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Published / 2022-07-31 14:52:01
हरमू रोड के श्री श्याम मंदिर में मना खाटू श्याम का हरियाली तीज

टीम एबीएन, रांची। हरमू रोड स्थित श्री श्याम मंदिर में आज खाटू नरेश का हरियाली तीज पर्व अनुष्ठान का विविध कार्यक्रमों के साथ भक्तिमय वातावरण में भव्यता के साथ संपन्न हुआ। श्री श्याम मित्र मंडल के महामंत्री श्री विश्वनाथ नारसरिया ने बताया कि खाटू धाम के श्री श्याम मंदिर के अनुरूप आज हरमू रोड के श्री श्याम मंदिर में विराजमान सभी देवी देवता यथा श्री श्याम बाबा श्री शिव परिवार, श्री हनुमान जी, श्री लड्डू गोपाल, श्री शालिग्राम, श्री गरुड़ जी को हरियाली रंग का वस्त्र पहनाया गया। खाटू नरेश का केशर तिलक शृंगार किया गया। सुगंधित इत्र से श्याम सरकार का मसाज किया गया। खाटू नरेश को विभिन्न प्रकार के फूल रजनी, लाल गुलाब, तुलसीदल, मोती, बेली, गेंदा, जूही व हरियाली एरिलापता की मोटी-मोटी मालाओं से श्री श्याम दरबार को सजाया गया। मंडल के मंत्री श्री श्याम सुंदर शर्मा के सान्निध्य में झारखंड के प्रशिद्ध आचार्य अनूप दाधीच व रत्नाकर शर्मा मंदिर के चार अचार्यों ने बाबा का शृंगार किया। श्री शिव मंदिर में भी हरियाली शृंगार किया गया। कोलकाता से फूल मंगवाये गये थे। श्री शिव मंदिर को जमीन पर हरियाली पत्तों से शृंगार किया गया था। श्री नारसरिया ने बताया कि हरियाली तीज पर मंदिर में विशेष प्रसाद बनवाया गया। हरा परवल, केसरिया पेड़ा, भुजिया, चना दाल, मेथी सुहाली का प्रसाद मंदिर में विराजमान सभी देवी देवताओं को अर्पित किया गया। एक भक्त ने शृंगार व प्रसाद सेवा निवेदित की। संस्था ने पंचमेवा व आम का भोग निवेदित किया। सायंकाल में बाबा का दरबार दर्शन हेतु खोल दिया गया। जहां भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। भक्तों के बीच विशेष प्रसाद वितरित किया गया। मौके पर विश्वनाथ नारसरिया, श्रवण ढाढ़निया, श्याम सुंदर शर्मा, अनिल नारनौली, पंकज गाडोदिया, विकास मोदी, संजय सराफ, दा प्रवीण नारसरिया, प्रदीप मोदी, पवन गोयेनका, दिनेश अग्रवाल, रोशन खेमका, किशन शर्मा, आशीष डालमिया, सहित बड़ी संख्या में भगत्तगण उपस्थित थे। मंगलवार को होगा सुंदरकांड पाठ : श्री श्याम मित्र मंडल के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर 11वां श्री सुंदरकांड व श्री हनुमान चालीसा का संगीतमय पाठ मंगलवार 2 अगस्त 2022 को सायं 4.30 बजे से हरमू रोड के श्री श्याम मंदिर में होगा। उक्त जानकारी श्री श्याम मित्र मंडल के महामंत्री विश्वनाथ नारसरिया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-07-30 13:11:16
देश के 73% बच्चे सोशल मीडिया पर एक्टिव, इनमें 10 में से तीन अवसादग्रस्त

एबीएन सोशल डेस्क। कुछ दिन पहले यूपी के देवरिया में पबजी गेम के शौकीन लड़के ने अपने दादा को फंसाने के लिए छह वर्षीय मासूम की हत्या कर दी। मध्य प्रदेश में पोते ने दादा के लाखों रुपये गायब कर दिए। वहीं, लखनऊ में 16 वर्षीय लड़के ने अपनी मां की हत्या कर दी। विशेषज्ञ इन घटनाओं में आॅनलाइन गेम, सोशल मीडिया व इंटरनेट के घंटों इस्तेमाल से बच्चे व किशोरों में हिंसक व्यवहार होना मुख्य कारण मानते हैं। अध्ययन बताते हैं, सोशल मीडिया पर सक्रिय 10 में से तीन बच्चे अवसाद, भय, चिंता के साथ चिड़चिड़ेपन के शिकार हैं। किसी का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, तो कुछ बगैर फोन खाना तक नहीं खा पाते। बंगलूरू स्थित राष्ट्रीय मानसिक जांच एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) के अनुसार, देश के 73% बच्चे मोबाइल यूजर्स हैं। इनमें 30% मनोविकार से पीड़ित हैं। नई दिल्ली एम्स के मनोचिकित्सक डॉ. यतन पाल सिंह बताते हैं, उनके यहां महीने में 15 से 16 बच्चे काउंसलिंग के लिए आते हैं जिनमें से 90% तक मॉडरेट व क्रोनिक स्थिति वाले हैं। यानी लक्षण तीसरी या फिर चौथी स्टेज जैसे दिखाई दे रहे हैं। आॅनलाइन एडिक्शन : लक्षण- अगर कोई स्क्रीन के सामने लंबा वक्त बिता रहा है तो यह एक बड़ा लक्षण है। परफॉर्मेंस घटना, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, धैर्य खोना, गुस्सा आना। एम्स क्लीनिक में साइबर बुलिंग के मामले भी आ रहे, पीड़ितों में लड़कियां सबसे अधिक, 10 में से एक किशोर साइबर बुलिंग का शिकार। चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) के अध्ययन के अनुसार, दिल्ली जैसे महानगरों में 10 में से एक किशोर साइबर बुलिंग का शिकार है। साइबर स्टॉकिंग के मामले बढ़े : 2017- 542, 2018- 739. सजा की दर घटी :2017- 40%, 2018- 25%. निम्हांस के अनुसार, हर सप्ताह देशभर में मनोचिकित्सकों के पास सोशल मीडिया की लत से परेशान औसतन 10 मामले पहुंचते हैं, जिनमें 12 साल से भी कम उम्र के हैं। साइबर बुलिंग : टारगेट पर ज्यादातर लड़कियां- दिल्ली एम्स में हर शनिवार संचालित क्लीनिक में साइबर बुलिंग के मामले आ रहे हैं। इनमें अधिकांश कॉलेज छात्राएं हैं। आॅनलाइन स्टडी एंड इंटरनेट एडिक्शन अध्ययन के अनुसार, 50% से ज्यादा साइबर बुलिंग के मामले दर्ज नहीं होते क्यूंकि लड़कियां अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाती हैं और धीरे-धीरे अवसाद से ग्रस्त होने लगती हैं। यहां से शुरू होती है बच्चों की चिंता : सोशल प्लेटफॉर्म पर खुद को टैग नहीं किए जाने, वॉट्सग्रुप ग्रुप से रिमूव होने, पोस्ट पर लाइक्स या शेयर नहीं बढ़ने से चितिंत हो रहे हैं। बार-बार फोन चैक करना। सोशल मीडिया पर दूसरों की पोस्ट देखना और इसी दुनिया पर भरोसा कर लेना। खुद से पूछिए ये सवाल... क्या आॅनलाइन वीडियो, साइट्स पर घंटों बिता रहे हैं? आपका पढ़ाई या किसी काम में मन नहीं लग रहा? जल्दी संयम खो देते हैं। बात-बात पर गुस्सा आता है? अगर इनका जवाब हां है तो सचेत हो जाएं। देश का पहला क्लीनिक निम्हांस में : इंटरनेट के लतखोर बच्चों-किशोरों की काउंसलिंग के लिए निम्हांस में देश का पहला क्लीनिक शुरू हुआ। देश में स्मार्टफोन औसतन 10 साल की उम्र में बच्चे को मिलता है। इनमें से 12 वर्ष की उम्र तक 50% बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग करने लग जाते हैं।

Published / 2022-07-29 17:38:46
बाबा धाम : श्रावण में 16 लाख भक्तों ने चढ़ाये डेढ़ करोड़

