एबीएन डेस्क। एयर इंडिया समेत कई अंतर्राष्ट्रीय विमान कंपनियों ने 5जी मोबाइल फोन सेवा और जटिल विमानन प्रौद्योगिकियों के बीच हस्तक्षेप पर अनिश्चितता को लेकर बुधवार से अमेरिका के लिए उड़ानों में कटौती कर दी है। एयर इंडिया ने कहा कि दिल्ली से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और जेएफके तथा मुंबई से नेवाकर् के बीच अपनी उड़ानें रद्द कर दी गयी है। एयर इंडिया ने एक ट्वीट किया कि अमेरिका में 5त्र संचार की तैनाती के कारण हम 19 जनवरी से दिल्ली से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और जेएफके तथा मुंबई से नेवार्क के बीच अपनी उड़ानें संचालित करने में सक्षम नहीं होंगे।सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमीरात, एयर इंडिया, ऑल निप्पॉन एयरवेज और जापान एयरलाइंस ने अमेरिका के लिए उड़ानों में कटौती की घोषणा की है। अमीरात ने नौ अमेरिकी हवाई अड्डों बोस्टन, शिकागो ओ‘हारे, डलास फोर्ट वर्थ, ह्यूस्टन में जॉर्ज बुश इंटरकांटिनेंटल, मियामी, नेवाकर, ऑरलैंडो, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल के लिए अपनी उड़ानें रद्द किये जाने की घोषणा की है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक हवाई अड्डों के पास 5जी सेल्यूलर एंटिना कुछ विमान उपकरणों से रीडिंग को अवरुद्ध कर सकता है जिससे पायलटों को यह पता चलता है कि वे जमीन से कितनी दूर हैं।
एबीएन डेस्क। भारत ने मंगलवार को आईएनएस विशाखापत्तनम से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल का समुद्र से समुद्र में मार करने वाला स्वरूप है। भारतीय नौसेना के सूत्रों के अनुसार परीक्षण में मिसाइल ने अपनी अधिकतम रेंज के साथ टार्गेट शिप को पूरी सटीकता के साथ निशाना बनाया। भारत ने ये टेस्ट तब किया है, जब चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है। वहीं बता दें कि हाल ही में फिलीपींस ने ब्रह्मोस को खरीदने के लिए समझौता किया है। जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, ब्रह्मोस भारत के साथ-साथ फिलीपींस की नौसेना का हिस्सा बन सकती है। इससे पहले पिछले महीने भारत ने ओडिशा तट के पास सतह से सतह पर मार करने में सक्षम स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल "प्रलय" का सफल परीक्षण किया था। "प्रलय" 150 से 500 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ, ठोस रॉकेट मोटर और अन्य नई तकनीक से लैस है।
एबीएन डेस्क। अगर आप भी रेल से यात्रा करते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, अब रेल यात्रियों को टिकट मिलने में ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब आपको ऑफलाइन टिकट बुक कराने के लिए रेलवे स्टेशन जाकर लंबी लाइन लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है, तो आपको बता दें कि अब आप अपने नजदीकी पोस्ट ऑफिस जाकर भी रेलवे टिकट बुक कर सकते हैं। दरअसल, भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर पोस्ट ऑफिस से भी रेल टिकट बुक करने की सुविधा दी है। इस खास सुविधा की पहल रेलवे की टिकट बुकिंग देखने वाली कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी ने की है। ये सुविधा रेलवे की आधुनिकीकरण योजना का एक हिस्सा है, जिसके तहत पोस्टल डिपार्टमेंट की मदद से पोस्ट ऑफिस में ट्रेन आरक्षण की सुविधा शुरू की जा रही है। रेलवे की जबरदस्त पहल रेलवे की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, इस खास पहल की शुरुआत अभी उत्तर प्रदेश से की जा रही है, जिसके तहत लगभग 9147 पोस्ट ऑफिस में टिकट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लोगों को टिकट बुक कराने में काफी सुविधा मिलेगी। अब ऑफलाइन टिकट बुक करने वालों को स्टेशन और एजेंटों के पास जाना नहीं पड़ेगा। इस नई पहल या सुविधा का लाभ सबसे अधिक ग्रामीण इलाकों में रहने वालो लोगों को होगा। अब दूर-दराज के गांवों और रिमोट लोकेशन में रहने वालों को भी ट्रेन में रिजर्वेशन कराने में सुविधा प्राप्त होगी। अपने पास के पोस्ट ऑफिस से कोई भी आसानी से अपना टिकट प्राप्त कर सकेगा।
एबीएन डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 2023 में प्रक्षेपित किए जाने वाले एवं मानव को अंतरिक्ष में ले जाने वाले देश के प्रथम अभियान गगनयान के लिए काफी तेजी से काम कर रहा है। क्रू मॉड्यूल, के पृथ्वी पर उतरने के विकल्पों , अंतरिक्ष यात्रियों की बचाव प्रणाली और इस दल (क्रू) के प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवनरक्षक पैकेट के बारे में दिलचस्प विवरण सामने आए हैं। इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र, बेंगलुरु के निदेशक डॉ. उन्नीकृष्णन नायर ने एक आलेख में कहा कि क्रू मॉड्यूल सप्ताह भर के अपने अभियान को पूरा करने के बाद 2023 में भारतीय तट के पास उतरेगा, और अपेक्षाकृत शांत समुद्री मौसमी दशाओं वाला अरब सागर प्राथमिक विकल्प है, लेकिन एक अन्य विकल्प के तौर पर बंगाल की खाड़ी पर भी विचार किया जा रहा है। इंडियन ह्यूमन स्पेस मिशन शीर्षक वाला आलेख मनोरमा ईयर बुक 2022 में प्रकाशित हुआ है। इसरो ने वहनीय मानव अंतरिक्ष उड़ान गतिविधियों के लिए HSFC की स्थापना 2019 में बेंगलुरु में की थी और गगनयान पहली परियोजना है। अंतरिक्ष यात्री बचाव प्रणाली के कामकाज को मान्यता देने के लिए परीक्षण उड़ान और गगनयान का प्रथम मानव रहित अभियान 2022 के उत्तरार्ध में शुरू होने का कार्यक्रम है।गगनयान ऑर्बिटल मॉड्यूल के दो हिस्से हैं- क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉडयूल- तथा वजन करीब 8,000 किग्रा है। आर्बिटल मॉड्यूल को ह्यूमन रेटेड लॉंच व्हीकल (HRLV) से प्रक्षेपित किया जाएगा, जो GSLV मार्क-3 रॉकेट का उन्नत संस्करण है। क्रू मॉड्यूल में प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री के जीवित रहने में सहायक पैकेट होंगे जो करीब दो दिनों तक उनकी मदद करेंगे। हालांकि, इसरो इसे लेकर सकारात्मक है कि मॉड्यूल के पृथ्वी पर उतरने के बाद दो घंटे के अंदर अंतरिक्ष यात्री भारहीनता से उबर सकते हैं। गगनयान के लिए चयनित चार अंतरिक्ष यात्रियों ने रूस में करीब 15 महीनों तक अंतरिक्ष उड़ान का प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
एबीएन डेस्क। दक्षिण कोरिया सरकार 2026 तक कोरिया का पहला कृत्रिम सूर्य केस्टार बनाने के लिए तकनीकी विकसित करने की योजना बना रही है। यह सूर्य 300 सेकंड में 10 करोड़ डिग्री तक तापमान बनाए रख सकता है। 300 सेकंड परमाणु संलयन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए आवश्यक न्यूनतम समय है। देश के विज्ञान और आईसीटी मंत्रालय ने घोषणा की कि उसने कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूजन एनर्जी में 16वीं राष्ट्रीय संलयन समिति का आयोजन कर परमाणु संलयन ऊर्जा विकास की चौथी बुनियादी योजना (2022-2026) को अंतिम रूप दिया है। विज्ञान मंत्रालय हर 5 साल में परमाणु संलयन ऊर्जा विकास के लिए अपनी नीतियों के लक्ष्य और निर्देश निर्धारित करता है। योजना के अनुसार, यह कृत्रिम सूर्य प्रयोगों के क्षेत्र में परिचालन प्रौद्योगिकी में सुधार करना जारी रखेगा। सरकार केस्टार के साथ पृथ्वी पर इस सिद्धांत को कृत्रिम रूप से लागू करके बिजली जैसी बिजली का उत्पादन करने का लक्ष्य बना रही है। कोरियाई शोध दल ने पहली बार 2018 में केस्टार को 1.5 सेकंड के लिए 10 करोड़ डिग्री पर बनाए रखने में सफलता पाई थी। केस्टार पिछले साल 20 व इस साल 30 सेकंड के लिए यह क्षमता बनाए रखने में सफल रहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। साउथ कोरियाई सरकार उसके पहले आर्टफिशियल सूर्य KSTAR के लिए एक तकनीक विकसित करने की योजना बना रही है। एएनआई के मुताबिक, इसके तहत 300 सेकंड के लिए 100 मिलियन डिग्री तापमान बनाए रखने की तैयारी है। परमाणु संलयन तकनीक के व्यवसायीकरण के लिए 300 सेकंड जरूरी न्यूनतम समय है। मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड ICT ने 30 दिसंबर को घोषणा की कि उसने कोरिया इंस्टिट्यूट ऑफ फ्यूजन एनर्जी में 16वीं राष्ट्रीय संलयन समिति का आयोजन किया। इस दौरान परमाणु संलयन एनर्जी डेवलपमेंट की चौथी बुनियादी योजना (2022-2026) को अंतिम रूप दिया। साइंस मिनिस्ट्री हर 5 साल में परमाणु संलयन ऊर्जा डेवलपमेंट के लिए अपनी पॉलिसीज के लक्ष्य निर्धारित करता है। योजना के अनुसार, मिनिस्ट्री KSTAR एक्सपेरिमेंट्स के क्षेत्र में ऑपरेटिंग तकनीक में सुधार करती रहेगी। बीते वक्त में इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। जैसे- इस साल 30 सेकंड के लिए 100 मिलियन डिग्री अल्ट्रा-हाई तापमान मेंटेन किया गया था। अब 2026 तक ऐसी तकनीक विकसित की जानी है, जो 300 सेकंड के लिए इतना तापमान मेंटेन कर सके। आर्टफिशियल सूर्य के रोशनी और गर्मी पैदा करने का मूल सिद्धांत परमाणु संलयन है। सरकार KSTAR के साथ पृथ्वी पर इस सिद्धांत को कृत्रिम रूप से लागू करके बिजली पैदा करने का लक्ष्य बना रही है। कोरियाई रिसर्च टीम ने 2018 में पहली बार KSTAR को 1.5 सेकंड के लिए 100 मिलियन डिग्री पर मेंटेन किया था। पिछले साल इसे 20 सेकंड और इस साल 30 सेकंड के लिए 100 मिलियन डिग्री पर मेंटेन किया गया। सरकार ने भविष्य में परमाणु संलयन के जरिए बिजली पैदा करने के बेसिक कॉन्सेप्ट भी तय किए। इसके साथ ही साल 2030 तक जरूरी नेटवर्क समेत R&D रोडमैप बनाने की योजना भी प्रस्तुत की। गौरतलब है कि चीन भी कृत्रिम सूर्य बनाने पर काम कर रहा है। चीन के एक्सपेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकन्डक्टिंग टोकामक (EAST) ने इस साल एक नया रिकॉर्ड बना दिया। प्रयोग के तहत 101 सेकेंड समय तक 216 मिलियन फॉरेनहाइट यानी कि 120 मिलियन सेल्सियस का प्लाज्मा तापमान बनाकर रखा गया। इतना ही नहीं, "कृत्रिम सूर्य" पर काम कर रहे वैज्ञानिक 288 मिलियन फॉरेनहाइट (160 मिलियन सेल्सियस) का तापमान 20 सेकेंड तक बनाए रखने में कामयाब हुए। हेफई के इंस्टीच्यूट ऑफ प्लाज्मा फिजिक्स ऑफ द चाइनीज़ एकेडमी ऑफ साइंसेज (ASIPP) में स्थित टोकामक डिवाइस को परमाणु संलयन प्रक्रिया को रिप्रोड्यूस करने के लिए डिजाइन किया गया है। यही प्रक्रिया सूर्य और अन्य तारों में भी घटित होती है जिससे उष्मा और प्रकाश उत्पन्न होता है। यह प्रयोग नियंत्रित न्यूक्लियर फ्यूज़न ने असीमित स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध करवाने हेतु किया था। इससे पिछला रिकॉर्ड 180 मिलियन फॉरेनहाइट (100 मिलियन सेल्सियस) को 100 सेकेंड तक बनाए रखने का था जो कि अब टूट गया है। न्यूक्लियर फ्यूज़न के साथ काम करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। कोरोना और चीन दोनों ही देश कृत्रिम सूर्य के जरिए भविष्य की अपनी उर्जा जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य बना रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में 5जी का ट्रायल पिछले दो साल से चल रहा है और मई 2022 तक देश में 5जी का ट्रायल चलेगा। 5जी की कमर्शियल लॉन्चिंग को लेकर पूरा देश इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया था। अब दूरसंचार विभाग ने कहा है कि मेट्रो और बड़े शहरों में 5जी पहले लॉन्च किया जाएगा। दूरसंचार विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि गुरुग्राम, बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे जैसे बड़े शहरों में 5जी पहले लॉन्च किया जाएगा और यह लॉन्चिंग ट्रायल तौर पर नहीं, बल्कि कमर्शियल तौर पर होगी। बता दें कि इन शहरों पहले से ही वोडाफोन आइडिया, जियो और एयरटेल अपने 5जी नेटवर्क का ट्रायल कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5जी के नए स्पेक्ट्रम की नीलामी मार्च-अप्रैल 2022 में होगी और उसके बाद 5जी नेटवर्क को लॉन्च किया जाएगा, हालांकि स्पेक्ट्रम की कीमत को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है। यदि स्पेक्ट्रम की कीमत अधिक होगी तो 5जी के प्लान भी महंगे होंगे। बहुत महंगी हैं या नहीं, इस पर चर्चा हुई है और मुझे लगता है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कई चीजें की जा सकती हैं कि भारतीय लोगों के लिए कवरेज बनाने के लिए पैसा है, एरिक्सन में एशिया पैसिफिक के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी मैग्नस इवरब्रिंग ने हाल ही में एक साक्षात्कार में द इंडियन एक्सप्रेस को बताया। बता दें कि भारतीय बाजार में पिछले दो साल में करीब 100 से अधिक 5जी स्मार्टफोन लॉन्च हुए हैं। इसके अलावा अन्य 5जी डिवाइस भी बाजार में मौजूद हैं। अब बस 5जी की लॉन्चिंग का इंतजार है। स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने अब लगभग 4जी फोन को लॉन्च करना ही बंद कर दिया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व के सबसे बड़े और अब तक का सबसे ज्यादा ताकतवर स्पेस टेलीस्कोप शनिवार को अपने अभियान पर रवाना हो गया। दुनिया के सबसे बड़ा यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है। यह पहले तारों, आकाशगंगाओं की खोज और जीवन के संकेतों का पता लगाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्वी तट स्थित फ्रेंच गुयाना अंतरिक्ष केंद्र से क्रिसमस की सुबह यूरोपीय रॉकेट एरियन के जरिए अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया। यह टेलीस्कोप अपने कक्षा तक पहुंचने में 16 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा जो कि चंद्रमा से चार गुना अधिक दूर है। इसे वहां पहुंचने में एक महीने का समय लगेगा और फिर अगले पांच महीनों में यह ब्रह्मांड की पड़ताल शुरू करने के लिए तैयार हो जाएगा। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने इस हफ्ते की शुरूआत में कहा था कि यह हमें हमारे ब्रह्मांड और उसमें हमारे स्थान की बेहतर समझ देने जा रही है कि हम कौन और क्या हैं। हालांकि, उन्होंने आगाह करते हुए यह भी कहा था, जब आप एक बड़ा पुरस्कार चाहते हैं, तो आपके सामने आमतौर पर एक बड़ा जोखिम होता है। एरियनस्पेस के मुख्य कार्याधिकारी स्टीफन इजराइल ने प्रक्षेपण से कुछ मिनट पहले कहा, हम आज सुबह मानवता के लिए प्रक्षेपण कर रहे हैं।
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