समाज

View All
Published / 2022-03-13 15:14:10
हृदय के द्वार खोलती द काश्मीर फाइल्स...

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (अमरेंद्र पांडेय)। आज दोपहर बाद कश्मीर फाइल्स देखने गया। कला, नाटक, ड्रामा, थियेटर का एक अपना दृष्टिकोण होता है। सामान्य आमने सामने की झड़प में जो हीरो आधी मिनट में हांफ जाए, वह भी फ़िल्म में पांव घुमाकर धरती पर मार दे तो पचास सौ आदमी तो चारों तरफ उड़ उड़कर जा गिरेंगे। सीता वियोग में प्रभु श्रीराम उतने नहीं रोए होंगे जितने स्टेज पर नाटक में श्रीराम बने कलाकार रोते हैं चीख चीख़कर। ड्रामे में राक्षस बनने वाला व्यक्ति इतना हंसता है कि संवाद भी सुनाई नहीं देते उसके चैलेंज से कह रहा हूं कि एक साधारण से बांस के बने धनुष पर प्रत्यंचा न चढ़ा पाएंगे प्रभास। लेकिन बाहुबली में तीन-तीन बाण एक साथ चला रहे हैं। यानी कई हज़ार नाटक फिल्में आदि देखने के बाद सौ बातों की एक बात यह कह रहा हूं कि सबकुछ बहुत बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है। लेकिन मेरे तमाम देखे जाने हुए में द काश्मीर फाइल्स पहली ऐसी फ़िल्म है जो बहाव के विपरीत गई है। यानी कश्मीर में हिंदुओं पर जो गुजरा। उनके ऊपर गुजरी यातनाएं। डर से थर थर कांपते कलेजे। बलात्कर की पीड़ा और चीखों से गूंजता अम्बर। घरों से उठती लपटें। मुर्गे की तरह भुने हुए गोश्त बनी पड़ी हिंदुओं की लाशें। छोटे बच्चों से कुकर्म के बाद हत्याएं। अपने ही देश में घरों से बेघर लाचार हिंदू। उस हैवानियत को बढ़ा चढ़ाकर दिखाना तो दूर। फ़िल्म उसका एक प्रतिशत भी दिखा पाने में मुश्किल से समर्थ हुई है। लेकिन यह एक प्रतिशत जरूर देखना चाहिए।।किसी को उंगली भर शहद चटा दो तो शहद के भरे ड्रम की कल्पना कर सकता है। किसी को एक मिर्च खिला दो तो पूरे ढेर का तीखापन पता चल जाता है। किसी को कील या पिन चुभो दो तो वह जान पाएगा। उस शरीर की पीड़ा जिसमें बिना गिनती के धंस गई न जाने कितनी बुलेट्स किसी की उंगली लौ पर रखवा दो तो पूरा शरीर लपटों में भस्म होने की पीड़ा अनुभूत कर सकता है कि वह कैसी होगी?? आपका भूतकाल द काश्मीर फाइल्स में चीख रहा है। आपका भविष्य आपकी तरफ उंगली किए खड़ा है और शंखनाद कर रहा है कि नहीं चेते तो अगले तुम सपरिवार फ़िल्म देखें। दोस्तों को प्रेरित करें। बाहर आकर जब बच्चे यह एक प्रतिशत देख चुके हों तब उन्हें 100 प्रतिशत के बारे में बताएं। यह फ़िल्म हृदय के द्वार खोल देगी। आप जो कहेंगे सीधा अंदर जाएगा। वामपंथी और कामपंथी ने कितने कमीने होते हैं और बच्चों का कैसे ब्रेनवॉश करते हैं यह बहुत ग़जब दिखाया है। चित्र पुराना है लेकिन कश्मीर फाइल्स देखकर आंखों की हालत यही थी।

Published / 2022-03-13 15:04:03
अलग-अलग रंगों की पहचान में लड़कों से आगे हैं लड़कियां, जानें क्यों...

