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Published / 2022-11-27 20:13:23
एक दूजे के अटूट बंधन में बंधे 51 नवदंपति जोड़े

वात्सल उत्सव में 200 दिव्यांग जनों को दिये गये व्हीलचीयर्स सहित कई उपकरण 
 

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के तत्वाधान में तथा अन्य समाजिक संस्थाओं एवं गणमान्य व्यक्तियों के सहयोग से गौशाला प्रांगण सुकूरहुटू कांके में नर- सेवा ही नारायण- सेवा के तहत सामूहिक विवाह सह वात्सल्य उत्सव का आयोजन किया गया। 
 

सामूहिक विवाह में 51 जोड़े सात जन्मों के रिश्ते में बंध गए। सामूहिक विवाह में 26 जोड़ो की शादी समाजसेवी मुरारी अग्रवाल एवं सरोज अग्रवाल तथा पुत्री नेहा अग्रवाल एवं दामाद प्रवीण अग्रवाल के विवाह वर्षगांठ के अवसर पर तथा 25 जोड़ो का शादी राजीव केडिया मुन्ना की 25 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर उपहार स्वरूप भेंट की गई। झारखंड के विभिन्न जिलों से आए सभी 51 नवविवाहित जोड़ो का विवाह पूरे रस्मो, बारात, वरमाला, फेरों एवं वैदिक मंत्रोचार के साथ संपन्न हुआ। सभी जोड़ों को गृहस्थी के सामग्री एवं सामानों के साथ- साथ विवाह का प्रमाण पत्र दिया गया। समारोह में आए सभी सम्मानित अतिथियों ने सभी 51 जोड़ो नव दंपतियों को आशीर्वाद देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूरा परिसर फूलों से सजाया गया था। 

वात्सल्य उत्सव में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति व 200 दिव्यांग जनों एवं विशेष प्रतिभावान बच्चों को पुरस्कृत किया गया। दिव्यांग जनों को व्हीलचेयर्स, एल्बो, छड़ी, वैशाखी, वाकर, आदि का वितरण किया गया। सभी दिव्यांगों ने उपकरण पाकर खुशी से लबरेज दिखे। तथा आयोजको का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में वृद्धाश्रम से आए सभी वृद्ध जनों को सेवा देते हुए सम्मानित किया गया। तथा वात्सल्य उत्सव में पधारे 40 किन्नर समुदायों को आदर- सत्कार करते हुए सम्मानित किया गया। उत्सव में छऊ नृत्य मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम में कई स्कूलों के बच्चों ने रंगारंग नृत्य- संगीत से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह गौ- सेवा के साथ किया। 
 

सामूहिक विवाह समारोह में पधारे सभी वर- वधू पक्ष के सभी बारातियों एवं सभी गणमान्य लोगों के लिए विशेष पकवान परोस कर स्वागत सम्मान किया गया। उक्त जानकारी देते हुए विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि समारोह में- विहिप प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, सेवा विभाग के प्रांत सहप्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल, विहिप के केंद्रीय पदाधिकारी जगरनाथ शाही, महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी, मुरारी अग्रवाल, मधुसूदन बुधिया, राजीव केडिया, उप मेयर संजीव विजयवर्गीय, प्रदीप राजगढ़िया, ओपी अग्रवाल, मुकेश काबरा, भानु प्रकाश जालान, बसंत कुमार मित्तल, रवि शंकर शर्मा, संजय सर्राफ, नीरज भट्ट,फतेह चंद्र जैन, उम्मेद मल जैन, भगवती भुवालका, शत्रुघ्न गुप्ता, सोहन दारूका, अरविंद सोमानी, विकास अग्रवाल, वासुदेव भाला, रोहित शारदा, अरविंद बंका, मनीष लोधा, सतीश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, नरेश बंका, नीलेश अग्रवाल, प्रेम अग्रवाल, विक्रम खेतावत, अनु पोद्दार, सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

Published / 2022-11-27 19:38:57
कराचार्य ब्रह्मानंद सरस्वती की 150वीं जयंती का उद्घाटन करेंगे सरसंघचालक डॉ मोहनराव भागवत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीमद्ज्योतिष्पीठोद्धारक जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मलीन ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज की 150वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में ‘आराधना महोत्सव’ 29 नवंबर से 08 दिसंबर तक आयोजित है। जिसका शुभारम्भ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन राव भागवत करेंगे। यह जानकारी जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने अलोपी बाग स्थित अपने मठ में पत्रकारों को दी। 
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद ने बताया कि ढाई हजार वर्ष पूर्व भगवान आदिशंकराचार्य ने देश के उत्तर दिशा में ज्यातिर्मठ, पश्चिमी में शारदामठ, दक्षिणी में श्रृंगेरीमठ एवं पूर्वी दिशा में गोवर्धनमठ की स्थापना की। चारों मठों में एक-एक प्रमुख आचार्य मनोनीत किया। बताया कि ज्योतिष्पीठ प्राकृतिक एवं अन्य आपदाओं के कारण 1833 से 1998 तक पूजा-अर्चना से बाधित रहा। 12 जून 1953 को शान्तानंद को शंकराचार्य बनाया गया। उनके बाद विष्णुदेवानंद और तत्पश्चात 14-15 नवंबर 1989 में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को शंकराचार्य बनाया गया। 
शंकराचार्य ने ‘आराधना महोत्सव’ के बारे में बताया कि प्रतिदिन प्रात: 6 बजे से श्रीरूद्रयज्ञ, 7 बजे से 12 बजे तक श्रीरामचरितमानस गायन, 2 बजे से 6 बजे तक श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा एवं आरती होगी और सायं सात बजे से रूद्राभिषेक होगा। 
उन्होंने बताया कि ब्रह्मानंद सरस्वती का 150वीं जयंती महोत्सव एवं राधामाधव वार्षिक पाटोत्सव 03 दिसंबर को 11 बजे होगा। 04 दिसंबर को ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानंद की जयंती एवं गीता जयंती कार्यक्रम होगा। सात दिसम्बर को ब्रह्मलीन शांतानंद का आराधना महोत्सव तथा शिखा चोटी प्रतियोगिता होगी। 8 दिसंबर को विद्वत सम्मेलन एवं सामाजिक सेवाओं के लिए सम्मान कार्यक्रम होगा। 

Published / 2022-11-26 22:35:43
27 नवंबर को सात जन्मों के वचन के साथ बंधेंगे 51जोड़े

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के तत्वावधान में  मी टू वी सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं एवं गणमान्य व्यक्तियों के सहयोग से 27 नवंबर रविवार को सुबह 8 बजे से अपराह्न 2 बजे तक गौशाला प्रांगण सुकूरहुटू, कांके में 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह सह वात्सल्य उत्सव का आयोजन किया गया है। आज पूर्वाह्न 11 बजे कार्यक्रम स्थल पर तुलसी वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 
विवाह समारोह में मुरारी अग्रवाल एवं सरोज अग्रवाल के पुत्र निखिल अग्रवाल व पुत्रवधू श्रद्धा अग्रवाल तथा पुत्री नेहा अग्रवाल एवं दामाद प्रवीण अग्रवाल के विवाह वर्षगांठ के अवसर पर 26 जोड़ों को शादी के उपहार भेंट करेंगे तथा राजू केडिया मुन्ना की विवाह के 25वीं वर्षगांठ (केडिया वस्त्रालय, हिनू) के द्वारा 25 जोड़ों को शादी के उपहार भेंट किये जायेंगे। 
गौशाला प्रांगण, सुकुरहुटू, कांके में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व 200 दिव्यांगजनो एवं विशेष प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहित किया जायेगा। दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर्स, एल्बो छड़ी, बैसाखी, वाकर आदि का वितरण, वृद्धाश्रम के बुजुर्गों की सेवा कार्य, किन्नर समुदाय के सदस्यों को आदर सम्मान, गौ सेवा तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम मे छऊ नृत्य का आयोजन किया जायेगा।
आज के कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांत सेवा प्रमुख अशोक अग्रवाल, विहिप समाजिक समरसता प्रांत सहप्रमुख दीपक महतो, मुरारी अग्रवाल, सोहन दारुका, प्रकाश अग्रवाल, नारायण अग्रवाल, राकेश सुलतानिया, स्नेहा मोदी, श्रद्धा अग्रवाल, नेहा केजरीवाल, राजेंद्र सिंह मुंडा, निखिल अग्रवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उक्त जानकारी झारखंड विहिप के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-11-25 23:18:59
स्कूल इंचार्ज से लेकर राष्ट्रीय महामंत्री तक की यात्रा यही अभाविप जैसे विराट संगठन का अंतनिर्हित तत्व : याज्ञवल्क्य शुक्ला, राष्ट्रीय महामंत्री, अभाविप

एबीएन सोशल डेस्क। 25 से 27 नवंबर तक जयपुर में चलने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में आज गढ़वा निवासी याज्ञवल्क्य शुक्ला ने विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में अपने दायित्व को ग्रहण किया। दायित्व को ग्रहण करते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि एक स्कूल इकाई से परिषद के साथ जुड़ने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े छात्र संगठन का राष्ट्रीय महामंत्री तक का सफर इस बात को सिद्ध करता है कि कल भी एबीवीपी का महामंत्री एक सामान्य कार्यकर्ता था, आज भी एबीवीपी का महामंत्री एक सामान्य कार्यकर्ता बना है और आगे भी एबीवीपी का महामंत्री एक सामान्य कार्यकर्ता ही रहेगा। स्कूल इंचार्ज से लेकर राष्ट्रीय महामंत्री तक की यात्रा, यही अभाविप जैसे विराट संगठन का अंतर्निहित तत्व है।
नगर अध्यक्ष डा. सत्य प्रकाश चौधरी ने याज्ञवल्क्य शुक्ल जी को महामंत्री बनने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह गढ़वा सहित पूरे झारखंड के कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का विषय है कि एक छोटे जिले से निकल कर श्री शुक्ला पूरे भारत में अभाविप का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह बात जिले के कार्यकर्ताओं को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
पलामू विभाग के संयोजक मंजूल ने याज्ञवल्क्य शुक्ला को बधाई देते हुए कहा कि श्री शुक्ला के राष्ट्रीय महामंत्री बनने पर पूरे जिले सहित प्रदेश के कार्यकर्ताओं में हर्ष का माहौल है। सभी कार्यकर्ता उन्हें लगातार बधाई दे रहे हैं। साथ ही नामधारी महाविद्यालय गढ़वा और रांची विश्वविद्यालय के लिए भी गौरव का पल है क्योंकि श्री याज्ञवल्क्य शुक्ला नामधारी महाविद्यालय के ही छात्र एवं छात्रसंघ अध्यक्ष और रांची विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। आज उनके महामंत्री बनने से राष्ट्रीय स्तर पर नामधारी महाविद्यालय का नाम पहुंच चुका है। 
उन्हें बधाई देने वालों में डॉ सत्यदेव पांडेय, प्रो उमेश सहाय, विश्वविद्यालय सह संयोजक निशांत चतुर्वेदी, विकाश कुमार, शुभेंदु, सुभम, लव, श्रीकांत, शशांक, अखिल, रोबिन, किरण, दीपमाला, विवेकानंद, स्नेहित, पुरुषोत्तम, राहुल सहित कई कार्यकर्ता शामिल रहे।

Published / 2022-11-25 22:12:39
दुनिया का नेतृत्व करे भारत, यह अभाविप की जिम्मेदारी : बाबा रामदेव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जयपुर में चल रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 68वें अधिवेशन में शुक्रवार को योगगुरु रामदेव ने कहा कि अतीत के गौरव और वर्तमान के शौर्य पराक्रम के साथ आने वाले समय में सभी क्षेत्रों में सभी प्रकार से भारत पूरे विश्व का नेतृत्व करे, यह जिम्मेदारी अभाविप को लेनी होगी। यह क्षमता भी केवल विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता ही रखते हैं।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तथा श्रीकृष्ण से हम भारतवासियों के खून का रिश्ता है। हम ऋषि मुनियों, ज्ञानी, विद्वतजनों और पराक्रमी जनों की संताने हैं। यही विद्यार्थी परिषद का भारत बोध भी है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल के कार्य को करने का जिम्मा अपने कंधों पर उठाना होगा। आप युवा शक्ति ही इस कार्य को कर सकते हैं।
योगगुरु बाबा रामदेव ने वामपंथियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लेनिन, कार्ल मार्क्स और माओ का अनुसरण करने वाले इनकी नाजायज औलाद हैं। उन्होंने अपने पूर्वजों के बारे में ऋषियों का जिक्र किया और कहा कि उनसे हमारे रक्त सम्बन्ध हैं। हर भारतीय की ऋषि परम्परा है। वह उन्हीं से मिली दीक्षा के मुताबिक कार्यों को सम्पादित करता है। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान और संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति बताया।
वर्तमान पीढ़ी को कर रहे दिग्भ्रमित
वामपंथियों पर आक्रामक बाबा रामदेव यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि सेक्यूलरिज्म की बात करने वाले कभी कम्युनिज्म तो कभी सोशियोलिज्म की बात कर वर्तमान पीढ़ी को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। इन्हें आड़े हाथों लेने वाले बाबा रामदेव ने वामपंथियों को बौद्धिक दरिद्रता का शिकार बताया। संकेतों में ही युवाओं को ऐसे वामपंथियों से सतर्क रहने को कहा।
गुणों को खुद में करें आरोपित
योगऋषि रामदेव ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को सफलता का मंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए कुछ गुणों की बहुत जरूरत होती है। उन गुणों को खुद में आरोपित करना होता है। शौर्य, पराक्रम, स्वाभिमान, वीरता और राष्ट्रभक्ति की चर्चा करते हुए उन्हें आत्मसात करने का सबक दिया। योगाचार्य रामदेव ने युवाओं से कहाकि कभी कुछ बनने की सोच कर कार्य करने से अच्छा है कि हम कुछ करने की सोचें। उस दिशा में अनवरत कार्य करते रहें। एक दिन ऐसा समय आयेगा, जब वह व्यक्ति एक बड़ा व्यक्तित्व बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि समय के सदुपयोग को ध्यान में रखकर लक्ष्य के प्रति निरंतर सन्नद्ध व्यक्ति ही सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है।
दिये सफलता के टिप्स
योगगुरु रामदेव ने युवाओं को सफलता के टिप्स भी दिये। हीनता, दीनता, नैराश्य, आत्मग्लानि, कुंठा जैसी भावनाओं को अपने अंदर स्थान न देने का संकल्प दिलाया। माता-पिता-गुरु को देवतुल्य मानने और विचारों को धरातल पर उतारने के प्रयास में निरंतरता बनाये रखने को कहा।
कराया संकल्प
योगगुरु रामदेव ने युवाओं से तीन संकल्प कराया। बताया कि इनकी अनदेखी से बनने वाले कार्य भी बिगड़ सकते हैं। इसलिए इन पर ध्यान रखें। इसके बाद उन्होंने सफलता अर्जित करने के तीन संकल्प कराये। पहला, भगवान के विधान का कभी भी अतिक्रमण नहीं करेंगे। दूसरा, देश के संविधान के प्रति हमेशा श्रद्धा रखेंगे और तीसरा वैयक्तिक जीवन की शुद्धता बनाये रखेंगे।

Published / 2022-11-25 17:17:50
कुंडली कालसर्प दोष से पुत्र प्राप्ति में बाधा : संदीप शास्त्री

टीम एबीएन, टाटीझरिया। प्रखंड के झरपो निवासी संदीप शास्त्री ने ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली मे कालसर्प दोष (सर्पशाप) से होने वाले पुत्र बाधा निवारण के संबंध में कहा कि सिसुते राहौ भौमदृष्टे भौम्भे वा सर्पशापद्विपुत्र।।८५।। यमे सुते चन्द्रदृष्टे सुतेशे राहुयुते सर्पशापद्वि पुत्र:।।८६।। सराहोपुत्र कारक: पुत्रेशे अबले भौमङ्गेशी  यूतौ सर्पशापद्वि पुत्र:।।८७।। सुतकारके सारे राखङ्गे पुत्रेशे त्रिके सर्पशापद्विपुत्र:।।८८।। पुत्रशे ज्ञे सारे कुजाशें राहु मानन्दीयुतेङ्गे च सर्पशापद्वि पुत्र:।।८९।। सुतेशो भौमे सुते राहौ सौम्यदृष्टे सर्पशापद्विपुत्र:।।१०।। सुताङ्गेशौ विबलो सज्ञेज्यौसुते पाप: सर्पशापद्विपुत्र:।।११।। लग्नेशे राहुयुते पुत्रेशे भौमयुते कारके राहुदृष्टे सर्पशापद्विपुत्र:।।१२।। पंचम भाव मे मंगल राहु मंगल से दुष्ट हो अथवा पंचम भाव मे मंगल की राशि का राहु स्थित हो।।८५।। पंचम भावस्थ चन्द्रमा से दृष्टि हो तथा पंचमेश राहु से युक्त हो।।८६।। 

पंचम भाव कारक यदि राहु  युक्त हो, पंचमेश निर्बल हो तथा लग्नेश भौम युक्त हो।।८७।। पंचम भावकारक यदि भौम से युक्त हो लग्न में राहु स्थित हो और पंचमेश त्रिकस्थ हो।।८८।। पंचमेश बुध भौम के नवांश में स्थिर होकर भौम से युत तथा राहु गुलिक से युक्त होकर लग्न में स्थित हो।।८९।। पंचमेश मंगल हो तथा पंचम भाव में राहु शुभ ग्रहों से दृष्ट अथवा युत हो।।९०।। पंचमेश और लग्नेश निर्बल होकर बुध और बृहस्पति से युत हो तथा पंचम भाव में पाप ग्रह स्थित हो।।९१।। लग्नेश राहु से और पंचमेश मंगल से युक्त हो तथा पंचम भावकारक राहु से दृष्ट हो।।९२।। 

उक्त सभी स्थितियों में सर्पशाप वंश में संतान (पुत्र) का अभाव होता है।।८५-१२।। उपर्युक्त विवरण से एक बात स्पस्ट हो जाती है कि यदि पंचम भाव लग्न पंचमेश या पंचम भाव कारक यदि मंगल राहु या केतू से किसी भी प्रकार का सबंध करते हो और निर्बल हो तो सर्पशाप के फलस्वरूप संतान सुख का अभाव होता है। जातक परिजात में भी- राहुकेतुयुते दृष्टे पंचमे बलवर्जिते। तादिशे वा तथा प्राप्ते  सर्पदोषात्सुतक्षय:।। पंचम भाव अथवा पंचमेश निर्बल होकर राहु या केतु से युत अथवा दृष्ट हो तो सर्प के शाप से पुत्र की हानि होती है। 
जानें क्या है इसकी निवारण विधि 
यदि पुत्रोत्पति में ऐसी बाधा हो तो चांदी का नाग-नागिन बनाकर  भगवान शिव के पास रखकर अभिषेक करें एवं नाग नागिन को बहते हुए जल मे प्रवाहित करें। तत्पश्चात अपने गांव के नजदीकी आसपास के दुर्गा माता मंदिर, शीतला माता मंदिर (देवी मंडप) प्रांगण में जाकर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। निश्चित ही माता जगत जननी, करुणामयी, ममतामयी एवं भागवत कृपा से पुत्रोत्पत्ति होगी, इसमें संदेह नहीं।

Published / 2022-11-24 22:06:52
रहें सतर्क... दिसंबर में 13 दिन बंद रहेंगे बैंक

एबीएन सोशल डेस्क। साल 2022 का आखिरी महीने दिसंबर को आने में चंद रोज ही रह गये हैं। इसी महीने में क्रिसमस का पर्व होता है तो वहीं इसी माह में बड़े दिन की छुट्टियां होती हैं, जिसके लिए लोग अभी से ही प्लानिंग कर रहे हैं लेकिन जश्न की तैयारी या घूमने-फिरने जाने के लिए इंसान को पैसों की जरूरत होती है। ऐसे में आपको ये जरूर पता होना चाहिए कि दिसंबर में किस दिन बैंक बंद रहेंगे और किस दिन खुलेंगे, जिससे आप उसके हिसाब से अपनी हॉलीडे की प्लानिंग कर सकते हैं।

आपको बता दें कि दिसंबर में एक-दो दिन नहीं बल्कि 13 दिन बैंक बंद रहने वाले हैं। फइक कैलेंडर के मुताबिक इस बार दिसंबर में क्रिसमस और गुरु गोविंद सिंह जैसे पर्व पड़ने से छुट्टियां बढ़ गई हैं। 31 दिन वाले दिसंबर महीने में चार संडे हैं तो वहीं सेंकड और फोर्थ शनिवार को भी बैंक बंद रहेंगे।
3 दिसंबर- शनिवार -सेंट फ्रांसिस जेवियर -गोवा का पर्व 4 दिसंबर- रविवार -सप्ताहांत -अवकाश 10 दिसंबर - शनिवार -महीने का दूसरा शनिवार- पूरे भारत में 11 दिसंबर - रविवार -सप्ताहांत -अवकाश 12 दिसंबर - सोमवार- संगमा सम्मान-मेघालय 18 दिसंबर- रविवार -सप्ताहांत -अवकाश 19 दिसंबर - सोमवार -मुक्ति दिवस -गोवा 24 दिसंबर - शनिवार- चौथा शनिवार -पूरे भारत में 25 दिसंबर - रविवार -सप्ताहांत -अवकाश 26 दिसंबर - सोमवार- क्रिसमस -सिक्किम, मेघालय 29 दिसंबर - गुरूवार- गुरु गोबिंद सिंह जी जन्मदिवस 30 दिसंबर - शुक्रवार- नांगबाह -मेघालय 31 दिसंबर - शनिवार -नये साल की पूर्व संध्या।

Published / 2022-11-21 10:31:00
धोनी का इलाज करने वाले वैद्य के रिश्तेदार भी करते हैं हड्डी के रोग का अचूक उपचार

एबीएन सोशल डेस्क। समाज में हुनरमंद लोगों की कमी नहीं है लेकिन आज भी कई ऐसे हुनरमंद लोग हैं जो आज भी गुमनामी के अंधेरे में जी रहे हैं। ऐसे ही एक इंसान हैं सरदूल सिंह जो लातेहार और लोहरदगा जिले के बॉर्डर पर स्थित अमवाटीकर सांगडीह गांव में रहते हैं। सरदूल सिंह के पास प्राकृतिक उपचार की ऐसी कला है, जिसके सहारे वे हड्डी से संबंधित रोगों का इलाज काफी आसानी से कर देते हैं। सरदूल सिंह की यह कला आसपास के लोगों के लिए वरदान साबित हुआ है। दूर-दूर से ग्रामीण सरदूल सिंह अपना इलाज कराने आते हैं। दरअसल, झारखंड के विख्यात वैद्य बंधन सिंह खेरवार, सरदूल सिंह के रिश्तेदार हैं।
बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को जब चोट लगी थी तब उन्होंने बंधन सिंह खेरवार से अपना इलाज कराया था। सरदूल सिंह ने प्राकृतिक उपचार की कला बंधन सिंह उनसे ही सीखी है। सरदूल के साथ इस काम में पत्नी गायत्री देवी भी सहयोग देती हैं। प्राकृतिक जड़ी बूटियों के बारे में गायत्री को भी अब अच्छी जानकारी हो गई है और गायत्री देवी भी इलाज के बारे सभी बारीकियां सीख चुकी है। दोनों पति-पत्नी के इस इलाज की कला से लोगों को लाभ मिल रहा है। 
सरदूल सिंह का जीवन बिलकुल फिल्मी कहानी की तरह है। पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री करने सरदूल सिंह ने होमगार्ड के जवान के रूप में काम करना शुरू किया। लगभग 5 साल पहले सरदूल सिंह के साथ एक दुर्घटना में हो जाता है और इसमें उनका पैर टूट जाता। इसके बाद कई बड़े-बड़े डॉक्टरों से सरदूल सिंह ने अपना इलाज कराया लेकिन, फिर भी उनका पैर ठीक नहीं हो पाया।

रांची के रिम्स में जब 3 महीने इलाज के बाद भी वो पूरी तरह ठूक नहीं हुए तो सरदूल को उनके रिश्तेदारों ने बंधन सिंह खेरवार के पास इलाज कराने की सलाह दी। लगभग एक महीने तक बंधन सिंह से इलाज कराने के बाद सरदूल सिंह का पैर पूरी तरह ठीक हो गया, इसके बाद से ही उनके मन में प्राकृतिक उपचार के प्रति विश्वास और बढ़ गया।

इलाज के बाद जब सरदूल सिंह पूरी तरह स्वस्थ हो गए तो बंधन सिंह खेरवार ने सरदूल सिंह को इस विद्या को सीखने की सलाह दी। जिसके बाद सरदूल सिंह ने इस विद्या को काफी तेजी से सीख लिया। इलाज की पद्धति को पूरी तरह से जानने के बाद सरदूल अपने गांव वापस लौटकर सभी का इलाज करने लगे। इलाज की प्राकृतिक पद्धति की जानकारी हासिल होने के बाद सरदूल सिंह ने अपने गांव और आसपास के गांव के दर्जनों लोगों का सफल इलाज किया है। सरदूल के बारे में दूर के लोग भी जानने लगे और अपना इलाज कराने आने लगे।

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