एबीएन सोशल डेस्क। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने शनिवार को एक श्वेत पत्र जारी करते हुए अपनी संपत्ति की लिस्ट जारी की। इसमें फिक्स्ड डिपोजिट और जमा हुए सोने का भी ब्यौरा है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने घोषणा की कि वर्तमान ट्रस्ट बोर्ड ने 2019 से अपने निवेश दिशानिदेर्शों को मजबूत किया है। ट्रस्ट ने सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी रिपोर्टों का भी खंडन किया कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के अध्यक्ष और बोर्ड ने आंध्र प्रदेश सरकार की प्रतिभूतियों में अधिशेष धन का निवेश करने का निर्णय लिया था। ट्रस्ट का कहना है कि अधिशेष राशि अनुसूचित बैंकों में निवेश की जाती है। एक प्रेस विज्ञप्ति में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने कहा कि श्रीवारी के भक्तों से अनुरोध है कि वे इस तरह के षड्यंत्रकारी झूठे प्रचार पर विश्वास न करें। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम द्वारा विभिन्न बैंकों में नकद राशि और सोने बहुत पारदर्शी तरीके से जमा किये जाते हैं। मंदिर ट्रस्ट ने कहा कि उसके पास राष्ट्रीयकृत बैंकों में 5,300 करोड़ से अधिक के मूल्य का करीब 10.3 टन सोना जमा है। इसके अलावा मंदिर के पास 15,938 करोड़ रुपए का नकद भी जमा है। टाइम्स आॅफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार टीटीडी ने अपनी कुल संपत्ति 2.26 लाख करोड़ रुपए आंकी है। टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी एवी धर्म रेड्डी ने बताया कि मंदिर ट्रस्ट की कुल संपत्ति 2.26 लाख करोड़ रुपए हो गई है। रेड्डी ने अखबार को बताया, 2019 में विभिन्न बैंकों में फिक्स्ड डिपोजिट के रूप में टीटीडी का निवेश 13,025 करोड़ था, जो अब बढ़कर 15,938 करोड़ हो गया है। पिछले तीन वर्षों में निवेश में 2,900 करोड़ की वृद्धि हुई है। मंदिर की ओर से यह भी बताया कि उसकी संपत्ति में पूरे भारत में 7,123 एकड़ में फैली 960 संपत्तियां भी शामिल हैं। मंदिर द्वारा की जाने वाली आय भक्तों, व्यवसायों और संस्थानों द्वारा दिए गए दान से आती है।
टीम एबीएन, रांची। नवंबर 5, 2022। 6 नवंबर से प्रारंभ होने वाले हितचिंतक अभियान पखवाड़े में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा 5 लाख हिंदुओं को जोड़े जायेंगे। 2024 में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण हो जायेंगे, इसके निमित्त षष्टिपूर्ति के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के इस देश व्यापी हितचिंतक अभियान को सर्वस्पर्शी बनाने हेतु झारखंड में 6 नवंबर से 20 नवंबर तक समाज के हर जाति, मत, पंथ, संप्रदाय से संपर्क कर उन्हें हिन्दू समाज व राष्ट्र हित के कार्यों से जोड़ेंगे यह बात विहिप के पटना क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल ने प्रेस वार्ता में बताया। उन्होंने बताया अभियान में कार्यकतार्ओं के द्वारा समाज में सभी प्रकार के लोगों को जोड़ने हेतु विशेष संपर्क भी किया जाएगा तथा विहिप के कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसके अन्तर्गत डॉक्टरों, इंजीनियरों, चार्डर्ड अकाउंटेंटों, वकील, पूर्व जजों, गायकों, अभिनेताओं, खिलाड़ियों इत्यादि सभी तरह के ख्याति प्राप्त लोगों को जोड़े जायेंगे। उन्होंने कहा, हितचिंतक अभियान का उद्देश्य विहिप के विभिन्न आयामों के कार्यों का जनसेवार्थ विस्तार करना है। सेवा कार्यों से अधिकाधिक कमजोर समाज को जोड़ना, नई पीढ़ी में सनातन संस्कारों का संचार करना, गौवंशों की रक्षा, सामाजिक समरसता, नारी सशक्तीकरण, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण व मठ-मंदिरों की सुव्यवस्था के साथ ही हिंदू समाज को संगठित करते हुए उसकी सुरक्षा के संकल्प का भाव जगाना है तथा मतांतरण व जिहाद गतिविधि रोकने एवं परावर्तन (घर वापसी) का कार्य को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए समाज आगे आए, ऐसा विचार रखा जायेगा। झारखंड के 1.25 लाख परिवार बनेंगे विहिप हितचिंतक : डॉ वीरेंद्र साहू- प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने बताया हितचिंतक अभियान के तहत झारखंड के 3500 पंचायतों के 20 हजार गांव में 1 लाख 25 हजार परिवार के 5 लाख हिंदुओं को हितचिंतक बनाया जायेगा। इस अभियान में 100 से अधिक पूर्णकालिक, 9000 से अधिक कार्यकर्ता एवं समर्थक तथा 3500 पंचायत स्तर में टोली के साथ अभियान पूर्ण करेंगे।अभियान टोली के साथ ?20 का कूपन होगा जिसे देकर हितचिंतक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा विश्व हिंदू परिषद समाज के सभी वर्गों को जोड़ने तथा सबल समाज खड़ा करने के निमित्त प्रत्येक 3 वर्ष में विश्व हिंदू परिषद का हिचिंतक अभियान चलाया जाता है। उन्होंने बताया हितचिंतक अभियान के प्रांत संयोजक मनोज पोद्दार एवं प्रांत सहसंयोजक रंगनाथ महतो एवं दीपक ठाकुर होंगे। 6 एवं 13 नवंबर को चलेगा हितचिंतक महाअभियान : मनोज पोद्दार- हितचिंतक अभियान प्रांत संयोजक मनोज पोद्दार ने बताया कि झारखंड में 6 नवंबर एवं 13 नवंबर को हितचिंतक महाअभियान चलाया जायेगा। इसके अंतर्गत प्रत्येक कार्यकर्ता सुबह से शाम तक समय देते हुए कम से कम 50 घर संपर्क एवं 200 हितचिंतक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित समय में पूर्ण हो अभियान : रंगनाथ महतो- हितचिंतक अभियान प्रांत सहसंयोजक रंगनाथ महतो ने हितचिंतक कूपन जारी करते हुए निर्धारित समय में अभियान पूर्ण करने हेतु कार्यकर्ताओं से आग्रह किया। प्रेस वार्ता में प्रांत संगठनमंत्री देवी सिंह, रांची विभाग सहमंत्री विकास सिंह, रांची विभाग प्रचार प्रसार प्रमुख अमर प्रसाद, महानगर मातृशक्ति सहसंयोजीका चित्रा पाल, महानगर हितचिंतक अभियान संयोजक नागेंद्र शुक्ला आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी रांची विभाग के प्रचार प्रसार प्रमुख अमर प्रसाद (8340430634) और विहिप, झारखंड के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू (7033541040) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। डॉक्टर्स वाइव्स एसोसिएशन ने अपनी चैरिटी कार्यक्रम की प्रतिबद्धता को निभाते हुए एक और कदम सेवा में समर्पण किया। बिरसा शिक्षा निकेतन विद्यालय, एचईसी जहां 700 गरीब तबके के बच्चों के बीच सभी को बिस्किट और मोजे के साथ-साथ विद्यालय प्रशासन को 35 चेयर्स दिया गया। इस कार्यक्रम में चेयर पर्सन विनीता शरण, अध्यक्ष बिंदु प्रसाद, सचिव डॉ सोनी सिन्हा, सुषमा मिश्रा, देवजानी संयाल, सुनीता सिंहा, पूनम झा, कमलेश मिद्धा, मधु गुप्ता, सीमा महेश्वरी, रश्मि कुमार, डॉ आभा कुमारी, नीलम शेखर श्रीला चौधरी, सिंधु भदानी उपस्थित थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूपी के शामली का लिटिल स्टार अजीम मंसूरी की शादी की मुराद आखिरकार पूरी हो ही गई। बुधवार को ढाई फीट के अजीम मंसूरी दुल्हा बन अपनी बारात लेकर हापुड़ पहुंचे, जहां 3 फीट की बुशरा के साथ उनका निकाह पढ़ा गया। सिर पर सेहरा बांध और शेरवानी पहनकर अजीम मंसूरी बड़े ही धूमधाम से अपनी बारात लेकर निकले। हाइट की वजह से शामली जनपद के कस्बा कैराना निवासी अजीम मंसूरी की शादी नहीं हो रही थी। जिसकी वजह से वे काफी चिंतित थे और शादी करवाने के लिए थाने में भी गुहार लगा चुके थे। अजीम मंसूरी की शादी में 20 से 25 बाराती शामिल हुए। बारात कैराना से चलकर हापुड़ पहुंची जहां करीब 1 बजे उनका निकाह पढ़ा गया। गौरतलब है कि अजीम मंसूरी कैराना का चर्चित लिटिल स्टार कहा जाता है। अजीम मंसूरी का कद ढाई फीट है। अजीम मंसूरी का यह छोटा कद उसकी शादी में रोड़ा बना हुआ था। अपनी शादी को लेकर अजीम मंसूरी काफी चिंतित थे और कुछ समय पहले मीडिया में अजीम मंसूरी ने शादी को लेकर गुहार लगाई थी। मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद अजीम मंसूरी के घर हापुड़ जनपद से बुशरा नामक युवती का रिश्ता आया। अजीम मंसूरी की शादी में 20 से 25 बाराती शामिल हुए। बारात कैराना से चलकर हापुड़ पहुंची जहां करीब 1 बजे उनका निकाह पढ़ा गया। गौरतलब है कि अजीम मंसूरी कैराना का चर्चित लिटिल स्टार कहा जाता है। अजीम मंसूरी का कद ढाई फीट है। अजीम मंसूरी का यह छोटा कद उसकी शादी में रोड़ा बना हुआ था। अपनी शादी को लेकर अजीम मंसूरी काफी चिंतित थे और कुछ समय पहले मीडिया में अजीम मंसूरी ने शादी को लेकर गुहार लगायी थी। मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद अजीम मंसूरी के घर हापुड़ जनपद से बुशरा नामक युवती का रिश्ता आया। दरअसल, बुशरा यूपी के हापुड़ जनपद की निवासी है, जिसका कद 3 फीट है। बुशरा व अजीम मंसूरी के परिजनों में रिश्ते की बात चली और 7 नवंबर को अजीम मंसूरी की शादी तय कर दी गई। तय तारीख से पहले ही अजीम मंसूरी अपनी बारात लेकर बुधवार को हापुड़ के लिए रवाना हो गये। अजीम मंसूरी के परिजनों से जब इस मामले में बात की तो उनका कहना था कि अजीम मंसूरी की शादी 7 नवंबर को होनी थी, लेकिन आज यानी 2 नवंबर को अजीम मंसूरी की बारात हापुड़ जनपद पहुंची। इसका कारण यह है कि अजीम मंसूरी की शादी में भारी भीड़ होने की आशंका परिजनों को थी। शादी के बाद शेरवानी-पगड़ी लगाए हुए अजीम मंसूरी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। अजीम मंसूरी व उनके परिजन और रिश्तेदारों में भी खुशी देखने को मिली। बैंड-बाजे के साथ अजीम मंसूरी को कैराना से दूल्हा बना कर हापुड़ ले जाया गया। फूलों से सजी कार में बैठे दूल्हा अजीम मंसूरी कैराना वासियों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। अजीम मंसूरी का सपना है कि वह शादी के बाद अपनी बेगम को लेकर मक्का में हज करने के लिए जायेंगे। बता दें कि अजीम मंसूरी 2019 में उस वक्त सुर्खियों में आये जब उन्होंने अपनी शादी के लिए थाने में गुहार लगयी। इतना ही नहीं अजीम मंसूरी ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी अपने लिए पत्नी खोजने की गुहार लगा चुके हैं। 2021 में भी अजीम मंसूरी शामली के महिला थाना और कैराना थाने में शादी के लिए कई चक्कर लगाये। इस बीच उनकी हाइट और शादी करने की इच्छा ने उन्हें सोशल मीडिया स्टार बना दिया।
एबीएन सोशल डेस्क। 28 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ आज उदित मान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के हर शहर, गांवों में इस पूजा की धूम रही। छठ घाटों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर लोंगों ने धने-धान्य, पुत्र, यश, ऊर्जा भगवान भास्कर से मांगी अब छठ घाट से घर जाकर छठ व्रतियां पारण कर 36 घंटे से जारी निर्जला उपवास तोड़ेंगी। बिहार, झारखंड और पूर्वांचल सहित देश और दुनिया के जिस कोने में भी यहां के लोग रहते हैं वहां छठ पर्व के दौरान गजब का उत्साह देखने को मिला। छठ घाटों पर इस दौरान आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा को लेकर छठ व्रतियों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापवित्र पर्व छठ संपन्न हो गया। छठ पर्व को लेकर पूरा शहर भक्ति में नजर आया। हर ओर छठी मइया के गीत गुंजायमान है। जिले के विभिन्न घाटों पर पहुंचकर भगवान भास्कर को अर्पित कर करने के लिए घाटों पर छठ व्रतियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए शहर के दरधा जमुना संगम तट पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।।संगम तट के दोनों ओर घाटों पर छठ व्रतियों के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार अर्घ्य देकर भगवान भास्कर को नमन किया। बेगूसराय में चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ उगते सूर्य की पूजा अर्चना के साथ समाप्त हो गया। बेगूसराय जिले में शहर से लेकर गांव तक गंगा घाट से लेकर घरों में बनाये कृत्रिम तालाब तक छठ पर्व को लेकर धूमधाम से पूजा अर्चना की गयी। चार दिवसीय छठ महापर्व के अंतिम दिन आज उगते भगवान भास्कर की पूजा अर्चना। बेगूसराय में 473 गंगा घाट, नदी घाट और पोखरों को जिला प्रशासन के द्वारा छठ पूजा के लिए तैयार किया गया था। इसके अलावा शहर से लेकर गांव तक लोग अपने अपने घरों और छत पर भी कृत्रिम तालाब बनाकर भगवान भास्कर की पूजा अर्चना की। 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद आज उगते सूरज की पूजा अर्चना के बाद छठ व्रतियों ने फलाहार कर अपना निर्जला व्रत का उपवास खत्म किया। सहरसा में भी लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के आखिरी दिन छठ घाटों पर लोगों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। नदी हो या तलाब सभी जगहों पर छठ व्रती सुबह से ही घाट पर पहुंचकर उदीयमान सूर्य का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही सूर्य भगवान ने दर्शन दिया उसके बाद अर्घ्य देने की सिलसिला शुरू हुआ। छपरा में छठ महा अनुष्ठान के चौथे दिन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने पूजा का समापन किया। मौके पर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में उत्सव का माहौल बना रहा। बेगूसराय में लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के आज चौथे दिन जिला के विभिन्न घाटों पर पहुंचे श्रद्धालु लोगों ने नौलखा मंदिर स्थित पोखार घाट पर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के आज चौथे दिन जिले के विभिन्न घाटों पर पहुंचे श्रद्धालु लोग तो आसपास के तालाब व कृत्रिम घाट पर भी काफी संख्या में पहुंचे। लोगों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही गुमला में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का चार दिवसीय अनुष्ठान हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ लोगों ने जन कल्याण की कामना करते हुए इस महापर्व का समापन किया। सुबह के अर्घ्य को देने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ छठ पूजा दिखी। लोगों ने भगवान भास्कर के उदय होते ही अर्घ्य दिया और अक्षय ऊर्जा श्रोत भगवान सूर्य की स्तुति की। उदय होने के साथ ही अर्घ्य देने का सिलसिला चल निकला, जिसके बाद लोगों ने काफी देर भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के अलावा हवन भी किये। सभी श्रद्धालुओं ने अर्घ्य देने के साथ ही सुख-समृद्धि की कामना करते हुए अगले साल फिर से छठ का अनुष्ठान करने की बात कही। बेतिया में छठ व्रतियों ने उगते सूर्य को दिया अर्घ्य, उगते सूर्य के अर्घ्य देने के बाद महापर्व छठ का हुआ समापन। खगड़िया में भी लोक आस्था का महापर्व छठ में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया गया। नदी हो या तलाब सभी जगहों पर छठ व्रती सुबह से ही घाट पर पहुंचकर उदीयमान सूर्य का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही सूर्य भगवान ने दर्शन दिया उसके बाद अर्घ्य देने की सिलसिला शुरू हुआ।
एबीएन नॉलेज डेस्क। हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाले मसाले बड़े काम के हैं। हल्दी की बात तो अलग ही है। इसे मसाला कहने से ज्यादा दवा कहना ज्यादा बेहतर होगा। हल्दी में कई औषधीय गुण छुपे हुए हैं। हल्दी में एंटी बायोटिक एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं। जो कई बीमारियों को दूर करने का काम करते हैं। हल्दी सेहत के लिए बड़ी फायदेमंद है, इसका इस्तेमाल वजन घटाने के लिए किया जाता है। हल्दी को पानी में मिलाकर पीने से वजन कम होता है। आइये जानते हैं कि हल्दी का पानी कैसे बनाया जाता है। कैसे घटाता है वजन : हल्दी में मौजूद पोषक तत्व वजन कम करने में कारगर हैं। हल्दी में पॉलीफेनॉल, करक्यूमिन कम्पाउंड मौजूद होते हैं, जो फैट को घटाने का काम करते हैं। वजन कम करने के लिए हल्दी का पानी बनाकर पीना चाहिए। कैसे बनायें हल्दी का पानी : हल्दी का पानी बनाने के लिए पीसी हुई हल्दी की जगह नेचुरल हल्दी की गठान लें। इस गठान को 2 कप पानी में डालकर इसे तब तक उबालना है, जब तक कि पानी आधा हो जाये। हल्दी के इस पानी में पोषक तत्व उतर आयेंगे। पानी को छानकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और गुनगुना हल्दी वाला पानी पी लें। रोज खाली पेट हल्दी का पानी पीने से वजन कम होने लगेगा। हल्दी के पानी के फायदे : हल्दी के पानी पीने से वजन कम करने के अलावा भी कई फायदे मिलते हैं। खाली पेट हल्दी का पानी पीने से जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है। हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करते हैं। इस पानी को पीने से बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। सर्दी-खांसी जैसी परेशानियां दूर हो जाती हैं। हर्ट अटैक का खतरा कम : हल्दी का पानी पीने से हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। हल्दी वाला पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इस पानी से खून पतला बना रहता है जिससे खून का थक्का जमने का खतरा नहीं रहता है और दिल हेल्दी रहता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सूर्योपासना के महानपर्व छठ पूजा की शुभकामनाएं देते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि आज भगवान सूर्यदेव के गुणों को धारण करने की महती आवश्यकता है। शीत ऋतु के आगमन पर जहां हम भगवान सूर्य की उपासना कर उनकी कृपा के पात्र बने रहने हेतु छठ मैया से प्रार्थना करते हैं। वहीं, दूसरी ओर उनके अनथक, समदर्शी, ऊर्जावान, प्रकाशवान व कीट नाशक स्वभाव को धारण कर विश्व कल्याण की ओर प्रेरित भी होते है। सम्पूर्ण हिंदू समाज को संकल्प लेना होगा कि हममें से कोई निस्तेज, निर्बल, लाचार, रोगी, निर्धन, उपेक्षित या अस्पृश्य न रहे। मूर्धन्य वैदिक विदुषी दर्शनाचार्या विमलेश आर्या की उपस्थिति में उन्होंने यह भी कहा कि संपूर्ण सृष्टि को आलोकित करने वाले सूर्यदेव से हमें आज प्रेरणा लेनी होगी कि विश्व के किसी भी कोने में आतंक रूपी कीटाणु, कोढ़ न रहने पाये और सभी सज्जन शक्तियां मिलकर हर्षोल्लास से आनंद पूर्वक रह सकें। पूर्वांचल वेलफेयर एसोशिएशन द्वारा दक्षिणी दिल्ली के आस्थाकुंज में आयोजित छठ पूजा महोत्सव में हजारों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों व बच्चों ने सहभागिता की। इस अवसर पर एसोसिएशन के सुबोध झा, अजय झा, राकेश पाठक, पंडित सतीश कुमार, रतन झा और संजय झा सहित अनेक पदाधिकारी व विविध संगठनों तथा आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ( 9810949109) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। उत्तर भारत के लगभग हर घर में तुलसी का पौधा लगा होता है और सुबह-शाम उसकी पूजा की जाती है। तुलसी के पौधे की हिंदू धर्म में विशेष मान्यता है और इसलिए इसे पवित्र पौधे की उपाधि भी दी गई है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है। उस जगह सुख-समृद्धि का वास होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी की पत्तियों में ऐसी खूबियां छिपी होती हैं। तुलसी की पत्तियों के सेवन से ही कुई रोग खत्म हो जाते है। जी हां, तुलसी की पत्तियों को सुबह खाली पेट चबाने से न सिर्फ आप कई बड़ी बीमारियों को दूर कर सकते हैं। बल्कि अपने शरीर को फिट भी रख सकते हैं। खाली पेट चबाएं पत्तियां और रोग भगायें दूर। सिरदर्द में कारगर : अगर आपको मौसम बदलने के कारण ठंड लग गई है या फिर सिरदर्द हो रहा है या फिर एलर्जी और साइनस जैसी परेशानी हो गयी है। तो आपके लिए तुलसी की पत्तियां बहुत काम आ सकती हैं। ये पत्तियां इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करती हैं। बस आप इन्हें यूज करने से पहले पानी में उबाल लें। पानी को उबालने के बाद उसे छान लें और गुनगुना होने पर पी जायें। ऐसा करने से आपकी परेशानी कम हो जायेगी। ब्लड शुगर में कारगर : तुलसी की पत्तियों में कई सारे यौगिक पाये जाते हैं। जिसमें कैरी फिलिन, मिथाइल युजेनॉल और यूजीनोल नाम के रसायन शामिल हैं। ये सभी रसायन हमारे पैंक्रियाज की कोशिकाओं को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं। पैंक्रियाज वहीं अंग है, जो शरीर में इंसुलिन बनाने का काम करता है। जब इंसुलिन सही तरीके से बनता रहेगा तो आपको अपना ब्लड शुगर लेवल दुरुस्त रखने में मदद मिलेगी। गले की खराश होगी कम : मौसम में बदलाव होने से कई तरह की परेशानियां होने लगती है, जिसमें से एक गले में खराश है। इस समस्या को दूर करने के लिए भी आप तुलसी की पत्तियां चबा सकते हैं। आपको करना क्या है कि पत्तियों को पानी में अच्छी तरह से उबाल लेना है। उबालने के बाद पानी को छान लें और गुनगुना होने पर पीयें। ये नुस्खा गले में खराश और दर्द को दूर करने में मदद करता है। तनाव होगा कम : तुलसी की पत्तियां ढेर सारे गुणों से संपन्न होती है, जिसमें मानसिक तनाव को कम करने वाले गुण भी शामिल हैं। दरअसल, इसकी पत्तियों में कोर्टिसोल नाम का गुण होता है, जो तनाव को कम करने में मदद करता है। आप सुबह खाली पेट तुलसी की 4 पत्तियों को चबा सकते हैं, जो आपके तनाव को धीरे-धीरे कम करने में मदद करेंगी। मुंह की बदबू खत्म करने में कारगर : मुंह की बदबू में अक्सर कुछ भी ज्यादा एसिडिटी खाने से उसकी बदबू मुंह में रह जाती है। जिसे दूर करने का काम तुलसी की पत्तियां भी कर सकती है। आप खाली पेट तुलसी की पत्तियां चबा सकते हैं, जो मुंह से आती बदबू को दूर करने में मदद करती है। पत्तियों को तोड़ने के बाद उन्हें साफ पानी से धोना न भूलें। पत्तियों को धोने के बाद अच्छी तरह से चबायें, ताकि आपको उसका पूरा फायदा मिले।
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