टीम एबीएन, रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम अध्यक्षा जगदम्बा माँ की पुण्य तिथि के अवसर पर ब्रह्मकुमारी संस्थान में पूरे दिन भर राजयोग अभ्यास किया गया। उन्होंने अपने दिव्य व्यक्तित्व के सुचीकृत आकर्षण से हजारों नारियों को स्वयं परमपिता परमात्मा द्वारा इस सृष्टि के परिवर्तन के महान कार्य के लिए निमित्त बनाया जो नव-सृजन की राह दिखाई। वह वर्तमान में भी नारी सत्ता द्वारा संचालित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रूप में समस्त संसार को आलोकित कर रहा है।
इस अवसर पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला ने कहा उनकी वाणी जलतरंग की तरह अमृत बरसाती हुई सत्यता और निर्मलता से भरी होती थीं। नव सृष्टि के निर्माण हेतु संकल्पित ब्रह्म ज्ञान देवी सरस्वती, दुर्गुणों को मिटाने वाली दुर्गा, धन-सम्पदा से भरपूर करने वाली लक्ष्मी, विकारों को जाने वाली कालिका खप्पड़वाली जैसे अनेक गुणों की प्रतिमान बना दी।
उनके चमकारिक आध्यात्मिक व्यक्तित्व ने तो हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई जैसे वर्ग संघर्ष में उलझे लोगों को इक्कीसवीं सदी के सत्पुरुषों योग्य बना दिया। सदा आलोकितता पर बैठे रहने के कारण कि सीत और लोक को आई हुई परी सी जान पड़ती मातेश्वरी जी ममतामयी की मूरत। गहन आध्यात्मिकता प्रेरणाओं से अति-प्रोत श्वेतवस्त्र धारणी सरस्वती मैय्या को ब्रह्म की एक पसली से निर्मित हुआ माना जाता है।
वैसे भी आदि देव ब्रह्मा की गोद ली हुई, दिल के पास रहने वाली अतिप्रेम संताने थीं। वे ऊंच-नीच के भेद-भाव रखे बिना, लौकिक माँ-बाप से हजारों गुणा निस्वार्थ प्रेम और शुभेच्छा लुटाती करती थीं। माया के जंजीरों से मुक्त नहीं कराती थीं ईश्वरीय जन्मसिद्ध अधिकार दिलाने हेतु प्रयत्नशील रहती थीं। बहुत कोशिशों के बाद भी कोई आध्यात्मिक जागृति पा जाये तो उन्हें आंतरिक खुशी होती थी।
हृदय भावनायें मिटाकर सम्पूर्ण आत्मविश्वास जगाने की उनमें अद्भुत युक्ति और शक्ति राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने संदेश में कहा कि ब्रह्म की मानस पुत्री श्री मातेश्वरी जगदम्बा जी के जीवन में योग और कर्म का संतुलन का अद्भुत समन्वय था। गीता के अनुसार राजयोग साधना की यह परमोच्च स्थिति को स्पर्श कर लेती है तो योग: कर्मकुशलता की सिद्धि प्राप्त हो जाती है। ऐसे साधक की किसी भी क्षण अपने संकल्प को शक्ति में परिवर्तित करने की क्षमता विकसित हो जाती है।
मातेश्वरी जी ने स्वयं परमपिता परमात्मा शिव द्वारा सिखाये गये राजयोग से कर्म योग द्वारा जीवन मुक्ति प्राप्त करके कर्मोंग पर विजय प्राप्त कर लिया था। मातेश्वरी जी अभय वरदान प्राप्त करके कैंसर जैसी असाध्य और असह शारीरिक बीमारी के भय को परास्त करते हुए अंतिम स्वांस तक मानवता की सेवा में तत्पर रहीं। मातेश्वरी जी अपने नश्वर भौतिक शरीर का परित्याग करने के कुछ क्षण पूर्व तक ईश्वरीय ज्ञानामृत की पावन ज्ञान-गंगा बनकर उपस्थित मनुष्यात्माओं को पवित्र बनाने के पुण्य कर्म में सलग्न रहीं।
24 जून 1965 को मातेश्वरी जी ने स्वयं को शारीरिक कर्मेंद्रियों सीमाओं और बंधनों से मुक्त कर सम्पूर्णता को प्राप्त कर महाप्राण यात्रा पर प्रस्थान किया। मातेश्वरी श्री जगदम्बा की सूक्ष्म उपस्थिति आज भी ब्रह्मावासियों को जीवन-पंथ पर अचल-अडोल होकर कर्म योग के लिए प्रेरणा प्रदान कर रही है। मातेश्वरी श्री जगदम्बा जी के दिखाये कर्म-साधना के पथ पर चलते हुए राजयोग की साधना द्वारा रुद्र-यज्ञ, आहुतियाँ और निराहकारी बनकर मानवता की सेवा में समर्पित रहे, यही हम ब्रह्मावासियों की उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि।
इस अवसर पर मातेश्वरी जी के जीवन चरित्र पर आधारित नाटिका का बालिकाओं द्वारा मंचन किया गया साथ ही गाईडेड मेडिटेशन का भी अभ्यास कराया गया। सभा में उपस्थित सभी ब्रह्म वत्सों ने पुष्पाजंली अर्पित किया तथा भोग स्वीकार किया। नया युग आध्यात्मिक युग होगा। पवित्रता ही सुख शान्ति की जननी है हर कीमत पर इसकी रक्षा करना अपना सर्वप्रथम कर्तव्य है। (लेखिका ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की केन्द्र प्रशासिका हैं।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग मे श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम में 212 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया गया। आज का महाप्रसाद श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के सदस्यों के सौजन्य से आयोजित किया गया।
अन्नपूर्णा महाप्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12:30 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे ने लगायी, तत्पश्चात मंदिर परिसर में उपस्थित दो हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आज के महाप्रसाद में केसरिया खीर, आलू चिप्स का पैकेट का वितरण विशाल जालान के सौजन्य से किया गया।
तत्पश्चात भजन- संध्या के कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने कृष्ण दरबार में अपने मनमोहक सुमधुर भजनों छोटी छोटी गईया छोटे छोटे ग्वाल छोटो सो मेरो मदन गोपाल..., जब जब तुझे पुकारू मैं मेरे श्याम आ जाता मेरे सामने की अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रोताओं को खूब झुमाया। तथा श्री राधा कृष्ण के जयकारा से पूरा वातावरण कृष्णमय एवं भक्तिमय बन गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती की गयी।
ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि संस्था द्वारा श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर मे आज अन्नपूर्णा महाप्रसाद एवं भजन संध्या में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं का भीड़ लगा रहा। तथा भगवान श्री राधा कृष्ण मंदिर में पांच हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
इस अवसर पर-ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, मधु जाजोदिया, विशाल जालान, नंदकिशोर चौधरी, सुनील पोद्दार, विष्णु सोनी, संजय सर्राफ,पवन कुमार पोद्दार, मनीष सोनी, महेश वर्मा, धीरज कुमार गुप्ता, परमेश्वर साहू, चंद्रदीप साहू, हरीश कुमार, अशोक ठाकुर, सुधीर कुमार, सत्यम कुमार, आशीष कुमार, सूरज कुमार, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के नागरिक संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के देशभर में 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठनों व कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद से देश में पिछले एक साल में छापे की 38,388 कार्रवाइयों में 53,651 बाल मजदूर मुक्त कराये गये। इनमें 90 प्रतिशत बच्चे उन क्षेत्रों में काम कर रहे थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन व भारत सरकार बाल मजदूरी का सबसे बदतरीन स्वरूप मानती है। इनमें स्पा, मसाज पार्लर और आर्केस्ट्रा जैसे तमाम उद्दयोग शामिल हैं जहां बच्चों का बाल वेश्यावृत्ति, चाइल्ड पोर्नोग्राफी या जबरिया अन्य यौन उद्देश्यों से इस्तेमाल किया जाता है।
ये तथ्य जेआरसी के सहयोगी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के शोध प्रभाग सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहैवियर चेंज (सी-लैब) की बाल श्रम के संबंध में एक रिपोर्ट ‘बिल्डिंग द केस फॉर जीरो : हाउ प्रासीक्यूशन एक्ट्स ऐज टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड लेबर’ में उजागर हुए। इन छापों के बाद 38,388 मामले दर्ज किये गये और 5,809 गिरफ्तारियां हुईं। इनमें 85 प्रतिशत गिरफ्तारियां बाल मजदूरी के मामलों में हुईं।
स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर रिपोर्ट में बाल श्रम के खात्मे के लिए एक राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन मिशन शुरू करने, इसके लिए पर्याप्त संसाधनों का आवंटन और जिलों में जिला स्तरीय चाइल्ड लेबर टास्क फोर्स के गठन की सलाह दी गयी है। यह रिपोर्ट 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के बीच देश के 24 राज्यों व केंद्रशासित क्षेत्रों के 418 जिलों में काम कर रहे जेआरसी के 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठनों के बाल श्रम और ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों को मुक्त कराने के लिए की गयी छापामार कार्रवाई के आंकड़ों पर आधारित है।
रिपोर्ट में बाल श्रम के खात्मे के लिए खास तौर से कानूनी कार्रवाइयों, शिक्षा व पुनर्वास पर जोर देते हुए कई सिफारिशें भी की गईं हैं। रिपोर्ट के अनुसार जब तक दोषियों पर सख्त व त्वरित कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बाल श्रम पर रोक मुश्किल है। साथ ही, अगर मुक्त कराये गये बच्चों की शिक्षा व पुनर्वास के इंतजाम नहीं किये गये तो वे फिर बाल मजदूरी के दुष्चक्र में फंस जायेंगे।
लिहाजा बाल मजदूर पुनर्वास कोष समय की जरूरत है। साथ ही, 18 साल तक मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा से भी बाल श्रम की रोकथाम में मदद मिलेगी क्योंकि पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों के बाल मजदूरी के दलदल में फंसने की संभावना अधिक रहती है। रिपोर्ट में समग्र नीतिगत बदलावों, सरकारी खरीदों में बाल श्रम का इस्तेमाल कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति, खतरनाक उद्योगों की सूची के विस्तार, राज्यों को उनकी विशेष जरूरतों के हिसाब से नीतियां बनाने, बाल मजदूरी के खात्मे के लिए सतत विकास लक्ष्य 8.7 की समयसीमा को 2030 तक बढ़ाने, दोषियों के खिलाफ सख्त व त्वरित कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गयी है।
इस दौरान सबसे ज्यादा तेलंगाना में 7,632 छापे मारे गये जबकि इसके बाद उत्तर प्रदेश (2,469), राजस्थान (2,453) और मध्यप्रदेश (2,335) रहे। यह दर्शाता है कि देशभर में चलाये गये बाल मजदूरी विरोधी अभियान प्रभावी रहे हैं, लेकिन स्थायी बदलाव तभी आयेगा जब कानून का डर और जवाबदेही सुनिश्चित की जाये। रिपोर्ट बताती है कि छापेमारी के साथ बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराने में भी तेलंगाना अव्वल रहा वर्ष 2024-25 में बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराने में तेलंगाना देश में अव्वल रहा जहां 11,063 बच्चे छुड़ाए गए जबकि इसके बाद बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का स्थान है।
बिहार में 3,974, राजस्थान में 3,847, उत्तर प्रदेश में 3,804 और दिल्ली में 2,588 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। जेआरसी के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का बाल श्रम के सबसे वीभत्स स्वरूपों में इस्तेमाल यह बताता है कि सरकार व नागरिक समाज के तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराने का हमारा राष्ट्रीय संकल्प अभी अधूरा है।
भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के कन्वेंशन 182 यानी बाल श्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संधि का हस्ताक्षरकर्ता देश है जिसमें बाल श्रम के सभी खतरनाक स्वरूपों को खत्म करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। भारत इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रहा है जिसके सुखद परिणाम भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा, इस रिपोर्ट से यह तथ्य स्थापित हुआ है कि कानूनी कार्रवाइयों से लोगों के मन में कानून का भय पैदा होता है जो बाल मजदूरी के खिलाफ प्रतिरोधक का काम करता है।
बाल मजदूरी के बदतरीन स्वरूपों के शिकार बच्चों के साथ न्याय तभी होगा जब दोषियों को सजा मिले और पीड़ितों के लिए सुरक्षा व पुनर्वास के पुख्ता इंतजाम हों। सरकार को अभियोजन तंत्र को मजबूत करते हुए एक बाल मजदूर पुनर्वास फंड स्थापित करने व इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक समग्र पुनर्वास नीति पर काम करना चाहिए।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार अंतराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एकादशी व्रत-उपवास जप-अनुष्ठान समूह सानिध्य में आनलाइन 24 घंटे का गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान विधि-विधान से गायत्री माता और गुरु-ईश ध्यान नमन , वंदन, पूजन-अर्चन सहित संपन्न हुआ।
इसमें प्रतिनिधिमंडल ने सभी से अनुरोध किया कि इस दैवीय योजना में गृहे गृहे आवासीय तपोवन में समयदान निर्धारित कर भारत राष्ट्र के नव निर्माण तथा सभी के लिए सद्बुद्धि व उज्वल भविष्य की प्रार्थना एवं सद्भावना के साथ सभी अपने बहुमूल्य समय का एक अंश अवश्य देने का प्रयास करें। जप-अनुष्ठान सुबह चार बजे से दूसरे दिन चार बजे तक निर्धारित था।
जप-अनुष्ठान समूह में बताया गया कि गायत्री महामंत्र में सद्बुद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई है। इसके 24 अक्षर में 24 अमूल्य शिक्षा-विद्या के संदेश भरे हुए हैं। उन शिक्षाओं में वे सभी आधार मौजूद हैं, जिन्हें हृदयंगम करने वाले का सम्पूर्ण दृष्टिकोण शुद्ध और भ्रम- जन्य अविद्या का नाश हो जाता है। गायत्री महामंत्र की रचना ऋषियों के वैज्ञानिक आधार पर हुई है।
जो अपने अंत:करण में सद्बुद्धि को जितना स्थान देता है, उसे उतनी ही मात्रा में आनन्दमयी स्थिति का अनुभव व लाभ प्राप्त करता है। आगे बताया गया कि परमात्मा से निकटता का साधन है अंत:करण से प्रार्थना। बताया कि शास्त्रकारों ने गायत्री की सर्वोपरि स्थान, स्थिति, शक्ति और इसकी उपयोगिता को एक स्वर से स्वीकार किया है।
इसमें निर्मल भावना, सद्विचार और सर्वोत्कृष्ट करूणा एक दैवी गुण व आत्म प्रकाश है। सभी शामिल साधक-शिष्यों ने सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्जवल भविष्य की मंगलमय मनोरथ से मंगलमय प्रार्थना की। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ-साधक और प्रचारक जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम अध्यक्ष ब्रह्माकुमारी मातेश्वरी सरस्वती का स्मृति दिवस आज यहां चौधारी बगान, हरमू रोड ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया। मौके पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ सुबोध ने कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा जिन्हें मम्मा कह कर संबोधित किया जाता है वे ब्रह्माकुमारियों की प्रथम प्रमुख थीं, जिन्हें बुद्धि की देवी की रूप में जाना जाता है। मम्मा ने ब्रह्माकुमारी संगठन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और आध्यात्मिकता को पोषण दिया।
महिला समिति अग्रवाल सभा की पूर्व अध्यक्ष मंजूला केडिया ने कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा को संस्था के संस्थापक ब्रह्मा की आध्यात्मिक बेटी माना जाता है। मम्मा ने एक मार्गदर्शक, प्रशासक एवं आध्यात्मिक शिक्षक के रूप में सभी को पालन दिया। सभा में उपस्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता सह समाजसेवी संजय सर्राफ ने कहा कि संस्था की प्रथम अध्यक्ष मातेश्वरी जगदम्बा ने ज्ञान ध्यान और सेवा के महत्व पर जोर दिया और सभी ब्रह्मावत्सों को एक भरोसा एक विश्वास के सिद्धान्त का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया।
निर्मल बुधिया अग्रवाल सभा के सह मंत्री ने कहा कि संस्था की प्रथम अध्यक्ष मातेश्वरी जगदम्बा ने सभी को स्वपरिवर्तन से विश्व परिवर्तन के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मम्मा का जीवन दिव्य गुणों व सेवा भाव से सम्पन्न था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अग्रवाल सभा के कार्यकारिणी सदस्य नरेश कुमार बंका ने कहा मातेश्वरी जी ने ब्रह्माकुमारियों के विकास और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और संगठन के सदस्यों को आध्यात्मिक ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान किया।
अमरेंद्र विष्णुपुरी समाजसेवी ने कहा आज के दिन हम सभी संस्था की प्रथम अध्यक्ष मातेश्वरी जगदम्बा के जीवन और शिक्षाओं पर तथा उनके द्वारा सिखाये गये मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। इस अवसर पर केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए कहा रूहानियत के गगनमंडल में ब्रह्मा संस्थापक के रूप में यदि ज्ञान सूर्य थे तो मातेश्वरी जी ज्ञान चन्द्रमा थीं। माँ ऐसी ज्ञान लोरी सुनाती थीं कि दु:ख अशांति शीतल मीठी छाँह में बदल जाती थीं। उन्होंने ज्ञान यज्ञ में अपने मन की पूर्ण आहुति दी तथा सर्वस्व प्रभु अर्पण किया।
उनका तपोबल उच्च स्तरिय था। वे योग की शक्तिशाली स्टेज में स्थित होकर पवित्रता तथा दिव्यता की किरणें प्रकीर्ण करती थीं। उनके नयन स्थिर, चेहरे पर मुस्कुराहट एवं मुखमंडल दिव्य आभा को लिए हुए होता था। वे ब्रह्माकुमारी शिवशक्तियों की ऐसी अनुपम सेनानी थीं जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन विश्व कल्याण की सेवा में समर्पित किया हुआ था। सरस्वती नाम से पहले उनका नाम ओम राधे था। ओम की ध्वनि करते करते वह ईश्वरीय स्मृति में मग्न हो जाती थीं और उनकी रूहानियत भरी वाणी सबको ईश्वरीय प्रेम से भाव विभोर कर देती थीं।
ज्ञातव्य हो इस अवसर पर मातेश्वरी जी के वन चरित्र पर आधारित नाटिका का बालिकाओं द्वारा मंचन किया गया साथ ही गाईडेड मेडिटेशन का भी अभ्यास कराया गया। सभा में उपस्थित सभी ब्रह्मा वत्सों ने पुष्पाजंली अर्पित किया। उक्त जानकारी देते हुए केंद्र प्रशासिका ने कहा कि यह मानवता की सेवा में नया युग आध्यात्मिक युग होगा। पवित्रता ही सुख शांति की जननी है। हर कीमत पर इसकी रक्षा करना अपना सर्वप्रथम कर्तव्य है।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार रांची युगतीर्थ मुख्य शक्तिपीठ धूर्वा सेक्टर टू,अलकापुरी शक्तिपीठ, धूर्वा बसस्टैंड प्रज्ञापीठ परिसर एवं बुटी मोड़ शाखा ओरमांझी प्रखंड, बुन्डु व राहे प्रखंड इकाई में आज विश्व स्तरीय योगदिवस पर उत्साह व उल्लास पूर्वक योगदिवस गायत्री साधकों ने मनाया। इस अवसर पर योगाचार्य चन्द्रदेव जी ने योगसाधना, राजयोग, प्रज्ञायोग, सहज योग, यम, नियम, प्रत्याहार आहार विहार पर उद्बोधन किया।
फिर संबंधित आसन, प्राणायम, बन्ध, मुद्रा, आसनों और मुद्रा विज्ञान में रोगानुसार मुद्राएं, आसन, योगाभ्यास एवं ध्यान,धारणा तथा आत्म-परमात्म के योगतत्व व चिन्तन मनन के बिंदु व सूत्रों, उसके समय निर्धारण, स्वच्छ स्थान व शुद्ध वातावरण के चयन पर प्रकाश डाला।
बताया कि इनके प्रयोग व उपयोग से साधकों एवं योगाभ्यासियों को स्वस्थ शरीर और स्वच्छ मन के विकास में पर्याप्त योगदान व लाभ मिलता है और इससे सरलतापूर्वक स्वास्थ्य संरक्षण में प्रगति एवं अनुभुति होती है। बताया कि उच्चस्तरीय योग-साधना में प्राणायम एवं सोऽहं साधना का अपना महत्व है।
आगे बताया कि योग साधनाएं सभी प्रकार के कष्टों के निवारण करने में सक्षम हैं। वरिष्ठ साधक ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय में योग व मानवीय चेतना विज्ञान के अध्ययन व प्रगतिशील प्रतिफल की उपलब्घि पर चर्चा करते हुए बताया कि आज योग पद्धति अपनाने की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
अलकापुरी शक्तिपीठ में राज प्रकाश योग प्रशिक्षक के सानिध्य में योग दिवस मनाया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के प्रचारक सह वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन कार्यकारिणी सदस्यों की एक बैठक जिलाध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार की अध्यक्षता में महाराजा अग्रसेन भवन के सभागार में संपन्न हुई। इस बैठक में मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा किए गए विभिन्न कार्यों की समीक्षा की गई एवं भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय किया गया। बैठक में अध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार ने सभी सदस्यों का स्वागत किया।
कोषाध्यक्ष कमलेश संचेती ने जिला मारवाड़ी सम्मेलन के 1 वर्ष का आय-व्यय का ब्योरा प्रस्तुत किया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 12 जुलाई को रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन महाराजा अग्रसेन भवन में प्रतिभा सम्मान समारोह- 2025 का आयोजन करेगा। इस समारोह के लिए विकास अग्रवाल एवं विशाल पाड़िया को कार्यक्रम संयोजक मनोनीत किया गया।
बैठक में 6 जुलाई को धनबाद में आयोजित झारखंड प्रांतीय अधिवेशन के संदर्भ में विस्तृत चर्चा हुई। जिला महामंत्री विनोद कुमार जैन ने बताया कि 6 जुलाई को धनबाद के राजविलास रिसोर्ट में आयोजित प्रांतीय अधिवेशन मे नवनिर्वाचित झारखंड के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल पदभार ग्रहण करेंगे। इस अधिवेशन में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री श्री संजय सेठ सहित कई गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहेंगे।
उन्होंने रांची से भी अधिक से अधिक संख्या में सदस्यों को प्रांतीय अधिवेशन मे भाग लेने का आग्रह किया। बैठक में मारवाड़ी सम्मेलन का सदस्यता अभियान बृहद स्तर पर चलाने का निर्णय लिया गया। बैठक का संचालन संयुक्त महामंत्री कौशल राजगढ़िया ने तथा धन्यवाद- ज्ञापन उपाध्यक्ष रमेश शर्मा ने किया।
उक्त जानकारी देते हुए जिला के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि बैठक मे रवि शंकर शर्मा, किशन साबू, पवन कुमार पोद्दार,नरेंद्र गंगवाल, मनोज चौधरी, विनोद कुमार जैन,कौशल राजगढ़िया रमेश शर्मा, अंजय सरावगी, राजेंद्र कुमार केडिया,निर्भय शंकर हरित, प्रमोद शाश्वत, पवन शर्मा, संजय सर्राफ, कमलेश संचेती, महेंद्र जैन,निर्मल बुधिया, अनिल अग्रवाल,ज्योति बजाज, नरेश बंका, विशाल पाड़िया, विजय कुमार खोवाल, विकास अग्रवाल, रमाशंकर बगड़िया, अजय खेतान, राजेश भरतिया, अमित बजाज, आशीष डालमिया, सुमित महलका, सनी टिंबरेवाल, सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग में श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम मे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर में एक विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सद्गुरु अपना घर आश्रम के 50 से भी अधिक निराश्रित दिव्यांग प्रभुजनों एवं सेवादारों ने भाग लिया।
इस पुनीत कार्य का संचालन मंदिर के पुजारी अरविंद पांडे जी द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन में सभी को विभिन्न प्राणायामों एवं योगासन का अभ्यास कराया। इस अवसर पर अरविंद पांडे ने उपस्थित निराश्रित जनों को योग के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास मानसिक एवं शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।
विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए योग न केवल शरीर को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि मानसिक शांति एवं आत्मबल में भी वृद्धि करता है। कार्यक्रम के दौरान अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति जैसे प्राणायामों के साथ-साथ ताड़ासन, वज्रासन, और सरल ध्यान तकनीकों का अभ्यास कराया गया। प्रभुजनों ने पूरे उत्साह से योग किया और अंत में सामूहिक शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों को फल, चना एवं जल प्रदान किया गया। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि यह आयोजन इस बात की जीवंत उदाहरण है कि समाज में सेवा और समर्पण की भावना से हर वर्ग के लोगों तक स्वस्थ और आत्मिक उन्नति के साधन पहुंचा जा सकते हैं।
रोजाना योग करने से शारीरिक और मानसिक रूप से कई फायदे होते हैं योग करने से तन और मन दोनों ही स्वस्थ रहते हैं उन्होंने बताया कि अपना घर आश्रम में सभी निराश्रित दीनबंधुओं को रोजाना योगाभ्यास कराया जाता है। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse