एबीएन सेंट्रल डेस्क। नव वर्ष के उपलक्ष्य में मां वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। देश-विदेश से आये भक्तों का कटड़ा में लगातार आगमन जारी है, जिससे पूरा क्षेत्र जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा है।
आंकड़ों के अनुसार, वीरवार दोपहर 3 बजे तक करीब 35 हजार श्रद्धालु भवन की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाये रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किये गये हैं। वहीं यदि वर्ष 2025 की बात करें तो पूरे वर्ष के दौरान 69,78,806 श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
यह आंकड़ा दशार्ता है कि श्रद्धालुओं की आस्था में किसी भी तरह की कमी नहीं आयी है। श्राइन बोर्ड और जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गयी है कि वे यात्रा के दौरान नियमों का पालन करें और मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा करें, ताकि दर्शन सुचारु रूप से संपन्न हो सकें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में दिनांक 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धाभाव वातावरण में आयोजित किया गया। आज वर्ष 2025 की अंतिम एकादशी पर प्रात: से ही भक्तों की भारी भीड़ इस पावन दिवस पर श्री श्याम प्रभु का दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ी।
इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को सुंदर नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर गुलदाऊदी, रजनीगंधा, गुलाब एवं तुलसी दल की मालाओं से अत्यंत मनमोहक श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान बजरंगबली और शिव परिवार का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया।
रात्रि 9 बजे से श्री श्याम प्रभु के जयकारों की बीच पावन ज्योत प्रज्ज्वलित कर श्री श्याम मंडल के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण संकीर्तन प्रारम्भ किया गया। तुझको रिझायेंगे भजन तेरा सुनायेंगे, खूब सज्यो श्रृंगार खाटू वाले को, छोड़ेंगे ना हम तेरा द्वार ओ बाबा सात जन्म तक, हमें तो जी भी दिया श्याम बाबा ने दिया... इत्यादि भजनों की लय पर भक्तगण झूमते रहे। मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मेवा - फल - खीर चूरमा व केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में ओम जोशी, रमेश सारस्वत, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, मनोज ढांढणनीयां, गौरव परसरामपुरिया, नितेश केजरीवाल, नितेश लाखोटिया, विकास पाडिया, प्रियांश पोद्दार का सहयोग रहा।
कल दिनांक 31 दिसंबर 2025 को द्वादशी के उपलक्ष में श्री श्याम प्रभु को संध्या 6 बजे खीर चूरमा का भोग अर्पित किया जायेगा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। वरिष्ठ समाजसेवी धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विकास में ब्राह्मण समाज की भूमिका सदैव मार्गदर्शक रही है। किंतु वर्तमान समय में यह समाज उपेक्षा, विभाजन और राजनीतिक शोषण का सामना कर रहा है।
अलग-अलग जाति और वर्ग अपने हितों को लेकर संगठित हो चुके हैं, जबकि ब्राह्मण समाज बिखरा हुआ है और उसकी समस्याओं पर न तो समाज के भीतर समुचित चिंता हो रही है और न ही राजनीतिक स्तर पर ठोस पहल दिखाई दे रही है।
धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि ब्राह्मण समाज के भीतर आज भी बड़ी संख्या में लोग गरीबी, बेरोजगारी, असुरक्षा और सामाजिक उपेक्षा में जीवन यापन कर रहे हैं। राजनीतिक दल चुनाव के समय समाज की भूमिका को महत्व देते हैं, लेकिन बाद में उनके सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे समाज में निराशा बढ़ रही है, जो सामाजिक समरसता के लिए घातक है।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में रहने वाले भारत के विभिन्न प्रांतों और भाषाओं से जुड़े ब्राह्मण, जो समाज के प्रति क्रियाशील हैं चाहे वे किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हों, सामाजिक संगठनों में कार्यरत हों या धार्मिक क्षेत्र में सक्रिय हों सभी को एक साझा मंच पर लाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से आगामी जनवरी माह में एक विशेष तिथि निर्धारित कर एक व्यापक चिंतन-बैठक आयोजित की जायेगी।
