टीम एबीएन, रांची। किशोरगंज चौक स्थित ग्राम देवी मंडप में एक जनवरी को महाआरती का आयोजन किया जायेगा। महाआरती 301 महिलाओं की ओर से किया जायेगा। सभी महिलाओं को सुहाग पिटारा दिया जायेगा। साथ ही विशाल भंडारा का भी आयोजन किया जायेगा। भंडारा का आयोजन मंदिर परिसर में होगा। मंदिर समिति के सदस्य कार्यक्रम को लेकर तैयारियों में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस तरह का आयोजन पिछले 10 सालों से किया जा रहा है। हर साल एक जनवरी को मां के दरबार को अदभुत रूप से सजाया जाता है, दरबार को कभी स्वर्गलोक, वनदेवी, नवदुर्गा के रूप में सजाया जाता है।
एबीएन सोशल डेस्क। फूलगोभी एक लोकप्रिय सब्जी है। भारत में इसकी कृषि का कुल क्षेत्रफल लगभग 3000 हेक्टर है, जिससे तकरीबन 6,85,000 टन उत्पादन होता है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तथा अन्य शीतल स्थानों में इसका उत्पादन व्यापक पैमाने पर किया जाता है। वहीं महाराष्ट्र में फूलगोभी की खेती लगभग 7000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। वर्तमान में इसे सभी स्थानों पर उगाया जाता है। फूलगोभी की खेती पूरे वर्ष की जाती है और फूलगोभी भारत वर्ष की शीतकालीन गोभी वर्गीय सब्जियों में एक प्रमुख सब्जी है।
इसमें फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, चूना, सोडियम, आयरन और विटामिन ए जैसे खनिजों से भरपूर होती हैं। इसलिए इस सब्जी की फसल आहार में महत्वपूर्ण है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक पौधा लगाने के 60-80 दिन तथा देर से तैयार होने वाली किस्म से 100-120 दिन में गोभी तैयार हो जाती है।
फूल गोभी की खेती के लिए सही मौसम : सर्दियों की जलवायु इस फसल के अनुकूल है। आमतौर पर 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि के लिए अनुकूल होता है। चूंकि फूलगोभी की किस्में तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए उन्हें उनकी जलवायु आवश्यकताओं के अनुसार चुना जाना चाहिए।
फूल गोभी की खेती के लिए कैसी हो भूमि : गोभी की खेती के लिए सभी प्रकार की अच्छे जल निकास वाली भूमि उपयुक्त होती है, परंतु हल्की एवं दोमट मिट्टी जिसका जल निकास अच्छा होती है। इसके अतिरिक्त भूमि भी अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए जिसमें जलभराव की समस्या न हो तथा उत्तम जीवाश्म वाली मिट्टी हो, जिसका पीएच मान 5.5 से 6.8 के मध्य होना चाहिए।
फूलगोभी की उन्नत किस्में : इसकी खेती मौसम के आधार अगेती, मध्यम और पछेती खेती के लिए वर्तमान समय में फूलगोभी की कई उन्नत किस्म बाजारों में उपलब्ध है। अगेती किस्में – अर्ली, कुंआरी, पूसा कातिकी, पूसा दीपाली, समर किंग पछेती – पूसा स्नोबाल-1, पूसा स्नोबाल-2, पूसा स्नोबाल-16 मध्यम किस्में – पंत सुभ्रा, पूसा सुभ्रा, पूसा सिन्थेटिक, पूसा अगहनी, पूसा स्नोबाल
उर्वरक और पानी का कब करें उपयोग : फूलगोभी के लिए 75 किग्रा एन, 75 किग्रा एस और 75 किग्रा के भी दें। 75 किग्रा एन की दूसरी किश्त रोपण के 1 माह बाद डालें।
रोगों से फसलों को बचाने का उपाय
रोग : फूलगोभी की सब्जियां विभिन्न कीड़ों से प्रभावित होती हैं जैसे कैटरपिलर लार्वा, पत्ता गोभी पर पत्ता गोभी का मक्खन मक्खी, साथ ही ब्लैक लेग, क्लब रूट, गोनोरिया, सीडलिंग पतन, लीफ स्पॉट जैसे रोग।
उपाय : कीड़ों के संक्रमण के लिए नर्सरी से संक्रमित सब्जियों में एंडोसल्फान 35 सीसी 290 मिली या फॉस्फोमिडॉन 85 डब्ल्यूयूएससी 60 मिली या मैलाथियान 50 सीसी 250 मिली प्रति हेक्टेयर 250 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
टीम एबीएन, बिष्णुगढ़ (हजारीबाग)। बिष्णुगढ़ प्रखंड प्रक्षेत्र के पिकनिक स्पॉट सैलानियों को खूब लुभाने लगे हैं। अंग्रेजी नववर्ष की दस्तक के साथ ही लोगों के जेहन में पिकनिक और सैर करने की प्लानिंग शुरू हो जाती है और इस बीच पिकनिक स्थलों का चयन लाजिमी है। प्रखंड प्रक्षेत्र स्थित कुछ पर्यटन स्थल ऐसे हैं, जो सैलानियों और सैर सपाटे के लिए प्रमुखता से इंतजार करती हैं।
मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर विष्णुगढ़-गोमिया मुख्य मार्ग से कुछ दूर सदारो गांव स्थित चंद्रु जल प्रपात पर्यटकों को नये साल में अपनी ओर बरबस आकर्षित कर रही है। यहां की खूबसूरत वादियां लोगों को पिकनिक के साथ सैर सपाटे लिए खूब लुभाती हैं। दूर-दूर से लोग यहां नये वर्ष के मौके पर पिकनिक और सैर मनाने के लिए आते हैं। वहीं 17 किमी दूर कोनार डैम भी लोगों के लिए पहली पसंद रहती है।
पिकनिक के अलावे सैर सपाटे के लिए भी यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पिछले वर्ष हजारीबाग व्यवहार न्यायालय से अधिवक्ताओं की टोली यहां पिकनिक और सैर का आनंद के लिए पहुंची थी। तो कई पॉलीटिशियनों की भी चहलकदमी होती रहती है। मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर बगोदर-विष्णुगढ़ मार्ग से पूरब तकरीबन 1.5 किलोमीटर अंदर हेठली बोदरा गांव की घनी वादियों के बीच मुखर्जी डबल डेकर पुल प्रकृति की मनोरम छटा से लबरेज है।
यहां का मनोरम प्राकृतिक दृश्य सैलानियों के लिए पिकनिक को खूब लुभाती है। दूर दराज के लोगों के लिए सैर करने और नये साल में पिकनिक का जश्न मनाने के लिए पसंदीदा स्थल रहा है। नये वर्ष में लोगों की हुजूम उमड़ पड़ती है। चहुओर घने जंगलों के बीच दो मंजिला पुल के साथ कल-कल करती जमुनिया नदी और इन सभी के बीच रंग-बिरंगे पक्षियों की करवल ध्वनि लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
टीम एबीएन, रांची। आज उषा मार्टिन द्वारा चलाया जा रहा योग अभियान में सत्यानंद योग मिशन और आरोग्य भारती अपने पांच दिनों का मधुमेह प्रबंधन योग शिविर अनगड़ा प्रखंड के सामुदायिक भवन में प्रारंभ किया गया। योग प्रमुख स्वामी मुक्तरथ जो आरोग्य भारती के प्रान्त मधुमेह प्रबंधन प्रमुख हैं।
उन्होंने अपने टीम के साथ सैकड़ों ग्रामीण को बढ़ते मधुमेह के प्रति जागरूक किये और योग के जरिये मधुमेह को रोकने तथा रोगमुक्त होने के उपाय बताये। उन्होंने योग द्वारा आंतरिक आमाशय, पेट और आंतों की सफाई की विधि, प्राणायाम द्वारा श्वसन मार्ग और मानसिक सुद्धिकरन की विधि तथा ध्यान के द्वारा तनावमुक्ति की विधि को बताये।
अनगड़ा पंचायत के मुखिया मधुसूदन मुंडा, इस कार्यक्रम के सहयोगी शालिनी हॉस्पिटल के राणा विकाश, शिशिर भगत एवं उपमुखिया ने मुक्तरथ जी का स्वागत किया और योग महत्वों को समझते हुए योगाभ्यास कक्षा में शामिल हुए।
मुखिया मधुसूदन मुंडा ने कहा कि योग बहुत शक्तिशाली विद्या है जो शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ा देता है। स्वामी मुक्तरथ ने कहा कि अब गांव में भी मधुमेह का आगमन हो चुका है इसे सही दिनचर्या, नियमित योगाभ्यास, स्वच्छ प्रयावरण व्यवस्था पर ईमानदारी पूर्वक आगे बढ़ने से रोका जाना बिल्कुल संभव है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मथुरा के न्यायालय ने यह आदेश दिया है कि कृष्ण जन्म-स्थान का सर्वे कराया जाये, नक्शा बनाया जाये और अगली तारीख पर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाये। ऐसा ही आदेश वाराणसी में हुआ था। उसको इंतजामिया कमेटी ने चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय में, चुनौती निरस्त हुई। इंतजामिया कमेटी सर्वोच्च न्यायालय गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे को रोका नहीं और सर्वे हो गया। हमें आशा है कि यहां पर भी यह सर्वे अब संपन्न हो जायेगा।
उन्होंने कहा कि जिस किसी भी व्यक्ति को सत्य का सामना करने की हिम्मत है और उसके पास छुपाने को कुछ नहीं है, वह सर्वे का विरोध नहीं कर सकता क्योंकि, सर्वे से तो केवल जो वर्तमान परिस्थिति है, उस परिस्थिति का जो सत्य है वही तो सामने आयेगा। हम उत्सुकता से इस आदेश के पूरा होने की प्रतीक्षा करेंगे। हमें विश्वास है कि इस सर्वे से न्यायालय को सत्य संधान कर उचित निर्णय करना शक्य हो पायेगा। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। 25दिसम्बर को तुलसी दिवस पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इसे सनातनी बड़े ही विधि विधान से मनाते हैं। मान्यता है कि जो कोई भी तुलसी पूजा करते हैं उसे अपार सुख और पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जाता है कि तुलसी अत्यंत प्रिय है। हिंदू परंपराओं में तुलसी की पूजन करना बेहद शुभ माना जाता है।
कई लोग अपने दिन की शुरुआत तुलसी में जल चढ़ा कर और आशीर्वाद लेकर करते हैं। इस वर्ष तुलसी पूजन 25 दिसंबर आज के ही दिन मनाया जा रहा है। कहा जाता है कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुलसी में देवी लक्ष्मी का वास होता है। अतः जो कोई भी तुलसी की पूजा करते हैं उसे अपार सुख और पुण्य प्राप्ति होती है।
वहीं दूसरी ओर तुलसी भगवान विष्णु को अधिक प्रिय है। हर हिन्दू के घर के आंगन मे तुलसी का पौधा लगाया जाता है। तुलसी का महत्व हमारे हिन्दू परम्परा me सबसे ज्यादा है।
टीम एबीएन, दारू (हजारीबाग)। दारू प्रखंड के पाण्डेयटोला जबरा निवासी अंकित कुमार पिता प्रदीप शर्मा का दारू में रविवार को भव्य स्वागत किया गया। अंकित ने यूपीएससी इंजीनयरिंग की परीक्षा को क्वालीफाई कर देश मे छठा रैंक लाये हैं, जिससे पूरे प्रखंड क्षेत्र के लोगों में काफी खुशी है।
रविवार को अंकित के मुम्बई से दारू आगमन होने पर पेटो चौक से जबरा पाण्डेयटोला तक गाजे बाजे के साथ ले जाया गया। इसके लिए एक खुली वाहन को फूलों से सजाकर अंकित को फूलमाला से लाद दिया गया और अतिशबाजी और पुष्पवर्षा के साथ उन्हें उनके घर तक ले जाया गया। इस दौरान सड़क के दोनों ओर लोग खड़े होकर अंकित को आशीर्वाद और बधाई दी। इस दौरान अंकित ने रास्ते मे आने वाले मंदिरों में मत्था टेका और भगवान का आशीर्वाद लिया।
अंकित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता, गुरुजन और कठोर परिश्रम को दिया उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है, बशर्ते ईमानदारी से प्रयास किया जाये। घर में माता पिता भाई बहन का साथ मिला, जहां भी शिक्षा ग्रहण किया हमेशा अपने गुरुओं से कुछ सीखने की कोशिश की। उनकी सफलता पर उनके घर के परिजनों के साथ-साथ पूरे प्रखंड की जनता काफी खुश है।
एबीएन सोशल डेस्क। क्रिसमस डे 25 दिसंबर को मनाया जाता है। क्रिसमस डे क्यों मनाया जाता है? प्रभु यीशु मसीह का जन्म 25 दिसम्बर को हुआ था। जिसकी वजह से इस दिन को क्रिसमस के तोर पर मनाया जाता है। मान्यता है कि यीशु मसीह ने इसी दिन मरियम के घर जन्म लिया था। क्रिसमस ईसाई धर्म का प्रमुख त्यौहार है।
हर साल 25 दिसम्बर को मनाया जाता है। क्रिसमस का पर्व इसाई धर्म के संस्थापक यीशु मसीह के जन्म दिवस के रूप मे मनाया जाता है। दिसंबर महीना शुरू होते ही लोग क्रिसमस के लिए तैयारियों में जुट जाते हैं। लोग अपने अपने घरों को सुंदर तरीके से सजाते हैं। इस दिन इसाई धर्म के लोग चर्च में जाकर प्रार्थना करते हैं, मोमबत्ती जलाते हैं, घर में क्रिसमस ट्री सजाकर प्रार्थना करते हैं और केक काटते हैं। इसके अलावा तमाम तरह के पकवान बनाकर हैं और पार्टी करके इस त्योहार को मनाते हैं। साथ ही इस दिन छोटे बच्चों को सांता क्लॉज इंतजार रहता है।
यीशु मसीह ने ईसाई धर्म के लोगों के लिए बहुत से कार्य किए थे। यीशु मसीह को लोग सूर्यदेव की तरह मानते थे। उन्हें लोग भगवान मानते थे, जिस कारण से यीशु मसीह के जन्मदिन के ही अवसर पर क्रिसमस डे मनाया जाता है। साईं धर्म के सबसे प्रमुख त्योहार क्रिसमस डे है।
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