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Published / 2022-11-21 12:24:42
ग्लोबल मार्केट : मिले जुले संकेत से एशियाई बाजारों पर बढ़ा दबाव

एबीएन नॉलेज डेस्क। ग्लोबल मार्केट से आज मिले-जुले संकेत नजर आ रहे हैं। एशियाई बाजारों में लगातार दबाव बना हुआ है। इसी तरह यूएस फ्यूचर्स भी दबाव में काम करता नजर आ रहा है। हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार ओवरऑल बढ़त के साथ बंद हुए थे।
पिछले कारोबारी सत्र में डाओ जोंस 199 अंक की बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा था। इसी तरह एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.52 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,965.75 अंक के स्तर पर बंद हुआ था। जबकि नैस्डेक ने फ्लैट लेवल पर कारोबार करके पिछले सत्र में कामकाज का अंत किया था।
दूसरी ओर एशियाई बाजारों में आज ओवरऑल बिकवाली का दबाव बना हुआ है। निक्केई इंडेक्स को छोड़कर एशियाई बाजार के सभी प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। एसजीएक्स निफ्टी 142 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,205.50 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स 0.79 प्रतिशत टूटकर 3,246.23 अंक के स्तर पर नजर आ रहा है। हैंग सेंग इंडेक्स भी अभी तक के कारोबार में 417.93 अंक यानी 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,574.61 अंक तक लुढ़क चुका है।
इसके अलावा कोस्पी इंडेक्स 1.01 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,419.80 अंक के स्तर पर कारोबार करता नजर आ रहा है। इसी तरह शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी 0.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,072.09 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं सेट कंपोजिट इंडेक्स 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,614.55 अंक और जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 0.08 प्रतिशत टूटकर 7,076.46 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। एशियाई बाजारों में सिर्फ निक्केई इंडेक्स में 0.02 प्रतिशत की सांकेतिक बढ़त है। फिलहाल ये सूचकांक 27,906.47 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

Published / 2022-11-19 22:49:49
अब डाटा चोरों पर आयेगी शामत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 2019 में ड्राफ्ट पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल में 15 करोड़ रुपये या किसी इकाई के वैश्विक कारोबार का 4 प्रतिशत जुमार्ना लगाने का प्रस्ताव था। मसौदे में भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव है, जो बिल के प्रावधानों के अनुसार कार्य करेगा।
500 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा जुर्माना
मसौदे में कहा गया है, यदि बोर्ड जांच के निष्कर्ष पर यह निर्धारित करता है कि किसी व्यक्ति द्वारा गैर-अनुपालन महत्वपूर्ण है, तो वह व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद, अनुसूची 1 में निर्दिष्ट ऐसा वित्तीय दंड लगा सकता है, जो प्रत्येक मामले में पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा।
ग्रेडेड पेनल्टी सिस्टम का प्रस्ताव
मसौदे में डेटा फिड्यूशरी के लिए एक ग्रेडेड पेनल्टी सिस्टम का प्रस्ताव किया गया है जो केवल अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार डेटा मालिकों के व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करेगा। दंड का एक ही सेट डेटा प्रोसेसर पर लागू होगा, जो एक ऐसी इकाई होगी जो डेटा फिड्यूशरी की ओर से डेटा संसाधित करेगी।
17 दिसंबर तक मसौदा पर कर सकते हैं टिप्पणी
मसौदे में 250 करोड़ रुपये तक के जुमार्ने का प्रस्ताव है, अगर डेटा फिड्यूशरी या डेटा प्रोसेसर अपने कब्जे में या उसके नियंत्रण में व्यक्तिगत डेटा उल्लंघनों के खिलाफ सुरक्षा करने में विफल रहता है। मसौदा 17 दिसंबर तक सार्वजनिक टिप्पणी के लिए खुला है।
संसद में पेश होगा विधेयक
इस मसौदा विधेयक पर व्यापक परामर्श होगा। सरकार अगले बजट सत्र तक इसे संसद में पेश करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ड्राफ्ट बिल यह भी अनिवार्य करता है कि उपयोगकर्ता को अपनी जानकारी साझा करने से सहमति देने, प्रबंधित करने, सहमति वापस लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
हटाना पड़ेगा डेटा
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति अपना बचत बैंक खाता बंद करता है, तो बैंक को खाते से संबंधित उसके डेटा को हटाना पड़ता है। इसी तरह, यदि कोई उपयोगकर्ता किसी विशेष प्लेटफार्म पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट को हटाता है, तो उसका डेटा हटाना होगा। व्यक्तिगत डेटा को केवल तब तक बनाए रखना चाहिए, जब तक कि यह उस उद्देश्य के लिए आवश्यक हो, जिसके लिए इसे एकत्र किया गया था।

