समाज

View All
Published / 2026-06-05 19:26:37
गायत्री महिमा का गान अनेक प्रकार से किया गया है : साधक-शिष्य

  • गायत्री महिमा का गान अनेक प्रकार से किया गया है : साधक-शिष्य

एबीएन सोशल डेस्क। हे गायत्री माता तेरी महिमा अपरम्पार है, यह अद्भुत अति सुन्दर तेरा रचा हुआ संसार है। कार्यक्रम प्रारंभ में प्रज्ञागीत गायन कर गायत्री महिला मंडल प्रतिनिधित्व में  निष्ठावान परिवार मध्य चुटिया में गायत्री महामंत्र का अखंड  जप-अनुष्ठान अखंड ज्योति एवं गुरुमाता जन्म शताब्दी वर्ष अनुयाज कार्यक्रम क्रम में तीन दिवसीय किया गया।

प्रथम दिन संध्याकाल संध्या वंदन में संकल्पित होकर षटकर्म, कलश पूजन, अखंड दीप ज्योति प्रज्ज्वलन कर गायत्री चालीसा पाठ, दूसरे दिन बारह घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान, सायंकाल गायत्री दीपयज्ञ तथा तीसरे चरण में आज सुबह गायत्री हवन-यज्ञ विधान में विशिष्ट मंत्रों से अग्निहोत्र कर मनोरथपूर्ण पूर्णाहुति सोल्लास संपन्न किया।

इस अवसर पर गायत्रीपरिवार संस्थापक परम पूज्य गुरुदेव की लिखित गायत्री महामंत्र की महिमा और गायत्री महाविज्ञान पुस्तक पर अनेक विषयगत चर्चा की गई। यज्ञीय पुरोहित ने बताया कि इसे वेदमाता, देवमाता, विश्वमाता सर्वकामधुक् ( सभी श्रेष्ठ कामनाओं को पूरा करने वाली) कहा गया है। किन्तु यह गुह्य विद्या है। 

आचार्य श्रीराम शर्मा पूज्य ने इस युग में मनुष्य मात्र को दुर्बुद्धि के चंगुल में जकड़ते, पीसते देखा तो सद्बुद्धि, सद्वभाव, सद्विचार, सद्ज्ञान प्रदायिनी, सन्मार्ग, सत्पथ गामिनी गुह्य गायत्री महाविद्या को जन-जन तक पहुंचाए जाने और जन सुलभ बनाने का भागीरथी तपोबल और अपने संकल्प बल का पुरुषार्थ सार्थक किया। इस पुण्य प्रसाद को जन-जन के लिए पुरुषार्थ स्वरूप गायत्री महाविद्या का युगानुरुप सफल प्रयोग कर गायत्री महाविज्ञान का सृजन व प्रकाशन किया।

इससे शिष्य जिज्ञासुओं एवं विशिष्ट  साधकों की रूचि बढ़ती गई और समस्याओं के समाधान, निराकरण करते गये। गुरुवर श्रीपूज्यवर ने बताया है कि गायत्री महामंत्र की महिमा एक ऐसा तत्व है, उदाहरण व दृष्टांत हैं,जिसे सभी महापुरूषों एवं ऋषि महर्षियों ने एक मत से स्वीकार किया है। 

गुरुवरश्री ने बताया है कि गायत्री ही ब्रह्म की सर्वोत्कृष्ट चेतना है, गायत्री उपासना साधना सर्वदा हितकारी, शुभकारी और लाभकारी है। श्रद्धापूर्वक गायत्री माता का आंचल पकड़ने का परिणाम सदा कल्याणकारक होता है।गायत्री मंत्र को भारतीय संस्कृति में सबसे श्रेष्ठ मंत्र माना गया है। नवरात्र महापर्व काल में गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान आत्म विकास में एक स्वर्णिम अवसर माना गया है। 