एबीएन डेस्क। आपने अक्सर देखा होगा कि लड़कियों को रंगों के बारे में ज्यादा पता होता है। लड़कियां मिलते जुलते रंग में अंतर समझ लेती हैं और उसी के आधार पर उनकी शॉपिंग भी होती है। लेकिन, क्या आप जानते हैं इसमें विज्ञान भी एक कारण है और विज्ञान की वजह से होता है। ऐसे में जानते हैं कि आखिर लड़कियों के ज्यादा रंग के बारे में पता होने का कारण क्या है? एक रिपोर्ट के मुताबिक रंगों की पहचान करने में पुरुषों की तुलना में महिलाएं काफी तेज होती हैं और उनमें रंगों की पहचान करने की क्षमता ज्यादा होती है। महिलाएं किसी एक रंग के अलग-अलग शेड को भी पहचान लेती हैं और उसे उसके नाम से जानती हैं। रंगों की पहचान को लेकर हुए अध्ययन में इस बात के सबूत मिलते हैं कि पुरुष और महिलाएं एक ही रंग को अलग-अलग अनुभव करते हैं। जहां पुरुष किसी रंग को साधारण तरीके से देखते हैं जबकि महिलाएं उस रंग के भीतर मौजूद रहने वाले रंग यानि उसके शेड को भी पहचान लेती हैं। लिहाजा, जब रंगों में अंतर ढूंढने की बात आती है तो यहां महिलाएं, पुरुषों को काफी पीछे छोड़ देती हैं। लाल रंग या किसी भी दूसरे रंग में मौजूद रहने वाले शेड्स को पहचानने में पुरुषों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि इसे और अच्छी तरह से समझें तो महिलाएं लाल रंग में मौजूद रहने वाले चेरी रेड, रोज रेड, जैम रेड, गार्नेट रेड, रूबी रेड, स्कार्लेट रेड, वाइन रेड, एप्पल रेड, ब्लड रेड, सांग्रिया रेड, बेरी रेड, ब्लश रेड आदि को पहचान सकती हैं, जबकि पुरुष इन सभी शेड्स को सीधे लाल रंग ही बता देंगे। महिलाओं और पुरुष द्वारा की जाने वाली रंगों की पहचान पर स्टडी करने वाले न्यूयॉर्क (अमेरिका) के ब्रूकलीन कॉलेज के पास बिल्कुल साफ तस्वीर तो नहीं है, लेकिन इस स्टडी से काफी कुछ बाहर निकलकर आया है। स्टडी में बताया गया है कि रंगों की पहचान हार्मोन्स से संबंधित है जो पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग होते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक पुरुषों और महिलाओं के प्रारंभिक विकास के समय टेस्टोस्टेरॉन का एक्सप्रेशन दिमाग के विजुअल कॉर्टेक्स में मौजूद न्यूरॉन्स को प्रभावित करता है।

Published / 2022-03-13 09:52:18
द कश्मीर फाइल्स देख बोले पीएम- इतना गर्व किसी फिल्म पर नहीं हुआ

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म द कश्मीर फाइल्स रिलीज से पहले ही चर्चाओं में बनी हुई है। फिल्म से जुड़े कई कलाकार भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। फिल्म के सिनेमाघरों पर आते ही इसे दर्शकों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी द कश्मीर फाइल्स फिल्म और इसकी पूरी टीम की काफी सराहना की है। द कश्मीर फाइल्स के प्रोड्यूसर अभिषेक अग्रवाल ने पीएम मोदी के साथ टीम की फोटोज शेयर की हैं। डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा- मैं बहुत खुश हूं कि अभिषेक ने भारत के इस चुनौती भरे सच को दिखाने की हिम्मत दिखाई। USA में द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के प्रति दुनिया के बदलते नजरिए में फायदेमंद साबित हुआ। वहीं प्रोड्यूसर अभिषेक अग्रवाल ने पीएम संग फोटोज शेयर कर लिखा है- आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना सुखद अनुभव रहा। द कश्मीर फाइल्स के लिए उनका एप्रीसिएशन और अच्छे शब्द इसे और भी खास बनाता है। हमें इससे पहले किसी फिल्म को प्रोड्यूस करने में इतना गर्व महसूस नहीं हुआ, धन्यवाद मोदी जी... फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, दर्शन कुमार आदि कलाकार अपनी भूमिकाएं बखूबी निभाये हैं।

Published / 2022-03-12 17:48:14
सावधान... अगले हफ्ते लगातार 4 दिन बैंक रहेंगे बंद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगले सप्ताह अगर आपको बैंक संबंधित कोई काम है तो लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। दरअसल, अगले सप्ताह होली का त्योहार पड़ रहा है ऐसे में बैंकों में लगातार चार दिन तक कामकाज नहीं होंगे। बैंक लगातार 4 दिन 17, 18, 19 और 20 मार्च को बंद रहेंगे। इन छुट्टियों में रविवार की एक छुट्टी भी शामिल है। RBI की ऑफिशियल वेबसाइट पर दी गई छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक, बैंकिंग अवकाश विभिन्न राज्यों में मनाए जाने वाले त्योहारों या उन राज्यों में खास अवसरों की अधिसूचना पर भी निर्भर करता है। ये सभी छुट्टियां सभी राज्यो में लागू नहीं होंगी। ऐसे में मार्च माह में बैंकों का कामकाज निपटाने के लिए घर से निकलने से पहले बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट जरूर देखकर निकले वरना आपका दिन बर्बाद हो जाएगा।

Published / 2022-03-12 13:35:02
चालीस दिनों तक व्रज में चलने वाला होली महोत्सव शुरू

एबीएन डेस्क (जीवीएस शास्त्री)। चालीस दिनों तक चलने वाला ब्रज होली महोत्सव शुरू हो चुका है। इसी के साथ होली के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए देश और दुनिया से श्रद्धालु मथुरा पहुंचने लगे हैं। ब्रज में बसंत पंचमी पर होली का ढांडा गढ़ने के साथ ही ब्रज के लगभग सभी मंदिरों में होली महोत्सव की शुरूआत हो जाती है। यहां हम आपको पूरे कार्यक्रम के बारे में बता रहे हैं। समाज गायन की परंपरा : देश-विदेश में विख्यात ब्रज की होली में समाज गायन विशेष स्थान रखता है, जिसमें होली गीत और पद गायन की अनूठी परंपरा है। इसमें पारंपरिक अंदाज में ठाकुरजी के समक्ष ब्रजवासी-सेवायत ब्रजभाषा में होली पदों का गायन करते हैं। समाज गायन की शुरूआत भी ब्रज के मंदिरों विशेषरूप से बरसाना स्थित श्रीजी मंदिर में बसंत पंचमी से हो जाती है। गुरुवार को श्रीजी मंदिर में पड़ गायन के बाद सेवायत गोस्वामीजनों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया। गोकुल स्थित गुरु शरणानंदजी महाराज के महावन रमणरेती आश्रम में हर साल पारंपरिक होली का आयोजन किया जाता है। इसमें टेसूके फूलों और गुलाल से होली खेली जाती है। बरसाना में लड्डू होली : मथुरा के बरसाना में लड्डू होली धूमधाम से मनाई जाती है। यह बरसाना की विश्व विख्यात लठ्ठमार होली से एक दिन पहले लाडली मंदिर में मनाई जाती है। इस बार लड्डू होली का आयोजन 03 मार्च 2020 को किया गया। बरसाना में लट्ठमार होली के अगले दिन नंदगांव में लट्ठमार होली खेली जाती है। इस बार यह आयोजन 05 मार्च को हुआ। श्रीकृष्ण जन्मस्थान में लट्ठमार होली : बरसाना और नंदगांव में लट्ठमार होली के बाद रंगभरनी एकादशी के दिन श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर होली मनाई जाती है। इस दिन ब्रज में देश-विदेशी भक्तों के साथ पूरा मथुरा यहां जुटता है। इस बार यह आयोजन 6 मार्च को हुआ। गोकुल में छड़ीमार होली : भगवान कृष्ण के गांव गोकुल में छड़ीमार होली खेली जाती है। गोकुल में श्रीकृष्ण बाल रूप में रहे थे इसलिए यहां लाठी के बजाए छड़ी होली जाती है, ताकि उन्हें ज्यादा चोट न लगे। इस बार 7 मार्च 2020 को गोकुल में इसका आयोजन किया जाएगा। दाऊजी का हुरंगा : दाऊजी का हुरंगा मथुरा के दाऊजी मंदिर में आयोजित होता है। यह मंदिर प्रसिद्ध बलदेव गांव में स्थित है। इसका आयोजन ब्रज के राजा बलदेव (दाऊजी) के आंगन में किया जाता है। इस बार इसका आयोजन 11 मार्च 2020 को किया जाएगा। लोक मान्यतानुसार बरसाना की लठमार होली भगवान कृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं की पुनरावृत्ति जैसी है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ इसी प्रकार कमर में फेंटा लगाए राधारानी तथा उनकी सखियों से होली खेलने पहुंच जाते थे तथा उनके साथ हंसी- ठिठोली करते थे जिस पर राधारानी तथा उनकी सखियां ग्वाल वालों पर डंडे बरसाया करती थीं। ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी लाठी या ढ़ालों का प्रयोग किया करते थे जो धीरे-धीरे होली की परंपरा बन गया। यही कारण है कि आज भी इस परंपरा का निर्वहन उसी रूप में किया जाता है। नाचते - झूमते गाते गांव में पहुंचने वाले लोगों को औरतें हाथ में ली हुई लाठियों से उन्हें पीटना शुरू कर देती हैं और पुरुष खुद को बचाते भागते हैं। सब मारना पीटना हंसी -खुशी के वातावरण में होता है। औरतें अपने गांवों के पुरूषों पर लाठियां नहीं बरसातीं, लेकिन शेष आस- पास खड़े लोग बीच -बीच में रंग बरसाते हुए दिखाई देते हैं। बरसाने में टेसू के फूलों के भगोने तैयार रहते हैं। दोपहर तक घमासान लठमार होली का समां बंध चुका होता है। नंदगांव के लोगों के हाथ में पिचकारियां और बरसाने की महिलाओं के हाथ में लाठियां होती हैं और फिर शुरू हो जाती है होली।

Published / 2022-03-11 06:09:11
अप्रैल से शुरू होगा अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमरनाथ यात्रा के लिए अप्रैल से तीर्थयात्रियों का ऑनलाइन पंजीकरण शुरू होगा। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने बृहस्पतिवार रात यह घोषणा की। श्राइन बोर्ड ने अप्रैल से ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों का पंजीकरण शुरू करने की घोषणा करते हुए कहा कि दक्षिण कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र के तीर्थस्थल में तीर्थयात्रियों की आवाजाही के लिए आरएफआईडी आधारित ट्रैकिंग की जाएगी। एसएएसबी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राहुल सिंह ने जम्मू संभागीय आयुक्त राघव लैंगर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान आगामी यात्रा के लिए व्यवस्था की समीक्षा करने के दौरान कहा, अमरनाथ यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अप्रैल 2022 के महीने में 20,000 पंजीकरण प्रति दिन की सीमा के साथ शुरू होगा। उन्होंने कहा कि यात्रा के दिनों में निर्धारित काउंटर पर ऑन स्पॉट (तत्काल) पंजीकरण भी किए जाएंगे। राहुल सिंह ने कहा कि अमरनाथ तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ने इस साल की तीर्थ यात्रा के दौरान वाहनों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर नज़र रखने को लेकर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

Published / 2022-03-09 17:49:14
धूम्रपान छोड़ने से भारी परेशानी हो जाती है, जानिए इसका सच...

एबीएन सोशल डेस्क। क्या स्मोकिंग छोड़ने के बाद वजन इतना बढ़ जाता है कि चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है, क्या इंसान डिप्रेशन से जूझने लगता है या परमानेंट खांसी की समस्या हो जाती है? स्मोकिंग छोड़ने को लेकर ऐसे कई भ्रम प्रचलित हैं, लेकिन इसका सच कुछ और ही है। आज नो-स्मोकिंग डे है। हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को यह दिन सेलिब्रेट किया जाता है। इसे मनाने का लक्ष्य धूम्रपान रोकने के लिए लोगों को जागरुक करना है। इस मौके पर जानिए स्मोकिंग छोड़ने को लेकर सबसे ज्यादा प्रचलित भ्रम और उनकी सच्चाई… भ्रम : क्या स्मोकिंग छोड़ने के बाद वजन बढ़ने से चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है? सच : यह सबसे कॉमन भ्रम है। इस पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का कहना है, स्मोकिंग छोड़ने के बाद थोड़ा वजन बढ़ता है, लेकिन इसे कंट्रोल भी किया जाता है। वजन इतना नहीं बढ़ता है कि चलने-फिरने में दिक्कत हो। एवरीडे हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, धूम्रपान छोड़ने के बाद जो वजन बढ़ता है वो स्मोकिंग के असर के मुकाबले बुरा बिल्कुल नहीं है। भ्रम : धूम्रपान छोड़ने के बाद इंसान लम्बे समय के लिए डिप्रेशन में चला जाता है। सच : सायकोसोशल ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर रॉबर्ट गार्डनर का कहना है, कुछ लोगों को लगता है कि स्मोकिंग छोड़ने के बाद मूड स्विंग की प्रॉब्लम होती है जो डिप्रेशन में बदल सकती है। रॉबर्ट का कहना है, अगर कोई इंसान पहले से ही डिप्रेशन से जूझ रहा है और स्मोकिंग छोड़ता है तब यह बढ़ सकता है। हालांकि इसका इलाज किया जाता है। सभी मामलों में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं। भ्रम : धूम्रपान छोड़ने पर अनियंत्रित खांसी की समस्या हो जाती है। सच : विशेषज्ञ कहते हैं, यह भी लोगों के बीच एक प्रचलित भ्रम है। वो मानते हैं कि स्मोकिंग छोड़ने पर उन्हें लगातार खांसी की समस्या से जूझना पड़ेगा। लेकिन इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। भ्रम : सिगरेट छोड़कर ई-सिगरेट पीना सुरक्षित है। सच : विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर लोगों को यही लगता है, लेकिन इस बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। अमेरिकी डॉक्टर्स ने यह पाया है कि ई-सिगरेट में ऐसे केमिकल और हैवी मेटल पाए जाते हैं जो सीधे फेफड़े तक पहुंचते हैं और इन्हें डैमेज करते हैं। इसलिए इसे सिगरेट छोड़ने का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। भ्रम : अलग तरह के फिल्टर स्मोकिंग के खतरे से बचा सकते हैं। सच : कई ऐसी सिगरेट हैं, जिन्हें लाइट सिगरेट की कैटेगरी में रखा जाता है। दावा किया जाता है कि इनमें फिल्टर, पेपर और ऐसी तम्बाकू का इस्तेमाल किया गया है जो फेफड़ों पर पड़ने वाले खतरों को कम करते हैं। इस तरह की लाइट सिगरेट पर रिसर्च की गई। रिसर्च में सामने आया कि ये बिल्कुल भी हेल्दी नहीं हैं और न ही खतरे को कम करती हैं।

Published / 2022-03-08 06:45:03
भारत के 80 फीसदी परिवार निजी मेडिकल की पढ़ाई में अक्षम

एबीएन सोशल डेस्क। यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद भारत में मेडिकल शिक्षा प्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास कर निजी मेडिकल कॉलेजों को लेकर बहस छिड़ी हुई है, देश के निजी मेडकल कॉलेजों के द्वारा छात्रों से एमबीबीएस के कोर्स के लिए 80 लाख से एक करोड़ रुपए तक वसूल लिए जाते हैं, जिसकी वजह से बच्चे मेडिकल पढ़ाई के लिए रूस, यूक्रेन, बांग्लादेश, नेपाल, स्पेन, जर्मनी जैसे देशों की ओर रुख करते हैं। जहां महज 20 से 25 लाख रुपए तक में ही मेडिकल की पढ़ाई की जा सकती है। यूक्रेन में पढ़ाई करने गए छात्रों के युद्ध में फंसने के बाद अब इसी बहस के बीच देश में एमबीबीए को लेकर कई खुलासे हो रहे हैं। मेडिकल शिक्षा पर चढ़ी परतें अब एक -एक करके खुलने लगी हैं। एक मीडिया रिपार्ट में कहा गया है कि सरकारी कॉलेज में सीमित सीटों के कारण करीब देश के 80 फीसदी से अधिक परिवार ऐसे हैं जो अपने बच्चों की मेडिकल पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते हैं। एनआरआई सीटों से 5 हजार करोड़ फीस : रिपोर्ट के अनुसार देश में एमबीबीएस की कुल 90800 सीटों में सिर्फ आधी सीटों का लोग खर्च उठा सकते हैं। इसकी वजह है कि ये सीटों सरकारी मेडिकल कॉलेज में हैं। यदि निजी एमबीबीएस कॉलेजों में सरकारी कोटे की बात करें तो इनमें 200 ही ऐसी सीटें हैं ऐसी है जिसका खर्च लोग उठा सकते हैं, जबकि दूसरी ओर कॉलेज प्रबंधन एनआरआई सीटों से सालाना लगभग 5,000 करोड़ रुपये जुटाते हैं। रिपोर्ट में देश के 605 मेडिकल कॉलेजों में 568 कॉलेज में उपलब्ध कुल 90 हजार 800 सीटों में से 86340 सीटों की ट्यूशन फीस का विश्लेषण किया गया है। इस विश्लेषण में सामने आया कि देश के ग्रामीण इलाके जहां डॉक्टरों की बहुत अधिक कमी हैं, वहां सिर्फ एमबीबीएस की सिर्फ 40 फीसदी सीटें हैं। इनमें से अधिकतर सरकारी कॉलेजों में हैं। कुल खर्च का आधा मेडिकल पढ़ाई पर : राष्ट्रीय सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार हम प्रति व्यक्ति सालाना खर्च को देखते हैं। देश में करीब 90 फीसदी लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। इसमें देश की 80 फीसदी आबादी के सालाना खर्च और एमबीबीएस की सालाना फीस की तुलना की गई। इसमें परिवार के सालाना खर्च के आधी रकम को अफोर्डेबल फीस माना गया। हालांकि, यह कहना थोड़ा वास्तविकता से हटकर होगा की एक परिवार अपने कुल खर्च का आधा हिस्सा बच्चे की मेडिकल पढ़ाई पर लगा सकता है। हालांकि, ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल चार्ज, मेस खर्च, एग्जाम फीस, यूनिवर्सिटी डेवलपमेंट फीस भी शामिल हैं। यह एक लाख से 3 लाख तक सालाना अधिक हो सकता है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में सस्ती व्यवस्था : महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में, निजी कॉलेजों में आरक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए या आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निजी कॉलेजों में फीस का भुगतान आंशिक रूप से या पूरी तरह से सरकार द्वारा किया जाता है, जिससे इन सीटों का एक निश्चित अनुपात कुछ वर्गों के लिए सस्ता हो जाता है। इन उपायों के बिना निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटें अनिवार्य रूप से भारत की 20 फीसदी से कम आबादी के लिए आरक्षित हैं। और निजी डीम्ड यूनिवर्सिटी सिटी मेडिकल कॉलेजों में सीटें, जो लगभग 8,500 सीटों या कुल सीटों का लगभग 10 फीसदी है। सबसे महंगे हैं गुजरात के सरकारी मेडिकल कॉलेज : गुजरात सरकारी कॉलेजों में सबसे महंगी एमबीबीएस सीटों वाला राज्य है। यहां अहमदाबाद और सूरत में ज्यादातर सरकारी-समाज संचालित कॉलेज नगर निगमों द्वारा चलाए जा रहे हैं। निजी कॉलेजों की तरह इनमें भी मैनेजमेंट और एनआरआई की सीटें हैं। इन कॉलेजों में सरकारी सीटों की सालाना फीस 3 लाख रुपये से लेकर 7.6 लाख रुपये तक है। गुजरात में 80 फीसदी से अधिक शहरी परिवारों का वार्षिक खर्च 3 लाख रुपये से कम है। पंजाब, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में सालाना फीस क्रमश: 1.8 लाख रुपये, 1.4 लाख रुपये और 1.1 लाख रुपये है। एम्स और उसके बाद बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे केंद्र सरकार के संस्थानों में फीस सबसे कम है। अधिकांश सरकारी कॉलेजों में वार्षिक शुल्क 6,500 रुपये से 9,000 रुपये तक है।

Page 202 of 218

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse