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Published / 2022-01-22 13:32:39
देर शाम न करें सूर्य नमस्कार, हो सकते हैं तनावग्रस्त

टीम एबीएन, रांची। सूर्य नमस्कार तीन तत्वों से गठित है आकृति, ऊर्जा और लय। 12 आसनों की आधारशिला पर इस अभ्यास की रचना की गई है। आसनों की यह शृंखला सूक्ष्म शक्ति प्राण का उत्पादन करती है, जिससे अतींद्रिय शरीर सक्रिय होता है। स्थिरता पूर्वक लयबद्ध क्रम मे इसका अभ्यास करने से ब्रह्मांड को लयबद्धता दिन के 24 घंटे, वर्ष के 12 राशि चक्र और शरीर के जैविक लय प्रतिबिंबित होती है। आकृति और लय का  यह समायोजन शरीर और मन को एक परिवर्तनकारी शक्ति उत्पन्न करता है, जिससे एक पूर्ण और अधिक गतिशील जीवन का निर्माण होता है। इसलिए नमस्कार के अभ्यास  के लिए सबसे उपयुक्त सूर्योदय का समय है। जब हम देर शाम को सूर्य नमस्कार करते हैं तो हमारे शरीर का रक्त संचार बढ़ जाता है, जिससे मस्तिष्क अधिक सक्रिय हो जाता है। इसके फलस्वरूप रात को जब हम सोते हैं तो हमें बेचैनी महसूस होती है एवं नींद नहीं आती, जिससे तनाव होता है। नींद पूरी नहीं होने के कारण दूसरे दिन भी हम तनाव में रहते हैं। इसलिए माना गया है कि देर शाम को सूर्य नमस्कार ना करके उसकी जगह चंद्र नमस्कार करना चाहिए। आसनों का क्रम सूर्य नमस्कार जैसा ही है अंतर इतना है कि अश्व संचालन के पश्चात अर्धचंद्रासन किया जाता है, यह संतुलन और एकाग्रता का विकास करता है। जिस प्रकार से सूर्य नमस्कार की 12 स्थितियां वर्ष की 12 राशियों और कलाओं से संबंधित है उसी प्रकार चंद्र नमस्कार की 14 स्थितियां का संबंध चंद्रमा की 14 कलाओं के साथ है। चांद पंचांग में पूर्णिमा के पूर्व के चौदह दिन शुक्ल पक्ष और पूर्णिमा के बाद के 14 दिन कृष्ण पक्ष कहलाते हैं।

Published / 2022-01-21 17:36:44
संघ के प्रथम मुस्लिम प्रचारक प्रह्लाद शिंदे का निधन, शोक

एबीएन डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता तथा विश्व हिन्दू परिषद के कोंकण प्रांत धर्मजागरण आयाम के प्रमुख प्रह्लाद शिंदे (52) का आज सुबह निधन हुआ। मूलतः गुलशन अब्दुल्ला शेख (प्रह्लाद शिंदे) मुंबई के नजदीक माथेरान में अपने बाल्यावस्था से ही संघ से जुड़े। 1985 से 1991 तक उन्होंने संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता (प्रचारक) के नाते अलग-अलग जगह में कार्य किया। हिन्दू तत्वज्ञान से प्रेरित होकर उन्होंने आगे अपने परिवार के साथ हिन्दू धर्म में प्रवेश किया। शुक्रवार सुबह उनकी अंत्ययात्रा में समाज के विविध स्तर के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। उत्तम संगठक रहे शिंदे ने शालेय नौकरी करते हुए भी संघ के विविध दायित्व तत्परता से निभाए। उनके पास विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के काम का दायित्व आया। श्रीराम जन्मभूमि यह उनकी रुचि का विषय था तथा रायगढ़ जिला के विविध मंदिरों के विश्वस्त, पुरोहित और धर्माचार्य के साथ उनका अच्छा संबंध था। मंगलवार को स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल लाया गया। मेडिकल जांच में ब्रेन हैमरेज की पुष्टि होने पर उन्हें बॉम्बे अस्पताल और फिर पनवेल के पटवर्धन रुग्णालय में दाखिल करवाया गया। परंतु स्वास्थ्य में सुधार न होने के कारण उनका निधन हुआ। परिवार में पत्नी, पुत्र और पुत्री को पीछे छोड़ गए हैं।

Published / 2022-01-20 06:01:34
सुर साम्राज्ञी लता मंगेश्कर अब भी ICU में, डॉक्टर बोले- इलाज जारी, प्रार्थना करें

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की मशहूर सिंगर लता मंगेश्कर कोरोना संक्रमित होने के बाद अभी भी ICU में ही भर्ती हैं। उनका इलाज कर रहे डॉक्टर प्रतीत समदानी ने लता मंगेश्कर के स्वास्थ्य को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। डॉक्टर प्रतीत समदानी ने कहा, लता मंगेश्कर अभी भी आईसीयू में हैं। वो जल्द से जल्द ठीक हो जाएं इसके लिए हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करें। डॉक्टर ने इससे पहले कहा था कि गायिका लता मंगेश्कर को केयर की जरूरत है। इसलिए उन्हें आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में कुछ और दिनों के लिए रखा जाएगा। बुधवार को लता की एक प्रवक्ता ने कहा कि शहर के एक अस्पताल में गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की हालत स्थिर है। 92 साल की लता मंगेश्कर को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद 9 जनवरी को दक्षिण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनमें कोनोना संक्रमण के मामूली लक्षण थे। उनकी प्रवक्ता अनुषा श्रीनिवासन अय्यर ने एक बयान में बताया कि लता दी की हालत स्थिर है। डॉक्टरों से अनुमति मिलने के बाद उन्हें घर लाया जाएगा।

Published / 2022-01-18 14:51:13
फेक न्यूज : पूरी दुनिया में सरकारों और मीडिया पर घटा लोगों का भरोसा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले एक साल में पूरी दुनिया में कोरोना वायरस महामारी के बीच लोगों का सरकारों और मीडिया पर से भरोसा घटा है। इसके साथ ही फेक न्यूज को लेकर चिंताएं अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। यह बात मंगलवार को जारी हुए एक वैश्विक सर्वेक्षण में सामने आई है। यह दावा एडलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर रिपोर्ट में किया गया है जो हर साल विश्व आर्थिक मंच के दावोस शिखर सम्मेलन के दौरान जारी की जाती है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सर्वाधिक भरोसे के मामले में व्यापार ने सरकार की जगह ले ली है। मीडिया अब तीसरे स्थान पर है। अध्ययन के अनुसार वैश्विक स्तर पर 76 फीसदी प्रतिक्रियादाताओं ने गलत सूचनाओं या फेक न्यूज का इस्तेमाल एक हथियार की तरह किए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की। इस मामले में स्पेन 84 फीसदी के साथ शीर्ष पर रहा। वहीं, भारत 82 फीसदी के साथ पांचवें स्थान पर रहा। नीदरलैंड्स, जापान, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और जर्मनी फेक न्यूज के मामले में सबसे कम चिंतित नजर आए। विभिन्न देशों में जनता के बीच गैर लाभकारी संगठनों (एनजीओ), कारोबारों, सरकारों और मीडिया पर भरोसे के मामले में चीन पहले स्थान पर रहा। वहीं, भारत को इस मामले में चौथा स्थान मिला है जबकि रूस अंतिम पायदान पर रहा। आर्थिक आशावाद के क्षेत्र में भी भारत ने शीर्ष पांच देशों में जगह बनाई। एक देश में नियोक्ताओं में भरोसे के मामले में इंडोनेशिया पहले और भारत दूसरे स्थान पर रहा। इस सूची में चीन को तीसरा स्थान मिला जबकि दक्षिण कोरिया अंतिम स्थान पर रहा। भारत में कारोबारों, सरकारों और मीडिया में भरोसा घटता दिखाई दिया है। वहीं, एनजीओ में लोगों का भरोसा बना हुआ है। इसके साथ ही सरकार में भरोसे को लेकर चीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और इंडोनेशिया के बाद भारत पांचवें स्थान पर रहा। इस सर्वेक्षण में शामिल किए गए 28 में से 23 देशों में लोगों के बीच सरकारों के मुकाबले कारोबारों को अधिक भरोसेमंद पाया गया है।

Published / 2022-01-16 12:17:27
लड़कियों की खरीद फरोख्त : राजस्थान और मध्यप्रदेश में काम कर रहा बड़ा गिरोह

एबीएन डेस्क। गुड़ाबांदा की तीन लड़कियों के साथ गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस को पता चला कि इनका बड़ा गिरोह है, जिसमें ओडिशा का श्याम राणा भी शामिल है। एसएसपी ने बताया कि बेरार रोड के मकड़ी राठौर (40) मूल रूप से बहरागोड़ा निवासी है और उसकी इसी तरह से शादी मध्य प्रदेश के ही बेरार रोड सेक्टर 12 निवासी परमू राठौर से हुई थी। मकड़ी ने ओडिशा के श्याम राणा से सम्पर्क किया था और श्याम राणा ने गुड़ाबांधा के बालेश्वर मुंडा को इस काम में लगाया। बालेश्वर ने इसके लिए अपने ही इलाके के वैसे परिवार को निशाना बनाया, जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर थे और घर में बेटियां थीं। उन्हें नौकरी देने का झांसा देकर पहले जाल में फंसाया और लड़कियों को श्याम राणा के माध्यम से ओडिशा से मध्य प्रदेश और राजस्थान भेज दिया। मध्य प्रदेश और राजस्थान में पप्पू परिहार और मंटू गोस्वामी द्वारा गिरोह बनाकर लोगों से लड़कियों का पहले से सौदा तय कर लिया जाता था। होटल तक इनके पहुंचने के बाद वहां उनके हवाले कर दिया जाता था। इन लड़कियों को बेचने के लिए इस गिरोह द्वारा व्हाटस्एप में तस्वीरों को भेजा जाता था। उन तस्वीरों के आधार पर लड़कियों का सौदा होता था और उनके दाम लगाए जाते थे। इसमें सर्वाधिक मूल्य गुड़ाबांधा की एक लड़की का छह लाख रुपये लगा, जिसे मध्य प्रदेश में ले जाकर बेचा गया। मध्य प्रदेश में बेची गयी तीन लड़कियों का अब तक पता नहीं चला है और इसके लिए डीएसपी के नेतृत्व में एक टीम वहां स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दबिश दे रही है। पुलिस के अनुसार मध्य प्रदेश और राजस्थान में महिला अनुपात कम होने के चलते ही वहां से या तो शादी करने या फिर गलत पेशे में उन लड़कियों को उतारने के लिए झारखंड की लड़कियों को निशाना बनाया जाता था और मकड़ी, बालेश्वर और राणा जैसे दलालों के माध्यम से उनका सौदा कर लिया जाता था।

Published / 2022-01-15 15:14:30
स्टार्टअप के सहारे पीएम मोदी के सपनों को आकार दे रहे प्रतिभाशाली युवा अतुल

एबीएन डेस्क (अवंतिका राज चौधरी)। स्टार्टअप्स जैसे-जैसे लोगों की सोच में परिवर्तन आता है, वैसे युग परिवर्तित होता है। आज के युग में लोग स्टार्टअप की सोच के साथ सामने आ रहे हैं। आज के युवा अपनी अच्छी खासी पैकेज वाले नौकरियों को त्याग कर स्टार्टअप करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। स्टार्टअप बिजनेस करने का एक नया तरीका है। अपनी सोच से समाज में कुछ बदलाव लाने का प्रयास किया जाता है। यह कह सकते हैं कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का स्टार्टअप एक अच्छा तरीका है। लोग अपनी विवेक, शिक्षा, बुद्धि का इस्तेमाल कर कम लागत में अधिक मुनाफा कमाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की स्टार्टअप इकाइयों को नये भारत का आधार-स्तंभ बताते हुए शनिवार को कहा कि सरकार ने 16 जनवरी को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के स्टार्टअप कारोबारियों को वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए कहा, स्टार्टअप की यह संस्कृति देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचे, इसके लिए 16 जनवरी को अब राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया है। मोदी ने कहा, ह्यमैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपके सभी सुझावों, विचारों और नवाचारों को सरकार से पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप नए भारत का आधार-स्तंभ बनेंगे और देश भारत के लिए नवोन्मेष और ह्यभारत से नवोन्मेष के मंत्र के साथ आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, वर्ष 2013-14 में जहां चार हजार पेटेंट को स्वीकृति मिली थी, वहीं पिछले वर्ष इनकी संख्या 28 हजार से ज्यादा हो गई। उन्होंने कहा कि आज देश में 60,000 से अधिक स्टार्टअप इकाइयां हैं। इनमें से 42 यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन) हैं। मोदी ने कहा, भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश सरकार की प्राथमिकता है। स्टार्टअप दिवस के मौके पर आज हम बात करने वाले हैं रांची के एक ऐसे ही स्टाटेअप कंपनी शिल्पकारी की। शिल्पकारी का शॉप रांची के पिस्का मोड़ के नारायण मार्केट में है। शिल्पकारी ऐसे सोच के साथ सामने आया, जिससे झारखंड की लुप्त होती संस्कृति का संरक्षण हो सके। शिल्पकारी के फाउंडर सेंट्रल यूनिवर्सिटी आॅफ झारखंड के छात्र अतुल शौर्य हैं। अतुल ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी आॅफ झारखंड से नैनोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई की है। शिल्पकारी एक ऐसा हैंडीक्राफ्ट शॉप है जहां झारखंड की लोक कला डोकरा, बंबू एंड वुड आर्ट, और सोहराय पेंटिंग पर काम किया जाता है ।यह सभी प्रोडक्ट आॅनलाइन व आॅफलाइन दोनों मोड से बिक्री किए जाते हैं। शिल्पकारी ना सिर्फ झारखंड तक सीमित है बल्कि यह देश के अन्य राज्यों तक भी अपनी प्रोडक्ट्स पहुंचाते हैं। शिल्पकारी से झारखंड के लगभग 800 शिल्पकार और कलाकार जुड़े हैं। यह स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार का एक जरिया है। शिल्पकारी ने सोहराय आर्ट को जीआई टैग दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। जीआई टैग, किसी उत्पाद का किसी दिए स्थान पर उत्पन्न होने के रूप में पहचान होता है। अतुल शौर्य ने शिल्पकारी की नींव जिस सोच के साथ रखी थी 3 साल बाद वह सही ट्रैक पर आगे बढ़ रही है। अतुल इसे और आगे तक ले जाना चाहते हैं अगले 5 सालों में यह शिल्पकारी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना चाहते हैं।

Published / 2022-01-14 17:26:09
मकर संक्रांति : गंगा में 6.5 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

एबीएन डेस्क। संगम नगरी प्रयागराज में मकर संक्रांति के साथ माघ मेला शुक्रवार से प्रारंभ हो गया। कोरोना के बढ़ते मामलों और कड़ाके की ठंड के बावजूद शाम 6 बजे तक करीब 6.5 लाख लोगों ने यहां गंगा और संगम में डुबकी लगाई। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी । मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं का भोर से ही मेला क्षेत्र में आगमन जारी है और शाम 6:00 बजे तक करीब 6.5 लाख लोगों ने गंगा में स्नान किया जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी संजय खत्री, मेलाधिकारी शेषमणि पांडेय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय कुमार ने मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर वीआईपी घाट, संगम नोज, अरैल घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारी ने बताया कि मेला क्षेत्र में 65,000 श्रद्धालुओं को मास्क वितरित किया गया। इस बीच, माघ मेले में अरैल क्षेत्र में स्थित एक छोटे तंबू (छोलदार) में गैस सिलेंडर लीक होने से आग लग गई जिससे क्षेत्र में अफरा तफरी मच गई। हालांकि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया जिससे कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। अग्निशमन दल की अरैल इकाई के अग्निशमन अधिकारी राम कुमार रावत ने बताया कि करछना क्षेत्र के ग्रांम मुगारी निवासी बिट्टन देवी ने कल्पवास करने के लिए शिविर लगाया गया था। उन्होंने बताया कि सिलेंडर से गैस रिसाव होने के कारण अचानक आग लग गई और वहां रखे बिस्तर और कुछ कपडे तथा छोलदार का कुछ हिस्सा जल गया। मेला क्षेत्र में देश के कोने कोने से आने वाली भीड़ के बीच कोविड नियमों का पालन कराना मेला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ड्यूटी में आए कई पुलिसकर्मी मेला शुरू होने से पहले ही कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। हर वर्ष माघ मेला में शिविर लगाने वाले स्वामी अधोक्षजानंद ने मकर संक्रांति के महत्व के बारे में कहा, ज्योतिष की गणना में जो कालचक्र संचालित होता है, उसमें एक साल में सूर्य 12 राशियों में घूमता है और लगभग एक महीना प्रत्येक राशि में रहता है। उन्होंने कहा कि मकर राशि का अत्यधिक महत्व है और जब सूर्य मकर राशि में आते हैं, वह विश्व का उत्तम समय होता है क्योंकि यह उत्तरायण काल कहलाता है। उन्होंने बताया कि सूर्य छह माह दक्षिणायन रहते हैं और छह माह उत्तरायण रहते हैं और उत्तरायण का प्रारंभ मकर संक्रांति से होता है और यह हर कार्य के लिए शुभ माना जाता है। इससे पहले अधिकारी ने बताया कि मेला प्रशासन ने मेला क्षेत्र को पांच सेक्टरों में विभाजित किया है। इन सभी सेक्टरों में बसने वाली 3200 से अधिक संस्थाओं तथा शिविरों में निवास करने वाले लोगों को मेला क्षेत्र में 12 स्नान घाटों तक सुगमता पूर्वक आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पांच पंटून पुलों को तैयार किया गया है। अधिकारी ने बताया कि मेला क्षेत्र में आने वाले कल्पवासियों, श्रद्धालुओं एवं साधु-संतो को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 बेड के दो अस्पताल -गंगा एवं त्रिवेणी, 12 स्वास्थ्य शिविर एवं 10 उपचार केन्द्र तैयार किए गये हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी 16 प्रवेश द्वारों एवं पार्किंग स्थलों पर श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग की गई।

Published / 2022-01-13 17:42:39
मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी को? यहां जानें...

एबीएन डेस्क। अलग-अलग जगहों के अक्षांश-रेखांश के अनुसार सूर्योदय के कारण सूर्य के राशि परिवर्तन में समयांतर हो जाता है। इस बार भी यही भ्रम रहेगा कि संक्रांति 14 या 15 जनवरी को मनाया जाए। वाराणसी के पंचांगों के साथ-साथ देश के अन्य भागों के अधिकतर पंचांगों में सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की रात 08 बजे के बाद दिखा रहा है। अतः वाराणसी के पंचांग के अनुसार संक्रांति पर्व निर्विवाद रूप से 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सभी तरह के मांगलिक कार्य जैसे यज्ञोपवित, मुंडन, शादी-विवाह, गृहप्रवेश आदि आरम्भ हो जाएंगे। सूर्य की दक्षिणायन यात्रा के समय जो देवप्राण शक्तिहीन हो गये थे उनमें पुनः नई ऊर्जा शक्ति का संचार हो जाएगा और वे अपने भक्तों-साधकों को यथोचित फल देने में सामर्थ्यवान हो जाएंगे। इस पर्व पर समुद्र में स्नान के साथ-साथ गंगा, यमुना, सरस्वती, नमर्दा, कृष्णा, कावेरी आदि सभी पवित्र नदियों में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देने से पापों का नाश तो होता ही है पितृ भी तृप्त होकर अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं यहां तक कि इस दिन किए जाने वाले दान को महादान की श्रेणी में रखा गया है। वैसे तो सभी संक्रांतियों के समय जप-तप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व है किन्तु मेष और मकर संक्रांति के समय इसका फल सर्वाधिक प्रभावशाली कहा गया है उसका कारण यह है कि मेष संक्रांति देवताओं का अभिजीत मुहूर्त होता है और मकर संक्रांति देवताओं के दिन का शुभारंभ होता है। इस दिन सभी देवता भगवान श्री विष्णु और मां श्रीमहालक्ष्मी का पूजन-अर्चन करके अपने दिन की शुरुआत करते हैं अतः श्रीविष्णु के शरीर से उत्पन्न तिल के द्वारा बनी वस्तुएं और श्रीलक्ष्मी के द्वारा उत्पन्न इक्षुरस अर्थात गन्ने के रस से बनी वस्तुएं जिनमें गुड़-तिल का मिश्रण हो उसे दान किया जाता है। ऊनी कंबल, जरूरतमंदों को वस्त्र विद्यार्थियों को पुस्तकें पंडितों को पंचांग आदि का दान भी किया जाता है। अन्य खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जी, चावल, दाल, आटा, नमक आदि जो भी यथा शक्ति संभव हो उसे दान करके संक्राति का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है पुराणों के अनुसार जो प्राणी ऐसा करता है उसे विष्णु और श्रीलक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और माघ माह के संयोग से बनने वाला यह पर्व सभी देवों के दिन का शुभारंभ होता है। इसी दिन से तीनों लोकों में प्रतिष्ठित तीर्थराज प्रयाग और गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगमतट पर साठ हजार तीर्थ, नदियां, सभी देवी-देवता, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर आदि एकत्रित होकर स्नान, जप-तप, और दान-पुण्य करके अपना जीवन धन्य करते हैं। तभी इस पर्व को तीर्थों और देवताओं का महाकुंभ पर्व कहा जाता है। मत्स्य पुराण के अनुसार यहां की एक माह की तपस्या परलोक में एक कल्प (आठ अरब चौसठ करोड़ वर्ष) तक निवास का अवसर देती है इसीलिए साधक यहां कल्पवास भी करते हैं। मरणोपरांत जीव की गति बताने वाले महानग्रंथ "कर्मविपाक" संहिता में सूर्य महिमा का वर्णन करते हुए भगवान शिव मां पार्वती से कहते हैं कि देवि ! ब्रह्मा विष्णुः शिवः शक्तिः देव देवो मुनीश्वरा, ध्यायन्ति भास्करं देवं शाक्षीभूतं जगत्त्रये। अर्थात- ब्रह्मा, विष्णु, शिव, शक्ति, देवता, योगी ऋषि-मुनि आदि तीनों लोकों के शाक्षीभूत भगवान् सूर्य का ही ध्यान करते हैं। जो मनुष्य प्रातःकाल स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देता है उसे किसी भी प्रकार का ग्रहदोष नहीं लगता क्योंकि इनकी सहस्रों किरणों में से प्रमुख सातों किरणें सुषुम्णा, हरिकेश, विश्वकर्मा, सूर्य, रश्मि, विष्णु और सर्वबंधु, जिनका रंग बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल है। हमारे शरीर को नयी उर्जा और आत्मबल प्रदान करते हुए हमारे पापों का शमन कर देती हैं प्रातःकालीन लाल सूर्य का दर्शन करते हुए ॐ सूर्यदेव महाभाग ! त्र्यलोक्य तिमिरापः। मम् पूर्वकृतं पापं क्षम्यतां परमेश्वरः। यह मंत्र बोलते हुए सूर्य नमस्कार करने से जीव को पूर्वजन्म में किये हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

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