एबीएन नॉलेज डेस्क। आमतौर पर रेगिस्तान का नाम सुनते ही अक्सर दिमाग में राजस्थान का थार मरुस्थल आता है, जिसे ग्रेट इंडियन डेजर्ट के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि ये तो भारत का रेगिस्तान है, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा मरुस्थल है, जो अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है, पर क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे छोटा रेगिस्तान कौन सा है और कहां है?
आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान के रहस्य को आजतक कोई भी सुलझा नहीं पाया है। दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान का नाम कारक्रॉस डेजर्ट है, जो कनाडा के युकोन में स्थित है। ये रेगिस्तान महज एक वर्ग मील में फैला हुआ है, जिसे आप चाहें तो पैदल चलकर भी माप सकते हैं, जबकि आमतौर पर रेगिस्तान इतने विशाल होते हैं कि पैदल चलकर उन्हें नापना को किसी इंसान के बस की बात ही नहीं होती।
इस रेगिस्तान के पास ही कारक्रॉस नाम का गांव है, जिसके बारे में कहा जाता है कि करीब 4500 साल पहले यह गांव आबाद हुआ था, जहां आज भी लोग रहते हैं। यहां के लोगों के लिए भी कारक्रॉस डेजर्ट एक पहेली ही बना हुआ है। खास बात ये है कि यह रेगिस्तान काफी ऊंचाई पर स्थित है। आमतौर पर रेगिस्तान में तो भयंकर गर्मी पड़ती है और सर्दी के मौसम में भी यहां का तापमान दूसरी जगहों के मुकाबले ज्यादा ही रहता है, लेकिन दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान में सर्दियों में जमकर बर्फ पड़ती है।
यही वजह है कि इस मौसम में यहां घूमने वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है। एडवेंचर के शौकीन लोग यहां काफी संख्या में पहुंचते हैं। बर्फीले इलाके में आखिर ये छोटा सा रेगिस्तान कैसे बन गया, ये अब तक एक रहस्य ही है। कुछ लोगों का मानना है कि झील सूखने की वजह से ये रेगिस्ताना बना है, तो कुछ का कहना है कि रेतीली हवाओं की वजह से इतनी ऊंचाई पर रेगिस्तान बना है, पर सच्चाई असल में क्या है, ये किसी को भी नहीं पता। हालांकि वैज्ञानिक इसको लेकर लगातार रिसर्च कर रहे हैं।
टीम एबीएन, रांची। रिलायंस जिओ ने देश के 20 नये शहरों और 11 यूनियन टेरिटरीज में 5जी सेवा की शुरुआत की घोषणा की। इन 20 नए शहरों में झारखंड के बोकारो, देवघर और हजारीबाग के नाम शामिल हैं। रिलायंस जियो के के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि इसके साथ अब रिलायंस जिओ सर्वाधिक 277 शहरों में 5जी सेवा उपलब्ध कराने वाला एकलौता 5जी नेटवर्क बन गया है।
अब बोकारो के लोगों को जिओ 5जी के क्रांतिकारी स्पीड से बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। 5जी सेवा से बोकारो शहर में बेहतरीन नेटवर्क और हाई स्पीड इंटरनेट का मजा आप ले पायेंगे। 5जी सेवा का सबसे सफल उपयोग शिक्षा, ई-गवर्नेंस, वेबसाइट, गेमिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विभिन्न सेक्टर में देखने को मिलेंगे।
जिओ वेलकम आफर के तहत ग्राहकों को 1जीबी पीएस डाटा की 5जी स्पीड निशुल्क प्राप्त कर पाएंगे। बोकारो शहर में 5जी सेवा शुरू होने से मुख्य रूप से प्रभावशाली बदलाव देखने को मिलेंगे। जहां लोग कुछ चंद सेकंड पर पूरी एचडी क्वालिटी की फिल्म और बड़ी और हैवी फाइल्स को कुछ मिनटों में ही अपलोड और डाउनलोड कर पाएंगे।
इसके साथ ही लोगों को सफलतापूर्वक 20 जीबीपीएस से 10 जीबीपीएस की हाई क्वालिटी इंटरनेट स्पीड मिलेगी। यह स्पीड 4जी इंटरनेट स्पीड के मुकाबले 10 गुना अधिक तेज होगी। 5जी के हाई क्वालिटी स्पेक्ट्रम बैंड के माध्यम से घर-घर तक तेज 5जी स्पीड का लुफ्त उठा पायेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो तेजी से 5G सर्विस का जाल पूरे देश में बिछा रही है। कंपनी ने मंगलवार को 20 नए शहरों में जिओ 5जी सर्विस लॉन्च की है। जियो की 5जी कनेक्टिविटी से जुड़ने वाले शहरों की संख्या अब बढ़कर 277 हो गयी है। कंपनी जियो 5जी से कनेक्ट होने वाले शहरों में फ्री 5जी सर्विस भी ऑफर कर रही है।
आज जियो ट्रू 5 जी से जुड़ने वाले शहरों में असम के चार शहर बोंगईगांव, उत्तरी लखीमपुर, शिवसागर तथा तिनसुकिया, उत्तर प्रदेश के तीन शहर अयोध्या, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर, बिहार के भागलपुर तथा कटिहार, झारखंड के बोकारो स्टील सिटी, देवघर और हजारीबाग शामिल हैं। इनके इलावा मोरमुगाओ (गोवा), दीव (दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव), गांधीधाम (गुजरात), रायचूर (कर्नाटक), सतना (मध्य प्रदेश), चंद्रपुर तथा इचलकरंजी (महाराष्ट्र), थौबल (मणिपुर) में भी आज से जियो की ट्रू 5जी सेवाओं की शुरुआत हो गयी है।
मिलेगा फ्री 5जी डेटा : रिलायंस जियो इनमें से ज्यादातर शहरों में 5जी सर्विस शुरू करने वाला पहला और एकमात्र ऑपरेटर बन गया है। इन शहरों के जियो यूजर्स को जियो वेलकम ऑफर के तहत इनवाइट किया जायेगा। आमंत्रित यूजर्स को बिना किसी एक्स्ट्रा कॉस्ट के 1 जीबीपीएस+ स्पीड पर अनलिमिटेड डेटा मिलेगा।
11 राज्यों के 20 नये शहरों में जिओ 5जी : इस मौके पर जियो प्रवक्ता ने कहा कि 11 राज्यों के 20 नए शहरों में जियो ट्रू 5जी लॉन्च कर हम बेहद उत्साहित हैं। जियो के ट्रू जी से जुड़ने वाले शहरों की कुल संख्या 277 हो गई है। इस लॉन्च की बदौलत, 277 शहरों में जियो यूजर्स नए साल 2023 में जियो ट्रू जी के परिवर्तनकारी लाभों का आनंद ले सकेंगे। ये शहर महत्वपूर्ण पर्यटन और कमर्शियल लोकेशन के साथ-साथ हमारे देश के प्रमुख एजुकेशन सेंटर भी हैं।
उन्होंने कहा कि ट्रू 5जी सर्विस के लॉन्च के साथ, इन क्षेत्रों के यूजर्स को न केवल सबसे अच्छा टेलीकॉम नेटवर्क मिलेगा बल्कि ई-गवर्नेंस, शिक्षा, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गेमिंग, एसएमई, हैल्थकेयर, कृषि, आईटी के क्षेत्रों में विकास के अनंत अवसर भी मिलेंगे।
राज्य सरकारों का जताया आभार : जियो प्रवक्ता ने आगे कहा कि हम असम, बिहार, गोवा, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के आभारी हैं, जिन्होंने इन क्षेत्रों को जल्दी डिजिटाइज करने के हमारे प्रयास का निरंतर सहयोग और समर्थन किया है। हमने देश भर में ट्रू 5जी रोलआउट की स्पीड बढ़ा दी है और दिसंबर 2023 तक पूरा देश जियो ट्रू 5 जी से जुड़ जायेगा।
जियो ट्रू 5जी भारत का एकमात्र ट्रू 5जी नेटवर्क है क्योंकि यह 4जी नेटवर्क पर शून्य निर्भरता के साथ स्टैंड-अलोन 5जी आर्किटेक्चर पर चलता है। यही नहीं, जियो के पास 700 मेगाहर्ट्ज, 3500 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में 5जी स्पेक्ट्रम का सबसे बड़ा और बेहतरीन मिक्स है जो इसे बहुत मजबूती देता है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। पंचांग मुताबिक मंगल ग्रह मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं, जिससे 3 राशि के जातकों के अच्छे दिन शुरू हो सकते हैं।
मंगल ग्रह करेंगे मिथुन में प्रवेश : वैदिक ज्योतिष अनुसार ग्रह एक निश्चित समय अंतराल बाद गोचर करते हैं। जिसका असर मानव जीवन और उनकी जीवनशैली पर पड़ता है। आपको बता दें कि शौर्य और साहस के दाता मंगल ग्रह 13 मार्च को मिथुन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसलिए इस गोचर का प्रभाव 12 सभी राशियों पर पड़ेगा। लेकिन 3 राशियांं ऐसी हैं, जिनको मंगल के गोचर से अच्छा धनलाभ हो सकता है। आइए जानते हैं ये राशियांं कौन सी हैं।
वृष राशि : आप लोगों के लिए मंगल ग्रह का गोचर शुभ फलदायी साबित हो सकता है। क्योंकि मंगल ग्रह आपकी राशि से दूसरे भाव में करेंगे। इसलिए इस समय आर्थिक मामलों में भी आपको इस समय अच्छे अवसर मिल सकते हैं। कारोबार में प्रगति करेंगे। पूर्व में जो आपने निवेश किया होगा उससे भी लाभ पाएंगे। साथ ही इस समय आपकी वाणी में प्रभाव आएगा। जिससे लोग आपसे प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही इस अवधि में कारोबारियों को उधार दिया हुआ धन वापस मिल सकता है। साथ ही इस समय आपके कार्य की सिद्धि हो सकती है।
