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Published / 2025-06-14 21:03:17
हम असत्य को छोड़ते नहीं, इसलिए सत्य साथ आता नहीं : श्रीकांत

मारवाड़ी सहायक समिति, श्री हनुमान मंडल ने किया गुरु जी का स्वागत, अभिनंदन 

शिवात्मा परमात्मा दो नहीं : श्रीकांत 

हम जिसे नहीं देख रहे, वो हर पल हमें देख रहा 

टीम एबीएन, रांची। रांची के अग्रसेन भवन के सभागार में श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर मुख्य यजमान लता देवी केडिया, ओम प्रकाश केडिया, निरंजन, अजय, संजय केडिया संग परिवार ने श्री मदभागवत व ब्यास पूजन किया। वैदिक मंत्रोचारण के साथ व्यास पीठ पर विराजमान परम श्रद्धेय कथावाचक श्रीकांत शर्मा को मुख्य यजमान ओम प्रकाश केडिया सपत्नी द्वारा चंदन, वंदन माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन स्वागत किया गया।  

कथा के मुख्य सार को बताते हुए कहते हैं कि ईश्वर से जगत है जगत से ईश्वर नही क्योकि हम सभी लोगों के जन्म का कारण भगवान है। गुरु कहते है शिवात्मा परमात्मा दो नहीं है। भागवत के परमतत्व को जाने, जहां से विज्ञान खत्म होता है, वहीं से भागवत प्रारंभ होती है। भागवत किताब नहीं, भगवान की मंगलाचरण पर चर्चा करते हुए बताया कि महाभारत खंड, परीक्षित कथा के प्रसंग पर भी अपने मुखारविंद से अमृत वर्षा की। भगवान सबको जान जाये यह जरूरी नहीं लेकिन हम जिसे नहीं देख रहे हैं, वो हर पल हमें देख रहा है। हम रामनवमी जन्माष्टमी इसलिए मनाते हैं कि भगवान का प्राकट्य होता है। 

श्रीमद् भागवत संसार की जलन से शांति दिलाने वाला ग्रंथ है। संसार जल रहा है और इससे शांति परमात्मा ही दे सकता है, क्योंकि परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है परमात्मा पास भी है और दूर भी है। वह सारे संसार में है और संसार उसमें है, ब्रह्म सब में विद्यमान है और राम तथा श्रीकृष्ण  वर्तमान है यह सब में रहते हैं लेकिन दिखाई नहीं पड़ते परमात्मा स्वयं प्रकाश है। 

सब कुछ उन्हीं से प्रकाशित होता है जब मनुष्य को कहीं से भी प्रकाश नहीं मिले तो उन्हें अपनी आत्मा से प्रकाश लेना चाहिये। क्योकि हमेशा सत्संग, सकीर्तन और महापुरुषों के सानिध्य से ही प्रकाश मिलता है उसी प्रकाश में नारायण के दर्शन होते हैं। इसलिए सत्संग भजन और कीर्तन में लगे रहो कोई न कोई संत महापुरुष आयेगा और जीवन में आपके रोशनी दे जायेगा। 

साधना करे लेकिन नियम के साथ होनी चाहिए जिस तरह से जल की पतली धार पत्थर को तोड़ देती है उसी तरह से नियम के साथ की गई साधना अहंकार के पत्थर को तोड़ कर श्रीबांके बिहारी लाल जी की दर्शन कराती है। यह उदगार श्रीकांत शर्मा ने द्वितीय दिवस की कथा प्रवचन में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि जिंदगी में नित्य प्रकाश लाओ यही रास्ता गोविंद का दर्शन कराता है। आंखों में आंसू आते ही भगवान उसे पूछने के लिए दौड़ते हुए आयेंगे बस इसी बात का ध्यान रखो कि वे आंसू स्वार्थ के आंसू नहीं होने चाहिए। 

अगर रोना हो तो सिर्फ ठाकुर जी को प्राप्त करने के लिए रोओ। शिवाजी ने समर्थ गुरु रामदास के चरणों की धूलि भी संत महापुरुषों की चरण धूलि लेने के साथ ही अध्यात्मिक की यात्रा शुरू हो जाती है। प्रभु से मांगना हो तो फिर सांसारिक चीजें क्या मांगना उनसे इति, रति, मति एवं गति की मांग कर सर्वस्य प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करें। 

सत्संग की महिमा का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि सत्संग से प्रभु की प्राप्ति होती है। पूर्व जन्म में क्या थे सत्संग और प्रभु के संपर्क से यह सब समाप्त हो जाता है, जैसे मत्स्यगंधा से कमल गंधा बन गयी सत्यवती, ठीक उसी प्रकार सत्संग में शामिल होने से मनुष्य के अंदर से काम, क्रोध, मद, लोभ आदि का लोप हो जाता है। 

व्यास जी ने कहा कि प्रभु को तीन रास्तों से प्राप्त किया जा सकता है। पहला तेज जो माता-पिता की सेवा करने से मिलता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहने वाले मनुष्य अगर भाऊ में जाकर प्रभु के लिए रोते हैं तो वह मनुष्य साधु बन जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार सत्संग के प्रभाव से ही नारद दासी के पुत्र से नारायण के पुत्र हो गये। 

भगवान ने उन्हें देवदत्त बिना भी प्रदान किया उसी नारद जी के प्रेरना से वेदव्यास जी ने 18000 श्लोक वाले श्रीमद् भागवत की रचना की। योग और ज्ञान से भी भक्ति  सर्वोच्च है । भक्ति का सर्वोच्च शिखर भी यही है की भक्त और भगवान में एक तत्वता हो जाये। जो आप हैं वही मैं हूं। इसके पूर्व मेन रोड हनुमान मंदिर के त्यागी जी, श्री हनुमान मंडल, मारवाड़ी सहायक समिति, रांची गोशाला के ट्रस्टी ओम प्रकाश छापड़िया ने गुरुजी को माला पहनाकर, अंग वस्त्र देकर उनका अभिनंदन और स्वागत किया। 

गुरु जी ने व्यास पीठ से सभी लोगों को आयोजक की तरफ से अंग वस्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्रदान किया।आज की कथा में स्वागत करने वालों राजेंद्र केडिया, मनोज चौधरी, किशन पोद्दार, सजन पाड़िया, प्रवीण मोदी, निर्मल बुधिया, हनुमान बेड़िया, रामअवतार फोगला, नारायण अग्रवाल, बालकिशन अग्रवाल, प्रकाश धेलिया ने किया। कथा श्रवण करने वालों में ओमप्रकाश केडिया, निरंजन केडिया, अजय केडिया, संजय केडिया, निर्मल बुधिया, प्रमोद सारस्वत, श्रेष्ठ केडिया, शोभा केडिया, कोमल केडिया, अनामिका केडिया सहित काफी संख्या में लोगों ने कथा श्रवण किया। 

7 बजे द्वितीय दिवस की कथा आरती के साथ विराम की गयी। लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। कल  की कथा दोपहर 3 से 7 बजे तक होगी। आप सभी लोग समय पर आकर श्रीमद् भागवत कथा के रस पान का आनंद अवश्य उठायें। उक्त जानकारी प्रमोद सारस्वत  (9431325438) ने दी।

Published / 2025-06-12 22:19:50
गुरुद्वारा में मनाया गया प्रकाश पर्व

  • गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सत्संग सभा द्वारा मीरी-पीरी के मालिक, छठे नानक श्री हरगोविंद साहिब जी महाराज का प्रकाश पर्व मनाया गया 

टीम एबीएन, रांची। गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सत्संग सभा, कृष्णा नगर कॉलोनी द्वारा आज बारह जून, गुरुवार को छठे नानक श्री हरगोविंद साहिब जी महाराज के प्रकाश पर्व के उपलक्ष में विशेष दीवान सजाया गया। विशेष दीवान की शुरूआत सुबह आठ बजे भाई महिपाल सिंह द्वारा आसा दी वार कीर्तन से हुई। 

गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेंदर सिंह ने कथावाचन करते हुए साध-संगत को बताया कि सिख पंथ के छठे गुरु श्री हरगोविंद साहिब जी का जन्म बडाली (अमृतसर) में हुआ था। वे पांचवें गुरु श्री अर्जुन देवजी के पुत्र थे। उनकी माता का नाम गंगा था। उन्होंने अपना ज्यादातर समय युद्ध प्रशिक्षण एवं युद्ध कला में लगाया तथा बाद में वे कुशल तलवारबाजी, कुश्ती व घुड़सवारी में माहिर हो गए। 

उन्होंने ही सिखों को अस्त्र-शस्त्र का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया व सिख पंथ को योद्धा चरित्र प्रदान किया। उनको मीरी-पीरी के मालिक इसलिए कहा जाता है कि उन्होंने मीरी और पीरी के प्रतीक के रूप में दो तलवारें धारण कीं, एक सांसारिक शक्ति को और दूसरी आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाती है। यह अवधारणा सिखों को एक संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है, जिसमें वे सांसारिक जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए आध्यात्मिक विकास को भी महत्व देते हैं। 

हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह जी ने पंज प्याले पंज पीर, छठम पीर बैठा गुरु भारी... एवं जमया पूत भगत गोबिंद का परगटया सभ मेह लिखिया धुर का... एवं वडी आरजा हरगोबिंद की सुख मंगल कल्याण विचारया... तथा  मेरा सतगुर रखवाला होआ धार कृपा प्रभ हाथ दे राखीआ हर गोविंद नवा निरोआ... शबद गायन कर संगत को गुरबाणी से जोड़ा। 

छह पौढ़ी श्री अनंद साहिब जी के पाठ,अरदास, हुक्मनामा के साथ दीवान की समाप्ति सुबह 10.30 बजे हुई। इसके बाद संगत के बीच कढ़ाह प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर सत्संग सभा द्वारा मिस्सी रोटी,प्याज का अचार एवं रायता का लंगर चलाया गया। सत्संग सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने संगत को श्री हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश की साखी सुनाई और प्रकाश पर्व की बधाई दी।  

सत्संग सभा के मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा ने बताया कि स्त्री सत्संग सभा द्वारा श्री हरगोबिंद साहिब जी का प्रकाश पर्व 26 जून,गुरुवार को मनाया जाएगा,प्रकाश पर्व को लेकर स्त्री सत्संग सभा द्वारा 16 जून से 26 जून तक रोजाना दोपहर 3. 30 बजे से शाम 4.45 बजे तक श्री सुखमनी साहिब जी का सामूहिक पाठ होगा।  

लंगर की सेवा में अशोक गेरा,मोहन काठपाल,अनूप गिरधर, बिनोद सुखीजा, हरीश मिढ़ा, नानक चंद अरोड़ा, महेंद्र अरोड़ा, राजकुमार सुखीजा तथा जोड़े की सेवा में बसंत काठपाल, पुरुषोत्तम सरदाना, गरिमा अरोड़ा की विशेष भागीदारी रही।  

आज के दीवान में अध्यक्ष द्वारका दास मुंजाल, सुरेश मिढ़ा, हरविंदर सिंह बेदी, नरेश पपनेजा, हरगोबिंद सिंह, महेश सुखीजा, हरविंदर सिंह हन्नी, नीरज गखड़, अश्विनी सुखीजा, मोहन लाल अरोड़ा, रमेश गिरधर, वेद प्रकाश मिढ़ा, लक्ष्मण दास मिढ़ा, जीवन मिढ़ा, केशव दास मक्कड़, इंदर मिढ़ा, रमेश पपनेजा, सुभाष मिढ़ा, हरजीत बेदी, जीतू अरोड़ा, बबलू थरेजा, भगवान दास मुंजाल, अमरजीत सिंह मुंजाल, राजेंद्र मक्कड़, किशन गिरधर, गुलशन मुंजाल, मनीष मल्होत्रा, कमल अरोड़ा, मनीष गिरधर, हैप्पी अरोड़ा, बबली दुआ, गीता कटारिया, मंजीत कौर, शीतल मुंजाल, बंसी मल्होत्रा, खुशबू मिढ़ा, दुर्गी देवी मिढ़ा, बिमला मिढ़ा, नीता मिढ़ा, इंदु पपनेजा, रेशमा गिरधर, ममता सरदाना, मीना गिरधर, नीतू थरेजा, अंजू पपनेजा, श्वेता मुंजाल, कुसुम पपनेजा, उषा झंडई, पूनम मुंजाल, नीतू किंगर, ममता थरेजा, सुषमा गिरधर, किरण अरोड़ा, रानी मुंजाल, गोबिंद कौर, गूंज काठपाल समेत अन्य श्रद्धालु शामिल हुए। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा (8709349310) ने दी।

Published / 2025-06-11 20:45:17
अब छल-कपट से भरपूर हो गयी हैं शक्ति स्वरूपा स्त्रियां : महेश पाल

  • भारतीय समाज में स्त्री को शक्ति का स्वरूप माना है, लेकिन क्या अब नव विवाहित स्त्री सिर्फ त्याग का प्रतीक नहीं छल और चाल की मूर्ति भी बनती जा रही है : योगाचार्य महेश पाल  

एबीएन सोशल डेस्क। वर्तमान समय में देखने में आ रहा है समाज में विभिन्न कुरीतियों के साथ कई अन्य घटनाएं भी सामने आ रही है। विवाह एक पवित्र बंधन है लेकिन वैवाहिक जोड़े इस पवित्र बंधन को बदनाम कर रहे हैं। जिसमें कुछ युवा और  महिलाएं भी शामिल हैं। योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि वर्तमान समय में जिस प्रकार पत्नियां अपने पतियों की हत्या एवं महिलाएं व पुरुष पराये मर्द व स्त्री के साथ व्यभिचार में लिप्त होना यह समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। 

अपनी नाजुक कलाइयों पर खरोंच पड़ने से तिलमिलाती लड़कियां संकोच के कारण अपने मन की बात कहने से डरने वाली लड़कियां, कमरे में छिपकली देख डर कर भागने वाली लड़कियां आखिर इतनी निडर कैसे हो गयी हैं कि अपने जीवन साथी को मौत के घाट उतारने में भी उन्हें संकोच नहीं होता।  कभी भाड़े के हत्यारों को बुलाकर अपने पति की हत्या की साजिश रचती मौत के हवाले कर शव को खाई में फेंकती हैं। कभी कत्ल कर के शव को किसी ड्रम में डालकर सीमेंट के घोल से पत्थर बनाने का असफल प्रयास करती हैं।

कोई अपने प्रेमी के साथ पति का गला घोंटकर शव के ऊपर सांप को बिठाकर पति की मौत का कारण सर्पदंश बताती हैं। कोई विवाह के उपरांत से ही पति की कमाई पर कब्जा कर के अपने मायके वालों का पोषण करती हैं तथा पति को आतंकित कर के मृत्यु का वरण करने के लिए विवश कर देती हैं।  जिनमें मुस्कान, ज्योति मौर्य, रबिता, सोनम जैसी लड़कियों ने समाज में विपरीत स्थिति पैदा कर दी है। अभी हाल ही मै इंदौर (म.प्र) से धड़कनों को झकझोर देने वाला एक ऐसा सच सामने आया है, जो किसी भी संवेदनशील इंसान की आत्मा को हिला देगा। 

राजा रघुवंशी एक होनहार, सजीव, मुस्कुराता चेहरा जिसकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी थी कि उसकी नई नवेली पत्नी सोनम रघुवंशी 11 मई को दोनों ने सात फेरे लिये। सपनों की डोर में बंधे और 20 मई को चल दिये हनीमून मनाने मेघालय। वहीं पत्नी सोनम अपने प्रेमी के प्रेम में मस्त होकर अंधे प्यार में लिप्त होकर अपने पति की हत्या करवा देती है। सोनम के हाथों राजा की हत्या ने सिर्फ एक बेटे को मां से नहीं छीना, बल्कि उस भरोसे को भी तोड़ दिया जो समाज स्त्रियों के प्रति संजोये बैठा है। 

हमारे भारतीय समाज में स्त्री को शक्ति का स्वरूप कहा गया है। ममता, करुणा और त्याग की मूर्ति। मगर चंद औरतें हां, सिर्फ कुछ आजकल ऐसे वीभत्स अपराधों को अंजाम दे रही हैं कि पूरी नारी जाति को कटघरे में खड़ा होना पड़ रहा है। क्या हो गया है आजकल की कुछ लड़कियों को? क्या पैसा, आजादी और झूठे सपनों के पीछे अब प्रेम, विश्वास, और रिश्तों की कीमत खत्म हो गयी है? क्या पति अब सिर्फ एक रास्ता है संपत्ति और योजना पूरी करने का? क्या अब स्त्री सिर्फ त्याग का प्रतीक नहीं, छल और चाल की मूर्ति बनती जा रही है? 

ये सवाल पूरे समाज से जवाब मांगते हैं। सवाल समाज से भी है क्या अब भी हम आंख मूंदकर हर स्त्री को देवी मानते रहेंगे? या अब समय आ गया है कि अच्छाई और बुराई का मूल्यांकन इंसान के कर्मों से हो, उसके लिंग से नहीं। सोनम अपने पति की हत्यारिन के रूप में सामने आयी है, यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज, परिवार और विवाह संस्था की आत्मा पर चोट है। देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर क्या मन से भी उतना ही स्वच्छ है? राजा-सोनम कांड ने एक गंभीर सवाल खड़ा किया है, हम किस दिशा में जा रहे हैं?

किस सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था को गढ़ रहे हैं, लेकिन सवाल है कि सोनम जैसे युवाओं को बना कौन रहा है? भारत की मातृशक्ति की परंपरा सीता, सावित्री, मैत्रेयी, गार्गी, देवी अहिल्या बाई, लोपामुद्रा, लक्ष्मीबाई और सावित्रीबाई फुले से भरी है। फिर सोनम जैसी विकृति क्यों? क्या इसके पीछे बदलती लाइफस्टाइल विदेशी खाना, बॉलीवुड में बनती अश्लील फिल्में व सीरियल, लिव इन रिलेशन, सोशल मीडिया पर बनती गलत संगत वाली रीलें, नशे की लत, गलत संगत, खुली आजादी, शिक्षा, भारतीय संस्कृति से दूर, उच्च बौद्धिकता का अभाव, विवाह को पवित्र बंधन न मानना इन सभी कारणों से युवा व युक्तियों की बदलती विचारशैली और नकारात्मकता, इन सभी कारणों की बजह से आज समाज में ऐसी स्थिति बन रही है। वहीं दूसरी ओर वर्तमान शिक्षा पद्धति है जो आदर्श नहीं, सिर्फ कॅरियर सिखा रही है। 

अंग्रेजी माध्यम, कान्वेंट, मैकॉलेवादी सोच ने हमारे संस्कारों को काटकर फेंक दिया है। देश को अब ऐसी शिक्षा चाहिए जो गुरुकुल की तरह चरित्र निर्माण करे, अब बच्चों का युवाओं में उच्च संस्कार विकसित करने के लिए योग शिक्षा पर भी जोर दिया जाना चाहिए। योग नकारात्मक विचारों को दूर करने व युवाओं में उच्च बौद्धिकता को विकसित करता है जिससे इस प्रकार की घटना को काफी हद तक रोकी जा सकती है। यूं तो प्रेम और आकर्षण मन के विषय हैं। समाज में शारीरिक आकर्षण के चलते कब वासना में अंध होकर युवक-युवती अपनी नैतिक और सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन करके अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए अपने परिवार की इज्जत को दांव पर लगाने से बाज न आ रहे हैं। 

मगर ऐसे कृत्य करने वालों को किसी और के विश्वास को छलने की छुट क्यों मिले दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि बिना पति के लिए समाज में इतना खुलापन आ चुका है कि दैहिक संबंधों में न उम्र आड़े आ रही है और न ही आपसी रिश्ते। कहीं सास अपने दामाद के साथ व्याभिचार में लिप्त है तो कहीं सगे कहे जाने वाले भाई बहन, बुआ भतीजे, ससुर बहु सहित अनेक रिश्ते भी कलंक की कथा लिखने में पीछे नही रह गये हैं। इंदौर के राजा रघुवंशी हों या मेरठ के सौरभ राजपूत, दोनों का कसूर केवल यही तो था कि एक की सोनम बेवफा हो गयी और दूसरे की मुस्कान। समाज में न जाने कितनी ही ऐसी मुस्कान, सोनम और निकिता है, जिनकी बेवफाई से अनेक निर्दोष पति अपनी जान गंवाने के लिए विवश हो रहे हैं।  

मनोविज्ञानियों व समाजशास्त्रियों के लिए यह गंभीर चिंतन का विषय है कि समाज किस दिशा में अग्रसर हो रहा है क्या विवाह जैसी संस्था का अस्तित्व चरमराने लगा है? क्या नारी के सशक्तिकरण में इस प्रकार के आचरण को स्वीकारा जा सकता है? क्या हत्या हत्या की साजिश जैसे कृत्यों के चलते अपराधी युवतियां किसी प्रकार की दया या संवेदना की पात्र हैं?

 नित्य ही ऐसी ऐसी घटना घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रकाश में आ रही है। इन्हीं घटनाओं को देखते और सुनते सुनते कुछ नकारात्मक व विपरीत विचारशैली वाले युवक-युवतियां में इस प्रकार की कृत्य करने के बीच पड़ते नजर आ रहे हैं, जिसमें अभी हाल ही में देखने में आया है। सोशल मीडिया फेसबुक पर गुना मध्य प्रदेश की एक युवती अपनी पोस्ट में पितृसत्तात्मक समाज की निंदा करते हुए सोनम रघुवंशी का सपोर्ट करते नजर आ रही है। यह भी समाज के लिए एक गंभीर चिंतन का विषय है।

Published / 2025-06-11 20:42:54
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर गायत्री परिवार किया जप-अनुष्ठान

  • ज्येष्ठ पूर्णिमा पर गायत्री परिवार  अंतर्राष्ट्रीय जप-अनुष्ठान समूह ने अखंड दीप के सानिध्य में जप-अनुष्ठान एवं यज्ञीय संदेश दिये 
  • ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर गुरुसत्ता की सूक्ष्म उपस्थति और आशीर्वाद से 24 घंटे के गृहे गृहे आॅनलाइन अखंड जप एवं उसकी पूणार्हुति सोल्लास यज्ञीय अनुष्ठान से संपन्न हुई 
  • अखंड ज्योति की दैवी ऊर्जा क्रांतिकारी प्रकाश है : समूह साधक 

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार साधकों ने ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आनलाइन जप-अनुष्ठान प्रतिनिधित्व में 24 घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान किया गया और समूह प्रतिनिधि ने इस अवसर पर शुभेच्छा की कि ज्येष्ठ मास पावन पूर्णिमा के प्रकाश की तरह हम सबके भीतर भी दीप्तिमान प्रकाश एवं आत्मबोध हो तथा इस भाव से सामूहिक प्राप्त ऊर्जा को गुरुसत्ताश्री व मातृसत्ताश्री के चरणों में समर्पित करें।

यह आनलाइन जप-अनुष्ठान 10  जून 2025 मंगलवार सुबह 5 बजे से 11 जून 2025 बुधवार  सुबह 5 बजे तक करके सोल्लास यज्ञीय कार्यक्रम से संपन्न किये गये। इस बाबत सभी से अनुरोध किया गया था कि इस दैवीय योजना में घर बैठे -बैठे सहयोग करें व गुरुवर श्रीआचार्य की सच्ची आराधना और राष्ट्र निर्माण के लिए सभी के लिए सद्बुद्धि व उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना भाव के साथ सभी अपने बहुमूल्य समय का एक अंश अवश्य देने का प्रयास करें। 

