टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंदिर में नवरात्र के अवसर पर मां भगवती की पूजा अर्चना व दुर्गा पाठ का आयोजन किया गया है। आश्विन शुक्ल पक्ष की एक से नवमी तिथि तक प्रतिदिन मंदिर के आचार्य द्वारा दुर्गा पाठ किया जाएगा तथा प्रात: कालीन एवं संध्या कालीन आरती उपस्थित भक्त जनों के साथ की जाएगी । यजमानश्री संजीत चौधरी रंजना चौधरी विधि विधान से पूजा अर्चना करवा रहे हैं।
प्रथम दिन कलश स्थापना मुहूर्त प्रात 6:15 बजे से प्रारंभ हुआ। जिसमें मंडल के श्याम सुंदर शर्मा के सानिध्य में आचार्य संग मिलकर यजमान ने मां भगवती की आराधना कर वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ मां भगवती को विराजमान करवाया। वैदिक विधि विधान पूजन अर्चना नवग्रह षोडश मात्रिका कलश स्थापना के समस्त पूजन कार्यों के बाद संजीत चौधरी धर्मपत्नी रंजना चौधरी ने प्रात: कालीन आरती की । जिसमें मंडल अध्यक्ष गोपाल मुरारका उपाध्यक्ष श्रवण ढानढनिया सदस्य श्याम सुंदर शर्मा एवं अनेक भक्त उपस्थित थे।
श्री श्याम मित्र मंडल द्वारा हरमू रोड के श्री श्याम मंदिर में आज 172 वा श्री सुंदरकांड श्री हनुमान चालीसा का पाठ का आयोजन किया गया। और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे के गायन व बजरंग बली की जय जयकारों से हरमू रोड का श्री श्याम मंदिर गूंज रहा था। राजेश ढांढनीया ने अखंड ज्योति एवं पूजन के सभी कार्य सम्पन्न करवाएं। सुनील मोदी ने बालाजी महाराज की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर केसरिया पेड़ा गुड़ चना फल का भोग बालाजी महाराज को अर्पित किया।
अरुण खुटेटा ने श्रीरामचरितमानस ग्रंथ की पूजा करके पाठ वाचकों का चंदन वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पाठ वाचक मनीष सारस्वत ओम शर्मा ने अपने सहयोगियों के साथ ढोलक ढपली के स्वर के साथ श्री गणेश वंदना कर श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया। श्री सुंदरकांड का संगीतमय पाठ उपस्थित जनों से करवाया गया। भक्तजन श्री हनुमान जी की आराधना में लीन थे। पाठ के मध्य में भजनों का गायन भी किया गया। श्री सुंदरकांड के पाठ के उपरांत पुन: श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके महाआरती करके भक्तजनों को प्रसाद वितरित किया गया।
श्रवण ढानढनिया ने चना प्रसाद सेवा पुष्पा देवी पोद्दार ने केसरिया पेडा सेवा मुकेश मित्तल ने गिरिगोला सेवा एवम राजेश जयसवाल ने फल प्रसाद सेवा निवेदित की। इस अवसर पर अध्यक्ष गोपाल मुरारका महामंत्री गौरव अग्रवाल उपाध्यक्ष श्रवन ढानढनिया अशोक लड़ियां कोषाध्यक्ष मनोज खेतान राजेश ढांढनीया निवर्तमान महामंत्री विश्वनाथ नारसरिया अरुण खूंटेटा सुनील मोदी हर्ष कृष्णा कुमार आदि भक्त उपस्थित थे।
खाटूधाम की परंपरा के अनुसार रांची श्याम मंदिर में शुक्रवार 26 सितंबर को खाटू नरेश का केसर चंदन तिलक श्रृंगार मंडल अध्यक्ष गोपाल मुरारका एवं उपाध्यक्ष मनोज खेतान के सानिध्य में किया जाएगा। विशेष श्रृंगार दर्शन 5:30 बजे के उपरांत भक्तगण कर पायेंगे। उपरोक्त सभी जानकारी मंडल के महामंत्री गौरव अग्रवाल ने दी।
टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 23 सितंबर को हम भारत के महान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती मनाते हैं। वे केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के प्रखर प्रवक्ता भी थे। उनका साहित्य आज भी युवाओं में ऊर्जा, साहस और देशप्रेम की भावना का संचार करता है।
दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में हुआ था। वे एक साधारण कृषक परिवार से थे। बचपन में ही पिता का देहांत हो गया, लेकिन कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक किया और इसके बाद वे शिक्षक, पत्रकार और फिर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गये।
उनकी कविताओं में ओज, शौर्य और क्रांति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। दिनकर जी को विशेष रूप से वीर रस के कवि के रूप में जाना जाता है। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में संस्कृति के चार अध्याय, परशुराम की प्रतीक्षा, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी आदि शामिल हैं। रश्मिरथी में कर्ण की पीड़ा और संघर्ष का मार्मिक चित्रण है, तो कुरुक्षेत्र में युद्ध और शांति की गूढ़ दार्शनिकता को दर्शाया गया है।
वहीं उर्वशी जैसी रचना में उन्होंने प्रेम और सौंदर्य को उच्च स्तर पर उठाया। दिनकर जी का साहित्य समाज की जटिलताओं को उजागर करता है और न्याय, समानता एवं राष्ट्रहित की बात करता है। दिनकर जी को उनकी साहित्यिक सेवा के लिए कई सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म भूषण, और राज्यसभा सदस्य जैसे गौरवपूर्ण पद प्राप्त हुए। वर्ष 1972 में उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उनकी लेखनी सत्ता से भी टकराने का साहस रखती थी। उन्हें जनकवि भी कहा जाता है क्योंकि वे जनता की आवाज बनकर उभरे। आज जब देश को पुन: जागरूकता, नैतिकता और राष्ट्रीयता की आवश्यकता है, तब दिनकर जी की कविताएं नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी जयंती पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनके अमर साहित्य को स्मरण कर देशभक्ति की ज्योति को प्रज्ज्वलित करते हैं।
टीम एबीएन, रांची। आगामी 26/9/25 दिन शुक्रवार को कांके रोड स्थित वाटिका वेकेंट हॉल में नवरात्र के शुभ अवसर पर डांडिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। माता भवानी को स्टेप फिटनेश स्टूडियो के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
इसके लिए 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागियों को डांडिया नृत्य के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत एक ऐसा देश है जहां हर पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक उन्नयन का संदेश होता है।
ऐसा ही एक पर्व है शारदीय नवरात्रि, जो इस वर्ष 22 सितंबर दिन सोमवार से आरंभ हो रहा है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का महापर्व है, जो आत्मशुद्धि, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है।नव-रात्रि का अर्थ है नौ रातों का उत्सव, जिसमें देवी दुर्गा के नवदुर्गा रूपों की पूजा होती है। यह पर्व अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चलता है।
माना जाता है कि इन नौ दिनों में देवी शक्ति पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और असुरों का संहार करती हैं। शारदीय नवरात्र को देवी शक्ति की आराधना का श्रेष्ठ काल कहा गया है। यह न केवल धर्म और आस्था का पर्व है, बल्कि यह आत्मनिरीक्षण, संयम और साधना का भी समय है।
इन नौ दिनों में माँ नव दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है:-1. शैलपुत्री-आरंभिक ऊर्जा का प्रतीक,2. ब्रह्मचारिणी-तपस्या और साधना की देवी,3.चंद्रघंटा- शांति और शक्ति का संतुलन, 4. कूष्मांडा-ब्रह्मांड सृजन करने वाली,5. स्कंदमाता- मातृत्व और संरक्षण की देवी, 6.कात्यायनी-दुर्गा का युद्ध रूप,7.कालरात्रि- नकारात्मकता का नाश करने वाली, 8. महागौरी- करुणा और शुद्धता की प्रतीक, 9. सिद्धिदात्री – ज्ञान और सिद्धियों की दात्री, नवरात्रि में लोग सात्विक भोजन करते हैं और मानसिक एवं शारीरिक शुद्धता बनाए रखते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित कर देवी का आवाह्न किया जाता है। दुर्गा सप्तशती पाठ प्रतिदिन देवी के मंत्रों, स्तुतियों और पाठ का आयोजन होता है।
डांडिया एवं गरबा, गुजरात और पश्चिम भारत में यह सांस्कृतिक रूप से अत्यंत लोकप्रिय है।अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं को देवी के रूप में पूजकर भोजन कराया जाता है। नवरात्रि केवल देवी की पूजा भर नहीं है, यह आत्मा को ऊर्जा देने वाला पर्व है। यह समय है अपने अंदर की नकारात्मकता को खत्म कर सकारात्मकता का दीप जलाने का।
यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में हर असुर (अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह) पर विजय पाई जा सकती है, यदि श्रद्धा, संयम और शक्ति हमारे साथ हो। यह पावन पर्व, हम सभी को एक अवसर देता है—धार्मिक आस्था के साथ-साथ आत्मचिंतन और आत्मविकास का। आइए इस नवरात्रि, देवी माँ से यही प्रार्थना करें कि वे हमें शक्ति दें, सद्बुद्धि दें और जीवन में धर्म, भक्ति एवं सेवा की भावना बनाए रखें।
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार एवं युगतीर्थ शांतिकुञ्ज के संस्थापक, युगप्रवर्तक, मार्गदर्शक गुरुसत्ता परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की जयंती बड़े उत्साह उल्लास व आनंदमय वातावरण में गायत्री साधक-शिष्य व भाई-बहनों ने अपनी आवासीय तपोवन, गायत्री शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, चरण पीठ और प्रज्ञा मंडल महिला, मंडल प्रतिनिधित्व इकाइयों में विधिवत पूजन-अर्चन, यज्ञ, जप- अनुष्ठान विधान से मनायी।
कई साधक-शिष्यों ने गुरुवर श्रीपूज्यवर का वास्तविक जन्म हिन्दी कैलेंडर तिथि आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तथा बहुतों ने अंग्रेजी दिनांक 20 सितंबर इन दोनों दिवसों को श्रद्धा-सामीप्य में मनाया। साथ ही इस महती अवतारी चेतना स्वरूप प्रज्ञावतार युगपुरुष, नवयुग सृजक, युगद्रष्टा के जन्म दिवसोत्सव, मालवीय जी द्वारा गायत्री महामंत्र से दीक्षित, यज्ञोपवित धारण तथा आगे वसंतोत्सव पर्व पर घटित विशिष्ट उनके आध्यात्मिक सद्गुरुदेवजी के प्रकाशपुंज रूप साक्षात्कार में पूर्व के 3 जन्मों का साथ व पहचान, इस जन्म में भी मार्गदर्शन, दिशानिर्देश, दिव्य अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन, 24-24 लाख का महा पुरश्चक्रण श्रृखला सहित तपश्चर्या, स्वतंत्रता संग्राम संलग्नता व जेल यात्रा भागीदारी और निर्धारित युग निर्माण, नव युग का मैनिफेस्टो स्वरूप सत्संकल्प पाठ, लाल मशाल, प्रज्ञा अभियान, विचार क्रांति, अभियान संबंधित प्रतिपादित सूत्र आध्यात्म तत्वदर्शन, उनके भारतीय धराधाम पर सद्गुरु रूप में अवतरण, ईश्वरीय अनुशासन को जीवन में अनुकरण, 3 हजार से अधिक पुस्तक लेखन, 4 हजार से अधिक शक्तिपीठों का स्थापन, सारी विश्व वसुधा को धर्म- अध्यात्म से अनुप्राणित करने, सबको योगमय व यज्ञमय जीवन जीने की कला पर विश्वास दृढ़ कराने के सूत्र आदि वृतांत स्मरण कर गहन चर्चाएं की गयी।
टाटानगर शक्तिपीठ भालूबासा गायत्री ज्ञान मंदिर नवयुग दल व महिला मंडल प्रतिनिधित्व ने गुरुदेव की अवतरण जयन्ती मनाने का समाचार बताया और स्वस्थ-सुखद जीवन व प्रगतिशील वातावरण विस्तार तथा उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय मनोरथ कर गुरुदेव श्री के चरणों में नमन-वंदन किये। उक्त जानकारी वरिष्ठ-साधक एवं प्रचारक प्रसारक जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क।
एक पर्यटक एक होटल में पहुँचा।
पर्यटक ने 2,500 रुपये होटल के काउंटर पर रखते हुए कहा – यह पैसा आप रख लीजिए, मैं पहले कमरा देखकर आता हूँ।
पैसा मिलते ही होटल का मालिक दौड़कर घी वाले की दुकान पर गया और उसे देने वाले 2,500 रुपये चुका कर हिसाब बराबर कर दिया।
घीवाला दौड़कर दूधवाले के पास गया और उसे देने वाले 2,500 रुपये चुका कर हिसाब बराबर कर दिया।
दूधवाला दौड़कर गायवाले के पास गया और उसे देने वाले 2,500 रुपये चुका कर हिसाब बराबर कर दिया।
गायवाला दौड़कर दानावाले (चारा बेचने वाले) के पास गया और हिसाब में से 2,500 रुपये घटा लाया।
अंत में, दानावाला उसी होटल में पहुँचा, जहाँ से वह ज़रूरत पड़ने पर उधार लिया करता था।
उसने होटल मालिक को 2,500 रुपये देकर अपना हिसाब बराबर कर दिया।
तभी पर्यटक कमरा देखकर लौटा और बोला – मुझे कमरा पसंद नहीं आया।
इतना कहकर उसने अपनी जमा की हुई 2,500 रुपये की रकम वापस ले ली और चला गया।
देखिए, इतनी दौड़-धूप में न किसी ने कुछ पाया, न किसी ने कुछ खोया, लेकिन सबका हिसाब बराबर हो गया।
यहाँ कहाँ गड़बड़ी हुई?
कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई। लेकिन यहाँ सबको यह भ्रम था कि रुपये हमारे हैं।
असलियत यह है कि हमें यह समझना ज़रूरी है – हम सब खाली हाथ आए हैं और खाली हाथ ही जाना है।
टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) अपने 61वें स्थापना दिवस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर 17 सितंबर को दुनिया का सबसे बड़ा रक्तदान अभियान चला रहा हैं। अभातेयुप केंद्र सरकार के सहयोग से रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 आयोजित कर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, रेल मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय भी इस अभियान से जुड़े हैं।
अभातेयुप के तत्वाधान मे तेरापंथ युवक परिषद रांची के द्वारा समाजिक संगठनों एवं संस्थाओं के साथ संयुक्त रूप से रांची जिले मे 10 जगह एवं आसपास के जिलों मे 8 शिविर लगाये जा रहे हैं। तेरापंथ युवक परिषद रांची के द्वारा इस बार 1000 यूनिट रक्तदान करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
रांची सांसद संजय सेठ के विशेष सहयोग से सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत उनके आवास स्थान पर रक्तदान शिविर, राष्ट्रीय सेवा योजना के एनएसएस इकाइयों के सहयोग से विश्वविद्यालयों मे, रेलवे के सहयोग से आरपीएफ कैंप इसके अलावा आईआईएम रांची, सेवा सदन, हेल्थ पॉइंट ब्लड बैंक, मोशन क्लासेस लालपुर, जेबरोनिक्स पीपी कंपाउंड एवं वाईबीएन यूनिवर्सिटी आदि मे शिविर लगाये जा रहे हैं। रिम्स ब्लड बैंक, सदर हॉस्पिटल, हेल्थ पॉइंट हॉस्पिटल, नागरमल मोदी सेवा सदन ब्लड बैंक एवं उनके डॉक्टर्स, तकनीकी टीम आदि का रक्तदान संग्रहित करने मे सहयोग रहेगा।
तेरापंथ युवक रांची परिषद के साथ श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल संघ रांची, श्री तेरापंथी सभा रांची, साधुमार्गी जैन संघ रांची, तेरापंथ महिला मंडल आदि के संयुक्त सहयोग से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक रक्तदान करवाया जा सके।
तेयुप के राज्य संयोजक सिद्धार्थ चोरड़िया एवं विशाल दस्सानी के अनुसार पुरे झारखंड में सामाजिक संगठनों एवं सरकारी एवं निजी संस्थानों के सहयोग से 35-40 शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविर के संयोजन में विशाल दस्सानी, ललित सेठिया, विकाश नाहाटा, सुरेश जैन, नेहा बैंगानी, खुशबु दस्सानी, विनय बेगवानी, विकास सुराना, बालबीर बोथरा, अमित बैंगानी, आकाश बैंगानी, प्रिया कोठारी, विवेक दस्सानी, सोनू पारख, ज्योति दूगर, पूजा नाहटा, विशाल सिंघी, रश्मि सिंघी, कीर्ति बोहरा, अरिहंत सिंघवी, रिद्धि बांठिया आदि विशेष सहयोग कर रहे हैं।
ऐसा पहली बार है, जब किसी भारतीय संगठन के आह्वान पर देश के अलावा 75 अन्य देशों में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाएगा और एक नया रिकॉर्ड बनाया जायेगा। विदित हो कि प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) द्वारा वर्ष 2012 से ही पुरे विश्व भर में रक्तदान शिविर लगाया जाता है। 2022 में पूरे विश्व भर मे 2 लाख 50 हजार यूनिट का संग्रहण हुआ था जो कि गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हैं। उक्त जानकारी तेयुप रांची रक्तदान शिविर संयोजक के सुरेश जैन ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। एक वो दौर था जब पति भाभी को आवाज़ लगाकर अपने घर आने की खबर पत्नी को देता था। पत्नी की छनकती पायल और खनकते कंगन बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे।
बाऊजी की बातों का हाँ बाऊजी-जी बाऊजी के अलावा जवाब नही होता था। आज बेटा बाप से बड़ा हो गया, रिश्तों का केवल नाम रह गया। ये समय-समय की नही समझ-समझ की बात है। बीवी को तो दूर बड़ो के सामने हम अपने बच्चों तक को नही बतलाते थे।
आज बड़े बैठे रहते है पर सिर्फ बीवी से ही बतियाते है। दादू के कंधे मानो पोतों-पोतियों के लिए आरक्षित होते थे, काका जी ही भतीजों के दोस्त हुआ करते थे। आज वही दादू OLD-HOUSE की पहचान है, काकाजी बस रिश्तेदारों की सूची का एक नाम है।
बड़े पापा सभी का ख्याल रखते थे, अपने बेटे के लिए जो खिलौना खरीदा वैसा ही खिलौना परिवार के सभी बच्चों के लिए लाते थे। ताऊजी आज सिर्फ पहचान रह गए और छोटे के बच्चे पता नही कब जवान हो गया? दादी जब बिलोना करती थी। बेटों को भले ही छाछ दे पर मक्खन तो वो केवल पोतों में ही बाँटती थी। दादी के बिलोने ने पोतों की आस छोड़ दी क्योंकि पोतों ने अपनी राह अलग मोड़ दी।
राखी पर बुआजी आते थे, घर मे नही मोहल्ले में फूफाजी को चाय-नाश्ते पर बुलाते थे। अब बुआजी बस दादा-दादी के बीमार होने पर आते है, किसी और को उनसे मतलब नही चुपचाप नयननीर बरसाकर वो भी चले जाते है। शायद मेरे शब्दों का कोई महत्व ना हो पर कोशिश करना इस भीड़ में खुद को पहचान ने की कि हम ज़िंदा है या बस जी रहे हैं।
ये समय-समय की नही समझ-समझ की बात है। अंग्रेजी ने अपना स्वांग रचा दिया, शिक्षा के चक्कर में हमने संस्कारों को ही भुला दिया। बालक की प्रथम पाठशाला परिवार व पहला शिक्षक उसकी माँ होती थी, आज परिवार ही नही रहे तो पहली शिक्षक का क्या काम? ये समय-समय की नही समझ-समझ की है
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