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Published / 2022-09-11 10:54:42
मकर संक्रांति 2024 से गर्भगृह में रामलला का दर्शन कर सकेंगे आमजन, 40% काम पूरा

एबीएन सोशल डेस्क। अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है। दिसंबर 2023 तक मंदिर निर्माण और जनवरी 2024 में मकर संक्रांति पर भगवान श्री रामलला विराजमान होने का अनुमान है। मंदिर निर्माण को लेकर आज राम मंदिर ट्रस्ट की दो दिनों की बैठक होने वाली है। बैठक से पहले मंदिर निर्माण की जानकारी देने वाले एक वीडियो ट्रस्ट की ओर से जारी किया गया है। मंदिर का 40 फीसदी काम पूरा : एक रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर का 40 फीसदी से भी ज्यादा का काम पूरा हो चुका है। मंदिर निर्माण ट्रस्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 तक मंदिर निर्माण का कार्य पूरा होने की उम्मीद है। साल 2024 की जनवरी की मकर संक्रांति पर भगवान श्री रामलला विराजमान होंगे। यानी 2024 में भगवान राम के भक्तों के सैकड़ों साल का इंतजार खत्म होने की उम्मीद है। मंदिर निर्माण की इन्हीं तैयारियों को लेकर आज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक होने जा रही है। दो दिनों तक होने वाली इस बैठक में मंदिर के गर्भगृह निर्माण के कार्य योजना पर अंतिम मुहर लगाई जायेगी। साथ ही राम जन्मभूमि परिसर में यात्री सुविधा केंद्र बनाये जाने और सुरक्षा के बीच उसके संचालन की व्यवस्था पर मंथन किया जायेगा। वहीं मंदिर निर्माण के साथ श्रद्धालुओं के लिए नए मार्ग का भी निर्माण शुरू हो गया है और आने वाले राम नवमी पर नए मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जायेगा। 2024 मकर संक्रांति पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु राम मंदिर गर्भगृह में भगवान श्री रामलला का दर्शन करेंगे। यही कारण है इस बार होने वाली ट्रस्ट की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में लिए गए फैसलों की रिपोर्ट भी पीएमओ को भेजी जायेगी इसलिए पूर्व आईपीएस अधिकारी और निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र समेत 11 सदस्य इस बैठक में शामिल होंगे।

Published / 2022-09-10 16:16:19
भागवत कथा का हर प्रसंग मनुष्य के चरित्र को सुधारता है : जया किशोरी

टीम एबीएन, लोहरदगा। श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन पूज्या जया किशोरी जी के कार्यक्रम स्थल व्यास मंच में आगमन होते हीं भक्तों के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने पूज्या जयाकिशोरी जी को अंगवस्त्र प्रदान कर एवं पगड़ी पहनाकर अभिनन्द किया। साहू परिवार ने ठाकुर जी की पूजा अर्चना और आरती किया। भजन जय जय राधा रमन, हरी बोल, जय जय राधा रमन, हरी बोल, हरी बोल हरी बोल, हरी बोल हरी बोल, हरी बोल हरी बोल, हरी बोल हरी बोल के साथ श्रीमद्भागवत कथा प्रारंभ की गई। भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग मनुष्य के चरित्र और स्वभाव को सुधारता है। जया किशोरी जी ने कथा वाचन करते हुए बतलायी कि कथा श्रवण करने पर श्री कृष्ण के प्रति प्रेम न हो, पाप से घृणा ना जागे, धर्म के प्रति प्रेरित ना हो तो ये समझना कि आपने कथा सुनी ही नहीं। पाप, कर्मों का नाश करती है कथा, प्रेम को बढ़ाती है कथा। पहले हम अपने मन को सुधारें, फिर जगत को सुधारने निकले। अपने चरित्र से यदि अपनी आत्मा को संतोष मिले तभी मानो कि तुम्हारा स्वभाव सुधरा है।भगवान की रासलीला का वर्णन करते हुए उसने कहा कि भगवान की रासलीला भक्त और भगवान का मिलन आत्मा और परमात्मा का मिलन है। इस रासलीला को कामदेव असफल नही कर सका। जिस रासलीला को देखने भगवान शंकर गोपी बनकर के आए हो उस अध्यात्मिकी पराकाष्ठा वाली भगवान की रासलीला का इस भौतिक युग में मजाक उड़ाने वाले हमारी आस्था संस्कृति और देश का मजाक बना रहे है। रासलीला का अर्थ ना जानने वाले मूर्ख है। उसके अर्थ का अनर्थ करने वाले पापी है। परमपिता परमेश्वर ने हजारों सालों से तपस्या करने वाले बड़े-बड़े ऋषियों को वरदान दिया था इस अवतार में वे गोपी बनेगी ओर भगवान के साथ साथ भक्ति, नृत्य अर्थात रासलीला करेंगे। कथा प्रसंग में मथुरा से कृष्ण जी का आमंत्रण, कृष्ण का मथुरा जाना और कुब्जा का उद्धार करना तथा कंस वध करने का वर्णन किया। सांदीपनि आश्रम उज्जैन में शिक्षा अर्जन, वहीं सुदामा से मैत्री का वर्णन करते हुए उसने कहा कि जीवन में दरिद्रता का कारण वही बनता है, किसी के हक को खाना। भगवान के प्रति भक्ति रखने वाले भी छोटे से अपराध का बड़ा दुख प्राप्त करते है तो हम मनुष्य किस गिनती में आते है हमें गोपी की तरह प्रेम, नंद बाबा की तरह दुलार और यशोदा की तरह वात्सल्य रखना होगा। भगवान को किसी भी रूप में मानो परंतु भगवान से प्रेम करो। उद्धव प्रसंग में श्रीकृष्ण ने उद्धव की ज्ञान भक्ति के अंहकार को दूर किया और भगवान कृष्ण के प्रति गोपियों की प्रेम को दिखाया। यही भक्ति अंत में रूक्मणि और श्रीकृष्ण की विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए आपने कहा कि पति तो पति ही होता है, वो पति परमेश्वर तभी बन सकता है जब परमेश्वर जैसा काम करे पत्नी संग सच्ची प्रेम करें। इस दौरान रुक्मणी विवाह की सुंदर सी झांकी प्रस्तुत की गई।जया किशोरी ने कहा श्रीकृष्ण के संग रुक्मिणी विवाह धूमधाम से रचाया गया। इस अवसर पर कथा स्थल में विशेष धुन बजाते गए। पंडाल परिसर में बारात निकली। कथा वाचिका जया किशोरी ने श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच गीत अध्याय हैं। जिसे भागवत के पंच प्राण भी कहते हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भवपार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, ऊधो-गोपी संवाद, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। विवाह उत्सव में भगवान कृष्ण की बारात धूमधाम से निकाली। गणेश मंडल के युवाओं ने भगवान कृष्ण की बरात में भजनों पर खूब नृत्य किया। कथा पंडाल में पहुंचकर कृष्ण रुक्मिणी विवाह रचाया गया। श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में स्थानीय सांसद सुदर्शन भगत, झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, साहू परिवार से शैफाली साहू, अरुणा साहू, उदय शंकर प्रसाद, धीरज प्रसाद साहू, सरिता साहू, मनु साहू, राहुल साहू, वंदना साहू, दुर्गेश साहु, हर्षित साहू, रुचि साहू, राजश्री साहू, हंसा साहू, सबिता साहु, सौरभ साहु, शेरी मुनी साहू, मिली साहु, रितेश साहू, नवीन गुप्ता, दिनेश साहू, मदन मोहन शर्मा, सचिदा चौधरी, दिल्ली से राजश्री कुमार, अजय महासेठ, शालिनी महासेठ रांची डॉ अनूप साहू, अशोक यादव, सुखैर भगत, राजेन्द्र खत्री, ओमप्रकाश सिंह, मनोज प्रसाद, हनुमान राजगड़िया, संदीप कुमार, अरुण राम, राहुल कुमार, बलवीर देव, कृष्ण मोहन केशरी, कैलाश केशरी, उर्मिला केशरी, सतीश जयसवाल, राकेश सिंह, अनिता पोद्दार गुस्सा में सजा 10,000 से हाथी भागवत प्रेमियों की मौजूदगी और जयकारे ने श्रीमद् भागवत कथा के छठवें को ऐतिहासिक बना दिया।

Published / 2022-09-09 16:31:35
पितृपक्ष में पिंडदान : जानें गया में पिंडदान से जुड़ी मान्यताएं...

एबीएन सोशल डेस्क। बिहार की धर्मनगरी गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले की शुरूआत हो गई है। धार्मिक महत्व के कारण गया को श्रद्धालु ‘गया जी’ भी कहते हैं। गया के पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से हजारों की संख्या में पिंड दानी अपने पूर्वज का पिंड दान करने गया जी आते हैं और तर्पण के माध्यम से उन्हें तृप्त करते हैं। गया जिसे विष्णु नगरी कहा जाता है वहां के बारे में मान्यता है कि वैदिक परंपरा और हिंदू मान्यताओं के अनुसार पितरों के लिए श्रद्धा से श्राद्ध करने पर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। गया में इस वर्ष पिंडदान करने आने वाले श्रद्धालु सूखी फल्गू नदी में नहीं बल्कि कल-कल बहती फल्गू के जल से अपने पूर्वजों का तर्पण और आचमन कर सकेंगे। गया में भारत का सबसे बड़ा ‘गया जी’ रबर डैम बनाया गया है। जिसके बाद फल्गू नदी में अब 10 फीट तक पानी है। गुरुवार को सीएम नीतीश कुमार ने इसका उद्गाटन किया। भगवान राम ने भी किया था यहां पिंडदान : कहा जाता है कि भगवान राम और सीताजी ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए गया में ही पिंडदान किया था। गया में पहले विभिन्न नामों की 360 वेदियां थीं, जहां पिंडदान किया जाता था। इनमें से अब 48 ही बची हैं। इन्हीं वेदियों पर लोग पितरों का तर्पण और पिंडदान करते हैं। पिंडदान के लिए प्रतिवर्ष गया में देश-देश-विदेश से लाखों लोग आते हैं। पितृ पक्ष में पिंडदान पूर्वजों और उनके दिए संस्कारों को याद करने का संकल्प है। इसमें पितरों (पूर्वजों) को तर्पण यानी जलदान और पिंडदान यानी भोजन का दान श्राद्ध कहलाता है। गया पिंडदान के लिए सबसे पवित्र भूमि माना गया है। यहां श्राद्ध व तर्पण से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि मृत्यू के बाद भी भौतिकवादी दुनिया और परिजनों के लगाव की वजह से आत्मा यहीं कहीं रह जाती है इससे आत्मा को कई तरह के कष्ट भोगने पड़ते हैं। तब उन्हें मुक्ति दिलाने के लिए पिंड दान से कराया जाता है। गयाजी इसके लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम और मां सीता ने भी यही राजा दशरथ का पिंडदान किया था।

Published / 2022-09-08 15:23:41
89 साल की हुई आशा भोंसले

एबीएन डेस्क। बॉलीवुड की जानीमानी पार्श्वगायिका आशा भोंसले आज 89 वर्ष की हो गयी हैं। 08 सितम्बर 1933 महाराष्ट्र के सांगली गांव में जन्मीं आशा भोंसले के पिता पंडित दीनानाथ मंगेश्कर मराठी रंगमंच से जुड़े हुए थे। नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही आशा के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी को उठाते हुए आशा और उनकी बहनलता मंगेश्कर ने फिल्मों में अभिनय के साथ साथ गाना भी शुरू कर दिया। आशा भोंसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में सावन आया फिल्म चुनरिया में गाया । सोलह वर्ष की उम्र मे अपने परिवार की इच्छा के विरूद्ध जाते हुये आशा ने अपनी उम्र से काफी बड़े गणपत राव भोंसले से शादी कर ली । उनकी वह शादी ज्यादा सफल नही रही और अंतत: उन्हे मुंबई से वापस अपने घर पुणे आना पड़ा। वर्ष 1957 में संगीतकार ओ.पी.नैय्यीर के संगीत निर्देशन में बनी निमार्ता-निर्देशक बी.आर.चोपड़ा की फिल्म नया दौर आशा भोंसले के सिने कैरियर का अहम पड़ाव लेकर आई ।वर्ष 1966 में तीसरी मंजिल में आशा भोंसले ने आर.डी.बर्मन के संगीत में आजा आजा मै हू प्यार तेरा गाना को अपनी आवाज दी जिससे उन्हे काफी प्रसिद्वि मिली।

Published / 2022-09-08 05:55:10
विभूति भूषण की 128वीं जयंती पर सुबर्नशिला सम्मान की शुरुआत

टीम एबीएन, जमशेदपुर/रांची। घाटशिला स्थित विभूति स्मृति संसद बांग्ला के सुप्रसिद्ध कथाकार विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के नाम पर स्थापित एक सांस्कृतिक केंद्र है। इस वर्ष विभूति भूषण की 128वीं जयंती पर संस्था ने इस वर्ष से विविध साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए विविध भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित करने के निमित्त सुबर्नशिला सम्मान की शुरुआत की है। यह प्रथम सुबर्नशिला सम्मान है। यह हिंदी भाषा में देश के महत्वपूर्ण समकालीन हस्ताक्षर रणेंद्र जी को, जिनके ग्लोबल गांव के देवता, गायब होता देश, गूंगी रुलाई का कोरस जैसे महत्वपूर्ण उपन्यास समकालीन हिंदी कथा साहित्य में अपनी भाषा, विषय और विजन के लिए रेखांकित किये गए हैं, दिया जा रहा है। साथ ही बंगला भाषा के दो अन्य कथाकारों निसार आमीन और अजीत त्रिवेदी को भी इस वर्ष का सुबर्नशिला सम्मान दिया जायेगा। इस साहित्यिक आयोजन में विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के साहित्य पर विमर्श सत्र आमार चोखे बिभूति भूषण आर झारखंडे बांग्ला भाषार दोशा भी आयोजित है। विभूति भूषण के साहित्य पर वैचारिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप कोलकाता से वरिष्ठ इप्टाकर्मी मित्रा सेन मजूमदार शामिल हो रही हैं। रणेंद्र जी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भी होंगे। विभूति भूषण जयंती 12 सितंबर, 2022 को घाटशिला में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम सह सम्मान समारोह में स्थानीय प्रलेस और इप्टा के साथी भी सहयोगी की भूमिका में हैं। विभूति भूषण जयंती पर सुबह पुस्तकालय और विभूति भूषण बंद्योपाध्याय पर केंद्रित आर्ट गैलरी का उद्घाटन और शाम को चंद्रिमा चटर्जी के द्वारा प्रशिक्षित बाल और युवा कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां और नाटक महंगा सौदा (प्रेमचंद अनुदित टॉलस्टॉय की कहानी के नाट्य रूपांतरण) पेश किया जायेगा। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों, रंगकर्मियों और गणमान्य व्यक्तियों शामिल होंगे। यह जानकारी विभूति स्मृति संसद घाटशिला के सुशांत सीट (जो कार्यक्रम संयोजक हैं) ने दी है।

Published / 2022-09-07 17:56:25
हमारी उम्मीद ही हमारे दुःख का कारण : जया किशोरी

टीम एबीएन, लोहरदगा। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पूज्या जया किशोरी जी के कार्यक्रम स्थल व्यास मंच में आगमन होते ही भक्तों के जयकारे से वातावरण गूंज उठा, भक्तों ने ताली बजाकर स्वागत किया माहौल भक्तिमय हो गया। राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने पूज्या जयाकिशोरी जी को अंगवस्त्र प्रदान कर अभिनन्द किया। सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये, सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये। जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये। भजन से श्रीमद्भागवत कथा प्रारम्भ की गई। पूज्या जया किशोरी जी ने बतलाया कि ईश्वर को याद करते ही नहीं है, भगवान को फुर्सत मिलने पर याद करते हैं, समय मिला तो याद किये नहीं मिला तो नहीं किये लेकिन आप जब संकट में रहते हैं तब चाहे आधी रात ही क्यों न हो याद करते हैं। हमारे दुःख का कारण हमारी उम्मीद ही है, महत्वाकांक्षा का अधिक पालना दुखों का कारण है, संतुष्टि का भाव ही ईश्वर के निकट लाता है। उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत कथा श्रवण हीं प्रायश्चित का श्रेष्ठ उपाय बताया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया गया। भगवान की शरण में रहने वाले भक्तों के पाप श्री भगवान के नामोच्चारण से ऐसे नष्ट हो जाते हैं जैसे सूर्य उदय होने पर कोहरा नष्ट हो जाता है। जिन्होंने अपने भगवद गुण अनुरागी मन मधुकर को भगवान श्री कृष्ण के चरणारविन्द मकरन्द का एक बार पान करा दिया। उन्होंने सारे प्रायश्चित कर लिए वे स्वप्न में भी यमराज और उनके पाशधारी दूतों को नहीं देखते, जैसे कोई परम शक्तिशाली अमृत को उसका गुण न जान कर अनजाने में पी ले, तो भी अमृत उसे अमर बना ही देता है। वैसे ही अनजाने में उच्चारण करने पर भी भगवान का नाम अपना फल देकर ही रहता है। बुधवार के कथा में ब्रह्मा और नारद की वार्तालाप का प्रसंग सुनाया गया। जिसमें नारद जी ने ब्रह्मा से पूछा कि हरि को प्राप्त करनेवाला कौन सा मन्त्र है? तब ब्रह्मा जी ने बतलाया कि हरे राम, हरे रामा, रामा रामा हरे हरे। हरे कृष्ण, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे। मंत्र का उच्चारण करने से हरि की प्राप्ति होगी। तब नारद ने कहा कि यह तो आसान है सभी मंत्रोच्चार कर सकते हैं, तब ब्रह्मा ने बतलाया कि सभी हरि को प्राप्त कर सकते हैं। प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी हैं और उस विश्वास को पूरा करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। इस कार्यक्रम में साहू परिवार से शैफाली साहू, उदय शंकर प्रसाद, अरुणा साहू, धीरज प्रसाद साहू, मनु साहू, राहुल साहू, वंदना साहू, हर्षित साहू, रुचि साहू, राजश्री साहू, हंसा साहू, शेरी मुनी साहू, मदन मोहन शर्मा, सचिदा चौधरी, अशोक यादव, संजय बर्मन, निशिथ जायसवाल, संदीप कुमार, लाल मोहन प्रसाद केशरी, राजेंद्र प्रसाद खत्री, डॉ अजय शाहदेव, कमल प्रसाद केशरी, मोहन दुबे, कंवलजीत सिंह, अरुण राम, राहुल कुमार, बलवीर देव, कृष्ण मोहन केशरी, कैलाश केशरी, उर्मिला केशरी, प्रमोद अग्रवाल, विजय जायसवाल, सतीश जयसवाल, राकेश सिंह, अनिता पोद्दार, अनिल कुमार, सचिदानन्द पाल सिंह, बी के ब्लांजिनप्पा, सामी ब्लांजिनप्पा, देवंती गुप्ता, सुष्मिता देवी, रानी देवी, संध्या गुप्ता, अर्पिता मुखर्जी, इशानी मुखर्जी, विनीता कुमारी, शिवमंदिर राय, गोपाल साहू, बिजली महतो, विनोद कुमार, राजू महतो, ब्रज सिंह, राजकुमार प्रसाद, मनीष साहू, गीता देवी, जयगोविंद सोनी, इंदु देवी, विमल गुप्ता, सोहन पटेल, सुरेश ठाकुर, विद्या सिंह, मीरा सिंह, कल्याणी पोद्दार, संगीता देवी, कमला देवी, विनोद राय, अनुज साहू, विनय पोद्दार, मुरली अग्रवाल, अनिल मोदी, संजय मोदी, प्रेम प्रजापति, रमेश केशरी, रमेश साहू, उषा बर्मन, राजीवरंजन प्रसाद, उदय गुप्ता, विनोद सिंह, आशीष कुमार, अमित कुमार, आकाश खत्री, जयजीत कुमार चौबे, आलोक राय, दिवेश कुमार, नितिन सिंह, रोहित ओझा, नीरज साहू, निलेश सिंह, सुधीर अग्रवाल, संजय महाराज, प्रमोद अग्रवाल, विजय अग्रवाल, धर्मेंद्र कुमार, विजय जयसवाल, दिनेश पांडेय, शशि वर्मा, अविनाश कौर, लखन मांझी, सजल कुमार, गोपाल साहू, दुर्गा प्रजापति, रोहन श्याम केसरी, बंटू जयसवाल, प्रदीप विश्वकर्मा, दिग्गज कुमार सिंह, सतीश विश्वकर्मा, आलोक कुमार, मनीष कुमार, सुजीत राय, रमेश साहु, राम लखन प्रसाद, प्रवीण कुमार, संदीप मिश्रा, सरोज प्रजापति, दिनेश अग्रवाल, मनीष प्रसाद, विजय सिंह, पंकज जयसवाल, हिमांशु कुमार, जयप्रकाश शर्मा, संजीव शर्मा, रमेश शर्मा, सागर वर्मा, संदीप भगत, मुरारी गोस्वामी, प्रवीण प्रसाद, गुडूस गुप्ता, गुप्तेश्वर गुप्ता, मनोज जयसवाल, मनोज गुप्ता, देशराज गोयल, नवीन जयसवाल सहित शहर के भक्त जन उपस्थित थे।

Published / 2022-09-06 09:49:55
करमा : भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक पर्व...

टीम एबीएन, रांची। करम या करमा पर्व झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों की संस्कृति से जुड़ा लोकपर्व है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम को दर्शाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार भादो मास की एकादशी में मनाया जाने वाला पर्व करम आदिवासियों की परंपरा में बहुत ही खास महत्व रखता है। इस दिन आदिवासी पुरुष और महिलाएं मिलकर करम देवता की पूजा करते हैं। मौके पर सभी पारंपरिक परिधान लाल बार्डर के साथ सफेद रंग की साड़ी और धोती में जगह-जगह लोक नृत्य करते नजर आते हैं। आदिवासियों के साथ-साथ सनातन धर्म प्रेमी भी इस पर्व में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। झारखंड में पेड़-पौधों की पूजा की प्रथा सदियों चली आ रही है। प्रकृति के प्रति मानव समाज की यह परंपरा बहुत पुरानी है। आदि मानवों ने जब प्रकृति के उपकार को समझा तब से ही यह प्रकृति पर्व आदिवासियों के संस्कृति का हिस्सा बन गया। आज भी इसकी प्रासंगिकता है। इसमें प्रकृति का संदेश निहित है। जैसे करम में करम डाली, सरहुल में सखुआ फूल, जितिया में कतारी आदि की पूजा करते आ रहे हैं। आदिवासी करम पर्व की पूर्व संध्या से ही इसकी तैयारी में लग जाते हैं। इस पर्व का आदिवासी बड़े ही बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि करम पर्व के बाद से ही आदिवासी समाज में शादी और शुभ कार्य की शुरुआत की जाती है। पूजा के दौरान कर्मा और धर्मा नाम के दो भाइयों की कहानी भी सुनाई जाती है, जिसका सार करम के महत्व को समझाता है। इस कहानी को सुने बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। माना जाता है कि इस पर्व को मनाने से गांव में खुशहाली आती है। करम के दिन घर घर में कई प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। करम भाई-बहन के प्यार को दर्शाता है। महिलाएं खासकर अपने भाइयों की लंबी उम्र और अच्छे भविष्य के लिए व्रत रखती है।

Published / 2022-09-05 04:19:39
टीचर्स डे : जानें शिक्षक दिवस से जुड़ी हर जानकारी...

एबीएन सोशल डेस्क। माता-पिता जहां प्यार और गुण देने के लिए जिम्मेदार हैं वहीं शिक्षक पूरा भविष्य उज्ज्वल और सफल बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। वे जीवन में शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हैं और हमारी प्रेरणा स्रोत बन कर हमें आगे बढ़ने तथा सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। वे हमें संसार भर के महान व्यक्तित्वों का उदाहरण देकर शिक्षा की ओर प्रोत्साहित करते हैं। वे हमें बहुत मजबूत और जीवन में आने वाली हरेक बाधा का सामना करने के लिए तैयार करते हैं तथा अपार ज्ञान और बुद्धि से हमारे जीवन को पोषित करते हैं। यदि हमें जीवन में सफल होना है तो हमेशा अपने शिक्षकों के आदेशों का पालन करना चाहिए और देश का योग्य नागरिक बनने के लिए उनकी सलाह का अनुकरण करना चाहिए। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन परिचय : डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद् तथा महान दार्शनिक थे। राजनीति में आने से पहले वह एक सम्मानित अकादमिक थे। वह कई कॉलेजों में प्रोफैसर रहे। वह ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में 1936 से 1952 तक प्राध्यापक रहे। कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफैसर के रूप में 1937 से 1941 तक कार्य किया। 1946 में यूनैस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वह शिक्षा में बहुत विश्वास रखते थे और उन्हें अध्यापन से गहरा प्रेम था। एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण उनमें विद्यमान थे। डॉ राधाकृष्णन जी का करियर 1908 में तब शुरू हुआ, जब उन्हें मद्रास प्रैजीडैंसी कालेज में दर्शनशास्त्र का सहायक अध्यापक चुना गया। इसके बाद वह सन 1921 तक मैसूर विश्वविद्यालय में रहे और 1921 में कोलकाता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र की पीठ के गौरवमय पद पर नियुक्त हुए। 1931 में आंध्र विश्वविद्यालय के उपकुलपति भी चुने गये। शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने पर उन्हें डी-लिट की उपाधि से भी विभूषित किया गया। 1939 में महामना मदन मोहन मालवीय जी के आग्रह पर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने और इस पद पर 1948 तक रहते हुए विश्वविद्यालय के विकास हेतु अनेक कार्य किये। देश की आजादी के बाद 1949 में डॉ राधाकृष्णन को रूस में भारत का राजदूत बनाकर भेजा गया, जहां उन्होंने विद्वता से वहां के लोगों में भी अमिट जगह बना ली। 1952 में सवसम्मति से भारत के उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हुए। अपने उपराष्ट्रपति काल में रूस, चीन, जापान आदि देशों की यात्रा करके उनसे मधुर संबंध स्थापित किए। मई 1962 में जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अवकाश ग्रहण किया तो डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पद पर नियुक्त किये गये। एक महान दार्शनिक, शिक्षक, लेखक का बाद में राष्ट्रपति पद पर सुशोभित होना न केवल भारत अपितु विश्व के लिए गौरव की बात थी। डा. राधाकृष्णन जीवन पर्यंत शिक्षा सुधार तथा समाज सुधार के कार्यों में लगे रहे। उन्होंने स्वयं को अन्य लोगों की तरह समझकर सादा जीवन व्यतीत किया। आज के शिक्षक वर्ग को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने स्तर में सुधार लाना चाहिए ताकि एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण हो सके। उनके जन्मदिन को शिक्षक दिन बनाए जाने की कहानी यह है कि देश का राष्ट्रपति बनने के बाद उनके कुछ दोस्तों और शिष्यों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी थी। इस पर उन्होंने कहा, मेरे जन्मदिन का जश्न मनाने की बजाय 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा।

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