टीम एबीएन, देवघर/रांची। झारखंड के देवघर स्थित बाबा धाम में कोरोना के कारण 2 वर्षों बाद इस वर्ष 14 जुलाई से प्रारंभ हुए श्रावणी मेले में बाबा के दर्शन करने अब तक लगभग 16 लाख श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। इन श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में कुल 1 करोड़, 58 लाख, 14 हजार, 70 रुपए मूल्य का कुल चढ़ावा चढ़ाया है। देवघर के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर में इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है तथा भक्त बड़ी संख्या में सोने और चांदी के सिक्के तथा नकदी भी बाबा के दरबार में चढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई से प्रारंभ श्रावण मेले में पहले 13 दिनों में 26 जुलाई तक कुल 15,79,269 श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में जलाभिषेक किया। इस दौरान कुल 37,038 भक्तों ने टिकट खरीद कर "शीघ्रदर्शनम" सुविधा का लाभ उठाया। वहीं भजंत्री ने बताया कि मंदिर प्रशासन ने भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने और चांदी के सिक्कों तथा शीघ्र दर्शनम् के टिकटों से कुल 92 लाख, 84 हजार रुपए प्राप्त किए। इस बीच मंदिर की पंडा समिति के देवनाथ पंडा ने बताया कि इस वर्ष भक्तों में अन्य वर्षों की तुलना में असीम उत्साह दीख रहा है।

Published / 2022-07-29 06:50:13
...आखिर माता पार्वती ने अपना ही मस्तक क्यों काटा?

एबीएन सोशल डेस्क। एक समय की बात है। माता पार्वती जी अपनी सहेली जया और विजया के साथ सुन्दर मंदाकिनी नदी के किनारे पर स्नान करने के लिए गई। तीनों स्नान करके बाहर आकर बालू-मिट्टी के शिवलिंग का निर्माण कर पूजन किया। फिर विसर्जन किया। उसके बाद माता और जया-विजया टहलने लगे। टहलते-टहलते जया-विजया को बहुत ही जोर की भूख लगी। उन दोनों ने माता पार्वती से भोजन मांगा। परन्तु माता ने उन्हें प्रतीक्षा करने को कहा। इस प्रकार जया विजया बार-बार भोजन मांगती और माता बार-बार प्रतीक्षा करने हेतु कहती। जब भूख असहनीय हो गई, तब जया-विजया ने करूणा भरे वचन से बोली। माता बच्चे को भूख लगने पर अपने बच्चों को तुरंत भोजन देती है। लेकिन आप तो हमें बार-बार प्रतीक्षा हेतु कहती है। आप तो अन्नपूर्णा है, फिर भी आप ऐसा क्यों कहती है? माता जया विजया के ऐसा करूण भरे वचन सुनकर माता पार्वती की आंख में आंसू आ गये और उसने तुरंत अपना सिर से धड़ को अलग कर दिया। उनका सिर कट कर उनके बाएं हाथ में आ गिरा और धड़ से 3 धाराएं निकली, जिससे दो धाराएं माता ने सखियों की ओर प्रवाहित किया और तीसरी धारा माता स्वयं पीने लगी। इस प्रकार दोनों सखियां प्रसन्न हो गई। तभी से माता का नाम छिन्नमस्तिका पड़ गया। मां पार्वती के जैसा कोई दयालु देवता या देवी नहीं है, जो अपने बच्चों के लिए अपने मस्तक तक को काट लेती है और मां ही एक ऐसी होती है जो अपने बच्चों को नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करती है। मां की ममता हमेशा हम बच्चों पर बनी रहे। जो अपने दोनों हाथों में तलवार और अपनी कटी हुई मस्तक धारण करती है। अपने भक्तों के लिए सदा वरदायनी रहती है, जो ममता और करूणा की देवी है। जिसने कामदेव और रति को अपने पैरों तले दबाये हुए है। जिसके अगल बगल जया-विजया है। वो छिन्नमस्तिका दुर्गा देवी हमें मंगल प्रदान करें और सबका कल्याण करें।

Published / 2022-07-28 17:22:34
जिहादी हिंसा के विरुद्ध किसी उग्र प्रतिक्रिया की जिम्मेदारी हिंदू समाज की नहीं : मिलिंद परांडे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक में दक्षिण कन्नड़ जिले में प्रवीण नेत्तारू की हत्या समेत हाल ही में हुए जिहादी हिंसा के सभी केस फास्ट ट्रैक अदालतों में चलाए जाने चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों और हिंदू समुदाय को न्याय शीघ्र सुनिश्चित हो सके। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने बयान जारी कर यह मांग की है। श्री परांडे ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को फास्ट ट्रैक न्यायालय बनाने पर तुरंत विचार करना चाहिए। उनके अनुसार कि जिहादी मानसिकता यदि ऐसी हिंसा करती रहेगी, तो हिंदू समाज में प्रत्यक्ष आक्रोश बढ़ेगा और स्वाभाविक तौर पर उग्र प्रतिक्रिया भी होगी। यदि ऐसा हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी हिंदू समाज की नहीं होगी। उन्होंने दोहराया कि विश्व हिंदू परिषद और उसकी युवा शाखा बजरंग दल ने प्रांतीय स्तर पर हैल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। यदि किसी को हिंसा की धमकी मिलती है, तो पुलिस से शिकायत करने के साथ ही कानूनी और सभी आवश्यक सहायता के लिए उन नंबरों पर तत्काल संपर्क करें। विहिप हिंदू समुदाय के साथ सदैव खड़ा रहा था, खड़ा है और खड़ा रहेगा। श्री परांडे ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अब तय करना पड़ेगा कि उसे कौन सा नेतृत्व स्वीकार है, मदनी और औवैसी का या फिर कलाम और अश्फाक उल्ला का। मुस्लिम समुदाय को अतिवादियों व आतंकी मानसिकता को कौम से बाहर का रास्ता दिखाना होगा अन्यथा उनकी कथनी व करनी का अंतर बना ही रहेगा। जमाते इस्लामी जैसे संगठन दोहरा मानदंड अपनाते हैं। एक ओर वह सिर तन से जुदा करने व बम विस्फोट करने वालों के समर्थन में खड़ा होता है तो वहीं वह कावड़ियों को जलपान कराने का नाटक भी करता है। श्री परांडे ने यह भी कहा कि जिहादी हिंसा को बढ़ावा देने वाली, उकसाने और भड़काने वाली सामग्री का प्रचार-प्रसार इंटरनेट के माध्यम से किया जा रहा है। ऐसी सारी सामग्री इंटरनेट पर प्रसारित किए जाने पर संपूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। श्री परांडे ने कहा कि नेपाल से दिल्ली तक टैरर कॉरीडोर बनाने का षड्यंत्र सामने आ चुका है। ऐसे में उसे ध्वस्त करने के लिए केंद्र सरकार को हरसंभव प्रयास करने चाहिए। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-07-28 17:10:25
बाबा आम्रेश्वर धाम : श्रावणी मेला से सभी संप्रदाय के लोगों को मिलता है रोजगार

टीम एबीएन, रांची। छोटानागपुर का मिनी बाबा के रुप में विख्यात बाबा आम्रेश्वर धाम न केवल हिंदुओं के आस्था का केंद्र है बल्कि भोले नाथ ने यहां एक महीने तक लगने वाला श्रावणी मेला में हजारों लोगों  को रोजगार का साधन भी प्रदान किये हैं। धाम परिसर में सभी समुदाय के लोग भी दुकानें खोलकर जमे रहते हैं तथा हर किसी को रोजी-रोटी मिलती है। आम्रेश्वर धाम में पूजा की सामग्रियों के अलावे प्राय: सभी तरह की दुकानें सजी हुई हैं। मेले में डिजनीलैंड लग गया है जहां श्रद्धालु पूजा-पाठ करने के पश्चात मनोरंजन करते हैं। प्रबंधन समिति के मुताबिक, श्रावणी मेले में चार सौ दुकानें लग गयी हैं। धाम परिसर स्थित चिल्ड्रेन पार्क में मेले में अपने परिजनों के साथ आने वाले बच्चे भ्रमण कर मनोरंजन का लुत्फ उठाते हैं। आम्रेश्वर धाम प्रबंध समिति के अनुसार, पावन सावन माह के 15वें दिन आज लगभग 10,000 शिवभक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। धाम परिसर में जिला प्रशासन एवं प्रबंधन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था है। लोगों  की गतिविधियों की निगरानी हेतु धाम परिसर में जगह-जगह सीसी टीवी कैमरे लगे हैं। पुलिस पिकेट बनाया गया है। खोया-पाया केन्द्र  स्थापित है। श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इस हेतु  प्रबंध समिति के वोलेंटियर सक्रिय रहते हैं। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, खूंटी द्वारा श्रावणी मेले में आयोजित प्रदर्शनी शिविर के माध्यम से लोगों को विविध सरकारी योजनाओं, विभिन्न पर्यटन स्थलों सहित मेला सबंधित  जानकारी व सूचनाएं दी जा रही है। वहीं एलईडी वैनों के माध्यम से वीडियो का प्रदर्शन कर जिले के विविध पर्यटन स्थलों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

Published / 2022-07-28 12:16:02
मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को स्वस्थ बनाता है योग : स्वामी मुक्तरथ

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 28 जुलाई को विद्या भारती मेमोरियल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी तुपुदाना में डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग के सिविल डिपार्टमेंट के छात्रों को आचार्य मुक्तरथ जी ने प्राणायाम और मेडिटेशन का अभ्यास कराया। इन छात्रों को कपालभाति और नाड़ीशोधन के साइंटिफिक लाभ को बताया गया। कपालभाति की क्रिया में जब हम फोर्सफुल्ली श्वांस को छोड़ते हैं तो वह फ्रंटल मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है जिससे एकाग्रता बढ़ती है। पिट्यूटरी ग्रन्थि स्वस्थ बनता है स्मरण शक्ति तेज होती है और आज्ञा चक्र का जागरण होता है। वहीं अनुलोम-विलोम की क्रिया जिसे नाड़ीशोधन प्राणायाम कहा जाता है। इस क्रिया में जब हम होशपूर्वक बायें नाशिका से श्वांस लेकर दायें नाशिका से छोड़ते हैं और फिर दायें नाशिका से श्वांस लेकर बायें से छोड़ते हैं तो यह हमारे पूरे नाड़ीतंत्र पर प्रभाव डालता है और खास कर मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को स्वस्थ बनाता है, उसके तनाव को खत्म करता है जिससे कि मस्तिष्क की क्षमता में वृद्धि होती है। मन नियंत्रित होता है और सुषुम्ना नाड़ी में प्राण का प्रवाह तेज होता है। यह भी आज्ञा चक्र को जागृत करता है। दोनों ही प्राणायाम अवसाद को दूर करता है। चिंता और क्रोध को दूर करता है और मानसिक रोग से हमें सुरक्षित रखता है।

Published / 2022-07-27 13:27:21
सिद्धनाथ तीर्थ के रूप में विख्यात है बिहार का बराबर सिद्धेश्वरनाथ मंदिर

एबीएन सोशल डेस्क। वैसे तो संपूर्ण देश में अनेक प्राचीन शिव मंदिर हैं। परंतु जब बात प्राचीनतम शिव मंदिर की हो तो मगध के बराबर पहाड़ पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर का नाम सर्वप्रथम आता है। इसे सिद्धनाथ तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है। महाभारत कालीन जीवंत कृतियों में से एक यह मंदिर आज भी पुरातन शिल्पकृतियों में महिमामंडित प्राचीन आदर्शों से युक्त पूजन परंपरा को जीवित रखे हुए है। बराबर पहाड़ के शिखर पर अवस्थित सिद्धेश्वरनाथ को नौ स्वयंभू नाथों में प्रथम कहा जाता है। इनकी पूजन कथा शिवभक्त वाणासुर से संबंधित होने के कारण इसे ‘वाणेश्वर महादेव’ भी कहा जाता है। मंदिर तक जाने के लिए सीढीयां भी बनी हुई है। बराबर पर्वत भारतवर्ष के पुरातन ऐतिहासिक पर्वतों में एक है। 1100 फुट ऊंचे बराबर पर्वत को मगध का हिमालय भी कहा जाता है। यहां सात अदभुत गुफाएं भी बनी हुई है। जिनका पता अंग्रेजों के कार्यकाल में चला । इनमें से चार गुफाएं बराबर गुफाएं एवं बाकी तीन नागार्जुन गुफाएं कहलाती है। भारत में पहाड़ों को काट कर बनाई गयी ये सबसे प्राचीन गुफाएं है। पर्यटन के लिहाज से भी ये काफी उपयुक्त स्थान है। ये पर्वत सदाबहार सैरगाह के रूप में प्राचीन काल से ही चर्चित है। किंवदंतियों के अनुसार पर्वत पर बनी गुफाएं प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के ध्यान साधना लगाने हेतु सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाई गई थी। गया-जहानाबाद सीमा पर अशोककालीन गुफाओं में कर्ण चैपर गुफा, सुदामा गुफा, लोमस ऋषि गुफा, नागार्जुन गुफा सहित सात गुफायें हैं। गौरतलब है कि कर्ण चैपर, सुदामा और लोमस ऋषि गुफा एक ही चट्टान को काटकर बनाई गई हैं। देखने में अद्भुत लगने वाली ये गुफाएं प्राचीन समय की कलाकारी को दशार्ती हैं। गुफा के भीतर तेज आवाज में चिल्लाने पर काफी देर तक प्रतिध्वनियों को सुनकर आने वाले पर्यटक काफी रोमांचित होते हैं। सुदामा गुफा : सुदामा गुफा का निर्माण सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के बारहवें वर्ष में आजीवक साधुओं के लिए बनवाया था। इस गुफा में एक आयताकार मण्डप के साथ वृत्तीय मेहराबदार कक्ष बना हुआ है। लोमस गुफा : लोमस ऋषि की विख्यात गुफा का निर्माण भी अशोक ने था। इन गुफाओं का निर्माण मिश्र शैली में किया गया है तथा उस समय के भारतीय कारीगरों के उत्कृष्ट कलाकारी एवं वास्तु विशेषज्ञता का परिचायक है। मेहराब की तरह के आकार वाली ऋषि गुफाएं लकड़ी की समकालीन वास्तुकला की नकल के रूप में हैं। द्वार के मार्ग पर हाथियों की एक पंक्ति स्तूप के स्वरूपों की ओर घुमावदार दरवाजे के ढांचों के साथ आगे बढ़ती है। यहां कई गुफाओं के अंदर भी गुफाएं है जहां तक पहुंचना काफी मुश्किल है। कर्ण चैपर गुफा : यहां मौजूद कर्ण चैपर गुफा को सुप्रिया गुफा भी कहा जाता था। अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 19वें वर्ष में इसका निर्माण कराया था। उस समय के लिखे गये शिलालेख आज भी यहां मौजूद हैं। शिलालेखों के अनुसार इस पहाड़ी को सलाटिका के नाम से भी जाना जाता था। इन गुफाओं का निर्माण भी मिश्र शैली से किया गया है। यहां चिकनी सतहों के साथ एक एकल आयातकार कमरे का रूप बना हुआ है। वापिक गुफा : पहाड़ के ऐतिहासिक सप्त गुफाओं में बनी वापिक गुफा में अंकित तथ्यों से ज्ञात होता है कि इसकी स्थापना योगानंद नामक ब्राह्मण ने की थी। मंदिर परिक्षेत्र में पाषाण खड़ों पर की गयी उत्कीर्ण कलाकृति इस पूरे क्षेत्र को प्राचीन शिव अराधना क्षेत्र के रूप में स्थापित करती है। एक अन्य मत के अनुसार आदिकाल में कौल संप्रदाय का मगध पर जो वर्चस्व था, उसका केन्द्र इसी पर्वत को बताया जाता है। इसकी उत्पत्ति ई।पू. 600 के लगभग मानी जाती है। इन्हें दशरथ द्वारा आजीविका के अनुयायियों को समर्पित किया गया था। विश्व जोपरी : विश्व जोपरी गुफा में दो आयातकार कमरे मौजूद हैं जहां चट्टानों को काटकर बनाई गई अशोका सीढियां द्वारा पहुंचा जा सकता है। नागाजुर्नी गुफाएं : नागार्जुन के आसपास की गुफाएं बराबर गुफाओं से छोटी एवं नयी है। गोपीका गुफा और वापिया का गुफा लगभग 232 ईसा पूर्व में राजा दशरथ द्वारा आजीविका संप्रदाय के अनुयायियों को समर्पित की गई थी। गोपिका गुफा : बारबर पहाड़ में अवस्थित इन गुफाओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। जिस विशाल चट्टान को खोदकर गुफाएं बनाई गई है उस पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। अक्सर पर्यटक यहां पिकनिक मनाने आते है। वैसे यहां सालों भी भक्तगण व पर्यटक आते रहते हैं लेकिन श्रावण मास, बसंत पंचमी एवं महाशिवरात्री अनंत चतुदर्शी में भक्तों व पर्यटकों का आगमन बड़ी संख्या में होता है।

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