एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका का एक मानवरहित सैन्य अंतरिक्ष विमान अपना छठा मिशन पूरा करके शनिवार तड़के धरती पर वापस लौट आया। इस विमान ने वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए रिकॉर्ड 908 दिन अंतरिक्ष में अपनी कक्षा में बिताये। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने दी है। छोटे अंतरिक्ष यान की तरह दिखने वाला सौर ऊर्जा से चलने वाला यह वाहन नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर उतरा। इसका पिछला मिशन 780 दिनों तक चला था। बोइंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और इस विमान को विकसित करने वाले जिम चिल्टन ने कहा कि 2010 में एक्स-37बी के पहले लॉन्च के बाद से इसने कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। इसने हमारे देश को नई अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का तेजी से परीक्षण और एकीकृत करने के लिए एक बेजोड़ क्षमता प्रदान की है। यह पहली बार है जब अंतरिक्ष विमान ने एक सेवा मॉड्यूल की तरह काम किया। इस अंतरिक्ष विमान ने नौसेना अनुसंधान प्रयोगशाला, अमेरिकी वायु सेना अकादमी और अन्य के लिए प्रयोग किए।सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए मॉड्यूल को कक्षा से बाहर आने से पहले ही वाहन से अलग कर दिया गया था। प्रयोगों के बीच फाल्कनसैट-8 नामक एक उपग्रह था, जिसे वायु सेना अनुसंधान प्रयोगशाला के साथ साझेदारी में अकादमी के कैडेटों द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया था। इसे अक्तूबर 2021 में तैनात किया गया था और अभी भी कक्षा में बना हुआ है। एक्स-37बी ऑर्बिटल टेस्ट व्हीकल-6 (ओटीवी-6) ने 908 दिनों तक चले अपना छठा मिशन को पूरा किया। इस दौरान कृषि समेत कई तरह के प्रयोग किए गए। एक अन्य प्रयोग ने बीजों पर लंबी अवधि के अंतरिक्ष जोखिम के प्रभावों का मूल्यांकन किया। अंतरिक्ष संचालन के प्रमुख जनरल चांस साल्ट्जमैन ने कहा कि यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग पर अंतरिक्ष बल के फोकस पर प्रकाश डालता है और वायु सेना विभाग के भीतर और बाहर हमारे साझेदारों के लिए अंतरिक्ष में कम लागत वाली पहुंच का विस्तार करता है। एक्स-37बी अब तक 1.3 अरब मील से अधिक की उड़ान भर चुका है और अंतरिक्ष में कुल 3,774 दिन बिता चुका है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले रॉकेट विक्रम-एस का प्रक्षेपण 15 नवंबर को किया जायेगा। हैदराबाद के अंतरिक्ष स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने शुक्रवार को यह घोषणा की। स्काईरूट एयरोस्पेस के इस पहले मिशन को प्रारंभ नाम दिया गया है जिसमें तीन उपभोक्ता पेलोड होंगे और इसे श्रीहरिकोटा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया जायेगा। कंपनी ने शुक्रवार को कहा, दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं। सभी की निगाहें आसमान की ओर हैं। पृथ्वी सुन रही है। यह 15 नवंबर 2022 को प्रक्षेपण का संकेत है। स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और सह संस्थापक पवन कुमार चांदना ने से कहा कि प्रक्षेपण पूर्वाह्न 11:30 मिनट पर किया जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के निजी स्पेस कंपनी द्वारा विकसित पहले रॉकेट विक्रम-एस का प्रक्षेपण 15 नवंबर को किया जायेगा। हैदराबाद के अंतरिक्ष स्टार्टअप मस्काईरूट एयरोस्पेस ने शुक्रवार को यह घोषणा की। स्काईरूट एयरोस्पेस के इस पहले मिशन को प्रारंभ नाम दिया गया है, जिसमें तीन उपभोक्ता पेलोड होंगे और इसे श्रीहरिकोटा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया जायेगा। कंपनी ने शुक्रवार को कहा, दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं। सभी की निगाहें आसमान की ओर हैं। पृथ्वी सुन रही है। यह 15 नवंबर 2022 को प्रक्षेपण का संकेत है। स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक पवन कुमार चांदना ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि प्रक्षेपण सुबह 11:30 मिनट पर किया जायेगा। स्काईरूट के रॉकेट का यह नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य परिचालन अधिकारी एन भरत डाका ने एक बयान में कहा कि विक्रम-एस रॉकेट एकल चरण वाला उपकक्षीय प्रक्षेपण यान है, जो तीन उपभोक्ता पेलोड लेकर जायेगा और अंतरिक्ष यानों की विक्रम श्रृंखला में अनेक प्रौद्योगिकियों के परीक्षण तथा उन्हें मान्यता देने में मदद करेगा। वहीं, इससे पहले इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस द्वारा विकसित एक रॉकेट इंजन के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। वीएसएससी ने तिरूवनंतपुरम में अपने वर्टिकल टेस्ट फैसिलिटी, थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन में अग्निलेट इंजन का 15 सेकंड का परीक्षण किया। इसरो और अग्निकुल कॉसमॉस के बीच हस्ताक्षरित किये गये एक सहमति पत्र के तहत यह परीक्षण किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप को इन-स्पेस (इंडियन नेशनल स्पेस प्रोमोशन एंड ऑथोराइजेशन) के जरिए सुविधाओं का उपयोग करने का अवसर प्रदान करना है।
टीम एबीएन, रांची। गुरुवार को ज्योतिर्विज्ञान विभाग में खगोल शास्त्र का ज्योतिषीय अध्ययन विषय पर एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याख्याता डॉ गोपाल पाठक कर खेडकर थे। उन्होंने बताया कि खगोल शास्त्र एवं ज्योतिष शास्त्र दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं। भारतवर्ष के प्राचीन ज्योतिर्विद् विद्वानों ने खगोल शास्त्र पर अनेक कार्य किए हैं। इनमें भास्कराचार्य, आर्यभट्ट, बापू देव शास्त्री, कमलाकर भट्ट, महर्षि लगध आदि प्रमुख हैं। हजारों वर्ष पहले आकाश मंडल में होने वाली घटनाओं से पड़ने वाले प्रभावों का खोज किये हैं। वैदिक गणित से काल को जान सकते हैं। विभाग के को-आॅर्डिनेटर डॉ प्रकाश सिंह ने कहा कि आने वाले समय में वैदिक गणित को जानना आवश्यक होगा। इसके अलावा विभाग के शिक्षक डॉ धीरेंद्र दुबे, निदेशक प्रोफेसर अर्चना कुमारी दुबे, डॉ मधुलिका वर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ एस के घोषाल व धन्यवाद ज्ञापन डॉ चंद्रशेखर मिश्र ने किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) परिचालन संबंधी गतिविधियां अपनी मार्केटिंग शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) से करवाएगा। वहीं, खुद अंतरिक्ष तकनीकों के शोध और विकास पर जोर देगा। इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने सोमवार को रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में यह खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में इसरो का जोर सरकार व जनता के लिए उपकरण जारी करने पर रहा है। उसने उपग्रह प्रणालियां बनायी, विभिन्न उपग्रहों निर्माण, प्रक्षेपण और संचालन करवाये, संचार व्यवस्था मुहैया करवाई, पृथ्वी के पर्यवेक्षण और नेविगेशन की सुविधाएं दीं। अब केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार यह सभी काम एनएसआईएल के सुपुर्द किए जा रहे हैं। इसके बदले आने वाले वर्षों में इसरो का ध्यान ज्यादा से ज्यादा शोध और विकास पर रहेगा। इनमें अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित आधुनिक तकनीकें प्राथमिकता पर होंगी। डॉ सोमनाथ ने दावा किया, इसरो को लेकर सरकार द्वारा करवाए जा रहे यह बदलाव कई वैज्ञानिकों संस्थानों के साथ इसरो शोध और समन्वय गतिविधियों को पूरी तरह बदल देंगे। कार्यक्रम में आरआरआई के निदेशक प्रो तरुण सौरदीप ने बताया कि यह इंस्टीट्यूट 1948 में नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सर सीवी रमन ने स्थापित किया था। यह 75 वर्षों से भौतिकी के प्रमुख क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा दे रहा है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। व्हॉट्सएप के वॉयस या वीडियो कॉल पर अब एक बार में 32 यूजर्स को एक साथ जोड़ सकेंगे। वहीं, 25 जीबी तक की फाइल भेज सकेंगे और एक ग्रुप में 1,024 सदस्यों को जोड़ सकेंगे। कंपनी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने बताया कि व्हॉट्सएप यूजर्स अपने समुदाय के 5,000 सदस्यों और यूजर्स को ब्रॉडकास्ट संदेश भी भेज सकेंगे। मेटा के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक पर यह जानकारी दी। इसमें उन्होंने कहा, आज हम व्हॉट्सएप पर समुदाय (कम्युनिटीज) शुरू कर रहे हैं। इससे ग्रुप बेहतर हो जायेंगे, क्योंकि सब-ग्रुप, कई थ्रेड, अनाउंसमेंट चैनल बनाये जा सकेंगे तथा और भी बहुत कुछ होगा। हम चैट के भीतर पोल की और 32 लोगों को एक साथ वीडियो कॉल करने की सुविधा भी शुरू कर रहे हैं। ये सभी एंड टू एंड एनक्रिप्शन के जरिये सुरक्षित हैं और आपके संदेशों की निजता बरकरार रहेगी। कंपनी ने इन सुविधाओं की घोषणा अप्रैल में की थी और अब इन्हें शुरू किया जा रहा है। अगले कुछ सप्ताह में ये सुविधाएं सभी यूजर्स को मिलने लगेंगी। मेटा का यह मंच चैट के दौरान सर्वेक्षण की सुविधा शुरू कर रहा है और अब 25 जीबी तक की फाइल के आदान-प्रदान की इजाजत भी दे रहा है। पहले उपयोगकर्ता 16 एमबी तक की फाइल भेज सकते थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने आज बड़े किल एल्टीट्यूड ब्रैकेट वाले दूसरे चरण की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) इंटरसेप्टर एडी-1 मिसाइल का पहला परीक्षण किया। ये ट्रायल ओडिशा के तट पर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। इस मिसाइल का ट्रायल सभी बीएमडी हथियार प्रणाली तत्वों की भागीदारी के साथ किया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस परीक्षण का वीडियो भी जारी किया है। एडी 1 लंबी दूरी की इंटरसेप्ट मिसाइल है और टू स्टेज वाली ठोस मोटर से चलती है। ये मिसाइल टारगेट पर सही निशाना लगाने के लिए स्वदेशी रूप से विकसिच एंडवांस कंट्रोल सिस्टम, नेविगेशन और गाइडेंस एल्गोरिदम से लैस है। इससे पहले अक्टूबर में अग्नि प्राइम न्यू जेनरेशन बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था। अधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया था कि नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि प्राइम का 21 अक्टूबर को ओडिशा के तट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। मिसाइल परीक्षण सुबह करीब 9.45 पर किया गया। रक्षा अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट के ट्रायल उड़ान के दौरान मिसाइल ने अधिकतम सीमा की यात्रा की और सभी परीक्षण उद्देश्यों को अच्छे से पूरा किया।
एबीएन नॉलेज डेस्क। पृथ्वी पर जो भी प्रकृतिक चीजें हैं, बेहद खूबसूरत हैं। जहां नदियों के बहते पानी की आवाज हमारे कानों को अच्छी लगती है। घास के मैदान में फैली शांति हमें सुकून देती है, वहीं पृथ्वी के अंदर से आने वाली आवाजें शायद इतनी खूबसूरत नहीं हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने हाल ही में 5 मिनट का बेहद डरावना ऑडियो जारी किया है। ये पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की आवाज है, जिसे सुनकर आप डर सकते हैं। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इस तरह की आवाज़ निकाल सकता है। ये 5 मिनट का ऑडियो है जिसमें भयानक क्रेक और कर्कश आवाजें हैं। इतना ही नहीं, इसमें गहरी सांस लेने जैसी आवाज़ें भी शामिल हैं। इन्हें सुनकर शायद आपको अपने कानों पर यकीन न हो। नीचे दिये गये वीडियो में आप पृथ्वी के अंदर से आने वाली आवाजों को सुन सकते हैं।
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