एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/ रांची। गायत्री परिवार जिला लोहरदगा में गायत्री जयंती, गंगा दशहरा, महाप्रयाण दिवस बड़े धूमधाम और हर्षोउल्लास पूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। इस निमित विभिन्न कार्यक्रम संपन्न हुए। गायत्री जयंती के पूर्व शंध्या में 12 घंटे का अखण्ड जप गायत्री शक्तिपीठ लोहरदगा में संपन्न हुआ।
गायत्री जयंती के दिन 5 कुण्डीय महायज्ञ हुआ। इसी दिन सिठियो नदी में भव्य गंगा आरती भी संपन्न हुआ। गायत्री परिवार के नैष्ठिक परिजनों ने पूज्य गुरुदेव और माताजी के युग निर्माण योजना और विचार क्रांति अभियान को सफल बनाने तथा मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण के सपने को साकार रूप देने के लिए अपने दिक्षा व संकल्प को याद किया।
सभी कार्यक्रमों में परिजनों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। प्रखंडों के परिजन भी सक्रिय रहे। उक्त जानकारी लोहरदगा गायत्री परिवार, शक्तिपीठ के जिला समन्वयक अनिल कुमार साहु ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंडल, रांची द्वारा अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में आज दिनांक 7 जून 2025 को खाटू नरेश श्याम बाबा को चांदन द्वादशी के पावन अवसर पर संध्या 6:30 से 9 बजे तक श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया गया।
आज के भोग के मुख्य यजमान रमेश बंका ने अपने पूरे परिवार के साथ जिनमें सुरेश बंका, नरेश बंका, अनामिका बंका, आशा बंका, पदमा बंका, नीरज बंका, अभिषेक बंका ने श्याम बाबा को खीर चूरमा का भोग अर्पित किये।
सर्वप्रथम मंडल के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बागला, मंत्री धीरज बंका एवं गोयल परिवार द्वार गणेश पूजन कर मंदिर में विराजे वीर बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी पूजन कर विभिन्न प्रकार के फल एवं मिष्ठान अर्पित कर श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमे का भोग अर्पित किया। मौके पर पूरा मंदिर परिसर हारे के सहारे की जय लखदातार की जय जयकारों के गूंज उठा।
द्वादशी के दिन श्री श्याम प्रभु का प्रिय भोग खीर चूरमा को लेने भक्तगण कतारबद्ध होकर प्राप्त कर रहे थे साथ ही श्री श्याम मण्डल के कार्यकर्ता आए हुए भक्तजनों को शुद्ध पिय जल का वितरण कर रहे थे तथा उनके चरण पादुका को रखने की उत्तम व्यवस्था बना हुआ था। आज के खीर चूरमा का भोग श्री श्याम मन्दिर में ही निर्मित किया गया तथा 350 से ज्यादा भक्तजनों प्रसाद प्राप्त किया।
आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महेश सारस्वत, प्रियांश पोद्दार, विकास पाड़िया, मनोज ढांढनीयां, नितेश लखोटिया, का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन मार्ग, रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रान्त मुख्य जोन गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू,शक्तिपीठ अलकापुरी, प्रज्ञापीठ बसस्टैंड स्थित धूर्वा एवं चेतना केन्द्र टाटीसिलवे सहित अनेक इकाई व रांची जिला अंतर्गत प्रखंड प्रकोष्ठ में गंगा दशहरा, गायत्री जयंती सह वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रज्ञावतार स्वरूप, उनका इस दिन महाप्रयाण,अखंड ज्योति एवं यज्ञीय अनुष्ठान, एकादशी व्रत जप, त्रिदिवसीय हर्षोल्लास मनाया गया।
शान्तिकुञ्ज के निर्देशानुसार कई कार्यक्रम आयोजित हुए व निर्देश बताए गए। गायत्री जयंती की पूर्व संध्या में बुधवार 12 घंटे का जप-अनुष्ठान हुआ। गुरुवार को यज्ञीय कार्यक्रम हुए। भारत राष्ट्र के नवनिर्माण, पुनरुत्थान, हर मोर्चे पर सफल संरक्षण की विशिष्ट वैदिक मंत्रों की मंगलमय आहुतियां प्रदान की गई। सायंकाल में दीपयज्ञ विधान हुआ । टाटीसिलवे केन्द्र में हर्षोल्लास पूर्वक कार्यक्रम आयोजन हुआ।
यज्ञीय टीम नायक द्वारा इस अवसर पर युग निर्माण योजना, सत्संकल्प पाठ,अपने अंग अवयवों से अपेक्षा, प्रज्ञा अभियान पाक्षिक पत्रिका का आज के परिप्रेक्ष्य में महत्व तथा उसका सदस्य हर एक प्रखंड स्तर पर बनाना, शान्तिकुञ्ज से जोड़ना, गायत्री महामंत्र संजीवनी विद्या, यज्ञीय अनुष्ठान इस युग की महती आवश्यकता व अपेक्षा पर प्रकाश डाला गया।टीम नायक ने बताया कि प्रज्ञा अभियान पाक्षिक जन-जन के लिए रोचक और सृजनात्मक भी है।
नीरज कुमार ने शान्तिकुञ्ज के अनेक दिशा-निर्देश पर निर्धारित आगामी नवरात्र, अगले वर्ष की वसंत पंचमी पावन अवसर पर झारखंड व रांची टीम का प्रतिनिधित्व और कार्यक्रमों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उनके सानिध्य में प्रज्ञागीत गायन वादन हुए और कई नये परिजनों ने पुंसवन संस्कार, दीक्षा संस्कार कराये गए।
दो पाली में यज्ञीय अनुष्ठान विधान हुए। वैश्विक आनलाइन जप-अनुष्ठान समूह प्रतिनिधिमंडल के सानिध्य में आज शुकवार एकादशी पर अखंड जप-अनुष्ठान भी सुबह से 24 घंटे के लिए ऑनलाइन एकादशी अखंड जप की महत्ता पर सबको प्रोत्साहित कर बताया कि यह शनिवार को सुबह चार बजे समापन होगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के नीरज कुमार, राजपति शर्मा, जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंडल द्वारा कल दिनांक 6 जून 2024 को अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में निर्जला एकादशी उत्सव आयोजित किया जायेगा, जिसमें श्री श्याम प्रभु का भव्य शृंगार, ज्योत, भोग, संगीतमय संकीर्तन का आयोजन किया जायेगा।
7 जून 2024 को चांदनी द्वादशी पर रमेश बंका एवं उनके परिवार संध्या 6:30 बजे श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित कर भक्तों के बीच बांटा जायेगा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ, रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। आज प्रात: 7:00 बजे से महेश नवमी के शुभ अवसर पर माहेश्वरी भवन से प्रभात फेरी एवं शोभायात्रा का आयोजन हुआ। शोभायात्रा श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर से प्रारंभ होकर कार्टसराय रोड, गाड़ीखाना चौक, हरमू रोड, गौशाला चौक, नॉर्थ मार्केट रोड, जे जे रोड, बड़ालाल स्ट्रीट होते हुए पुन: मंदिर पहुंची।
इस शोभायात्रा में भगवान महेश की विशाल प्रतिमा को ट्रैक्टर पर सजाकर विराजमान किया गया, जिसका मार्ग में आरती और पूजन हुआ। शोभायात्रा के दौरान भजन गायन मनोज काबरा, मुकेश काबरा, विभोर डागा, मोहित सोमानी, कृष्णा काबरा, दिनेश काबरा, विनित काबरा सहित महिला सदस्य ने किया। पूरे मार्ग में भगवान महेश के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
समाज बंधुओं एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपने-अपने स्थानों पर शोभायात्रा का स्वागत किया। प्रमुख स्वागतकर्ता रहे: मारवाड़ी ब्राह्मण सभा, बोड़ा परिवार, साबू परिवार, काबरा परिवार, मारवाड़ी सहायक समिति, पप्पू शर्मा परिवार, गौरीशंकर काबरा परिवार, चेतन शर्मा परिवार, श्याम संघ, साबू रिक्शा ग्रुप, श्री श्याम मंडल, महावीर साबू परिवार, राजकुमार मारू परिवार, रमेश चितलांगिया परिवार इन्होंने शोभायात्रा में शामिल सभी लोगों का स्वागत शीतल जल, शरबत, आइसक्रीम आदि के द्वारा किया। विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भगवान महेश को माल्यार्पण किया तथा शोभायात्रा संयोजक श्री अजय शंकर ने बताया कि इस आयोजन में 400 से अधिक पुरुष, महिलाएं एवं बच्चे शामिल हुए।
शोभायात्रा के पश्चात श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर स्थित शिवालय में मुख्य यजमान मनोज काबरा ने परिवार सहित भगवान महेश का रुद्राभिषेक एवं हवन किया। प्रसाद स्वरूप अल्पाहार व्यवस्था रामगोपाल, विष्णु शंकर साबू के सहयोग से की गयी।
स्वाद की यात्रा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों ने अपने पेरेंट्स के साथ मिलकर विभिन्न प्रदेशों की दो विशेष व्यंजन तैयार की। इस अनोखी गतिविधि में न सिर्फ खाना बनाने का आनंद था, बल्कि ज्ञानवर्धक क्वेश्चन-आंसर राउंड भी शामिल था, जिसकी निर्णायक बनीं श्रीमती अर्चना मुरारका उन्होंने विराज मालपानी एवं सुरभि मालपानी, आद्या माहेश्वरी एवं नेहा माहेश्वरी, पाखी चितलांगिया एवं विनीता चितलांगिया का नाम घोषित किया। इसे सफल आयोजन की संयोजिकाएं रहीं भावना काबरा, रंजू मालपानी, शिखा बिरला, एवं अंजना गट्टानी।
अनलिमिटेड फन फॉर किड्स बच्चों के लिए कुछ बेहद ही मजेदार और दिलचस्प गेम्स, खेल-कूद के साथ अपनी कुशल प्रतिभा दिखाई । इस प्रतियोगिता में दो ग्रुप बच्चों के वार्षिक उम्र के हिसाब से रखे गए थे। ग्रुप अ में करीबन 15 बच्चे वहीं ग्रुप इ में 20 बच्चों ने भाग लिया, ग्रुप अ वर्ग वाले बच्चों के लिए 3 तरह के खेल आयोजित किए, जैसे लिफ्ट एंड शिफ्ट द बॉल, मैजिकल कलर्स और मेमोरी मॉन्सटर्स।
इसी प्रकार ग्रुप इ वर्ग के बच्चों के लिए 4 तरह के खेल आयोजित किए, जैसे द पफ पाथ, रेस टू द रंग, ब्रेन ब्लिट्ज एवं द टनल चैलेंज। इस मनोरंजक कार्यक्रम की संयोजिका नेहा साबू, पारुल माहेश्वरी, नेहा मंत्री एवं पूजा शारडा रहीं। फन विथ टैलेंट की संयोजिका रितिका शारदा, सुमन बाहेती, सुष्मिता सोमानी और सीमा मालपानी थी, मस्ती, सवाल, और गेम के साथ 14 जोड़ी ने पार्ट लिया।
मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी ने बताया सभी गेम्स के विजेताओं को 8 जून सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पुरस्कृत किया जायेगा। आज की शोभायात्रा में प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार मारु, प्रदेश कोषाध्यक्ष शिव शंकर साबू, प्रदेश महिला समिति सचिव संगीता चितलांगिया, सभा अध्यक्ष किशन कुमार साबू, सचिव नरेन्द्र लाखोटिया, महिला समिति अध्यक्षा भारती चितलांगिया, सचिव बिमला फलौड़, युवा संगठन अध्यक्ष विनय मंत्री, सचिव हेमंत माहेश्वरी, प्रभात फेरी संयोजक अजय शंकर साबू, उमाशंकर पेड़ीवाल, कुमुद लखोटिया, अनीता साबू , महोत्सव संयोजक सुरेश सारडा, अमित मालपानी, कविता मंत्री,विनीता बिहानी, अंकित काबरा, आकाश चितलांगिया के साथ समाजबंधु उपस्थित रहे। उक्त जानकारी समाज के मीडिया प्रभारी अशोक साबू और रश्मि मालपानी ने दी।
टीम एबीएन, रांची। गुरुनानक सेवक जत्था की स्थापना के पच्चीस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनीष मिढ़ा, पंकज मिढ़ा, सूरज झंडई, करण अरोड़ा, आशु मिढ़ा, नवीन मिढ़ा और पवनजीत सिंह खत्री की अगुवाई में 170 श्रद्धालुओं का जत्था आज तीन जून, मंगलवार को उत्तराखंड स्थित श्री हेमकुंड साहिब जी की यात्रा के लिए कृष्णा नगर कॉलोनी से रवाना हुआ। दोपहर 2.30 बजे गुरु घर के सेवक मनीष मिढ़ा ने वाहेगुरु से घर बाहर तेरा भरवासा तू जन के है संग... तथा चरण चलो मारग गोबिंद... अरदास कर यात्रा आरंभ करने की आज्ञा मांगी।
तत्पश्चात गुरुद्वारा साहिब के पार्किंग स्थल में गुरुनानक सत्संग सभा, गुरुनानक भवन कमेटी, गुरुनानक बाल मंदिर स्कूल कमेटी और स्त्री सत्संग सभा ने श्रद्धालुओं के जत्थे को माला पहनाकर बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जयकारे के साथ सभा द्वारा बुक किये गये। तीस आॅटो रिक्शा द्वारा रांची रेलवे स्टेशन के लिए रवाना किया।
सत्संग सभा के अध्यक्ष द्वारका दास मुंजाल, सचिव अर्जुन देव मिढ़ा, उपाध्यक्ष सुरेश मिढ़ा, भवन कमेटी के अध्यक्ष हरविंदर सिंह बेदी, सचिव चरणजीत मुंजाल, गुरुनानक बाल मंदिर स्कूल कमेटी के अध्यक्ष नीरज गखड़, सचिव अश्विनी सुखीजा, स्त्री सत्संग सभा की गीता कटारिया, नीता मिढ़ा, शीतल मुंजाल, इंदु पपनेजा और संस्था के मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा ने जत्थे में शामिल सभी सदस्यों को यात्रा की सफलता की शुभकामनाएं दी।
श्री हेमकुंड साहिब जी की यात्रा करने जा रहे जत्थे में सात वर्षीय साहिब सिंह खत्री, आठ वर्षीय ध्रुव अरोड़ा एवं तिरसठ वर्षीय जगदीश मुंजाल तक की विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालु शामिल हैं। जत्था शाम 4.25 बजे रांची से दिल्ली के लिए गरीब रथ ट्रेन से रवाना हुआ।
संस्था के मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा ने जानकारी दी कि यह जत्था कल चार जून की सुबह साढ़े ग्यारह बजे दिल्ली पहुंचेगा और वहां गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब और गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब जी के दर्शन कर शाम को पांच बजे ऋषिकेश के लिए रवाना हो जायेगा। छह जून को ऋषिकेश से सुबह छह बजे बस द्वारा प्रस्थान कर जत्था रात आठ बजे गोविंद घाट पहुंचकर रात्रि विश्राम करेगा।
सात जून को गोविंद घाट से यात्रा शुरू होगी। सभी श्रद्धालु गोविंद घाट से 13 किलोमीटर पैदल यात्रा कर गोविंद धाम पहुंच कर रात्रि विश्राम करेंगे। आठ जून को जत्था गोविंद धाम से 6 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर दोपहर बारह बजे श्री हेमकुंड साहिब पहुंच कर बफीर्ले पहाड़ों के बीच स्थित सरोवर में स्नान कर पवित्र गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करेगा और अरदास के बाद दोपहर दो बजे वहां से निकलकर उसी शाम वापस गोविंद धाम पहुंच कर रात्रि विश्राम करेगा।
नौ जून को जत्था सुबह सात बजे गोविंद धाम से प्रस्थान कर दोपहर ग्यारह बजे वापस गोविंद घाट पहुंचेगा और वहां से जत्था के सदस्य दोपहर बारह बजे बद्री नाथ धाम के लिए बस द्वारा रवाना हो जाएंगे। दोपहर तीन बजे श्री बद्री नाथ धाम के दर्शन के बाद वहीं रात्रि विश्राम होगा। दस जून को सभी श्रद्धालु सुबह श्री बद्री नाथ धाम से बस से रवाना होकर रात को ऋषिकेश पहुंचेंगे जहां संपूर्णता की अरदास के साथ ही इस यात्रा का समापन हो जाएगा। बारह जून को दिल्ली से गरीब रथ से प्रस्थान कर जत्था तेरह जून को सुबह वापस रांची पहुंचेगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा (8709349310) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री माहेश्वरी सभा के पूर्व सचिव मुकेश काबरा एवं रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि इस वर्ष महेश नवमी पर्व 4 जून को मनाया जायेगा। महेश नवमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन पर्व है, जो देवों के देव भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य स्वरूप को समर्पित है।
यह त्योहार मुख्य रूप से माहेश्वरी समाज द्वारा बड़े ही उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए यह पर्व उनके लिए विशेष महत्व रखता है और इसे अपने पूर्वजों और संस्कृति से जुड़ने का दिन माना जाता है। यह पावन पर्व, शिव भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति का अवसर लेकर आता है।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे परिवार में खुशहाली बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, महेश नवमी ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष नवमी तिथि 3 जून को रात 9:56 बजे शुरू होगी और 4 जून को रात 11:54 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर, यह पर्व 4 जून को मनाया जायेगा।
इस दिन रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जो पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। महेश नवमी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर शिवलिंग को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं। ॐ नम: शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद महेश नवमी की कथा सुनें और भगवान को खीर या फल का भोग लगाएं। इस दिन रुद्राभिषेक करना भी शुभ माना जाता है। अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
महेश नवमी का पर्व माहेश्वरी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने माहेश्वरी समुदाय के पूर्वजों को आशीर्वाद दिया था। यह पर्व सुख और समृद्धि का प्रतीक है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से भक्तों के जीवन में शांति और सफलता आती है। यह पर्व एकता और भक्ति का संदेश भी देता है।