परम पूज्य श्रीगुरुदेव ने इसमें साधना संबंधित कुछ भ्रांतियों के निवारण का भी जिक्र किया है।यजमान ने देव दक्षिणा में एक दुर्गुण का त्याग और एक सद्गुण ग्रहण का संकल्प सहित पूर्णाहुति सोल्लास संपन्न किया।इस कार्यक्रम में अपर चुटिया, मकचून्द टोली और रेलवे कॉलोनी महिला मंडल प्रतिनिधियों ने पूरा सहयोग किया। उक्त जानकारी जय नारायण प्रसाद और बैद्यनाथ केशरी ने दी। 

Published / 2026-06-04 20:54:07
लोहरदगा : बजरंग दल के युवा ने रक्तदान कर बचायी एक की जान

जरूरतमंद मरीज के लिए आगे आये बजरंग दल के युवा, ऋतिक गोयल ने किया रक्तदान 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। जिले में गुरुवार को बजरंग दल लोहरदगा के नगर सहसंयोजक अनुभव कुमार समाज सेवा के क्षेत्र में लगातार सराहनीय कार्य कर रहे हैं। जिसकी लोग प्रशंसा भी करते है जैसे ही उन्हें किसी जरूरतमंद मरीज को रक्त की आवश्यकता होने की सूचना मिलती है। 

वे अपने मित्रों एवं युवाओं से संपर्क कर रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रयास से कई जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो रहा है। बता दें कि बजरंग दल का गठन वर्ष 1984 में   युवा संगठन के रूप बजरंग दल का गठन किया गया। 

संगठन का मूल उद्देश्य सेवा, सुरक्षा और संस्कार के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र, समाज एवं धर्म के प्रति जागरूक करना है। संगठन समय-समय पर रक्तदान शिविर राहत कार्य, गौ सेवा, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ जरूरतमंदों की सहायता के लिए भी कार्य करता है। 

बजरंग दल के कार्यकर्ता सामाजिक समरसता और मानव सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसी कड़ी में कुछ दिनों से बीमार चल रहे धनेश्वर महतो को रक्त की आवश्यकता होने पर अनुभव कुमार ने युवाओं से संपर्क किया। सूचना मिलते ही युवा ऋतिक गोयल ने आगे बढ़कर एक यूनिट रक्तदान किया और मानवता की मिसाल पेश की। 

मौके पर समाजसेवी सचिन कुमार साहू ने कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है, जिससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से समाज सेवा और रक्तदान के प्रति जागरूक होने की अपील की है। 

इस अवसर पर हर्ष कुमार, आयुष तमेड़ा, अनुभव कुमार सहित अन्य युवा उपस्थित थे। सभी ने रक्तदाता ऋतिक गोयल के इस नेक कार्य की सराहना की और कहा कि आने वाले दिनों में भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए इसी तरह सेवा कार्य जारी रहेंगे। युवाओं की यह पहल समाज में मानवता और सेवा भाव का सकारात्मक संदेश दे रही है।

Published / 2026-06-01 22:05:16
धोली सती मैया, कर दो सबका बेड़ा पार..

श्री धोली सती दादी जी का उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया 

एबीएन सोशल डेस्क। पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा के पावन अवसर पर रांची लालपुर चौक स्थित साकेत सर्राफ के आवास में भक्ति और श्रद्धा के अद्भुत रंगों से सराबोर हो उठा, जब श्री धोली सती दादी महिला समिति द्वारा श्री धोली सती दादी जी उत्सव का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। 

पूरे वातावरण में भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि, दीप-प्रकाश की ज्योति और भक्तिमय आस्था की सौंधी सुगंध व्याप्त रही। कार्यक्रम की शुरुआत दादी जी के विशेष श्रृंगार के साथ हुई। आकर्षक फूलों से सजे दादी के दिव्य स्वरूप का दर्शन करते ही श्रद्धालुओं के चेहरों पर उमंग और भक्ति झलक उठी। 

इसके बाद सामूहिक मंगल पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने पूरी निष्ठा के साथ दादी जी की महिमा का गुणगान किया। समिति की सक्रिय सदस्या शशि सर्राफ एवं सविता सर्राफ सहित अन्य महिलाओं ने अपनी मधुर आवाज में कई भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए। इन भजनों ने वातावरण में आध्यात्मिक उत्साह को और भी दैदीप्यमान कर दिया।

गाए गए कुछ प्रमुख भजनों में दादी जी के दर पर आए, मन को मिला विश्राम, धोली सती मैया, कर दो सबका बेड़ा पार, आज पूर्णिमा के दिन दादी, तुम घर-घर दीप जलाओ... भजनों की सुरीली लहरों के बीच उपस्थित महिलाओं ने दादी जी के श्रीचरणों में आराधना एवं वंदन करते हुए सुख-समृद्धि की कामना की।

भजन-कीर्तन के पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम का समापन दादी जी की आरती और सभी के उत्तम स्वास्थ्य एवं कल्याण की प्रार्थना के साथ हुआ। दादी जी का महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सबों के हृदय में अविस्मरणीय स्मृतियां छोड़ गया। 

इस अवसर पर शशि सर्राफ, सविता सर्राफ, करुणा बागला, कविता सर्राफ,मधु सर्राफ, श्वेता सर्राफ, रेनू सर्राफ, ममता सर्राफ, संजीता सर्राफ, मंगला बागला, शशि, अनुराधा, रीना, विनीता, निधि, सावित्री, दीप्ति, सपना, माया, सीतू के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं। 

श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि धोली सती दादी जी नारी शक्ति, साहस और संरक्षण की प्रतीक हैं। उनकी आराधना से परिवार में शांति, सुख और समृद्धि का वास होता है।

Published / 2026-06-01 18:45:01
सरना समाज पर दूरगामी परिणामों पर चिंतन जरूरी : जगदीप भगत

व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा, आरोप-प्रत्यारोप और सरना समाज पर उसका प्रभाव या दुष्प्रभाव : दूरगामी परिणामों पर गहन चिंतन आवश्यक : जगदीप भगत  

एबीएन, न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को चुनाव लड़ने और राजनीति में भाग लेने का अधिकार है। यह अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन जब राजनीति का उद्देश्य समाज सेवा, समुदाय की एकता और जनहित के बजाय केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, पद प्राप्ति या राजनीतिक पहचान बनाना रह जाता है, तब उसके नकारात्मक प्रभाव समाज पर पड़ने लगते हैं। विशेष रूप से सरना समाज जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील समुदायों को इसका अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

आज कई बार देखा जाता है कि कुछ लोग चुनावी लाभ, लोकप्रियता या वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसे बयान दे देते हैं जिनके दूरगामी परिणामों पर पर्याप्त विचार नहीं किया जाता। सार्वजनिक जीवन में बोले गये शब्द केवल व्यक्तिगत विचार नहीं रह जाते, बल्कि वे समाज के भीतर भ्रम, मतभेद और विभाजन का कारण भी बन सकते हैं। 

यदि कोई व्यक्ति बिना तथ्यों की जांच किए, बिना सामाजिक प्रभावों को समझे या बिना समुदाय के व्यापक हितों को ध्यान में रखे बयान देता है, तो उसका असर आने वाले वर्षों तक दिखाई दे सकता है। सरना समाज की पहचान उसकी परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं, सामुदायिक एकता और पूर्वजों से प्राप्त सांस्कृतिक विरासत में निहित है। 

ऐसे में यदि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण समाज को विभिन्न गुटों में बांटने, एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने या सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया जाता है, तो इससे समाज की सामूहिक शक्ति कमजोर होती है। समाज की ऊर्जा अपने अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा में लगने के बजाय आंतरिक विवादों में खर्च होने लगती है। 

किसी भी समाज का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता या राजनीतिक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल वर्तमान की राजनीति तक सीमित नहीं होती। उनके शब्द और निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उदाहरण बनते हैं। इसलिए किसी भी विषय पर बोलने से पहले उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक परिणामों का गंभीरता से मूल्यांकन करना आवश्यक है। 

एक असावधान बयान या निर्णय समाज में अविश्वास, भ्रम और अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकता है। सरना समाज को आज एकता, जागरूकता और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं तब तक उचित हैं जब तक वे समाज के हितों के साथ जुड़ी हों। लेकिन यदि व्यक्तिगत लाभ को समाज के सामूहिक हित से ऊपर रखा जाता है, तो इसका नुकसान पूरे समुदाय को उठाना पड़ता है।

इसलिए आवश्यक है कि समाज के सभी जिम्मेदार व्यक्ति, चाहे वे राजनीतिक क्षेत्र में हों या सामाजिक क्षेत्र में, अपने विचारों और कार्यों में संयम, जिम्मेदारी और दूरदर्शिता का परिचय दें। समाज का हित, एकता और सांस्कृतिक अस्तित्व किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा से बड़ा होता है। इसलिए हर निर्णय और हर वक्तव्य समाज के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर ही दिया जाना चाहिए।

Published / 2026-05-31 19:04:32
व्यसनमुक्त एवं सृजनयुक्त झारखंड बनाना है : गायत्री परिवार

  • व्यसनमुक्त एवं सृजनयुक्त झारखंड बनाना है : गायत्री परिवार
  • गायत्री परिवार ने नशा निषेध व व्यसन उन्मूलन अभियान की शानदार रैली चुटिया की रेलवे कॉलोनी कृष्णापुरी काली मंदिर परिसर से निकाला

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 31.5.26 दिन रविवार प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से रांची रेलवे-स्टेशन कॉलोनी चुटिया कृष्णा पुरी में काली मंदिर, हनुमान मंदिर रोड नंबर 1 से रोड  नं 11 होकर  नशा निषेध दिवस कार्यक्रम चलाया गया।

जिसमें बड़ी संख्या में मोहल्ला निवासी एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा हर्षोल्लास के साथ बैनर, दफ्ती पोस्टर तले गीत संगीत, वादन गायन व जयघोष करते नशा मुक्ति कार्यक्रम का शानदार उदाहरण पेश किए।इस कार्यक्रम मे हमारे स्थानीय व ऊपरी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा।व्यसन विनाश का सोपान और नशाखोरी अभिशाप के समान है। 

रैली अभियान के संचालक मंडल प्रतिनिधियों, सहायकों ने शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में बहुत सुन्दर सराहनीय संदेश दिये। संदेश में व्यसन से नशा से होने वाले शारीरिक नुकसान, पारिवारिक परेशानी, सामाजिक हानि और राष्ट्रीय मानवीय गरिमा गिरावट पर अनेकानेक सद्विचार प्रकट किये। 

गीतों के मधुर स्वरों में भी संदेश दिया कि तनिक सोचो भैया बहिन थोड़ा थोड़ा सोचो, हजार बार सोचो आप गुटखा खाते हो, क्या पाते हो, नशा नाश की जड़ है भाई। इससे सदा दूर रहो, यह है बहुत दुखदाई।सभी जानते हैं कि नशा नुकसान दायक है। इससे दूर रहने का संकल्प और शक्ति का प्रयोग करने तथा नशा छोड़ने का अचूक  उपाय सुझाये गये। 

अंत में गीत संगीत व गायन वादन व उद्घोष माध्यम से  जीवन को व्यसन से नशा से बचाइए और नवसृजन में लगाइए का संदेश नशेबाजों को ध्यान से पढ़ने, पढ़ाने, समझाने व्यसन मुक्त स्वर्णिम भारत के महा अभियान की पुस्तिका तथा नशा निषेध अभियान का पम्पलेट  प्रचारक पत्र जन-जन तक पहुंचाए जाने के लिए  वितरित किये गये।

कार्यक्रम आयोजन की शुरुआत स्थानीय नगर निगम पार्षद के मंत्रोच्चारण व जयघोष से तथा समापन शान्ति से किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के कार्यकर्ता प्रचारक जय नारायण प्रसाद और अभय शंकर सिंह ने दी। 

Published / 2026-05-31 18:58:06
मुक्ति संस्था ने किया 36 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 31/05/ 2026 दिन रविवार को मुक्ति संस्था के द्वारा जुमार नदी के तट पर 36 अज्ञात शवों का पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार किया गया।

मुक्ति संस्था के सदस्यों ने रिम्स के मोर्चरी गृह से अज्ञात शवों को निकालकर पैक कर जुमार नदी के तट पर  लेकर गए इस दौरान संस्था के अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने अज्ञात शवों को मुखाग्नि दी।

संस्था के अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने बताया कि मुक्ति संस्था द्वारा अबतक कुल 2189अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। अंतिम अरदास परमजीत सिंह टिंकू ने किया। मौके पर संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। 

  • प्रवीण लोहिया
  • रवि अग्रवाल
  • संदीप पपनेजा
  • हरीश नागपाल
  • आर के गांधी
  • आदित्य शर्मा
  • सुमित अग्रवाल
  • राहुल चौधरी
  • सीताराम कौशिक
  • अरुण कुतरियार
  • संजय गोयल
  • उज्ज्वल जैन
  • वीरेंद्र कुमार गुप्ता
  • सौरभ बथवाल
  • अमित अग्रवाल
  • विजय धानुका
  • राहुल जायसवाल
  • राजा गोयनका
  • पंकज मिढ़ा 
  • कमल चौधरी
  • बलबीर जैन
  • मोती सिंह

Published / 2026-05-31 18:42:56
पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में उमड़ा आस्था का सागर

  • पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में उमड़ा आस्था का सागर
  • 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किये दर्शन

टीम एबीएन, रांची। परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम एवं श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। 

इस अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा तथा हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया कार्यक्रम के अंतर्गत मंदिर में ट्रस्ट की ओर से 268 वें श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का भव्य आयोजन किया गया। पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा के शुभ अवसर पर श्री राधा रानी का विशेष एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। 

उन्हें दिव्य एवं आकर्षक आभूषणों से अलंकृत कर मनोहारी स्वरूप प्रदान किया गया, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। सुसज्जित विग्रहों की छटा ने उपस्थित भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग अर्पित किया गया।

इसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण प्रारंभ हुआ। महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, बोतल बंद आम रस, शीतल जल तथा आलू चिप्स का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। 

कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों ने भगवान श्री श्याम एवं श्री राधा-कृष्ण की महिमा पर आधारित सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की मधुर स्वर लहरियों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में डूब गया। राधे-राधे और जय श्री कृष्ण के जयघोषों से वातावरण पूरी तरह कृष्णमय एवं भक्तिमय हो उठा। 

भजन-संध्या के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महाआरती में भाग लिया। शंखनाद और घंटियों की गूंज ने आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया। श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और विश्व कल्याण की कामना करते हुए प्रभु से सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और दिनभर में पांच हजार से अधिक भक्तों ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।

इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, अरविंद अग्रवाल, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत, संजय सर्राफ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ट्रस्ट सदस्य उपस्थित रहे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी। 

Published / 2026-05-30 21:46:18
पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा भक्ति, दान और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा 31 मई दिन रविवार को मनायी जायेगी। 

यह पूर्णिमा भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। पुरुषोत्तम मास लगभग 3 वर्ष के अंतराल पर आता है। हिंदू पंचांग चंद्र और सौर गणना पर आधारित है। दोनों के बीच समय के अंतर को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब इस अतिरिक्त मास को कोई देवता स्वीकार नहीं कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास घोषित किया। तभी से यह मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। 

पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है क्योंकि यह साधना, जप, तप, दान और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करती है। इस दिन प्रात:काल पवित्र नदी अथवा घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करने, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने तथा सत्यनारायण कथा सुनने या कराने का विशेष महत्व बताया गया है। 

श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान से सुख, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते हैं, इस पावन अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। अन्नदान, वस्त्रदान, जलदान, गौसेवा तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर किया गया दान कई गुना फलदायी माना जाता है। पुरुषोत्तम पूर्णिमा का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर धर्म, भक्ति, सेवा और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करना है। 

यह पर्व हमें संयम, सदाचार, करुणा और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देता है। इस दिन किये गये जप, तप, पूजा और सत्कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। 

अत: पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, पुण्य संचय और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ एवं पावन अवसर है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दिन की गयी उपासना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाली हैं।

Page 5 of 235

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse