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Published / 2026-04-24 17:57:34
पंछी को दाना - पंछी को पानी: जनजागरूकता अभियान का पहला चरण संपन्न

  • पंछी को दाना - पंछी को पानी: जनजागरूकता अभियान का पहला चरण संपन्न

टीम एबीएन, रांची। श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची, (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) ने आज दिनांक 24.04.2026 (दिन- शुक्रवार) को पंछी को दाना-पंछी को पानी: जन जागरूकता अभियान वर्ष 2026 का पहला चरण का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को प्रोग्रेसिव पब्लिक स्कूल आॅफ लर्निंग, साई विहार कॉलोनी के पीछे, न्यू  मधुकम, रोड न. 5, रांची में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्कूल के छठी कक्षा से दसवीं कक्षा के बच्चों के बीच सकोरा (मट्टी का बर्तन) एवं दाना का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया ताकी इस भीषण गर्मी में पक्षियों को पीने का पानी एवं दाना मिल सके साथ ही उनके प्राणों की रक्षा हो सके।

इस भीषण गर्मी में हम मनुष्य तो अपने सुख-सुविधा के लिए उपाय कर लेते हैं। परंतु इन बेजुबान पंछियों के पास इस तपती गर्मी से अपने प्राणों के रक्षार्थ कुछ नही होता। एक तरफ जहां हम अपने स्वार्थ के लिए लगातार वृक्षों की कटाई कर पक्षियों के घरों को उजाड़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण को बढ़ाकर प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रकृति रूपी भगवती की हम पूजा तो अवश्य करते हैं परन्तु अपने क्रिया कलापों से उन्ही भगवती की अवहेलना भी करने में पीछे नही रह रहे हैं। 

नतीजा हम सबके सामने है जहां पहले के दिनों में पक्षी हमारे घर-आंगन में सुबह शाम चहचहाते रहते थे वहीं आज सन्नाटा पड़ा है। हमारे बड़े-बुजुर्ग यह भी मानते थे कि पक्षियों के वास से वास्तु-दोष काट जाता है एवं घर परिवार में खुशहाली रहती है। परन्तु अब हालात यह है कि पक्षी बस अब चित्र एवं किताबों तक सिमट कर रह गये हैं। 

पक्षी हमारे बीच से विलुप्त न हो जाये और इस भीषण गर्मी से उनके प्राणों के रक्षार्थ यह कार्यक्रम लोगों को जागरूक करने का एक अनूठा पहल है। कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों के बीच लगभग 225 सकोरा एवं दाना के पैकेट का वितरण किया गया एवं उनसे निवेदन किया गया कि अपने घरों के छत एवं आंगन पर इसमें पानी भर कर रखें और साथ ही पक्षियों के खाने के लिए दाना भी दें। 

कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रोग्रेसिव पब्लिक स्कूल आॅफ लर्निंग के प्रधानाध्यापक अशोक पाठक का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समूह शाखा रांची की ओर से बद्रीनाथ शाहदेव, गिरेंद्र नाथ शाहदेव, अनिल ठाकुर, नागदमनी नाथ शाहदेव, नितिन चौरसिया, यदुनाथ शाहदेव आदि सम्मलित हुए।

Published / 2026-04-23 23:38:26
18, 19 और 20 को होगा विशु शिकार

18, 19 और 20 को होगा विशु शिकार

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। जिला राजी पड़ाह व्यवस्था के तहत आगामी 18/ 19/ 20 को आयोजित विशु शिकार के सफल आयोजन हेतु आज 23.4.2026 को सेन्हा प्रखंड के पलमी गांव में  पडहा  वेल बुधवा उरांव की अध्यक्ष में बैठक की गयी। बैठक में जिला राजी पडहा वेल लक्ष्मीनारायण भगत, उप कोटवार सुखदेव उरांव, उपवेल बुद्धेश्वर उरांव, मीडिया प्रमुख जगदीप भगत उपस्थित थे। 

बैठक में ग्रामीणों को जिला राजीव पड़ा व्यवस्था के जिला वेल ने कहा कि पेसा कानून झारखंड में लागू हो गया है इसलिए जिला राजी पड़ा व्यवस्था और पैसा कानून के नियमावली को गांव-गांव में बतलाना, जागरूक करना जिला राजी पडहा व्यवस्था का दायित्व बढ़ गया है। 

इसलिए आगामी मई माह मे होने वाले विशु शिकार में अधिक से अधिक संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति  आवश्यक हो गया है। बैठक में संदीप पहन, मंगल पहान, शनिचरवा उरांव, जीतराम उरांव, राम उरांव, रोपा उरांव, खादी पुजार, गंदुवा उरांव, रोया पहन, चेता उरांव आदि ग्रामीण उपस्थित थे।

Published / 2026-04-23 13:25:18
ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है और पुस्तकें इस शक्ति का सबसे सुलभ माध्यम : संजय सर्राफ

  • विश्व पुस्तक दिवस ज्ञान, संस्कृति और सृजनात्मकता का वैश्विक उत्सव
  • ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है और पुस्तकें इस शक्ति का सबसे सुलभ माध्यम : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 23 अप्रैल को पूरे विश्व में विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। यह दिन पुस्तकों, लेखकों और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समर्पित है। 

इसकी शुरुआत वर्ष 1995 में यूनेस्को द्वारा की गई थी। 23 अप्रैल का दिन साहित्य जगत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन महान साहित्यकार विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वांतेस और इंका गार्सिलासो दे ला वेगा का पुण्यतिथि या जन्मतिथि माना जाता है। 

यही कारण है कि इस तिथि को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में चुना गया।विश्व पुस्तक दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों में पढ़ने की आदत को विकसित करना और पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाना है। आज के डिजिटल युग में,जहां मोबाइल और इंटरनेट का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, वहां पुस्तकों का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। 

पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि वे व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास, सोचने-समझने की क्षमता और रचनात्मकता को भी समृद्ध करती हैं। इस दिवस की महत्ता इस बात में निहित है कि यह समाज को ज्ञान और शिक्षा के प्रति जागरूक करता है। पुस्तकें हमें इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और जीवन के विभिन्न पहलुओं की गहराई से जानकारी देती हैं। वे हमें नई दृष्टि प्रदान करती हैं और हमारे भीतर सकारात्मक सोच का विकास करती हैं। 

विशेषकर बच्चों और युवाओं के लिए यह दिन अत्यंत प्रेरणादायक होता है, क्योंकि यह उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ साहित्य से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। विश्व पुस्तक दिवस की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इस दिन विभिन्न देशों में पुस्तक मेलों, साहित्यिक गोष्ठियों, लेखकों के सम्मान समारोह और पठन-पाठन से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 

कई स्कूलों और पुस्तकालयों में बच्चों को मुफ्त पुस्तकें वितरित की जाती हैं, जिससे उनमें पढ़ने की आदत विकसित हो सके। इसके अलावा, लेखकों और प्रकाशकों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति भी जागरूकता फैलाना इस दिवस का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

इस दिन का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य कॉपीराइट के प्रति सम्मान को बढ़ावा देना है, ताकि लेखकों की रचनात्मकता और मेहनत का उचित सम्मान हो सके। यह दिवस हमें यह भी सिखाता है कि पुस्तकें केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे समाज को दिशा देने का एक सशक्त माध्यम हैं।

अंततः विश्व पुस्तक दिवस हमें यह संदेश देता है कि ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है और पुस्तकें इस शक्ति का सबसे सुलभ माध्यम हैं। इसलिए हमें अपने जीवन में पुस्तकों को स्थान देना चाहिए और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना चाहिए। यह दिन हमें पुस्तकों के महत्व को समझने और उन्हें अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करता है।

Published / 2026-04-22 22:38:04
25 अप्रैल को धूमधाम से मनायी जायेगी सीता नवमी

  • सीता नवमी 25 अप्रैल को 
  • सीता नवमी त्याग, पवित्रता धर्म, धैर्य और आदर्श नारीत्व का पावन उत्सव : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सीता नवमी जिसे जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह पर्व माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष सीता नवमी 25 अप्रैल दिन शनिवार को मनायी जायेगी। 

यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को पड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मिथिला बिहार के जनकपुर क्षेत्र में राजा जनक के खेत से माता सीता का प्राकट्य हुआ था। माता सीता को त्याग, पतिव्रता धर्म, सहनशीलता और आदर्श नारीत्व की प्रतिमूर्ति माना जाता है। उनका जीवन हर युग की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 

सीता नवमी के दिन श्रद्धालु विशेष रूप से माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं तथा व्रत रखकर सुख-समृद्धि और पारिवारिक कल्याण की कामना करते हैं।सीता नवमी का मुख्य उद्देश्य समाज में नारी के सम्मान, शक्ति और सहनशीलता के गुणों को जागृत करना है। माता सीता ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। 

उनका जीवन यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और मर्यादा बनाये रखना ही सच्चा धर्म है। यह पर्व हमें पारिवारिक मूल्यों, निष्ठा और त्याग की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। पौराणिक कथा के अनुसार, मिथिला के राजा जनक एक बार अपने राज्य में यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। यज्ञ स्थल की भूमि को शुद्ध करने के लिए जब वे स्वयं हल चला रहे थे, तभी धरती से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई। 

राजा जनक ने उस कन्या को ईश्वर का आशीर्वाद मानकर अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उनका नाम सीता रखा, क्योंकि वे हल की नोंक (सीत) से प्रकट हुई थीं। आगे चलकर माता सीता का विवाह भगवान श्रीराम से हुआ और उन्होंने अपने जीवन में आदर्श पत्नी और नारी धर्म का पालन करते हुए अनेक कठिन परीक्षाओं को सहन किया। इस दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं व्रत रखती हैं और कथा श्रवण करती हैं। 

विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए माता सीता का पूजन करती हैं। कई स्थानों पर रामायण पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है। अंतत:, सीता नवमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह नारी शक्ति, त्याग और मर्यादा का जीवंत प्रतीक है, जो समाज को सदैव सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

Published / 2026-04-21 20:27:06
राजस्थान : सीकर में रोका गया दो बहनों का बाल विवाह

कानून को धता बताने की कोशिश नाकाम, सीकर में निषेधाज्ञा से रोका गया दो बहनों का बाल विवाह 

एबीएन सोशल डेस्क। राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में कानून को धता बताकर गुपचुप तरीके से दो बहनों के बाल विवाह को अदालती आदेशों के जरिए रोक दिया गया। जिले में यह पहला मामला है जब बाल विवाह रोकने के लिए अदालत ने निषेधाज्ञा जारी की। बाल विवाह की रोकथाम के लिए काम कर रहे नागरिक समाज संगठन गायत्री सेवा संस्थान को अपने एक सदस्य के जरिए सूचना मिली थी कि दो बहनों के बाल विवाह की तैयारी की जा रही है।

इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गायत्री सेवा संस्थान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं श्रीमाधोपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। बच्चियों के परिजनों को बाल विवाह के कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए उन्हें समझाया गया और इस विवाह को रोकने के लिए नोटिस दिया गया। 
पुलिस व प्रशासनिक टीम के मौके से लौटने के बाद बच्चियों के परिजन कानून को धता बता कर गुपचुप तरीके से विवाह के प्रयास में जुटे रहे। 

अक्षय तृतीया के दिन यानी 19 अप्रैल को सूचना मिली कि दोनों बच्चियों का बाल विवाह होने जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अगले दिन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहयोग से अदालत में अर्जी दी गयी, जिस पर श्रीमाधोपुर न्यायालय के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने परिजनों को अदालत में तलब किया और निषेधाज्ञा जारी कर इस बाल विवाह को रोकने का आदेश दिया। 

दोनों बच्चियों की उम्र 15 व 17 साल है और वे स्थानीय विद्यालय में पढ़ रही हैं। इस पूरी कार्रवाई में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. शालिनी गोयल, सीताराम जाखड़, बाल अधिकारिता विभाग से सहायक उपनिदेशक डॉ. गार्गी शर्मा, गायत्री सेवा संस्थान से नरेश कुमार सैनी, अभिषेक बगड़िया, चाइल्ड हेल्पलाइन से राकेश कुमार, राहुल दानोदिया और श्रीमाधोपुर थाना पुलिस टीम सक्रिय रूप से शामिल रही। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक व राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने कहा कि यह आदेश जिले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 के तहत पहली न्यायिक निषेधाज्ञा है जो भविष्य में ऐसे मामलों में एक नजीर पेश करेगी। 

यह न केवल दो बालिकाओं के जीवन को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि अब बाल विवाह जैसे अपराधों के विरुद्ध कानूनी हस्तक्षेप और प्रभावी एवं सख्त हो रहा है।  जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने अदालती आदेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए हमारे देश में कानून हमेशा से सख्त और प्रगतिशील रहे हैं। जरूरत इन कानूनों पर गंभीरता से अमल की है। 

इस तरह की निषेधाज्ञाएं एक स्पष्ट संदेश देती हैं कि कानून के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता और बाल विवाह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जिस तरह से सरकार, समाज व न्यायपालिका बाल विवाह के खिलाफ एकजुटता व दृढ़ संकल्प दिखा रहे हैं, उससे उम्मीद जगी है कि हम जल्द ही बाल विवाह मुक्त राजस्थान के सपने को पूरा होते देखेंगे। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

Published / 2026-04-21 12:03:38
भारतीय संस्कृति में साहस, ऊर्जा और अनुशासन का प्रतीक है मंगलवार

  • भारतीय संस्कृति में साहस, ऊर्जा और अनुशासन का प्रतीक है मंगलवार

एबीएन सोशल डेस्क। मंगलवार का दिन भारतीय संस्कृति में साहस, ऊर्जा और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व का संतुलन काफी गहरा है।

आध्यात्मिक महत्व

अध्यात्म में मंगलवार को मङ्गल यानी शुभता और कल्याण का कारक माना गया है।

  1. हनुमान जी और मंगल देव: यह दिन मुख्य रूप से हनुमान जी और मंगल देव (Mars) को समर्पित है। हनुमान जी संकटमोचन हैं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा जीवन से बाधाओं और भय को दूर करने के लिए की जाती है।
  2. शक्ति और साहस का प्रतीक: मंगलवार को नई शुरुआत और कठिन कार्यों को संपन्न करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह दिन मानसिक दृढ़ता और आत्म-नियंत्रण (Self-discipline) का प्रतीक है।
  3. ऋण मुक्ति: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करने से पुराने कर्जों से मुक्ति मिलने की धारणा है।

वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व

प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान (ज्योतिष शास्त्र) के अनुसार, हर दिन का नाम एक विशेष खगोलीय पिंड (Planet) के प्रभाव पर आधारित है।

  1. मंगल ग्रह (Planet Mars): इस दिन का स्वामी मंगल ग्रह है। खगोलीय दृष्टि से मंगल को लाल ग्रह कहा जाता है। इसमें आयरन ऑक्साइड की अधिकता के कारण यह उग्र और ऊर्जावान दिखता है।
  2. ऊर्जा का प्रवाह: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, सप्ताह के दिनों का वर्गीकरण हमारे शरीर के भीतर के ऊर्जा चक्रों (Energy Centers) से भी जुड़ा है। मंगलवार को शरीर में रक्त संचार और पित्त (Metabolic energy) की सक्रियता अधिक मानी जाती है।
  3. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: मंगल नाम स्वयं सकारात्मकता का संचार करता है। जब हम किसी दिन को शुभ मानकर कार्य करते हैं, तो हमारे मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर बेहतर होता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।

संक्षेप में प्रभाव

श्रेणी प्रभाव 

  • तत्व अग्नि (Fire) 
  • गुण पराक्रम और अनुशासन 
  • रंग लाल (ऊर्जा और रक्त का प्रतीक) 

मंगलवार हमें यह सिखाता है कि शक्ति का सही उपयोग और मन पर विजय प्राप्त करना ही वास्तविक मंगल है। यथार्थ शिक्षा सेवा जय हो।

Published / 2026-04-20 22:44:46
सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए जन जन में गौरवशाली परंपरा एवं स्व का बोध आवश्यक : अंबरीष सिंह

  • सनातन संस्कृति की रक्षा  के लिए जन जन में गौरवशाली परंपरा एवं स्व का बोध आवश्यक : अंबरीष सिंह

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर द्वारा रांची के ग्रीन होरिजन में प्रबुद्ध जन विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं केंद्रीय विशेष संपर्क प्रमुख अंबरीष सिंह ने उपस्थित विशिष्ट जनों को संबोधित करते हुए  प्राचीन भारत की ऋषि  परंपरा का उल्लेख किया।धर्म व समाज रक्षा हेतु सर्वस्व समर्पण की सनातन परंपरा की चली आ रही श्रृंखला का स्मरण कराया। भारत के हिंदू मान बिंदुओं की रक्षा के लिए सतत लड़ते रहे यह जानते हुए भी कि तोपों के सामने तलवारें कितनी देर टिक पायेंगी लड़ते रहे, बलिदान होते रहे।

महापुरुषों एवं संतों ने धर्म एवं मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किये।  उन्होंने बताया कि रामजन्मभूमि मन्दिर निर्माण जो अपने जीवन काल मे हम देख पा रहे है। उसकी शौर्य गाथा हमे कभी नही भूलना चाहिए। सैकड़ो वर्षों की प्रतीक्षा 76 बार के  युद्ध में हमारा पराक्रम, पौने चार लाख रामभक्तो का बलिदान जिसके कारण हिन्दू गौरव का परिचय हमने विश्व को कराया है।

हमने कभी भी  विदेशी आक्रांताओं को चैन की नींद नही लेने दी, कभी चन्द्रगुप्त मौर्य कभी छत्रपति शिवाजी तो कभी महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह जैसे अपने महान योद्धाओं के नेतृत्व में शौर्य का परिचय देकर अनेको बार उन्हें उखाड़ फेंका है। सनातन की गौरवशाली परंपरा को बचाए रखने के लिए हिंदुत्व का बोध होना आवश्यक है। रामायण महाभारत एवं अन्य पौराणिक ग्रंथो को मात्र पढ़ना नहीं बल्कि अपने दैनिक जीवन एवं आचरण में भी उतारना आवश्यक है। 

सनातन की रक्षा एवं संवर्धन के लिए प्रत्येक हिंदू में स्व  का बोध हो, परिवारों में संस्कार की रक्षा हो, सामाजिक समरसता का भाव विकसित हो। इसके पूर्व विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने उपस्थित विद्वत जनों का स्वागत एवं कार्यक्रम की भूमिका रखी। प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया धन्यवाद ज्ञापन महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी ने किया।

कार्यक्रम में भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी भूतेशानंद जी महाराज, गुवाहाटी और पटना क्षेत्र के धमार्चार्य संपर्क प्रमुख वीरेंद्र विमल, क्षेत्र मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद पांडे, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सिद्धनाथ सिंह, भारत के रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ, रेखा जैन, प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, मदन बगड़िया, मनोज पांडे, प्रकाश रंजन, दीपा रानी कुंज, अनिमा पांडे, कीर्ति गौरव, रवि शंकर राय, अमर प्रसाद, अशोक अग्रवाल, श्रीदेव सिंह, डॉक्टर सुष्मिता पांडे, अमरेंद्र विष्णुपुरी, अमरनाथ ठाकुर, शंकर दुबे, ललन सिंह पंकज सहित अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार-प्रसार प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।

Published / 2026-04-20 21:19:41
ऐतिहासिक रामनगरी चुटिया हुई शिवमय

सुरेश्वर महादेव मंदिर के वार्षिकोत्सव पर कलश यात्रा में शामिल हुई हजारों महिलाएं 

दस हजार से ज्यादा शिव भक्तों ने भंडारा में ग्रहण किया प्रसाद  

टीम एबीएन, रांची। रामनगरी चुटिया सोमवार को पूरी तरह शिवमय हो गया। स्वर्ण रेखा घाट स्थित सुरेश्वर महादेव मंदिर के चतुर्थ स्थापना दिवस पर आयोजित वार्षिकोत्सव के मौके पर निकाली गयी कलश यात्रा में हजारों की संख्या में माताएं बहने और शिव भक्तों ने भाग लिया। 

मौके पर रामनगरी चुटिया पूरी तरह शिवमय हो गयी। कलश यात्रा में ढोल नगाड़ा मांदर तुरही के बीच ओम नम: शिवाय और हर हर महादेव के नारे से पूरी चुटिया गूंजती रही। कलश यात्रा के शामिल शिव भक्तों का स्वागत करने के लिए रास्ते के दोनों और श्रद्धालु उनकी अगवानी के लिए खड़े थे। यात्रा में शामिल शिव भक्तों पर कई स्थानों पर पुष्प वर्षा की गयी। 

कलश यात्रा में  यजमान के रूप में मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुरेश साहू पत्नी रेणु, आलोक कुमार अपनी पत्नी सरिता कुमार, रामशरण तिर्की अपनी पत्नी डॉक्टर चिंतामणि सांगा और रुपेश केसरी अपनी पत्नी शशि केसरी के साथ कलश लिए सबसे आगे चल रहे थे। चुटिया के कमलू तालाब से जल लेकर महिलाएं वापस मंदिर परिसर लौटकर आये और बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। सुबह दस बजे से रूद्राभिषेक किया गया जो कि लगभग एक बजे तक चला पूरा मंदिर शिवमय हो गया। 

कलश यात्रा  कलश में जल भरने के पूर्व शांतेश्वर पुरोहित शशिकांत पांडे और पुरोहित सच्चिदानंद बाबा ने मंत्रोच्चार  के साथ जल भरने की विधि संपन्न कराई। कलश में जल भरने के पश्चात कलश यात्रा वापस मंदिर परिसर पहुंचा, जहां पूरे विधि विधान के साथ उपरोक्त पुरोहितों ने  धूमधाम के साथ पूजा अर्चना की। पूजा के बाद महाभंडारा का आयोजन हुआ जिसमें हजारों की संख्या में शिव भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। 

कार्यक्रम के आयोजन में मंदिर कमेटी के महासचिव संतोष कुमार, युवा अध्यक्ष विक्रम साहू, मीडिया  प्रभारी रतन लाल, कृष्णा साहू, गुजा तिर्की, केशव केसरी, रणजीत रामृ, रूपेश केसरी, कलेश्वर साहू, संजय कुमार, नंदकिशोर ठाकुर, विक्रम साहू, संजय कुमार, कृष्णा कुमार, रितिक राज, धनंजय सिंह, मनपूरन नायक, ललिता महतो, सरिता देवी, किरण देवी, शत्रु नायक, राकेश साहू, किशोर नायक, मुकेश केसरी, केशव केसरी, गौतम साहू, निक्की साहू, बबलू साहू आदि ने अहं भूमिका निभायी।

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