टीम एबीएन, रांची। 13 मई 2025 को विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री बजरंग बागड़ा ने झारखंड के अधिवक्ताओं के साथ ग्रीन एक्रस होटल एअरपोर्ट रोड रांची में बेठक की। श्री बागड़ा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारतवर्ष के हिन्दुओं ने साढ़े सात सौ वर्ष तक इस्लामिक शासन और दो सौ वर्षों का इसाई शासन को झेला, इसके बावजूद अपने अस्तित्व को बचा कर रखने में सफल रहा है।
इसका मुख्य कारण कारण हैं विवाह और कुटुंब प्रणाली परंतु आज के मौजूदा दौर में हम हिंदुओं के द्वारा कुटुंब और विवाह प्रणाली में हो रहे परिवर्तन के कारण हमारा अस्तित्व खतरे में है और यह हिन्दू समाज के नाश का कारण बन सकती है। अत: हमे अपनी गलतियों को समय रहते हर हाल में ठीक करना होगा।
श्री बागड़ा झारखंड के दो दिवसीय प्रवास में आज रांची आए और विहिप से जुड़े अधिवक्ताओं और कार्यकर्ताओं को संबंधित किया। श्री बागड़ा ने हिंदू परिवारों की कुटुंब प्रणाली और जनसंख्या नीति में आये कई बदलाओं पर चिंता जाहिर करते हुए, आग्रह किया कि यदि हिन्दू परिवार सामूहिकता की भावना को बढ़ावा नहीं दिया गया और जन्म दर को बढ़ाकर कम से कम तीन बच्चों का नहीं किया गया, तो हम हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा।
उन्होंने श्रीराम मंदिर से जुड़े अभियान की सफलता और प्रयागराज के महाकुंभ में 66 करोड़ हिंदुओं की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों से विश्वभर में नयी ऊर्जा की जागृति हुई है, परंतु यह जागृति हमें सिर्फ धार्मिक आयोजनों एवं मंदिरों तक ही सीमित नहीं रखना है। ऐसी जागृति हम हिन्दुओं को अपने मूल जीवन विंदु और जीवन दर्शन के क्षेत्र में भी खास तौर पर दिखाने की जरूरत है।
हमारी विवाह प्रणाली पूरे दुनिया में अनूठी है, विवाह प्रणाली में कॉन्ट्रैक्ट का कोई स्थान नहीं है। मौजूदा दौर में देर से विवाह करने, विवाह के उपरांत सिर्फ एक या दो बच्चे पैदा करने आदि की वजह से हमारी सामूहिकता आधारित परिवार तथा कुटुंब प्रणाली को कई प्रकार से नुकसान पहुंचा है। बच्चों की संख्या कम होने से परिवार की निरंतरता में कमी आई है। बच्चों में एकाकीपन बढ़ा है, जिससे उनके संतुलित विकास में कमी आई है।
परिवार में बुजुर्गों के सम्मान और महती भूमिका कम होने से परिवार के अंदर संकट बढ़े गये हैं। उन्होंने उपरोक्त समस्याओं के राजनैतिक दुष्परिणाम के प्रति भी आगाह किया और कहा कि यदि हम अभी नहीं संभले, तो निकट कुछ वर्षों में हमारी जनसंख्या मुसलमानों से कम हो जायेगी। ऐसी स्थिति में हमारे वोट करने का प्रतिशत घटा, तो हम शासन प्रणाली में अपनी भागीदारी को गंवा बैठेंगे और हमपर अत्याचार बढ़ जायेगा।
इस क्रम में उन्होंने भारतवर्ष से अलग हुए तीन राष्ट्रों क्रमश: अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू आबादी के घटने और वहां के हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से सीख लेते हुए, उन्होंने हिंदुओं को एकजुट होने के साथ साथ जनसंख्या बढ़ाने और कुटुंब प्रबोधन पर विशेष कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विहिप के क्षेत्र मंत्री वीरेन्द्र विमल, झारखण्ड प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, संयोजक रंगनाथ महतो, संगठन मंत्री देवी सिंह, विधि प्रकोष्ठ प्रांत प्रमुख व वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कृष्णा, सेवानिवृत जज शिवपाल सिंह, विहिप प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन, प्रांत टोली सदस्य अमरनाथ ठाकुर, अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख जुगल किशोर, अधिवक्ता प्रदीप चौरसिया, रामराजा समेत, रांची महानगर मंत्री विश्व रंजन इसके अलावा झारखंड उच्च न्यायालय एवं सिविल कोर्ट रांची के अधिवक्ता ने इस बैठक में हिस्सा लिये। उक्त जानकारी विहिप रांची के प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा - रांची, (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची ) द्वारा आज दिनांक 13.05.2025 (दिन - मंगलवार) को पंछी को दाना - पंछी को पानी: जन जागरूकता अभियान के पहले चरण का आयोजन किशोरगंज रोड न. 1 स्थित एल. पी. पब्लिक स्कूल में आयोजित किया गया। जिसमे स्कूल के बच्चों के बीच सकोरा (मट्टी का बर्तन) एवं दाना का वितरण किया गया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया ताकी इस भीषण गर्मी में पक्षियों को पीने का पानी एवं दाना मिल सके साथ ही उनके प्राणों की रक्षा हो सके। इस भीषण गर्मी में हम मनुष्य तो अपने सुख-सुविधा के लिये उपाय कर लेते हैं। परन्तु इन बेजुबान पंछियों के पास इस तपती गर्मी से अपने प्राणों के रक्षार्थ कुछ नही होता।
एक तरफ जहां हम अपने स्वार्थ के लिए लगातार वृक्षों की कटाई कर पक्षियों के घरों को उजाड़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण को बढ़ाकर प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रकृति रूपी भगवती की हम पूजा तो अवश्य करते हैं परन्तु अपने क्रिया कलापों से उन्ही भगवती की अवहेलना भी करने में पीछे नही रह रहे हैं।
नतीजा हुम् सबके सामने है जहां पहले के दिनों में पक्षी हमारे घर-आंगन में सुबह शाम चहचहाते रहते थे वहीं आज सन्नाटा पड़ा है। हमारे बड़े-बुजुर्ग यह भी मानते थे कि पक्षियों के वास से वास्तु-दोष काट जाता है एवं घर परिवार में खुशहाली रहती है। परन्तु अब हालात यह है कि पक्षी बस अब चित्र एवं किताबों तक सिमट कर रह गए हैं। पक्षी हमारे बीच से विलुप्त न हो जाये और इस भीषण गर्मी से उनके प्राणों के रक्षार्थ यह कार्यक्रम लोगों को जागरूक करने का एक अनूठा पहल है।
कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों के बीच लगभग 200 सकोरा एवं दाना के पैकेट का वितरण किया गया एवं उनसे निवेदन किया गया कि अपने घरों के छत एवं आंगन पर इसमें पानी भर कर रखें और साथ ही पक्षियों के खाने के लिए दान भी दें। कार्यक्रम के सफल आयोजन में एल. पी. पब्लिक स्कूल के तरफ से जितेंद्र पाठक एवं विजय कुमार मिश्रा का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में समूह शाखा रांची की ओर से हेमन्त नाथ शाहदेव, नवल किशोर सिंह, गिरेन्द्र नाथ शाहदेव, कीर्तिमान नाथ शाहदेव, एतवा बड़ाईक, यदुनाथ शाहदेव आदि सम्मलित हुए।
एबीएन सोशल डेस्क। घर-घर अलख जगाएंगे हम बदलेंगे जमाना यज्ञ रूप प्रभो! हमारे भाव उज्जवल कीजिए प्रज्ञागीत गायन, गायत्री महामंत्र के सस्वर पाठ और यज्ञीय अनुष्ठान विधान के संबंधित मंगलमय जयघोष के साथ अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुञ्ज तत्वावधान और मार्गदर्शन में रांची मुख्य शक्तिपीठ सेक्टर टू ,धूर्वा प्रज्ञापीठ बसस्टैंड, अलकापुरी, टाटीसिलवे चेतना केंद्र सहित रांची जिलांतर्गत अनेक प्रखंडों व पंचायतों में आज वैशाख मास एवं बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर गृहे - गृहे गायत्री यज्ञ संपन्न हुए।
इस अवसर पर गृहे गृहे गायत्री उपासना और ग्रामे ग्रामे यज्ञ अभियान अंतर्गत पहले समूह चर्चा हुई। बताया गया कि गायत्री और यज्ञ हमारी सनातन संस्कृति के माता पिता हैं। हमारे अवतार, ऋषि, मुनि, संत सभी ने इसी महाविद्या का आश्रय प्राप्त किया था। हमारे वेद और शास्त्र भी इसी गायत्री महामंत्र की गरिमा का गान करते हैं। परम् पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के सतत तप और पुरुषार्थ से वर्तमान समय में यह महामंत्र विश्व के कौने-कौने में गुंजायमान हो रहा है।
रांची जिला अंतर्गत सभी प्रखंडों, पंचायतों में विगत दिनों दिव्य ज्योति कलश रथ- भ्रमण दर्शन व पूजन-अर्चन और विभिन्न कार्यक्रम में उमड़कर जुड़े परिजनों की चर्चा की गई। वैशाख पूर्णिमा सह बुद्ध पुर्णिमा दिनांक 12 मई 2025 दिन सोमवार बुद्ध भगवान की जयन्ती है, उनके जीवन वृतांत और परिस्थितिजन्य स्मृतियों का स्मरण किया गया और इस सदी के युगावतार प्रज्ञावतार युग ऋषि, युग धर्म, युग साहित्य अखंड ज्योति, मासिक अखंड ज्योति पत्रिका, जप-अनुष्ठान पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया। बताया गया कि इस बार दो दिन दिन 11 मई रविवार छुट्टी दिन और 12 मई सोमवार को सम्पूर्ण विश्व में एक साथ एक दिन 24 लाख घरों में यज्ञ सम्पन्न कराने का लक्ष्य और निर्देश है।
आगे चर्चा हुई कि आसन्न वैश्विक संकटों से मनुष्यता की रक्षा एवं जन जन में सद्बुद्धि की स्थापना हेतु किये जा रहे इस महाप्रयोग में सबका सहयोग स्वागत योग्य हैं। सभी इकाई प्रमुख और पुरोहित द्वारा नि:शुल्क यज्ञ कराने एवं परिवार को देव परिवार के रूप में विकसित करने हेतु निर्धारित समय पर सुबह 9 से 12 बजे के मध्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस पावन अवसर सभी कार्यक्रमों में हम यज्ञ क्यों करें, आज यज्ञ आवश्यक क्यों, इसकी महत्ता, उपयोगिता और आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। साथ ही आज हर माह की तरह अंतरराष्ट्रीय आनलाइन जप-अनुष्ठान समूह प्रतिनिधित्व में आज 24 घंटे का जप-अनुष्ठान भी आयोजित है।
यज्ञीय अनुष्ठान में भारतीय सैन्य शक्ति संवर्धन व विजय हेतु देश रक्षा, सीमाओं में डटे हमारे सैनिकों में शक्ति संचार, शौर्य पराक्रम और आत्मबल संवर्धन हेतु निर्दिष्ट महामंत्र से विशिष्ट आहुति प्रदान की गई। और रांची शक्तिपीठ सेक्टर टू सहित सभी मंडलों में तथा प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में समन्वय समिति के सदस्यगणों ने घर-घर और समूह में यज्ञीय कार्यक्रम कराये और स्वस्थ-सुखद जीवन व प्रगतिशील वातावरण विस्तार तथा उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ किए गए। अंत में शांतिपाठ व जयघोष कर कार्यक्रम समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से भीषण गर्मी को देखते हुए मोरहाबादी कुसुम विहार रोड नंबर 4 में बेजुबान पक्षियों के रक्षा के लिए पक्षी बचाओ अभियान कार्यक्रम आज आयोजित किया गया। इसमें छोटे-छोटे बच्चों के अलावा उनके अभिभावकों को इस भीषण गर्मी में पक्षियों सहित अन्य बेजुबान प्राणियों को दाना पानी देने की अपील भी की गयी।
मौके पर बच्चों एवं उनके अभिभावकों के बीच पक्षियों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए सिकोरे बांटे गये। साथ ही साथ यह संकल्प दिलाया गया कि सब अपने-अपने घरों पर सिकोरे रख कर पक्षियों को दाना पानी देकर उनकी रक्षा करने में अपना योगदान देंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप राम मंदिर में प्रभु राम की सेवा करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। राम मंदिर ट्रस्ट ने राम मंदिर में प्रभु राम की सेवा करने वाले लोगों के लिए एक भवन बनाने का निर्णय लिया है, जहां आप 15 दिन से एक महीने तक रह सकते हैं। इस भवन में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं भी विकसित की जायेंगी।
यह भवन राम मंदिर से मात्र 200 मीटर दूरी पर रामकोट में बनाया जा रहा है। लगभग 2000 स्क्वायर फीट में यह भवन कल से बनना शुरू होगा और आज इसका भूमि पूजन ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने किया है। इस भवन में 100 से 150 श्रद्धालु आराम से रह सकेंगे।
इस भवन का निर्माण अगले 6 महीनों में पूरा हो जायेगा। इसके बाद देश-विदेश से आने वाले भक्त अगर प्रभु राम की सेवा और आराधना करना चाहते हैं और रात को ठहरना चाहते हैं, तो राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा इस भवन में रुक सकते हैं। इस भवन का निर्माण लगभग 2000 स्क्वायर फीट की भूमि पर हो रहा है, जहां 100 से 150 श्रद्धालु ठहर सकते हैं।
राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामकोट में एक जमीन खरीदी है। यहां देशभर से सेवा करने आने वाले श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था की जायेगी। इस निवास भवन में 15 दिन, 20 दिन और 1 महीने तक रहने की व्यवस्था होगी।
यह निवास भवन 2000 स्क्वायर फीट में बनेगा और इसमें लगभग 150 यात्री रह सकेंगे। यह एक स्टील स्ट्रक्चर होगा। आज इसका भूमि पूजन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया। इसका निर्माण कार्य कल से शुरू होगा और 5 से 6 महीने में पूरा हो जायेगा।