कन्या राशि : मंगल ग्रह का गोचर कन्या राशि के जातकों को अनुकूल सिद्ध हो सकता है। क्योंकि मंगल ग्रह आपकी राशि से कर्म भाव पर विचरण करेंगे। इसलिए इस समय बेरोजगार लोगों नई जॉब का प्रस्ताव आ सकता है। साथ ही जो छात्र प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उनको किसी परीक्षा में सफलता मिल सकती है।
साथ ही पैतृक पक्ष और पिता एवं पिता समान व्यक्तियों से आपको सहयोग और लाभ की प्राप्ति होगी। धार्मिक कार्यों में आपकी रुचि हो सकती है। वहीं व्यापारियों को इस समय अच्छा धनलाभ हो सकता है। साथ ही इस अवधि नौकरीपेशा लोगों के प्रमोशन और इंक्रीमेंट की बात चल सकती है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
आप लोगोंं के लिए मंगल ग्रह का राशि परिवर्तन शुभ साबित हो सकता है। क्योंकि मंगल ग्रह आपकी राशि से भाग्य स्थान में विचरण करेंगे। इसलिए इस समय आपको भाग्य का साथ मिल सकता है।
साथ ही इस समय जो छात्र विदेश में रहकर पढ़ना चाहते हैं, उनकी मुराद पूरी हो सकती है। साथ ही इस अवधि में आपके अटके हुए काम बनेंगे। कार्यक्षेत्र की बात करें तो अधिकारियों के साथ तालमेल बढ़िया होगा। साथ ही कोर्ट- कचहरी के मामलों में आपको सफलता मिल सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के पहले हाइब्रिड रॉकेट मिशन का रविवार को चेन्नई में सफल प्रक्षेपण किया गया। इसमें दोबारा इस्तेमाल होने वाली प्रक्षेपण यान तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएलवी) मिशन-2023 नाम से किये गये इस प्रक्षेपण में, रॉकेट 150 पीआईसीओ उपग्रहों को ले गया है जिन्हें देशभर के 6 से 12वीं कक्षा तक के 5,000 छात्रों ने डिजाइन और विकसित किया है।
मार्टिन फाउंडेशन ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन (एकेआईएफ) और स्पेस जोन इंडिया के साथ मिलकर यह मिशन किया है। उपग्रहों को साउंडिंग रॉकेट का उपयोग करके भी प्रक्षेपित किया गया। साउंडिंग उपग्रहों के प्रक्षेपण की सुविधा केलमबक्ककम उपनगरीय इलाके के पट्टीपुलम में है और इस जगह से हाइब्रिड रॉकेट के नाम से भी जाने जाने वाली साउंडिग रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया है।
एकेआईएफ की स्थापना दिवंगत राष्ट्रपति और प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ अब्दुल कलाम के पौत्रों ने की थी। स्पेस जोन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ डॉ आनंद मेगालिंगम ने बताया कि रॉकेट लगभग 5-6 किमी की ऊंचाई तक उड़ गया और उसके बाद समुद्र में गिर गया।
पूरा मिशन साढ़े आठ मिनट तक चला। इस दौरान हर सेकेंड का डाटा उपग्रह से रिकॉर्ड कर लिया गया। उपग्रहों की सुरक्षित लैंडिग के लिए पैराशूट की मदद ली गई और उतरने के बाद सभी उपग्रह बरामद किए गए और सभी उनसे डेटा एकत्र किया जायेगा। इन उपग्रहों को दोबारा इस्तेमाल किया जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दूरसंचार प्रौद्योगकी के क्षेत्र में भारत लगातार बेहतर हो रहा है। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि कहा कि अपनी स्वदेशी 4जी/5जी तकनीक से अपनी ताकत साबित कर दी है। इतना ही नहीं, आने वाले तीन सालों में भारत दुनिया के लिए दूरसंचार प्रौद्योगिकी का प्रमुख निर्यातक बन जायेगा। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने रेलवे को लेकर भी बड़ा बयान दिया। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे के निजीकरण की कोई योजना नहीं है।
सबसे तेज गति से हो रहा 5जी सुविधा का प्रसार : केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 5जी सेवाओं की शुरुआत देश में एक अक्टूबर, 2022 को हुई थी। इसके 100 दिन के भीचर 200 से ज्यादा शहरों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है। इस रफ्तार से 5जी के प्रसार से लिए दुनियाभर के कई लोगों ने प्रशंसा भी की है। इतना ही नहीं, कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे दुनिया में 5जी का सबसे तेज प्रसार बताया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। स्विट्जरलैंड में काफी ऊंचाई पर एक बांध है- लेक मट्जे डैम (मुत्तसी झील बांध)। यह कोई सामान्य डैम नहीं है। यह एक सोलर डैम है। बादलों की ऊंचाई पर बना यह डैम उस मौसम, खासकर सर्दियों में बिजली पैदा करता है, जब बाकी जगह बिजली का उत्पादन ठंडा पड़ जाता है। यह समुद्र तल से 8000 फीट की ऊंचाई पर बना है।
