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Published / 2022-02-14 12:06:28
नीट : झुमरी तिलैया के सगलदीप को राज्यभर में 45वां स्थान

टीम एबीएन, कोडरमा। गुरुद्वारा रोड निवासी सरदार सगल दीप सिंह ने जेनरल कोटे में 2021 के नीट मेडिकल के एग्जाम में झुमरी तिलैया का नाम रौशन किया है। उन्होंने आॅल इंडिया रैंकिंग 5414 स्थान प्राप्त किया। उन्होंने घर पर रहकर ही परीक्षा की तैयारी की थी। सगलदीप को राज्य भर में 45वां स्थान प्राप्त हुआ है। ज्ञात हो कि सगल दीप सिंह स्वर्गीय अशोक सलूजा के छोटे पुत्र और गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के सचिव यशपाल सिंह गोल्डन के भतीजे हैं। उन्होंने दसवीं की परीक्षा में भी 10 सीजीपीए प्राप्त किया था। 12वीं की परीक्षा में भी प्रथम आया था। सगलदीप की सफलता पर सारे समाज और परिवार मेंं हर्ष एवं खुशी का वातावरण है। सगल दीप सिंह ने दूरभाष पर बताया कि यह उसके गुरुजनों एवं बड़ों का आशीर्वाद है। उनके परिजनों से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह उनकी अपनी मेहनत का फल है। वह रात को 3:30 बजे तक पढाई करता था। सगलदीप के डॉ बनाना उनके स्वर्गीय पिताा अशोक सलूजा का सपना था।

Published / 2022-02-12 18:00:35
शुरुआत 5,000 से और अंत में 31,000 में बिका "आम"

एबीएन सोशल डेस्क। आम के दीवाने, इसे खाने के लिए कितनी कीमत चुका सकते हैं, इसका अंदाजा पुणे से सामने आई एक खबर के बाद लगाया जा सकता है। दरअसल, पुणे की एक मंडी में सीजन का पहला हापुस आम खरीदने के लिए जबरदस्त होड़ दिखाई दी। बाकायदा आम की बोली लगाई गई। एक टोकरी खरीदने के लिए जबरदस्त बोली लगी, जिसके बाद आखिर में 31 हजार रुपये में टोकरी नीलाम हो गई। आम विक्रेता का कहना है कि इस तरह के आम के दाम पिछले 50 साल में भी नहीं मिले हैं। दरअसल, देवगढ़ रत्नागिरी से हापुस आम की पहली फसल शुक्रवार को पुणे के एपीएमसी मार्केट पहुंची थी। पांच हजार रुपये रखी गई शुरुआती कीमत : आम की टोकरी जैसे ही बाजार पहुंची, लोग उसे खरीदने के लिए टूट पड़े। मुंहमांगी कीमत भी देने को तैयार थे। ऐसे में आम विक्रेता युवराज काची ने उसे नीलाम करने की योजना बनाई। युवराज ने बताया कि आम की शुरुआती कीमत 5 हजार रुपये लगाई गई। आखिर में हापुस आमों की यह टोकरी 31 हजार रुपये में बिकी। हर बार होती है नीलामी : युवराज काची बताते हैं कि परंपरा के तौर पर हम सीजन के पहले आम की नीलामी आयोजित करते हैं। इस नीलामी के आधार पर अगले दो महीने तक बाजार का रास्ता तय होता है, लेकिन ऐसा पहली बार है जब 31 हजार रुपये में टोकरी बिकी है। उन्होंने बताया कि यह पिछले 50 साल में सबसे महंगी बोली है। इसके अलावा एक टोकरी 21 हजार तो एक और 18 हजार रुपये में नीलाम हुई। वहीं दो टोकरियां 22, 500 रुपये में बिकीं।

Published / 2022-02-12 16:56:28
योगभक्ति के पुरोधा स्वामी निरंजनानंद

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (स्वामी मुक्तरथ)। बगैर शोर-शराबे के योग-संस्कृति को फैलानेवाले स्वामी निरंजनानंद आत्मप्रचार से हमेशा दूर रहे। आज 14 फरवरी को उनका जन्म दिवस है। स्वामीजी ने अपने गुरु स्वामी सत्यानंद द्वारा स्थापित मुंगेर स्थित बिहार योग विद्यालय को श्रेष्ठ संस्थान बना दिया है। साथ ही रिखिया पीठ को उच्च स्थान पर बनाये रखा है। योग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य के लिए पद्मविभूषण अलंकरण से भी सम्मानित किया जा चुका है। बात 1956 की है। जब स्वामी निरंजनानंद के गुरु स्वामी सत्यानंद ऋषिकेश स्थित स्वामी शिवानंद के आश्रम में रह रहे थे। उन्होंने स्वामी सत्यानंद को अपने पास बुलाया और कहा कि तुम्हारा जाने का समय आ गया है, जाओ। दुनिया में परिव्राजक की तरह घूमो। दुनिया को योग सिखाओ। स्वामी सत्यानंद संसार के लिए निकले। 1963 तक परिव्राजक की तरह भ्रमण करते रहे। स्वामी सत्यानंद को बीस साल मिले और इस अवधि में दुनिया को सत्यानंद के जरिये योग मिला। इन्हीं बीस सालों में मुंगेर में बिहार योग विद्यालय की स्थापना हुई, जहां से निकल कर सत्यानंद पूरी दुनिया में जाते थे और पूरी दुनिया से लोग निकल कर बिहार योग विद्यालय पहुंचते थे। एक से एक प्रामाणिक, वैज्ञानिक योग ग्रंथों का प्रकाशन हुआ। बीसवीं सदी में योग का जो पुनर्जागरण होना था, बिहार योग विद्यालय उसका केंद्र बन गया और स्वामी सत्यानंद सूत्रधार। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा महाद्वीप होगा, जहां स्वामी सत्यानंद ने योग का बीज न बोया हो। अरब से लेकर अमेरिका तक अफ्रीका से लेकर आॅस्ट्रेलिया तक स्वामी शिवानंद का परिव्राजक संन्यासी पूरी दुनिया में घूम घूमकर योग बीज बो रहा था, जो आगे चलकर पुष्पित और पल्लवित होनेवाला था। लेकिन, एक तरफ जहां वे वर्तमान की सख्त जमीन पर योग बीज रोपित कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ वे भविष्य में इसके रखरखाव की योजना पर भी काम कर रहे थे, ताकि कोई फूल खिलने से पहले न कुम्हला जाये। यह कोई दस-बीस साल का मामला नहीं था। अब तो यह शताब्दियों का मामला है। एक पवित्र परंपरा के पुनर्जागरण काल में सिर्फ वर्तमान नहीं होता। उसका अपना एक भविष्य होता है और उस भविष्य की अपनी एक दैवीय योजना। चार साल के स्वामी निरंजन इसी दैवीय योजना का हिस्सा होकर बिहार स्कूल आॅफ योगा पहुंचे थे। 1964 बिहार स्कूल आॅफ योगा और स्वामी निरंजन दोनों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण साल है। इसी साल मुंगेर में बिहार योग विद्यालय की स्थापना हुई और इसी साल चार साल के निरंजन योग विद्यालय में प्रविष्ट हुए। छतीसगढ़ के राजनांदगांव में 14 फरवरी, 1960 को जन्मे स्वामी निरंजनानंद की जीवनदिशा उनके गुरु स्वामी सत्यांनद द्वारा निर्देशित रही। यहां उन्हें गुरु ने योगनिद्रा के माध्यम से योग और अध्यात्म का प्रशिक्षण दिया। कम उम्र में ही वे इतने योग्य हो चुके थे कि स्वामी सत्यानंद ने उन्हें दशनामी संन्यास परंपरा में दीक्षित करने के बाद काम पर लगा दिया। उन्हें विदेशों में योग केंद्रों की स्थापना करनी थी। जहां योग केंद्र स्थापित हो चुके थे, उनके संचालन को भी सुनिश्चित करना था। उन्हें न सिर्फ योग समझाना था, बल्कि दुनिया की विविध संस्कृतियों को समझना भी था। सांस्कृतिक एकता के यौगिक सूत्रों की खोज करनी थी। अमेरिका से लेकर आॅस्ट्रेलिया तक। वहां उन्होंने विशेष तौर पर घ्यान और प्राणायाम के क्षेत्र में अनुसंधान का काम अल्फा रिसर्च के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित डॉ जो कामिया के साथ काम किया। सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया के ग्लैडमैन मेमोरियल सेंटर के जापानी डॉ टॉड मिकुरिया ने उन पर ध्यान संबधी शोध किये। जिस समय स्वामी निरंजनानंद विदेश के लिए निकले, तो उस समय स्वामी सत्यानंद के योग आंदोलन के परिणामस्वरूप केवल फ्रांस में 77 हजार पंजीकृत योग शिक्षक थे। उस समय के लिए यह बहुत बड़ी संख्या थी। उन दिनों वे सिर्फ इन योग शिक्षकों को प्रशिक्षित करते थे, ताकि वे अपने स्कूलों मे लौट कर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर सकें। बाद में यह आंदोलन रिसर्च आॅन योगा इन एड्यूकेशन के नाम से पूरी दुनिया में फैल गया। यूरोप में इस आंदोलन का सूत्रपात पेरिस की स्वामी योग भक्ति, कनाडा में स्वामी अरुंधती ने आरंभ किया गया। इस आंदोलन का नाम योगा एजुकेशन इन स्कूल रखा गया। परिणामस्वरूप यह उत्तर तथा दक्षिण अमेरिका में काफी लोकप्रिय हुआ। इसके परिणामस्वरूप अनेक देशों की शिक्षा पद्धति में योग को शामिल किया गया। निरंजनानंद सरस्वती ने 1983 तक वह सब किया। 23 साल की उम्र तक जब तक कोई नौजवान काम करने के लिए घर से बाहर कदम रखता है, तब तक स्वामी निरंजन अपने हिस्से का एक बड़ा काम पूरा करके वापस लौट आये थे। अब उनके हिस्से आगे की जिम्मेदारियां आनेवाली थीं। भारत लौटने के बाद उन्होंने बिहार योग विद्यालय को विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा तक ले गये, लेकिन साथ ही वे समूचे विश्व में स्वामी सत्यानंद के बीजारोपण की माली की तरह रखवाली भी करते रहे। वर्ष 1993 के विश्व योग सम्मेलन के बाद गंगा दर्शन में बाल योग मित्र मंडल की स्थापना की गयी। इसका आरंभ मुंगेर के सात छोटे बच्चों से किया गया और आज मुंगेर शहर में ही बाल योग मित्र मंडल 5000 से अधिक प्रशिक्षित बच्चे योग शिक्षक हैं। मुंगेर में यह संख्या 35 हजार और पूरे भारत में 1,50000 हैं। इन बच्चों ने तीन आसनों, दो प्रणायामों, शिथिलीकरण एंव धारणा के एक-एक अभ्यास का चयन किया। दरअसल, स्वामी सत्यानंद सरस्वती का स्पष्ट दृष्टिकोण था कि यदि हम बच्चों तक पहुंच पाते हैं और उनके जीवन की गुणवत्ता और प्रतिभा में सुधार ला पाते हैं, तो वे अपनी रचनात्मकता का अधिकतम उपयोग कर अपने भावी जीवन के तनावों और संघर्षों का सामना बेहतर ढंग से कर पायेंगे। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम दो बार मुंगेर बच्चों के कार्यक्रम में आये। उन्होंने मुंगेर को योगनगरी की संज्ञा दी। (लेखक सत्यानंद योग मिशन से जुड़े हैं।)

Published / 2022-02-11 19:15:13
इस साल मोबाइल शुल्क बढ़ाने की तैयारी में जुटीं मोबाइल कंपनियां

एबीएन डेस्क। दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल का मानना है कि वर्ष 2022 में भी मोबाइल कॉल और सेवाओं की दरों में बढ़ोतरी होगी। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि एयरटेल शुल्क वृद्धि में आगे रहने में हिचकिचाहट नहीं दिखाएगी। कंपनी का इरादा प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) को 200 रुपए पर पहुंचाने का है। नवंबर, 2021 में एयरटेल ने सबसे पहले मोबाइल और सेवाओं की दरों में 18 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत की वृद्धि की थी। भारती एयरटेल के भारत और दक्षिण एशिया के लिए प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गोपाल विट्टल ने कहा, मुझे लगता है कि 2022 में शुल्क दरें बढ़ेंगी। हालांकि ऐसा अगले तीन-चार महीनों में नहीं होगा। अभी सिम मजबूती और वृद्धि में तेजी लौटने का इंतजार है। मुझे उम्मीद है कि अगले दौर की शुल्क बढ़ोतरी होगी। हालांकि, यह प्रतिद्वंद्वियों द्वारा तय की जानी है। पूर्व की तरह हम इस बार भी शुल्क वृद्धि की अगुआई करने में हिचक नहीं दिखाएंगे। कंपनी के तिमाही नतीजों की घोषणा के समय उन्होंने विश्लेषकों के सवाल पर यह बात कही। भारती एयरटेल का दिसंबर तिमाही का एकीकृत शुद्ध लाभ 2.8 प्रतिशत घटकर 830 करोड़ रुपए रहा है। तिमाही के दौरान कंपनी की एकीकृत आय 12.6 प्रतिशत बढ़कर 29,867 करोड़ रुपए रही है। विट्टल ने कहा, हमें उम्मीद है कि हमारा एआरपीयू 2022 में ही 200 रुपए पर पहुंच जाएगा। अगले कुछ साल में हम इसके 300 रुपए पर पहुंचने की उम्मीद करते हैं। दिसंबर 2021 तिमाही में एयरटेल के भारत में 4जी ग्राहकों की संख्या सालाना आधार पर 18.1 प्रतिशत बढ़कर 19.5 करोड़ हो गई है। एक साल पहले की समान तिमाही में यह संख्या 16.56 करोड़ थी। भारत में एयरटेल के नेटवर्क पर प्रति ग्राहक डेटा का इस्तेमाल 11.7 प्रतिशत बढ़कर 16.37 गीगाबिट (जीबी) से 18.28 जीबी हो गया है। विट्टल ने कहा कि कंपनी उपकरण अद्यतन, नेटवर्क और क्लाउड कारोबार पर 30 करोड़ डॉलर (2,250 करोड़ रुपए) खर्च करेगी।

Published / 2022-02-10 15:15:38
सीए बनने पर निवर्तमान वार्ड पार्षद ने दी बधाई

टीम एबीएन, कोडरमा। चार्टर्ड एकाउंटेंट की फाइनल परीक्षा में सफलता प्राप्त करने पर झुमरी तिलैया पानी टंकी रोड निवासी रिया जैन को निवर्तमान पार्षद पिंकी जैन ने उनके घर पर जाकर उनको पुष्पगुच्छ देकर बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। जैन समाज के मंत्री ललित जैन सेठी सहित पदाधिकारियों के द्वारा बधाई दी गई उनके पिता सुरेश जैन कासलीवाल और माता रितु जैन मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। बेटी की सफलता पर उन्होंने बहुत खुशी का इजहार किया। उनके पुत्र शुभम जैन भी सीए हैं। बधाई देने वालों में जैन समाज के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला, सह मंत्री राज, छाबड़ा, उपाध्यक्ष कमल जैन सेठी, प्रदीप जैन पांड्या, सुरेश झाझंरी, नरेंद्र झाझंरी, सुनील जैन शेट्टी,सुशील जैन छाबड़ा, जैन स्कूल के डायरेक्टर किशोर जैन पांड्या, सुनील जैन छाबड़ा, जयकुमार कुमार गंगवाल, नीलम सेठी, आशा गंगवाल , विनोद अजमेरा सुरेश शेट्टी, महावीर कासलीवाल, महेंद्र कासलीवाल मनीष सेठी, संदीप सेठी, एवं समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन, राजकुमार जैन शामिल थे।

Published / 2022-02-09 18:03:20
दुखद : तीन साल में 16,000 ने कर्ज और 9,140 लोगों ने बेरोजगारी के चलते कर ली आत्महत्या

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने बुधवार को कहा कि 2018 से 2020 के बीच 16,000 से अधिक लोगों ने दिवालिया होने या कर्ज में डूबे होने के कारण आत्महत्या कर ली जबकि 9,140 लोगों ने बेरोजगारी के चलते अपनी जान दे दी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 2020 में 5,213 लोगों ने दिवालियापन या कर्ज में डूबे होने के कारण आत्महत्या की जबकि 2019 में यह संख्या 5,908 और 2018 में 4,970 थी। उन्होंने कहा कि 2020 में 3,548 लोगों ने जबकि 2019 में 2,851 और 2018 में 2,741 लोगों ने बेरोजगारी के चलते आत्महत्या की।

Published / 2022-02-08 13:19:36
अनंत यात्रा पर महाभारत के भीम...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। टेलीविजन पर मशहूर पौराणिक धारावाहिक महाभारत में भीम के किरदार को जीवंत करने वाले कलाकार प्रवीण कुमार का सोमवार रात निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार थे। उन्होंने कल देर रात दिल्ली में अशोक विहार स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, पुत्री, दो भाई और एक बहन है। प्रख्यात फिल्म निर्देशक बी आर चोपड़ा के निर्देशन में महाभारत में भीम के किरदार से प्रवीण को काफी लोकप्रियता मिली थी। बाद में उन्होंने कई फिल्मों में भी काम किया। महाभारत में उनके साथी कलाकार रहे गजेंद्र चौहान ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि एक और दु:खद समाचार मिला। मेरा महाभारत का भाई प्रवीण कुमार जी हम सबको छोड़कर अनंत यात्रा पर चला गया। विश्वास नहीं हो रहा। पा जी, आप हमेशा हमारी यादों में रहेंगे। ओम शांति. ओम शांति.. ओम शांति...

Published / 2022-02-08 07:51:48
झारखंड : सिमडेगा के पर्यटन स्थलों को संवार आजीविका का सृजन

टीम एबीएन, सिमडेगा। झारखंड में सिमडेगा स्थित केलाघाघ, दनगद्दी, केतुंगाधाम जैसे पर्यटक स्थलों को दिया गया नया स्वरूप ना सिर्फ पर्यटकों को अपनी ओर बरबस आकर्षित कर रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका भी सशक्त हो रही है। यहां की मनोरम प्रकृति छटा पर्यटकों का मन मोह रही है। यही नहीं, इन पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं से आच्छादित किया गया है, जिससे पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। सिमडेगा के उपायुक्त सुशांत गौरव ने सोमवार को बताया कि वर्षों से उपेक्षित सिमडेगा के पर्यटन स्थलों को संवारने का कार्य पिछले एक वर्ष से किया जा रहा है। जिला पर्यटन संर्वधन समिति के माध्यम से जिले के वैसे पर्यटक स्थल, जहां पर्यटकों का आना लगा रहता है, उसे चिह्नित करते हुए विकास के कार्य हो रहे हैं। इस कार्य में स्थानीय लोगों की भूमिका तय की गई, जिसे यहां के लोगों ने सहर्ष स्वीकार भी किया है। इससे जिला प्रशासन को सहूलियत हुई और पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण एवं लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार सुनिश्चित हुआ। सिमडेगा में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। इनमें से एक है। भंवर पहाड़, जो पौराणिक विरासत का प्रतीक है। कहते हैं कि कालांतर में युद्ध के दौरान शत्रुओं को मार गिराने में भंवर पहाड़ का अहम योगदान रहा है। जिला प्रशासन द्वारा भंवर पहाड़ की विरासत तथा पहाड़़ को पर्यटक स्थल के रूप में पहचान दिलाने के लिए चिह्नित किया। भंवर पहाड़़ के मनोरम द्दश्य को देखने एवं पहाड़़ की खासियत से जन-जन को अवगत कराने के उदेश्य से उसे सँवारने का कार्य धरातल पर उतारा गया है। जल्द भंवर पहाड़़ के सौंदर्यीकरण के कार्य को पूर्ण करते हुए पर्यटकों को सुपुर्द कर दिया जायेगा।

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