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि बुद्ध पूर्णिमा जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म उनके ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की तिथि के रूप में मनाया जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा का महत्व केवल उनके जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन की पावनता इसलिए भी विशेष है क्योंकि यही वह तिथि है जब भगवान बुद्ध को बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे गहन तपस्या के बाद सत्य और ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह दिन ध्यान, तप, और करूणा के अभ्यास का प्रतीक है, जबकि हिंदू धर्म में इसे ईश्वर के अवतार के रूप में पूजा जाता है। इस दिन कई लोग सत्य, अहिंसा और संयम का व्रत लेकर पुण्य अर्जित करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 11 मई को रात 8 बजकर 1 मिनट से प्रारंभ होगा और 12 मई को रात 10 बजकर 25 मिनट तक समाप्त होगा।
उदया तिथि के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 12 मई सोमवार को मनाया जायेगा। जो बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म दोनों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। इन योगों में पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु और भगवान बुद्ध की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है,जो आत्मिक शांति और पुण्य अर्जन का कारण बनते हैं। यह समय पूजा, ध्यान और तप के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
इस दिन के विशेष योगों का लाभ उठाकर लोग भगवान बुद्ध की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ अपने जीवन में शांति और समृद्धि लाने की कोशिश करते हैं। यह दिन न केवल भगवान गौतम बुद्ध का जन्मदिन है, बल्कि इसी दिन उन्हें सत्य का ज्ञान भी प्राप्त हुआ था। बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को भगवान बुद्ध द्वारा दिखाए गए जीवन के सत्य और उनके धर्म के उपदेशों का पालन करने के रूप में मनाते हैं।
इस दिन का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक जागरूकता और मानवता के सेवा की प्रेरणा देता है। ध्यान, साधना और करुणा के साथ भगवान बुद्ध की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से उबरने में मदद मिलती है। हिंदू धर्म में भी इस दिन का महत्व है क्योंकि इसे भगवान विष्णु के नौवे अवतार के रूप में देखा जाता है।
भगवान बुद्ध ने जीवन के दु:ख, पाप, और कर्म के फल को समझाया और इसे पवित्र उपदेशों के माध्यम से मानवता को दिखाया। इस दिन को आध्यात्मिक उन्नति, आत्मिक शांति, और पुण्य अर्जन का अवसर माना जाता है। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और बुराइयों को समाप्त करने के लिए बुद्ध शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक है इस दिन हम सभी को अपने आचरण में सुधार लाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेना चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि मातृ दिवस हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, इस वर्ष 11 मई को मातृ दिवस मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मां यह मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का सार है। मां वह शक्ति है, जो निःस्वार्थ प्रेम, त्याग, समर्पण और करुणा की सजीव प्रतिमूर्ति होती है। संसार की कोई भी भावना मां की ममता के आगे नहीं टिक सकती।
इसी मातृत्व की महानता को सम्मान देने के लिए हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है।यह दिवस मात्र एक दिन नहीं, बल्कि वह अवसर है जब हम अपनी मां को यह बता पाते हैं कि वह हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण हैं। यह एक भावनात्मक पर्व है जो हमें अपने हृदय की गहराइयों से मां के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की प्रेरणा देता है।
मां ममता की मूरत है मातृ दिवस की शुरुआत अमेरिका से हुई, जब अन्ना जार्विस नामक महिला ने अपनी मां की स्मृति में इस दिन को मनाने की पहल की।धीरे-धीरे यह परंपरा वैश्विक रूप लेती गई और आज लगभग हर देश में यह दिन श्रद्धा और प्रेम से मनाया जाता है।
भारत में भी यह दिन खास महत्व रखता है। भारतीय संस्कृति में तो मां को देवी तुल्य माना गया है। मातृदेवो भव: की भावना हमारे शास्त्रों में भी निहित है। मां केवल जन्म नहीं देती, बल्कि जीवन भर हमारा मार्गदर्शन करती है, कष्टों को अपने आँचल में समेटकर हमारे लिए सुख-संवेदनाओं का सागर लुटा देती है।
मातृ दिवस के अवसर पर बच्चे अपनी मां को उपहार देते हैं, विशेष भोज बनाते हैं या कोई हस्तनिर्मित कार्ड या कविता के माध्यम से अपने भाव प्रकट करते हैं। हालांकि, यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि मां के योगदान को सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन आदर और प्रेम देना चाहिए। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में जब संयुक्त परिवार विघटित हो रहे हैं, मां की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
ऐसे में मातृ दिवस हमें माँ के साथ समय बिताने, उनके अनुभवों से सीखने और उन्हें मान देने का एक सशक्त अवसर देता है। अंततः, मां न सिर्फ जीवन की जननी हैं, बल्कि वह एक प्रेरणा हैं, एक आधार हैं और हमारे अस्तित्व की जड़ हैं। मां को समर्पित यह दिन उनके प्रति हमारे प्रेम और आदर की अभिव्यक्ति का माध्यम बनता है।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि बुद्ध पूर्णिमा जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म उनके ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की तिथि के रूप में मनाया जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा का महत्व केवल उनके जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन की पावनता इसलिए भी विशेष है क्योंकि यही वह तिथि है जब भगवान बुद्ध को बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे गहन तपस्या के बाद सत्य और ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है।यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह दिन ध्यान, तप, और करूणा के अभ्यास का प्रतीक है, जबकि हिंदू धर्म में इसे ईश्वर के अवतार के रूप में पूजा जाता है। इस दिन कई लोग सत्य, अहिंसा और संयम का व्रत लेकर पुण्य अर्जित करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 11 मई को रात 8 बजकर 1 मिनट से प्रारंभ होगा और 12 मई को रात 10 बजकर 25 मिनट तक समाप्त होगा।
उदया तिथि के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 12 मई सोमवार को मनाया जाएगा। जो बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म दोनों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। इन योगों में पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु और भगवान बुद्ध की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है, जो आत्मिक शांति और पुण्य अर्जन का कारण बनते हैं।
यह समय पूजा, ध्यान और तप के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इस दिन के विशेष योगों का लाभ उठाकर लोग भगवान बुद्ध की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ अपने जीवन में शांति और समृद्धि लाने की कोशिश करते हैं। यह दिन न केवल भगवान गौतम बुद्ध का जन्मदिन है, बल्कि इसी दिन उन्हें सत्य का ज्ञान भी प्राप्त हुआ था।
बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को भगवान बुद्ध द्वारा दिखाए गए जीवन के सत्य और उनके धर्म के उपदेशों का पालन करने के रूप में मनाते हैं। इस दिन का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक जागरूकता और मानवता के सेवा की प्रेरणा देता है। ध्यान, साधना, और करुणा के साथ भगवान बुद्ध की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से उबरने में मदद मिलती है।
हिंदू धर्म में भी इस दिन का महत्व है क्योंकि इसे भगवान विष्णु के नौवे अवतार के रूप में देखा जाता है। भगवान बुद्ध ने जीवन के दुःख, पाप, और कर्म के फल को समझाया और इसे पवित्र उपदेशों के माध्यम से मानवता को दिखाया।
इस दिन को आध्यात्मिक उन्नति, आत्मिक शांति, और पुण्य अर्जन का अवसर माना जाता है। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और बुराइयों को समाप्त करने के लिए बुद्ध शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक है इस दिन हम सभी को अपने आचरण में सुधार लाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेना चाहिए।
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