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Published / 2022-10-06 13:03:38
एयरटेल ने देश में प्रदर्शित किया 5जी संचालित पहला इमर्सिव वीआर विज्ञापन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत की प्रीमियर कम्युनिकेशन सलूशन प्रोवाइडर, भारती एयरटेल (एयरटेल) ने 5जी द्वारा संचालित देश का पहला इमर्सिव वर्चुअल रियलिटी (वीआर) विज्ञापन पेश किया। एयरटेल थैंक्स ऐप पर नया विज्ञापन फॉरमेट ब्रांड्स के लिए कस्टमर्स के साथ एक ऐसे इमर्सिव वातावरण में जुड़ने के नए तरीके उपलब्ध कराता है, जो पहले पारंपरिक विज्ञापन के तरीकों में उपलब्ध नहीं था। अल्ट्रा-फास्ट लो-लेटेंसी 5जी नेटवर्क सुनिश्चित करता है कि 3डी विजुअल और वीडियो जीवंत हों। ब्रांड्स इस प्रकार के विज्ञापन का उपयोग करके अपने ग्राहकों को एक इमर्सिव, लैग-फ्री और अत्यधिक आकर्षक विज्ञापन दिखा सकते हैं। एयरटेल डिजिटल के सीईओ आदर्श नायर ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, अब हम 5जी की बदौलत लो-लेटेंसी के साथ और अधिक लाभ हासिल कर सकते हैं, जो इसका सबसे बड़ा फायदा है। हम इस तकनीक का उपयोग भारत में अब तक का पहला इमर्सिव वीआर विज्ञापन विकसित करने के लिए कर रहे हैं, जो व्यवसायों को मोबाइल-फर्स्ट मार्केट में ग्राहकों के साथ सीधे संवाद की सुविधा प्रदान करता है। इसका उपयोग ब्रांड अपने ग्राहकों को आकर्षक, इमर्सिव और कस्टमाइज्ड एक्सपीरियंस देने के लिए कर सकते हैं।

Published / 2022-10-06 07:06:26
नासा का अंतरिक्ष यान उल्कापिंड से टकराने के बाद 10,000 किमी तक बिखरा मलबा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नासा के डार्ट अंतरिक्ष यान द्वारा इरादतन टक्कर मारकर जिस उल्कापिंड को तोड़ा था उसका मलबा हजारों किलोमीटर के दायरे में फैला है। इसके बारे में चिली के एक टेलीस्कोप द्वारा ली गई एक नई तस्वीर से पता चला है। जानकारी के अनुसार डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (डार्ट) के अंतरिक्षयान ने इरादतन डाइमॉरफोस नाम के उल्कापिंड को 26 सितंबर को टक्कर मारी थी। डाइमॉरफोस वास्तव में डिडमोस नाम के क्षुद्रग्रह का पत्थर था। यह पहला ग्रह रक्षा परीक्षण था जिसमें एक अंतरिक्ष यान के प्रभाव ने एक क्षुद्रग्रह की कक्षा को बदलने का प्रयास किया था। डार्ट की टक्कर के दो दिन बाद खगोलविदों ने चिली में 4.1-मीटर दक्षिणी खगोल भौतिकी अनुसंधान (एसओएआर) टेलीस्कोप का उपयोग क्षुद्रग्रह की सतह से उड़ी धूल और मलबे के विशाल ढेर की तस्वीरों को लेने के लिये किया। नई तस्वीरों में धूल के निशान को दिखाती है - इजेक्टा जिसे सूर्य के विकिरण दबाव से दूर धकेल दिया गया है, जैसे धूमकेतु की पूंछ - केंद्र से देखने के क्षेत्र के दाहिने किनारे तक फैली हुई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिस समय यह तस्वीरें ली गई उस समय डिडमोस की पृथ्वी से दूरी टक्कर के बिंदु से कम से कम 10,000 किमी के बराबर होगी। लोवेल वेधशाला के टैडी कारेटा ने कहा, यह अद्भुत है कि हम टक्कर के बाद के दिनों में संरचना और उसकी सीमाओं की इतनी स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम थे।

Published / 2022-10-06 06:57:33
इस महीने के अंत तक 36 वनवेब सैटेलाइट्स लॉन्च करेगा इसरो

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस महीने के अंत तक 36 सैटेलाइट्स को लॉन्च करेगा। इसरो ने गुरुवार को कहा कि वह यूनाइटेड किंगडम के ग्लोबल कम्युनिकेशन नेटवर्क वनवेब के 36 सैटेलाइट्स को अपने सबसे भारी लॉन्चर एलवीएम3 या लॉन्च व्हीकल मार्क III पर लॉन्च करेगा। खास बात यह है कि वनवेब इंडिया-1 मिशन/एलवीएम3 एम2 के तहत लॉन्च होने वाले ये उपग्रह एलवीएम3 के ग्लोबल कॉमर्शियल लॉन्च सर्विस मार्केट में एट्री को चिह्नित करेंगे। दरअसल, पिछले महीने उपग्रह संचार कंपनी वनवेब ने प्रस्तावित प्रक्षेपण से पहले 36 सैटेलाइट्स के आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचने की घोषणा की थी। कंपनी ने एक बयान में कहा था कि इस प्रक्षेपण के साथ, वनवेब के पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में प्रथम पीढ़ी के उपग्रहों के समूह का 70 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो जायेगा। उसने कहा था कि वह दुनिया भर में उच्च गति वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराने में प्रगति कर रही है। बयान में कहा गया था कि यह कंपनी का 14वां प्रक्षेपण होगा और उपग्रहों को इसरो के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क3 के जरिये उनकी कक्षा में भेजा जायेगा। बता दें कि यह सहयोग इसरो की कॉमर्शियल शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के दो सेवा अनुबंधों का परिणाम है, जो लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) ब्रॉडबैंड संचार सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए वन वेब के साथ हस्ताक्षरित है। वहीं, इसरो ने कहा है कि अनुबंध के तहत आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 36 सैटेलाइट्स को एक एलवीएम3 द्वारा कक्षा में स्थापित किया जायेगा। लॉन्च के साथ, वनवेब के पास अपने नियोजित जेन 1 एलईओ तारामंडल का 70 प्रतिशत से अधिक कक्षा में होगा क्योंकि यह सरकारों, व्यवसायों और समुदायों के लिए उच्च गति, कम विलंबता कनेक्टिविटी देने की तैयारी करता है। इसरो ने अपने ट्विटर हैंडल पर लॉन्च की तैयारियों के बारे में डिटेल्स शेयर किया है। इस डिटेल्स में बताया गया है कि आने वाले दिनों में लॉन्च वाहन के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का एकीकरण होगा। साथ ही 36 सैटेलाइट्स के साथ पेलोड फेयरिंग का एकीकरण भी होगा। इसके बाद यह इस महीने के तीसरे या चौथे हफ्ते तक लॉन्च के लिए तैयार हो जायेगा। वनवेब – 648 लियो उपग्रहों के एक समूह द्वारा संचालित एक वैश्विक संचार नेटवर्क है। इसका मुख्यालय लंदन में है। वनवेब को फरवरी 2019 में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य लियो उपग्रहों के एक समूह के कार्यान्वयन के माध्यम से दुनिया भर में हर जगह कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

Published / 2022-10-04 11:37:26
गूगल ट्रांसलेशन हुआ इतिहास, सेवाएं बंद

एबीएन नॉलेज डेस्क। गूगल ने 2010 में चीन के अंदर सर्च इंजन सेवा को बंद कर दिया था। इसकी बड़ी वजह पड़ोसी देश की सरकार द्वारा इंटरनेट सामग्री को बड़े पैमाने पर सेंसर किया जाना था। हालांकि, 2017 में गूगल ने एक समर्पित वेबसाइट और ऐप के जरिए चीन में ट्रांसलेशन सर्विस की शुरुआत की। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने चीन में ट्रांसलेट सर्विस को बंद कर दिया है। इस कदम से पड़ोसी देश में कंपनी की सेवाओं का दायरा और भी छोटा हो गया है। चीन में ट्रांसलेट वेबसाइट खुलने पर अब एक जेनेरिक गूगल सर्च बार दिख रहा है। इस पर क्लिक करते ही यूजर्स हांगकांग की गूगल ट्रांसलेशन वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। हालांकि चीनी यूजर्स हांगकांग की ट्रांसलेशन वेबसाइट का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में अमेरिकी टेक कंपनी ने ट्रांसलेशन सर्विस को कम इस्तेमाल किये जाने के कारण बंद कर दिया है। चीन में गूगल ट्रांसलेश सर्विस के अचानक बंद होने का असर कुछ चीनी एप्लिकेशन पर भी पड़ा है। ये ऐसी एप्लिकेशन हैं, जो गूगल की ट्रांसलेट सर्विस के ऊपर निर्भर हैं। टेकक्रंच के मुताबिक अमेरिकी कंपनी के इस कदम से को रीडर डॉक्यूमेंट रीडर जैसी सर्विस का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं। बता दें कि 2006 में गूगल ने चीन में गूगल सर्च का चीनी वर्जन पेश किया था, लेकिन लोकल सर्च इंजन बैडु से इसे कड़ी टक्कर मिली। 2010 में गूगल ने चीन में अपनी सर्च इंजन सेवा बंद कर दी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, 2010 में गूगल ने कहा था कि चीन में हैकर्स ने उसके कुछ सोर्स कोड को चुराया है और कुछ चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के जीमेल अकाउंट को भी छेड़ा है। इंटरनेट सामग्री पर चीनी सरकार की कड़ी निगरानी को देखते हुए गूगल ने पड़ोसी देश में सर्च इंजन सर्विस को बंद कर दिया। कम उपयोग के कारण बंद : गूगल के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी ने चीन में कम उपयोग के कारण गूगल ट्रांसलेट को बंद कर दिया है। अगस्त में सबसे बड़ी ट्रांसलेशन सर्विस को चीन में 5.35 करोड़ हिट मिले हैं। गूगल ने 2017 में चीन के अंदर ट्रांसलेशन ऐप लॉन्च की थी। चीनी यूजर्स को रिझाने के लिए कंपनी ने मशहूर चीनी-अमेरिकी रैपर एमसी जिन से एड भी कराया था।

Published / 2022-10-03 05:59:52
मंगलयान : गया था छह महीने के लिए और पूरे किये आठ साल, अब बैटरी-ईंधन, संपर्क सब खत्म

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत के मंगलयान की विदाई हो गई है। इसमें मौजूद ईंधन और बैटरी भी समाप्त हो चुकी है। इसके बाद ये अटकलें तेज हो गई हैं कि देश के पहले अंतर्ग्रहीय मिशन का 8 साल का सफर समाप्त हो गया। 450 करोड़ रुपये की लागत वाला मार्स ऑर्बिटर मिशन 5 नवंबर 2013 को पीएसएलवी-सी25 से प्रक्षेपित किया गया था और वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष यान को पहले ही प्रयास में 24 सितंबर 2014 को सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया था। इसरो के सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, अब, कोई ईंधन नहीं बचा है। उपग्रह की बैटरी खत्म हो गई है। संपर्क खत्म हो गया है। हालांकि, इसरो की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसरो पहले एक आसन्न ग्रहण से बचने के लिए यान को एक नयी कक्षा में ले जाने का प्रयास कर रहा था। बैटरी-ईंधन सब समाप्त : अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, लेकिन हाल ही में एक के बाद एक ग्रहण लगा, जिनमें से एक ग्रहण तो साढ़े सात घंटे तक चला। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा, चूंकि उपग्रह बैटरी को केवल एक घंटे और 40 मिनट की ग्रहण अवधि के हिसाब से डिजाइन किया गया था, इसलिए एक लंबा ग्रहण लग जाने से बैटरी लगभग समाप्त हो गयी। इसरो के अधिकारियों ने कहा कि मार्स ऑर्बिटर यान ने लगभग आठ वर्षों तक काम किया, जबकि इसे छह महीने की क्षमता के अनुरूप बनाया गया था। उन्होंने कहा, इसने अपना काम बखूबी किया और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिणाम प्राप्त किये। 8 साल पहले मंगल पर भेजा गया सबसे यह सस्ता मिशन था : 24 सितंबर 2014 को वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष यान को पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया था। इसके साथ ही भारत विश्व में अपने पहले प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश और दुनिया का चौथा देश बन गया था। उस समय मंगल पर भेजा गया यह सबसे सस्ता मिशन था। भारत, एशिया का भी ऐसा करने वाला पहला देश बन गया था क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे।

Published / 2022-10-02 11:37:07
5जी नेटवर्क किसानों के लिए खोलेगा तरक्की के द्वार, जानें कैसे...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के प्रगति मैदान में इंडिया मोबाइल कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने देश में 5जी नेटवर्क सर्विस की शुरुआत की है। जिसे देश के लिए क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है। माना जा रहा है कि देश में 5जी नेटवर्क की शुरुआत होने से कई सेक्टरों में आमूल-चूल परिवर्तन हाेगा। 5जी नेटवर्क से प्रभावित होने वाले सेक्टरों में कृषि सेक्टर भी शामिल है। जिस तरह की 5 जी नेटवर्क की खूबियां हैं, उससे कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव होने की उम्मीद है। मसलन, मानव सभ्यता का सबसे पुराना व्यवसाय, जो कई कारणों से पिछड़ा हुआ था, वह 5जी नेटवर्क के बाद स्मार्ट होने की तरफ बढ़ेगा। वहीं 5 जी नेटवर्क किसानों के लिए भी तरक्की के दरवाजे खुलेगा। 5 जी नेटवर्क कैसे कृषि को प्रभावित करेगा और इससे किसानों को कैसे फायदा होगा। देश-दुनिया में ड्रोन तकनीक बेशक नई है। इस बीच भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में भी ड्रोन तकनीक को अपनाने का फैसला लिया है, जिसके तहत मौजूदा समय में कीटनाशकों व उर्वरकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन, 5 जी नेटवर्क के आ जाने के बाद के कृषि में ड्रोन का दायरा बढ़ जायेगा। एक तरफ 5 जी नेटवर्क से कीटनाशाकों और उर्वरकों के छिड़काव में सटीकता आयेगी। तो वहीं इंटरनेट स्पीड के बढ़ने से मैपिंग भी सटीक हो सकेगी। इसके साथ ही ड्रोन का प्रयोग खेतों की लाइव निगरानी के लिए भी किया जा सकेगा, जिससे अमूल्य मानव श्रम का बचाव होगा। भारत गेहूं और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो दुनिया का प्रमुख खाद्य प्रधान है. तो वहीं भारत दुनिया के कई देशों को खाद्यान्न की आपूर्ति करता है। दुनिया के देशों को खाद्यान्न आपूर्ति की शुरुआत फसलों की बुवाई से ही शुरु हो जाती है। जिसके तहत बुआई और उत्पादन के अनुमान के आधार पर खाद्यान्न के बाजार की तैयारियां की जाती है। अभी तक अनुमान के लिए जिस तकनीक प्रयोग होता है, उसके आधार पर मिलने वाले आंकड़ों में कई बार समस्याएं होती हैं। वहीं 5 जी नेटवर्क के आने से इन अनुमान में सटीकता आयेगी। जिससे देश के खाद्यान्नों को सहींं समय पर बाजार मिल सकेगा और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे। कृषि व्यवसाय में लगे किसानों को तरक्की तब होती है, जब उनकी फसल को बेहतर दाम मिलता है। इसके लिए किसानों को अपनी फसलों को खेतों से मंडियों तक पहुंचाना पड़ता है। मसलन, मौजूदा समय में मंडी में विशेष व्यापारियों का एकाधिकार और उतार-चढ़ाव किसानों को प्रभावित करते हैं। इस वजह से किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ई-नाम पोर्टल शुरू किया हुआ है। लेकिन, कई किसानों के लिए यह डिजिटल बाजार अभी भी दूर की कोड़ी है। 5 जी नेटवर्क शुरू होने से किसान, बेहतर स्पीड के साथ अपने ही खेत से अपनी फसल बेच सकेंगे। तो वहीं ई-नाम पोर्टल पर बेहतर स्पीड के साथ फसल की गुणवत्ता के आधार पर किसान अपनी फसल के दाम तय करवा सकेंगे। खेती मौसम आधारित व्यवसाय है। मसलन मौसम के पूर्वानुमान ही खेती का दशा-दिशा तय करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मानसून है। जिसका सटीक पूर्वानुमान खरीफ सीजन की फसलों का उत्पादन तय करता है। 5 जी नेटवर्क से मौसम के पूर्वानुमान में भी सटीकता आने का अनुमान है, तो वहीं 5 जी नेटवर्क के माध्यम से किसानों को सही और सटीक समय पर किसानों को मौसम की जानकारी मिल सकेगी, जिससे मौसम से होने वाला उनका नुकसान कम हो जायेगा।

Published / 2022-10-01 17:25:59
एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने किया माइक्रो एटीएम लॉन्च, नकद निकासी हुई आसान

एबीएन नॉलेज डेस्क। एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने माइक्रो एटीएम लॉन्च करने की घोषणा की है। इस माइक्रो एटीएम से बड़े महानगरों और शहरों से बाहर रहने वाले ग्रामीण इलाकों के डेबिट कार्ड उपयोगकर्ता भी आसानी से नकद निकासी कर सकेंगे। इस पहल के माध्यम से उपयोगकतार्ओं को आसान नकद निकासी तक पहुंच प्रदान करने के लिए बैंक पूरे भारत में 500,000 से अधिक बैंकिंग प्वाइंट्स के अपने मजबूत नेटवर्क का लाभ उठाएगा। माइक्रो एटीएम लेनदेन की सुविधा के लिए, एयरटेल पेमेंट्स बैंक अब नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन आॅफ इंडिया (एनपीसीआई) - नेशनल फाइनेंसियल स्विच (एनएफएस) के साथ इंटीग्रेट किया गया है। किसी भी बैंक के ग्राहक अब अपने पड़ोस में स्थित एयरटेल पेमेंट्स बैंक के बैंकिंग प्वाइंट पर माइक्रो एटीएम सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। उपयोगकर्ता निर्दिष्ट बैंकिंग प्वाइंट से किसी भी बैंक के डेबिट कार्ड का उपयोग करके अब तत्काल नकद निकासी कर सकते हैं और अपने खाते की शेष राशि की जांच कर सकते हैं। उपयोगकर्ता माइक्रो एटीएम के माध्यम से प्रति लेनदेन 10,000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं।

Published / 2022-10-01 10:08:49
कहां मिलेगा 5जी सिम? आपका मोबाइल कैसे पकड़ेगा 5जी नेटवर्क? यहां जानें...

एबीएन नॉलेज डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में रिमोट का बटन दबाकर भारत में 5जी इंटनरेट सेवाओं का आगाज कर दिया है। पहले फेज में सर्विस को 13 शहर में रोल आउट किया जायेगा। इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गांधीनगर, गुरुग्राम, हैदराबाद, जामनगर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे शामिल हैं। इसके बाद 5जी को देश के हर हिस्से में पहुंचाया जायेगा। उल्लेखनीय है की 5जी सर्विस शुरू होने से पहले 5जी स्मार्टफोन बाजार में आ चुके हैं और सर्विस चालू होते ही लोग सुपर फास्ट 5जी इंटरनेट का मजा ले पायेंगे। हालांकि, सवाल यह उठता है कि 5जी नेटवर्क आने के बाद 5जी सिम कैसे मिलेगी? और 5जी सिम कार्ड पर अपना पुराना नंबर कैसे यूज किया जायेगा, तो चलिए अब आपको बताते हैं कि 5जी स्मार्टफोन पर 5जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। सिम के साइज में नहीं होगा बदलाव : इस समय बाजार में 2जी, 3जी और 4जी सिम मौजूद हैं। इस वक्त फीचर फोन यूजर्स जहां 2जी सिम यूज करते हैं, वहीं स्मार्टफोन यूजर्स 3जी और 4जी दोनों तरह के सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। अगर बात करें 5जी सिम की, तो यह मौजूदा 4जी सिम की तरह ही होगी। जानकारी के अनुसार 4जी सिम के साइज या शेप में कोई भी बदलाव नहीं किया जायेगा। 5G नेटवर्क भी पकड़ेगी 4जी सिम : आप फिलहाल जिस भी कंपनी की 4जी सिम इस्तेमाल रहे हैं, वह 5जी नेटवर्क भी पकड़ सकेगी। हालांकि ऐसा कैसे संभव होगा। इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। दरअसल, सिम के अंदर कोई तकनीक नहीं होती है। सिम के माध्यम से आपको सिर्फ एक यूनिक आईडी दी जाती है और उसी आईडी के हिसाब से आपके नंबर पर प्लान एक्टिव किया जाता है। ऐसे में हो सकता है कि आपको नई सिम लेने की जरूरत न पड़े। किन मोबाइल फोन्स में चलेगी 5जी सिम? 5जी सिम का इस्तेमाल सिर्फ 5जी फोन पर ही किया जा सकेगा। साथ ही जो मोबाइल यूजर्स 5जी फोन खरीद चुके हैं हो सकता हैं उन्हें अलग से 5जी सिम खरीदने की जरूरत न पड़े। ग्राहक अपनी 4जी सिम पर ही 5जी नेटवर्क कनेक्ट कर सकेंगे।

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