एबीएन सोशल डेस्क। संपूर्ण भारतवर्ष में हर साल की भांति इस साल भी 31 मई को लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी का 300वा जन्म उत्सव (जयंती) संपूर्ण भारत बर्ष मैं बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाने जा रहे हैं।
योगाचार्य महेश पाल लोक माता देवी अहिल्याबाई जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताते हैं कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई द्वारा किए गए समाज सेवा के कार्य समाज के हित में और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपने समाज सेवा के कार्य अपनी धर्म परायण नीति, न्याय प्रिय नीति और अपनी राजनीतिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालन करने के लिए पूरे विश्व में विख्यात है।
जिस तरह से उन्होंने अपने राज्य को संभाला और मानव सेवा के कार्य के साथ साथ पूरे भारतवर्ष में मंदिरों घाटों का पुनर्निर्माण करवाया जिन्हें विदेशी आक्रमण द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था, लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी का जन्म महाराष्ट्र के चौड़ी ग्राम में 31 मई 1725 मै भेड़-बकरी पशुपालक गाडरी-धनगर (पाल-बघेल-होल्कर) परिवार में हुआ, वह बचपन से ही स्वभाव से चंचल चतुर समझदार न्याय प्रिय, धार्मिक थी।
उनका विवाह मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर के साथ हुआ एक युद्ध में खंडेराव होलकर की मृत्यु हो गई उसके पश्चात सन 1767 में मालवा के शासन व्यवस्था महारानी अहिल्याबाई जी ने संभाली और और एक आदर्श हिंदू राज्य व्यवस्था स्थापित की, सनातन धर्म के न जाने कितने तीर्थ मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया घाटों का निर्माण करवाया मानव सेवा के कार्य में बावड़ियों छायादार वृक्ष एवं जनहित के कार्य किये।
महारानी अहिल्याबाई जी ने मालवा क्षेत्र पर लगभग 30 साल तक शासन किया उन्होंने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया,लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी द्वारा किए गए सामाजिक कार्य धार्मिक क्षेत्र के कार्यों द्वारा आज उन्हें संपूर्ण भारतीय जनमानस में देवी का दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं, मालवा में तो उन्होंने एक आदर्श हिंदू राज्य स्थापित किया ही लेकिन अपनी राज्य की सीमाओं से परे जाकर भी उन्होंने मंदिरों घाटों का पुनरुद्धार किया।
आज जिन भी स्थानों को हिंदू सनातन तीर्थ स्थानों के रूप में जाना जाता हैं उसके 80 फीसदी निर्माण और पुनरुद्धार लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी द्वारा कराए गए हैं, जिसमें, काशी, विश्वनाथ, बैद्यनाथ, सोमनाथ, ओंकारेश्वर, भीमाशंकर, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं बड़े बड़े कुण्ड, धर्म शालाओ, का निर्माण कराया, पुष्कर से लेकर गया तक, अयोध्या मथुरा से लेकर केरल तमिलनाडु तक महारानी अहिल्याबाई जी ने सैकड़ो तीर्थ व मंदिरों को पुनर्जीवित किया काशी, गया, सोमनाथ, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार कांची, द्वारका, बद्रीनारायण, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी का आज जो भी रूप हम देखते हैं वह अहिल्याबाई जी की ही देन है।
अपनी 70 वर्ष के जीवन में चाहे कितने ही दुख झेले हो अहिल्याबाई होल्कर जी ने लेकिन 30 साल के अपने शासन में एक शासक के रूप में वह हमेशा जनता की सेवा में ललगी रही इसलिए आज भी कई राज्यों में उनके नाम से कई लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रहे हैं वही मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अहिल्या विकास बोर्ड का गठन भी किया गया है।
हमारे भारतीय समाज के युबाओ को महान वीर वीरांगनाओं के जीवन व उनके चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व से कुछ सीखना चाहिए जिससे कि हमारा युवा पीढ़ी राष्ट्र के लिए कुछ कर सके राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सके समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म कर एक नए उत्तम संस्कारबान समाज व पीढ़ी को गढ़ सके।
देवी अहिल्याबाई जी का पूरा जीवन संघर्षों के साथ बीता लेकिन फिर भी वह धर्म के साथ डटी रही और पूरे विश्व में हिंदू सनातन धर्म को स्थापित कर पूरे भारतीय समाज की प्रेरणा स्रोत बनी इसी तरह हम सबको भी अपने जीवन में उच्च कार्यों को करते हुए अपने जीवन को सफल बनाना है और राष्ट्र के निर्माण मै अहम योगदान देना है।
