत्येक वर्ग की सेवा करते हैं।

चरखी दादरी विमान दुर्घटना का जीवंत उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उस विमान में अरब देशों के यात्री थे, जिनमें अधिकांश मुस्लिम परिवार थे। फिर भी संघ के स्वयंसेवकों ने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए निष्कपट सेवा की। इस अलौकिक सेवा कार्य के लिए वहां के लोगों ने संघचालक को मस्जिद में बुलाकर सम्मानित किया। श्री रामलाल जी ने कहा, हमें प्रचार नहीं करना है, लेकिन सत्य तथ्य समाज के समक्ष रखना आवश्यक है।

श्री रामलाल जी ने बताया कि संघ का संपर्क समाज के विभिन्न वर्गों, विचारधाराओं एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों से निरंतर बना रहता है। संघ स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, ग्राम विकास, आपदा राहत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
जहां सरकारी विद्यालय नहीं हैं, वहां हजारों एकल विद्यालय संघ स्वयंसेवक चला रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, संघ व्यक्ति निर्माण का केंद्र है।

शताब्दी वर्ष के विशेष संदर्भ में श्री रामलाल जी ने कहा कि संघ पंच परिवर्तन का विषय लेकर  घर-घर संपर्क, नागरिक गोष्ठियों और समाज संवाद के माध्यम से व्यापक जनजागरण का कार्य कर रहा है। सज्जन, प्रभावी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सामाजिक शक्ति को साथ लेकर भारत को अधिक संगठित, सक्षम और विश्वकल्याण के भाव से युक्त बनाने का संघ का व्यापक उद्देश्य है।

कार्यक्रम में समाज के अनेक प्रमुख जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख उपस्थितजन में डॉ. राम जी यादव, डॉ. शुभ्रा, संजय सेठ, पराशक्ति पल्लव, प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू, प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, प्रांत सह संघचालक अशोक श्रीवास्तव जी एवं सह प्रांत प्रचारक राजीव कांत जी एवं संघ एवं विविध संगठन के पदाधिकारियों समेत 300 की संख्या में समाज की सज्जन एवं मातृशक्ति शामिल रहे।

यह प्रमुख जन गोष्ठी न केवल आरएसएस के शताब्दी वर्ष का महत्वपूर्ण आयोजन था, बल्कि समाज में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त मंच भी सिद्ध हुई। श्री रामलाल जी के उद्बोधन ने सभी उपस्थितजन को गहन चिंतन एवं राष्ट्र निर्माण में सहभागिता के लिए प्रेरित किया। 

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