ज्ञान विज्ञान

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Published / 2022-08-23 17:26:29
प्रकांड विद्वान अष्टावक्र

एबीएन नॉलेज डेस्क। अष्टावक्र इतने प्रकांड विद्वान थे कि मां के गर्भ से ही अपने पिताजी ‘कहोड़’ को अशुद्ध वेद पाठ करने के लिये टोक दिये, जिससे क्रुद्ध होकर पिताजी ने आठ जगह से टेढ़े हो जाने का श्राप दे दिया था। अष्टावक्र अद्वैत वेदांत के महत्वपूर्ण ग्रंथ अष्टावक्र गीता के ऋषि हैं। अष्टावक्र गीता अद्वैत वेदांत का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। ‘अष्टावक्र’ का अर्थ ‘आठ जगह से टेढ़ा’ होता है। कहते हैं कि अष्टावक्र का शरीर आठ स्थानों से टेढ़ा था। उद्दालक ऋषि के पुत्र का नाम श्वेतकेतु था। उद्दालक ऋषि के एक शिष्य का नाम कहोड़ था। कहोड़ को संपूर्ण वेदों का ज्ञान देने के पश्चात उद्दालक ऋषि ने उसके साथ अपनी रूपवती एवं गुणवती कन्या सुजाता का विवाह कर दिया। कुछ दिनों के बाद सुजाता गर्भवती हो गई। एक दिन कहोड़ वेदपाठ कर रहे थे तो गर्भ के भीतर से बालक ने कहा कि पिताजी! आप वेद का गलत पाठ कर रहे हैं। यह सुनते ही कहोड़ क्रोधित होकर बोले कि तू गर्भ से ही मेरा अपमान कर रहा है इसलिये तू आठ स्थानों से वक्र (टेढ़ा) हो जायेगा। हठात एक दिन कहोड़ राजा जनक के दरबार में जा पहुंचे। वहां बंदी से शास्त्रार्थ में उनकी हार हो गई। हार हो जाने के फलस्वरूप उन्हें जल में डुबा दिया गया। इस घटना के बाद अष्टावक्र का जन्म हुआ। पिता के न होने के कारण वह अपने नाना उद्दालक को अपना पिता और अपने मामा श्वेतकेतु को अपना भाई समझता था। एक दिन जब वह उद्दालक की गोद में बैठा था तो श्वेतकेतु ने उसे अपने पिता की गोद से खींचते हुये कहा कि हट जा तू यहां से, यह तेरे पिता का गोद नहीं है। अष्टावक्र को यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने तत्काल अपनी माता के पास आकर अपने पिता के विषय में पूछताछ की। माता ने अष्टावक्र को सारी बातें सच-सच बता दीं। अपनी माता की बातें सुनने के पश्चात अष्टावक्र अपने मामा श्वेतकेतु के साथ बंदी से शास्त्रार्थ करने के लिये राजा जनक की यज्ञशाला में पहुंचे। वहां द्वारपालों ने उन्हें रोकते हुये कहा कि यज्ञशाला में बच्चों को जाने की आज्ञा नहीं है। इस पर अष्टावक्र बोले कि अरे द्वारपाल! केवल बाल श्वेत हो जाने या अवस्था अधिक हो जाने से कोई बड़ा व्यक्ति नहीं बन जाता। जिसे वेदों का ज्ञान हो और जो बुद्धि में तेज हो वही वास्तव में बड़ा होता है। इतना कहकर वे राजा जनक की सभा में जा पहुंचे और बंदी को शास्त्रार्थ के लिये ललकारा। राजा जनक ने अष्टावक्र की परीक्षा लेने के लिये पूछा कि वह पुरुष कौन है जो तीस अवयव, बारह अंश, चौबीस पर्व और तीन सौ साठ अक्षरों वाली वस्तु का ज्ञानी है? राजा जनक के प्रश्न को सुनते ही अष्टावक्र बोले कि राजन! चौबीस पक्षों वाला, छह ऋतुओं वाला, बारह महीनों वाला तथा तीन सौ साठ दिनों वाला संवत्सर आपकी रक्षा करे। अष्टावक्र का सही उत्तर सुनकर राजा जनक ने फिर प्रश्न किया कि वह कौन है जो सुप्तावस्था में भी अपनी आंख बंद नहीं रखता? जन्म लेने के उपरांत भी चलने में कौन असमर्थ रहता है? कौन हृदय विहीन है? और शीघ्रता से बढ़ने वाला कौन है? अष्टावक्र ने उत्तर दिया कि हे जनक! सुप्तावस्था में मछली अपनी आंखें बंद नहीं रखती। जन्म लेने के उपरांत भी अंडा चल नहीं सकता। पत्थर हृदयहीन होता है और वेग से बढ़ने वाली नदी होती है। अष्टावक्र के उत्तरों को सुकर राजा जनक प्रसन्न हो गये और उन्हें बंदी के साथ शास्त्रार्थ की अनुमति प्रदान कर दी। बंदी ने अष्टावक्र से कहा कि एक सूर्य सारे संसार को प्रकाशित करता है, देवराज इन्द्र एक ही वीर हैं तथा यमराज भी एक है। अष्टावक्र बोले कि इंद्र और अग्निदेव दो देवता हैं। नारद तथा पर्वत दो देवर्षि हैं, अश्वनीकुमार भी दो ही हैं। रथ के दो पहिये होते हैं और पति-पत्नी दो सहचर होते हैं। बंदी ने कहा कि संसार तीन प्रकार से जन्म धारण करता है। कर्मों का प्रतिपादन तीन वेद करते हैं। तीनों काल में यज्ञ होता है तथा तीन लोक और तीन ज्योतियां हैं। अष्टावक्र बोले कि आश्रम चार हैं, वर्ण चार हैं, दिशायें चार हैं और ओंकार, आकार, उकार तथा मकार ये वाणी के प्रकार भी चार हैं। बंदी ने कहा कि यज्ञ पांच प्रकार के होते हैं, यज्ञ की अग्नि पांच हैं, ज्ञानेन्द्रियां पांच हैं, पंच दिशाओं की अप्सरायें पांच हैं, पवित्र नदियां पांच हैं तथा पंक्ति छंद में पांच पद होते हैं। अष्टावक्र बोले कि दक्षिणा में छ: गौएं देना उत्तम है, ऋतुएं छ: होती हैं, मन सहित इंद्रियां छ: हैं, कृतिकाएं छ: होती हैं और साधस्क भी छ: ही होते हैं। बंदी ने कहा कि पालतू पशु सात उत्तम होते हैं और वन्य पशु भी सात ही, सात उत्तम छंद हैं, सप्तर्षि सात हैं और वीणा में तार भी सात ही होते हैं। अष्टावक्र बोले कि आठ वसु हैं तथा यज्ञ के स्तम्भक कोण भी आठ होते हैं। बंदी ने कहा कि पितृ यज्ञ में समिधा नौ छोड़ी जाती है, प्रकृति नौ प्रकार की होती है तथा वृहती छंद में अक्षर भी नौ ही होते हैं। अष्टावक्र बोले कि दिशाएं दस हैं, तत्वज्ञ दस होते हैं, बच्चा दस माह में होता है और दहाई में भी दस ही होता है। बंदी ने कहा कि ग्यारह रुद्र हैं, यज्ञ में ग्यारह स्तम्भ होते हैं और पशुओं की ग्यारह इन्द्रियां होती हैं। अष्टावक्र बोले कि बारह आदित्य होते हैं बारह दिन का प्रकृति यज्ञ होता है, जगती छंद में बारह अक्षर होते हैं और वर्ष भी बारह मास का ही होता है। बंदी ने कहा कि त्रयोदशी उत्तम होती है, पृथ्वी पर तेरह द्वीप हैं। इतना कहते कहते बंदी श्लोक की अगली पंक्ति भूल गये और चुप हो गये। इस पर अष्टावक्र ने श्लोक को पूरा करते हुये कहा कि वेदों में तेरह अक्षर वाले छंद अति छंद कहलाते हैं और अग्नि, वायु तथा सूर्य तीनों तेरह दिन वाले यज्ञ में व्याप्त होते हैं। इस प्रकार शास्त्रार्थ में बंदी की हार हो जाने पर अष्टावक्र ने कहा कि राजन! यह हार गया है, अतएव इसे भी जल में डुबो दिया जाये। तब बंदी बोला कि हे महाराज! मैं वरुण का पुत्र हूं और मैंने सारे हारे हुये ब्राह्मणों को अपने पिता के पास भेज दिया है। मैं अभी उन सबको आपके समक्ष उपस्थित करता हूं। बंदी के इतना कहते ही बंदी से शास्त्रार्थ में हार जाने के पश्चात जल में डुबोये गये सार ब्राह्मण जनक की सभा में आ गये जिनमें अष्टावक्र के पिता कहोड़ भी थे। अष्टावक्र ने अपने पिता के चरणस्पर्श किये। तब कहोड़ ने प्रसन्न होकर कहा कि पुत्र! तुम जाकर समंगा नदी में स्नान करो, उसके प्रभाव से तुम मेरे शाप से मुक्त हो जाओगे। तब अष्टावक्र ने इस स्थान में आकर समंगा नदी में स्नान किया और उसके सारे वक्र अंग सीधे हो गये। धन्य है हमारी सनातन संस्कृति...।

Published / 2022-08-22 14:09:12
पृथ्वी का 4 अरब वर्ष पुराना अवशेष मिला, जानें क्या कह रहे वैज्ञानिक...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आॅस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों को धरती की ऊपरी परत का 4 अरब साल पुराना एक विशाल टुकड़ा मिला है, जो आयरलैंड जितना बड़ा है। यह पृथ्वी के उस परत का हिस्सा है, जो इन अरबों वर्षों में तमाम उल्का पिंडों के वार से भी सुरक्षित रहे हैं और इनपर पर्वत निर्माण प्रक्रियाओं का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। यानी यह परत लगभग धरती के मूल स्थिति के रूप में ही बरकरार हैं और यही वजह है कि वैज्ञानिकों को इसमें मानव-जीवन के लिए कई तरह के संसाधन मिलने की संभावनाएं नजर आ रही हैं। पृथ्वी मूल रूप से तीन परतों में बंटी है- क्रस्ट (भू-पर्पटी), मैंटल (बीच का हिस्सा) और कोर (सबसे भीतर का हिस्सा)। कर्टिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को पश्चिम आॅस्ट्रेलिया के दक्षिण-पश्चिम में करीब 4 अरब साल पुराने क्रस्ट (भू-पर्पटी) के टुकड़े का प्रमाण मिला है। इसके लिए समुद्र के किनारों की रेत से खनीज की खोज करने वाले इंसान के बाल से भी सूक्ष्म लेजर का इस्तेमाल किया गया है। यह शोध कर्टिन स्कूल आॅफ अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेज के शोधकतार्ओं ने किया है। इस शोध से जुड़े एक शोधार्थी मैक्समिलियन ड्रॉल्नर के मुताबिक इस नई खोज से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि धरती एक निर्जन भूमि से कैसे जीवन के लायक बनी। वैज्ञानिक भू-पर्पटी या पृथ्वी की ऊपरी परत की जिस 4 अरब साल पुराने टुकड़े की बात कर रहे हैं, उसका आकार आयरलैंड के बराबर बताया जा रहा है। ड्रॉल्नर ने कहा, इस बात के साक्ष्य हैं कि आयरलैंड के आकार के चार अरब साल पुराने टुकड़े ने पिछले कुछ अरब वर्षों में पश्चिमी आॅस्ट्रेलिया के भूवैज्ञानिक विकास को प्रभावित किया है और वाशिंगटन में बने चट्टानों में भी यह कालखंड एक प्रमुख घटक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी की ऊपरी परत का यह टुकड़ा आॅस्ट्रेलिया, भारत और अंटार्कटिका के बीच पहाड़ों के निर्माण होने की प्रक्रियाओं से भी बचा रहा है और अभी भी पश्चिमी आॅस्ट्रेलिया के दक्षिण-पश्चिमी कोने के नीचे दसों किलोमीटर की गहराई में मौजूद है। शोधकतार्ओं का कहना है कि जब वह अपनी पड़तालों की तुलना पहले से मौजूद डेटा से करते हैं तो ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया के कई इलाकों में भू-पर्पटी के निर्माण और संरक्षण का कालखंड एक समान ही लगता है। उनके मुताबिक, लगभग चार अरब साल पहले पृथ्वी के विकास में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करता है। क्योंकि, उल्कापिंडों की बमबारी कम हो गई, जमीन की ऊपरी परत जम गयी और जीवन की शुरुआत होनी शुरू हो गई। कर्टिन स्कूल आॅफ अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेज में मिनरल सिस्टम ग्रुप के टाइम्सस्केल्स के शोध पर्यवेक्षक डॉ मिलो परहम ने कहा है कि इस क्षेत्र का पहले कोई बड़े पैमाने पर अध्ययन नहीं किया गया था; और जब मौजूदा डेटा की तुलना की गई तो परिणाम दिलचस्प दिखे। काफी नई जानकारी सामने आई। परहम का कहना है, क्रस्ट के पुराने टुकड़े का किनारा महत्वपूर्ण क्रस्टल सीमाओं का संकेत करता है, जो यह बताता है कि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की खोज कहां की जाए।

Published / 2022-08-19 03:44:32
धरती पर कैसे आया था पानी? जानें इसकी अनसुलझी कहानी...

एबीएन नॉलेज डेस्क। धरती पर पानी कैसे आया? ये सवाल लंबे समय से चर्चा का विषय है और अभी तक इसका पुख्ता जवाब नहीं मिला है। हालांकि, इसे लेकर कई तरह के दावे जरूर किए गए हैं और हर बार वैज्ञानिक धरती पर पानी आने के अलग अलग कारण बताते हैं। अब इस संदर्भ में एक और दावा किया गया है और बताया धरती पर पानी आने की कुछ संभावनाएं बताई गई है। हाल ही में एक स्टडी सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि पृथ्वी पर पानी आने की वजह एस्टेरॉइड है। यह स्टजी जापान की एक वैज्ञानिक टीम की ओर से की गई है। दरअसल, जापान ने एक एस्टरॉइड की स्टडी के लिए हायाबूसा-2 नाम का स्पेसक्राफ्ट भेजा था। इस एस्टेरॉइड का नाम रीयुगू है, जिस पर रिसर्च की जा रही थी। अब इस एस्टेरॉइड पर लगी धूल की स्टडी से पानी का संकेत मिला है। वैसे यह सैंपल साल 2020 में आ गए थे और अब उस पर जांच की जा रही थी। इसके जरिए दावा किया जा रहा है कि इस एस्टेरॉइड पर पुराने मौलिक तत्व मिले थे। धूल के कणों में कई ऑर्गेनिक मैटेरियल मिले थे, जो धरती पर जीवन की उत्पत्ति के सोर्स हो सकते हैं। इसके असात ही इसमें अमोनी एसिड्स को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं। अब एस्टेरॉइड से ग्रह और धरती बनने की बातें सामने आ रही हैं। जानकारी मिली है कि ऑर्गेनिक रिच-सी टाइप एस्टेरॉयड के जरिए धरती पर पानी आया हो सकता है। इसमें कुछ चीजें ऐसी मिली हैं, जिनके आधार पर कहा जा रहा है कि 450 करोड़ साल पहले एस्टेरॉयड रीयुगू पर जीवन के संकेत थे।

Published / 2022-08-18 17:39:14
मुंबई में इलेक्ट्रिक एसी डबल डेकर बस शुरू, यात्री उत्साहित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुंबई में डबल डेकर बस के ऊपरी हिस्से में बैठकर हवा खाना अब बीते दिनों की बात होगी; क्योंकि बेस्ट ने पहली इलेक्ट्रिक एसी डबल डेकर बस बृहस्पतिवार को सड़क पर उतार दी है। इसमें यात्रा को लेकर मुंबईवासी खासे उत्साहित हैं। वर्षों से पारंपरिक डबल डेकर बस में यात्रा करने वाले कई यात्री इस बात से सहमत दिखे कि नयी इलेक्ट्रिक एसी डबल डेकर बस में लगी बड़े शीशे वाली खिड़कियों से नजारा और बेहतर दिखेगा। हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लेलैंड की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इकाई स्विच मोबिलिटी ने बृहस्पतिवार को यहां देश की पहली इलेक्ट्रिक डबल डेकर वातानुकूलित बस का अनावरण किया। 65 सीटो वाली नयी बसें मुंबई नगर निकाय की सार्वजनिक परिवहन इकाई बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन (बेस्ट) उपक्रम के मौजूदा डबल-डेकर बेड़े की जगह लेंगी। आर्किटेक्ट विवेक पी ने कहा, बचपन में मुझे आगे की सीट पर बैठना पसंद था। बस में बैठकर बाहर का नजारा और हवा के झोंके अलग ही आनंद देते थे। मैं अपनी दादी का हाथ छुड़ाकर बस के ऊपरी हिस्से में अगली सीट पर बैठने के लिए दौड़ पड़ता था। नयी बसों में हम यह सब चीजें याद करेंगे। इस बीच, कई यात्री नयी इलेक्ट्रिक बस पर किए गए पेंट के रंगों को लेकर इसकी आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि बस पर लाल की तुलना में काले रंग को अधिक तरजीह दी गई है। एक यात्री अक्षय मराठे ने ट्वीट किया, डबल डेकर बस पर काले रंग का जोर अधिक है। दो डेक के बीच का रंग लाल होना चाहिए। नयी बस में पुरानी डबल डेकर के विपरीत दो सीढ़ियां हैं, जिनमें से एक पिछली तरफ जबकि दूसरी चालक सीट के पीछे है। नयी डबल डेकर बस के अंदरुनी डिजाइन में हरे-सफेद रंग की सीट दी गई है, जिसमें बेल्ट भी है। वहीं, यात्रियों की सुविधाओं के तहत लैपटॉप और मोबाइल फोन चार्जिंग पॉइंट भी दिए गए हैं।

Published / 2022-08-18 05:32:56
लैपटॉप-मोबाइल फोन सबके लिए एक ही चार्जर की तैयारी

एबीएन नॉलेज डेस्क। आने वाले समय में लैपटॉप, मोबाइल फोन सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक पोर्टेबल उपकरण एक ही चार्जर से चार्ज हो सकेंगे। सरकार इस मामले में विशेषज्ञों का समूह स्थापित करेगी। यह समूह दो महीने में इस पर रिपोर्ट देगा। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने इस उद्योग से जुड़े लोगों के साथ बैठक की थी। बैठक में एसोचैम, आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू, फिक्की, सीआईआई सहित तमाम संगठन के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारत में दो प्रकार के चार्जर पर विचार हो सकता है। इसमें सी टाइप पोर्ट भी शामिल होगा। सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा, इस महीने समूह बन जायेगा। उसे दो महीने में रिपोर्ट देनी होगी। इससे जुड़े संघ और निर्माता ई-कचरे की चिंताओं से सहमत हैं, फिर भी इस पर चर्चा की मांग की गई है। रोहित सिंह ने कहा, यह एक जटिल मुद्दा है। चार्जर के निर्माण में भारत का अपना एक स्थान है। अंतिम निर्णय लेने से पहले हमें हर किसी के नजरिये से इसे समझना होगा। इसमें उद्योग, ग्राहक, निर्माता और पर्यावरण जैसे क्षेत्र हैं। प्रत्येक हितधारक का एक अलग नजरिया है। उनके लिए अलग विशेषज्ञ समूह बनाये जायेंगे।

Published / 2022-08-15 06:35:17
धरती की परत से मिली हैं चंद्रमा को गैसें, पता चलेगा खगोलीय पिंड की उत्पत्ति कैसे हुई...

एबीएन नॉलेज डेस्क। चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में नया शोध सामने आया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार ठोस प्रमाण खोजा है, जिससे पता चला है कि चंद्रमा में मौजूद हीलियम और नियॉन जैसा गैसें धरती की पांच परतों में से एक मेंटल से मिली हैं। साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित खोज उस सिद्धांत को और भी मजबूत करती है, जिसमें कहा गया है कि चंद्रमा की उत्पत्ति धरती और अन्य खगोलीय पिंड की टक्कर की वजह से हुई है। इस अध्ययन के जरिये उन जटिल सवालों का जवाब तलाशने में भी मदद मिल सकती है, जिससे पता चल सकता है कि आखिर पृथ्वी, चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंड की उत्पत्ति कैसे हुई है। मेंटल गैस धरती के अंदर करीब 2,890 किमी तक स्थित है।

Published / 2022-08-10 18:22:15
इसी महीने शुरू होंगी एयरटेल की 5जी सेवाएं, 2024 तक जुड़ेगा हर शहर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल इसी महीने से 5जी सेवाएं शुरू करने जा रही है। कंपनी का लक्ष्य मार्च, 2024 तक देश के सभी शहरों तथा प्रमुख ग्रामीण क्षेत्रों में 5जी सेवाएं शुरू करने का है। कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गोपाल विट्टल ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि देश में मोबाइल सेवाओं की कीमत काफी कम है और इसे बढ़ाये जाने की जरूरत है। विट्टल ने कहा, हमारा 5जी सेवाएं अगस्त से शुरू करने का इरादा है। जल्दी ही इसे देशभर में पहुंचाया जाएगा। हमें भरोसा है कि हम मार्च, 2024 तक देश के प्रत्येक शहर और प्रमुख ग्रामीण इलाकों में 5जी सेवाएं शुरू कर देंगे। उन्होंने कंपनी के वित्तीय परिणाम पर बातचीत में कहा, वास्तव में, देश में 5,000 शहरों में नेटवर्क क्रियान्वयन की विस्तृत योजना पूरी तरह तैयार है। यह कंपनी के इतिहास में अबतक का सबसे बड़ा क्रियान्वयन होगा। भारती एयरटेल ने हाल में संपन्न स्पेक्ट्रम नीलामी में पूरे देश में 3.5 गीगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में 19,867.8 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी हासिल की। कंपनी ने कुल 43,040 करोड़ रुपए में निम्न और मध्यम बैंड में स्पेक्ट्रम खरीदा है। विट्टल ने कहा कि कंपनी का पूंजी व्यय मौजूदा स्तर पर बना रहेगा। उन्होंने महंगे और बेहतर माने जाने वाले 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम खरीदने की जरूरत को तवज्जो नहीं दी। इस बैंड में स्पेक्ट्रम से अन्य बैंड के मुकाबले दूरसंचार सेवाओं के लिए कम मोबाइल टावर लगाने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, हमारी प्रतिस्पर्धी कंपनियां के पास बड़े स्तर पर मध्यम बैंड स्पेक्ट्रम नहीं है। अगर हमारे पास इतने बड़े स्तर पर मूल्यवान मध्यम बैंड में स्पेक्ट्रम नहीं होता, तो हमारे लिए 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। विट्टल ने कहा कि कंपनी के पास 900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड है और उसकी तुलना में 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में नेटवर्क से कोई अतिरिक्त कवरेज नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि एयरटेल की मासिक प्रति ग्राहक औसत कमाई (एआरपीयू) 183 रुपये है और इसके जल्दी ही शुल्क दरों में वृद्धि के साथ 200 रुपये तथा अंतत: 300 रुपये पर पहुंचने का अनुमान है।

Published / 2022-08-10 17:35:37
आखिर किसी व्यक्ति को मच्छर ज्यादा क्यों काटते हैं, यहां जानें...

एबीएन नॉलेज डेस्क। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से मच्छर अन्य लोगों की तुलना में किसी एक व्यक्ति की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। न्यू मैक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी में सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रोफेसर डॉ जगदीश खुबचंदानी ने अनुसार यदि घर में सात व्यक्ति हैं तो किसी एक व्यक्ति को मच्छर सबसे ज्यादा काटते हैं और उसके मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि बीमारियों की चपेट में आने की अत्यधिक आशंका रहती है। डॉ खुबचंदानी ने कहा कि मच्छर करीब 3,500 से अधिक प्रकार हैं जिनमें से कुछ ही लोगों को काटते हैं। खास बात यह है केवल मादा मच्छर ही लोगों को काटती हैं क्योंकि उन्हें अपने अंडों के लिए प्रोटीन के स्रोत के रूप में रक्त की आवश्यकता होती है। एनोफिलीज प्रजाति के मच्छर मलेरिया, पीले बुखार और डेंगू का कारण बनने वाले विषाणुओं समेत कई जानलेवा बीमारी के लिए जिम्मेदार हैं। वर्ष 1968 की शुरुआत में एक अध्ययन में पाया गया कि पीले बुखार के लिए जिम्मेदार मच्छर लैक्टिक एसिड से अत्याधिक आकर्षित होते हैं। इसे मच्छरों के लिए एक हस्ताक्षर मानव गंधक कहा गया है। व्यायाम करते समय लैक्टिक एसिड अधिक बनता है, इसलिए व्यायाम करने के बाद साबुन से अच्छी तरह स्नान कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें भाने वाली तुलसी, लैवेंडर, लेमन थाइम और गेंदे के फूल जैसे सुगंधित पौधे की खुशबू से मच्छर दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि एक से अधिक अध्ययनों से पता चला है कि मच्छरों को आकर्षित करने अथवा दूर रखने में व्यक्तियों का रक्त समूह भी जिम्मेदार है। ब्लड ग्रुप ‘ए’ वाले लोगों के लिए यह अच्छी खबर है। मच्छरों को यह ग्रुप कम आकर्षक लगता है, लेकिन ब्लड ग्रुप ‘ओ’ के लिए यह इतना अच्छा नहीं है। इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों से मच्छर ‘ए’ ग्रुप वाले की तुलना में दोगुना आकर्षित होते हैं, लेकिन ‘ओ’ ग्रुप वाले व्यक्तियों के लिए राहत की बात है कि वे गंभीर मलेरिया की चपेट में नहीं आते हैं। इन अध्ययनों में शरीर की गंध, शरीर का रंग, त्वचा का तापमान और बनावट, त्वचा पर रहने वाले रोगाणुओं, गर्भावस्था की स्थिति, मनुष्यों द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइआॅक्साइड, शराब और आहार के प्रकार पर चर्चा की गई है। कुल मिलाकर, अध्ययनों से पता चलता है कि गर्भवती महिलाएं, उच्च शरीर के तापमान और पसीने वाले लोग, विविध त्वचा सूक्ष्म जीवों की उपस्थिति, और गहरे रंग की त्वचा वाले लोग मच्छर को अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

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