जप-अनुष्ठान समूह में शामिल रांची साधक-शिष्य समूह प्रतिनिधि ने अपने संदेश में गुरुवर श्रीपूज्यवर वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीरामशर्मा आचार्यजी की प्रचंड ऊर्जा शक्ति संपन्न व सौभाग्यशाली अखंड दीपक की ज्योति पर लेखनी का हवाला पेश कर संदेश प्रेषण में अखंड ज्योति की महती महत्ता पर प्रकाश डालकर बताया कि अखंड ज्योति की दैवी ऊर्जा क्रांतिकारी प्रकाश है। यह युगान्तरकारी बदलाव का प्रतीक है। इसके दिव्य प्रकाश के समक्ष साधक अनुप्राणित, प्रकाशित और प्रभावित होते हैं।आगे संदेश में बताया कि  यह ज्योति ज्वाला बनेगी। अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुञ्ज का युग परिवर्तन एक लक्ष्य है उसका आधार ह : सत्प्रवृति संवर्धन और जन-मानस का परिष्कार।  

21 वीं सदी युग परिवर्तन की अनेक महती संभावनाएं संजोए हूई है। इसमें मानवीय गरिमा को पुनर्जीवित करना है। अपने जप में गायत्री मंत्र के साथ महामृत्युंजय मंत्र और चंद्र गायत्री मंत्र को शामिल किया गया था।  जप-अनुष्ठान समूह ने सभी के स्वस्थ-सुखद जीवन व प्रगतिशील वातावरण विस्तार और उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय मनोरथ सहित दिव्य ज्योति से प्रार्थना की। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के साधक सह प्रचारक जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2025-06-10 21:57:59
कल होगा भगवान जगन्नाथ का देव स्नान कार्यक्रम

रांची के जगन्नाथपुर मंदिर में बुधवार को देव स्नान कार्यक्रम, 27 जून को निकाली जायेगी भव्य रथ यात्रा 

टीम एबीएन, रांची। जगन्नाथपुर मंदिर धुर्वा, रांची में बुधवार को परंपरागत देव स्नान यात्रा पूरी श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव से आयोजित की जायेगी। यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के वार्षिक रथयात्रा महोत्सव की शुरूआत का प्रतीक है, जिसकी तैयारियां कई सप्ताह पहले से प्रारंभ हो चुकी हैं। मंदिर समिति और सेवायतों द्वारा पूरी विधिपूर्वक इस पावन आयोजन को संपन्न कराया जायेगा। 

11 जून को देव स्नान यात्रा का भव्य आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 5 बजे सुप्रभातम् और 6 बजे मंगल आरती से होगी। दोपहर एक बजे से विशेष पूजा प्रारंभ होगी। 12 बजे भगवान को भोग अर्पण किया जायेगा और फिर मंदिर के पट बंद हो जायेंगे। इसके बाद महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को गर्भगृह से निकालकर शोभायात्रा के रूप में स्नान मंडप लाया जायेगा। 

यहां तीनों विग्रहों का स्नान 51-51 मिट्टी के कलशों में संग्रहित औषधीय जल से किया जायेगा। सबसे पहले भगवान बलभद्र, फिर सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ का स्नान संपन्न होगा। स्नान अनुष्ठान का नेतृत्व पुजारी रामेश्वर पाढ़ी, सरयू नाथ मिश्रा, कौस्तुभधर नाथ मिश्रा और श्रीराम मोहंती करेंगे। मौके पर प्रथम सेवक सेवायत ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव जजमान के रूप में उपस्थित रहेंगे।

Published / 2025-06-10 20:44:37
मैं भिखारी नहीं एक व्यापारी हूं...

राजकुमारी पाण्डेय

एबीएन सोशल डेस्क। एक भिखारी था। रेल सफर में भीख मांगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख मांगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा। वह उस सेठ से भीख मांगने लगा। भिखारी को देखकर उस सेठ ने कहा, तुम हमेशा मांगते ही हो, क्या कभी किसी को कुछ देते भी हो? 

भिखारी बोला, साहब मैं तो भिखारी हूं, हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूं, मेरी इतनी औकात कहां कि किसी को कुछ दे सकूं? सेठ ने कहा जब किसी को कुछ दे नहीं सकते तो तुम्हें मांगने का भी कोई हक नहीं है। मैं एक व्यापारी हूं और लेन-देन में ही विश्वास करता हूं, अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो तभी मैं तुम्हे बदले में कुछ दे सकता हूं।

तभी वह स्टेशन आ गया जहां पर उस सेठ को उतरना था, वह ट्रेन से उतरा और चला गया। इधर भिखारी सेठ की कही गयी बात के बारे में सोचने लगा। सेठ के द्वारा कही गयी बातें उस भिखारी के दिल में उतर गयी। वह सोचने लगा कि शायद मुझे भीख में अधिक पैसे इसीलिए नहीं मिलता क्योकि मैं उसके बदले में किसी को कुछ दे नहीं पाता हूं। लेकिन मैं तो भिखारी हूं, किसी को कुछ देने लायक भी नहीं हूं। लेकिन कब तक मैं लोगों को बिना कुछ दिये केवल मांगता ही रहूंगा।

बहुत सोचने के बाद भिखारी ने निर्णय किया कि जो भी व्यक्ति उसे भीख देगा तो उसके बदले मे वह भी उस व्यक्ति को कुछ जरूर देगा। लेकिन अब उसके दिमाग में यह प्रश्न चल रहा था कि वह खुद भिखारी है तो भीख के बदले में वह दूसरों को क्या दे सकता है? इस बात को सोचते हुए दिनभर गुजरा लेकिन उसे अपने प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला।

दूसरे दिन जब वह स्टेशन के पास बैठा हुआ था तभी उसकी नजर कुछ फूलों पर पड़ी जो स्टेशन के आसपास के पौधों पर खिल रहे थे, उसने सोचा, क्यों न मैं लोगों को भीख के बदले कुछ फूल दे दिया करूं। उसको अपना यह विचार अच्छा लगा और उसने वहां से कुछ फूल तोड़ लिये। 

वह ट्रेन में भीख मांगने पहुंचा। जब भी कोई उसे भीख देता तो उसके बदले में वह भीख देने वाले को कुछ फूल दे देता। उन फूलों को लोग खुश होकर अपने पास रख लेते थे। अब भिखारी रोज फूल तोड़ता और भीख के बदले में उन फूलों को लोगों में बांट देता था।

कुछ ही दिनों में उसने महसूस किया कि अब उसे बहुत अधिक लोग भीख देने लगे हैं। वह स्टेशन के पास के सभी फूलों को तोड़ लाता था। जब तक उसके पास फूल रहते थे तब तक उसे बहुत से लोग भीख देते थे। लेकिन जब फूल बांटते-बांटते खत्म हो जाते तो उसे भीख भी नहीं मिलती थी, अब रोज ऐसा ही चलता रहा ।

एक दिन जब वह भीख मांग रहा था तो उसने देखा कि वही सेठ ट्रेन में बैठे हैं जिसकी वजह से उसे भीख के बदले फूल देने की प्रेरणा मिली थी। वह तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंच गया और भीख मांगते हुए बोला, आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल हैं, आप मुझे भीख दीजिये बदले में मैं आपको कुछ फूल दूंगा। सेठ ने उसे भीख के रूप में कुछ पैसे दे दिये और भिखारी ने कुछ फूल उसे दे दिये। उस सेठ को यह बात बहुत पसंद आयी। 

सेठ ने कहा- वाह क्या बात है...? आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गये हो, इतना कहकर फूल लेकर वह सेठ स्टेशन पर उतर गया। लेकिन उस सेठ द्वारा कही गयी बात एक बार फिर से उस भिखारी के दिल में उतर गयी। वह बार-बार उस सेठ के द्वारा कही गयी बात के बारे में सोचने लगा और बहुत खुश होने लगा। उसकी आंखें अब चमकने लगीं, उसे लगने लगा कि अब उसके हाथ सफलता की वह चाबी लग गयी है जिसके द्वारा वह अपने जीवन को बदल सकता है।

वह तुरंत ट्रेन से नीचे उतरा और उत्साहित होकर बहुत तेज आवाज में ऊपर आसमान की ओर देखकर बोला, मैं भिखारी नहीं हूं, मैं तो एक व्यापारी हूं... 
मैं भी उस सेठ जैसा बन सकता हूं... मैं भी अमीर बन सकता हूं! लोगों ने उसे देखा तो सोचा कि शायद यह भिखारी पागल हो गया है, अगले दिन से वह भिखारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा।

एक वर्ष बाद इसी स्टेशन पर दो व्यक्ति सूट बूट पहने हुए यात्रा कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा तो उनमे से एक ने दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और कहा, क्या आपने मुझे पहचाना? सेठ ने कहा- नहीं तो! शायद हम लोग पहली बार मिल रहे हैं। सेठ बोला- मुझे याद नहीं आ रहा, वैसे हम पहले दो बार कब मिले थे?

अब पहला व्यक्ति मुस्कुराया और बोला- हम पहले भी दो बार इसी ट्रेन में मिले थे, मैं वही भिखारी हूं जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी मुलाकात में बताया कि मैं वास्तव में कौन हूं? नतीजा यह निकला कि आज मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूं और इसी व्यापार के काम से दूसरे शहर जा रहा हूं।

आपने मुझे पहली मुलाकात में प्रकृति का नियम बताया था... जिसके अनुसार हमें तभी कुछ मिलता है, जब हम कुछ देते हैं। लेन देन का यह नियम वास्तव में काम करता है, मैंने यह बहुत अच्छी तरह महसूस किया है, लेकिन मैं खुद को हमेशा भिखारी ही समझता रहा, इससे ऊपर उठकर मैंने कभी सोचा ही नहीं था और जब आपसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई तब आपने मुझे बताया कि मैं एक व्यापारी बन चुका हूं। 

अब मैं समझ चुका था कि मैं वास्तव में एक भिखारी नहीं बल्कि व्यापारी बन चुका हूं। भिखारी ने स्वयं को जब तक भिखारी समझा, वह भिखारी रहा । उसने स्वयं को व्यापारी मान लिया, व्यापारी बन गया। शिव बनकर शिव की पूजा करनी चाहिए।

भारतीय मनीषियों ने संभवत: इसीलिए स्वयं को जानने पर सबसे अधिक जोर दिया और फिर कहा- शिवोभूत्वा शिवम् यजेत॥

Published / 2025-06-09 20:25:26
संत गुरु कबीर दास की जयंती 11 जून को

कबीर दास ने समाज में व्याप्त आडंबरों, पाखंडों और भेदभाव का किया था खंडन : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संत और कवि संत गुरु कबीर दास की जयंती इस वर्ष बुधवार 11 जून को मनायी जायेगी। यह दिन हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को पड़ता है। संत कबीर दास का जन्म 1398 में वाराणसी (काशी) में हुआ था।

उनके माता-पिता मुस्लिम थे, लेकिन कबीर ने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की सीमाओं को पार करते हुए एकता और मानवता का संदेश दिया। उनकी रचनाएं बीजक, साखी ग्रंथ, कबीर ग्रंथावली और अनुराग सागर के रूप में प्रसिद्ध हैं। संत कबीर की जयंती उनके योगदान और शिक्षाओं को सम्मानित करने का अवसर है। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज में प्रासंगिक हैं, जो हमें धर्म, जाति और संप्रदाय से परे मानवता, प्रेम और एकता का संदेश देती हैं। 

उनकी कविताएं और दोहे आज भी लोगों के जीवन में मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। संत कबीरदास जी 15वीं सदी के एक महान कवि, समाज सुधारक और संत थे। उन्होंने अपने दोहों और पदों के माध्यम से समाज में व्याप्त आडंबरों, पाखंडों और भेदभाव का खंडन किया. उन्होंने एकता, प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश दिया कबीर दास जी ने मूर्ति पूजा, तीर्थ यात्रा और कर्मकांडों का विरोध किया और सीधे ईश्वर के प्रति समर्पण पर जोर दिया। 

उनका मानना था कि ईश्वर एक है और उसे किसी भी रूप में पूजा जा सकता है। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। संत कबीरदास जयंती का पर्व कबीरदास जी के विचारों और शिक्षाओं को याद करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का एक अवसर है। इस दिन देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें भजन, कीर्तन, प्रवचन और सत्संग शामिल हैं। 

लोग कबीरदास जी के दोहों का पाठ करते हैं और उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि सच्चा धर्म प्रेम, करुणा और मानवता की सेवा में निहित है। हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए और एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहां कोई भेदभाव न हो। 

संत गुरु कबीर जयंती न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह हमें अपने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, भेदभाव और असमानता के खिलाफ जागरूकता फैलाने का अवसर भी प्रदान करती है। इस दिन को मनाकर हम संत कबीर की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें और समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दें।

Published / 2025-06-08 18:05:46
श्री राधा-कृष्ण मंदिर में अन्नपूर्णा महाप्रसाद में 3,000 से भी अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

मंदिर में 7 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने किया दर्शन 

भजन संध्या में मनमोहक भजनों में भक्तगण खूब झूमे 

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग में श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम में 210वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद भंडारा किया गया। आज का श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा महाप्रसाद डूंगरमल अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल ने अपनी पोती सान्वी एवं मेहल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर उनके परिवार के सौजन्य से आयोजित किया गया। 

अन्नपूर्णा महाप्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12:30 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे ने लगायी। तत्पश्चात मंदिर परिसर में उपस्थित 3 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आज के महाप्रसाद में केसरिया खीर, पुड़ी आलू चना सब्जी, जीरा राइस चिप्स आदि का वितरण किया गया। तत्पश्चात भजन- संध्या के कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने कृष्ण दरबार में अपने मनमोहक सुमधुर भजनों की अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रोताओं को खूब झुमाया। 

श्री राधा कृष्ण के जयकारा से पूरा वातावरण कृष्णमय एवं भक्तिमय बन गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती की गयी। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि संस्था द्वारा श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर में आज अन्नपूर्णा महाप्रसाद एवं भजन संध्या में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं का भीड़ लगा रहा। तथा भगवान श्री राधा कृष्ण मंदिर मे 7 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये। 

आज मंदिर में रांची के अलावे झारखंड के कई जिलों से आये सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर का दर्शन किये तथा श्रद्धालुगण भव्य आकर्षक एवं अनूठा मंदिर को देखकर मंत्र मुग्ध होकर उत्साहित हो रहे थे। 

मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, संजय सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, मधु जाजोदिया, विशाल जालान, नंदकिशोर चौधरी, सुनील पोद्दार, अनिल अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, शोभा अग्रवाल, वंदना अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, विष्णु सोनी, पवन कुमार पोद्दार, अजय राय, मनीष सोनी, महेश वर्मा, धीरज कुमार गुप्ता, परमेश्वर साहू, चंद्रदीप साहू, हरीश कुमार, अशोक ठाकुर, सुधीर कुमार, सत्यम कुमार, आशीष कुमार, सूरज कुमार सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

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