इस बैठक में समाज की एकता, समरसता, बहन-बेटियों की सुरक्षा, बच्चों के भविष्य, सामाजिक सम्मान और समग्र विकास पर गंभीर विचार किया जायेगा। धर्मेंद्र तिवारी ने सभी ब्राह्मण बंधुओं से आह्वान किया कि वे दलगत और प्रांतीय सीमाओं से ऊपर उठकर विचार, विवेक और संवाद के माध्यम से समाज, राज्य और राष्ट्र के कल्याण हेतु एकजुट हों। उक्त जानकारी धर्मेंद्र तिवारी (9431115714) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में प्रतिदिन चल रहे वेजिटेबल खिचड़ी भोग प्रसाद 10 दिनों में 4 हजार से भी अधिक भक्तों ने खिचड़ी भोग ग्रहण किया।
ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि श्री राधा कृष्ण मंदिर में 20 दिसंबर से प्रत्येक दिन अन्नपूर्णा वेजिटेबल खिचड़ी भोग का वितरण दोपहर 12:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जा रहा है तथा प्रतिदिन 4 सौ से भी अधिक श्रद्धालु वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद प्राप्त कर रहे हैं।
प्रतिदिन खिचड़ी प्रसाद का विधिवत भोग मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे द्वारा मंदिर मे दोपहर 12 बजे लगाया जाता है। तत्पश्चात श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी भोग का वितरण किया जाता है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी डॉ सदानंद जी महाराज के सानिध्य मे प्रतिदिन मंदिर परिसर में अन्नपूर्णा खिचड़ी भोग सेवा चलाया जा रहा है।
ट्रस्ट द्वारा विगत 5 वर्षों से मंदिर मे प्रत्येक रविवार को श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद भंडारा का आयोजन किया जाता है। जिसमें हजारों लोग भंडारा का प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुगण दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद / रांची। धनबाद के कतरास बाजार स्थित राजस्थानी धर्मशाला में विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत कार्यसमिति की तीन दिवसीय बैठक का समापन विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अम्बरीष जी के उद्बोधन के साथ समाप्त हुआ।
समापन समारोह में उपस्थित विश्व हिंदू परिषद के प्रांत, विभाग एवं जिला के पदाधिकारी को संबोधित करते हुए श्री अंबरीश सिंह ने कहा कि स्वाधीन देश में स्व का अभिमान करने वालों की कमी के कारण हमारी संस्कृति को नष्ट करने का कुचक्र चलता रहा। सनातन मानबिंदु, आचार पद्धति, संस्कृति को सुरक्षित रखने के विचार से ही विश्व हिंदू परिषद की स्थापना की गई थी।
मंदिर सनातन परंपरा के श्रद्धा एवं भक्ति- शक्ति का केंद्र होता था जिसे आक्रांताओं ने निरंतर क्षति पहुंचाने पहुंचाने की चेष्टा की। परिवारों में परंपरागत संस्कार का अभाव देखने को मिल रहा है परिवार में संस्कारों का जिस तरह क्षरण हो रहा है उसके रक्षण की आवश्यकता है । गोरक्षा, सेवा, धर्म प्रसार, सामाजिक समरसता, जैसे आयामों पर विशेष कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने बताया 12 से 18 जनवरी तक मकर संक्रांति उत्सव समरसता दिवस के रूप में, माघ पूर्णिमा के दिन श्री रविदास जयंती, वर्ष प्रतिपदा से हनुमान जन्मोत्सव तक सभी समितियों के माध्यम से श्री रामोत्सव, एवं 14 जनवरी को बाबा साहब अंबेडकर जयंती प्रत्येक प्रखंड केन्द्रों में मनाया जाएगा। इसके साथ ही समिति का दृढिकरण एवं आयामों के कार्यों का विस्तार करने का निर्णय लिया गया।
प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने विभिन्न जिलों से आए समस्त प्रतिनिधियों एवं वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने हजारीबाग के डेमोटांड़ में परिषद द्वारा चल रहे आवासीय विद्यालय एवं अन्य सेवा कार्यों की जानकारी देते हुए झारखंड के सभी जिलों में सेवा कार्य सुचारू रूप से चलाने का आग्रह किया। इस अवसर पर क्षेत्र मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू जी द्वारा प्रांत के नवीन दायित्व एवं प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र द्वारा जिलों के नवीन दायित्वों की घोषणा की गयी।
कीर्ति गौरव दुर्गा वाहिनी प्रांत संयोजिका, गंगा कच्छप प्रांत सहसंयोजिका, शशि शर्मा एवं अनिमा पांडे को प्रांत मातृशक्ति सहसंयोजिका, सविता सिंह संस्कार केंद्र प्रांत प्रमुख मातृशक्ति एवं कीर्ति सुमन मोदी को प्रांत साप्ताहिक मिलन केंद्र एवं संस्कार केंद्र प्रमुख दुर्गावाहिनी का दायित्व दिया गया। बैठक का समापन बजरंग दल प्रांत संयोजक श्री रंगनाथ महतो ने पूर्णता मंत्र एवं जयघोष के साथ कराया।
बैठक में क्षेत्र संगठन मंत्री माननीय आनंद पांडे, क्षेत्र गोरक्षा टोली के पालक त्रिलोकी नाथ बागी, प्रांत उपाध्यक्ष श्री गंगा प्रसाद यादव, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, देवी सिंह प्रांत सह मंत्री श्री राम नरेश सिंह, श्री मनोज पोद्दार, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख श्री जुगल किशोर प्रसाद, प्रांत सत्संग प्रमुख श्री रंजन कुमार सिन्हा, विशेष संपर्क प्रांत प्रमुख अरविंद सिंह, गोरक्षा प्रांत प्रमुख कमलेश सिंह, प्रांत प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन, सामाजिक समरसता प्रांत सह प्रमुख मनोज चंद्रवंशी, सेवा सहप्रमुख विनय कुमार, अमरेन्द्र विष्णुपुरी, धनबाद विभाग मंत्री राजेश दुबे, महानगर अध्यक्ष अशोक चौरसिया ,महानगर मंत्री आनंद कुमार, बजरंग दल सहसंयोजक तापस कुमार डे सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। जन्मदिन संस्कार यज्ञ के साथ ही मनाया जाना चाहिए।अंतःकरण को प्रभावित करने की यज्ञ की अपनी क्षमता विशेष है। इसे जन-जन का आन्दोलन बनाना चाहिए।
यज्ञीय पुरोहित भाई प्रमोद कुमार ने बताया। इस अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में आज रविवार को चन्द्र प्रकाश सक्सेना, श्रीमती शीला देवी, प्रदीप दिव्यायन एवं कुलदीप कुमार का जन्मदिवस यज्ञीय संस्कार विधान से मनाया गया।इस पावन अवसर पर सर्वदेव आवाह्न, पूजन-अर्चन के साथ पंचतत्वों का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।
पुरोहित ने बताया कि सृष्टि रचना के इन तत्व घटकों में निहित सूक्ष्म संस्कार के भाव-प्रभाव साधक के मनःक्षेत्र को प्राप्त होते हैं।इनमें प्रत्येक तत्व के गुण व पूजन-क्रम में प्रेरणाप्रद भावार्थ बताए गए। बताया कि इस क्रम में अपनी महत्वकांक्षा को सीमित रखने,लिए व्रतों को स्मरण करने, देव शक्तियों से उनकी वृति व शक्ति से मार्गदर्शन की प्रार्थना करनी चाहिए।
व्रत धारण उपरान्त यज्ञ-आहुति विधान से जन्मदिन संस्कार किया गया।उपस्थित बालक व परिजनों ने और अन्य साधक- शिष्य को एक बुराई छोड़ने व एक अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प किया।संकल्प की रक्षा,सफलता के लिए यज्ञ कुण्ड पर साधकों ने देव शक्तियों को नमन-वंदन कर अग्निहोत्र में महामंत्रों की मंगलमय आहुतियां दी।
पूर्णाहुति, आरती, क्षमा प्रार्थना उपरान्त सोल्लास विधान संपन्न कर जन्मदिन परिजनों को मंगलमय पूजित कलश जल से अभिसिंचन व आशीर्वचन मंत्र पाठ सहित पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद , बधाई व मंगल वस्तिवाचन कर अनुष्ठान विधान संपन्न किए गए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ-साधक सह मीडिया प्रचारक जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली/रांची)। तकनीकी विकास और बाज़ार की व्यवस्था ने कुछ हद तक मुक्ति भी दी है और एक अलग तरीके से अन्यायपूर्ण व्यवस्था भी बनाई है। मनुष्य की गरिमा, नया अभी भी कोसों दूर है और लेखक का स्वप्न है कि ऐसा समाज बन सके जो न्याय आधारित हो। मेरा कहानी लेखन इसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है कि हमारा समाज अधिक मानवीय बन सके।
सुप्रसिद्ध कथाकार पंकज मित्र ने अपने पर केंद्रित विख्यात लघु पत्रिका बनास जन के लोकार्पण के अवसर पर अपने पाठकों का सबसे अधिक ऋण स्वीकार किया जिनके कारण वे लगातार सक्रिय रह सके। हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में एक सादे समारोह में वरिष्ठ उपन्यासकार रणेन्द्र, लेखक-अनुवादक दिगम्बर, चर्चित कथाकार कविता और अरुण कुमार असफल ने बनास जन के उक्त विशेषांक का लोकार्पण किया।
आलोचक-कथाकार राजीव कुमार के सम्पादन में आए इस विशेषांक में लगभग एक दर्जन आलोचकों ने विस्तार से पंकज मित्र की कहानियों का विश्लेषण-मूल्यांकन किया है। मित्र के संगी- साथियों संजय कुमार कुंदन और राजेश करमहे के संस्मरणों के साथ उनका लम्बा साक्षात्कार भी अंक में है। मूलत: झारखंड निवासी पंकज मित्र 1996 से कहानियाँ लिख रहे हैं और पेशे से भारतीय प्रसारण सेवा में अधिकारी रहे हैं।
आयोजन में साहित्यकार रणेन्द्र ने कहा कि हिंदी के लघु पत्रिका आंदोलन का विशिष्ट स्वर बन चुकी बनास जन का पंकज मित्र पर विशेषांक का प्रकाशन इस बात का प्रमाण है कि हिंदी साहित्य समाज ने गंभीर और जनपक्षधर लेखकों का महत्व स्वीकार किया है। कथाकार कविता ने पंकज मित्र को बधाई दी और कहा कि अपनी पीढ़ी के श्रेष्ठ कहानी सर्जक के रूप में वे जाने जाते रहेंगे।
बनास जन के सम्पादक पल्लव ने बनास जन की सत्रह वर्षीय यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि पंकज मित्र पर आया अंक तरासीवाँ अंक है। चित्तौड़गढ़ से प्रारम्भ हुई इस पत्रिका ने अब तक हिंदी के अनेक रचनाकारों पर अपने अंकों का प्रकाशन किया है जिनमें मीराँ, नज़ीर अकबराबादी, भीष्म साहनी, नामवर सिंह, फणीश्वरनाथ रेणु, अमरकान्त, मृणाल पांडे, स्वयं प्रकाश, असग़र वजाहत, ओमप्रकाश वाल्मीकि, अखिलेश पर अंक सम्मिलित हैं।
पल्लव ने लघु पत्रिकाओं की प्रकाशन यात्रा को भूमंडलीकरण के प्रतिपक्ष में भारतीय संस्कृति और साहित्य का संघर्ष बताया।
आयोजन में कवि-कथाकार श्रीधर करुणानिधि, डॉ विदित, शोधार्थी जनार्दन सहित अन्य रचनाकारों ने भी पंकज मित्र को बधाई दी।
बनास जन द्वारा जारी रिपोर्ट
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एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व है।
इन्हीं में से एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत है पौष पुत्रदा एकादशी जो पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर शुरुआत होगी तथा इसी तिथि का समापन 31 दिसंबर को सुबह 5 बजे होगा, ऐसे में 30 दिसंबर को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत किया जाएगा, इस व्रत का पारण 31 दिसंबर को किया जाएगा।
कई भक्त साधक इस व्रत को 31 दिसंबर को करेंगे।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना विशेष फल प्रदान करती है। पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह व्रत रखा जाता है। पुत्रदा का अर्थ है-पुत्र या संतान देने वाली। शास्त्रों के अनुसार यह एकादशी विशेष रूप से संतान प्राप्ति, पारिवारिक सुख-शांति और वंश वृद्धि के लिए मनाई जाती है।
जिन दंपत्तियों को संतान सुख नहीं मिलता, वे श्रद्धा एवं विधि-विधान से इस व्रत को रखकर भगवान विष्णु से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मांगते हैं। इस एकादशी का उल्लेख पद्म पुराण, स्कंद पुराण आदि धर्मग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान प्राप्ति का योग बनता है, परिवार में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
पूर्व जन्मों के पापों का नाश होता है,तथा मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है।यह व्रत केवल संतान की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को संयम, भक्ति और धार्मिक अनुशासन का मार्ग भी दिखाता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
पौराणिक कथा के अनुसार भद्रावती नामक नगरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। वे धर्मपरायण और न्यायप्रिय थे, परंतु उन्हें संतान न होने का गहरा दुःख था।राजा-रानी ने अनेक उपाय किए, किंतु कोई लाभ नहीं हुआ। एक दिन ऋषियों के मार्गदर्शन से उन्होंने पौष शुक्ल एकादशी का व्रत पूरे विधि- विधान से किया और भगवान विष्णु की आराधना की।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। समय आने पर रानी ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। तभी से यह एकादशी पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुई। पौष पुत्रदा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और भक्ति का पर्व है।
यह व्रत संतान सुख की कामना करने वालों के साथ-साथ हर भक्त को भगवान विष्णु के चरणों में समर्पण और धार्मिक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
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