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाता है। इसी दिन सन् 1826 में उदन्त मार्तण्ड नामक पहले हिंदी समाचार पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ था। इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है। उदन्त मार्तण्ड का संपादन और प्रकाशन पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने किया था।
यह साप्ताहिक समाचार पत्र कोलकाता से प्रकाशित हुआ, जो उस समय भारत में अंग्रेजी शासन का प्रमुख केंद्र था। यद्यपि यह समाचार पत्र आर्थिक कारणों से केवल 79 अंक ही निकाल पाया, परंतु इसने हिंदी पत्रकारिता की नींव रख दी। हिंदी पत्रकारिता ने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। इसने आम जनमानस को अंग्रेजों के अत्याचारों से अवगत कराया और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के विचारों को जन-जन तक पहुँचाया।
हिंदी समाचार पत्रों ने लोगों में चेतना जगाने का काम किया और भारतीय अस्मिता को शब्दों में ढाला। आजादी के बाद हिंदी पत्रकारिता ने लोकतंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह आम जनता और सरकार के बीच सेतु का कार्य करती है। लोकतंत्र में चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता सत्ता पर निगरानी रखने का कार्य करती है और जनहित के मुद्दों को उठाती है।
वर्तमान समय में डिजिटल युग ने पत्रकारिता के स्वरूप को व्यापक रूप से बदला है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का प्रभाव बढ़ा है। सोशल मीडिया के माध्यम से समाचार तेजी से फैलते हैं, लेकिन इसके साथ ही फेक न्यूज़ और भ्रामक जानकारी की चुनौती भी सामने आई है। ऐसे में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है।
हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस आंदोलन की याद दिलाता है जिसने हिंदी को जनसंवाद की भाषा बनाया। यह दिवस पत्रकारों को उनके उत्तरदायित्व की याद दिलाता है कि वे निष्पक्ष, निर्भीक और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता करें। यह समाज को सच से जोड़ने और लोकतंत्र को मजबूती देने का अवसर है।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग में श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा- कृष्ण मंदिर मे वट सावित्री पूजा एवं सोमवती अमावस्या का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मौके पर श्री राधा कृष्ण का अलौकिक भव्य श्रृंगार, विशेष पूजा अर्चना, प्रसाद भोग, भजन संध्या एवं सामूहिक महाआरती की गयी।
श्री राज श्याम जी को फल, मेवा, चूरमा, पेड़ा का विधिवत भोग पुजारी अरविंद पांडे द्वारा लगाया गया। तथा पूरे विधि विधान एवं मंत्रोच्चार साथ पूजा-अर्चना एवं महाआरती की गयी। मंदिर में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं बड़ी संख्या में महिलाओं ने हाथ जोड़कर परिवार के सुख शांति समृद्धि के लिए भगवान श्री राधा कृष्ण से प्रार्थना की। सबों ने सामूहिक महाआरती में भाग लिया। तत्पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद भोग का वितरण किया गया।
तत्पश्चात 2 घंटे तक चले भजन- कीर्तन के कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी द्वारा गाये मनमोहक सुमधुर भजनों में- कर लो सावित्री पूजा जीने का सहारा है या मैया जी को प्यारा है..., देना हो तो दीजिए जनम-जनम का साथ मेरे सर पर रख दो कान्हा अपने ये दोनों हाथ..., कान्हा ने किया मिस कॉल की राधा बोले हेलो हेलो..., नाचो गाओ खुशी मनाओ झूमो रे सब आज कन्हैया आया है भक्तों के घर आया है... की अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रद्धालुओं को खूब झुमाया एवं पूरे मंदिर परिसर को वृंदावन कृष्णमय बना दिया।
ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति में विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने से त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा प्राप्त होती है जिससे जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह महिलाओं के शक्ति समर्पण और प्रेम का भी प्रतीक है।
मौके पर डुंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, पूरणमल सर्राफ, सुरेश भगत, सुरेश अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, पवन पोद्दार, शिव भगवान अग्रवाल, विशाल जालान, संजय सर्राफ, सुनील पोद्दार, अरविंद अग्रवाल, विष्णु सोनी, मधु जाजोदिया, अंजनी अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे।
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। पश्चिमी दिल्ली के आर्यसमाज मंदिर रानीबाग के सत्संग भवन में श्री अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ के तत्वावधान में आयोजित 42वें वैचारिक क्रांति शिविर में बोलते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आज कहा कि जनजातीय समाज के जीवन मूल्यों की रक्षा से ही समरस समाज के साथ समृद्ध राष्ट्र का निर्माण हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम 14 वर्ष के वनवासी जीवन की पूर्णता पर ही भगवान् श्री राम बन पाए। 13 वर्ष के वनवास व एक वर्ष के अज्ञात वास के बाद ही पांडव महा भारत को जीत पाए। वनांचल में रहने वाले जनजातीय समाज की समृद्ध प्राचीन परंपराओं ने ही देश को भगवान् बिरसा मुंडा, सिद्धु-कान्हु, टंट्या भील, भीमा नायक, रानी गाइडिनल्यू और लक्ष्मण नायक जैसे अनेक वीर वीरांगनाएं विद्वान् व महापुरुष दिए। हमें इन परंपराओं पर गर्व है। ऐसे शिविरों में सीखे यम नियम आसन प्राणायाम ध्यान व राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण की भावनाएं ही हमें बड़ा और महान् बनाती हैं।
असम नगालैंड मिजोरम त्रिपुरा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ उड़ीसा राजस्थान, बिहार, झारखंड, यूपी व उत्तराखण्ड जैसे दर्जन भर राज्यों के वनवासी, गिरिवासी व जनजातीय क्षेत्रों से आए 150 छात्र छात्राओं के साथ लगभग एक सौ बालबाडी शिक्षकों के सप्ताह भर चलने वाले इस शिविर के तीसरे दिन आज ओजस्वी संत श्री स्वामी सच्चिदानंद ने उनका यज्ञोपवीत संस्कार कराया।
दर्शनाचार्य विमलेश आर्या ने तो अपनी काव्यमयी प्रश्नोत्तरी द्वारा बच्चों को खेल -खेल में ही महत्वपूर्ण जानकारी देकर बहुत आनंद दिलाया तथा अपनी स्वरचित पुस्तक दयानंद मंजरी भी विजेता बच्चों में वितरित की।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक व भाजपा मन्दिर प्रकोष्ठ के संयोजक ने भी अपने विचार रखे तथा संघ के महामंत्री श्री जोगिंद्र खट्टर के साथ समस्त आयोजक टीम व अन्यान्य संगठनों के लगभग 150 बंधु भगिनी व प्रबुद्ध जन भी उपस्थित थे। आचार्य जीव वर्धन, स्वामी विश्वामित्र जी भी मंच को शोभायमान कर रहे थे तथा भजन गायक श्री विनोद आर्य के प्रेरक मधुर भजन भी हुए। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दी।
टीम एबीएन, रांची। गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा, रातु रोड में आज 25 मई, रविवार को टाटानगर से पुष्प से सुसज्जित वाहन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप लाया गया। गुरु नानक सत्संग सभा के तत्वाधान में गुरुनानक सेवक जत्था के श्रद्धालु मनीष मिढ़ा के नेतृत्व में कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को टाटानगर से रांची ले आने के लिए दोपहर बारह बजे चार पहिया वाहनों से रवाना हुए।
जिसमें कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पांच विरध (वृद्ध) स्वरूप और संची साहिब को पुष्प से सज्जित वाहन में विराजमान कर सड़क मार्ग से टाटानगर स्थित टेल्को गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया और यह स्वरूप धर्म प्रचार समिति, अकाली दल, जमशेदपुर को सौंप दिया गया। वहां लंगर छकने के बाद वाहेगुरु जी से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के नये पावन स्वरूप को सड़क मार्ग द्वारा रांची ले आने की अरदास हुई।
तत्पश्चात वहां से शाम छह बजे जत्था रांची के लिए रवाना हुआ। यह जत्था रात नौ बजे कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित नानक चंद जी अरोड़ा के चौक पहुंचा और वहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पांच पावन स्वरूप के स्वागत में पहले से ही स्त्री सत्संग सभा की कीर्तन मंडली के सदस्य शबद गायन कर रहे थे। पावन स्वरूप के पहुंचते ही वहां पर मौजूद लगभग पंद्रह सौ श्रद्धालुओं ने बोले सो निहाल सत श्री अकाल का जयघोष कर श्री पावन स्वरूप का श्रद्धाभाव से स्वागत किया और नगर कीर्तन निकाल कर पुष्प वर्षा और शबद गायन करते हुए गुरुद्वारा साहिब तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई की.
कीर्तन मंडली की शीतल मुंजाल,गीता कटारिया,इंदु पपनेजा,नीता मिढ़ा,मंजीत कौर,रेशमा गिरधर,बबीता पपनेजा,सुंदर दास मिढ़ा,सुरजीत मुंजाल,रमेश पपनेजा एवं इंदर मिढ़ा ने रास्ते भर " ...." एवं " दर्शन देख जीवां गुरु तेरा पूरण करम होये प्रभु मेरा...." तथा " आज्ञा भई अकाल की तबै चलायो पंथ,सब सिखन को हुकुम है गुरु मानयो ग्रंथ...." जैसे कई शबद गायन कर कृष्णा नगर कॉलोनी को भक्तिमय कर दिया.सभी महिला श्रद्धालु सफेद सलवार कमीज और केसरिया दुपट्टाऔर पुरुष श्रद्धालु सफेद कुर्ता पायजामा पहन कर नगर कीर्तन में शामिल हुए. पावन स्वरूप के गुरुद्वारा साहिब पहुंचने पर सत्संग सभा द्वारा सजाए गए विशेष दीवान में हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह जी ने " धन धन हमारे भाग घर आया पीर मेरा......" एवं " जे होवै भाग ता दरसन पाईऐ आपि तरै सभ कुटम्ब तराईऐ...." शबद गायन कर गुरु ग्रंथ साहिब जी की महिमा का गुणगान किया.जानी जिवेंदर सिंह जी द्वारा अरदास,हुकुमनामा के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को सुखासन कराया गया.कढ़ाह प्रशाद वितरण के साथ कार्यक्रम की समाप्ति रात 10:30 बजे हुई.मंच संचालन मनीष मिढ़ा ने किया.सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप के आगमन की समूह साध संगत को बधाई दी. इस मौके पर सत्संग सभा द्वारा श्रद्धालुओं के लिए गुरु का अटूट लंगर चलाया गया .
आज के कार्यक्रम में सुरेश मिढ़ा,हरगोबिंद सिंह,लेखराज अरोड़ा,महेश सुखीजा,प्रेम मिढ़ा,नरेश पपनेजा,चरणजीत मुंजाल,अशोक गेरा,सुभाष मिढ़ा,हरजीत बेदी,हरविंदर सिंह हन्नी,मोहन लाल अरोड़ा,नीरज गखड़, अश्विनी सुखीजा,रमेश गिरधर,सागर थरेजा,मोहन काठपाल,जीवन मिढ़ा,अनूप गिरधर,बिनोद सुखीजा,हरीश मिढ़ा,इंदर मिढ़ा,रमेश पपनेजा,नानक चंद अरोड़ा,महेंद्र अरोड़ा,राजकुमार सुखीजा,बसंत काठपाल,लक्ष्मण अरोड़ा,पंकज मिढ़ा,आशु मिढ़ा,नवीन मिढ़ा,पवनजीत सिंह खत्री,पुरुषोत्तम सरदाना,अमरजीत सिंह मुंजाल,राजेंद्र मक्कड़,नीरज सरदाना,ईशान काठपाल,किशन गिरधर,सूरज झंडई, करण अरोड़ा,इनीश काठपाल,कुणाल चूचरा,कमल मुंजाल,उमेश मुंजाल,राकेश गिरधर,रमेश तेहरी,कमल धमीजा,अजय मुंजाल,जय गाबा,पीयूष थरेजा,जसवंत चूचरा,मनीष मल्होत्रा,पीयूष मिढ़ा, मनोहरी काठपाल,बबली दुआ, तीर्थी काठपालिया,शीतल मुंजाल,मनजीत कौर,हरजिंदर कौर,बिमला मिड्ढा,रमेश गिरधर,रेशमा गिरधर, नीता मिड्ढा,ममता थरेजा,नीतू किंगर, इंदु पपनेजा,दुर्गी देवी मिड्ढा, खुशबू मिड्ढा,आशा मिड्ढा,एकता मिड्ढा,गूंज काठपाल,रश्मि मिड्ढा,उषा झंडई,बबीता पपनेजा, पूनम मुंजाल, किरण अरोड़ा,बंसी मल्होत्रा,श्वेता मिड्ढा,अमर मुंजाल,अंजू धमीजा,किरण मक्कड़,जसवीर मुंजाल,सुषमा गिरधर,अमर बजाज,रजनी तेहरी,अंजू काठपाल, रजनी मक्कड़, मीडिया प्रभारी, नरेश पपनेजा (8709349310) भी थे।
टीम एबीएन, रांची। हाल ही में Zoca Dine & Bar में आयोजित BGMI (बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया) चैंपियनशिप लीग ने न केवल क्षेत्र के प्रतिभाशाली गेमर्स को एक मंच प्रदान किया, बल्कि समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी गौरवपूर्ण बना दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्वामी मुक्तरथ बाबा की उपस्थिति ने एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयाम जोड़ा। यह संदेश स्पष्ट था कि आज के युवाओं के सपनों और रुचियों को अब समाज के हर वर्ग से समर्थन मिल रहा है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से हिमांशु पांडे, रजत कुमार, और त्रिप्त संभव ओझा जैसे विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहे, जिन्होंने न केवल प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरणादायक संवाद भी प्रस्तुत किया।
यह आयोजन केवल प्रतियोगिता का मंच नहीं था, बल्कि यह कौशल, रणनीति और युवा ऊर्जा का उत्सव था। Zoca Dine & Bar ने एक आदर्श आयोजन स्थल के रूप में शानदार माहौल प्रदान किया, जहां खेल और मनोरंजन दोनों का सुंदर मेल देखने को मिला।
हम इस आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि भविष्य में भी इस प्रकार के ईस्पोर्ट्स कार्यक्रमों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलता रहेगा। ईस्पोर्ट्स केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि आने वाला भविष्य है — और यह देखकर खुशी होती है कि इसे इतनी सकारात्मकता और स्वीकार्यता के साथ अपनाया जा रहा है।
टीम एबीएन, रांची। प्रतिभा ग्रुप द्वारा आयोजित चार दिवसीय समर कैंप कार्यक्रम का समापन हुआ। गायत्री मंदिर सेक्टर टू युग निर्माण कन्या विद्यालय स्कूल कैंपस में ये कार्यक्रम आयोजन 20 मई से 23 मई तक चला। इसका आयोजन ग्रुप की संचालिका कुमारी अनुपमा द्वारा किया गया।
ग्रुप की मेंबर रिंकू सिंह, अनीता, कृष्णा, ज्योत्सना, शैला सिंह, आराधना, सुनीता पांडे, षोडशी रानी, विद्या, नीतू, मीनू शुभश्री तिवारी, नीलिमा, श्यामा, इन सबने भरपूर सहयोग किया। इसमें बच्चे खेल खेल में धार्मिक गतिविधि में भाग लिये एवं गेम्स, डांस म्यूजिक, पेंटिंग, जनरल नॉलेज के अलग अलग पीरियड में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिये। प्रतिभा ग्रुप के सारे मेंबर्स का इस कार्यक्रम में सराहनीय योगदान रहा। बच्चों के बीच आज प्राइज बांटा गया।
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने गायत्री मंदिर के प्रबंधक जटाशंकर झा एवं रांची विमेंस कॉलेज की प्रोफेसर इंग्लिश डिपार्टमेंट अनीता सिंह सेल सिटी क्लब की प्रेसिडेंट और समाज सेवी एवं बीजेपी महिला मोर्चा झारखंड प्रदेश की मंत्री नीलम चौधरी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इसे सफल बनाया। उक्त जानकारी प्रतिभा ग्रुप की सदस्य रिंकू सिंह ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उम्र बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इससे आपके आॅर्गन्स की फंक्शनिंग भी प्रभावित होती है, इनमें ब्रेन भी शामिल है। उम्र बढ़ने के साथ ही याददाश्त का कमजोर होना एक आम बात है। इसीलिए आपके दादा-दादी, नाना-नानी को भी बातों को याद रखने और चीजों पर ठीक तरीके से फोकस कर पाने में कठिनाई हो सकती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं अपने डेली रूटीन में आप एक चीज को शामिल करके अपने ब्रेन की एज को कम कर सकते हैं। जी हां, ये संभव है मेडिटेशन से। हाल ही में हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने भी एक नई रिसर्च में पाया है कि एडवांस मेडिटेशन ब्रेन के बायोलॉजिकल एज को कम कर सकता है। रिसर्च के मुताबिक, नियमित और डीप मेडिटेशन करने वाले लोगों का दिमाग औसत 5.9 साल तक जवान पाया गया।
जानकारी के लिए आपको बता दें यह शोध ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरू द्वारा विकसित समयमा साधना नामक मेडिटेशन रिट्रीट में भाग लेने वाले ध्यानकर्ताओं पर आधारित है। जब वैज्ञानिकों ने समयमा साधना में भाग लेने वाले लोगों के दिमाग की जांच की, तो इसके चौंकाने वाले नतीजे सामने आये।
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