इस प्रोजेक्ट का नाम आल्पिनसोलर है, जिसे एनर्जी कंपनी आक्स्पो चला रही है। 700 घरों की जरूरत के बराबर बिजली: स्विस ऊर्जा फर्म एक्सपो ने देश के सबसे लंबे बांध पर लगभग 5,000 के करीब सौर पैनल स्थापित किये हैं। ये पैनल सर्दियों के मौसम में भी स्वच्छ बिजली पैदा करेंगे, जब बारिश और पानी की कमी से पनबिजली का उत्पादन कम हो जाता है।
यह बांध हर घंटे 33 लाख किलोवाट बिजली पैदा कर सकता है। इतनी बिजली 700 घरों के लिए काफी है। तीन गुना फायदा कैसे? सोलर पैनल की यह दीवार बादलों के ऊपर है, इसलिए सर्दियों में भी यह अच्छी धूप हासिल करती है और ऐसे में बहुत सारी बिजली पैदा होती है। पहाड़ों पर जमी बर्फ भी धूप को परावर्तित कर इन सोलर पैनलों पर भेजती है।
ऐसे में धूप का असर बढ़ जाता है और बिजली तीन गुना ज्यादा बनती है। कंपनी का क्या कहना है? एक्सपो के प्रवक्ता जीनेट श्रांज ने का कहना है कि अल्पाइन सौर संयंत्रों के गुणों में से एक यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से सर्दियों में मिडलैंड्स की तुलना में तीन गुना अधिक बिजली का उत्पादन करते हैं।
फ्यूचर प्लान: पिछले साल, स्विट्जरलैंड की संसद ने सर्दियों के दौरान बिजली की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद के लिए नई सौर परियोजनाओं की मंजूरी को स्वीकृति दी थी। पिछले साल ही इस बांध का निर्माण पूरा हुआ है। 2030 तक यहां 4,200 पैनल और लगाए जाने का लक्ष्य है, ताकि हर साल करीब 1.2 गीगावाट सोलर बिजली और पैदा होगी। कंपनी 30 हजार से अधिक घरों को इस तरह तैयार बिजली देना चाहती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के इतिहास में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के भंडार पाये गये हैं। माइंस के सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि पहली बार लिथियम के भंडार मिले हैं और वह भी जम्मू और कश्मीर में। इस भंडार के 60 लाख टन के होने की संभावना है। खजाना कहे जाने वाला लिथियम का भंडार मिलने को नई युग की शुरूआत माना जा रहा है।
हालांकि, इससे पहले कर्नाटक के मांड्या जिले में 1600 टन का लिथियम भंडार पाया गया था, लेकिन वह किसी भी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए नहीं था। आस्ट्रेलिया, चिली और चीन लिथियम के तीन सबसे बड़े उत्पादक और निर्यातक हैं। लिथियम एक ऐसी धातु जिसके बड़ी मात्रा में मिलने से देशों के भाग्य तक बदल जाते हैं।
अब भारत में भी जब इसका भंडार मिला है तो आने वाले समय में कई दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। भारत में लिथियम के मिलने से माना जा रहा है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों के सेक्टर को बूस्ट मिल सकता है। लिथियम की बैटरियों का इस्तेमाल ईवी में किया जाता है और पेट्रोल व डीजल के महंगे होने के चलते कार कंपनियां इन दिनों ईवी कारों पर काफी जोर दे रहे हैं। देश-दुनिया की सभी प्रमुख कार कंपनियां नई-नई ईवी कारें लॉन्च कर रही हैं।
अभी तक भारत लीथियम के इम्पोर्ट के लिए आस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना पर निर्भर रहा है। रिचार्जेबल बैटरी में लिथियम एक प्रमुख तत्व है जो स्मार्टफोन और लैपटॉप, साथ ही इलेक्ट्रिक कारों जैसे कई गैजेट्स के लिए बहुत ही जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह खोज ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन में कटौती के प्रयासों के तहत 2030 तक प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों की संख्या में 30 फीसदी की वृद्धि करने में भारत की मदद कर सकती है।
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