एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। विश्व हिंदू परिषद तथा बजरंग दल के द्वारा यह निर्णय लिया गया कि आगामी हिन्दू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083, अंग्रेजी कलेंडर अनुसार 19 मार्च दिन वृहस्पतिवार को सुबह 9 बजे स्थानीय वीर शिवा जी चौक अवस्थित सिद्धि दात्री दुर्गा मंदिर प्रांगण में भगवा ध्वज पूजन, भारत माता आरती तथा सामूहिक हनुमान चालीसा का आयोजन के साथ प्रसाद वितरण कार्यक्रम किया जायेगा।
इस निमित्त नव निर्वाचित नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव के साथ युवा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अजातशत्रु, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय पंकज, युवा भाजपा जिलाध्यक्ष बाल्मीकि कुमार, विश्व हिंदू परिषद जिलाध्यक्ष रितेश कुमार, बजरंग दल संयोजक पवन प्रजापति, केंद्रीय महावीर मंडल अध्यक्ष विपुल तामेड़ा, केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति अध्यक्ष संतोष लकड़ा की विशेष उपस्थिति के साथ साथ विश्व हिंदू परिषद तथा बजरंग दल के सभी पदाधिकारी, सदस्य तथा जिला के सनातनी युवा एवं गणमान्य उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की सफलता हेतु सम्पर्क अभियान भी चलाया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। परमहंस डॉ संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के द्वारा संचालित विगत 2 वर्षों से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज मदनलाल लाखोटिया एवं उनके परिवार के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 45 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया।
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 19 फरवरी से 15 मार्च तक 25 दिनों मे 5550 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया।
मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में-सावित्री देवी, विजय प्रकाश अग्रवाल, कविता गाडोदिया, प्रेमचंद्र मिश्रा, मनोज कुमार, उमेश भगत, श्याम सुंदर, विकास कुमार, अभिषेक कुमार, मधु छावनिका, विजय पोद्दार, योगेंद्र प्रसाद सिंह, निष्क नारायण, ललिता पोद्दार, अभिनव सिंह, शरद पोद्दार, दिगंबर सिंह, रजनी गुप्ता, झलक कुमारी, शंकर लाल पेडिवाल, सुरेश अग्रवाल, विद्या देवी अग्रवाल, रमन बोड़ा के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गयी।
सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितों, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के समान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं है।
अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश भगत सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम और श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, नामकुम (रांची)। लायंस क्लब आॅफ रांची अम्बर की अध्यक्ष दीपाली रस्तोगी एवं सचिव रश्मि सिंह के नेतृत्व में ग्राम बराम, बराम पंचायत, नामकुम में लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर, रांची के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 200 से अधिक ग्रामीण महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गयी।
जांच के दौरान डायबिटीज, हाइपरटेंशन (ब्लड प्रेशर), हीमोग्लोबिन, बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) तथा बॉडी फैट की जांच की गयी और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया गया। शिविर में चिकित्सा टीम का नेतृत्व लायन सिमू रवि तथा डाइटिशियन रवि महतो ने किया। उनकी टीम ने भी ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में लायन माधवेश, योगेंद्र, राधिका, मन्नू, अनुज, रवि, लायन ज्योति एवं लायन रंजीता सहित क्लब की पूरी टीम का विशेष सहयोग रहा। सभी के संयुक्त प्रयास से यह स्वास्थ्य शिविर ग्रामीण महिलाओं के लिए काफी लाभदायक साबित हुआ।
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 15 मार्च को पूरे विश्व में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है।
इस दिवस का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उन्हें शोषण से बचाना तथा बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। आज के आधुनिक उपभोक्तावादी युग में यह दिवस अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी आवश्यक हो गई है।
विश्व उपभोक्ता दिवस मनाने की प्रेरणा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के उस ऐतिहासिक भाषण से मिली, जो उन्होंने 15 मार्च 1962 को अमेरिकी संसद में दिया था। इस भाषण में उन्होंने उपभोक्ताओं के चार मूलभूत अधिकारों- सुरक्षा का अधिकार,जानकारी का अधिकार,चयन का अधिकार और अपनी बात सुने जाने का अधिकार-को मान्यता दी। इसी ऐतिहासिक पहल की स्मृति में बाद में उपभोक्ता संगठनों द्वारा 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
वर्ष 1983 से यह दिवस वैश्विक स्तर पर नियमित रूप से मनाया जा रहा है।इस दिवस का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। उपभोक्ता किसी भी अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, क्योंकि बाजार की पूरी व्यवस्था उन्हीं की आवश्यकताओं और मांगों के आधार पर संचालित होती है।
यदि उपभोक्ता जागरूक और सशक्त होंगे तो व्यापारिक संस्थान भी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करने के लिए बाध्य होंगे। इसलिए इस दिन विभिन्न देशों में सेमिनार, जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।भारत में भी उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
वर्ष 1986 में भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू किया, जिसे बाद में और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 लागू किया गया। इस कानून के माध्यम से उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी, मिलावटी वस्तुओं, गलत विज्ञापन और खराब सेवाओं से सुरक्षा प्रदान की जाती है।
इसके तहत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आयोग स्थापित किए गए हैं, जहां उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विश्व उपभोक्ता दिवस का महत्व केवल अधिकारों की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदार उपभोक्ता बनने का संदेश भी देता है। आज के समय में डिजिटल खरीदारी, ऑनलाइन सेवाएं और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव के कारण उपभोक्ताओं के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
इसलिए यह आवश्यक है कि उपभोक्ता वस्तुओं की गुणवत्ता, कीमत, गारंटी और सेवा संबंधी सभी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही खरीदारी करें तथा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होने पर अपने अधिकारों का उपयोग करें। कहा जा सकता है कि विश्व उपभोक्ता दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक, सशक्त और जिम्मेदार बनाने का वैश्विक अभियान है।
यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे तो बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगेगी और समाज में न्यायपूर्ण एवं संतुलित आर्थिक व्यवस्था का निर्माण संभव हो सकेगा। इसलिए प्रत्येक नागरिक को इस दिवस के महत्व को समझते हुए अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। श्री राधाकृष्ण मंदिर कृष्णा नगर कॉलोनी में आज दिनांक 12/03/2026 को रामनवमी एवं नवरात्र महोत्सव धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। रामनवमी के उपलक्ष में कलश यात्रा निकालने निर्णय लिया गया। 18/03/2026 दिन बुधवार को सुबह 7 बजे से शिव दुर्गा मंदिर से 108 महिलाओं द्वारा कलश उठाया जायेगा।
जो कलश यात्रा हरि ओम मंदिर होते हुए, काली मंदिर होते हुए, भक्ति चौक, झंडा चौक होते हुए राधाकृष्ण मंदिर कृष्णा नगर कॉलोनी पहुंचेगी। उसके पश्चात मां का विशाल भंडारा भक्तों के बीच में वितरण किया जायेगा एवं कलश यात्रा में मुख्य आकर्षण माता की संजीव झांकी एवं श्री दुर्गा जागरण मंडली के सदस्यों के द्वारा भजनों का कार्यक्रम होगा।
19/3/2026 संध्या 4 बजे से सुंदर कांड का सामूहिक पाठ मंदिर प्रांगण में होगा। मीडिया प्रभारी अरुण जसूजा से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवरात्र नवरात्रों के दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ 19/03/2026 से 26/03/2026 तक प्रात 7 बजे से 10 बजे तक होगी एवं मां की अखंड ज्योत जलायी जायेगी।
महा अष्टमी के दिन रात्रि में 9 बजे 1008 ज्योत प्रज्ज्वलित की जायेगी और भजन कीर्तन का कार्यक्रम रात्रि 11 बजे तक होगी। 27 को रामनवमी महोत्सव कार्यकम 11 से दोपहर 3 बजे तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम एवं विशाल भंडारा होगा। दसमी के दिन सुबह 10 बजे से हवंन एवं ज्योत विसर्जन का कार्यक्रम होगा।
मौके पर प्रधान नंदकिशोर, अरोड़ा मुखी, राधेश्याम किंगर, चंद्रभान तलेजा, रामचंद्र तलेजा, मनोहर लाल जसुजा, सुनील कटारिया, चंदन सिराणा, किशोरी पपनेजा, अंचल किंगर, निखिल घेई, हरिश मनुजा, अरुण जसुजा, मनीष मुंजल, कमल घई, विनीत अरोड़ा, अनिल मुंजल, विकास घई, रोहित तलेजा, चंद्रभान मनुज, जिमी अरोड़ा, पवन पापनेजा, विजय जसुजा एवं समाज के बहुत सारे लोग उपस्थित हुए।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में आज दो पुंसवन संस्कार दो परिवार द्वारा कराये गए। इस दौरान वर्तमान समय में पुंसवन संस्कार की आवश्यकता, गरिमा, महत्व व अपेक्षा पर प्रकाश डाला गया। यज्ञीय पुरोहित ने समय की अपेक्षा पर चर्चा करते हुए बताया कि गर्भस्थ शिशु परिवार, समाज, राष्ट्र का सौभाग्य, यश व गौरव का कारण बने।
माता पिता अभिभावकों का ध्यान आकर्षित कर बताया गया कि गर्भस्थ शिशु में शारीरिक, बौद्धिक, तथा भावनात्मक नव-निर्माण व विकास के लिए अनुकूल वातावरण, खान-पान, आचार-विचार का, शुचिता पवित्रता का निर्धारण आवश्यक व आकर्षक होना चाहिए। पूर्व के कुसंस्कारों का निवारण तथा सुसंस्कारों की मंगलमय स्थापना, ग्रहण और विकास के लिए सत्संकल्प, सत्प्रयोजन, सत्पुरुषार्थ एवं देव अनुग्रह के संयोग का प्रयास रूचिकर व तीव्रतर होना चाहिए।
गायत्री यज्ञ अनुष्ठान दौरान इस प्रकार दिशा-निर्देश व संकल्प साथ अच्छी तरह बताकर षटकर्म, देवपूजन, सर्व देव नमस्कार, स्वस्तिवाचन पाठ, रक्षा विधान कराकर शेष संस्कार विधिवत सोल्लास, एक बुराई परित्याग एवं एक अच्छाई ग्रहण कराकर संस्कार विधान संपन्न कराये गये। उक्त जानकारी गायत्री-परिवार रांची शक्तिपीठ के प्रमोद कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। अध्यात्म के उपासना, साधना एवं आराधना के महाविज्ञान में सद्गुरु, सत्संग और सत्सानिध्य का ही प्रमुख महत्व है और उनके ही माध्यम से साधक स्वयं का परिमार्जन करता है। सद्गुरु उन्हें कहा जाता है जिनका सत्य के साथ एकात्मकता स्थापित हो जाती है।
व्यक्ति एवं सत्य में विभेद ना रह जाए ऐसे व्यक्ति सद्गुरु के उच्च पद पर प्रस्थापित हो जाते हैं। सतगुरु से सशरीर सानिध्य सर्वोत्तम तो होता है परंतु यह भी आवश्यक नहीं है कि सद्गुरु से हर घड़ी शारीरिक निकटता बनी रहे। जब गुरु एवं शिष्य का सानिध्य गहन एवं सघन हो जाती है तब आत्म-मिलन और आत्म-एकाकार की अद्भुत घटना घटित होती है।
सद्गुरु अपने शिष्य के सूक्ष्म शरीर में स्थापित हो जाते हैं और उनकी उपस्थिति का तरंग श्वास, प्रश्वास तथा हृदय की धड़कन के साथ संपूर्ण स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर में प्रवाहित होते रहता है। इंद्रियों के द्वारा अनुभूति तथा ग्रहण करने की क्षमता सीमित होती है, जबकि शारीरिक संरचना के अंदर अदृश्य संस्थाओं से उठने वाले तरंगों का प्रभाव व्यापक एवं स्थाई होता है।
सत्य का अन्वेषण बुद्धि, विवेक एवं तर्क के आधार पर नहीं किया जा सकता है। सत्य के अन्वेषण के लिए श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और निष्ठा का मिश्रित शक्तिशाली आधार चाहिए। जैसे ही सत्य की ओर यात्रा प्रारंभ होती है जीवन में अद्भुत घटित होने लगती है जिसे भौतिक जगत में चमत्कार के रूप में देखा और समझा जाता है।
जबकि सत्य के अन्वेषक को इन चमत्कारों से कोई लेना-देना नहीं रहता है वह तो सत्य से एकाकार बाद ही गुरु के ऋण से मुक्त हो पता है। मनुष्य की इच्छा अनंत है जिसकी पूर्ति शायद ही हो पाती है। इच्छाओं का, क्रिया प्रतिक्रिया का और असंतोष का भारी बोझ ढोने से कहीं अच्छा है सत्य के सानिध्य में जीवन की यात्रा को पूरी की जाय।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नीले आकाश का सच एक ऐसी पुस्तक है, जो बिहार और झारखंड की राजनीति, सत्ता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तंत्र की जटिल सच्चाइयों को उजागर करती है। यह किताब सिर्फ घटनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक ऐसी पत्रकारिक यात्रा है, जो बताती है कि सत्ता के गलियारों में कैसे फैसले होते हैं, किस तरह घोटालों की गूंज लोकतंत्र के स्तंभों को हिलाती है और कैसे जनता की उम्मीदें राजनीतिक समीकरणों में गुम हो जाती हैं।
किताब की शुरुआत बिहार विभाजन और झारखंड गठन से होती है, जिसमें झारखंड आंदोलन की पृष्ठभूमि, संघर्ष और अंतत: राज्य निर्माण की राजनीतिक खींचतान को विस्तार से बताया गया है। यह अध्याय दिखाता है कि कैसे राजनीतिक समीकरणों के चलते वरिष्ठ नेता कड़िया मुंडा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचते-पहुंचते रह गये और बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बन गये।
दूसरा अध्याय पशुपालन घोटाला और लालू प्रसाद बिहार की राजनीति के सबसे बड़े भ्रष्टाचार की कहानी कहता है। इसमें बताया गया है कि किस तरह करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से फर्जी बिलों और घोटालों के जरिये निकाले गये और किस तरह इस घोटाला से बिहार की राजनीति का चेहरा बदल गया।
तीसरा अध्याय लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के रोचक किस्से बिहार की सत्ता के दिलचस्प और कभी-कभी हास्यपूर्ण पहलुओं को सामने लाता है। इसमें सत्ता के भीतर के कई ऐसे किस्से हैं जो राजनीति के मानवीय और नाटकीय दोनों रूपों को दिखाते हैं।
चौथा अध्याय सचिवालय का सच और रिपोर्टिंग की यात्रा लेखक की पत्रकारिक दृष्टि का परिचायक है। यह अध्याय सरकारी फाइलों, प्रशासनिक गड़बड़ियों और जमीनी रिपोर्टिंग के अनुभवों से भरा है।
इसके बाद पांचवां अध्याय में बिहार के घोटालों से नहीं सीख लिया झारखंड ने में बताया गया है कि कैसे झारखंड ने बिहार की गलतियों को दोहराया। नये राज्य में भ्रष्टाचार, गुप्त फंड के दुरुपयोग और सत्ता की राजनीति ने जनता की उम्मीदों को धूमिल कर दिया। गुप्त फंड का गुप्त उपयोग, खान और उद्योग, और शराब पर खेल जैसे अध्याय सत्ता और व्यवसाय के गठजोड़ को उजागर करते हैं। ये दिखाते हैं कि किस तरह प्राकृतिक संसाधनों और योजनाओं को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया।
पानी के पाइप में बह रहा भ्रष्टाचार अध्याय में जलापूर्ति योजनाओं में हुए घोटालों का खुलासा किया गया है, जबकि रघुवर दास, मैनहर्ट और राज्यपाल का संयोग सत्ता के ऊपरी स्तर पर चल रही अदृश्य राजनीतिक ताकतों का चित्रण करता है। अंतिम 11 वां अध्याय द गार्डियंस बाबूलाल से हेमंत तक झारखंड की राजनीतिक यात्रा को समेटता है। इसमें राज्य के मुख्यमंत्रियों की भूमिका, उनके फैसले, और विकास बनाम राजनीति की जंग का सटीक विश्लेषण है।
कुल मिलाकर, नीले आकाश का सच बिहार और झारखंड की राजनीति की मिट्टी से निकली वह कहानी है जिसमें सत्ता की सच्चाई, घोटालों की गंध, और उम्मीदों के नीले आकाश की तलाश एक साथ चलती है। यह किताब पत्रकारिता, राजनीति और समाज के उन अदृश्य सूत्रों को जोड़ती है जिनसे भारत के लोकतंत्र की असल तस्वीर उभरती है।
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