एबीएन नॉलेज डेस्क। चांद पर जीवन को लेकर लंबे समय से रिसर्च चल रही है। अब हाल ही में एक रिसर्च में इसे लेकर पॉजिटिव रेस्पॉन्स आया है, जिसमें बताया गया है कि वहां कुछ इलाकों में इतना तापमान है कि वहां इंसान आराम से रह सकता है। ऐसे में इंसानों के चांद पर जीवन की संभावना बढ़ रही है। ऐसे में जानते हैं चांद पर मिले इस तापमान के क्या मायने हैं? कितना है तापमान : डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां गुफाओं की तरह के कुछ स्ट्रक्चर हैं, जो आने वाले वक्त में इंसानों की सुरक्षा कर सकते हैं। रिसर्च में बताया गया है कि जहां भी इंसानों के हिसाब से तापमान है, वहां कुछ गड्ढे हैं और उन गड्ढों में पृथ्वी के हिसाब से तापमान है। यूनिवर्सिटी आॅफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों के अनुसार, 17 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान पाया गया है। दरअसल, वैसे चांद की तहत पर तापमान काफी बदलता रहता है। चांद की अधिकांश सतह पर दिन के वक्त 260 डिग्री तक तापमान रहता है और रात में यह तापमान जीरो से 280 डिग्री नीचे तक आ जाता है। हालांकि, अब कुछ स्थानों पर स्थिर तापमान से लग रहा है कि आने वाले वक्त में यहां के जीवन की संभावना बढ़ सकती है। खास बात ये है कि जिन क्षेत्रों या गड्ढों में तापमान कम है, वहां सौर विकिरण, अन्य हानिकारक किरणों और छोटे उल्कापिंडों से भी बचा जा सकता है। बता दें कि चंद्रमा पर एक दिन या रात पृथ्वी पर दो हफ्ते से थोड़े अधिक के बराबर है। इस वजह से यहां काफी मुश्किलें भी हैं। बता दें कि रिसर्च के अनुसार, 200 से अधिक खोजे गए गड्ढों में से करीब 16 लावा ट्यूब की वजह से है। रिसर्चर्स को लगता है कि चांद पर हुए गड्ढों में ओवरहैंग्स स्थिर तापमान का कारण हो सकते हैं। इनकी खोज साल 2009 में ही कर दी गई थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 5जी स्पेक्ट्रम के लिए भारत में अब तक पहली और सबसे बड़ी नीलामी आज सोमवार को खत्म हो गई। यह नीलामी सात दिनों तक चली, जिसमें चार कंपनियों रिलायंस जियो, भारतीय एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और अडानी ग्रुप की अडानी डाटा नेटवर्क लिमिटेड ने भाग लिया था। इसमें 1.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य के 5जी टेलिकॉम स्पेक्ट्रम की रिकॉर्ड बिक्री हुई। नीलामी में मुकेश अंबानी की कंपनी जियो ने सबसे अधिक बोली लगाई। 4जी स्पेक्ट्रम से लगभग दोगुना है रकम : सूत्रों के अनुसार, अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक 1,50,173 करोड़ रुपए की बोलियां लगाई गईं। अत्यधिक उच्च गति के मोबाइल इंटरनेट संपर्क की पेशकश करने में सक्षम 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की यह राशि पिछले साल बेचे गए 77,815 करोड़ रुपए के 4जी स्पेक्ट्रम से लगभग दोगुना है। यह राशि 2010 में 3जी नीलामी से मिले 50,968.37 करोड़ रुपए के मुकाबले तीन गुना है। रिलायंस जियो ने 4जी की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक तेज गति से संपर्क की पेशकश करने वाले रेडियो तरंगों के लिए सबसे अधिक बोली लगाई। जियो के बाद इन कंपनियों का स्थान : इसके बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड का स्थान रहा। बताया जाता है कि अडानी समूह ने निजी दूरसंचार नेटवर्क स्थापित करने के लिए 26 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खरीदा है। सूत्रों ने कहा कि किस कंपनी ने कितना स्पेक्ट्रम खरीदा, इसका ब्योरा नीलामी के आंकड़ों के पूरी तरह आने के बाद ही पता चलेगा। इन बैंड्स में स्पेक्ट्रम के लिए नहीं मिली बोली : सरकार ने 10 बैंड में स्पेक्ट्रम की पेशकश की थी लेकिन 600 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के लिए कोई बोली नहीं मिली। लगभग दो-तिहाई बोलियां 5जी बैंड (3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज) के लिए थीं, जबकि एक-चौथाई से अधिक मांग 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में आई। यह बैंड पिछली दो नीलामियों (2016 और 2021) में बिना बिके रह गया था। पिछले साल इन कंपनियों ने खरीदा था ये स्पेक्ट्रम पिछले साल हुई नीलामी में रिलायंस जियो ने 57,122.65 करोड़ रुपए का स्पेक्ट्रम लिया था। भारती एयरटेल ने लगभग 18,699 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी और वोडाफोन आइडिया ने 1,993.40 करोड़ रुपए का स्पेक्ट्रम खरीदा था। इस साल कम से कम 4.3 लाख करोड़ रुपए के कुल 72 गीगाहर्ट्ज रेडियो तरंगों को बोली के लिए रखा गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जोधपुर में जुलाई माह में 140 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। जोधपुर में जुलाई माह में 140 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। राजस्थान में जुलाई में जमकर बरसे बादल: राजस्थान में बारिश का परिदृश्य बदल रहा है। राजस्थान में इस बार जुलाई माह में बारिश ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। वर्ष 1956 के बाद यह पहला मौका है जब जुलाई में इस कदर बादल बरसे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान के केवल दो ही जिले ऐसें हैं जो जुलाई माह में औसत बारिश के आंकड़े को नहीं छू पाये हैं। शेष सभी में बारिश ने जमकर दरियादिली दिखाई है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत में 5जी स्पेक्ट्रम की पहली नीलामी सोमवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गई। इस दौरान जियो और एयरटेल समेत कई कंपनियां उत्तर प्रदेश पूर्वी सर्किल के लिए 1800 मेगाहर्ट्ज के लिए बोली लगा रही हैं। इससे पहले रविवार को बोली लगाने के छठे दिन कुल स्पेक्ट्रम बिक्री 1.50 लाख करोड़ रुपए के मील के पत्थर को पार कर गई थी। अत्यधिक उच्च गति की इंटरनेट सेवा देने में सक्षम 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के छह दिनों में अब तक 1,50,130 करोड़ रुपए की बोलियां मिल चुकी हैं। रविवार को आयोजित सात नए दौर की बोली में 163 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई। दूरसंचार विभाग ने इस नीलामी में कुल 4.3 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 72 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की बिक्री की पेशकश की है। इस नीलामी में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के अलावा अडाणी एंटरप्राइजेज भी शिरकत कर रही है। सोमवार को नीलामी का सातवां दिन है और फिलहाल 38वें दौर की बोली चल रही है। सूत्रों ने कहा कि शनिवार को मांग में अपेक्षाकृत नरमी के बाद उप्र पूर्वी सर्किल, जिसमें लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर शामिल हैं, ने 1800 मेगाहर्ट्ज के लिए एक बार फिर से बोली लगाने में तेजी देखी। उप्र पूर्वी में 10 करोड़ से अधिक मोबाइल ग्राहक हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों के बीच स्पेक्ट्रम के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों कहा था कि 5जी नीलामी इस बात को रेखांकित करती है कि उद्योग विस्तार करना चाहता है और विकास के चरण में प्रवेश कर गया है। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम के लिए निर्धारित आरक्षित मूल्य उचित है और यह नीलामी के परिणाम से साबित होता है।
टीम एबीएन, रांची/पटना। केंद्र सरकार द्वारा देश के विभिन्न राज्यों के गांवों में 4जी मोबाइल सेवा बहाल करने के लिए 26,316 करोड़ रूपए की लागत वाली एक परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई है। इस परियोजना के तहत दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में अवस्थित देश के 24,680 वंचित गांवों में 4जी मोबाइल सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इनमें बिहार राज्य के 14 जिलों के 207 गांव तथा झारखंड राज्य के 23 जिलों के 1615 गांव शामिल हैं। केंद्र सरकार की इस परियोजना के तहत बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला का एक गांव, बांका के चार गांव, बेगूसराय के दो गांव, गया के 12 गांव, जमुई के 13 गांव, कैमूर-भभुआ के 125 गांव, लखीसराय का एक गांव, मुंगेर के चार गांव, नवादा के 11 गांव, पूर्वी चंपारण के तीन, पश्चिम चंपारण के पांच गांव, पटना के 11 गांव, रोहतास के 14 एवं सीतामढ़ी के 1 गांव सहित 14 जिलों के 207 गांवों में 4जी सर्विस की सुविधा बहाल की जाएगी। इसी तरह झारखंड राज्य के बोकारो 27 गांव, चतरा के 161 गांव, देवघर के 33 गांव, धनबाद एक गांव दुमका का 117 गांव, गढ़वा का 28 गांव, गिरीडीह के 5 गांव, गोड्डा के 32 गांव, गुमला के 91 गांव, हजारीबाग के 30 गांव, जामताड़ा का एक गांव, खूंटी के 88 गांव, कोडरमा के 30 गांव, लातेहार के 81 गांव, लोहरदग्गा के 28 गांव पाकुड़ के छ: गांव, पलामू के 136 गांव, पश्चिम सिंहभूम के 177 गांव, पूर्वी सिंहभूम के 279 गांव, रामगढ़ के 18 गांव, रांची के 6 गांव, साहिबगंज के 96 गांव, सरायकेला-खरसांवा के 35 गांव और सिमडेगा का 109 गांव सहित 23 जिलों के 1615 गांवों में 4जी सर्विस की सुविधा बहाल की जाएगी। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के सरकार के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना से मोबाइल ब्रॉडबैंड के माध्यम से विभिन्न ई-गवर्नेंस सेवाएं बैंकिंग सेवाएं टेली-मेडिसिन टेली-एजुकेशन इत्याादि सुलभ कराने को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन होगा।
एबीएन नॉलेज डेस्क। आप अपने घरों में देखते हैं और तमाम बिजली के उपकरणों को जब घर में इस्तेमाल करते होंगे तो देखते होंगे कि उनके यूज के लिए आप जब उनके प्लग्स को शाकेट में लगाते हैं तो ये आमतौर पर तीन पिन वाले होते हैं। ज्यादातर बिजली के प्लग तीन पिन वाले होते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि ऐसा क्यों होता है। हालांकि कभी आपने इन्हें अगर खोलकर देखा हो तो इसके तीन पिनों में तीन तार जुडे़ होते हैं। इन तीन पिनों दो का आकार तो बराबर और एक जैसा होता है लेकिन तीसरी पिन इन दो पिनों की तुलना में कुछ मोटी होती है। इस पिन को सामान्य तौर पर एक हरे रंग के तार से जोड़ दिया जाता है। इस तार को अर्थ का तार कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि प्लग में इस तीसरी पिन का काम क्या होता है। तीसरी पिन और हरे रंग के तार में सामान्य स्थितियों में कोई भी बिजली की धारा नहीं बहती है। इस तार का एक सिरा जिस बिजली के उपकरण का आप इस्तेमाल कर रहे होते हैं, उससे जुड़ा होता है। और हर रंग के तार वाला पिन प्लग के जरिए जिस प्वाइंट से जुड़ता है वो उसे अर्थिंग या पृथ्वी से जोड़ देता है। इसे इलैक्ट्रिक ग्राउंडिंग भी कहते हैं। तब बिजली का झटका लगता है : कभी-कभी ऐसा होता है कि विद्युत उपकरण में कोई दोष हो जाता है तब इस उपकरण में बिजली की धारा प्रवाहित होने लगती है। ऐसी स्थिति में अगर कोई उस उपकरण को छू ले तो उसे बिजली का झटका लगेगा। बिजली के झटके की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि मनुष्य के शरीर में से कितनी बिजली की धारा किस मात्रा में प्रवाहित हो रही है। अगर उसके हाथ भीगे हों तो शरीर से अधिक बिजली की धारा प्रवाहित होगी। इसका कारण है कि गीली त्वचा सूखी त्वचा की तुलना में बिजली की सुचालक होती है और ऐसी स्थिति में व्यक्ति को भयानक झटका लगेगा। इससे उसकी मृत्यु भी हो सकती है। तीसरी पिन के जरिए अर्थिंग का काम : तीसरी पिन का प्रयोग या अर्थिंग एक ऐसा तरीका है जो दोषी उपकरणों से लगने वाले बिजली के झटकों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। मेंस से चलने वाली सभी उपकरणों के लिए ये बहुत जरूरी है कि उनका धरती के साथ उचित तौर पर संबंध स्थापित करा दिया जाए, प्लग की तीसरी पिन यही काम करती है। तो नहीं लगेगा झटका : यदि बिजली की तीसरी पिन के जरिए अर्थिंग सही तरीके से हो रही हो तो बिजली उपकरण के खराब होने पर अगर उसकी बॉडी में करंट प्रवाहित भी होने लगता है तो बिजली का झटका लगेगा भी तो ज्यादा खतरनाक नहीं होगा या झटका लगेगा ही नहीं। इस तरह बिजली प्लग की तीसरी पिन आपको सबसे ज्यादा सुरक्षा देने वाली होती है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। गूगल मैप्स पर अब भारत के 10 शहरों में सड़कों और गलियों की वास्तविक तस्वीरें देखी जा सकेंगी। प्रौद्योगिकी कंपनी ने इसके लिए दो स्थानीय कंपनियों के साथ भागीदारी की है। सरकार ने पूर्व में सुरक्षा कारणों से सड़कों और अन्य जगहों की व्यापक फलक वाली तस्वीरें दिखाने की अनुमति नहीं दी थी। अबतक गूगल मैप्स पर उपग्रह से ली गयी तस्वीरें होती थीं, लेकिन अब उसपर वास्तविक तस्वीरें होंगी। गूगल ने बुधवार को बयान में कहा कि जेनेसिस इंटरनेशनल और टेक महिंद्रा की भागीदारी के साथ सड़कों, गलियों की वास्तविक तस्वीर देखने की सेवा शुरू की गई है। बयान के अनुसार, गूगल मैप्स पर आज से सड़क की तस्वीर उपलब्ध होगी। यह सेवा बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, नासिक, वडोदरा, अहमदनगर और अमृतसर में होगी। गूगल, जेनेसिस इंटरनेशनल और टेक महिंद्रा की 2022 तक इस सेवा का 50 से अधिक शहरों में विस्तार करने की योजना है। इसके साथ गूगल मैप्स यातायात प्राधिकरणों की तरफ से जारी गति सीमा के आंकड़े भी दिखाएगी। गूगल ने "ट्रैफिक लाइट" के समय को बेहतर ढंग से बनाने के मॉडल को लेकर बेंगलुरु यातायात पुलिस के साथ अपनी साझेदारी की भी घोषणा की है। बयान में कहा गया है, यह स्थानीय यातायात प्राधिकरण को प्रमुख चौराहों पर सड़क की भीड़ का प्रबंधन करने में मदद कर रहा है... इस व्यवस्था का पूरे शहर में विस्तार किया जाएगा। गूगल स्थानीय यातायात अधिकारियों के साथ साझेदारी में कोलकाता और हैदराबाद में भी इसका विस्तार करेगी। इसके अलावा, वैश्विक कंपनी ने वायु की गुणवत्ता के बारे में जानकारी देने के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ भी गठजोड़ की घोषणा की है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। चीन की एक लापरवाही धरती के लोगों को मुश्किल में डाल सकती है। बता दें कि, चीन ने लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट लॉन्च किया है, जिसका एक हिस्सा वापस पृथ्वी पर गिरेगा और वो धरती की तरफ तेजी बढ़ रहा है। चीन ने फैसला किया है कि लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट का ये हिस्सा धरती पर गिरेगा और ये कहां गिरेगा इसके ऊपर चीन का कोई कंट्रोल नहीं है। ये तीसरी बार है कि जब चीन ने लॉन्च हुए रॉकेट के हिस्से को धरती पर गिराने का फैसला किया है। साल 2020 और 2021 वो पहले भी ऐसा कर चुका है। चीन का एक और रॉकेट बेकाबू होकर धरती पर गिरने वाला है। दुनिया चीन की इस लापरवाही से चिंतित है, कि आगे क्या होगा, कहां गिरेगी ये आफत। पिछले साल ही हिंद महासागर में एक ऐसा ही चीनी रॉकेट क्रैश हुआ था और उसके मलबे की वजह से पर्यावरण को खासा नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों को चिंता सता रही है कि रविवार को चीन ने जो 21 टन का रॉकेट मार्च 5बी लॉन्च किया था, वो अब धरती के वातावरण में ब्लास्ट होने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, धरती में दाखिल होते ही ये रॉकेट पूरी तरह से जल जाएगा। ये अचानक सतह पर आएगा और किसी अज्ञात जगह पर पूरी स्पीड से गिरेगा। इस बात की आशंका थोड़ी कम है कि इसका मलबा उस जगह पर गिरेगा जहां पर काफी आबादी है। हालांकि, विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि चीन दुनिया के लिए लगातार खतरा की वजह बनता जा रहा है लेकिन उसे होश नहीं है कि वह क्या कर रहा है। चीन ने पिछले हफ्ते हैनान स्थित वेनचांग लॉन्च साइट से एक रॉकेट लॉन्च किया था। ये रॉकेट सौर ऊर्जा से चलने वाली नई लैब को लेकर रवाना हुआ था जिसमें वेनतियान एक्सपेरिमेंट मॉड्रयूल था। इसे चीन के तियांगॉन्ग स्पेस स्टेशन तक जाना था। मगर अब पिछले साल मई की ही तरह इस बार भी धरती पर क्रैश होने की आशंका है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने चीन पर गैर-जिम्मेदाराना रवैये का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि चीन जिम्मेदारी से मानकों को नहीं मान रहा है और अंतरिक्ष के मलबे को लेकर बहुत ही लापरवाह है। उन्होंने कहा कि चीन रॉकेट के फिर से धरती में दाखिल होने वाले खतरों को कम नहीं कर पा रह है और न ही वो अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर पारदर्शी है। चीन का ये रॉकेट लॉन्चिंग के समय ही ब्लास्ट हो गया था। अब आने वाले दिनों में ये धरती का चक्कर लगाता रहेगा। इसके कुछ दिनों बाद ही ये सतह पर वापस लौटेगा। वहीं, चीन ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है कि वो अंतरिक्ष के कार्यक्रम को लेकर गैरजिम्मेदार है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि रॉकेट की वजह किसी को होने वाले नुकसान की आशंका बहुत कम है।
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