महेश नवमी की धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती ने ऋषियों के श्राप के कारण पत्थर में परिवर्तित हो चुके 72 क्षत्रियों को शापमुक्त कर पुनर्जीवन प्रदान किया था। माता पार्वती ने उन क्षत्रियों को आशीर्वाद दिया कि उनके वंश पर हमेशा उनकी छाप रहेगी और वे माहेश्वरी कहलायेंगे। महेश नवमी के दिन माहेश्वरी समाज के लोग एकजुट होकर इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।
समाज में एकता, भाईचारे और धार्मिकता का संदेश फैलाने के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शोभायात्राओं और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। इस दिन को माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो समाज के गौरव और पहचान का प्रतीक है। महेश नवमी न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह समाज में एकता, समृद्धि और सकारात्मकता का संदेश भी देता है।
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके भक्तजन अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यह पर्व माहेश्वरी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है और उनके सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण- प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि निर्जला एकादशी व्रत जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए है जो पूरे वर्ष में अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते। इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून शुक्रवार को रखा जाएगा।
सनातन धर्म में श्रीहरि विष्णुजी की पूजा-अर्चना आराधना का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता है विष्णुजी के व्रत और पूजन से समस्त दुखों से छुटकारा मिलता है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। वैसे तो हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को विष्णुजी की पूजन और व्रत किया जाता है। लेकिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विशेष दिन माना गया है।
इस दिन महिलाएं बिना अन्न जल ग्रह किए निर्जला व्रत रखती है। इसे लिए निर्जला एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से विष्णुजी की असीम कृपा प्राप्त होती है। निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। यह व्रत पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति, और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
पुराणों के अनुसार, इस दिन किया गया व्रत सभी एकादशियों के व्रतों के समान फल प्रदान करता है। व्रत का संकल्प-दशमी तिथि को संयमित भोजन करें और एकादशी के दिन व्रत का संकल्प लें।पूजा विधि-एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में तुलसी के पत्ते, चंदन, दीप, धूप और फल अर्पित करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। व्रत का पालन- पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करें।
रात्रि में जागरण करके भजन-कीर्तन करें। व्रत खोलने से पूर्व भगवान विष्णु को भोग अर्पित करें और फिर फलाहार करें। पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में भीमसेन ने इस व्रत को कठिनाई के बावजूद रखा था। महर्षि व्यास ने उन्हें यह व्रत रखने की सलाह दी थी, जिससे उन्हें सभी एकादशियों के व्रत का पुण्य प्राप्त हुआ।
निर्जला एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक विकास में भी सहायक है। इस दिन की गई पूजा और दान से जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस विशेष दिन का पालन करके हम अपने जीवन को पुण्यमय बना सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
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