ज्ञान विज्ञान

View All
Published / 2023-08-25 17:22:36
चंद्रयान-3 को देख चन्द्रयान-2 भी हुआ सक्रिय, जानें कैसे...

  • मैं तुम पर नजर रख रहा हूं, चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने खींची चंद्रयान-3 के लैंडर की ताजा तस्वीरें

एबीएन नॉलेज डेस्क। इसरो का चंद्रयान-2 मिशन भले ही चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था लेकिन उसका मिशन का ऑर्बिटर अभी भी काम कर रहा है। अब चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने ही चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान की तस्वीरें खींची हैं। 

इसरो ने ये तस्वीरें जारी हैं, जिनमें चांद की सतह पर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को साफ देखा जा सकता है। इसरो ने ट्वीट में लिखा कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने चंद्रयान-3 लैंडर को कहा है कि मैं तुम पर नजर रख रहा हूं।

इसरो ने बताया कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में हाई रेजोल्यूशन कैमरा लगा हुआ है। अभी चांद के आसपास मौजूद कैमरों में यह सबसे बेहतर रेजोल्यूशन वाला कैमरा है। लैंडर विक्रम के चांद की सतह पर उतरने के बाद यह तस्वीर ली गयी है। 

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चंद्रमा का कक्षा में चांद के चारों तरफ परिक्रमा कर रहा है। हालांकि बाद में इसरो द्वारा इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया। इससे पहले इसरो ने ट्वीट में जानकारी दी कि चंद्रयान-3 मिशन के तहत लैंडर विक्रम की सभी गतिविधियां और सिस्टम सामान्य हैं। 

लैंडर मॉड्यूल के पैलोड इलसा, रंभा और चेस्ट को चालू कर दिया गया है। रोवर प्रज्ञान ने भी संचालन शुरू कर दिया है। वहीं प्रोपल्शन मॉड्यूल के शेप पैलोड को भी रविवार को चालू कर दिया गया है।  

बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के साथ ही भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद चांद की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश बन गया है। वहीं चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है।

Published / 2023-08-24 15:08:04
चन्द्रयान के साथ-साथ तेजस भी रच रहा इतिहास

  • चंद्रयान के साथ-साथ तेजस का भी कमाल, 20 हजार फुट की ऊंचाई से दागा अस्त्र...मिसाइल का सफल परीक्षण

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत में 23 अगस्त 2023 की तारीख इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जायेगी। पूरी दुनिया 23 अगस्त की तारीख को याद रखेगी। 23 अगस्त को जहां चंद्रयान-3 की सफल लैंडिग हुई वहीं सेना ने लड़ाकू विमान तेजस से मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया। 

भारत के हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने बुधवार को गोवा के तट पर हवा से हवा में मार करने वाली दिखाई नहीं पड़ने वाले लक्ष्य को भेदने की क्षमता वाली मिसाइल अस्त्र का परीक्षण किया, जो सफल रहा। अधिकारियों ने बताया कि करीब 20,000 फुट की ऊंचाई पर विमान से मिसाइल प्रक्षेपण किया गया। 

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हल्के लड़ाकू विमान तेजस एलएसपी-7 ने 23 अगस्त को गोवा के तट पर हवा से हवा में मार करने वाली बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल अस्त्र का परीक्षण किया। मंत्रालय ने कहा कि परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरे हो गये हैं। 

प्रक्षेपण की निगरानी वैमानिकी विकास एजेंसी, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के परीक्षण निदेशक और वैज्ञानिकों और सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन और एयरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस महानिदेशालय के अधिकारियों ने की। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजस से मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए सबको बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्षेपण से तेजस की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आयातित हथियारों पर निर्भरता कम होगी।

Published / 2023-08-24 14:49:08
मिशन चन्द्रयान : अपने काम पर अबतक खरा उतर रहा है प्रज्ञान

  • लैंडर से उतरते हुए रोवर की पहली फोटो आयी सामने

एबीएन नॉलेज डेस्क। चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) बुधवार शाम चंद्रमा की सतह पर उतर गया। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल ने शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके बाद अब रोवर को लैंडर मॉड्यूल से बाहर निकाला गया है। 

इसकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) बुधवार शाम चंद्रमा की सतह पर उतर गया। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। 

लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल ने शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके बाद अब रोवर को लैंडर मॉड्यूल से बाहर निकाला गया है। इसकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। 

इसरो का ट्वीट- रोवर सतह पर उतरा और चांद पर चला भारत। चंद्रयान 3 मिशन को लेकर इसरो ने भी ट्वीट किया। इसमें कहा गया, चंद्रयान 3 का रोवर मेड इन इंडिया, मेड फॉर द मिशन ऑपरेशन! रोवर लैंडर से नीचे उतरा और पूरा भारत चांद पर साथ चला।

Published / 2023-08-23 18:22:31
चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग सफल

चांद पर उतरा इसरो का चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल 

एबीएन नॉलेज डेस्क। चांद पर भारत ने इतिहास रच दिया है। इसरो का चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल सफलतापूर्वक चांद पर उतर गया। इसरो के मुताबिक, लैंडर ने तय समय 6.04 बजे चांद पर लैंड करने में सफलता पायी। इस दौरान इसरो ने बेंगलुरु में मिशन के कंट्रोल कॉम्पलेक्स से लैंडिंग की पूरी प्रक्रिया का लाइव टेलीकास्ट किया। 

संभावना जतायी जा रही है कि इसरो के इस मिशन से चांद के रहस्यों से जल्द पर्दा उठेगा। इसके साथ ही चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मिशन चलाने वाला भारत पहला देश बन गया है। चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग सफल हो गयी है। दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत पहला देश बन गया है। इसी के साथ भारत ने इतिहास रच दिया है। 

चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) बुधवार शाम चंद्रमा की सतह पर उतर गया। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल ने शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग की। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये पल अविस्मरणीय है। हर देशवासी की तरह मेरा ध्यान चंद्रयान महाअभियान पर लगा हुआ था। मैं भी अपने देशवासियों के साथ, अपने परिवारजनों के साथ इस उमंग और उल्लास से जुड़ा हुआ हूं। भारत चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचा है, जहां आज तक कोई देश नहीं पहुंचा है। आज से चांद से जुड़े कई मिथक बदल जायेंगे।

Published / 2023-08-23 11:38:03
चंद्र मिशन के लिए दहशत के 15 मिनट

एबीएन नॉलेज डेस्क। 2019 में चंद्रयान-2 मिशन से पहले, इसरो के तत्कालीन अध्यक्ष के सिवन ने लैंडिंग के अंतिम चरण को दहशत के 15 मिनट कहा था। यह बयान चंद्र कक्षा से चंद्रमा की सतह तक उतरने में शामिल कठिनाइयों को दर्शाता है। 

यही कारण है कि यह चंद्र मिशन का सबसे कठिन हिस्सा माना जाता है।  
चंद्रमा में पर्याप्त हवा नहीं है और बहुत अधिक धूल है। जब चंद्रमा या मंगल पर कोई अंतरिक्ष यान उतरता है, तो उसे धीमा करना पड़ता है ताकि उसके लक्ष्य (जिस स्थान पर लैंडिंग करानी हो) का गुरुत्वाकर्षण उसे अंदर खींच सके।

पृथ्वी और कुछ हद तक मंगल के साथ, सबसे बड़ी शुरुआती चुनौती ग्रह का वातावरण होती है। जब कोई वाहन अंतरिक्ष के निर्वात को छोड़कर गैस की एक बड़ी दीवार से टकराता है, तो टक्कर से बहुत अधिक ऊष्मा ऊर्जा उत्पन्न होती है। 

इसीलिए पृथ्वी पर लौटने वाले या मंगल ग्रह पर उतरने वाले अंतरिक्ष यान खुद को बचाने के लिए हीट शील्डिंग ले जाते हैं। लेकिन वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद वे खुद को सावधानीपूर्वक धीमा करने के लिए पैराशूट का उपयोग कर सकते हैं।

हालांकि, चंद्रमा पर बमुश्किल ही वायुमंडल है इसलिए पैराशूट कोई विकल्प नहीं है। जब गर्मी से बचाव की बात आती है तो यह सुविधाजनक है, क्योंकि वाहन को अतिरिक्त वजन उठाने की आवश्यकता नहीं होती है। 

लेकिन इसे धीमा करने और लैंडिंग को रोकने के लिए अपने इंजनों का उपयोग करने में सक्षम होने की आवश्यकता है। इसका मतलब यह भी है कि ईंधन के सीमित भंडार गलती के लिए बहुत कम गुंजाइश रखते हैं।

पर्याप्त ईंधन के साथ दूसरी चिंता सामने आती है चंद्रमा की सतह रेगोलिथ नामक सामग्री से ढकी हुई है। रेगोलिथ धूल, चट्टान और कांच के टुकड़ों का मिश्रण है। चंद्रमा पर क्रू अपोलो मिशन के दौरान एक चिंता भी थी कि एक बड़ा अंतरिक्ष यान सतह में डूब सकता है।

लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों के सामने असली समस्या यह है कि धूल हर जगह जमा हो जाती है और काफी मात्रा में गुरुत्वाकर्षण इसे रोके रखने में मदद करता है। यह लैंडिंग पर भी लागू होता है। 

जब कोई अंतरिक्ष यान उतर रहा होता है, तो उसके रॉकेट थ्रस्टर्स धूल फेंकते हैं जो उसके सेंसर को प्रभावित करते हैं। यह गलती यान को गलत दिशा की ओर ले जाती है जिससे एक सपाट लैंडिंग क्षेत्र गड्ढे में तब्दील हो जाता है।

Published / 2023-08-22 23:23:59
23 को या 27 को होगी चंद्रयाण-3 की लैंडिंग!

  • 23 अगस्त को आई बाधा तो 27 को उतारेंगे चंद्रयान-3

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चंद्रयान 3 मिशन 23 अगस्त की शाम को चांद की सतह पर लैंड कराया जायेगा। हालांकि, इससे पहले विक्रम लैंडर के लिए अनुकूल स्थितियों को पहचाना जायेगा। इसरो के मुताबिक, लैंडिंग के लिए निर्धारित समय से ठीक 2 घंटे पहले यान को उतारने या न उतारने पर अंतिम निर्णय होगा। 

इसरो के वैज्ञानिक नीलेश एम देसाई के मुताबिक, अगर चंद्रयान 3 को 23 अगस्त को लैंड नहीं कराया जाता है, तो फिर इसे 27 अगस्त को भी चांद पर उतारा जा सकता है। 

27 अगस्त के लिए भी तैयारियां पूरी

निदेशक एम देसाई ने कहा कि यान को 30 किमी की ऊंचाई से चंद्रमा पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रक्रिया शुरू करने से 2 घंटे पहले सभी निर्देश लैंडिंग मॉड्यूल को भेजे जायेंगे। 

उन्होंने कहा कि इस समय उन्हें चंद्रयान-3 को 23 अगस्त को ही चंद्र सतह पर उतारने में कोई मुश्किल नजर नहीं आ रही है, इसलिए उसी तारीख पर यान को उतारने का प्रयास होगा। 27 अगस्त को लैंडिंग के लिए भी सभी सावधानियां बरती जा रही हैं। सभी प्रणालियां भी तैयार रखी गयी हैं।

Published / 2023-08-22 19:30:19
चंद्रमा पर उतरने के लिए चंद्रयान-3 तैयार

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय चंद्र मिशन चंद्रयान-3 बुधवार को चंद्रमा पर उतरने के लिए तैयार है। चंद्र मिशन, चंद्रयान 3 सफलतापूर्वक अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और चंद्रयान लैंडर मॉड्यूल (एलएम) 23 अगस्त की शाम छह बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरेगा। 

अब तक, मिशन पूरी तरह से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और सभी की निगाहें अब लैंडिंग पर हैं, जो सफल होने पर, भारत को उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल कर देगा जिनमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इसरो वैज्ञानिक आधी रात से ही चंद्रयान-3 मिशन पर नजर रख रहे हैं। 

गौरतलब है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग से कुछ ही घंटे पहले इसरो ने एक मील का पत्थर हासिल किया जब आॅर्बिटर ले जाने वाले चंद्रयान-2 ने कल चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल (एलएम) का औपचारिक स्वागत किया। चंद्रयान-2 आॅर्बिटर चंद्रयान-3 लैंडर के साथ इसरो के लिए बैकअप संचार चैनल होगा। 

इसरो ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा चंद्रयान -3 मिशन: आपका स्वागत है दोस्त। सीएच-2 आॅर्बिटर ने औपचारिक रूप से सीएच-3 एलएम का स्वागत किया। इसरो ने 2019 में कहा था कि सटीक प्रक्षेपण और कक्षीय युद्धाभ्यास के कारण, चंद्रयान -2 आॅर्बिटर का मिशन जीवन सात साल तक बढ़ गया था। 

22 जुलाई, 2019 को प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान -2 मिशन में चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव का पता लगाने के लिए एक आर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल थे। चंद्रयान-2 को जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था और रोवर ले जा रहा लैंडर सितंबर 2019 में लैंडिंग साइट के बहुत करीब एक तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे मिशन 99.99 प्रतिशत सफल रहा। 

इसरो ने सोमवार को चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले, लैंडर हैजर्ड डिटेक्शन एंड अवॉइडेंस कैमरा (एलएचडीएसी) द्वारा ली गई चंद्र सुदूर क्षेत्र की तस्वीरें जारी कीं। इसरो ने कहा कि दूसरा डीबूस्टिंग और अंतिम आॅपरेशन रविवार सुबह 0200 बजे किया गया और एलएम निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करेगा और 23 अगस्त को संचालित लैंडिंग शुरू होगी। 

इस युद्धाभ्यास के बाद, चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान अब लगभग 25 किमी गुणा 134 किमी पर स्थित था। इसरो ने कहा, मॉड्यूल को आंतरिक जांच से गुजरना होगा और निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा। इसरो, लैंडिंग साइट की पहचान करने के बाद, बुधवार शाम को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए सटीक ब्रेकिंग तकनीक का प्रदर्शन करेगा। 

उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को 14 जुलाई को इसरो के सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम 3-एम4 द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। लगभग 16 मिनट की उड़ान अवधि के बाद, इसे 36,500 किमी गुणा 170 किमी की अण्डाकार पार्किंग कक्षा में प्रविष्ट किया गया। चंद्रयान-3 को कक्षा में प्रवेश करने से इसकी 42 दिन की यात्रा समाप्त हो गई। 

इसरो के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने कहा कि चंद्रमा की ओर 3.80 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग के साथ समाप्त होगी। चंद्रयान-3 में एक स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल (एलएम), प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) और एक रोवर शामिल है, जिसका उद्देश्य भविष्य के अंतर-ग्रहीय मिशनों के लिए आवश्यक नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करना और प्रदर्शित करना है। 

चंद्रयान-3 की सेहत सामान्य है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से पूरे मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यान के स्वास्थ्य की लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन आॅपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है।

Published / 2023-08-21 22:21:36
इसरो अंतरिक्ष में अगले वर्ष भेजेगा कृत्रिम मेधा रोबोट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार चंद्रयान-3 की सफलता को लेकर आत्मविश्वास से भरी है और उसका लक्ष्य अगले वर्ष के उत्तरार्द्ध में भारत अंतरिक्ष में पहली बार मानव मिशन भेजना है जिसके पहले एक कृत्रिम मेधा रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। 

अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेन्द्र सिंह ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र पर लगे गोपनीयता के पर्दों को उतार कर इसे सार्वजनिक क्षेत्र के लिए खोल दिया है जिससे इस क्षेत्र में नयी तकनीक और नयी प्रतिभाएं लाने का मार्ग खुल गया है। 

सरकार चंद्रयान-3 की सफलता को लेकर आत्मविश्वास से भरी है और उसका लक्ष्य अगले वर्ष के उत्तरार्द्ध में भारत अंतरिक्ष में पहली बार मानव मिशन भेजना है जिसके पहले एक कृत्रिम मेधा रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जायेगा। 

अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेन्द्र सिंह ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र पर लगे गोपनीयता के पर्दों को उतार कर इसे सार्वजनिक क्षेत्र के लिए खोल दिया है जिससे इस क्षेत्र में नयी तकनीक और नयी प्रतिभाएं लाने का मार्ग खुल गया है। 

डॉ सिंह ने कहा कि इस समय तक 350 से अधिक स्टार्ट अप्स अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को आधुनिक उपकरणों की आपूर्ति करने के प्रस्ताव दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के विकास में बहुत तेजी आयी है और आज हम विश्व की महाशक्तियों के बराबरी के स्तर पर पहुंच गये हैं। 

चंद्रयान-3 के मिशन के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रयान मिशन इस बार निश्चित रूप से कामयाब होगा और यह तय अवधि से अधिक काम करेगा। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण की योजना में समय अवश्य लगा है लेकिन इससे खर्च कम हुआ और प्रतिरोध कम होने से मिशन सुरक्षित रहा है। 23 अगस्त को यह तय समय पर चांद की सतह पर उतरेगा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि उतरने की सटीक जगह का निर्णय उसी समय किया जायेगा। 

उन्होंने कहा कि इसरो का अगला मिशन गगनयान है। इसके लिए इस वर्ष के उत्तरार्द्ध में एक मानवरहित यान भेजा जाएगा। अगले वर्ष के पूर्वार्द्ध में कृत्रिम मेधा युक्त रोबोट वायुमित्र को भेजा जायेगा और इसकी सफलता एवं अध्ययन के बाद वर्ष 2024 के उत्तरार्द्ध में मानव मिशन भेजा जायेगा। 

डॉ सिंह ने रूस के लूना-25 मिशन के क्रैश लैंडिंग और चंद्रयान मिशन को लेकर सावधानियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत के चंद्रयान मिशन में कक्षीय आरोहण विधि से भेजा गया है। इसलिए इसमें प्रतिरोध कम होने के कारण ऊर्जा की खपत कम हो रही है और चंद्रमा के बहुत नजदीक आने के बाद ही वर्टिकल लैंडिंग करेगा और इस बार उसकी बॉडी में सुरक्षा के सभी उपाय किये गये हैं जिससे इस मिशन की विफलता की संभावना ना के बराबर है।

Page 15 of 53

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse