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Published / 2023-12-16 21:44:14
यादें 2023 की... : इस साल ट्रैंड में रही नाखूनों की ये कला, वेडिंग सीजन में करें ट्राई

एबीएन नॉलेज डेस्क। आवरआल लुक को परफेक्ट बनाने के लिए आउटफिट, मेकअप और हेयरस्टाइल के अलावा नेल आर्ट भी खूबसूरती पर चार-चांद लगा देते हैं। 

खासतौर पर इस वेडिंग सीजन में नेल आर्ट के जरिए आप अपनी खूबसूरती पर चार-चांद लगा सकते हैं। वैसे तो नेल आर्ट बहुत ही बारीकी से करवाने पड़ते हैं लेकिन आज आपको कुछ ऐसे डिजाइन्स दिखाते हैं जिन्हें आप इस वेडिंग सीजन ट्राई कर सकती हैं।   

  • इस तरह के ब्लैक और गोल्डन नेल आर्ट आप इस वेडिंग सीजन ट्राई कर सकते हैं।  
  • आप चाहें तो ऐसे मल्टी कलर का नेलआर्ट ट्राई कर सकते हैं। 
  • पर्पल, व्हाइट और सिल्वर कलर के ऐसे नेल आर्ट डिजाइन आप ट्राई कर सकते हैं। तीन कलर्स का कॉम्बिनेशन आपके हाथों की सुंदरता को डबल कर देगा। 
  • न्यूड कलर्स आजकल काफी ट्रैंड में है। ऐसे में यदि आप चाहें तो न्यूड नेल आर्ट भी इस वेडिंग सीजन  ट्राई कर सकते हैं। 
  • फ्लोरल नेल आर्ट का अगर आपको शौक है तो आप आसानी से इसे वेडिंग सीजन में ट्राई कर सकते हैं।

Published / 2023-12-12 21:01:47
जानें 2023 में गूगल पर सबसे ज्यादा किया किया गया सर्च

सेक्स आन द बीच रेसिपी साल 2023 में गूगल पर हुई सबसे ज्यादा सर्च

एबीएन नॉलेज डेस्क। साल 2023 कई खट्टे-मीठे, तीखे स्वाद देकर जा रहा है। इस साल गूगल पर सबसे ज्यादा जिस रेसिपी को लोगों ने सर्च किया वो थी सेक्स आन द बीच रेसिपी, जी हां ये वो ड्रिंक है जो इस साल लोग सबसे ज्यादा पीना और बनाना चाहते थे। 

तो आप भी अगर नया साल आने से पहले ये रेसिपी जान लेंगे तो इस साल न्यू ईयर पार्टी में आप भी अपने मेहमानों को सेक्स आन द बीच ड्रिंक सर्व करेंगे। सेक्स आन द बीच एक पॉप्युलर कॉकटेल है जिसे बनाना आसान है और इसका स्वाद बहुत रेफ्रेशिंग होता है। 

तो आप अगर इसे घर पर बनाना चाहते हैं तो आपका क्या सामग्री चाहिए और इसे बनाने का सही तरीका क्या है। आइये सब जानते हैं : सेक्स आन द बीच रेसिपी बनाने की सामग्री : 

  • 1 आँज वोडका 
  • 1 आँज पीच नैक्टार 
  • 1 आँज क्रैनबेरी जूस 
  • 1 आँज आरेंज जूस 
  • 1 आँज पाइनएप्पल जूस 
  • आधा आँज ग्रेनाडाइन सिरप 
  • बर्फ (क्रश की हुई) 

सेक्स आन द बीच रेसिपी बनाने का तरीका :

  • शेकर में वोडका, पीच नैक्टार, क्रैनबेरी जूस, आरेंज जूस, पाइनएप्पल जूस और ग्रेनाडाइन सिरप डालें। 
  • शेकर को ड्यूल शेक के साथ ढंक दें और अच्छे से शेक करें ताकि सभी सामग्री अच्छे से मिल जायें। 
  • ग्लास में बर्फ (क्रश की हुई) डालें। 
  • शेकर से निकालकर उसे ग्लास में छलन के माध्यम से छलाना। 
  • ग्लास में छलाने के बाद, उसे गर्मी से बचाने के लिए ठंडा करें और ताजगी के साथ परोसें। 

नोट : आप इसे गर्मी में ठंडा करने के लिए बार-आइस या क्रश की हुई बर्फ का उपयोग कर सकते हैं। यह कॉकटेल ठंडा और रेफ्रेशिंग है और इसका स्वाद बहुत शानदार होता है। कृपया ध्यान दें कि शराब की सेवा केवल आदृष्ट वयस्क उम्र के व्यक्तियों के लिए उचित है।

Published / 2023-11-29 17:32:34
कहीं ईश्वर के अपमान के कारण तो नहीं हुई थी टनल वाली घटना

एबीएन नॉलेज डेस्क। विदेशी टनल एक्सपर्ट अर्नाल्ड डिक्स जितने बार भी टनल के अंदर गये और बाहर निकले, उतनी बार पास वापस स्थापित पूजा स्थल के आगे घुटनों पर बैठकर हाथ जोड़े और आंख बंद करके प्रार्थना की।

इन्हीं अमेरिकी एक्सपर्ट ने आते ही टनल के मुहाने से हटाये गये पूजा स्थल को वापस रखवाया था। कहा था कि हिमालय ने गुस्सा दिखाया है। उन्होंने मजदूरों को बंधक बनाया है। अब हिमालय ही जब चाहेगा, तब उनको छोड़ेगा।

हुआ भी ऐसा ही। अमेरिकी मशीन भी पहली बार किसी मिशन पर टूट गया और दरवाजे तक पहुंचकर भी सारे एक्सपर्ट लाचार हो गये थे। अमेरिकी टनल विशेषज्ञ ने कहा था कि उन्होंने मां काली से एक डील की है। शायद अब वे उस अध्यात्म अनुभव को साझा करेंगे।

आज भी अर्नाल्ड उस छोटे से चबूतरे वाले मंदिर के में देवी, भोलेनाथ और बाबा बौगनाथ की पूजा की और बहुत देर तक वहीं बैठे रहे।

सबसे अजूबा तब हुआ, जब इसी पूजा स्थल के पीछे चट्टान पर पानी की धारा निकल गयी और उससे बाबा भोलेनाथ की आकृति सी बन गयी। मौसम अचानक साफ हो गया। जबकि बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने बता रखा था। उसे देखकर अर्नाल्ड ने कहा कि आज हिमालय और यहां के बाबा भोलेनाथ खुशखबरी देने वाले हैं।

एक दूसरे धर्म के प्रख्यात इंजीनियर द्वारा हिंदू धर्म की मान्यताओं को इस स्तर तक समझना और इज्जत देना काफी कुछ कह जाता है, जहां विज्ञान डगमगाता है। वहीं से आस्था की शुरूआत होती है। विज्ञान और धर्म विपरीत नहीं बल्कि पूरक है।

सभी 41 लोगों की सकुशल लौटे अब सरकार से कुछ उम्मीद कि अब हर मजदूर का 1 करोड़ का दुर्घटना इंश्योरेंस कंपलसरी हो ... और दूसरा पहाड़ों के मंदिर को धार्मिक स्थल रहने दें, पर्यटन स्थल न बनायें। प्रकृति से छेड़छाड़ कम से कम हो। और पहाड़ों के धार्मिक स्थान में रहने के होटल, घर आदि निर्माण न हों। लोग सुबह जाएं और वापस उसी दिन नीचे लौटें। बस मूलभूत सुविधा ही हो।

प्रकृति ने बता दिया है कि

वह सर्वोपरि है…

वही ईश्वर है…

वही शक्ति है...

हम सबको उसे मानना ही होगा।

Published / 2023-11-25 20:19:09
टारगेट के करीब पहुंचा आदित्य एल-1

7 जनवरी की तारीख अहम

एबीएन नॉलेज डेस्क। सूर्य के अध्ययन के लिए भेजे गये भारत के पहले अंतरिक्ष मिशन यान आदित्य एल-1 अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही अपने लक्षित पॉइंट तक पहुंच जायेगा। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने इसकी जानकारी दी है। 

इसरो चीफ ने कहा कि आदित्य सही रास्ते पर है और मुझे लगता है कि यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि संभव है कि सात जनवरी को आदित्य एल-1 अपना अंतिम मैनुवर पूरा कर एल-1 पॉइंट में दाखिल होगा।

बता दें कि आदित्य एल1 को बीती 2 सितंबर 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। आदित्य एल-1 स्पेस यान करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर 125 दिनों में सूर्य के नजदीक स्थित लैग्रेजियन पॉइंट तक पहुंचेगा। 

आदित्य एल1 लैग्रेजियन पॉइंट से सूर्य की तस्वीरें लेकर पृथ्वी पर भेजेगा। आदित्य एल1 की मदद से इसरो सूर्य के किनारों पर होने वाली हीटिंग का अध्ययन करेगा और सूरज के किनारों पर उठने वाले तूफानों की गति और उसके तापमान के पैटर्न को समझने की कोशिश की जायेगी।

Published / 2023-11-20 20:05:52
नासा की भविष्यवाणी से सकते में आम जनजीवन

  • नासा ने बताया कैसे पृथ्वी पर होगा जीवन का अंत, दूसरे ग्रहों पर जिंदगी तलाशना ही अंतिम रास्ता 

एबीएन नॉलेज डेस्क। पृथ्वी के वायुमंडल में ऐसे बदलाव आयेंगे, जिससे यहां आक्सीजन बहुत ही कम हो जाएगी। इसके चलते पृथ्वी पर वर्तमान का वायुजीवी वाला जीवन खत्म हो जायेगा। 

इसमें इंसान भी शामिल होंगे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे पहले इंसानों के रहने लायक दूसरा ग्रह खोजना होगा। हाल में किये गये एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन नासा के नेक्सएसएस (नेक्सस फॉर एक्सोप्लैनेट सिस्टम साइंस) परियोजना का हिस्सा है, जिसमें बाहरी ग्रहों पर जीवन ढूंढा जा रहा है। 

जॉर्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक क्रिस रेनहार्ड ने कहा कि हमारा अध्ययन बताता है कि पृथ्वी में दो तरह के बदलाव हो रहे हैं। एक ऐसी प्रक्रिया जो लाखों वर्षों से चल रही हैं और पृथ्वी को अलग-अलग दौर में ले जाने का काम करती हैं। 

इससे होने वाले बदलाव पृथ्वी पर दूरगामी प्रभाव देते हैं। वहीं, दूसरी तरफ वे बदलाव जो बहुत तेजी से होते हैं, लेकिन उनके असर बहुत गहरे होते हैं और यहां तक उनसे पृथ्वी की प्रक्रियाओं में बड़ा या लंबे समय तक रहने वाला बदलाव आ जाता है। मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाला जलवायु परिवर्तन भी इसी का हिस्सा है।

खत्म होगा जीवन का यह स्वरूप

रेनहार्ड ने कहा कि इस बदलाव का नतीजा यह होगा कि पृथ्वी पर आक्सीजन पर निर्भर जीवन खत्म हो जायेगा। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के जैवमंडल के जटिल मॉडलों का उपयोग किया और सूर्य की बढ़ती चमक के कारण कार्बन डाइआक्साइड के टूटने से उसकी कमी जैसे कारकों को शामिल किया।

Published / 2023-11-15 18:44:50
नासा-इसरो की संयुक्त भागीदारी रचेगी इतिहास, जानें कैसे...

  • इसरो : 2024 में नासा और इसरो लॉन्च करेंगे संयुक्त अंतरिक्ष मिशन, हर 12 दिनों में होगा पृथ्वी का सर्वेक्षण

एबीएन नॉलेज डेस्क। नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) को विशेष रूप से कंपन से संबंधित परीक्षणों के बाद 2024 की पहली तिमाही में लॉन्च किया जायेगा। नासा निसार के प्रोजेक्ट मैनेजर फिल बरेला ने कहा कि इसे इसरो अगले साल की पहली तिमाही में लॉन्च करने का अनुमान है। 

उन्हें उम्मीद है कि इसरो जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-2 के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निसार (जिसे  नाइसर  कहा जाता है) का प्रक्षेपण जनवरी से पहले नहीं होगा। 

तीन साल की अवधि वाले इस मिशन का उद्देश्य हर 12 दिनों में पृथ्वी की सभी भूमि और बर्फ से ढंकी सतहों का सर्वेक्षण करना है। यह 90 दिनों की उपग्रह कमीशनिंग अवधि के बाद शुरू होगा। 

जिन प्रमुख परीक्षणों को किया जाना बाकी है, उनमें सबसे अहम कंपन परीक्षण है। बरेला ने कहा परीक्षणों की एक पूरी शृंखला है जिसे हमें करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए बैटरी और सिमुलेशन परीक्षण किए जाने चाहिए कि सिस्टम ठीक काम करता है।

बरेला ने कहा- हम रडार और विभिन्न अंतरिक्ष यान इलेक्ट्रॉनिक्स पर प्रदर्शन परीक्षण करेंगे। इसलिए, बहुत सारे परीक्षण बाकी हैं, लेकिन बड़े वातावरण का परीक्षण, जो अब शेष है, वह कंपन है। 

नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के निदेशक डॉ लॉरी लेशिन ने कहा कि निसार परियोजना अतीत में उड़ायी गयी किसी भी चीज से बेहतर है। उन्होंने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा था, हालांकि पिछले मिशनों के डेटासेट हैं जो एक तरह की बेसलाइन बना सकते हैं, लेकिन निसार के साथ हम क्षमता के नये स्तर पर पहुंचेंगे।

लेशिन ने कहा, अगर यह बहुत अच्छी तरह से काम करता है, तो हम लगभग निश्चित रूप से लंबी आधार रेखा को प्राप्त करने के लिए उस मिशन का विस्तार करेंगे। पृथ्वी को बहु-वर्षीय टाइमस्केल पर बदलते हुए देखना एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। यह वही है जिसे हम ढूंढ़ रहे हैं।

इसरो के अनुसार, निसार एक लो अर्थ आर्बिट (एलईओ) वेधशाला है जिसे उसके और नासा द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है। निसार 12 दिनों में पूरे विश्व का नक्शा तैयार करेगा और पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र, बर्फ द्रव्यमान, वनस्पति बायोमास, समुद्र के स्तर में वृद्धि, भूजल और भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन सहित प्राकृतिक खतरों में परिवर्तन को समझने के लिए स्थानिक और अस्थायी रूप से सुसंगत डेटा प्रदान करेगा।

नासा ने एक बयान में कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य जंगली, कृषि, आर्द्रभूमि और पर्माफ्रॉस्ट पारिस्थितिक तंत्र में कार्बन भंडारण और उत्थान की गतिशीलता और जलवायु परिवर्तन के लिए बर्फ की चादरों की प्रतिक्रिया, समुद्री बर्फ और जलवायु के संबंध और दुनिया भर में समुद्र के स्तर में वृद्धि पर प्रभाव को समझना है।

निसार में सिंथेटिक अपर्चर रडार इंस्ट्रूमेंट (एसएआर), एल-बैंड एसएआर, एस-बैंड एसएआर और एंटीना रिफ्लेक्टर होंगे। नासा के अनुसार, आनबोर्ड उपकरण अंतरिक्ष से एक सेंटीमीटर का मामूली बदलाव भी देख सकते हैं। एसयूवी आकार के उपग्रह का द्रव्यमान लगभग 2,800 किलोग्राम है, जो लगभग चार किलोवाट बिजली प्रदान करने वाले दो सौर प्रणालियों द्वारा संचालित होगा।

Published / 2023-10-28 00:13:15
आज रात 1:05 से साल का आखिरी चंद्रग्रहण

  • मोक्ष रात 2:24 बजे, 9 घंटे पहले से सूतक काल
  • खुले आसमान में खीर रखने से करें परहेज

टीम एबीएन, रांची। 28 अक्टूबर शनिवार को शरद पूर्णिमा के दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा। यह चंद्र ग्रहण झारखंड सहित पूरे देश भर में रात 1:05 से रात 2:24 तक रहेगा जिसका सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जायेगा। 

पंडित संतोष पांडेय के अनुसार शनिवार शाम जब चंद्र ग्रहण का सूतक शुरू हो जायेगा उसके बाद पारंपरिक रूप से पूजा पाठ और देव स्पर्श नहीं होगा। ग्रहण के समय में अपने इष्ट देवता और भगवान का ध्यान करना चाहिए। शरद पूर्णिमा के दिन खुले में खीर रखने का रिवाज है, पर इस बार परहेज करना चाहिए। ग्रहण के कारण गंगा आरती शनिवार कों दोपहर में ही की जायेगी, शाम को नहीं।  

शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखे जाने की परंपरा है, जिसे लोग ग्रहण करते हैं।चंद्रग्रहण की वजह से खीर सुतक लगने से पहले बनाकर तुलसी का पत्ता रखना श्रेयस्कर होगा, क्योंकि सूतक शाम 4:05 से शुरू हो जायेगा जो ग्रहण समाप्ति यानी रात 2:24 तक रहेगा। इस दौरान खीर को ढंककर रखें और चंद्रग्रहण समाप्त होने के पश्चात आप खुले आसमान में रखकर सूर्योदय से पूर्व इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं।

पंडित संतोष के मुताबिक चंद्र ग्रहण वृष राशि वालों के लिए शुभ नहीं है।  वहीं मिथुन, वृश्चिक, कुंभ और कर्क राशि वालों के लिए लाभप्रद होगा। सिंह, कन्या, तुला, मकर और मीन की करें तो इनके लिए दुख, चिंता, पीड़ा और क्षति के योग हैं। 

ऐसे जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की आराधना के साथ-साथ अपने इष्ट देव का जप करना चाहिए। यह ग्रहण मेष राशि में लग रहा है इस कारण से इस राशि के लोगों को इसे देखने से बचना चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी चंद्र ग्रहण को नहीं देखना चाहिए।

Published / 2023-10-27 22:06:31
चंद्रयान-3 के स्वागत में लैंडर ने की साफ-सफाई, जानें कैसे...

चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर उतरे ही लैंडर ने कर दिखाया था ये कमाल, हटाई कई टन मून डस्ट

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत के चंद्रयान 3 ने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करके इतिहास रच दिया था। लेकिन उस दिन लैंडर के लैंड करते ही दक्षिणी ध्रुव पर एक और घटना हुई थी। विक्रम लैंडर के लैंड करते ही चंद्रमा की सतह पर इतनी लूनर मिट्टी उड़ी कि उसने चांद पर भी एक इंजेक्ट हेलो तैयार कर दिया। 

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक पर लिखा- चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को चांद पर लैंडिंग करते ही चांद की सतह पर एक इजेक्ट हेलो बना दिया। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि विक्रम लैंडर के लैंड करते ही लगभग 2.06 टन लूनर मिट्टी चांद पर फैल गयी।

क्या होता है इजेक्ट हेलो और क्या है एपिरेगोलिथ?

वैसे तो इसरो ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट एक्स पर चांद की धरती पर चंद्रयान-3 के लैंडर द्वारा बनाये गये इस इजेक्ट हेलो के बारे में जानकारी दी है, लेकिन आपके दिमाग में यह सवाल जरूर दस्तक दे रहा होगा कि आखिरकार यह इजेक्ट हेलो होता क्या है? या एपिरेगोलिथ भी क्या चीज है? हम आपको सिंपल भाषा में इसके बारे में बताते हैं। 

दरअसल, चंद्रयान-3 के लैंडर ने जब चांद की धरती पर लैंडिंग की प्रक्रिया शुरू की थी तो इसकी सतह के करीब आते ही वहां मौजूद मिट्टी आसमान में उड़ने लगी थी। चांद की सतह से उड़ने वाली इसी मिट्टी और उसमें मौजूद चीजों को साइंटिफिक भाषा में एपिरेगोलिथ कहते हैं। ये वास्तव में लूनर मैटेरियल हैं। 

चांद की धरती की मिट्टी टेलकम पाउडर से भी अधिक पतली है, जो चांद के सतह पर लैंडिंग के समय चंद्रयान-3 के लैंडर में लगे रॉकेट बूस्टर के आॅपोजिट डायरेक्शन में फायर करते ही उड़ने लगी थी।

क्यों करनी पड़ी थी रॉकेट बूस्टर की फायरिंग

चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की वजह से चंद्रयान-3 का लैंडर तेज गति से चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था, क्रैश लैंडिंग से बचाने के लिए इसकी गति धीमी करनी जरूरी थी। इसके लिए इसमें लगे रॉकेट बूस्टर को फायर किया गया था, जिससे वह चंद्रयान-3 के लैंडर को एक खास गति पर ऊपर की ओर धकेल रहा था और दूसरी ओर चांद का गुरुत्वाकर्षण लैंडर को नीचे खींच रहा था।

हालांकि गुरुत्वाकर्षण खिंचाव गति थोड़ी अधिक थी जिसकी वजह से लैंडर सतह की ओर बढ़ रहा था और रॉकेट फायरिंग से ऊपर की ओर धकेले जाने के कारण गति धीरे-धीरे शून्य की ओर बढ़ रही थी। 

सतह तक पहुंचते-पहुंचते धीरे-धीरे रॉकेट बूस्टर की फायरिंग के जरिये लैंडर की गति शून्य की गयी थी और इस दौरान जितना समय लगा था। उतनी देर तक चांद की मिट्टी सतह से ऊपर उड़ती रही और लैंडिंग साइट से दूर जाकर फिर चांद के गुरुत्वाकर्षण की वजह से धीरे-धीरे सतह पर गिरती रही।

लैंडिंग के वक्त तक चांद की जमीन पर 108.4 वर्ग मीटर क्षेत्र की करीब 2.5 टन मिट्टी उड़कर अपनी जगह से दूसरी जगह गिरी है। इसकी वजह से इस 108.4 वर्ग मीटर दायरे की जमीन की मिट्टी लगभग उड़ गयी है और चांद की सतह का ठोस हिस्सा बचा है जो एक खास स्ट्रक्चर की तरह दिख रहा है। इसका आकार गोल है, इसलिए इसरो ने इसे इजेक्ट हेलो नाम दिया है। इसकी तस्वीर चंद्रयान दो के कैमरे से खींची गयी है।

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