Published / 2022-11-18 12:54:18
भारत के पहला प्राइवेट विक्रम-इस रॉकेट लॉन्च

एबीएन नॉलेज डेस्क। देश के पहले प्राइवेट रॉकेट विक्रम-एस की आज लॉन्चिंग हो गयी। इस रॉकेट का निर्माण हैदराबाद की एक स्टार्ट-अप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने किया है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी इसरो ने श्रीहरिकोटा के अपने केंद्र से भारत के इस पहले प्राइवेट रॉकेट विक्रम-एस की लॉन्चिंग की। इसकी लॉन्चिंग के बाद भारत के स्पेस मिशन में प्राइवेट रॉकेट कंपनियों की एंट्री हो गयी है। विक्रम-एस रॉकेट ने देश की स्पेस इंडस्ट्री में प्राइवेट सेक्टर की एंट्री को एक नयी दिशा प्रदान की है, जिस पर दशकों से सरकारी स्वामित्व वाले इसरो का प्रभुत्व था।

स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली प्राइवेट सेक्टर की कंपनी बन गई है, जिसने 2020 में केंद्र सरकार द्वारा स्पेस इंडस्ट्री को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोले जाने के बाद भारतीय स्पेस प्रोग्राम में कदम रखा है। विक्रम-एस रॉकेट को आज सुबह करीब 11:30 पर लॉन्च किया गया। इससे पहले इसे 15 नवंबर को लॉन्च करने की प्लानिंग थी। सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च होने के बाद अब विक्रम-एस 81 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचेगा। रॉकेट का नाम इंडियन स्पेस प्रोग्राम के जनक और दिवंगत साइंटिस्ट विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।

Published / 2022-11-17 23:02:38
इस साल कूड़ा हो जायेंगे 5.3 अरब फोन

एबीएन नॉलेज डेस्क। इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निवारणपर काम करने वाली संस्था वेस्ट इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट ने कहा है कि इस साल दुनियाभर में 5.3 अरब फोन फेंक दिये जायेंगे। संस्था का यह अनुमान वैश्विक व्यापार के आंकड़ों पर आधारित है।
दुनिया में ई-कचरे के बढ़ते संकट को दिखाते इस शोध में कहा गया है कि ऐसे लोगों की तादाद काफी बड़ी है जो अपने पुराने फोन को रीसाइकल करने के बजाय रखे रहते हैं। ई-कचरा का दोहरा नुकसान है क्योंकि इसे फेंकने के कारण जलवायु को नुकसान होता है और इसमें इस्तेमाल कीमती धातुओं को यदि रिसाइक्लिंग के दौरान निकाला नहीं जाता है तो खनन के जरिए उन्हें पृथ्वी से निकालना पड़ता है, जिसके अपने कई नुकसान हैं।
एक स्मार्टफोन के अंदर 62 धातुएं हो सकती हैं। आईफोन के पुर्जों में सोना, चांदी और पैलेडियम जैसी बेशकीमती धातु भी होती हैं जिन्हें एशिया, अफ्रीका और आॅस्ट्रेलिया में खनन से निकाला जाता है।
संस्था के महानिदेशक पास्कल लीरॉय ने कहा कि लोगों को अंदाजा नहीं है कि ई-कचरे में मौजूद कीमती धातुओं की मात्रा कितनी बड़ी है। वह कहते हैं, लोगों को अहसास नहीं है कि देखने में सामान्य लगने वालीं इन चीजों को अगर वैश्विक स्तर पर एक साथ रखा जाए तो कितनी बड़ी मात्रा बन सकती है।
16 अरब फोन
एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में इस वक्त 16 अरब से ज्यादा मोबाइल फोन हैं। यूरोप में जितने फोन हैं, उनमें से लगभग एक तिहाई इस्तेमाल नहीं होते। डब्ल्यू ट्रिपल ई का शोध दिखाता है कि इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक कचरा 2030 तक सालाना 7.4 करोड़ टन की दर से बढ़ने लगेगा। 
फोन के साथ टैबलेट-कंप्यूटर भी शामिल
इस कचरे में सिर्फ फोन शामिल नहीं हैं। टैबलेट और कंप्यूटर से लेकर वॉशिंग मशीन, टोस्टर और फ्रिज व जीपीएस मशीन तक ई-कचरे का बड़ा हिस्सा बन रहे हैं।
एक अनुमान के मुताबिक 2018 में पूरी दुनिया में 5 करोड़ टन ई-कचरा जमा हुआ। इस कचरे में कंप्यूटर प्रोडक्ट्स, स्क्रीन्स, स्मार्टफोन, टैबलेट, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और हीटिंग या कूलिंग वाले उपकरण सबसे ज्यादा थे। इसमें से सिर्फ 20 फीसदी कचरे की रिसाइक्लिंग हुई, बाकी खुली जमीन या नदियों और समंदर तक पहुंच गये।
भारत की स्थिति
इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा करने के मामले में भारत दुनिया का पांचवां बड़ा देश है। भारत में हर साल करीब 10 लाख टन ई-कचरा निकलता है। भारतीय शहरों में पैदा होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कचरे में सबसे ज्यादा कंप्यूटर होते हैं। ऐसे ई कचरे में 40 फीसदी सीसा और 70 फीसदी भारी धातुएं मिलीं हैं।
एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पूरे देश में लाखों टन ई-कचरे का महज तीन से दस फीसदी ही इकट्ठा किया जाता है। नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के पिछले दिसंबर 2020 में पेश इस रिपोर्ट के मुताबिक 2017-18 में ई-कचरा कलेक्शन का लक्ष्य था 35,422 टन लेकिन कलेक्शन हुआ 25,325 टन। इसी तरह 2018-19 में लक्ष्य था 1,54,242 टन लेकिन जमा हुआ 78,281 टन। और अगले ही साल यानी 2019-20 में भारत में 10,14,961 टन ई-कचरा पैदा कर दिया गया।

Published / 2022-11-17 10:15:32
18 को भारत के पहले निजी रॉकेट प्रक्षेपण को अंतरिक्ष नियामक ने दी मंजूरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के अंतरिक्ष नियामक ने निजी क्षेत्र के पहले रॉकेट विक्रम-एस के प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है। विक्रम-एस स्काईरूट एरोस्पेस द्वारा विकसित सब-ऑर्बिटल यान है।

अंतरिक्ष नियामक भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) ने कहा, इन-स्पेस ने एक निजी भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप स्काईरूट एरोस्पेस के प्रक्षेपण की अनुमति दे दी है। यह इसरो के सतीश धवन केन्द्र से 18 नवंबर, 2022 को दिन में 11 से 12 बजे के बीच सब-आर्बिटल यान विक्रम-एस को लांच करेगा। 

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले रॉकेट का प्रक्षेपण देखने के लिए श्रीहरीकोटा में मौजूद रहेंगे।

Published / 2022-11-16 13:09:48
नासा का सबसे बड़ा अंतरिक्ष मिशन आज होगा लॉन्च

एबीएन नॉलेज डेस्क। कैनेडी स्पेस सेंटर में अगली पीढ़ी के रॉकेट आर्टिमिस को चंद्रमा की यात्रा पर भेजने के तीसरे प्रयास की तैयारी चल रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिए अगली पीढ़ी के रॉकेट आर्टिमिस की यह चंद्रमा के लिए पहली उड़ान होगी।

Published / 2022-11-14 21:12:45
23 जून तक कोलकाता के सभी हिस्सों में शुरू होंगी 5जी सेवाएं

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रिलायंस जियो ने इस साल दिसंबर तक कोलकाता के प्रमुख हिस्सों को 5जी सेवा से जोड़ने और जून 2023 तक पूरे शहर में सेवाओं को शुरू करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में तेज गति वाली इंटरनेट सेवाएं जल्द ही शुरू की जाएंगी। कोलकाता के बाद यह राज्य का दूसरा शहर होगा जहां जियो की 5जी सेवाएं शुरू होंगी। 
रिलायंस जियो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सिलीगुड़ी में 5जी सेवाएं शुरू करना कंपनी द्वारा दिसंबर 2023 तक पूरी तरह से सेवाओं को शुरू करने की योजना का हिस्सा है। इससे पहले, एयरटेल ने सिलीगुड़ी में अपनी 5जी सेवाएं शुरू करने की घोषणा करते हुए निकट भविष्य में कोलकाता में भी सेवाओं को शुरू करने की उम्मीद जताई थी। 
दूरसंचार कंपनी जियो ने चुनिंदा शहरों में अपनी सेवाएं शुरू की हैं और धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ा रही है। अधिकारी ने कहा, बंगाल क्षेत्र के सिलीगुड़ी में हम जल्द ही 5जी सेवाएं शुरू करेंगे। कोलकाता में वर्तमान में सेवाओं को दैनिक आधार पर बढ़ाया जा रहा है। शहर के प्रमुख हिस्सों को दिसंबर के भीतर दायरे में लाया जाएगा और यह अगले साल जून 23 तक पूरा हो जायेगा। 

Published / 2022-11-13 10:06:16
अंतरिक्ष में रिकॉर्ड 908 दिन बिताकर धरती पर लौटा अमेरिका का मानवरहित विमान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका का एक मानवरहित सैन्य अंतरिक्ष विमान अपना छठा मिशन पूरा करके शनिवार तड़के धरती पर वापस लौट आया। इस विमान ने वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए रिकॉर्ड 908 दिन अंतरिक्ष में अपनी कक्षा में बिताये। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने दी है। छोटे अंतरिक्ष यान की तरह दिखने वाला सौर ऊर्जा से चलने वाला यह वाहन नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर उतरा। इसका पिछला मिशन 780 दिनों तक चला था। बोइंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और इस विमान को विकसित करने वाले जिम चिल्टन ने कहा कि 2010 में एक्स-37बी के पहले लॉन्च के बाद से इसने कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। इसने हमारे देश को नई अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का तेजी से परीक्षण और एकीकृत करने के लिए एक बेजोड़ क्षमता प्रदान की है। यह पहली बार है जब अंतरिक्ष विमान ने एक सेवा मॉड्यूल की तरह काम किया। इस अंतरिक्ष विमान ने नौसेना अनुसंधान प्रयोगशाला, अमेरिकी वायु सेना अकादमी और अन्य के लिए प्रयोग किए।सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए मॉड्यूल को कक्षा से बाहर आने से पहले ही वाहन से अलग कर दिया गया था। प्रयोगों के बीच फाल्कनसैट-8 नामक एक उपग्रह था, जिसे वायु सेना अनुसंधान प्रयोगशाला के साथ साझेदारी में अकादमी के कैडेटों द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया था। इसे अक्तूबर 2021 में तैनात किया गया था और अभी भी कक्षा में बना हुआ है। एक्स-37बी ऑर्बिटल टेस्ट व्हीकल-6 (ओटीवी-6) ने 908 दिनों तक चले अपना छठा मिशन को पूरा किया। इस दौरान कृषि समेत कई तरह के प्रयोग किए गए। एक अन्य प्रयोग ने बीजों पर लंबी अवधि के अंतरिक्ष जोखिम के प्रभावों का मूल्यांकन किया। अंतरिक्ष संचालन के प्रमुख जनरल चांस साल्ट्जमैन ने कहा कि यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग पर अंतरिक्ष बल के फोकस पर प्रकाश डालता है और वायु सेना विभाग के भीतर और बाहर हमारे साझेदारों के लिए अंतरिक्ष में कम लागत वाली पहुंच का विस्तार करता है। एक्स-37बी अब तक 1.3 अरब मील से अधिक की उड़ान भर चुका है और अंतरिक्ष में कुल 3,774 दिन बिता चुका है।

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