एबीएन डेस्क। नए साल के पहले दिन कमर्शियल सिलिंडर के उपभोक्ताओं को तोहफा दिया है। इंडियन ऑयल ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इंडियन ऑयल ( IOCL) के अनुसार 1 जनवरी 2022 को दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 102 रुपये की कटौती की गई है। अब 19 किलोग्राम वाले गैस सिलेंडर दिल्ली में 1998.5 में मिलेगा। चेन्नई में उपभोक्ताओं के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए 2131 रुपये और मुंबई में 1948.50 रुपये देने होंगे। नए साल में कोलकाता में 19 किलोग्राम का गैस सिलेंडर 2076 रुपये में मिलेगा। गौरतलब है कि इससे पहले बीते दिसंबर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 100 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। घरेलू सिलेंडर की कीमत में इस बार भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले साल अक्टूबर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे। इंडियन ऑयल के अनुसार, नए साल में भी दिल्ली और मुंबई में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 900 रुपये है। कोलकाता वालों को घरेलू सिलेंडर के लिए 926 रुपये और चेन्नई वालों को 916 रुपये चुकाने होंगे। लखनऊ में रसोई गैस 938 रुपये प्रति सिलेंडर मिलेगी। अभी कीमत के मामले में बिहार की राजधानी पटना में गैस महंगी है। वहां घरेलू सिलेंडर की कीमत 998 रुपये है। अहमदाबाद में रसोई गैस की कीमत 907 रुपये प्रति सिलेंडर है। भोपाल में रसोई गैस 906 रुपये में मिल रही है।
नई दिल्ली। नया साल शुरू हो रहा है और नया महीना भी। जनवरी, 2022 आ गया है। नया महीना शुरू होने से पहले ही खुद को इन बातों के लिए तैयार कर लेना चाहिए कि महीने में क्या बदलाव आने वाले हैं और अगर आपको बैंक से अक्सर काम पड़ता है तो ये भी जान लेना चाहिए कि नए महीने में बैंक कितने दिन बंद रहेंगे। ऐसे में हम एक बार इस पर नजर डाल रहे हैं कि जनवरी, 2022 में कितने दिन बैंकों का कामकाज प्रभावित रहेगा, बैंकों में कितने दिनों की छुट्टियां रहेंगी। अगर छुट्टियों की लिस्ट पर नजर डालें तो पता चलता है कि जनवरी में कुल 16 दिन बैंकों की छुट्टियां रहेंगी। इनमें से 10 राष्ट्रीय और कुछ राज्य स्तर पर मनाए जाने वाले त्योहार या तिथि हैं। वहीं, सात वीकेंड की छुट्टियां हैं। लेकिन जाहिर है कि भारत विविधताओं का देश है और जरूरी नहीं कि हर त्योहार या कोई विशेष तिथि हर राज्य में मनाई जाती हो।इसलिए ये सारी छुट्टियां देश के सभी बैंकों पर लागू नहीं होती हैं। छुट्टियों की लिस्ट : 1 जनवरी, 2022: नया साल (आइज़ोल, गंगटोक, चेन्नई, शिलॉन्ग), 3 जनवरी, 2022: नए साल का जश्न (सिक्किम में लोसूंग), 4 जनवरी, 2022: लोसूंग (गंगटोक, आइज़ोल), 11 जनवरी, 2022: मिशनरी दिवस (मिजोरम), 12 जनवरी, 2022: स्वामी विवेकानंद जयंती (कोलकाता), 14 जनवरी, 2022: मकर संक्रांति/पोंगल (तमिलनाडु, पुदुतच्चेरी, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्य), 15 जनवरी, 2022: उत्तरायण पुण्यकाल मकर संक्रांति/माघ संक्रांति/संक्रांति/पोंगल/तिरुवल्लुवर दिवस, 18 जनवरी, 2022: थाई पुसम (तमिलनाडु), 26 जनवरी, 2022: गणतंत्र दिवस। इसके अलावा जनवरी, 2022 में वीकेंड की कुल सात छुट्टियां भी पड़ रही हैं। बता दें कि महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं। 2 जनवरी, 2022: रविवार, 8 जनवरी, 2022: दूसरा शनिवार, 9 जनवरी, 2022: रविवार, 16 जनवरी, 2022: रविवार, 22 जनवरी, 2022: चौथा शनिवार, 23 जनवरी, 2022: रविवार, 30 जनवरी, 2022: रविवार।
एबीएन डेस्क, रांची। पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड के बरदीकानपुर निवासी शोभा हांसदा को साहित्य अकादमी ने बाल साहित्य पुरस्कार के लिए चुना है। मिदनापुर बंगाल के निरंजन हांसदा को मोने रेयाक् आडांग लघु कथा संग्रह और मयूरभंज ओडिशा के कुना हांसदा को सगई गनाडे उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। शोभा हांसदा को यह सम्मान हली मोने कविता के लिए दिए जाने की घोषणा की गई है। शोभा हांसदा ने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि 10-12 वर्षों से लेखन कार्य शुरू किया। साहित्य पुरस्कार के बारे में सोचा भी नहीं था। सब कहते हैं कि अच्छा लिख रही हूं। इससे संतोष होता है। पुरस्कार की घोषणा से मनोबल बढ़ा है। वर्षों की मेहनत का फल मिला लगता है। इस सम्मान से आगे और लिखने की प्रेरणा मिलेगी। संताली भाषा, साहित्य, परंपरा, संस्कार, धर्म, जीवन शैली के बारे में लिखने की इच्छा है। साहित्य अकादमी ने गुरुवार को अपने प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार, युवा पुरस्कार और बाल साहित्य पुरस्कार की घोषणा की। हिंदी के लिए दया प्रकाश सिन्हा को उनके नाटक सम्राट अशोक के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया है। अंग्रेजी के लिए नमिता गोखले को थिंग्स टू लीव बिहाइंड तथा पंजाबी के लिए खालिद हुसैन को कहानी संग्रह सूलां दा सालण के लिए पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
इटखोरी। भद्रकाली मंदिर से कुछ ही दूरी पर उत्तर दिशा की ओर जंगल के बीच कलकल कर बहती मुहाने नदी की मनोरम वादियों में बसा हदहदवा सैलानियों को बरबस अपनी ओर खींचता है। नदी के चारों ओर पत्थर व घने जंगल से इस पर्यटक स्थल की शोभा और बढ़ जाती है। नव वर्ष 2022 का आगमन होने वाला है। नया साल आते ही लोगों में घूमने जाने की होड़ लग जाती है। लोग नए नए जगहों पर घूमने के साथ-साथ पिकनिक मनाने के लिये जगह तलाशने लगते हैं। इसी बीच हदहदवा का मनोरम वादियां इटखोरी समेत आसपास के लोगों के लिए एक अच्छा पिकनिक स्पॉट साबित हो रहा है। लोग यहां हर साल बड़ी संख्या में पिकनिक मनाने और घूमने के लिए पूरे परिवार के साथ आते हैं। चट्टानों से बहता कल-कल पानी और चारों ओर जंगल इस खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। यह स्थल पेड़-पौधों और चट्टानों को आगोश में लिए लोगों को आकर्षित करती है। यह स्थल काफी आकर्षक व मनोरम है। नदी का पानी जब चट्टानों के बीच से बहती है तो पूरे पानी का रंग नीला पन अपने आप में छंटा बिखेर देता है। साथ ही युवाओं के लिए यह सेल्फी प्वांइट भी बन गया है।
बेरमो। अन्य बड़े शहरों से अब आप बोकारो जिला को अलग नहीं कर सकते। आज के तारीख में बोकारो स्टील सिटी एजुकेशन हब के रूप में देखा जाता है। हालांकि अब बोकारो जिला में बेहतर शिक्षा का सफल रुझान आना भी शुरू हो गया है। इसी क्रम में देश के सबसे बड़े प्रयोगशाला इसरो में वैज्ञानिक के रूप में बोकारो के सागर अग्रवाल का चयन होने की खुशी में आज पूरा जिला वासी झुमते नजर आ रहे हैं। इस खुशी को अग्रवाल कल्याण महासभा ने अपने अंदाज से मनाया और उक्त मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल अग्रवाल संस्था के अन्य सदस्यों के साथ बोकारो स्थित उनके आवास पर जाकर उन्हें सम्मानित किया। मिली जानकारी के अनुसार बोकारो स्टील सिटी के रहने वाले सागर अग्रवाल पिता निरंजन अग्रवाल के पुत्र का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन करफड में वैज्ञानिक के रुप में चयन हुआ है इसकी सूचना पाकर अखिल भारतीय अग्रवाल कल्याण महासभा की ओर से सागर अग्रवाल को अंगवस्त्र वा बुके देकर सम्मानित किया तथा उनके परिजन को बधाई दी और कहा कि सागर अग्रवाल अपने समाज और गांव की ही नहीं पूरे बोकारो और झारखंड का नाम रोशन किया है। इनके द्वारा किए गए सच्चे लगन का ही यह परिणाम जिस कारण इन्हे यह सफलता मिली है मैं और पूरी संस्था इनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है। बताते चलें कि सेक्टर चार स्थित डीएवी से 2013 में साइंस में इंटरमीडिएट करने के बाद सागर अग्रवाल का चयन भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन इंस्ट्रीयुट आॅफ टेक्नोलॉजी में हुआ। जहां उन्होंने 2017 में इलेक्ट्रॉनिक से बीटेक करने के बाद आईएसएम आईआईटी धनबाद में एमटेक की पढ़ाई की। वे कानपुर स्थित पीएसआईटी कॉलेज में बीटेक के छात्र को पढ़ाने में लग गए फिर 2020 जनवरी में इसरो के साइंटिस्ट पद के लिए परीक्षा में भाग लिया कोरोना कॉल के कारण 2021 में साक्षात्कार हुआ। सागर अग्रवाल ने बताया कि मैट्रिक के पढ़ाई के वक्त से ही इसरो जैसे संस्थान में काम करने की इच्छा थी। उसी लक्ष्य को लेकर मैं आगे बढ़ता रहा और आज मुझे सफलता मिली। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता सबसे महत्वपूर्ण चीज है क्योंकि सफलता आपको उतना नहीं सिखाती है यह सिर्फ आप के आकार को बढ़ाता है। इसलिए कभी भी असफलता से घबराए नहीं। मौके पर विनोद गर्ग अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, राजू प्रसाद, अजय अग्रवाल, राजेंद्र गर्ग, प्रवीण अग्रवाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
चतरा। जिला अपने प्राकृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के लिये प्रदेश ही नही देश के पर्यटन मानचित्र पर एक अलग स्थान रखता है। यह वनांचल अपने सुरम्य वादियों, पर्वत, झरना, नदियों को अपने आप में समेटे हुये है। यहां पर पवित्र धार्मिक नगरी भद्रकाली मंदिर, लमबोईया मंदिर और कौलेश्वरी मंदिर है, वहीं तमासीन और बलबल जैसे दो महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है। जिला मुख्यालय से तकरीबन पैंतीस किमी दूर इटखोरी में स्थित मां भद्रकाली मंदिर आस्था का केंद्र बिन्दु है। इसके साथ ही यह धर्मस्थल पर्यटन का भी केंद्र बनते जा रहा है। हालांकि यहां सालों भर पूजा-अर्चना के लिए साधकों व श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लेकिन नव वर्ष के आगमन पर यहां सैलानियों की भीड़ बढ़ने लगती है। भद्रकाली मंदिर के निकट मुहाने नदी बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक डुबकी लेने के लिए नदी सबसे अच्छी जगह है। भद्रकाली मंदिर की बहुत मान्यता है। धार्मिक आस्था वाले लोगों के लिए यह तीर्थ भी है। यहां देवी मंदिर के साथ शिवलिंग भी है। वहीं जिले के पर्यटन स्थल भी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यहां के पर्यटन स्थल घने जंगलों से ढंकी है और यहां कल-कल बहते पानी की आवाज सुनना बहुत ही सुकूनदायक लगता है। यहां कल कल करते झरने बरबस ही लोगो का मन मोह लेते है तमासीन अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। प्रति वर्ष हजारों सैलानी यहाँ आते है और पिकनिक का लुफ्त उठाते है। यहां का झरना प्रसिद्ध है यही लोग अपने आप को इसमें भीगने से रोक नहीं पाते। कौलेश्वरी मंदिर प्रकृति की गोद में बसा है यहाँ आकर आप पर्वत चढ़ने का भी मजा ले सकते है।
एबीएन डेस्क, रांची। कल्याण गुरुकुल रामगढ़ में प्रशिक्षण ले रही झारखंड की 24 छात्राओं को क्वालिटी टेक्सटाइल्स प्रक्षेत्र में प्लेसमेंट मिला है। कल्याण गुरुकुल में आयोजित एक विशेष आयोजन में छात्राओं के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया गया, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त, रामगढ़ नागेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि कल्याण गुरुकुल से अब तक जितने रोजगार मिले है उनमें अच्छा मानदेय, बेहतर सुविधा और सुरक्षित काम करने का माहौल व्याप्त रहता है, जिÞला कल्याण पदाधिकारी रामगढ़ श्री रामेश्वर चौधरी ने उपस्थित सभी श्रोताओं से कल्याण विभाग की कल्याण गुरुकुल जैसे कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने का अवहान किया। बताते चलें कि झारखंड की दूर दराज की बेटियों को उनके गरीबी चक्र से बाहर निकाल कर, आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर जीवन शैली एवं सुरक्षित रोजगार देने के लिए झारखंड सरकार के मार्गदर्शन में कल्याण गुरुकुल एक नया आयाम लिख रहा है। 2014 में तत्कालीन और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा शुरू किये गये कल्याण गुरुकुल से अब तक 15 हजार से अधिक युवक युवतियों को रोजगार मिल चुका है, 150 से अधिक युवतियों को कल्याण गुरुकुल रामगढ़, पतरातु से रोजगार मिल चुका है। इसी क्रम में कल्याण गुरुकुल के संबंध में प्रचार प्रसार जोरों पर है। ताकि ज्यादा से ज्यादा युवक युवतियां कल्याण गुरुकुल से जुड़ कर अपनी जिÞंदगी बेहतर कर सकें, इसके लिए विभाग के द्वारा हेल्प्लायन नंबर जारी किया गया है। युवा अब 6204800180 पर कॉल कर के गुरुकुल, प्रशिक्षण एवं रोजगार के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जानकारी हिंदी के साथ साथ झारखंड के अन्य भाषाओं में उपलब्ध है।
एबीएन डेस्क। काशी विश्वनाथ मंदिर में पिछले दो साल से जारी पुनर्निर्माण कार्यों का पहला फेज पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वाराणसी पहुंचकर प्रोजेक्ट का लोकार्पण भी कर दिया। मोदी ने यहां पहले गंगा नदी पर चलने वाले क्रूज से ललिता घाट तक का सफर किया और फिर गंगा में डुबकी भी लगाई। इसके बाद उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। पूरे मंदिर कॉरिडोर की बात की जाए तो पुनर्निर्माण कार्यक्रम को 700 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बताया गया है। मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव मार्च 2019 में रखी थी। अब दो साल बाद पीएम ने पहले फेज में 339 करोड़ रुपये के खर्च से हुए पुनर्निर्माण कार्यक्रमों का लोकार्पण कर दिया है। हालांकि, किसी मंदिर के पुनर्निर्माण की यह कोई पहली योजना नहीं है, जिसकी शुरूआत या लोकार्पण पीएम मोदी के कार्यकाल में हुआ है। इससे पहले करीब सात अलग-अलग प्रोजेक्ट्स को मोदी ने अपने सात साल के कार्यकाल में शुरू कराया है। इनमें सबसे ऊपर नाम आता है अयोध्या स्थित राम मंदिर के पुनर्निर्माण कार्यक्रम का, जिसकी नींव मोदी ने ही अगस्त 2020 में हिंदू रीति-रिवाजों से पूजा करने के बाद रखी थी। इसके अलावा आधा दर्जन और योजनाओं की नींव भी पीएम अपने कार्यकाल में कर चुके हैं। ऐसे में अमर उजाला आपको बता रहा है कि बीते सात सालों में मोदी ने मंदिर के पुनर्उद्धार कार्यक्रम के लिए कितनी कीमत की योजनाओं की शुरूआत की है। 1. राम मंदिर पुनर्निर्माण योजना : राम मंदिर के पुनर्निर्माण पर बीते कई सालों से चल रहे विवाद का अंत 2019 में हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मंदिर की जमीन को हिंदू पक्ष के हवाले करने का फैसला किया। इसके बाद केंद्र की मोदी सरकार ने राम मंदिर के पुनर्निर्माण की कोशिशें तेज कर दीं। इसके लिए मोदी सरकार की तरफ से फंड का भी एलान किया गया और अगस्त 2020 में मोदी ने हिंदू रीति-रिवाजों से पूजा कर इसकी नींव रख दी। माना जा रहा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण 2023 तक पूरा हो जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट ने कुछ समय पहले ही एलान किया था कि चंदे से जुटाई गई रकम अब तक 1100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है और इसका इस्तेमाल मंदिर के निर्माण के साथ अयोध्या में अन्य धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए भी किया जाएगा। 2. सोमनाथ मंदिर कॉम्प्लेक्स : मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान सोमनाथ मंदिर के परिसर के सौंदर्यीकरण के कई प्रोजेक्ट्स शुरू करवाए थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने इन्हीं कार्यों को आगे बढ़ाते हुए मोदी ने इस साल अगस्त में एक बार फिर सोमनाथ मंदिर में 80 करोड़ की कीमत के तीन अहम प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया था। पहला प्रोजेक्ट पार्वती माता के मंदिर का शिलान्यास था। इसके अलावा मोदी ने सोमनाथ मंदिर में बने दर्शन पथ को भी देश को भेंट किया था, जिसे 47 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर की तरह ही इस दर्शन पथ से भक्त समुद्र के साथ-साथ मंदिर के भी दर्शन कर सकते थे। पीएम ने इसके अलावा एक एग्जीबिशन सेंटर और पुनर्निर्मित महारानी अहिल्याबाई मंदिर के परिसर का भी लोकार्पण किया था। सोमनाथ ट्रस्ट ने यह परिसर करीब 3 करोड़ रुपये में तैयार करवाया था। बताया जाता है कि पर्यटन मंत्रालय ने सोमनाथ मंदिर को पर्यटकों के लिए विकसित करने की भी योजना बनाई है। अगर यह योजना मंजूर होती है तो सोमनाथ मंदिर में 111 करोड़ रुपये की नई योजनाओं की शुरूआत होगी, जो मंदिर का नक्शा ही पूरी तरह बदल देगी। सोमनाथ मंदिर के मास्टर प्लान के तहत इसे टूरिस्ट स्पॉट बनाने के लिए 282 करोड़ रुपये के खर्च अनुमानित है, जिसमें अधिकतर खर्च केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों की ओर से किया जाएगा। 3. केदारनाथ मंदिर : उत्तराखंड में 2013 में आई भयानक प्राकृतिक आपदा से केदारनाथ मंदिर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। मोदी ने 2014 में पीएम बनने के बाद से ही इस मंदिर के पुनर्उद्धार की योजना तैयार करवानी शुरू कर दी थी। पीएम ने पिछले महीने ही रुद्रप्रयाग पहुंचकर करीब 130 करोड़ रुपये के खर्च से निर्मित मंदिर का लोकार्पण किया था। इसके अलावा मोदी ने रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाके के लिए 180 करोड़ रुपये के कई प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन किया था। इनमें संगम घाट के पुनर्निर्माण से लेकर टूरिस्ट सेंटर और प्रशासनिक दफ्तर और अस्पताल के निर्माण तक शामिल थे। मोदी ने पर्यटन के लिए लिहाज से अगली सदी को उत्तराखंड की सदी भी करार दिया था। 4. चार धाम परियोजना : प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में चार धाम परियोजना की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत सरकार ने चारों धाम को जोड़ने के लिए एक सर्किट बनाने का एलान भी किया था। इसके तहत सरकार ने 889 किलोमीटर लंबे हाईवे के चौड़ीकरण का लक्ष्य रखा था और इस सर्किट पर आॅल-वेदर यानी हर मौसम में मजबूत रहने वाली सड़क के निर्माण कराया तय किया था। इसके जरिए भक्तों को हर मौसम में हिमालय के ऊपरी हिस्से पर मौजूद बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन करने का मौका मिलेगा। पीएम ने दिसंबर 2016 में प्रोजेक्ट की नींव रखी थी, तब इसकी अनुमानित लागत करीब 12 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी। 5. कश्मीर में मंदिरों का पुनर्निर्माण : जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 रद्द हो जाने के बाद सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश में अब मंदिरों के पुनर्निर्माण कार्यों को शुरू कराया है। इनमें श्रीनगर में कुछ धार्मिक स्थलों का दोबारा निर्माण कराया जाना शामिल है। हाल ही में श्रीनगर में रघुनाथ मंदिर को पुनर्निर्मित कराया गया और अब खराब स्थिति में मौजूद अलग-अलग मंदिरों को चिह्नित कर के उनके पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जा रही है। खुद गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी कह चुके हैं कि कश्मीर में करीब 50 हजार मंदिर बंद हो चुके हैं, जिनके पुनर्निर्माण का कार्य किया जाना है और सरकार ने इसके लिए एक कमेटी का गठन भी कर दिया है। जिन मंदिरों का पुनर्निर्माम होना है, उनमें अनंतनाग का मार्तंड मंदिर, पाटन का शंकरगौरीश्वर मंदिर, अवंतिपोरा के अवंतिस्वामी और अवंतिस्वरा मंदिर और श्रीनगर के पांद्रेथन मंदिर शामिल हैं। 6. विदेश में मंदिर निर्माण कार्य : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी मंदिर निर्माण कार्यों की शुरूआत कराई है। इसी कड़ी में पीएम मोदी ने 2018 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबुधाबी में पहले हिंदू मंदिर का शिलान्यास किया था। यूएई सरकार ने 2015 में पीएम मोदी के दौरे के वक्त मंदिर के लिए जमीन आवंटित की थी। इसके बाद 2019 में पीएम मोदी ने बहरीन में स्थित 200 साल पुराने भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर के रेनोवेशन का कार्यक्रम शुरू कराने का एलान किया था। श्रीनाथ जी का यह मंदिर तीन मंजिला होगा और इसमें हिंदू रीति-रिवाजों से शादियों का आयोजन भी किया जाएगा।
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