टीम एबीएन, रांची। तिरुपति अपार्टमेंट कांके रोड में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ के आवास में श्री कृष्ण जन्माष्टमी बड़े ही हषो॔ल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बाल गोपाल श्री कृष्ण को मनमोहक रूप से फूलों एवं बैलूनों से सजाया गया एवं पूजा अर्चना की गयी।
प्रसाद में फल, रबड़ी, धनिया, आटे की पंजीरी, बादाम, किशमिश, काजू, मिश्री, मक्खन, पंचामृत एवं साबूदाने की खीर, नारियल के लड्डू, पेडा,चॉकलेट पंचमेवा,का भोग अर्पित किया गया। शाम को भजन- कीर्तन किया गया, रात्रि 12 बजे शंखनाद के बीच श्री कृष्ण का जन्म हुआ।
लड्डू गोपाल को झूलन में झुलाया गया। सामूहिक रूप से आरती की गई एवं प्रसाद वितरण किया गया। संजय सर्राफ ने कहा कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का पर्व है।
भगवान शिव की मानस पुत्री मनसा देवी की पूजा आस्था और विश्वास के साथ सम्पन्न
मान्यता: सांपों के काटने से होने वाली बीमारियों से सुरक्षा और संतान प्राप्ति के लिए की जाती है मनसा पूजा
कई स्थानों पर बत्तख की दी गई बलि
एबीएन संवाददाता,लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा के विभिन्न स्थानों में 17 अगस्त को भगवान शिव की मानस पुत्री मां मनसा देवी की पूजा विश्वास, भक्ति, आस्था और समर्पण भाव से किया गया। मनसा पूजा में विशेष रूप से झारखंड के रांची, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम आदि इलाकों में ओडिया और बांग्ला भाषी के अलावा पंचपरगनिया,खोरठा भाषा-भाषी के लोग अधिकांश रूप से शामिल होते हैं। लोहरदगा के पतराटोली, थाना टोली, पावरगंज क्षेत्र, छत्तर बगीचा बाल्मीकि नगर आदि इलाकों में मां मनसा की प्रतिमा और चित्र स्थापित कर उनकी विधिवत पूजा अर्चना की गई। कुछ इलाके में वक्त की बलि दी गई।
नागों की देवी की आराधना को मनसा पूजा या नाग पूजा भी कहा जाता है।एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो क्षेत्रीय कैलेंडर के श्रवण संक्रांति के दिन में मनाया जाता है। यह देवी मनसा को समर्पित है, जिन्हें सांपों की देवी माना जाता है। इस त्योहार के दौरान, भक्त देवी मनसा की पूजा करते हैं, उनसे आशीर्वाद मांगते हैं और सांपों के काटने और बीमारियों से सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।
मनसा देवी को सांपों की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से सांपों के काटने और उनसे होने वाली बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
ऐसी भी मानता है कि मनसा देवी को संतान प्राप्ति के लिए भी पूजा जाता है। उनकी पूजा करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिलता है।
भक्तों को शारीरिक और मानसिक कष्टों से छुटकारा मिलता है।
मनसा पूजा में, भक्त देवी को फूल, फल, मिठाई, और दूध चढ़ाते हैं।
कुछ भक्त बत्तख या अन्य जानवरों की बलि भी चढ़ाते हैं।पूजा के बाद, भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं और दूसरों को भी प्रसाद वितरित किया गया। थाना टोली में पुरोहित सुभाष चंद्र चौबे ने पूजा संपन्न कराया इस मौके पर यजमान के रूप में संतोष मुखर्जी- बिनोती देवी, मृत्युंजय चौबे, सोम मुखर्जी अनीता ओझा, प्रतिमा मुखर्जी, सुमन ओझा, कृष्णा, पूजा, सुदीप्ता, ईशानी, अर्पिता, नील, रुद्रांश सावित्री करुआ समेत काफी संख्या में लोग शामिल हुए।
मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री माना जाता है। उनकी पूजा सर्पदंश से सुरक्षा, संतान प्राप्ति और समृद्धि के लिए की जाती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मनसा पूजा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है, कि यह चांद सौदागर और उनकी पत्नी बेहुला की कहानी से जुड़ी है।
मनसा पूजा की कथा मनसा मंगल काव्य में वर्णित है, जो 13वीं से 18वीं शताब्दी के बीच लिखा गया था। इस कथा के अनुसार, देवी मनसा, भगवान शिव की मानस पुत्री हैं। नागों की देवी हैं। कहा जाता है की मां मनसा का जन्म कश्यप ऋषि के मस्तिष्क से हुआ था। मनसा देवी को हलाहल विष से भगवान शिव की रक्षा करने के लिए भी जाना जाता है।
ऐसा भी कहा जाता है कि एक बार
देवी ने क्रोधित होकर उसके सातों पुत्रों को मार डाला। चांद सौदागर की पत्नी, बेहुला, ने अपने पति को बचाने और देवी को प्रसन्न करने का फैसला किया। उसने एक नाव में अपने पति के शव को लेकर भागीरथी नदी में यात्रा की, और देवी मनसा की आराधना की। मनसा देवी, बेहुला की भक्ति से प्रसन्न हुईं और उसने चांद सौदागर के सातों पुत्रों को पुनर्जीवित कर दिया।
फोटो संकेत :- लोहरदगा के थाना टोली में मां मनसा की पूजा संपन्न करवाते पुरोहित सुभाष चंद्र चौबे पूजा में भाग लेतीं महिलाएं
टीम एबीएन, रांची। रविवार को श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची ने सर्वेश्वरी पौधरोपण अभियान वर्ष - 2025 के चौथे चरण का आयोजन ग्राम- तारुप, टिकरा टोली, प्रखंड- रातू, जिला- रांची में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय ग्राम देवी के मंदिर में विधिवत आरती-पूजन के साथ किया गया तथा साफ-सफाई के लिए झाड़ू भी दिया गया।
उसके पश्चात एक लघु गोष्ठी की गयी। जिसमें श्री सर्वेश्वरी समूह का संक्षिप्त परिचय देते हुए समूह के जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में भी ग्रामीणों को अवगत कराया गया। साथ ही वृक्षों के कमी से हो रहे दुष्परिणामों के बारे में अवगत कराते हुए वृक्षों के बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
गोष्ठी के बाद ग्रामीणों के बीच जैव विविधता को ध्यान मे रखते हुवे 296 पौधों का वितरण किया गया तथा धर्मेंद्र सिंह के फार्महाउस में नीम, सागवान, आवला जैसे 12 पौधों का रोपण किया गया। ज्ञात हो कि श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्व स्तरीय सामाजिक एवं धार्मिक संस्था है जो अनेक जनकल्याण के कार्यक्रम लगातार करती रहती है।
जनसेवा के लिए श्री सर्वेश्वरी समूह का नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। सर्वेश्वरी पौधरोपण अभियान उन्ही जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक है जिसे पूरे वर्षा ऋतु में चलाया जाएगा। इस वृहद वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से लोगों को वृक्ष लगाने एवं वृक्षों को बचाने के प्रति भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम मे ग्रामीणों के बीच उत्सुकता थी और उपस्थित उन सभी ने वृक्ष लगाने और उसे बचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में समूह शाखा की ओर से विभूति शंकर सहाय, अभय सहाय, हेमन्त नाथ शाहदेव, नवल किशोर सिंह, धर्मेंद्र सिंह के साथ अन्य समर्पित सदस्यगण शामिल हुए।
टीम एबीएन, रांची। मंगल भवन अमंगल हारी, नारायणी तेरो नाम सुखकारी..., दादी दादी बोल दादी सुन लेसी, सुन लेसी मां सुन लेसी..., नारायणी लियो अवतार, बधाई सारा भगता न... आदि दिनभर इन भजनों से मारवाड़ी भवन गुंजायमान रहा। अवसर था श्री राणी सती मंडल के वार्षिकोत्सव का नगर की प्रसिद्ध धार्मिक संस्था श्री राणी सती मंडल ने अपना 44वां वार्षिकोत्सव।
रविवार को प्रात: 8:30 बजे से रात्रि 9 बजे तक मारवाड़ी भवन हरमू रोड में बड़े ही धूमधाम से मनाया। प्रात: 9 बजे आचार्य पंडित श्याम सुंदर भारद्वाज के मंत्रोच्चारण के साथ विजय खोवाल ने सपत्नीक गणेश पूजन का कार्य संपन्न कराया तत्पश्चात उद्योगपति अभय अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। इसके पश्चात मंडल के सदस्यों ने पांच भजनों की माला अर्पित की।
11 बजे से श्री हनुमान मंडल के सदस्यों ने भजनों का कार्यक्रम प्रस्तुत किया। 2 बजे से भारत के नंबर 1 मंगल पाठ वाचक एवं भजन गायक सौरभ - केशव मधुकर (कोलकाता ) ने 701 सुहागन महिलाओं के साथ राजस्थानी वेश- भूषण में सुसज्जित हो कर राणी सती के जीवन चरित्र का मंगल पाठ का रसास्वादन कराया। साथ ही अपने भजनों के कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।
इनके भजनों के बोल- मात भवानी मेरी मां है कल्याणी, एक बार चली आओ फिर आके चली जाना, बांटो-बांटो आज बधाई झुनझुनवाली घर पर आई, जगदंबा भवानी मैया तेरा त्रिभुवन में छाया राज है। समाजसेवी सज्जन कुमार मनीष सर्राफ एवं हनुमान प्रसाद रामअवतार राजगढ़िया ने दादी जी को गजरा पहनाया।झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने सपत्नीक दादी जी को मेहंदी लगाई।
समाजसेवी कमल मोर ने सपरिवार दादी जी को चुनड़ी ओढ़ाई, समाजसेवी राजेश अग्रवाल ने छप्पन भोग लगाया तो प्रदीप नारसरिया ने सपरिवार भक्तों के बीच मंगल पाठ के प्रसाद का वितरण किया। इसके बाद महाभोग लगा कर लगभग 3500 भक्तों को प्रसाद जिमाया गया। दिनभर श्रद्धालु भक्तों का तांता लगा रहा।
महोत्सव के सफल आयोजन में विनोद झुनझुनवाला, राजेन्द्र केडिया, अरविंद मंगल, राजेश पोद्दार, मनोज अग्रवाल, निर्मल बुधिया, पंकज शर्मा, राजन प्रसाद, प्रतीक अग्रवाल, अमित खेमका, बिजय खोवाल, दिनेश गोयल, आनंद टाइवाला, हरीश अग्रवाल, संजय शर्मा, वीरेंद्र बंसल, संदीप अग्रवाल, संजय सर्राफ, सुशील केडिया, विशाल सिंघानिया, पवन फोगला, सुमित गाड़ोदिया, मनीष बागला, महेश कानोडिया, शिवम सर्राफ, अमित खुटेटा, रौनक झुनझुनवाला, अरुण बाजोंरिया, सुशील बजाज के साथ ही सैकड़ों सदस्यों के साथ ही श्री श्याम परिवार, श्री राणी सती सेवा समिति, मारवाड़ी सहायक समिति ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उपरोक्त जानकारी निर्मल बुधिया ने उपलब्ध करायी।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में 15 अगस्त को 79वां स्वतंत्रता दिवस अत्यंत उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ नजर आया। कार्यक्रम की शुरूआत झंडोत्तोलन के साथ हुई, जिसे ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल ने संपन्न किया।
झंडा फहराने के बाद राष्ट्रगान गूंज उठा और उपस्थित जनसमूह ने देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। झंडोत्तोलन के पश्चात अपने संबोधन में श्री अग्रवाल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद करते हुए कहा कि देश को आजाद कराने में जिन वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनका ऋण हम कभी नहीं चुका सकते।
उन्होंने कहा कि आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करें। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर में प्रसाद रूप में केसरिया खीर एवं विविध मिठाइयों का वितरण किया गया, जिससे उपस्थित जनसमूह में विशेष उत्साह देखा गया। कार्यक्रम को और अधिक आत्मीय बनाने के लिए देशभक्ति गीतों का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और युवाओं ने भाग लिया।
ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम में सदगुरु कृपा अपना घर आश्रम में निवास कर रहे निराश्रितों, दिव्यांगों, विशेष व्यवस्था की गयी थी ताकि वे भी इस राष्ट्रीय पर्व में भागीदारी कर सकें। जिन्होंने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत वातावरण का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। अंत में सबने मिलकर वन्दे मातरम् के जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
मौके पर ट्रस्ट के सह संरक्षक विजय कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल,उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, संजय सर्राफ, सुनील पोद्दार, नंदकिशोर चौधरी, सुरेश चौधरी, मधु जाजोदिया, पुजारी अरविंद पांडे, पवन पोद्दार, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
कमल सिंह लोधा
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क (ग्वालियर)। 15 अगस्त 2025 मानवता की मिसाल पेश करते हुए ग्वालियर निवासी आकाश श्रीवास्तव, जो संत रामपाल जी महाराज के शिष्य हैं, ने 26 मार्च को अपने दिवंगत पिताजी रमेश चंद्र जी का देहदान गजराज मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर में किया। इस पुण्य कार्य में उनकी पत्नी रक्षा श्रीवास्तव भी सहयोगी रहीं।
आकाश श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा अपने गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज से मिली, जो अपने अनुयायियों को पाखंड-मुक्त जीवन अपनाने और समाज के कल्याण के लिए कार्य करने का संदेश देते हैं। वर्तमान समय में जहाँ कई लोग कर्मकांड और अंधविश्वास में उलझे रहते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी स्वेच्छा से देहदान जैसे परमार्थ कार्य कर विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।
गजराज मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार के निस्वार्थ कार्य बहुत कम देखने को मिलते हैं और इससे मेडिकल विद्यार्थियों व शोधकर्ताओं को अमूल्य मदद मिलती है। इस अनुकरणीय पहल के लिए 15 अगस्त को आकाश श्रीवास्तव को गजराज मेडिकल कॉलेज की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर सम्मान से नवाजा गया। समाज के लिए यह घटना प्रेरणास्रोत बन गई है।
टीम एबीएन, रांची। गायत्री शक्तिपीठ धूर्वा सेक्टर टू में सात दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का समापन गुरुवार को 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, गायत्री दीक्षा, यज्ञोपवित व पुंसवन संस्कार सहित बहुत हर्षोल्लास आनन्दमय वातावरण में जयघोष सहित हुआ। रांची उपजोन समन्वय,रांची शहर व जिलांतर्गत प्रखंड के सेवाभावी, समयदानी साधक-शिष्य भाई-बहनों को बहुत अच्छी तरह सम्मानित कर विदाई हुई।
शक्तिपीठ में शामिल प्रशिक्षुओं ने बताया कि सत्र संचालन, आवासीय व भोजन व्यवस्था बहुत सुन्दर व सराहनीय थी और उस टीम को धन्यवाद दिया तथा कहा कि इस सत्र में प्रशिक्षण विषय पाठ,जप-अनुष्ठान, योगाभ्यास, साधना, स्वाध्याय, संयम सेवा समयदान श्रमदान सारी व्यवस्था में भागीदारी करते हुए हर्ष आनन्द उल्लास सहित सद्ज्ञान, सत्कर्म, सद्भाव, एकता समता का अनुभव व वातावरण का दर्शन हुआ।
शान्तिकुञ्ज टोली में प्रवचन कर्ता और ढपली वादक भी शामिल प्रशिक्षु, जिज्ञासु की प्रश्नोत्तरी से खुशी जाहिर की।अगले प्रशिक्षण सत्र कार्यक्रम आयोजन के लिए साहिबगंज के लिए रवाना हुई। इस दौरान टीम नायक ने बताया कि गायत्री-साधना,यज्ञीय अनुष्ठान सर्व सुलभ, सर्वोपयोगी और फलदायी है। उन्होंने बताया कि मनुष्य शरीर में अनेक विलक्षण शक्तियां सन्निहित हैं। यह तथ्य अब वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं।
विस्तार से बताया कि ये शक्तियाँ शरीरस्थ कुछ केन्द्रों व ग्रंथियों पर संचालित व प्रभावित करती हैं। अनेक उदहारण दृष्टांत सहित बताया कि कैसे गुरुदेव पांच शरीर से भी कार्य करते थे। यह निश्चित फलदायी साधना है। आहार विहार प्राकृतिक व्यावहारिक, धर्म संगत और सात्विक रखना उत्तम है।
टोली नायक ने बताया कि गायत्री और यज्ञ पर गुरुदेव वेदमूर्ति- तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा गायत्री मंत्र और यज्ञ की आध्यात्मिक महत्ता को गहराई से प्रस्तुत किया है, जो गायत्री मंत्र के दार्शनिक और वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करती है, यह आत्म-जागरण, जनजागरण और मानसिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
साथ ही यज्ञ की प्रक्रिया और जीवन में इसके प्रभाव को सरलता से समझाया गया है। विचार क्रांति अभियान, युग निर्माण योजना, सांसारिक, भौतिक जनों एवं आध्यात्मिक साधकों के लिए बहुत प्रेरणादायी व मार्गदर्शक है।
प्रशिक्षण सत्र समापन के दौरान कहा कि यह दिव्य ब्राह्मी प्रसाद औरों को बांटिए। यह पुण्य प्रसाद वितरण एक पुण्य कर्म और आवश्यक धर्म कृत्य है। अंत में लोकहितार्थ मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ और शांतिपाठ कर समापन किया गया। दोपहर भोजनोपरांत सभी साधक-शिष्य भाई-बहन विदा किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदुओं का त्योहार गोगा नवमी 17 अगस्त दिन रविवार को मनाया जायेगा। गोगा नवमी जिसे गुगा नौमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व मारवाड़ी समाज के घरों में भी उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। गोगा नवमी भगवान गुगा यानि नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित है।
गोगा नवमी भाद्र पद महीने में कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू परंपराओं में गोगाजी जिन्हें जहर वीर गोगा भी कहा जाता है वे एक लोकप्रिय लोक देवता है जिनकी भारत के उत्तरी राज्यों विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है। गोगा नवमी गोगाजी के सम्मान में मनाया जाने वाले महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है।
मान्यता है कि वे भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी को प्रकट हुए थे। इसलिए हिंदू उन्हें यह दिन समर्पित करते हैं, गोगा को शक्तिशाली राजपूत राजकुमार के रूप में जाना जाता है जिनके पास विषैला सांपों को नियंत्रित करने की अलौकिक शक्तियां थी। इस दिन अनुष्ठानों के एक भाग के रूप में उनकी कहानियों के विभिन्न संस्करण सुनाए जाते हैं।
कुछ कहानियों में उनके दिव्य जन्म, उनके विवाह, पारिवारिक जीवन, युद्ध, सांप के काटने पर उपचार करने की उनकी अविश्वसनीय कला,और पृथ्वी से उनके गायब होने का वर्णन है। हिंदुओं का मानना है कि इस दिन उनकी पूजा करने से वे सांपों और अन्य बुराइयों से सुरक्षित रहते हैं उसके अलावा एक लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि भगवान गुगा बच्चों को सभी नुकसानों से बचाते हैं इसलिए विवाहित महिलाएं गोगा नवमी पर पूजा करती है और अपने बच्चों की भलाई और लंबी उम्र के लिए उनसे प्रार्थना करती है।
कुछ नि: संतान विवाहित महिलाएं भी इस दिन संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती है। गोगा नवमी के दिन भक्त गोगा जी की मूर्ति की पूजा करते हैं वे नीले रंग के घोड़े पर सवार दिखाई देते हैं और पीले और नीले रंग के झंडे भी थामे रहते हैं कुछ क्षेत्रों में भगवान गोगा की पूजा का अनुष्ठान श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन से शुरू होता है और नवमी तक नौ दिनों तक चलता है इसी कारण इसे गोगा नवमी के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन सभी गोगाजी की कथा का पाठ करते हैं एवं विधिवत पूजा अर्चना पूरे होने के बाद भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में चावल और चपाती वितरित की जाती है। भगवान गोगा को राखी या रक्षा सूत्र भी बांधते हैं। एवं रक्षाबंधन में बांधी गई रक्षा सूत्र को समर्पित करते हैं ताकि किसी भी चोट या नुकसान से सुरक्षा का आश्वासन मिल सके।
गोगा नवमी न केवल एक धार्मिक पर्व है बल्कि सांस्कृतिक एकता, समाजिक विश्वास और लोक परंपरा का प्रतीक भी है गोगाजी की अलौकिकता और सर्प दंश रोकने की शक्ति का लोक विश्वास, पूजा- विधि, मेले- जुलूसों और कथा- श्रवण की रस्मों से जुड़ा यह उत्सव हमारे लोक जीवन की समृद्ध धरोहरों में से एक है।
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