टीम एबीएन, जमशेदपुर/ रांची। जमशेदपुर के आदित्यपुर सहारा गार्डेन सिटी निवासी अंकिता आशी कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के हॉट सीट पर पहुंच गई है। इस एपिसोड में अंकिता आशी सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ हॉट सीट पर खेलते हुए नजर आई। बता दें कि अंकिता से पहले उनकी मां ज्योति सिन्हा भी कौन बनेगा करोड़पति में फास्टेट फिंगर तक पहुंच की है।
अंकिता आर्किटेक्ट अनूप कुमार की बेटी है। अंकिता ने बताया कि इनकी मां ज्योति सिन्हा भी कौन बनेगा करोड़पति में फास्टेट फिंगर तक पहुंच चुकी हैं। अंकिता के पिता जमशेदपुर के जाने माने आर्किटेक्ट इंजीनियर हैं। वे आशी आर्किटेक्ट के नाम से मशहूर हैं। अंकिता की सफलता पर पूरे परिवार और शुभचिंतकों ने उसे शुभकामनाएं दी हैं।
इधर, अमिताभ बच्चन ने काफी बेहतर बातचीत की जैसे लगा कि पुराने परिचित हैं। बता दें कि अंकिता केबीसी शो को बचपन से देख रही है। मां के कहने पर प्ले एलॉग खेलना शुरू किया। पहले कभी सोचा नहीं था कि हॉट सीट पर जाना है। हमेशा यही सोचा कि ठीक है एक फैमली टाइम है, सब साथ में शो देखते हैं। और खेलते भी रहते हैं। फिर जब सलेक्शन हुआ और कॉल आया तो काफी आश्चर्यजनक था। काफी इंटरव्यू हुआ उसके बाद फास्टेट फिंगर के लिए सलेक्शन हुआ। वहां जाने के बाद माहौल ही बिल्कुल अलग था।
अंकिता ने बताया कि केबीसी में दूसरी बार जाने का मौका मिला। पहली बार मां के साथ गयी थी, लेकिन इस बार प्रतिभागी बनकर जाने का मौका मिला। इसी वर्ष सितंबर में मां केबीसी में गयी थी, लेकिन वह हॉट सीट पर नहीं जा सकी थीं। साथ ही बता दें कि अंकिता की मां ज्योति सिन्हा ने कहा कि केबीसी इसलिए पसंद है कि बचपन से क्विज से लगाव रहा है। इससे ज्ञान बढ़ता है। पूरी फैमिली मिलकर केबीसी खेलते थे। मां ने बताया कि बेटी को हॉट सीट पर जाने का मौका मिला, जिससे पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है। अमिताभ जी का व्यवहार काफी पसंद है।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 3 दिसंबर 2022 को पूर्वाह्न 9:30 बजे नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय होचर, कांके, रांची, परिसर में मोक्षदा एकादशी के पावन दिवस पर गीता जयंती मनाया गया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह विहिप के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु इत्यादि ने दीप प्रज्ज्वलन एवं भगवान श्रीकृष्ण के पूजन अर्चन कर शुभारंभ किया।
इस अवसर पर देवी सिंह ने कहा कि जब धर्म और अधर्म के बीच के युद्ध में अर्जुन ने युद्ध स्थल पर हथियार डाल दिए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीगीता जी का उपदेश देते हुए कहा था संसार में मानव का सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र धर्म है। उन्होंने कहा व्यक्तिगत जीवन में मानसिंह धर्मात्मा हो सकता है परंतु महाराणा प्रताप जैसे देशभक्त के कार्य में विघ्न डालते हुए अधर्म कार्य किया था जिसके कारण आज भी वह समाज में उपेक्षित है।
उन्होंने कहा मानव जीवन में धर्म पल-पल बदलता है। धर्म का अर्थ कर्तव्य होता है। इस अर्थ में मानव जीवन में पितृ धर्म, मातृ धर्म, स्त्री धर्म, पुत्र धर्म, पुत्री धर्म, छात्र धर्म, शिक्षक धर्म, गुरु धर्म जैसे जीवन में अनेक धर्म आते हैं, जिसका मानव निष्ठापूर्वक पालन करते हुए अपने जीवन को पूर्ण करता है। उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों के रक्षा सदैव करते हैं चाहे द्रोपदी हो, चाहे अर्जुन।
राष्ट्रीय स्वाभिमान के शौर्य गाथा का प्रतीक है गीता जयंती : डॉ बिरेन्द्र साहू
प्रांत मंत्री डॉ साहू ने कहा मानव इतिहास में सबसे उत्कृष्ट ज्ञान और अलौकिक शक्ति संपन्न पुरुषार्थ का नाम है श्री कृष्ण। भारतीय जनमानस के लिए गीता जयंती का अनुपम महत्व है। श्रीगीता जी के द्वारा मानव को यथार्थ में जीने की कला बताई गई है। उन्होंने कहा वर्तमान समय में गीता जयंती का विशेष महत्व हिंदू समाज के शौर्य गाथा से जुड़ा है। 1528 में जिहादी आक्रांताओं के द्वारा अयोध्या में स्थित भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम का अलौकिक मंदिर को क्षति पहुंचाकर ढांचा का रूप देने का दुस्साहस किया गया था। इस पावन मंदिर को पुन: प्राप्त करने हेतु हिंदू समाज ने 76 संघर्ष करते हुए लगभग साढे चार लाख हिंदुओं ने बलिदान किए हैं। 1992 में गीता जयंती के पावन दिवस को लगभग 464 वर्ष तक रहे हिंदू समाज का माथे के कलंक रूपी ढांचा को भारतीय हिंदू समाज ने समाप्त कर दिया, इसलिए हम संपूर्ण हिंदू समाज गीता जयंती को स्वाभिमान के शौर्य गाथा का प्रतीक रूप में भी मनाते हैं। उन्होंने कहा अयोध्या में भगवान पुरुषोत्तम श्रीरामजी का अलौकिक, उत्कृष्ट एवं अनुपम भव्य मंदिर निर्माण हो रहा है,जो संसार के समस्त सनातनी हिंदू समाज के सांस्कृतिक अवधारणा एवं जीवन मूल्यों को प्रतिष्ठापित करते हुए आराधना एवं चिंतन का केंद्र बनेगा।
इस अवसर पर शिव प्रसाद साहू, उर्मिला केरकेट्टा, राकेशचंद्र झा, सुजीत उपाध्याय, मनीष साहू, सुनीता कश्यप, अनु देवी, राम किशोर साहू, विजय उरांव, दीपक साहू, रिंकी कुजुर, सुनीता मुंडा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप के झारखंड प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, सोनपुर/ पटना। बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने सोनपुर मेला में बिहार के पारंपरिक लोक गीतों के साथ रंग जमाया। पर्यटन विभाग के मुख्य मंच पर आयोजित कार्यक्रम में नीतू नवगीत ने सोहर, झूमर, नाचारी और दूसरे लोकगीत गाकर बिहार की माटी की सोंधी खुशबू मेला परिसर में बिखेरी। उन्होंने का ले के शिव के मनाई हो गाते हुए बाबा हरिहर नाथ का जयकारा लगाया और उसके बाद एक से बढ़कर एक झूमर गीत पेश किए। पटना से बैदा बुलाई द नजरआ गईली गुनिया, फर गईले नेमुआ उजडध गईले, ए सजनी अरे पिया गइले कलकताबा ये सजनी जैसे गीतों पर श्रोता झूमे।
उन्होंने जुग जुग जिया सु लालनवा (सोहर), पिपरा के पतवा फुनूंगिया डोले रे ननदी,चलनी के चालल दूल्हा,कजरा मोहब्बत वाला जैसे गीत सुना कर मेला में बहार ला दिया। उनके साथ भोला कुमार ने नाल पर, सुजीत कुमार ने हारमोनियम पर, पिंटू कुमार ने पैड पर, राजा राम राय ने बैंजो पर संगत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध एंकर ने किया। कार्यक्रम के उपरांत लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत को कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया गया।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। टेबल टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी अचंता शरत कमल को बुधवार को यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित किया।
शरत खेल रत्न हासिल करने वाले एकमात्र खिलाड़ी रहे जबकि बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन और एचएस प्रणय, महिला मुक्केबाज निकहत जरीन, ट्रैक एवं फील्ड खिलाड़ियों एल्धोस पॉल और अविनाश साबले सहित 25 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
खेल रत्न में 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, एक पदक और सम्मान पत्र दिया जाता है। अर्जुन पुरस्कार में 15 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, एक कांस्य प्रतिमा और सम्मान पत्र दिया जाता है। समारोह में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर विशेष तौर पर पहुंचे।
पुरस्कार विजेताओं की सूची
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार 2022 : अचंता शरत कमल।
अर्जुन पुरस्कार : सीमा पूनिया (एथलेटिक्स), एल्धोज पॉल (एथलेटिक्स), अविनाश मुकुंद साबले (एथलेटिक्स), लक्ष्य सेन (बैडमिंटन), एचएस प्रणय (बैडमिंटन), अमित (मुक्केबाजी), निकहत जरीन (मुक्केबाजी), भक्ति प्रदीप कुलकर्णी (शतरंज), आर प्रज्ञानानंदा (शतरंज), दीप ग्रेस एक्का (हॉकी), सुशीला देवी (जूडो), साक्षी कुमारी (कबड्डी), नयन मोनी सैकिया (लॉन बाउल), सागर कैलास ओवलकर (मल्लखंब), इलावेनिल वलारिवान (निशानेबाजी), ओमप्रकाश मिथरवाल (निशानेबाजी), श्रीजा अकुला (टेबल टेनिस), विकास ठाकुर (भारोत्तोलन), अंशु (कुश्ती), सरिता (कुश्ती), परवीन (वुशु), मानसी गिरीशचंद्र जोशी (पैरा-बैडमिंटन), तरुण ढिल्लों (पैरा-बैडमिंटन), स्वप्निल संजय पाटिल (पैरा-तैराकी), जर्लिन अनिका जे (बिधर बैडमिंटन)।
द्रोणाचार्य पुरस्कार 2022 नियमित श्रेणी : जीवनजोत सिंह तेजा (तीरंदाजी), मोहम्मद अली कमर (मुक्केबाजी), सुमा सिद्धार्थ शिरूर (पैरा-निशानेबाजी), सुजीत मान (कुश्ती)।
द्रोणाचार्य पुरस्कार लाइफटाइम अचीवमेंट श्रेणी : दिनेश जवाहर लाड (क्रिकेट), बिमल प्रफुल्ल घोष (फुटबॉल), राज सिंह (कुश्ती)।
लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए ध्यानचंद पुरस्कार 2022 : अश्विनी अकुंजी सी (एथलेटिक्स), धर्मवीर सिंह (हॉकी), बीसी सुरेश (कबड्डी), नीर बहादुर गुरुंग (पैरा एथलेटिक्स)।
राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2022 : ट्रांसस्टेडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, कलिंगा इंस्टीट्यूट आॅफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, लद्दाख स्की एंड स्नोबोर्ड संघ।
मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी 2022 : गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर।
तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार : नैना धाकड़ (थल साहस), शुभम धनंजय वनमाली (जल साहस), ग्रुप कैप्टन कुंवर भवानी सिंह सम्याल (लाइफ टाइम अचीवमेंट)।
टीम एबीएन, चरही (हजारीबाग)। चरही पंचायत के ग्राम सडवाहा के पश्चिमी छोर में अवस्थित है, पिकनिक स्पॉट बरदपिछरवा फॉल। जो सैलानियों के मन को मोहित करता है। यह फॉल चारों ओर से जंगलों, पहाड़ों और नदियों के बीच घिरा हुआ है। चरही से इसकी दूरी सात किलोमीटर है। यहां पहुचने के दो रास्ते हैं। एक रास्ते चरही-सडवाहा होते हुए और दूसरे रास्ते हत्यारी होते हुए लोग उस फॉल तक पहुंचते हैं। फॉल तक जाने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़क को बोकारो नदी तक ही निर्माण कराया गया है।
नदी में पानी रहने के कारण पार करना असंभव हो जाता है। जिस कारण पिकनिक मनाने वाले लोग अपने वाहन को खड़ी कर पैदल ही जाना पड़ता है। नदी पर पूल नहीं होने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रकृति ने इस फॉल को काफी सुंदरता के साथ गढ़ने का काम किया है। चारों और सुंदरता ही सुंदरता को बिखरे हुए हैं। यहां पहुचने के बाद मन को मोह लेता है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोग स्वर्ग का सैर कर रहे हैं। चारों ओर पक्षियों की चहचहाट व पहाड़ के ऊपर से छलछल करते झरने से फॉल में चार चांद लग जाता है और सौंदर्य को बढ़ाता है। यहां पर लंबी-लंबी चिकनी और खूबसूरत चट्टानें खूबसूरती को और भी निखारे हुए है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थल पर किसी जमाने में बैल और शेर में लड़ाई हुई थी। इस क्रम में बैल का पैर फिसल गया था। तबसे इस स्थल का नाम बरदपिछरवा पड़ा। आज भी बैल के पैर का निशान मौजूद है। इस फॉल के नजारा को देखने के लिए देश और विदेश के सैलानी कई पहुचे हैं। घनघोर जंगल होने के कारण पूर्व में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन माओवादी के शरणस्थली माना जाता था। जिस कारण लोग फॉल जाने से डरते थे। जैसे ही शरण स्थल समाप्त होते ही लोग पुन: आना-जाना शुरू कर दिये। इस फॉल को देखने, स्नान करने और पिकनिक मनाने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। लोग दिसंबर से लेकर जनवरी तक पिकनिक मनाते हैं।
लोगों का कहना है कि इस फॉल को सरकार द्वारा सुंदरीकरण कराया जाय तो यह स्थल हुंडरू फॉल और दशम फॉल से अतिसुंदर होगा। साथ ही सरकार को लाखों रुपये की राजस्व की प्राप्ति हो सकती है और यह फॉल राज्य ही नहीं पूरे विश्व मे विख्यात हो सकता है। तथा स्थानीय बेरोजगारों के लिए एक रोजगार का साधन बन जायेगा।
एबीएन सोशल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि समाज को जगाने वाले सभी महापुरुषों ने अध्यात्म को आधार बनाया है और इसके बिना धर्म संभव नहीं है। संगम नगरी के अलोपीबाग स्थित स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के आश्रम में आयोजित आराधना महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम के बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुये भागवत ने कहा, आप संत, महात्मा, सन्यासियों को देखें या सामाजिक जीवन में काम करने वाले महापुरुषों- रवींद्रनाथ टैगोर, गांधी जी या अंबेडकर को देखें। वह (अंबेडकर) भी कहते थे कि बिना धर्म के कुछ नहीं होगा।
संघ प्रमुख ने कहा, धर्म का अर्थ है सबको साथ लेकर चलना, सबको साथ चलाना, सबको उन्नत करना। जहां धर्म नहीं है वहां लोग यह मानते हैं कि जो बलवान है वह आगे जायेगा और जो दुर्बल है वो मरेंगे ही। धर्म कहता है कि जो बलवान है उसे दुर्बलों की रक्षा करनी चाहिए। धर्म निकलता है अध्यात्म से। उन्होंने कहा, हमारे व्यक्तिगत जीवन, हमारे पारिवारिक जीवन और हमारे राष्ट्रीय सामाजिक जीवन को शुद्ध बनाने वाला अध्यात्म ही है। संघ प्रमुख ने कहा, यदि लोगों को मार्गदर्शन नहीं मिलता तो वे भटकते ही हैं। अपने राष्ट्र का सौभाग्य है कि अपने आचरण से लोगों का मार्गदर्शन करने वाले महापुरुषों की परंपरा अखंड रूप से चलती आई है। ब्रह्मलीन स्वामी शांतानंद सरस्वती उसी परंपरा से थे। भागवत ने कहा, जीवन को मनुष्य जीवन बनाने के लिए व्यक्ति को आध्यात्मिक होना पड़ेगा। भौतिक और आध्यात्मिक जीवन को अलग अलग करके देखने की वृत्ति, हमारी वृत्ति नहीं है क्योंकि हम एकात्म और समग्र दृष्टि से सारी बातों को देखते हैं।
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य रहे ब्रह्मलीन ब्रह्मानंद सरस्वती की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित आराधना महोत्सव आठ दिसंबर, 2022 तक चलेगा जिसमें श्रीनाथ पीठाधीश्वर स्वामी आचार्य जितेंद्र नाथ जी महाराज द्वारा श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा सुनाई जायेगी। उद्घाटन कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, स्वामी आचार्य जितेंद्र नाथ जी महाराज और कई साधु संत शामिल हुए।
टीम एबीएन, कोडरमा। मारवाड़ी युवा मंच की इकाई प्रेरणा शाखा सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से कार्यक्रम आयोजित कर लोगों के लिए प्रेरणा श्रोत बन गयी है। समाज के अंतिम पायदान तक के लोगों के लिए सेवा ही इनका लक्ष्य है। सोमवार को प्रेरणा शाखा ने दो कार्यक्रम आयोजित किये जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत जरूरतमंद कन्या जिसका विवाह होना है उसे साड़ी, सूट सोने का नाक का कांटा, होने वाले दूल्हे के लिए शेरवानी, घड़ी, आयरन, कंबल, कुकर आदि समान उपलब्ध कराये। साथ ही प्रेरणा शाखा की पदाधिकारी और सदस्यों ने विवाहित जीवन के लिए अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।
मौके पर प्रेरणा शाखा की अध्यक्ष श्रेया केडिया ने कहा कि पुनीत कार्य है कन्या के विवाह में सहयोग करना। अंधकार को समाप्त करने के लिए जिस तरह दीपक की जरूरत होती है उसी प्रकार समाज में अपने सामाजिक दायित्व का भी निर्वाह करने की जरूरत होती है। समाज में बदलाव लाने के लिए सहयोग की भावना प्रकट करने के लिए प्रेरणा शाखा कार्य कर रही है। वहीं दूसरी ओर शाखा ने यदुटांड़ गौशाला परिसर में गौ आहार कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर शाखा कि सचिव नेहा हिसारिया परियोजना निदेशक शालू चौधरी ने कहा कि गाय में 36 करोड़ देवी- देवताओं का वास होता है। और गौ सेवा ही सच्ची सेवा होती है। मौके पर गौ को गुड़, चोकर, रोटी गौ माताओं को खिलाई गयी। इस अवसर पर सारिका लड्ढा, मिनी हिसारिया, स्वेता गुटगुटिया, मीना हिसारिया, रश्मि गुटगुटिया, कृतिका मोदी, सीए गुंजन अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर के नेतृत्व में दिव्य दिग्विजय रामराज्य रथ यात्रा का महादेव मंडा चुटिया से आज प्रात: 5:00 श्री रामलला के महाआरती के बाद नगर भ्रमण पुष्प वर्षा के साथ प्रारंभ हुआ जो चुटिया थाना, सुजाता चौक, राजेंद्र चौक, श्री शिव मंदिर महावीर मंदिर डोरंडा,शिव मंदिर कडरू, सहजानंद चौक,श्री श्याम मंदिर रातु रोड चौक, कचहरी चौक, करम टोली चौक, मेडिकल चौक, शिव मंदिर, हाऊसिंग कॉलोनी चौक, बड़ागाई चौक, शिवाजी चौक, बूटी बस्ती, विकास, ओरमांझी, पटेल चौक रामगढ़, सुभाष चौक दुर्गा मंडप रामगढ़, चरही, हजारीबाग, इचाक,पदमा,बरही,चौपारण होते हुए गया , बिहार के लिए प्रस्थान हो गया।
चुटिया से निकलने के बाद श्रीराम राज्य दिग्विजय रथ का डोरंडा शिव मंदिर, श्याम मंदिर, मेडिकल चौक, बरियातू हाउसिंग कॉलोनी, बड़ागांई चौक, बूटी, विकास, ओरमांझी, पटेल चौक रामगढ़ इत्यादि स्थानों पर गणेश शंख, पांचजन्य, पोंड्र, देवदत्त, महालक्ष्मी, कामधेनु, गरुड़ इत्यादि शंख ध्वनि एवं वेद मंत्रों अन्य वाद्य यंत्र के गगनभेदी गुंजों के बीच पुष्प वर्षा करते हुए स्वागत अभिनंदन किया गया।
मार्ग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए रामराज्य दिग्विजय यात्रा के पूज्य संत श्रीशक्ति शांतनंदा महर्षि, (राष्ट्रीय सचिव श्री रामदास मिशन) ने कहा रामराज्य स्थापित करने के लिए त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था इसी प्रकार श्री राम जन्मभूमि पर बनने वाली भव्य राम मंदिर पूर्ण होने के पूर्व पूरे भारत में दिग्विजय रथ यात्रा कर रामराज की स्थापना का संदेश दे रही है। उन्होंने कहा यह यात्रा 5 अक्टूबर से अयोध्या से प्रारंभ होकर नेपाल काठमांडू सहित भारत के 27 राज्यों का लगभग 15000 किलोमीटर भ्रमण कर 2 दिसंबर को पुन: अयोध्या पहुंचेगी तथा गीता जयंती के पावन अवसर पर यज्ञ अनुष्ठान करके रामराज स्थापना की संकल्प लिया जायेगा। उन्होंने कहा इस यात्रा का तीन मुख्य उद्देश्य है प्रथम केंद्र सरकार से मांग की गई है भारत इंडिया नहीं है, क्योंकि इंडिया माता नहीं कहां जाता है जब भी कहा जाता है तो भारत माता की जय ही कहा जाता है अत: इस देश का नाम भारत हो। दूसरी बात उन्होंने कहा सरकार देश के जिहादी आक्रांताओं एवं लूटेरा ईसाई मिशनरियों का इतिहास हमारा भारतीय इतिहास नहीं है। हमारा आदर्श भगवान श्रीराम है, श्री कृष्ण है, शिवाजी है, बिरसा मुंडा है हमें अपने आदर्शों का इतिहास बच्चों को पढ़ाने का पाठ्यक्रम तैयार किया जाए। उन्होंने तीसरी मांग को बताते हुए कहा श्री राम मंदिर के बन जाने के बाद रामराज्य की कल्पना तभी पूरी हो सकती है जब भगवान श्री राम को जन-जन की भावना तक हम जोड़ पाए इसके लिए पाठ्यक्रम में हमारे आराध्य देवताओं एवं राष्ट्र भक्त सपूतों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का समावेश हो।
प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने कहा भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम का मंदिर, देश का राष्ट्र मंदिर होगा। क्योंकि श्री राम मंदिर राष्ट्र स्वाभिमान का पुनर्स्थापन है। भगवान पुरुषोत्तम राम का मंदिर विश्व के समस्त प्राणियों के लिए प्राण के समान होगा क्योंकि सनातन परंपरा ही समस्त जीवो के अंदर में भगवान को विराजमान पाता है उसकी सुरक्षा, समृद्धि एवं संरक्षण का विषय के संदर्भ में सनातन परंपरा ही सोचता है। इस यात्रा का नेतृत्व विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी, प्रचार प्रसार विभाग प्रमुख अमर प्रसाद, महानगर सहमंत्री विश्वरंजन कुमार, ग्रामीण जिला मंत्री रोबिन कुमार, सहमंत्री रोशन कुमार, दीपक साहू, रतन केसरी, श्रीराम नगर कार्यवाह बैजनाथ, विभाग संयोजिका काजल सोनी इत्यादि ने की। उक्त जानकारी विहिप के अमर प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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