रांची (डॉ ललन शर्मा)। इस पंक्ति को हम सबने अपने पाठ्यक्रमों में जरूर पढ़ा होगा एवं बार-बार पढ़ कर गर्व की अनुभूति भी की होगी। परंतु शायद ही किसी को पता होगा कि 14-15वीं सदी में सुदूर जंगल क्षेत्र की एक आदिवासी राजकुमारी ने केवल महिलाओं को संगठित कर तुर्कों की एक बड़ी सेना को तीन-तीन बार पराजित किया था। भारत का आधुनिक इतिहास इन जैसी वीरांगनाओं को भले ही भूल जाए, पर वो समाज जिसके संपूर्ण अस्तित्व के रक्षण का काम ही जिसने किया हो, वह समाज उसे कैसे भूल सकता है! यही कारण रहा है कि आज भी संपूर्ण उरांव समाज चाहे वह भारत के किसी भी कोने में क्यों ना बसा हो हर 12 वर्ष पर उस उरांव राजकुमारी की वीरता को याद करने एवं उनके प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित करने हेतु जनी शिकार का उत्सव मनाता है। महीने भर अपनी अपनी सुविधा से हर गांव की छोटी से बड़ी आयु की सभी स्त्रियां पुरुष वेश में जंगल को शिकार करने निकलती हैं, सब के हाथ में कोई ना कोई अस्त्र-शस्त्र यथा तीर-धनुष, कुल्हाड़ी, फरसी, दौवली, बलुआ, हँसुआ आदि अवश्य ही होता है। 14-15वीं शताब्दी के करीब रोहतासगढ़, जो वर्तमान में बिहार के सासाराम के करीब मौजूद है, वहां पर उस समय उरगन ठाकुर (रूईदास) नामक एक उरांव राजा हुआ करते थे, लोगों का मानना है कि वे लोग सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र के वंशज थे। सुरक्षा की दृष्टि से रोहतास गढ़ का किला घने जंगलों के बीच एक ऊंची पहाड़ी पर अवस्थित था परन्तु नीचे समीप में सोन नदी बहती थी इस कारण पशुपालन एवं खेती अच्छी थी, फलस्वरूप उस समय का उरांव साम्राज्य काफी समृद्ध था जिसकी ख्याति दूर दूर तक फैली हुई थी। तुर्कों की बुरी नजर तो उनके साम्राज्य पर बहुत पहले से थी, उन्होंने कई बार रोहतासगढ़ पर आक्रमण भी किया, पर राजा उरगन ठाकुर के कुशल नेतृत्व और सैन्य शक्ति के कारण तुर्कों को हर बार मूँह की खानी पड़ी। थक हार कर तुर्कों ने भेदनीति का सहारा लिया एवं लुन्दरी नामक एक महिला से, जो राजा के यहां दूध पहुंचाने जाती थी, के माध्यम से तुर्कों ने राज्य की कमजोरियों का भेद लिया। लुन्दरी ने तुर्कों को बताया कि बैसाख माह में हर वर्ष विशु सेंदरा का आयोजन होता है एवं उस दिन राज्य के राजा अपनी प्रजा और सैनिकों के साथ शिकार पर जाते हैं एवं खान-पान और नाच-गान के कार्यक्रम में व्यस्त रहतें हैं, तो यह एक सही मौका हो सकता है आक्रमण कर रोहतासगढ़ किले पर जीत हाशिल करने का। यह सुन कर तुर्कों ने रोहतासगढ़ किले पर आक्रमण करने की रणनीति बनाई एवं विशु सेंदरा के दिन अपने सैनिको के साथ हमला करने रोहतासगढ़ पहुंचे। जब तुर्क की सेना वहां पहुंची तो आश्वस्त थी कि वहां पर उनका सामना निहत्थे एवं विशु सेंदरा के उल्लास में नाचते-गाते-झूमते हुए सैनिको से होगा, पर वहां पहुंचने पर किले के अंदर से बड़े-बड़े पत्थरों एवम् तीर-धनुष से उनपर जोरदार आक्रमण हुआ। तुर्की सेना को इस तरह की किसी भी जवाबी कारवाई का जरा भी पूर्वाभास नहीं था, और इससे घबरा कर वे भाग खड़े हुए। इस प्रकार वे लगातार तीन बार मार खा - खा कर पराजित हुए। सिनगी दई के नेतृत्व में रोहतास गढ़ की सेना पहाड़ी से नीचे उतरकर सोन नदी के उसपार तक तुर्कों को खदेड़ चूकी थी, अबतक उनकी सेना की कमर टूट चूकी थी एवं हताश सैनिक वापसी की तैयारी करने लगे थे।
आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित कन्याका परमेश्वरी मंदिर को दशहरा के मौके पर 5 करोड़ 16 लाख रुपये मूल्य के नोटों से सजाया गया है। इस मंदिर में साल के अलग-अलग समय पर देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। नौ दिवसीय नवरात्र-दशहरा समारोह के दौरान उन्हें धन की देवी धनलक्ष्मी के रूप में पहना जाता है और उनकी पूजा की जाती है। 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने मंदिर को सजाने के लिए लंबे समय तक काम किया। सजावट के लिए 2,000 रुपये, 500 रुपये, 200 रुपये, 100 रुपये, 50 रुपये और 10 रुपये के नोटों का इस्तेमाल किया गया है। चार साल पहले 11 करोड़ रुपये की लागत से पुराने कन्याका परमेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। तब से नवरात्रि दशहरा समारोह हर साल भव्य रूप से आयोजित किया जाता है। नेल्लोर शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मुक्कला द्वारकानाथ घटनाओं ने कहा कि 7 किलोग्राम सोना और 60 किलोग्राम चांदी देवी को सुशोभित करने के लिए उपयोग की जाती है।
एबीएन डेस्क। वाकई देश परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। 60 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला पेट्रोल आज 100 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। दशकों पहले एक कड़ी आवाज में कश्मीर को खाली करवाने वाले आज खुद को स्थापित करने में जुटे हैं। अब यह देश उन्हें असहिष्णु लग रहा है। हमेशा डरकर जीने वाले हिन्दू अब हिंदुत्व की आवाज बुलंद कर रहे हैं। ऐसे में हमारे देश के राजनेता आखिर क्यों पीछे रहें। वे भी अपनी डफली अपना राग अलापने में जुटे हुए हैं। भाजपा छोड़ में कांग्रेस में शामिल होने वाले दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू अब कांग्रेस के लिए किसी भष्मासुर से कम साबित नहीं हो रहे हैं। अब तो उनके सहयोगी जैसे कन्हैया कुमार और जिग्नेश जैसे साथी भी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। ऐसे में सोशल मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि कचरा हमेशा कूड़ेदान में ही जाता है और अभी वर्तमान समय में कांग्रेस से बढ़िया कोई कूड़ेदान नहीं हो सकता।
जमशेदपुर। जमशेदपुर ने सौम्य रंजन की एक युवा प्रतिभा को देखा है, जो सिर्फ 13 साल की है और उसने 5 किताबें लिखी हैं। उनकी 2 किताबें भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में शुमार हैं। वह विद्या भारती चिन्मय विद्यालय में पढ़ता है जो जमशेदपुर के शीर्ष विद्यालय में से एक है। उनकी प्रिंसिपल सुश्री मीना विल्खु ने भी उनके काम की सराहना की वह कक्षा 8 में पढ़ता है। उसके पिता संजय कुमार टाटा मोटर्स के कर्मचारी हैं और माता सस्मिता दास एक शिक्षिका हैं। सौम्य रंजन अपनी बहन स्मृति और अपने दादाजी के भी आभारी हैं उन्होंने कक्षा छह से लिखना शुरू किया था और अब तक उनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वह तीरंदाजी भी सीखता है और खेल के प्रति भी जुनूनी है। उनकी किताबों को कई हॉलीवुड और बॉलीवुड सितारों ने सराहा है। वह मिशन लेट स्टार्ट नाम से अपना एनजीओ भी चलाते हैं जहां वह जानवरों की मदद करते हैं और युवा प्रतिभा को भी बढ़ावा देते हैं। वह टीम के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद भी करते हैं।उन्होंने कभी अपना समय बर्बाद नहीं किया बल्कि उन्होंने छह किताबें लिखीं और बच्चों के लिए एक प्रेरणा हैं उनकी नवीनतम पुस्तक सभी प्रमुख स्टोरों में बहुत कम कीमत पर उपलब्ध है। मेरी 6 पुस्तकें हैं नैतिकता का खजाना पाठकों की खुशी, सोने के समय की कहानियां‘ जो छोटे बच्चों के लिए हैं। द वाइटल ट्रूथ एक ऐसी किताब है जो आपके दिमाग को सकारात्मकता से भर देगी। लव अटैक एक ऐसी किताब है जिसमें उन्होंने एक प्रेम कहानी लिखी है जो बहुत ही दिल को छू लेने वाली और भावनात्मक है, और द भारत के राष्टÑीय बेस्टसेलर जहा पर शामिल थे रस्किन बन्ड, सुदीप नागरकर, अजिताभा बोस, अंशुमन भगत, स्तुति चांगल, रोहित दावेसर, हिमांशु राय, आदित्य निघोट, अजय के पांडे और देवांशी शर्मा जैसे 10 सबसे अधिक बिकने वाले लेखक हैं। इस पुस्तक को लिखने के पीछे मुख्य उद्देश्य लेखकों को देना आदर करना है और यह भी कि आप कुछ सीखें। सौम्य रंजनने बताया कि जो पैसा मैं इस किताब से कमाऊंगा वह मेरे एनजीओ में दान कर दिया जाएगा, जिसका इस्तेमाल आगे लोगों की मदद के लिए किया जाएगा। यह पुस्तक युवाओं के लिए एक प्रेरणा लेकर आई है क्योंकि लेखकों ने अपने अनुभव और अपनी यात्रा साझा की है जो निश्चित रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी यह पुस्तक आपको दृढ़ निश्चयी बनाएगी और किसी भी कार्य के प्रति आपकी इच्छा शक्ति को बढ़ाएगी।
रांची। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सकुर्लेशन के कारण एक बार फिर झारखंड में अच्छी बारिश हो सकती है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र ने मौसम पूवार्नुमान में बताया है कि झारखंड में अगले 5 दिनों तक गरज के साथ बारिश हो सकती है। बीते 24 घंटों में झारखंड में मानसून सामान्य रहा है। राज्य में कहीं-कहीं सामान्य तो कहीं-कहीं भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। सबसे अधिक बारिश खूंटी के अड़की में 106 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई है। अधिकतम तापमान जमशेदपुर में 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई है। 5 दिनों के मौसम पूवार्नुमान की जानकारी देते हुए रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि उत्तर पश्चिम बंगाल में बने साइक्लोनिक सकुर्लेशन के शनिवार से और गहराने की उम्मीद है। इससे झारखंड में अगले पांचों दिन अच्छी बारिश का अनुमान है।
भंडरिया। गढ़वा जिला के भंडरिया प्रखंड अंतर्गत मदगड़ी ग्राम निवासी किसान का बेटा ने शिशु रोग विशेषज्ञ परीक्षा में प्रथम श्रेणी से पास कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। किसान प्रायाग महतो के पुत्र डॉ अनुप कुशवाहा ने गोल्ड मेडल प्राप्त कर गढ़वा जिला का नाम रौषन किया है। बता दूं कि अनुप पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के भवारमाल में शासकीय स्कूल से पांचवी की पढ़ाई के बाद गढ़वा जिला अंतर्गत भंडरिया प्रखंड के कंजिया संत अंतोनिस में दसवीं तक पढ़ाई की। उसके बाद एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए रिम्स रांची चले गये। वहां अनुप ने एमबीबीएस कीे डिग्री प्राप्त करने के बाद शिशु रोग विशेषज्ञ में प्रथम श्रेणी से पास करते हुए गोल्ड मेडल प्राप्त किया। डा. अनुप कुशवहा के पिता खेती कर सब्जी बेचते हैं। इस सफलता के लिए डा. अनुप ने अपने माता-पिता को श्रेय दिया हैै। वहीं अनुप ने कहा कि मेहनत से कुछ भी संभव है। अपने क्षेत्र के युवाओं से उन्होंने कहा कि मेहनत करें। मेहनत एक दिन जरूर रंग लाती है।
धनबाद। कतरास के सुजल रक्षित पिता सपन रक्षित कतरास बाजार राजबाड़ी रोड के रहने वाला है। सुजल सर्वोदय पब्लिक स्कूल, कतरास में पढ़ाई कर रहा है। सुजल ऐसे ही कतरास मुहल्ले के गलियों में बैडमिंटन खेलते-खेलते इस खेल का इतना दीवाना बन गया जो वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर में खेल कर आॅल इंडिया अंडर 13 सिंगल में 7 रैंक प्राप्त है। खेल के प्रति बेटे के दीवानगी देख अभिभावक ने भी उसे कभी रोका नहीं। सुजल 2017 से कोच संदीप कुमार दे से प्रशिक्षण लेना प्रारंभ किया एवं अपने घर से 25 किलोमीटर दूर कतरास से धनबाद इंडोर स्टेडियम में अभ्यास के लिए प्रतिदिन जाता है। सुजल 2017 से ही अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है। 2017 में पीएनबी मेट लाइफ द्वारा आयोजित जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप 3 लखनऊ में सेमी-फाइनल तक खेल ग्रैंड फिनाले, दिल्ली के लिए चयनित हुआ तथा ग्रैंड फिनाले में क्वार्टर- फाइनल का सफर तय किया।पीएनबी मेट लाइफ द्वारा सुजल का अच्छा खेल प्रदर्शन देख उसे 2018 से स्पॉन्सर देना प्रारम्भ किया। सुजल का कहना है कि आज के समय मे अच्छे परामर्शदाता का होना अतिआवश्यक है। कोच, पीएनबी मेट लाइफ एवं क्राई के सहयोग से आज राष्ट्रीय स्तर के मुकाम तक पहुँचे।आगे अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए राष्ट्रीय स्तर में अच्छे प्रदर्शन करना हमारा लक्ष्य है। वर्तमान में सुजल का आॅल इंडिया अंडर 13 सिंगल्स में 7 है। सुजल कई बार राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में उपविजेता बने तथा राज्य का प्रतिनिधित्व कर राष्ट्रीय स्तर में खेल रहा है। धनबाद जिला बैडमिंटन एसोसिएशन से संबद्ध और एनआइएस कोच संदीप कुमार दे ने कहा कि कोच मार्गदर्शन का काम करता है। मेहनत तो खिलाड़ी को ही करनी होती है । खिलाड़ी अनुशासन में रहकर खेल पर फोकस करें तो उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। सुजल एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी है। वहीं सुजल के कोच संदीप ने बताया कि कोयलांचल में प्रतिभावान खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है लेकिन संसाधन की कमी के कारण खिलाड़ियों के प्रतिभा दबकर रह जाती है। कतरास में भी बैडमिंटन के लिए इंदौर स्टेडियम होना आवश्यक है।
एबीएन डेस्क। कुछ लोग ज्यादा चाय पसंद करते हैं, तो कुछ लोग कॉफ़ी। ये दोनों चीजें पीते-पीते अमूमन हमारी आदत में शुमार हो जाती हैं। पेय पदार्थों से हमारी सेहत और जीवन की गतिविधियों को लेकर विशेष जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि चाय में थीन (Thein) और कॉफी में कैफीन (Caffein)उपलब्ध होता है। कैफीन भरपूर एनर्जी देने में सक्षम है। Coffee के सेवन से तनाव (Stress) कम होता है। इससे याददाश्त भी मजबूत होती है। इसके और भी फायदे हैं, पर ध्यान रहे, एक दिन में चार कप से अधिक कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। कॉफी का सेवन करने से हमारे लीवर को भी बहुत मदद मिलती है, क्योंकि इससे कुछ ऐसी स्थिति से बचाया जा सकता है, जिसमें लीवर डेमेज हो सकता है। कॉफी के सेवन से स्कार टिश्यू डेवलप होता है, जिस कारण लीवर हेल्दी ना रहता है।ब्लैक कॉफी में एंटी ऑक्सीडेंट्स की मात्रा भी अधिक होती है। इससे यह फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाती है और स्किन और बालों के लिए भी काफी लाभदायी होती है। कॉफी हमारे शरीर के मेटाबॉलिक रेट को भी 10% बढ़ा देती है।इस कारण फैट लॉस होने में बहुत मदद मिलती है और अधिक कैलोरीज़ भी उपयोग में आती हैं।अगर वर्क आउट करने से पहले कॉफी का सेवन किया जाए, तो इससे एड्रेनलीन हार्मोन बढ़ जाता है।इससे हमारे फैट टिश्यू से फैटी एसिड्स रिमूव होते हैं। इस वजह से हमारा फिजिकल परफॉर्मेंस बेटर होता है।
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