टीम एबीएन, रांची। शनिवार को श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची ने सर्वेश्वरी पौधरोपण अभियान वर्ष 2025 के दूसरे चरण का आयोजन ग्राम - दोलैचा, पंचायत - लापुंग, जिला - रांची में किया गया। कार्यक्रम की शुभारंभ स्थानीय ग्राम देवी के मंदिर में विधिवत आरती-पूजन के साथ किया गया तथा साफ-सफाई के लिए झाड़ू भी दिया गया।
उसके पश्चात उच्च विद्यालय, लापुंग में नौवीं एवं दसवीं कक्षा के बच्चों के बीच एक लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें श्री सर्वेश्वरी समूह का संक्षिप्त परिचय देते हुए समूह द्वारा किये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में भी छात्र-छात्राओं को अवगत कराया गया।
साथ ही वृक्षों के कमी से हो रहे दुष्परिणामों के बारे में अवगत करते हुए वृक्षों के बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। गोष्ठी के बाद बच्चों के बीच लगभग 150 पौधों का वितरण किया गया। इसके उपरांत विद्यालय परिसर में लगभग 50 पौधों का रोपण भी किया गया।
ज्ञात हो कि श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्व स्तरीय सामाजिक एवं धार्मिक संस्था है जो अनेक जनकल्याण के कार्यक्रम लगातार करती रहती है। जनसेवा के लिए श्री सर्वेश्वरी समूह का नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं लिम्का बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।
सर्वेश्वरी पौधरोपण अभियान उन्ही जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक है जिसे पूरे वर्षा ऋतु में चलाया जायेगा। इस वृहद पौधरोपण अभियान के माध्यम से लोगों को वृक्ष लगाने एवं वृक्षों को बचाने के प्रति भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में उच्च विद्यालय, दोलैचा के प्रधान अध्यापक जनक साहू एवं सचिव राम मोहन भगत भी शामिल हुए। समस्त कार्यक्रम के कुशल आयोजन में सुनील साहू का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम में समूह शाखा की ओर से हेमंत नाथ शाहदेव, नवल किशोर सिंह, शंभू शंकर षाड़ंगी, गंगाधर नाथ शाहदेव, अंजनी सिंह, समुद्र श्रीनाथ शाहदेव, गौरी शंकर षाड़ंगी, नागदमनी नाथ शाहदेव, कीर्तिमान नाथ शाहदेव, रविंद्र साहू, द्वेद नाथ शाहदेव, बद्रीनाथ शाहदेव के साथ लगभग 15 सदस्यगण शामिल हुए।
*प्रेस विज्ञप्ति*
*स्वामी सदानंद जी महाराज का 81वां जन्मोत्सव उल्लासपूर्वक मनाया गया*
*स्वामी जी का जीवन त्याग, सेवा और मानव कल्याण पर है समर्पित: डुंगरमल अग्रवाल*
श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वाधान मे ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग (रांची) में ट्रस्ट के संस्थापक परमहंस श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज जी का 81वां जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर को भव्य रूप से फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया, जिससे सम्पूर्ण परिसर एक दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण में परिवर्तित हो गया। स्वामी सदानंद महाराज जी के 81वें अवतरण दिवस की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति स्वरूप 81 दीपों का आयोजन किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में एक साथ प्रज्ज्वलित किया। दीपमालिका की रोशनी ने पूरे मंदिर क्षेत्र को भक्तिमय प्रकाश से आलोकित कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वनि वंदन एवं मंगलाचरण से हुई, जिसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी एवं सज्जन पाड़िया ने कई मधुर और मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों के दौरान श्रद्धालुओं ने नृत्य करते हुए अपनी भक्ति अर्पित की।जन्मोत्सव के अवसर पर पुजारी अरविंद पांडे द्वारा विधिवत भोग लगाया गया एवं विशेष आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आरती के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लेकर पुण्य अर्जित किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल ने कहा कि स्वामी सदानंद महाराज जी का जीवन त्याग, सेवा और मानव कल्याण को समर्पित रहा है। उनके सान्निध्य में ट्रस्ट द्वारा रांची में झारखंड का सबसे बड़ा श्री राधा-कृष्ण मंदिर और अपना घर आश्रम जैसे जनसेवा के महत्वपूर्ण कार्य संचालित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और स्वामी जी के चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित की। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि स्वामी जी का जन्मोत्सव का यह आयोजन भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक ऊर्जा और मानव सेवा के संकल्प से परिपूर्ण अवसर बन गया। इस अवसर पर-डुंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल,मनोज कुमार चौधरी, सज्जन पाड़िया,निर्मल छावनिका,नन्द किशोर चौधरी, शिव भगवान अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, सुरेश चौधरी,अरविंद अग्रवाल, सुनील पोद्दार,अशोक पोद्दार,मनीष जालान, बिष्णु सोनी, मनीष सोनी, सुरेश अग्रवाल, पवन पोद्दार, विद्या देवी अग्रवाल, बिमला जालान, शीला मुरारका,रमा डोकानिया,कवीता गाड़ोदिया, संतोष देवी अग्रवाल, ललिता पोद्दार,रेखा पोद्दार, मनीषा जालान,सरिता अग्रवाल, प्रमिला पुरोहित,सुधा सुल्तानिया सीता शर्मा, शारदा पोद्दार,मंगला मोदी, उषा मोदी,आशा मुंजाल, दीपिका मोतीका,आशा मिश्रा, आशा सिंह, बिमला मिश्रा, सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे।
प्रेस प@श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। आज येसु धर्मसंघ के संस्थापक संत इग्नासियुस का पर्व रांची में धूमधाम से मनाया गया। संत मारिया गिरजा में रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद की अगुवाई में समारोही मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया। इस अवसर पर रांची येसु धर्मसंघ के सभी पुरोहितों के लिए विशेष प्रार्थना की गई एवं छोटानागपुर में शिक्षा एवं विकास में उनके योगदान की सराहना की गई।
आज रांची येसु धर्मसंघ के पुरोहितों एवं धर्म बंधुओं के लिए विशेष दिन रहा क्योंकि आज उनके संस्थापक लोयोला के संत इग्नासियुस का पर्व मनाया गया। इस अवसर पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने मिस्सा बलिदान अर्पित किया। उन्होंने अपने धर्मोपदेश में कहा कि कलीसिया एवं बाइबिल में अनेक संत हुए हैं जिनके जीवन हमारे लिए आदर्श रहा है।
संत इग्नेशियुस भी हमारे लिए एक आदर्श है हमें भी इग्नासियुस के समान प्रभु पर केंद्रित जीवन जीना है। इस प्रकार हम प्रत्येक क्षण एक आदर्श जीवन जीते हुए सच्चे ख्रीस्तीय कहलायेंगे। उन्होंने रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत में येसु धर्मसंघ के योगदान के उनके धर्मसंघ का आभार व्यक्त किया और इस अवसर पर बधाईयां एवं शुभकामनाएं भी दीं।
संत इग्नासियुस काथलिक कलीसिया के महान संतों में से एक हैं जिन्होंने येसु समाज की स्थापना की। उन्होंने अपने जीवन को ईश्वर और मनुष्यों की सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित कर दिया। उनका जीवन कठिन तपस्या, आंतरिक परिवर्तन और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत उदाहरण है।
संत इग्नासियुस लोयोला का जन्म सन् 1491 ई. में स्पेन के बास्क के एक छोटे से गाँव लोयोला में हुआ था। उनका असली नाम इनेगो लोपेज दे लोयोला था। वे एक समृद्ध और कुलीन परिवार से थे और उनका पालन पोषण भी राजसी वातावरण में हुआ था। बचपन से ही वे एक शूरवीर योद्धा बनना चाहते थे और अपनी युवावस्था में वे एक बेहद ही साहसी सैनिक बने। सैनिक बनने के बाद वे विभिन्न युद्धों में भाग लेने लगे।
सन् 1551 ई. में एक युद्ध के दौरान, उन्हें तोप के गोले से घुटने में गंभीर चोट लगी। उन्हें चिकित्सा के लिए, लम्बे समय तक अस्पताल में विस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने समय व्यतीत करने के लिए ईसा मसीह और विभिन्न संतों की जीवनियों को पढा। इन ग्रंथों को पढ़ने से उनके जीवन में गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन हुआ। उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग कर तप और साधना जीवन बिताना शुरू किया।
चोट से उबरने के बाद इग्नासियुस ने स्पेन और फिर फ्रांस की राजधानी पेरिस में उच्च शिक्षा हासिल की। इस दौरान निरंतर ध्यान और आत्म-निरीक्षण द्वारा गहराई से ईश्वर को जानने का प्रयास किया। अपने इन अनुभवों को उन्होंने आध्यात्मिक साधना नामक किताब में लिखा है। आध्यात्मिक साधना, एक अनूठी किताब मानी जाती है। आज भी यह पुस्तक आध्यात्मिक साधकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
1534 ई. में संत इग्नासियुस ने अपने छः मित्रों के साथ येसु समाज की स्थापना की। उनका उद्देश्य था ईश्वर की महत्तर महिमा के लिए शिक्षा-प्रसार, प्रेरितिक कार्य और समाज की सेवा करना। इस धर्मसमाज को 1540 ई. में संत पापा द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई। तब से लेकर आज तक इस धर्म समाज के द्वारा दुनिया भर में हजारों की संख्या में स्कूल कॉलेज और विश्वद्यिालय चलाए जा रहे हैं।
संत इग्नासियुस का निधन 31 जुलाई 1556 ई. को रोम में हुआ। उन्हें 1622 ई. में संत घोषित किया गया। उन्हीं की स्मृति में 31 जुलाई को उनका पर्व मनाया जाता है। संत इग्नासियुस का जीवन और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक आध्यात्मिक साधना हम सबों के लिए प्रेरणादायक और अनुकरणीय है।
येसु धर्मसंघ के संस्थापक लोयोला के संत इग्नासियुस के पर्व के अवसर पर रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद के आलावा, येसु धर्मसंघ के प्रोविंशियल फाo अजित कुमार खेस, फाo सुधीर मिंज, फाo आनंद डेविड खलखो, टी ओ आर के प्रोविंशियल फाo मनोज वेंगतनाम, सिo मेरी ग्रेस तोपनो, सिo सुषमा, 50 से अधिक पुरोहितगण एवं हज़ारों की संख्या में ख्रीस्त विश्वासी शामिल हुए।
*प्रेस विज्ञप्ति*
*पांच दिवसीय श्री कृष्ण बीतक कथा के चौथे दिन माता,संतान एवं प्रेम का आध्यात्म संगम*
*नारी निंदा ना करो, नारी रतन की खान। नारी ने ही जन्म दिया,राम कृष्ण हनुमान: साध्वी मीणा महाराज*
श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वाधान में संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग रांची मे आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय श्री कृष्ण बीतक कथा के चौथे दिन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ। बीतक कथा में वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका विदुषी साध्वी मीणा महाराज एवं विदुषी पूर्णा महाराज ने भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। चौथे दिन की कथा मे विदुषी साध्वी मीणा महाराज ने श्री कृष्ण की मार्मिक कथा के इस प्रसंग में कहा कि हे माता अपने घर जो संतान आती है उनके साथ श्री कृष्ण जैसा बर्ताव रखो क्या पता तुम्हारे घर में कोई अवतारी पुरुष आ जाए,*नारी निंदा ना करो, नारी रतन की खान। नारी ने ही जन्म दिया, राम कृष्ण हनुमान।* इस संसार में नारी की कितनी बड़ी महिमा है। इस प्रकार निजानंदाचार्य जी श्री देवचंद्र महाराज ने श्री कृष्ण प्रणामी धर्म को विश्व विख्यात बनाने के लिए किस प्रकार प्रारंभ किया, श्री देवचंद जी के चरणों में मिहिराज ठाकुर आए जो बाद में महामति प्राणनाथ जी के नाम से विश्व मे प्रसिद्ध हुए। *प्रेम छुपाये ना छुपे जा घर प्रगट होय। जो पे मुख बोले नहीं तो नैन देत है रोए।* किसी व्यक्ति में प्रेम है तो वह प्रेम छुपा नहीं सकता परमात्मा के चरणों के प्रति प्रेम का उदय हो वह प्रेम कभी छुपाए नहीं छिपता, मुख से बोलकर नहीं सुनाता है कि मैं प्रेमी हूं इस प्रकार गुरु शिष्य का प्रेम होना चाहिए इसी प्रकार स्वामी देवचन्द्रजी और स्वामी प्राणनाथ जी मे बना यह दोनों श्री राज श्यामा जी के अवतार हैं।
इसके उपरांत विदुषी साध्वी पूर्णा महाराज ने श्रीकृष्ण के दिव्य प्रसंग को अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। मंदिर परिसर में उपस्थित भक्तगण कथा की प्रत्येक पंक्ति के साथ आत्म विभोर हो उठे। उन्होंने अपने मनमोहक भजनों से भक्तों को अमृत गंगा का रसपान कराते हुए खूब झुमाया। तथा श्री कृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय एवं कृष्णमय हो गया। कार्यक्रम में सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, कथा के अंत में सामूहिक आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया पांचवें दिन गुरुवार को अंतिम कथा सुबह 11 बजे से अपराह्न 1 बजे तक होगा। पश्चात कथा का समापन होगा। उन्होंने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से सहभागी होने की अपील की है।
इस अवसर पर-डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, मनोज चौधरी,निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ,सज्जन पाड़िया, मधु जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, संजय सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, अंशुल अग्रवाल, दिलीप अग्रवाल, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडे, विद्या देवी अग्रवाल, कविता चौधरी, पूनम अग्रवाल, शकुंतला केजरीवाल, प्रमिला पुरोहित, सुधा सुल्तानिया, अमिता जालान, विमला जालान, शोभा जालान, सरिता अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, निकिता जालान, उमा नारसरिया, अनीता जालान, सुलोचना देवी चौधरी, रेखा पोद्दार, शारदा पोद्दार, सरोज पोद्दार, शीला मुरारका, के अलावे बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती रांची के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गोस्वामी तुलसीदास जयंती का पर्व इस वर्ष 31 जुलाई दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। यह तिथि श्रावण मास की सप्तमी को पड़ती है जिसे महान संत कवि और भक्त गोस्वामी तुलसी दास जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जयंती, भारतीय धर्म और साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इस दिन हम उन महान संत की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से धर्म, भक्ति, और आदर्श जीवन के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया। महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12 ग्रंथों की रचना की। सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस को मिली,ये उन्होंने सरल अवधि भाषा में लिखी। श्रीरामचरितमानस के बाद हनुमान चालीसा उनकी लोकप्रिय रचना है।
गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान शिव और माता पार्वती के मार्गदर्शन से अपने जीवन में सगुण रामभक्ति की धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि वह धारा आज भी प्रवाहित हो रही है। रामभक्ति के द्वारा न केवल अपना ही जीवन कृतार्थ किया अपितु जन-जन को श्रीराम के आदर्शों से बांधने का प्रयास किया।गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन एक प्रेरणा का स्रोत है।
वे हिंदी साहित्य के महान कवि और संत थे, जिनकी काव्य रचनाएँ विशेष रूप से भगवान राम के प्रति उनकी गहरी भक्ति को दर्शाती हैं। उनके प्रमुख ग्रंथों में रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, दोहावली और कवितावली शामिल हैं। रामचरितमानस उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है, जो वाल्मीकि की रामायण का हिंदी में सरल रूपांतरण है। इस ग्रंथ में भगवान राम की जीवनी को सरल और सरस भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे हर व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके।
उन्होंने अपना अंतिम समय काशी में व्यतीत किया और प्रभु श्रीराम का स्मरण करते हुए अपने शरीर का त्याग किया एवं उनकी आत्मा प्रभु श्री राम में विलीन हो गई। उनके ग्रंथों में भगवान राम के जीवन के आदर्श पहलुओं को उजागर किया गया है, जो हर भक्त के लिए मार्गदर्शक हैं। हनुमान चालीसा में हनुमान जी की शक्तियों और उनके भक्तों के प्रति असीम कृपा का वर्णन किया गया है, जो भक्तों को साहस और विश्वास प्रदान करता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती पर हम उनकी शिक्षाओं और रचनाओं की महत्ता को समझते हुए, अपने जीवन को धार्मिकता और भक्ति की दिशा में आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। उनका जीवन और उनके ग्रंथ हमारे लिए सदैव प्रेरणा के स्रोत रहेंगे, और हम उनकी उपासना के माध्यम से उनके दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास ने अपने काव्य में केवल धार्मिक भावनाओं को ही नहीं बल्कि सामाजिक समरसता सदाचार और करूणा जैसे मानवीय मूल्यों को भी स्थान दिया। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को भगवान श्री राम के आदर्शों से जुड़ने का कार्य किया उन्होंने भक्ति को ही मोक्ष का मार्ग बताया और बताया कि प्रभु केवल भाव के भूखे हैं, जाति भाषा वर्ण के नहीं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती केवल एक कवि या संत की जयंती नहीं है यह दिन हमें उनके दिखाएं मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
आज जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है तुलसीदास जी के विचार उनकी भक्ति और साहित्य एक प्रकाश स्तंभ की भांति मार्गदर्शन करता है उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस युग में थी। रामचरितमानस की चौपाइयां में आज भी भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती है तुलसीदास का जीवन काव्य और भक्ति अनंत काल तक मानवता को राह दिखाते रहेंगे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के जामताड़ा जिÞले में स्थित प्रख्यात श्री श्याम मंदिर में हुई चोरी की घटना की श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने तीव्र निंदा व्यक्त करते हुए इस घटना को एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताया है। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ श्री श्याम मंदिर में हुई चोरी की घटना की निंदा की है।
कहा है कि अज्ञात चोरों ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए श्री श्याम प्रभु की प्रतिमा से सभी मूल्यवान जेवरात आभूषण मुकुट, हार, चूड़ियां, कंठी, बाजूबंद और दान पात्र में रखी लाखों रुपये की धनराशि चोरी कर ली। यह घटना केवल आर्थिक क्षति नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी गहरा आघात है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चोरी नहीं, अपितु हमारी आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर एक बड़ा हमला है।
ट्रस्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि देशभर के प्रमुख मंदिरों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाये और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए विशेष बलों की तैनाती की जाए। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में भी श्री श्याम मंदिर में चोरी की घटना हुई थी, जिसमें असामाजिक तत्वों ने मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर मंदिर से आभूषण चुरा लिये थे। यह दोनों घटनाएं दशार्ती हैं कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा अब एक बड़ा सवाल बन चुकी है। श्रद्धालुओं और समाज में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। तथा सरकार से कठोर कार्रवाई की मांग की है।
सरकार को चाहिए कि वह इस गंभीर मुद्दे को केवल एक चोरी की घटना न समझे, बल्कि इसे धार्मिक अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा से जोड़कर देखे। साथ ही मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षागार्ड, और आधुनिक अलार्म सिस्टम अनिवार्य किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहरायी जायें। यह समय है जब समाज और सरकार दोनों को मिलकर धार्मिक स्थलों की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
घटना की निंदा करने वालों में ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, राजेंद्र अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधु जाजोदिया, अरविंद अग्रवाल, विष्णु सोनी, संजय सर्राफ, पुजारी अरविंद पांडे आदि शामिल है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, दुमका। जिले में अवस्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बाबा बासुकीनाथ धाम में श्रावणी मेला के 14 वें गुरुवार को दिन शाम 7 बजे तक 97805 श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और पूजा- अर्चना की।
बासुकीनाथ धाम मेला प्रबंधन समिति से मिली जानकारी के अनुसार बीते गुरुवार को संध्या 7 बजे तक सामान्य रूट लाइन से 78,900, शीघ्र दर्शनम से 5400 एवं जलार्पण काउंटर से 13505 श्रद्धालुओं ने जल अर्पण किया।
श्रद्धालुओं से गुरुवार को चढ़ावे के रूप में शीघ्र दर्शनम से 16,20,000 रुपये, दान पेटी से 2,52,980 गोलक से 51270 एवं अन्य स्रोत से 8961 रुपये नकद राशि प्राप्त हुए।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार राष्ट्र स्तरीय आनलाइन स्वाध्याय-सत्संग में युग ऋषि परमपूज्य गुरुदेवश्री की पुस्तक उपासना का तत्वदर्शन और स्वरूप पर सुबह आनलाइन स्वाध्याय पाठ व संवाद चल रहा है। इस युग साहित्य के माध्यम से आज बताया गया कि मनुष्य जीवन का चिर साध्य है आत्म-शांति, जिसका आधार है-- वे श्रेष्ठताएं जो परमात्मा के स्वाभाविक गुण हैं और उन्हें उपासना के आधार पर ही पाया जा सकता है, किंतु सच्ची उपासना वह है, जो केवल उपासना के लिए निष्काम होकर की जाए।
निष्काम रूप से उपासना प्रारंभ कर परमात्मा से आत्मा का संबंध स्थापित करिये और श्रेष्ठताओं की उपलब्धि कर सुख-शांति के अक्षय आनंद से भरे जीवन और अनंत आनंद की परख कीजिए। बताया गया कि हमारा प्रत्येक भाव, विचार क्रिया और वस्तु उपासना का स्वरूप बन जाए, इस उच्च स्थिति को पाने तक हमारा पावन कर्त्तव्य है कि हम प्रतिदिन सच्चे और गहरे मन से परमात्मा की थोड़ी-थोड़ी उपासना नित्य निरंतर करते चलें।
यह थोड़ी-थोड़ी उपासना भी जब हमारे जीवन में अनिवार्य आवश्यकता बनकर हमें लाभान्वित करेगी। पाठ-संवाद में बताया कि परमात्मा समस्त सत्प्रवृत्तियों एवम् अनंत शक्तियों का केंद्र है। जब जीव विभु, बनना चाहता है, तो उसे अपने सामने एक आदर्श उपस्थित रखना होता है, जो परमात्मा का सच्चे मन से जितना-जितना चिंतन करता है, वह उसी अनुपात से परमात्मा के गुणरूप में बदलता जाता है।
जीवन का लक्ष्य आत्मोत्कर्ष है, उसकी पूर्ति में परमात्मा का स्मरण-चिंतन एवं भजन-पूजन आवश्यक संबल सिद्ध होता है। आज स्वाध्याय में करीब तीन दर्जन साधक-शिष्य भाई-बहन शामिल रहे। स्वाध्याय के शुभारंभ में गुरु-ईश ध्यान नमन वंदन और अंत में सर्वत्र मंगलकारी शांतिपाठ कर समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री-परिवार के मीडिया प्रचारक जय नारायण प्रसाद ने दी।
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