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Published / 2022-05-22 15:26:26
52 साल करियर में कुश्ती का एक भी मुकाबला नहीं हारे गामा पहलवान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पहलवान गुलाम मोहम्मद बख्श बट का आज जन्मदिन है। रुस्तम-ए-हिंद की उपाधि से नवाजे गए मोहम्मद बख्श बट गामा का जन्म 22 मई 1878 को अमृतसर में हुआ था और उन्हें द ग्रेट गामा के नाम से जाना जाता है। कुश्ती प्रतियोगिताओं में गामा की सफलता ने उन्हें पूरे भारत में प्रसिद्धि दिलाई। अपने 52 साल लंबे कुश्ती करियर में वह एक भी मुकाबला नहीं हारे। गूगल ने भी उनके जन्मदिन को डूडल से सजाया। 10 साल की उम्र से ही गामा ने अपने नियमति व्यायाम में 500 पुश-अप शामिल कर लिए थे। सन 1988 में गामा ने जोधपुर की एक व्यायाम प्रतियोगिता में हिस्सा लिया जिसमें देशभर से 400 पहलवान आए थे। अंतिम 15 में जगह बनाने के बाद गामा को जोधपुर के महाराज ने विजेता घोषित कर दिया। वहां से दतिया के महाराज ने उन्हें कुश्ती सिखाने की जिम्मेदारी ले ली। उन्होंने 15 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की और 1910 तक गामा ने तभी बड़े पहलवानों को हरा दिया था। वह राष्ट्रीय हीरो और विश्व चैम्पियन के रूप में अखबारों में छपने लगे थे। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई खिताब अर्जित किए, विशेष रूप से 1910 में विश्व हैवीवेट चैम्पियनशिप का भारतीय संस्करण और 1927 में विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप, जहां उन्हें टूनार्मेंट के बाद टाइगर की उपाधि से सम्मानित किया गया। प्रिंस आॅफ वेल्स ने अपनी भारत यात्रा के दौरान गामा को सम्मानित करने के लिए उन्हें एक चांदी की गदा भी भेंट की थी। 1947 में बंटवारे के दौरान गामा को कई हिन्दुओं की जिन्दगी बचाने के लिए भी सराहा जाता है। बंटवारे के बाद वह पाकिस्तान चले गए और 1960 में देहांत से पहले तक लाहौर में ही रहे।

Published / 2022-05-22 13:22:00
रघुनाथगंज मंदिर में हुआ नीतू नवगीत का शानदार अभिनंदन

टीम एबीएन, शकूराबाद। रामकथा का वैश्विक संदर्भ विषय पर मॉरीशस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेकर वापस आने वाली बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका और रघुनाथगंज सूर्य मंदिर समिति की अध्यक्ष डॉ नीतू कुमारी नवगीत का ग्रामवासियों ने हार्दिक अभिनंदन किया। रघुनाथगंज सूर्य मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुष्पगुच्छ और अंग वस्त्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्थान मुंबई की सदस्य के रूप में नीतू नवगीत 1 सप्ताह की यात्रा पर मॉरीशस गई थी जहां उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने के अलावा अलग-अलग कार्यक्रमों में बिहार की खुशबू से लबरेज लोकगीतों की भी प्रस्तुति दी। रघुनाथ मंदिर में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में उन्होंने लोकगीतों में प्रभु श्री राम और माता सीता विषय पर अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया। यहां उन्होंने राम और सीता जी के जीवन से जुड़े लोक गीतों की प्रस्तुति भी की जिसे सभी द्वारा सराहा गया। विश्व हिंदी सचिवालय के अलावा उन्होंने हिंदी प्रचारिणी सभा मॉरीशस, रामायण सेंटर, मॉरीशस तथा पुरोहित संघ मंदिर में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। मॉरीशस के विभिन्न केंद्रों पर उन्होंने देखकर रामजी को जनक नंदिनी बाग में बस खड़ी की खड़ी रह गई, जुग जुग जिया तू ललनवा, सिया धिया सुकुमारी, राम जी से पूछे जनकपुर के नारी बता द पहुना लोगवा देत काहे गारी, मिथिला नगरिया निहाल सखिया चारो दूल्हा में बड़का कमाल सखिया, राजा जनक जी के बाग में अलबेला रघुवर आयो जी, बता द पहुना मिथिले में रहू जवने सुखवा ससुरारी में तब ने सुखवा कहीं ना, धना धना भाग अयोध्या, सखी फूल लोर्ढै चलु फुलवरिया सीता के संग सहेलियां, शबरी प्रसंग रहिया निहारे रही कुटिया में सबरी श्री राम जी आएंगे, चित्रकूट के घाट घाट पर तुलसी देखे बाट राम मेरे आएंगे, मन में है विश्वास एक दिन पूरी होगी आस राम मेरे आएंगे, सीता के चढ़ेला हरदिया मनभावन लागे सहित अनेक लोक गीतों की प्रस्तुति दी। डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि मॉरीशस हिंद महासागर में बसा हुआ एक लघु भारत है जहां की मिश्रित संस्कृति में भारतीयता का भाव घुला मिला है। पोर्ट लुइस के समीप अवस्थित गंगा तालाब के पास भगवान शिव और दुर्गा माता की 33 मीटर ऊंची प्रतिमाएँ मॉरीशस में हैं। वर्तमान समय में वहां के प्रधान मंत्री प्रविंद्र जगन्नाथ और राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन भारतीय मूल के ही हैं। मॉरीशस यात्रा के दौरान साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के सदस्यों की मुलाकात मॉरीशस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी हुई। अभिनंदन समारोह में रघुनाथगंज सूर्य मंदिर समिति के संरक्षक रविंद्र भगत, पंचायत समिति के सदस्य राजेश्वर प्रसाद, शंभू प्रसाद, सुनील प्रसाद, बबलू कुमार, मंटू कुमार, पंकज कुमार, सोनू कुमार, राहुल कुमार, अमन कुमार गुप्ता, भूषण प्रसाद, राजकुमार गुप्ता, सुनीता देवी, आदि उपस्थित रहे। मंच संचालन सुनील प्रसाद ने किया।

Published / 2022-05-16 16:55:24
बुद्ध पूर्णिमा : मां छिन्नमस्तिका मंदिर में उमड़ा भक्तों का हुजूम, बंगाल, बिहार और ओडिशा के भक्त भी पहुंचे

टीम एबीएन, रामगढ़। रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर काफी संख्या में श्रद्धालु मां भगवती की पूजा के लिए पहुंचे। दामोदर और भैरवी के संगम में स्नान करने के बाद भक्तों ने मां की पूजा कर अपने परिवार के लिए सुख शांति और समृद्धि की कामना की। बुध पूर्णिमा पर झारखंड के अलावे बिहार ओडिशा और बंगाल के भक्त भी मां की अराधना करते दिखे। मां की अराधना के लिए सुबह से ही श्रद्धालु लाइन में लगे दिखे। भीषण गर्मी के बावजूद भक्तों में मां की पूजा के लिए काफी उत्साह देखा गया। मुख्य मंदिर से लेकर प्रवेश द्वार होते हुए सड़क तक पहुंची भीड़ को संभालने के लिए मंदिर न्यास समिति के लोग सक्रिय दिखे। श्रद्धालुओं को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो इसका प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा पूरा ख्याल रखा गया। पुरोहितों के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख मास की पूर्णिमा या वैशाखी पूर्णिमा, पीपल पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख पूर्णिमा सभी में श्रेष्ठ मानी गई है। प्रत्येक माह की पूर्णिमा, जगत के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु भगवान को समर्पित होती है। भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना गया है, जिन्हें इसी पावन तिथि के दिन बिहार के पवित्र तीर्थ स्थान बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी।

Published / 2022-05-16 16:50:36
महाराज नंदी जी को मिला 353 वर्ष की तपस्या का प्रतिफल, मिला ज्योतिर्लिंग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वाराणसी के ज्ञानवापी में आज सर्वे के दौरान बाबा विश्वनाथ का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग मिल गया, जो सनातन हिंदू समाज के लिए एक हर्ष का विषय है। भारतवर्ष सनातन हिंदुओं का देश है, परन्तु मुस्लिम आक्रांताओं के द्वारा सनातन परंपरा को नष्ट करने के उद्देश्य हजारों अराध्य स्थलों के नष्ट करने का दु:साहस किया गया था। इसी कड़ी में आज से 353 वर्ष पूर्व आक्रांता औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग तथा मंदिर को क्षति पहुंचाने की चेष्टा की थी। इस ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा में नंदी महाराज ने 353 वर्ष तक तपस्या कर रहे थे। आज भगवान शिव के दिवस सोमवार एवं महात्मा बुद्ध के जन्म दिवस पर बाबा विश्वनाथ के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग सर्वे टीम के समक्ष अपने को दर्शन देकर संपूर्ण सनातन हिंदू समाज को अपने अतीत से परिचय कराने के साथ-साथ महाराज नंदी का तपस्या को भी पूर्ण किए।आक्रांताओं के क्रूरता द्वारा वर्षों पूूर्व हमारे सनातनी समाज एवं हमारे धर्म स्थलों को नष्ट करने जो षड्यंत्र चलाया गया था, आज संपूर्ण विश्व उसे देख रहा है। कट्टरपंथी मुस्लिमों के द्वारा 1947 का पहले का जो वक्तव्य दिया जा रहा है, यह बिल्कुल निराधार है। यह मंदिर 1947 का नहीं बल्कि प्राचीन मंदिर है। विगत 353 वर्ष से हिंदू समाज ने सदैव बाबा विश्वनाथ जी के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को प्राप्त करने के संघर्ष कर रहे थे। ऐसे कट्टरपंथियों से हिन्दू समाज को सचेत रहने की आवश्यकता है एवं न्यायालय की न्याय के प्रति अविश्वास रखने वालों पर हिंदू समाज को कठोरता से उत्तर देने की आवश्यकता है। ज्ञानवापी भगवान विश्वनाथ का था, आज भी है और सदैव रहेगा। भगवान बाबा विश्वनाथ के अलौकिक दर्शन हेतु समस्त हिंदू जनमानस को हार्दिक शुभकामनाएं...। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-05-16 16:45:00
ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग ने सिद्ध किया कि वह मंदिर है...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वाराणसी में ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान एक कमरे में शिवलिंग मिलने से स्वयं सिद्ध हो गया है कि वह मंदिर है। यह बात विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कही है। आलोक के अनुसार ज्ञानवापी मंदिर में सर्वे के दौरान एक कमरे में शिवलिंग प्राप्त हो गया है और यह बहुत आनंद का समाचार है। उन्होंने कहा कि शिवलिंग दोनों पक्षों और उनके वकीलों की उपस्थिति में मिला है। इसलिए शिवलिंग वाला स्थान मंदिर है। यह तथ्य स्वयं सिद्ध हो चुका है कि वहां मंदिर अब भी है और 1947 में भी था। उन्होंने आशा जताई है कि ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान मिले इस साक्ष्य को समस्त देशवासी स्वीकार करेंगे और इसका आदर करेंगे। श्री आलोक कुमार को भरोसा है कि शिवलिंग मिलने के बाद इसकी जो स्वाभाविक परिणतियां हैं, देश उस तरफ़ आगे बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने ज्ञानवापी के शिवलिंग वाले हिस्से को संरक्षित किया है, सील किया है। पुलिस अधिकारियों का दायित्व है कि वहां कोई छेड़छाड़ नहीं हो। उन्होंने भरोसा जताया कि यह विषय अपने परिणाम तक पहुंचेगा। श्री आलोक कुमार ने कहा कि मामला क्योंकि अभी न्यायालय में है, इसलिए अधिक टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। न्यायालय का निर्णय आने के बाद विश्व हिंदू परिषद इसके बारे में आगे विचार करेगी और तभी तय किया जाएगा कि अगला कदम क्या उठाया जाएगा। हमने कहा था कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण तक हम न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे। अब बदली हुई परिस्थितियों में हम इस मामले को आगामी 11-12 जून को हरिद्वार में होने वाली अपने केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में पूज्य सन्तों से समक्ष निवेदित करेंगे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल (मो. 9810949109) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-05-16 12:48:06
ज्ञानवापी में र्वे टीम के प्रवेश पर बोले हिंदू पक्ष के सोहनलाल- अंदर बाबा मिल गये...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे का काम लगातार तीसरे दिन पूरा हो गया है। कल यानी 17 मई एडवाकेट कमिश्नर को कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट पेश करनी है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि सर्वे में शामिल एक सदस्य को ज्ञानवापी परिसर में जाने से पुलिस ने रोक दिया। कुछ देर बैठाने के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। सर्वे की जानकारी लीक करने के आरोपों में ये कार्रवाई की गई। वहीं सर्वे के बाद ज्ञानवापी से बाहर निकले वादी पक्ष के पैरोकार सोहनलाल आर्य ने मीडिया से कहा कि अंदर बाबा मिल गए। इस बारे में पूछने पर कहा कि जिन खोजा तिन पाइयां..तो समझिए, जो कुछ खोजा जा रहा था, उससे कहीं अधिक मिला है। दावा किया कि गुंबद, दीवार और फर्श के सर्वे के दौरान कई साक्ष्य दबे हुए से दिखे। उन्होंने पुरातात्विक सर्वेक्षण करने की बात कही। वहीं अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता अभयनाथ यादव और मुमताज अहमद ने कहा कि अंदर कुछ भी नहीं मिला। इधर, पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने सर्वे पूरा होने पर काशिवासियों का आभार जताया है। मीडिया को धन्यवाद कहा है। डीएम बोले- किसी के दावे पर ध्यान देने की जरूरत नहीं : वाराणसी के जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने कहा कि सर्वे को लेकर अगर किसी ने कोई बात कही है या किसी बात का दावा किया है तो यह उनकी व्यक्तिगत राय है। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में कोर्ट कमिश्नर द्वारा रिपोर्ट पेश करने के बाद कोई भी बात अदालत ही बतायेगा। किसी की बात पर कोई ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। हाई लैंस कैमरे से हुई फोटोग्राफी : सूत्रों के मुताबिक आज तहखाने के अंदर एक हिस्से में जमा मलबे व पानी को निकाल कर वीडियोग्राफी कराई गई। वहीं ज्ञानवापी के गुंबद की आज फिर वीडियोग्राफी हुई। इसकी बनावट की हाई लैंस कैमरे से फोटोग्राफी भी की गई। शनिवार को भी इसका सर्वे किया गया था। अदालत के आदेश के बाद शनिवार और रविवार को चार-चार घंटे में 80 से 85 फीसदी ही सर्वे ही हुआ था। 17 मई को सर्वे रिपोर्ट वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में पेश की जाएगी। शनिवार को तहखाने के अंदर एक हिस्से में मलबे व पानी की वजह से सर्वे की पूरी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। वादी पक्ष ने मलबा हटाकर जांच करने की बात कही तो प्रतिवादी पक्ष ने एतराज भी जताया था। आज इसी हिस्से का सर्वे हुआ। वीडियोग्राफी के लिए विशेष कैमरों का इस्तेमाल किया गया। सर्वे को लेकर आज भी जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था रही। इधर, बुद्ध पूर्णिमा और सोमवार का दिन होने के कारण बाबा विश्वनाथ के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ी। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में गंगा स्नान के लिए पहुंचे। उनकी सुरक्षा के लिए गंगा में एनडीआरएफ और जल पुलिस तैनात को तैनात किया गया। बाबा धाम आने वाले श्रद्धालुओं को गेट नंबर एक और गंगा द्वार से मंदिर में प्रवेश कराया गया। श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम : ज्ञानवापी की ओर आने वाले सभी रास्ते को बैरिकेडिंग कर बंद कर दिए गए हैं। मैदागिन-गोदौलिया मार्ग पर आम वाहनों पर प्रतिबंध है। बांसफाटक क्षेत्र की दुकानें सर्वे होने तक बंद हैं। पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश सर्वे शुरू होते ही सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। पैदल मार्च कर शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से क्षेत्र को दो जोन में बांटा गया है। काशी और वरुणा जोन में एडिशनल सीपी स्तर के अधिकारी बनाए गए हैं। गोदौलिया से दशाश्वमेध मार्ग होते हुए गंगा तक पुलिस चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही है। इससे पहले शनिवार को ज्ञानवापी परिसर में दूसरे दिन रविवार को सर्वे के दौरान गुंबद, दीवारों और तहखाने की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी की गई। 80 फीसदी से ज्यादा सर्वे की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। शनिवार को सर्वे के बाद बाहर निकले हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि हमने जिन बातों को आधार बनाकर वाद दायर किया था, वह और भी मजबूत हो गया है। सर्वे में जो साक्ष्य व तथ्य मिल रहे हैं, उनसे हमारी राह और आसान हो जाएगी। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष के वकील ने तीन बार ऊंची आवाज में कहा कि कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला।

Published / 2022-05-16 05:28:23
वैष्णो देवी मंदिर के पास जंगलों में लगी आग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में माता वैष्णो देवी के पास त्रिकुटा की पहाड़ियों पर जंगलों में भीषण आग लग गई। पुलिस ने रविवार को बताया कि जंगलों में आग शनिवार को लगी और धीरे-धीरे पहाड़ के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों ने कहा, आग के कारण वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा प्रभावित नहीं हुई है और तीर्थयात्री भवन की तरफ सुचारू रूप से जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि वन विभाग के दमकल कर्मी, पुलिस और श्राइन बोर्ड के कर्मचारी आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

Published / 2022-05-12 12:50:04
साइप्रस के 100 मीटर बाधा दौड़ में 22 साल की ज्योति ने जीता स्वर्ण

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। ज्योति याराजी ने साइप्रस में चल रही इंटरनेशनल एथलेटिक्स मीट में 100 मीटर बाधा दौड़ में 13.23 सेकंड के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए जीत दर्ज की। आंध्र की 22 वर्ष की ज्योति ने लिमासोल में हुए टूनार्मेंट में स्वर्ण पदक जीता। एक महीने पहले ही हवा से वैध सीमा से अधिक मदद मिलने के कारण उसका राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने वाला प्रदर्शन मान्य नहीं किया गया था। पुराना रिकॉर्ड अनुराधा बिस्वाल के नाम था जो उन्होंने 2002 में 13.38 सेकंड में बनाया था। साइप्रस इंटरनेशनल मीट विश्व एथलेटिक्स उपमहाद्वीपीय टूर चैलेंजर वर्ग डी का टूनार्मेंट है। ज्योति ने पिछले महीने कोझिकोड में फेडरेशन कप में 13.09 सेकंड का समय निकाला था लेकिन हवा की गति प्लस 2.1 मीटर प्रति सेकंड होने से उसे अमान्य करार दिया गया क्योंकि वैध सीमा प्लस 2.0 मीटर प्रति सेकंड है। ज्योति ने 2020 में अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी 13.03 सेकंड का समय निकाला था, लेकिन उसे अमान्य करार दिया गया क्योंकि राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (नाडा) ने टूनार्मेंट में उसकी जांच नहीं की थी और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ का कोई तकनीकी प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था। वहीं पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में अमलन बोरगोहेन तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने 21.32 सेकंड का समय लिया। जबकि लिली दास ने महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ जीतीं। उन्होंने 4 मिनट 17.79 सेकंड में दौड़ पूरी की।

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