टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 18/07/2022 दिन सोमवार को मोराबादी स्थित सुविधा बैंक्वेट हॉल में स्वामी सहजानंद सरस्वती विकास मंच की बैठक हुई, जिसमें युवाओं को स्वामी जी के बताए रास्ते पर चलने की बातें, समाज के लिए एकजुटता और संगठन का विस्तार पर चर्चा की गई। स्वामी जी का सारा जीवन अपने समाज, भूमिहार ब्राह्मणों की एकजुटता, सेवा और हिन्दू समाज के लिए बीत गया। आज युवाओं को स्वामी जी की जीवनी को पढ़ना चाहिए और उन्हें अनुसरण कर समाज जोड़ना चाहिए। आज इन्हीं सब विषयों पर चर्चा हेतु यह बैठक रखी गयी थी, जिसमें समाज के युवाओं के योगदान पर चर्चा हुई। आज की युवा पीढ़ी अपने समाज के लिए और अपने भाइयों-बहनों के लिए क्या कर सकते हैं इसपर चर्चा हुई। जिसमें सुविधा कैटरर और सुविधा बैंक्वेट के डायरेक्टर और संगठन के संरक्षक जसवंत पांडेय, संगठन के अध्यक्ष अजय सिंह, संगठन के महामंत्री शिव शंकर सिंह, सचिव रामकुमार, संगठन मंत्री आनन्द कुमार शाही, कोषाध्यक्ष विवेक, पारस, सुगन्ध, दिनेश सिंह, लकवकेश, नित्यानंद, सत्यनारायण, योगेंद्र, गिरिन्दर, दिनेश, अरविंद, विनोद, प्रकाश, रंजीत, राहुल, रमेश, रोहित, सत्यप्रकाश, शैलेश, नवलेश, मुकेश, सतेन्द्र, केदार समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए। रांची के विभिन्न स्थानों के 51 ब्रह्मर्षि युवाओं ने एक साथ सदस्यता ली। सभी सदस्यों को माला पहनाकर पदधारियों ने स्वागत किया। यह जानकारी स्वामी सहजानन्द सरस्वती विकास मंच के प्रवक्ता अशोक कुमार पांडेय ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रावण मास की पहली सोमवारी को लेकर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। रांची, देवघर, खूंटी समेत तमाम मंदियों में कांवरियों की भीड़ पहुंचने लगी है। देवघर में बाबा का जलाभिषेक करने को लेकर भक्तों में काफी उत्साह है। देवघर बाबा मंदिर में देश के कोने कोने से कांवरिया जुट रहे हैं। बिहार के सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने को लेकर भक्त पहुंच रहे हैं। शहर की गली-गली में बोलबम का नारा गूंज रहा है। श्रावण मास की पहली सोमवारी को लेकर उत्साह देवघर में दिखने लगी है। कांवरिया बताते हैं कि 2 साल के लंबे अंतराल के बाद बाबा को जलाभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इसको लेकर मन में काफी उत्साह है। खूंटी में भी श्रावणी मेला को लेकर आम्रेश्वर धाम में काफी भीड़ देखी जा रही है। सावन की पहली सोमवारी को लेकर यहां जलाभिषेक करने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। आमरेश्वरधाम धाम प्रबंध समिति और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं के जलार्पण के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। इससे पहले रविवार को बाबा आमरेश्वरधाम में श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया। छुट्टी का दिन होने के कारण लोग बड़ी संख्या में परिवार के साथ आमरेश्वरधाम पहुंचे थे। व्यवस्था और सुरक्षा का जायजा लेने के लिए एसडीओ जितेंद्र मुंडा, डीएफओ कुलदीप मीणा, नगर पंचायत कार्यपालक पदाधिकारी रवि प्रकाश समेत अन्य दंडाधिकारी आमरेश्वरधाम में मौजूद रहे। इसी क्रम में खूंटी से 100 कांवरियों का जत्था बाबानगरी देवघर के लिए रविवार को रवाना हुआ। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव की पहली पत्नी देवी सती ने जब अपने पिता के घर पर अपने पति शिव का अपमान होते देखा तो वो बर्दाश्त नहीं कर पाईं और राजा दक्ष के यज्ञकुंड में अपनी आहूति दे दी। इसके बाद उन्होंने हिमालय पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती के रूप में भी उन्होंने भगवान शिव को भी अपना वर चुना और उनकी प्राप्ति के लिए कठोर तप किया। सावन के महीने में ही भगवान शिव उनके तप से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद पार्वती का भगवान शिव के साथ विवाह हुआ। तब से ये पूरा सावन माह शिव और पार्वती दोनों का प्रिय माह बन गया। सोमवार का दिन महादेव और मां पार्वती को समर्पित होता है, ऐसे में उनके प्रिय माह सावन में पड़ने वाले सोमवार का महत्व कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। शिव भक्त सामान्यत: सोमवार का व्रत नहीं रखते, वो सावन के सोमवार का व्रत जरूर रखते हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। सावन का पहला सोमवार तमाम शिव भक्तों के लिए खास है। इसको लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सावन की पहली सोमवारी को राजधानी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। राजधानी के शिव मंदिर में भक्त सुबह से ही पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में सुबह 3:30 बजे से ही बाबा का पट खोल दिया गया है ताकि श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक कर सकें। पुजारी बताते हैं कि सोमवार को व्रत करने से भक्तों कि हर मनोकामना पूर्ण होती है। सोमवार के व्रत का भगवान शिव की आराधना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सोमवार का विशेष महत्व माना गया है। पहाड़ी मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों ने बताया कि करीब 2 साल के बाद पहाड़ी मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति मिली है। इतने दिन बाद उन्हें भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हो पा रहा है। मंदिर में आए भक्तों ने कहा कि इस वर्ष पूजा कर हम भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं जिस प्रकार से पिछला 2 वर्ष गुजरा है वैसी त्रासदी आने वाले समय में ना देखने को मिले। ऐसे हालात कभी उत्पन्न ना हो कि देश में मंदिरों को बंद करना पड़ जाए। वहीं पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुखदेव नगर थाना की पुलिस के साथ-साथ थाना प्रभारी ममता कुमारी डीएसपी प्रकाश सोय सहित विभिन्न पुलिसकर्मी लगातार सुरक्षा में तैनात हैं। सुरक्षा को लेकर डीएसपी प्रकाश सोए ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा का ख्याल रखा गया है जगह जगह पर पुलिस फोर्स तैनात किए गए हैं। वहीं ट्रैफिक व्यवस्था को भी पहाड़ी मंदिर के आसपास मजबूत रखा गया है। किसी भी तरह की कोई भी वाहन मंदिर परिसर के आसपास नहीं आने दी जा रही है ताकि जाम की समस्या ना बने। पुलिस प्रशासन के अलावा आरएसएस के कार्यकर्ता और वॉलिंटियर्स की भी तैनाती की गई है। मंदिर की सुरक्षा और श्रद्धालुओं को सुविधा देने में लगे सभी वॉलिंटियर्स को दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ जगह-जगह पर सीसीटीवी भी लगाये गये हैं ताकि कहीं भी किसी तरह की कोई चुक ना हो सके।
टीम एबीएन, रांची। राजा दक्ष और गणेश का माथा प्रत्यारोपण आज भी जीव विज्ञान के लिए कल्पना है। दो भिन्न योनियों का सर और धड़ का प्रत्यारोपण, ब्लड ग्रुप मिलान, मस्तिष्क का प्रत्यारोपण जो हजारों साल पहले शिव ने किया यह सच्चाई हो या व्यास की परिकल्पना लेकिन यह तो आगे भी हजारों साल तक नहीं होने वाला है। उक्त बातें पंडित रामदेव पांडेय ने कही। वह झारखंड की राजधानी रांची के बरियातू स्थित हाउसिंग कॉलोनी में आयोजित शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन व्यास मंच से उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिवमहापुराण में गणेश की उत्पत्ति एक कोशिका से है। आज भी प्रोटोजोवा ग्रुप के जीव एक कोशिश से उत्पन्न होते हैं। कार्तिक का जन्म शिव के वीर्य से हुआ, पर पृथ्वी अग्नि, जल, नार, छः कृतिकाएं, इनकी माता हुई।दस माताओं के गर्भ धारण से छः माथे वाले एक बालक का जन्म होना विज्ञान में आज भी असम्भव है। शिव नटराज भी है, जिनके डमरू बजाने से अक्षर का स्वर लहरी निकला है। शिव योगी और भोगी दोनों हैं। दण्ड देने की बात हुई तो अनन्य भक्त लंकेश को सौ सालों तक हिमालय में दबा कर रखा। तब लंकेश का नाम रावण पड़ा। शिव पुत्र गणेश का बाहुबल की भी परीक्षा लेते हैं। युद्ध करते हैं। शिव गृहस्थ हैं। एक पत्नीव्रत हैं। पार्वती को रमणीय बनाकर हृदय में रखा तो अन्य नारी गंगा को सर पर सुशोभित कर लिया। अपने पत्नी को हृदय में रखिए और दूसरी नारी को दिमाग में। घर गृहस्थी में आक्षेप नहीं आएगा। शिव साम्यवादी हैं। अपनी बरात में भूत, प्रेत, वैताल, लंगड़ा, खाना सबको लेकर जाते हैं। शिव सादा जीवन उच्च विचार के द्योतक हैं। सभी देवता अनन्त आसमान स्वर्ग में बिराजते हैं। पर शिव जमीन पर विराजमान हैं और बैल पर चढ़कर चलते हैं। जबकि पार्वती की सवारी सिंह है। जिससे यह प्रतीत हित है कि पत्नी को ताकतवर बनाकर रखो। भले बैल को डरना पड़े। सनातन संस्कृति पत्नी को ताकतवर बनाती है। देवी स्वरूप पूछता है पर अन्य कथित परदेशी धर्म तो पत्नी को तलाक के मुहाने पर खड़ा रखता है। कहता है स्त्री तुम्हारी खेत है। शिव सती की जुदाई, बेटे गणेश का डिसेबल होना भी स्वीकार कर जीवन जीने की सीख देते हैं। गणेश उत्तर भारत में पूजनीय हैं तो कार्तिक/ सुब्रमण्यम/ मुरुगन स्वामी दक्षिण में स्मरणीय हैं। इनका परिवार के साथ परिवार की सवारियों में नैसर्गिक विरोधाभास है, फिर भी शिव और इनका परिवार विश्व के सभी देव मण्डल में सर्वशक्तिमान होकर पूजे जाते हैं। परिवार प्रबंधन सीखना हो तो शिव से सीखें। परिवार के हर जन को क्षमतावान बनाओ। शिवपुराण के अनुसार सृष्टि का निर्माण कई हज़ार साल के बाद हुआ है। विज्ञान ने कहा है कि डेढ़ खरब साल के बाद सृष्टि का निर्माण हुआ है, जबकि विदेशी धर्म के पुस्तक में बताया गया कि सृष्टि तो छः दिनों में मैंने बनाया और बहुत तक गया। इसलिए तुलसी दास ने शिव को महाविज्ञानी कहा है।
टीम एबीएन, देवघर/रांची। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का आगाज हो चुका है। 2 साल बाद सावन के पावन महीने में एक बार फिर भक्त अपने भगवान से मिलने आ रहे हैं। सुल्तानगंज उत्तरवाहिनी गंगा से कांवर में जल लेकर पांव पैदल यात्रा करते हुए 105 किलोमीटर की दूरी तय कर बाबा नगरी पहुंचने वाले कांवरियों के अंदर गज़ब का उत्साह देखने को मिल रहा है। ऐसे में कावरियों की सुविधा को देखते हुए दुम्मा बॉर्डर से कुजुरिया तक कांवरिया पथ पर जगह-जगह इंद्र वर्षा के लिए सिस्टम लगाए गए हैं। कांवरिया पथ कांवरियों को गर्मी से राहत देने के लिए जिला प्रशासन ने एक तय दूरी पर इसकी व्यवस्था की है। दरअसल, पैदल यात्रा के दौरान कांवरियों को धूप लगती है ऐसे में इंद्र वर्षा के सिस्टम की मदद से आर्टिफिशियल बारिश करा कर कांवरियों को राहत देने की कोशिश की जाती है। कांवरिया भी इस वर्षा का जमकर आनंद लेते हैं। इंद्र वर्षा से कांवरियों को गर्मी से काफी राहत मिलती है। कांवरिया बताते हैं कि इंद्र वर्षा हम कांवरियों के लिए काफी राहत देने वाली व्यवस्था है। जब बारिश नहीं होती है तो धूप में चलने में काफी कठिनाई होती है तो इंद्र वर्षा के जरिए अपने शरीर को कुछ देर तक ठंडा करके आगे बढ़ते हैं। फिर कुछ ही दूरी के अंतराल पर फिर दूसरे इंद्र वर्षा से यह सुखद आनंद मिलता है, जो काफी राहत देने का कार्य करता है। कोरोना महामारी के कारण पिछले 2 वर्षों से श्रावणी मेला को स्थगित कर दिया गया था, जिससे बाबा भोलेनाथ के भक्त देव नगरी देवघर नहीं पहुंच रहे थे। वह इस वर्ष से श्रावणी मेला का आयोजन किया जा रहा है, जिससे भारी संख्या में कांवरिया देवघर बाबा बैजनाथ मंदिर पहुंच रहे हैं। ऐसे में कांवरियों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन तमाम व्यवस्थाओं में जुटी हुई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा है कि बिहार के फूलवारी शरीफ में पकड़े गए आतंकवादी मॉड्यूल से उजागर हुई पीएफआइ की गतिविधियों और उनके इरादों से पूरा देश चिंतित है। 2047 तक संपूर्ण देश को दारुल इस्लाम में परिवर्तित करने और देश को शरीयत के बर्बर कानूनों से संचालित करने का उनका लक्ष्य एक बड़े खतरे की ओर संकेत कर रहा है। यहां पर संपूर्ण देश के जेहादी युवक प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे अपने अपने प्रदेश में अराजकता, अशांति और आतंक फैलाने की योजनाओं को लागू कर रहे हैं। देशभर में रामनवमी, महावीर जयंती आदि की शोभायात्राओ के ऊपर हिंसक हमले; शाहीन बाग, शिव विहार, जहांगीरपुरी आदि में हिंसा का तांडव; लव जिहाद व हिंदुओं पर प्राण घातक हमलों का राष्ट्रव्यापी स्वरूप इनके षड्यंत्रों का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन सब आतंकी घटनाओं का केंद्रीय तंत्र से संचालित होना संपूर्ण देश की सरकारों के लिए एक चुनौती है। इसमें शामिल लोगों और उनके सहायकों पर ऐसी सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए जिससे कोई भी इनकी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित होने का सोच भी ना सके। डॉ जैन ने कहा कि पूरे देश में किसी भी सेकुलर नेता द्वारा, इस आतंकी माड्यूल की निंदा में, एक भी शब्द ना कहना, ज्यादा चिंता का विषय है। याकूब मेमन की फांसी को रुकवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने वाले, बटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों के लिए आंसू बहाने वाले और बुरहान वानी जैसे आतंकियों के समर्थन में कैंडल मार्च निकालने वालों के मुंह में, ऐसे मौकों पर, दही क्यों जम जाती है? ऐसे में अगर देश की जनता यह विश्वास करने लग जाती है कि जेहादी आतंकवाद छद्म सेकुलर नेताओं के सहयोग से ही पनप रहा है तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। सोनिया, राहुल समेत इन सब सैकूलर गैंग के नेताओं को यह जवाब देना होगा कि उनके लिए राष्ट्र-हित पहले हैं या उनके क्षुद्र निहित स्वार्थ? डॉ सुरेंद्र जैन ने बिहार सरकार की मंशा पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए पूछा कि कई वर्षों से चल रहे इस आतंकी प्रशिक्षण केंद्र को तभी क्यों पकड़ा गया जब माननीय प्रधानमंत्री के आगमन पर हमले की आशंका के कारण पुलिस बलों को अधिक सतर्क और सक्रिय होना पड़ा? तमिलनाडु व केरल जैसे, जिहादियों से त्रस्त प्रदेशों के जिहादियों को भी बिहार अधिक सुरक्षित क्यों लग रहा है? बांका, दरभंगा, अररिया, भागलपुर जैसे कई अन्य स्थानों पर पिछले कुछ वर्षों में 100 से अधिक बम विस्फोट हो चुके हैं। अनुसूचित जातियों की बस्तियों पर जिहादियों के द्वारा हमले तथा उन भाई बहनों पर कई प्रकार के अत्याचार लगातार हो रहे हैं। ऐसा लगता है कि बिहार जिहादियों की शरण स्थली और ब्रीडिंग सेंटर बन गया है। बिहार सरकार को भी आत्म विश्लेषण करना चाहिए और राष्ट्रघाती सेकुलर नीति को छोड़कर जिहादियों पर लगाम लगानी चाहिए। बिहार क्रांति की धरती है। कहीं ऐसा ना हो कि बिहार के राष्ट्रवादी समाज को इन जेहादीयों के विरुद्ध एक और क्रांति का शंखनाद करना पड़ जाए। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, दुमका/ रांची। पवित्र माह सावन का आज पहला दिन है। इसको लेकर प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। सुबह 4 बजे से ही भक्त भगवान भोले की अराधना में जुट गए हैं। मंदिर में सरकारी पूजा के बाद श्रद्धालु जलाभिषेक कर बाबा बासुकी की पूजा कर रहे हैं। सावन के पहले दिन पूजा के लिए भक्तों में इतना उत्साह था कि वे रात 2 बजे से ही मंदिर के बाहर लाइन में खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने के साथ ही हर हर महादेव और बोल बम के नारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। लोग अपने भगवान शिव की पूजा अर्चना में लीन हो गए। बाबा बासुकीनाथ मंदिर में संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी की गई है। श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं से लेकर भीड़ को नियंत्रित करने को लेकर खास इंतजाम किये गये है। वहीं, सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम है। दुमका एसडीएम महेश्वर महतो सुबह तीन बजे से ही बासुकीनाथ मंदिर में कैंप कर व्यवस्था की कमान संभाले हुए हैं। एसडीएम के साथ डीएसपी राम समद और अन्य अधिकारी भी मौजूद हैं।
टीम एबीएन, रांची। अपने उद्देश्य के अनुरूप मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा एवं मारवाड़ी युवा मंच महिला समर्पण रांची शाखा के संयुक्त तत्वाधान में आगामी 15 जुलाई 2022 से 18 जुलाई 2022 तक चार दिवसीय नि:शुल्क कृत्रिम पैर प्रत्यारोपण शिविर का उद्घाटन समारोह 15 जुलाई दोपहर 3 बजे मारवाड़ी भवन हरमू रोड में होगा। उद्घाटन समारोह में माननीय स्वास्थ्य मंत्री (झारखंड सरकार) बन्ना गुप्ता मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। उन्होंने मारवाड़ी युवा मंच द्वारा आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम में उपस्थित होने और जनसेवा से जुड़े प्रस्तावित कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की। उक्त जानकारी मारवाड़ी युवा मंच महिला समर्पण शाखा की मीडिया प्रभारी सरिता बथवाल और उपाध्यक्ष सह प्रवक्ता मारवाड़ी युवा मंच अमित शर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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