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Published / 2025-05-22 22:00:18
हिमाचल के युल्ला कांडा में है दुनिया का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। युल्ला कांडा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के निचार तहसील में स्थित है और इसे दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित श्रीकृष्ण मंदिर माना जाता है।  यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,895 मीटर (12,780 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है और एक पवित्र झील के मध्य में स्थित है, जिसे पांडवों द्वारा उनके वनवास के दौरान बनाया गया माना जाता है। 
यहां हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर भव्य उत्सव आयोजित होता है, जिसमें किन्नौर और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु भाग लेते हैं। 
यात्रा की शुरूआत युल्ला खास गांव से होती है, जो रिकांग पिओ से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से लगभग 12 किलोमीटर की ट्रेकिंग करके मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। 
यह ट्रेक मध्यम कठिनाई का है और इसमें घने जंगलों, हरे-भरे घास के मैदानों और ऊंचे पर्वतीय रास्तों से होकर गुजरना होता है। 
यात्रा का सर्वोत्तम समय मई से अक्टूबर के बीच होता है, जब मौसम सुहावना होता है और रास्ते खुले रहते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यहां पहुंचना कठिन हो सकता है। 

दिल्ली से युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर (किन्नौर, हिमाचल) कैसे जायें :  

स्टेप 1

  • दिल्ली से शिमला (हिमाचल प्रदेश की राजधानी) 
  • हिमाचल रोडवेज (एचआरसीटीसी) या प्राइवेट वोल्वो बसें रोज चलती हैं (8-10 घंटे)। 
  • ट्रेन : दिल्ली से कालका तक ट्रेन लें,  
  • फिर कालका से शिमला के लिए टॉय ट्रेन। 
  • फ्लाइट : दिल्ली से शिमला (जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट) के लिए उड़ान।

स्टेप 2

  • शिमला से रिकांग पिओ (किन्नौर) 
  • दूरी: लगभग 230 किलोमीटर 
  • एचआरसीटीसी की बसें, शेयर टैक्सी या निजी टैक्सी से आप जा सकते हैं। 

स्टेप 3

  • रूट : शिमला, नारकंडा, रामपुर, पूह, रिकांग पिओ 
  • स्टेप 3: रिकांग पिओ से युल्ला गांव 
  • करीब 35 किलोमीटर 
  • शेयर जीप या प्राइवेट टैक्सी से जायें। 
  • युल्ला गांव से ही ट्रेक शुरू होता है। 

स्टेप 4

  • युल्ला गांव से युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर (ट्रेकिंग) 
  • दूरी: लगभग 12 किलोमीटर पैदल ट्रेक 
  • रास्ता जंगलों, घास के मैदानों और पहाड़ों से होकर जाता है।

Published / 2025-05-21 20:53:27
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा ने दो स्थानों पर लगाया स्थायी प्याऊ

टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा ने दो स्थानों पर ठंडे पानी की मशीन की व्यवस्था की। प्याऊ लगाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को गर्मी में राहत मिल सके एवं उन्हें शुद्ध स्वच्छ एवं ठंडा पानी मिल सके। पहले प्याऊ एलईबीबी हाई स्कूल लगाया गया, जिसका उद्घाटन उषा अग्रवाल से कराया गया। 

दूसरा प्याऊ हिंदपीड़ी फर्स्ट स्ट्रीट स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय में लगाया गया, जिसका उद्घाटन सुनीता सरावगी एवं सुनील सरावगी ने किया। मौके पर स्कूल के बच्चों ने सुंदर भजन एवं गाना गाकर एवं शाखा अध्यक्ष मधु सर्राफ को और सुनीता सरावगी को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।

स्कूल के प्रधानाचार्य ने इस नेक कार्य के लिए सभी बहनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थाई प्याऊ लगने से सभी को शुद्ध जल हमेशा मिल सकेगा उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है जल है तो कल है।  उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा ने दी। 

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शाखा अध्यक्ष मधु सराफ, निवर्तमान राष्ट्रीय सचिव रूपा अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष गीता डालमिया, अंशु नेवटिया, नैना मोर, प्रांतीय उपाध्यक्ष अलका सरावगी, उर्मिला पाड़िया, बिना मोदी, कुसुम पटवारी, सरिता अग्रवाल, प्रीति अग्रवाल, मंजू तुलस्यान, रीना सुरेखा, नूपुर सरावगी, के अलावे अन्य सदस्यों का सहयोग रहा।

Published / 2025-05-20 21:59:53
भारत में सामाजिक सुधार और बाल शोषण :  फातिमा

एबीएन सोशल डेस्क। बाल शोषण और सामाजिक सुधार की दिशा में नारी सशक्तिकरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक होती हैं, तब वे अपने बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। नारी सशक्तिकरण केवल महिलाओं को शक्ति देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को सशक्त बनाने की प्रक्रिया है। 

जब महिलाएं अपने अधिकारों को पहचानती हैं और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती हैं, तब वे बाल शोषण जैसी कुरीतियों के विरुद्ध भी एक मजबूत दीवार बन जाती हैं। एक सशक्त महिला अपने परिवार में सुरक्षित वातावरण बना सकती है, बच्चों को उचित मार्गदर्शन दे सकती है और समाज में बदलाव की लहर ला सकती है। 

इसलिए, बाल शोषण के उन्मूलन और सामाजिक सुधार के लिए नारी सशक्तिकरण को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। जब महिलाएं समाज में नेतृत्व करती हैं, तो वे बाल सुरक्षा और शिक्षा को अपनी प्राथमिकता में शामिल करती हैं, जिससे बाल शोषण जैसी कुरीतियों के खिलाफ सामाजिक वातावरण बनता है। परिवर्तन कुछ लौटने की अवधारणा को एक नया दृष्टिकोण देती है और यह दिखाती है कि एक व्यक्ति का प्रयास भी समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकता है। 

बाल शोषण और सामाजिक सुधार में नारी सशक्तिकरण की अलग भूमिका है: बाल शोषण एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जो केवल कानूनों से नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और संरचना में बदलाव से ही समाप्त हो सकती है। इस दिशा में नारी सशक्तिकरण एक सशक्त माध्यम है जो न केवल महिलाओं को सक्षम बनाता है, बल्कि समाज को भी सुरक्षित और संवेदनशील बनाता है। जब महिलाएं शिक्षित और जागरूक होती हैं, तो वे अपने बच्चों के अधिकारों और उनके मानसिक व शारीरिक विकास के प्रति सजग रहती हैं।

Published / 2025-05-18 21:27:39
पंछी को दाना- पंछी को पानी : जन जागरूकता अभियान का आयोजन

टीम एबीएन, रांची। श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) ने रविवार को मोरहाबादी मैदान स्थित आक्सीजन पार्क के मुख्य द्वार पर पंछी को दाना - पंछी को पानी - जन जागरूकता अभियान - वर्ष 2025 के दूसरे चरण का आयोजन किया। 

कार्यक्रम प्रात: 7 बजे शुरू किया गया जिसके तहत लोगों के बीच 250 सकोरा (मट्टी का बर्तन) एवं दाना का पैकेट का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया ताकी इस भीषण गर्मी में पक्षियों को पीने का पानी एवं दाना मिल सके साथ ही उनके प्राणों की रक्षा हो सके। 

लोगों को कार्यक्रम के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया कि प्रकृति के संतुलन में पक्षियों का अहम योगदान है। उनके रक्षार्थ यदि हम अभी जागरूक नहीं हुए तो वह दिन दूर नही जब पक्षी केवल किताबों एवम चित्रों तक सिमट कर रह जायेंगे। पक्षी हमारे बीच से विलुप्त न हो जाये और इस भीषण गर्मी से उनके प्राणों के रक्षार्थ यह पंछी को दाना - पंछी को पानी कार्यक्रम लोगों को जागरूक करने का एक अनूठा पहल है।

कार्यक्रम में लोगों के बीच लगभग 250 सकोरा एवं दाना के पैकेट को वितरित कर उनसे निवेदन किया गया कि अपने घरों के छत एवं आंगन पर इसमें पानी भर कर रखें और साथ ही पक्षियों के खाने के लिए दाना भी दें।  इसके पूर्व इस कार्यक्रम के पहले चरण में किशोर गंज रोड न. 1 स्थित एल. पी. पब्लिक स्कूल के बच्चों के बीच 200 सकोरा एवं दाना के पैकेटों का वितरण किया जा चुका है।

आज के कार्यक्रम में श्री सर्वेश्वरी समूह-  शाखा रांची की ओर से विभूति शंकर सहाय, हेमन्त नाथ शाहदेव, नवल किशोर सिंह, राधा मोहन मिश्रा, मानन्द सिंह, अभिजीत रौनियार, सुचित्रा शाहदेव, रचना रौनियार, गिरेन्द्र नाथ शाहदेव, अंजनी सिंह, रोहित कुमार सिंह, द्वेद नाथ शाहदेव, समुद्र नाथ शाहदेव, सौरभ राज, शांभवी शाहदेव, मानवेन्द्र नाथ शाहदेव, अक्षत नाथ शाहदेव शामिल हुए।

Published / 2025-05-18 21:05:31
पोप लियो 14वें के परमाध्यक्षीय काल के उद्घाटन की धर्मविधि

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 18 मई 2025 को संत पेत्रुस महागिरजाघर रोम में पोप लियो 14वें ने अपनी प्रेरिताई का उद्घाटन किया। इस धर्मविधि ने संत पेत्रुस और उनकी शहादत के साथ संबंध स्थापित किया, जो रोम के कलीसिया के आधार बने। पोप लियो 14वें के पदग्रहण के इस समारोह में उसे पालियुम और मछुआरे की अंगूठी  प्रदान की गयी। 

काथलिक कलीसिया में इन प्रतीक चिन्हों का विशेष महत्व होता है। पालियुम एक धार्मिक परिधान है, जो खोई हुई भेड़ को कंधे पर उठाने वाले चरवाहे के प्रतीक के रूप में पहनाया जाता है। इसे छह काले क्रूसों से सजाया गया है, जो प्रभु के क्रूस की याद दिलाते है।

वहीं, मछुआरे की अंगूठी पेत्रुस की विश्वास की मुहर है, जिसे उन्होंने येसु के आदेश पर मछलियां पकड़ी थीं। धर्मविधि की शुरुआत संत पेत्रुस महागिरजाघर में हुई, जहां पोप ने संत पेत्रुस की कब्र पर प्रार्थना की। इसके बाद, उन्होंने सुसमाचार और धर्मविधि के माध्यम से पोप के आधिकारिक कार्य का उद्घाटन किया। 

समारोह के अंत में, पोप ने सभा को आशीर्वाद दिया और यह प्रार्थना की कि ईश्वर कलीसिया को प्यार, एकता और कृपा में सुदृढ़ करें। इस विशेष अनुष्ठान के माध्यम से, पोप लियो 14वें ने अपनी प्रेरिताई का शुभारंभ किया।

Published / 2025-05-16 23:04:39
25 को जमशेदपुर से रातू रोड लाया जायेगा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप

  • गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा, रातु रोड में 25 मई को टाटानगर से पुष्प से सुसज्जित वाहन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप लाया जाएगा 

टीम एबीएन, रांची। गुरु नानक सत्संग सभा के तत्वाधान में 25 मई,रविवार को कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा साहिब से गुरु घर के सेवकों का जत्था श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को टाटानगर से रांची ले आने के लिए दोपहर 12:00 बजे रवाना होगा।

कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के विरध (वृद्ध) स्वरूप को पुष्प से सज्जित वाहन में विराजमान कर टाटानगर स्थित टेल्को गुरुद्वारा साहिब ले जाया जाएगा और यह स्वरूप धर्म प्रचार समिति,अकाली दल,जमशेदपुर को सौंप दिया जाएगा। वहां लंगर छकने के बाद वाहेगुरु जी से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के नये पावन स्वरूप को सड़क मार्ग द्वारा रांची ले आने की अरदास होगी तत्पश्चात वहां से दोपहर साढ़े तीन बजे जत्था रांची के लिए रवाना होगा। 

यह जत्था शाम सात बजे कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित नानक चंद जी अरोड़ा के चौक पहुंचेगा और वहीं से सत्संग सभा द्वारा नगर कीर्तन निकाला जाएगा, जिसमें श्रद्धालु पुष्प वर्षा और शबद गायन करते हुए गुरुद्वारा साहिब तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई करेंगे और गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को सुखासन कराया जाएगा। इस मौके पर सत्संग सभा द्वारा श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई है।

सत्संग सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने बताया कि टाटानगर से पुष्प सवारी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को बड़े ही श्रद्धाभाव से लाया जाएगा और कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सत्संग सभा में विराजमान किया जाएगा। इसको लेकर सभी तैयारियां कर ली गई हैं। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा (8709349310) ने दी।

Published / 2025-05-15 23:25:18
देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह का भव्य आयोजन

  • बिरसा हुंकार पत्रिका के नव स्वरूप का लोकार्पण भी हुआ

टीम एबीएन, रांची। विश्व संवाद केंद्र, झारखंड द्वारा ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा के पावन अवसर पर 15 मई 2025 को देवर्षि नारद जयंती सह पत्रकार सम्मान समारोह एवं बिरसा हुंकार पत्रिका  नये स्वरूप में लोकार्पण का आयोजन रांची कॉलेज परिसर स्थित आर्यभट्ट सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता एवं देवर्षि नारद जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। मंचस्थ अतिथियों का स्वागत पारंपरिक विधि से किया गया।

कार्यक्रम में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान-2025 तीन श्रेणियों में प्रदान किए गए। वरिष्ठ पत्रकार श्रेणी सीताराम पाठक जी गढ़वा, पलामू क्षेत्र  83 वर्षीय सक्रिय पत्रकार हैं, पद्मश्री बलबीर दत्त जी साथ राँची एक्सप्रेस, देशप्राण जैसे अनेकों संस्थानों  में अपनी सेवाएँ दी। महिला पत्रकार की श्रेणी में प्रभात खबर की वरिष्ठ संवाददाता लता रानी राँची, एवं नवोदित पत्रकार बीरबल यादव जामा, दुमका को यह सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही, विभिन्न स्थानों से आए हुए पत्रकारों को भी प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जागरण पत्रिका बिरसा हुंकार के नव स्वरूप का लोकार्पण भी मंचस्थ विशिष्ट अतिथियों के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। पत्रिका की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बिरसा सेवा स्मृति न्यास के अध्यक्ष राजेंद्र मिश्र ने कहा कि यह पत्रिका झारखंड की जनजातीय संस्कृति, सामाजिक चेतना एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों की एक सशक्त अभिव्यक्ति है।

मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा, वर्तमान समय में जब सूचनाओं का प्रवाह बिना सत्य और तथ्य की पुष्टि के हो रहा है, ऐसे में देवर्षि नारद जी के संवाद कौशल से पत्रकारों को सीख लेनी चाहिए।कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह से सत्य और तथ्य को जाने बगैर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है, ऐसे समय में देवर्षि नारद जी से पत्रकारों को सीख लेने की आवश्यकता है। हाल की घटनाओं पर उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना ने अपने पराक्रम का परिचय दिया। कई बड़े-बड़े मीडिया हाउस ने भी भ्रामक खबरें चलाईं। तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया। जबकि भारत के अंदर कई मीडिया हाउस ने अपनी सकारात्मक पत्रकारिता का परिचय दिया। 

उन्होंने कहा कि भारत की मीडिया की जिम्मेदारी ऐसे मौके पर और भी बढ़ जाती है ताकि समाज तक सत्य पहुंच सके। उन्होंने कहा कि देश की एकता के लिए राजनीतिक और भौगोलिक के साथ-साथ हमारे मन भी एक होने चाहिए। हमारे देश की एकता पर प्रहार करने वाले लोग पहले भी थे और आज भी हैं। आज देश की एकता के लिए जरूरी है कि हम सबमें समानताएं क्या हैं, उसे उजागर करना और उसे जोड़ना बहुत आवश्यक है।

हमें अपने देश के इतिहास को जानने के साथ-साथ उसे सही क्रम में जानना भी उतना ही जरूरी है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि आज भारत में भाषा के नाम पर राजनीति हो रही है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि हमारी भाषाएं आपस में ही एक-दूसरे की बहनें हैं। भारत की सारी भाषाएं एक-दूसरे से मिलकर ही आगे बढ़ीं और विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि आने वाली तकनीक हमारी भाषाओं के साथ हमें भी जोड़ने का काम करे, ऐसी ही कोशिश हमें भी करनी होगी। भाषाओं के बाद उन्होंने बताया कि कई लोग हमें जातियों में भी विभक्त करने की कोशिश करते रहते हैं।

उन्होंने बताया कि झारखंड में कई तरह के जनजातीय समाज के लोग रहते हैं। उन्होंने झारखंड की जनजातीय समाज की संस्कृति को हिंदू संस्कृति का सबसे शुद्धतम स्वरूप बताया। वही संस्कृति धीरे-धीरे अन्य गांव और शहरों में आई, वह अलग-अलग तरीके से विकसित होती चली गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की कई बातें लोग भूल जाते हैं। इसीलिए आज की पत्रकारिता में हमें समाज में इस बात को बार-बार पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विकास की कथा से जानबूझकर कुछ पन्ने हटा दिए गए और कुछ पन्ने जोड़ दिए गए, जिसके कारण समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। इन्हीं बातों को बताते हुए उन्होंने कहा कि आज देवर्षि नारद को आदर्श मानकर ही पत्रकारिता करने की आवश्यकता है।

उन्होंने आगे बताया कि पिछड़े और गरीबों के हितों के नाम पर हिंसक आंदोलन भी किए गए, जिनसे कभी उन गरीबों का भला नहीं हो पाया। वहीं कई क्षेत्रों में वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यों का जिक्र किया, जिनके कारण उन क्षेत्रों में विकास और शांति देखी गई, जबकि वर्षों से उन्हीं के नाम पर लोगों को भ्रमित करने वाले माओवादी और मिशनरी प्रभावित क्षेत्रों में विकास और शांति स्थापित नहीं हो पाई।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 वर्षों का हो चुका है। 100 वर्ष पहले परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी ने कहा था कि असामान्य काम सामान्य लोग एक साथ मिलकर आसानी से कर सकते हैं। यह अब हमारे समाज में दिखने लगा है। उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कोरोना के समय को याद करते हुए कहा कि सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और ऐसी कई संस्थाएं थीं, जिन्होंने मिलकर सरकार का साथ दिया और इस महामारी से लड़ा। उन्होंने झारखंड की जनजातीय संस्कृति को हिंदू संस्कृति का शुद्धतम स्वरूप बताया और कहा कि यह संस्कृति पूरे भारतवर्ष की सांस्कृतिक एकता का मूल है।

मुख्य अतिथि के रूप में विकास भारती के सचिव पद्मश्री अशोक भगत ने देवर्षि नारद जी की जयंती पर कहा कि आज के समय में देवर्षि नारद जी ने ही तथ्य और सत्य पर आधारित सकारात्मक पत्रकारिता की शुरुआत की थी। आज भी इसी सकारात्मकता के साथ पत्रकारिता की आवश्यकता है। प्रत्येक पत्रकार को नारद जी को ही अपनी प्रेरणा मानकर काम करना चाहिए और यही कारण है कि हम आज नारद जयंती मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रेरणादायक पत्रकारिता वही होती है जो समाज को दिशा दे, उसे जागरूक करे और रचनात्मक संवाद स्थापित करे।

विशिष्ट अतिथि क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन जी, विश्व संवाद केंद्र अध्यक्ष रामावतार नारसरिया तथा बिरसा सेवा स्मृति न्यास अध्यक्ष राजेंद्र मिश्र ने भी अपने विचार साझा किए और नारद जी की पत्रकारिता परंपरा को आज के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक बताया। कोविड काल में समाज सेवा के उदाहरणों से संघ की सामाजिक भागीदारी को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में रामावतार नारसरिया ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और वंदे मातरम् गीत के साथ समारोह का समापन हुआ।इस कार्यक्रम में समाज के अनके वर्गों की सहभागिता रही। डॉ अजीत कुमार, डॉ तपन शांडिल्य,करमवीर सिंह,राकेश लाल, धनंजय सिंह, डॉ सुभाष यादव, संजय जैन, मयूर मिश्र, जिज्ञासा ओझा, प्रतिष्ठा सिंह, मनोज भारद्वाज, सुषमा कुमारी, संजीव गोस्वामी, विवेक सिंह, दीपक पांडेय, बिनायक मिश्र, पंकज वत्सल, चंदन मिश्र, डॉ गोपाल पाठक, डॉ मयंक मुरारी, शशांक राज, भानु जालान, राजीव कमल बिट्टू, विजय घोष, प्रशांत पल्लव, रवि प्रकाश, रोहित शारदा, निलेश कुमार, डॉ सतहिश मिद्धा, धनंजय पाठक, प्रकाश, विकास कुमार इत्यादि अनेकों गणमान्य व्यक्तियों के साथ साथ प्रेस के साथियों ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दी।

Published / 2025-05-14 22:06:04
देखें वीर अनेक

Pallavi Singh

देखें वीर अनेक,  

अब शेरनी की दहाड़ है। 

एक आसमान की बिजली  

दूसरी भूकंप की आगाज है।।  

विंग कमांडर वोमिका सिंह  

करनल सोफिया कुरैशी  

भारत माता की शान है।। 

 

सिंदूर मिटाने वाले आतंकी,  

तुझे एक चुटकी सिंदूर की कीमत बतायेंगे 

भारत मां के बच्चे हम 

आपरेशन संकल्प हमारा  

तुझसे भारत माता की जय के नारे लगायेंगे। 

 

कलमा पूछ के मारने वाले,  

तुझे कलमा का मतलब बतायेंगे  

जय श्री राम के नारे लगवोंगे।।

 

मत भूलो पाकिस्तान,  

1971 में तेरे टुकड़े हुए।  

इंदिरा ही थी वह नारी,  

हर भारतीय के दिल में बसी है मां काली।।

आतंकी, रोते हुए तुने हमें छोड़ा था,  

सुनो हम हिंद की नारी हैं,  

हिम्मत ही सुहाग हमारा,  

मातृभूमि के खातिर, कुर्बान है जहां सारा ।।

 

और कहा था तुने मोदी को जाकर बताओ 

आ गये हैं तुझे मिटाने  

भारत की सीमा को अफगानिस्तान से मिलाने, 

जय मां भवानी, जय हिंद, जय हिंद की सेना।। 

(कवयित्री रिम्स रांची बीडीएस की तीसरे वर्ष की छात्रा है।) 

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