एबीएन सोशल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल की बैठक में बेहतर स्वास्थ्य के लिए मोटे अनाज और खेलों की अहमियत पर बल दिया और सांसदों से इन्हें प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करने को कहा। वहीं, संसद भवन में दोपर के भोजन के रूप में सांसदों के लिए मोटे अनाज के व्यंजन परोसे गये।
दरअसल, सरकार का मानना है कि मोटे अनाज खाने से जहां लोग स्वस्थ्य रहेंगे। वहीं इसकी खेती करने वाले किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। यही वजह है कि केंद्र सरकार मोटे अनाज के उपयोग पर फोकस कर रही है। ऐसे भी घर के बड़े-बुजुर्ग सर्दी में मोटा अनाज खाने की सलाह देते हैं। वहीं, आयुर्वेद विशेषज्ञ कहते हैं कि ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने में भोजन भी अहम रोल अदा करता है। खाने की तासीर भी शरीर को ठंड से बचाने में मदद करती है। इसके लिए मोटा अनाज खाने की सलाह दी जाती है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ किरण गुप्ता कहती हैं, मोटे अनाज में जौ, बाजरा, मक्का आदि शामिल होता है। इस अनाज की तासीर गर्म होती है। ये शरीर में पहुंचकर गर्माहट देते हैं। सर्दी में मोटा अनाज खाने की सबसे बड़ी वजह यही है। इनमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। जैसे- फायबर। यह पेट के लिए सबसे बेहतर और सबसे जरूरी है।
सर्दियों की डाइट में मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी को जरूर शामिल करना चाहिए। इनसे कई तरह की डिश बनाई जा सकती हैं। जैसे- दलिया, रोटी और डोसा। इसके अलावा बाजरे का खीचड़ा, बाजरे की रोटी भी खानपान में शामिल की जा सकती है। खास बात है कि मोटे अनाज में फायबर अधिक होता है और वजन को भी कंट्रोल करने में मदद करते हैं। हालांकि इसमें घी का इस्तेमाल सीमित रखें। भारत सरकार के अनुसार, मिलेट (ज्वार, बाजरा, रागी आदि) में देश की पोषण संबंधी सुरक्षा में योगदान देने की बहुत अधिक क्षमता है।
ऐसे में हम कह सकते हैं कि मोटे अनाजों में न केवल पोषक तत्त्वों का भंडार है बल्कि ये जलवायु लचीलेपन वाली फसलें भी हैं और इनमें अद्भुत पोषण संबंधी गुणों का भी भंडार है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल ने पिछले महीने हजारों यूट्यूब चैनलों को हटा दिया है। इन चैनलों में 7,599 चैनल, एक एडसेंस अकाउंट और तीन ब्लॉगर अकाउंट्स शामिल हैं. ये चीन से जुड़े हैं। चीन के अकाउंट के संबंध में जांच चल रही है, जिसके तहत इन अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है। इस बात का ध्यान रखें कि सस्पेंड किये गये चैनल और ब्लॉग्स ने मुख्य तौर पर एंटरटेनमेंट, म्यूजिक और लाइफस्टाइल कंटेंट होता है। कंपनी के मुताबिक, इनमें चीनी और अंग्रेजी भाषा में बेहद कम कंटेंट ही चीन और अमेरिकी मामलों पर उपलब्ध होता है।
इसके अलावा कंपनी ने तीन यूट्यूब चैनल के कंटेंट को भी हटा दिया है, जो चीनी भाषा में संवेदनशील कंटेंट शेयर करते हैं। यह कंटेंट यूक्रेन में युद्ध और ताइवान के बीच संबंधों और यूक्रेन में युद्ध से जुड़ा था। अब तक कंपनी ने जांच के तहत 515 यूट्यूब चैनलों को हटाया है, जो अजरबेजान के मामलों के साथ जुड़े थे और 57 ब्राजील के मामलों पर थे।
गूगल ने कहा कि उन्होंने एक एडसेंस अकाउंट को हटा दिया है। और एक डोमेन को गूगल न्यूज पर दिखने से मना कर दिया है। यह एक्शन कंपनी की जांच-पड़ताल के तहत ही किया गया है। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने जुलाई और सितंबर 2022 के महीनों में अपने प्लेटफॉर्म से 5.6 मीलियन वीडियो को हटाया है। यह कार्रवाई उन्होंने कम्युनिटी गाइडलाइंस के उल्लंघन का हवाला देकर की है।
प्लेटफॉर्म को दो महीनों के दौरान 271,000 अपील हटाने के संबंध में मिली है। यूट्यूब ने अपने लेटेस्ट ब्लॉग में बताया है कि कंटेंट को रिव्यू करने के बाद उसने करीब 29,000 अपीलों को स्वीकार किया है। यूट्यूब के मुताबिक, इस साल जुलाई से सितंबर के बीच, हर 10,000 व्यू में से, 10 से 11 में ऐसा कंटेंट मौजूद था, जिसने कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास पूरी क्षमताओं वाला एक अंतरिक्ष स्टेशन है जिसका नाम तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन है। यह नासा के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (एसएसएस) का प्रतिस्पर्धी होगा। चीन इस पर काफी सालों से काम कर रहा था। अब कोई भी इंसान चीन के तियांगोंग में भी रह सकता है। वहीं अब अपना स्पेस स्टेशन बनाने के बाद चीन की अमेरिका और रूस जैसी दुनिया की दो शीर्ष अंतरिक्ष शक्तियों के बीच मजबूत उपस्थिति होगी।
एक समय में चीन के छह अंतरिक्ष यात्री एकसाथ : पिछले महीने चीन ने तीन अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष भेजा था जो घंटें में अपने गंतव्य तक पहुंच गये थे, इसके बाद से शेंजू मिशन को काफी सफल माना जा रहा था। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में गये तीन अंतरिक्ष यात्री वहां पहले से मौजूद दल की जगह लेंगे, जिसने स्टेशन के निर्माण में मदद की है। ऐसा पहली बार था जब चीन के छह अंतरिक्ष यात्री एक ही समय में अंतरिक्ष में थे।
तियांगोंग पूरी तरह से चीन द्वारा निर्मित और संचालित है : वहीं इस मिशन के सफल होने के साथ ही, चीन अपना स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन चलाने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। बता दें कि तियांगोंग मंदारिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब स्वर्ग का महल होता है। अमेरिक के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के विपरीत, तियांगोंग पूरी तरह से चीन द्वारा निर्मित और संचालित है। हालांकि रूस का स्पेस स्टेशन कई देशों के साथ मिलकर बनाई गई परियोजना है।
पाकिस्तान इस परियोजना में साथ आ सकता है : तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के तैयार हो जाने पर यह पाकिस्तान जैसे चीन के करीबी सहयोगियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए भी उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके तैयार हो जाने पर चीन एकमात्र देश होगा जिसके पास अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) कई देशों की सामूहिक परियोजना है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। कोविड-19 महामारी के सबसे खराब प्रभाव के बाद अब हम काम और छुट्टियां दोनों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भारी उछाल देख रहे हैं। वास्तव में, भारत ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में तीन गुनी छलांग देखी है, जो अगले वर्ष दोगुनी होने की संभावना है। एक-दूसरे से जुड़े रहने को आसान, सहज और सम्मोहक बनाने के लिए, एयरटेल ने एयरटेल वर्ल्ड पास लॉन्च किया है। वर्ल्ड पास सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के अनुभव में क्रांति लाता है क्योंकि यह 184 देशों में निर्बाध रूप से काम करता है। तो भले ही आप किसी हवाई अड्डे पर रास्ते में हों या दो या दो से अधिक देशों की यात्रा कर रहे हों, यह एक पैक अब आपकी सभी रोमिंग जरूरतों को पूरा करता है।
यह बदलाव एयरटेल द्वारा किए गए व्यापक ग्राहक अनुसंधान के आधार पर आया है, जिसमें दिखाया गया है कि कई ग्राहक पूरे वैश्विक टेल्को उद्योग में सामान्य रूप से भ्रमित करने वाले अंतर्राष्ट्रीय रोमिंग पैक पाते हैं। नतीजतन, कई लोग जब चाहते हैं तब जुड़े नहीं होते हैं। या वे विदेश में अस्थायी कनेक्शन के जटिल विकल्प तलाशते हैं। एयरटेल ने अब एयरटेल वर्ल्ड पास के लॉन्च के साथ इस समस्या को संरचनात्मक रूप से हल कर लिया है।
एयरटेल वर्ल्ड पास के लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए शाश्वत शर्मा, डायरेक्टर कंज्यूमर बिजनेस, भारती एयरटेल ने कहा, ह्लएयरटेल में हमारा मिशन ग्राहकों की समस्याओं को हल करना है, ताकि वह हमारा अनुभव खुद बयां करे। अंतर्राष्ट्रीय यात्रा संबंधी चिंताओं पर हमने जो प्रतिक्रिया सुनी है, उसने हमें अपने ग्राहकों के लिए एक परिभाषित प्रस्ताव - एयरटेल वर्ल्ड पास लॉन्च करने के लिए मजबूर किया है। यह हमारे ग्राहकों को अधिक वैल्यू के साथ दुनिया के लिए एक पैक प्रदान करता है और वे ऐप पर क्या उपयोग करते हैं, उन्हें नियंत्रित करने की अनुमति भी देता है, पैक समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक आपातकालीन डेटा उपयोग की अनुमति देता है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ओरियन अंतरिक्ष यान मून मिशन पूरा करने के बाद पृथ्वी की ओर रवाना हो गया है। ओरियन अंतरिक्ष यान सोमवार को चंद्रमा के करीब से गुजरा और उसने पृथ्वी की ओर लौटने के लिए गुरुत्वाकर्षण सहायता का उपयोग किया। इसी के साथ आर्टेमिस-1 मिशन के लिए वापसी की यात्रा शुरू हो गयी है।
बिना चालक दल वाले नासा के ओरियन अंतरिक्ष यान ने अपने निकटतम बिंदु से 80 मील (130 किलोमीटर) से कम की उड़ान भरी। इस दौरान चंद्रमा के पास पहुंचने पर कैप्सूल के साथ संचार 30 मिनट के लिए बाधित भी हुआ। ओरियन कार्यक्रम के डिप्टी मैनेजर डेबी कोर्थ ने कहा अंतरिक्ष यान कैसा प्रदर्शन कर रहा है, इसके बारे में हम इससे ज्यादा खुश नहीं हो सकते। मगर संचार बहाल होने पर शानदार फुटेज स्क्रीन पर चमकने लगी। कमरे में मौजूद हर शख्स इस फुटेज को देखता ही रह गया।
सोमवार को मिशन का आखिरी दिन था। नासा के मेगा मून रॉकेट एसएलएस ने 16 नवंबर को फ्लोरिडा से उड़ान भरी थी। शुरू से अंत तक ये यात्रा करीब साढ़े 25 दिनों तक चली। ओरियन अंतरिक्ष यान 11 दिसंबर को स्थानीय समयानुसार सुबह 9:40 बजे सैन डिएगो से दूर प्रशांत महासागर में लैंड कर सकता है। यहां इसे अमेरिकी नौसेना के जहाज पर चढ़ाया जायेगा।
इससे पहले मिशन के दौरान ओरियन ने चंद्रमा के चारों ओर दूरस्थ रेट्रोग्रेड कक्षा में लगभग छह दिन बिताये। इसका आशय है कि उच्च ऊंचाई और चंद्रमा की दिशा के विपरीत यात्रा करना। एक सप्ताह पहले ओरियन ने हमारे ग्रह से 280,000 मील (450,000 किलोमीटर) की दूरी का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आर्टेमिस मिशन मैनेजर माइक सराफिन ने कहा कि एक बार जब यह पृथ्वी पर वापस आ जाएगा, तो ओरियन 1.4 मिलियन मील से अधिक की यात्रा कर चुका होगा। उल्लेखनीय है कि नासा 2025 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की योजना पर काम कर रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने मंगलवार को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया। अंडमान और निकोबार कमान ने बयान जारी कहा कि सेना ने आज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो की सेवाएं मंगलवार को ठप हो गयी। रिपोर्ट के अनुसार यूजर्स को कॉल करने से लेकर मैसेज करने तक में समस्या आ रही है। कुछ यूजर्स का कहना है कि सोमवार रात से ही जियो की सेवाएं ठप हैं। यूजर्स सोशल मीडिया पर भी इसकी शिकायत कर रहे हैं। हालांकि, यूजर्स मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।
बता दें कि कई जियो यूजर्स कॉल करने या प्राप्त करने में असमर्थ होने के साथ-साथ एसएमएस का उपयोग करने में असमर्थ हैं, लेकिन कई यूजर्स कॉल कर पा रहे हैं। इससे पहले भी जियो की सेवाएं ठप हुई थीं, जिसमें तीन घंटे तक यूजर्स की कॉलिंग और एसएमएस सेवाएं प्रभावित हुई थीं। हालांकि, तब भी यूजर्स मोबाइल डाटा सेवा का इस्तेमाल कर पा रहे थे।
दरअसल, आज सुबह से ही यूजर्स को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यूजर्स इसकी शिकायत ट्विटर पर कर रहे हैं। कई यूजर्स जियो की सर्विस को लेकर मीम्स भी शेयर कर रहे हैं। एक यूजर ने मीम्स के साथ लिखा, जिओ डाउन स्थिति, जब आपके पास जियो फाइबर, जियो सिम और जियो मोबाइल है और नेटवर्क डाउन है।
वहीं एक अन्य यूजर्स ने लिखा सुबह से ही उनके मोबाइल पर वाल्ट का साइन नहीं दिख रहा है और वह कॉल नहीं लगा पा रहे हैं। ऐसे में आप 5जी की अच्छी सर्विस कैसे देंगे जब नॉर्मल कॉल्स में ही दिक्कतें आ रही हैं।
एबीएन नॉलेज डेस्क। महासागरों के वैज्ञानिक अध्ययन और चक्रवातों पर नजर रखने के लिए भारत तीसरी पीढ़ी के ओशियन-सैट का प्रक्षेपण शनिवार को करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का लोकप्रिय रॉकेट पीएसएलवी-सी54 इसे आठ अन्य नैनो उपग्रहों के साथ पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। इस मिशन के लिए उल्टी गिनती शुरू कर दी गई है। यह प्रक्षेपण सुबह 10.26 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रस्तावित है। 44.4 मीटर ऊंचे रॉकेट का यह पीएसएलवी-एक्सएल प्रारूप है, जिसमें 321 टन लिफ्ट ऑफ मास यानी खुद रॉकेट, बूस्टर, प्रोपेलेंट, उपग्रह व उपकरणों को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता है। रॉकेट की यह 24वीं उड़ान होगी।
इसरो के वैज्ञानिक इसे अब तक के सबसे लंबे मिशन में से एक मान रहे हैं। इसमें रॉकेट दो कक्षाओं में उपग्रह ले जायेगा। प्रक्षेपण के 20 मिनट बाद ओशियन-सैट धरती से 742 किमी की ऊंचाई पर छोड़ा जायेगा। इसके बाद रॉकेट पृथ्वी की ओर लाया जायेगा और 516 से 528 किमी ऊंचाई पर बाकी उपग्रह छोड़े जायेंगे।
ये पीएसएलवी-सी54 प्रक्षेपण यान में इस्तेमाल होने वाले टू-ऑर्बिट चेंज थ्रस्टर्स (ओसीटी) का उपयोग करके कक्षाओं को बदलने के लिए रॉकेट को शामिल करेगा। अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को ऑर्बिट-1 में अलग किया जायेगा जबकि यात्री पेलोड को ऑर्बिट-2 में अलग किया जायेगा।
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