एबीएन नॉलेज डेस्क। साल 2024 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण जल्द ही आने वाला है। सूर्य ग्रहण का न केवल वैज्ञानिक बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्व होता है। इस समय कई कार्यों को करने की मनाही होती है। आइये पंडित संतोष पाण्डेय से जानते हैं कि कब लगेगा यह सूर्य ग्रहण और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
श्री पाण्डेय के अनुसार इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर 2024 को लगेगा, जो सर्व पितृ अमावस्या के दिन पड़ रहा है। इससे पहले 15 दिन पहले चंद्र ग्रहण हुआ था। पितृ अमावस्या के दिन पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण खास धार्मिक महत्व रखता है।
सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर को रात 9:13 बजे से शुरू होगा और भारतीय समय के अनुसार अगले दिन सुबह 3:17 बजे समाप्त होगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा क्योंकि यह रात के समय होगा. फिर भी धार्मिक नियमों के अनुसार कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
साथ ही बता दें कि इस प्रकार सूर्य ग्रहण के दौरान इन सावधानियों का पालन करना जरूरी होता है, जिससे आप और आपका परिवार सुरक्षित और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहे।
नोट : यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है। इसलिए इससे संबंधित कोई सूतक या ग्रहण का कोई भी नियम भारतवर्ष में मान्य नहीं होगा।
एबीएन नॉलेज डेस्क। अंतरिक्ष की दुनिया में एक अद्भुत घटना होने जा रही है। कल 29 सितंबर की रात को, लोग आकाश में दो चांद देख पाएंगे, जो एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना है। यह दूसरा चांद दरअसल एक विशालकाय एस्ट्रॉयड है।
जिसे 2024 पीटी5 कहा जाता है। यह एस्ट्रॉयड धरती की परिक्रमा कर रहा है और 25 नवंबर तक यह नजदीक रहेगा। इसके बाद यह सूर्य की कक्षा में चला जायेगा। दूसरे चांद को मिनी मून कहा जा रहा है। आइये इस एस्ट्रॉयड और इसके विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।
यह खगोलीय घटना खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए एक चमत्कार के समान है। अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के वैज्ञानिक इस पर निगरानी रखे हुए हैं। हालांकि, मिनी मून को नंगी आंखों से देख पाना संभव नहीं होगा। इसे देखने के लिए विशेष टेलीस्कोप की आवश्यकता होगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मिनी मून का महाभारत से एक खास कनेक्शन है। स्पेन के यूनिवर्सिडैड कॉम्प्लूटेंस डी मैड्रिड के शोधकतार्ओं ने बताया है कि इस मिनी मून की विशेषताएँ अर्जुन एस्ट्रॉयड बेल्ट से मिलती हैं, जिसे महाभारत के प्रमुख किरदार अर्जुन के नाम पर रखा गया है। यह नाम अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा मान्यता प्राप्त है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। मोदी सरकार अंतरिक्ष में कुछ बड़ा तैयारी है। मोदी सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को हरी झंडी दे दी है। इसके लिए पूरा रोडमैप जारी किया गया है। यह पूरा मिशन हैरान कर देने वाला है। यह एक बड़ा ही अहम लूनर एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद चंद्रयान-4 को चंद्रमा पर जाने और फिर वहां से मिट्टी और चट्टानों के साथ वापस धरती पर आना है।
इस मिशन को मोदी कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है। मोदी सरकार और भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के इस प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी उम्मीद हैं। मोदी सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 2,104.06 करोड़ रुपये (लगभग 253 मिलियन डॉलर) बजट का ऐलान किया है।
यह एक महत्वाकांक्षी मिशन होगा, जो देश के अतंरिक्ष में अन्वेषण लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए जरूरी तकनीकों के विकास को इस मिशन के तहत ध्यान में रखा जायेगा। बता दें कि भारत ने चंद्रयान 3 की चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा दिया था। इस सफलता से पूरी दुनिया में अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का काबिलियत का डंका बजा था।
चंद्रयान-4 मिशन का फोकस चंद्र कक्षा (Lunar Orbit) में डॉकिंग और अनडॉकिंग, धरती पर वापसी और चंद्रमा की सतह से इकट्ठा किये गये नमूनों का विश्लेषण करना शामिल है। भारत 2035 तक अंतरिक्ष में इंडियन स्पेस स्टेशन की स्थापना करेगा. इसके बाद भारत उन देशों के कतार में जाकर खड़ा हो जायेगा, जिनके पास अपना खुद का स्पेस स्टेशन है।
ऐसा होते ही भारतीय अतंरक्षि यात्री कई दिन तक स्पेस में रह जाएंगे और शोध कर पाएंगे। वहीं 2040 तक भारत का चालक दल के साथ चंद्रमा पर उतरने का बड़ा लक्ष्य है। ऐसे में भारत का चंद्रयान-4 मिशन आगामी लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम होगा। कैबिनेट से तो चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी मिल गयी है, लेकिन अभी इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में 36 महीनों का समय लग सकता है।
भारतीय स्पेस एजेंसी इंडियन स्पेस रिपर्ट ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) चंद्रयान-4 अतंरिक्ष यान के विकास और प्रक्षेपण का नेतृत्व करेगा। अगर सब कुछ ठीक रहा और अगर चंद्रयान-4 मिशन सफल रहता तो अतंरिक्ष में भारत की एक बड़ी छलांग होगी। साथ ही चंद्रयान की मिट्टी और चट्टानों का रिसर्च कर भारतीय वैज्ञानिक पता लगा पाएंगे कि उसमें क्या-क्या अवयव हैं और वो कितने काम के हो सकते हैं।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) का अंतिम रॉकेट लॉन्च किया। यह रॉकेट सुबह 9:19 बजे प्रक्षिप्त किया गया। SSLV की यह तीसरी और आखिरी डेवलपमेंटल फ्लाइट है, जिसके सफलतापूर्वक लॉन्च होने के बाद यह रॉकेट पूरी तरह से तैयार माना जाएगा।
इसके माध्यम से ISRO छोटे सैटेलाइट्स को कम लागत में अंतरिक्ष में भेज सकेगा। इस बार SSLV अपने साथ EOS-08 सैटेलाइट को लेकर गया है। EOS-08 सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य धरती की तस्वीरें लेना और मौसम की जानकारी प्रदान करना है। यह सैटेलाइट 24 घंटे धरती की तस्वीरें खींचेगा, जो आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और सुरक्षा में सहायक होगी।
इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इन्फ्रारेड पेलोड: यह दिन और रात दोनों समय धरती की तस्वीरें लेगा, जिससे आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी में मदद मिलेगी। ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम रिफ्लेक्टोमेट्री पेलोड: यह समुद्र की सतह, मिट्टी की नमी और हिमालय के ग्लेशियरों की जानकारी देगा और बाढ़ की चेतावनी में भी सहायता करेगा।
सिलिकॉन कार्बाइड अल्ट्रावॉयलेट डोसीमीटर: यह गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की UV रेडिएशन से सुरक्षा की निगरानी करेगा और गामा रेडिएशन का पता लगाएगा। इस मिशन के सफल होने पर ISRO का वाणिज्यिक विभाग, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड, निजी कंपनियों के लिए भी सैटेलाइट लॉन्च कर सकेगा, जिससे अंतरिक्ष में भारत की पकड़ और मजबूत होगी। EOS-08 मिशन का मुख्य उद्देश्य माइक्रोसैटेलाइट्स का विकास, नए उपकरण बनाना और भविष्य के उपग्रहों के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल करना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के गगनयान मिशन की तैयारियां जोरों पर हैं। अब केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया है कि गगनयान मिशन के चार गगनयात्रियों में से एक गगनयात्री को अगस्त में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (करर) भेजा जायेगा। भारत के गगनयात्री को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा साथ मिलकर अगस्त में आईएसएस भेजेंगे।
इसरो-नासा और एक्सिओम के साझा मिशन को अगस्त में लॉन्च किया जा सकता है। गगनयात्री अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरेंगे। फरवरी में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गगनयान मिशन के चार गगनयात्रियों को सार्वजनिक रूप से पेश किया था।
चारों गगनयात्री भारतीय वायुसेना के शीर्ष पायलट हैं, जिनमें ग्रुप कैप्टन बालाकृष्णन नायर, अजित कृष्णन, अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला शामिल हैं। अब इन चारों में से ही एक गगनयात्री को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र भेजने के लिए चयन किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने ये भी बताया कि गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष जाने वाले चारों गगनयात्रियों की इसरो के बंगलूरू स्थित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सुविधा केंद्र में ट्रेनिंग चल रही है और वे तीन सेमेस्टर में से दो की ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। गगनयान मिशन अगले साल लॉन्च किया जा सकता है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। चैटजीपीटी निर्माता ओपनएआई ने सर्चजीपीटी लांच किया है, जो एक एआई संचालित सर्च इंजन है, यह वेब पर रियल टाइम पर सूचना तक एक्सेस प्रदान करता है। सैम ऑल्टमैन द्वारा संचालित कंपनी ने कहा कि वह सर्चजीपीटी का टेस्टिंग कर रही है, जो नए एआई सर्च फीचर्स का एक टेंपरेरी प्रोटोटाइप है, यह आपको तेज और समय पर जवाब देता है। ओपनएआई ने कहा कि वह सबसे पहले फीडबैक प्राप्त करने के लिए यूजर्स और पब्लिशर्स के एक छोटे ग्रुप के साथ सर्च इंजन लॉन्च कर रहा है।
कंपनी ने कहा- हालांकि यह प्रोटोटाइप टेंपरेरी है, लेकिन हम भविष्य में इनमें से बेस्ट फीचर्स को सीधे चैटजीपीटी में एकीकृत करने की योजना बना रहे हैं। यूजर्स को सर्च में पब्लिशर्स को लिंक कर उनसे जुड़ने में मदद करने के लिए सर्चजीपीटी को डिजाइन किया गया है। आप फॉलो-अप सवाल पूछ सकेंगे, जैसे आप किसी व्यक्ति से बातचीत में करते हैं।
ओपनएआई ने कहा कि रिस्पांस में क्लीयर, इन-लाइन, नेम और लिंक होते हैं, ताकि यूजर्स को पता चले कि जानकारी कहां से आ रही है और वे सोर्स लिंक वाले साइडबार में और भी ज्यादा रिजल्ट्स के साथ जल्दी से जुड़ सकते हैं। कंपनी ने कहा कि वह लोकल जानकारी और कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में सुधार करती रहेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एलियंस से बात करने का खुल गया राज! 22 करोड़ किलोमीटर दूर स्पेस से NASA के पास आया मैसेज
आपको ऋितिक रोशन की कोई मिल गया फिल्म जरूर याद होगी। इस मूवी में सुपरपावर्स से लैस जादू एलियन ऋितिक की बहुत मदद करता है।
यह तो एक मूवी है, लेकिन अगर सच में एलियंस मौजूद हों तो हम उनसे कैसे बात कर पाएंगे? एलियंस हैं या नहीं है, इसकी चर्चा पूरी दुनिया में चर्चा चलती रहती है, लेकिन यह सच है कि एलियंस की मौजूदगी अब तक साबित नहीं हुई है। हम केवल फिल्मों आदि में ही एलियंस देखते हैं या फिर कभी-कभी अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट (UFO) के पृथ्वी पर आने की अफवाह सुनते हैं जिन्हें एलियंस का स्पेसक्रॉफ्ट कहा जाता है।
बहरहाल, एलियंस का होना या ना होना एक अलग बहस है, लेकिन अगर एलियंस मौजूद हैं तो उनसे बात करने की संभावना बढ़ गई है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. हाल ही में नासा को पृथ्वी पर स्पेस में 22.5 किलोमीटर दूर से मैसेज रिसीव करने में सफलता मिली है।
इंटरप्लेनेटरी कम्युनिकेशन की दिशा में नासा ने बड़ी छलांग लगाई है। इसके Psyche नामक स्पेसक्रॉफ्ट ने 22.5 करोड़ किलोमीटर दूर स्पेस से एक लेजर मैसेज को सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापस भेजा है। यह सफलता ना केवल फास्ट स्पेस कम्युनिकेशन की क्षमता को दिखाती है, बल्कि इतने बड़े स्पेस में डेटा सेंड करने और रिसीव करने के तरीके के लिए नया दरवाजा भी खोलती है।
नासा ने Psyche मिशन को अक्टूबर 2023 में लॉन्च किया था। यह एक रोबोटिक स्पेसक्रॉफ्ट है जो Psyche 16 नामक मेटल-रिच एस्टेरॉयड का पता लगाने के मिशन पर है, जो मंगल और बृहस्पति के बीच एस्टेरॉयड बेल्ट में रहता है। स्पेसक्रॉफ्ट एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस है, जिसमें डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशंस (DSOC) सिस्टम शामिल है, जिसे स्पेस में लेजर कम्युनिकेशन के साथ एक्सपेरिमेंट करने के लिए डिजाइन किया गया है।
दक्षिणी कैलिफोर्निया में नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी में प्रोजेक्ट की ऑपरेशन प्रमुख मीरा श्रीनिवासन ने कहा कि हमने 8 अप्रैल को एक पास के दौरान लगभग 10 मिनट के डुप्लिकेट स्पेसक्रॉफ्ट डेटा को डाउनलिंक किया। तब तक हम Psyche से अपने डाउनलिंक में टेस्ट और डॉयग्नोस्टिक डेटा भेज रहे थे। यह प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ कि कैसे ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी स्पेसक्रॉफ्ट के रेडियो फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम के साथ इंटरफेस कर सकती है।
इस डेमो में लेजर कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को आज गहरे स्पेस मिशन से इस्तेमाल की जाने वाली मॉडर्न रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम की तुलना में 10 से 100 गुना तेज स्पीड से स्पेस से डेटा ट्रांसमिट करने के लिए डिजाइन किया गया है। 13 अक्टूबर, 2023 को लॉन्च होने के बाद से स्पेसक्रॉफ्ट स्वस्थ और स्थिर बना हुआ है, यह अभी भी अच्छी तरह से काम कर रहा है। इसकी मंजिल Psyche एस्टेरॉयड है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर पश्चिमी चीन में जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अंतरिक्ष यान शेनझोउ-18 चालक दल के साथ बीजिंग समय के अनुसार गुरुवार को रात 8:59 बजे प्रक्षेपित किय जायेगा। चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी (सीएमएसए) ने बुधवार को इसकी घोषणा की। सीएमएसए के उप निदेशक लिन ज़िकियांग ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अंतरिक्ष यान शेनझोउ-18 अंतरिक्ष उड़ान मिशन को पूरा करने के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों - ये गुआंगफू, ली कांग और ली गुआंगसु - को ले जायेगा और श्री ये इसके कमांडर होंगे। शेनझोउ-18 चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम का 32वां उड़ान मिशन है और चीन के अंतरिक्ष स्टेशन के अनुप्रयोग और विकास चरण के दौरान तीसरा मानवयुक्त मिशन है। चालक दल लगभग छह महीने तक कक्षा में रहेगा और उनका इस साल अक्टूबर के अंत में उत्तरी चीन के भीतरी मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र में डोंगफेंग लैंडिंग साइट पर लौटने का कार्यक्रम है। लिन ने कहा प्रक्षेपण में लॉन्ग मार्च-2एफ वाहक रॉकेट का उपयोग किया जायेगा, जो जल्द ही प्रणोदक से भर जायेगा। लिन ने कहा, शेनझोउ-18 चालक दल को कक्षा में काम सौंपने के बाद शेनझोउ-17 चालक दल 30 अप्रैल को डोंगफेंग लैंडिंग साइट पर लौटने वाला है।
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