एबीएन नॉलेज डेस्क। साल 2023 का आखिरी चंद्र ग्रहण कल यानी 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा की रात में लग रहा है। 28-29 अक्टूबर की मध्यरात्रि को लग रहा यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर आयेगा और इसका प्रभाव भी लोगों के जीवन पर पड़ेगा। 6 राशि वालों के लिए यह चंद्र ग्रहण अशुभ फल दे सकता है। लिहाजा इन राशि वालों को संभलकर रहना चाहिए।
मेष राशि को बेवजह के तनाव, धन खर्च, हानि का सामना करना पड़ सकता है। सेहत बिगड़ सकती है या दुर्घटना हो सकती है। कोई झूठा आरोप लग सकता है या भाई से विवाद हे सकता है। आप पछतावे में रहेंगे।चंद्र ग्रहण के दौरान और उसके बाद भी संभलकर रहें।
कर्क राशि को कार्य क्षेत्र में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। निजी जीवन पर चंद्र ग्रहण का नकारात्मक असर रहेगा। कोई दुर्घटना हो सकती है या विवाद में फंस सकते हैं। बेहतर होगा कि इस समय किसी कानूनी विवाद से बचें। खरीदारी पर काबू रखें।
सिंह राशि को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण सिंह राशि के जातकों की मान हानि करवा सकता है। आप खुद को अपनी ही नजरों में गिरा हुआ महसूस कर सकते हैं। अतीत के मामले आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचायेंगे। बनते काम बिगड़ने लगेंगे। विशेष तौर पर नौकरी करने वालों के लिए यह समय परेशानी बढ़ाने वाला है।
कन्या राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण काल में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।वरना कोई बड़ा संकट झेलना पड़ सकता है। आप चंद्र ग्रहण के 15 दिन बाद तक अधिक गहराई वाले जल स्थान पर जाने से बचें। वाहन संभल कर चलायें अनावश्यक दुश्चिंताओं को अपने ऊपर हावी न होने दें और सकारात्मक रहने की कोशिश करें।
मकर राशि के जातकों को यह चंद्र ग्रहण तनाव दे सकता है। आपका मन उदास रहेगा। जीवनसाथी के साथ रिश्ते में उथल पुथल रह सकती है। कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अग्नि, बिजली व गहरे जल स्थान से माता को दूर रखें।
मीन राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण धन हानि करवा सकता है। जमापूंजी खर्च हो सकती है। घर में विवाद हो सकता है। पैतृक संपत्ति को लेकर नुकसान झेलना पड़ सकता है।अनावश्यक भागदौड़ और चिंता रहेगी। व्यापार में गुप्त शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। अनजान व्यक्ति से मित्रता न करें।
(नोट : यहां दी गयी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एबीएन न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
टीम एबीएन, रांची। भारत की प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं में से एक, भारती एयरटेल (एयरटेल) की वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा, एयरटेल एक्सट्रीम प्ले के पेड सब्सक्राइबर्स की संख्या अक्टूबर महीने में पांच मिलियन (50 लाख) के आंकड़े को पार कर गयी है।
इसके साथ ही यह देश में अभी भी सबसे तेजी से बढ़ रहा ओटीटी एग्रीगेटर बना हुआ है। कंपनी ने आज इसकी जानकारी दी। एयरटेल एक्सट्रीम प्ले एक सिंगल ऐप पर संग्रहित ओटीटी कंटेंट का भारत का सबसे बड़ा संकलन प्रदान करता है।
इसके ग्राहकों को सोनी लिव, लायंसगेट प्ले, चौपाल, होईचोई, फैनकोड, मनोरमा मैक्स, शेमारू मी, आल्ट बालाजी, अल्ट्रा, इरोज नाउ, एपिकआन, डॉक्यूबे, प्लेफ्लिक्स आदि जैसे पार्टनर्स के उत्कृष्ट कंटेंट प्राप्त होते हैं। वे एयरटेल एक्सट्रीम ऐप पर न्यूनतम 148 रुपये के रिचार्ज के द्वारा 20 कंटेंट पार्टनर्स के 40,000 से अधिक मूवी टाइटल्स और शोज देख सकते हैं।
इस उपलब्धि के बारे में एयरटेल डिजिटल के सीईओ, आदर्श नायर ने कहा कि हालांकि भारत में 40 से अधिक ओटीटी ऐप्स और प्रीमियम वीडियो कंटेंट का व्यापक संग्रह उपलब्ध है, पर इसे खोजना और फिर भुगतान करना मुश्किल होता है। एयरटेल एक्सट्रीम प्ले शानदार ओटीटी ऐप्स के सबसे बड़े संग्रह को एक कीमत पर एक ऐप में एक साथ इकट्ठा करने में मदद करता है।
हमने हाल में आल्ट बालाजी, फैनकोड और प्लेफ्लिक्स को भी शामिल किया है जिससे हम शानदार कंटेंट के सबसे व्यापक सेलेक्शन और बीस मिलियन (2 करोड़) सब्सक्राइबर्स के आंकड़ें तक पहुंचने की अपनी महत्वाकांक्षा के और करीब पहुंच गये हैं।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) गगनयान मिशन की पहली टेस्ट फ्लाइट का शनिवार को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया। शनिवार सुबह 10 बजे इसरो ने गगनयान मिशन के क्रू मॉडल को सफलतापूर्वक लॉन्च कर लिया है। इसरो को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है।
पहले इसे शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे इसके प्रक्षेपण की कोशिश की गई थी लेकिन तकनीकी करणों के कारण इसे टालना पड़ गया। इसरो चीफ सोमनाथ ने ट्विट करके बताया कि 10 बजे के करीब दूसरे प्रयास बड़ी सफलता मिली।
गगनयान के पहले टेस्ट व्हीकल एबॉर्ट मिशन -1 (टीवी-डी1) को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया। इस व्हीकल ने 17 किमी की उंचाई से क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम को छोड़ दिया। फिर पैराशूट के जरिये सफलतापूर्वक क्रू मॉड्यूल सिस्टम की बंगाल की खाड़ी में सफल सॉफ्ट लैंडिंग हुई।
इसरो चीफ ने मिशन की सफलता का ऐलान किया उन्होंने कहा कि क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग की गई। मौसम खराबी के बाद लिफ्ट प्रॉसेस में कंप्यूटर ने इंजन में आई खराबी को इंगित किया और इसरो की टीम ने तत्काल उसे दुरुस्त किया और हमने इसे सफलता पूर्वक पूरा किया।
इसरो ने बताया कि क्रू मॉड्यूल का द्रव्यमान 4,520 किलोग्राम है और यह एकल दीवार वाली बिना दबाव वाली एल्यूमीनियम संरचना है। उड़ान के लगभग 61 सेकंड में और 11.9 किमी की ऊंचाई पर, परीक्षण वाहन/रॉकेट और चालक दल की भागने की प्रणाली अलग हो गयी। उड़ान भरने के 91 सेकंड बाद और 16.9 किमी की ऊंचाई पर क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम अलग हो गया और इसे पैराशूट के जरिये समंदर में उतार दिया गया।
इसरो ने एकल-चरण तरल प्रणोदक वाले रॉकेट के इस प्रक्षेपण के जरिये मानव को अंतरिक्ष में भेजने के अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम गगनयान की दिशा में आगे कदम बढ़ाया। इसरो का लक्ष्य तीन दिनों के गगनयान मिशन के लिए मानव को 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा में अंतरिक्ष में भेजना और फिर उसे पृथ्वी पर सुरक्षित वापस लाना है। इसरो ने शुक्रवार को कहा था कि इस परीक्षण उड़ान की सफलता शेष परीक्षणों और मानवरहित मिशन के लिए आधार तैयार करेगी, जिससे पहला गगनयान कार्यक्रम शुरू होगा।
इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने कहा कि मिशन गगनयान की सफल मानव रहित परीक्षण उड़ान आने वाले समय में इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के भारत के कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यह जीएसएलवी रॉकेट प्रणाली का हिस्सा है।
आज की उड़ान मैन कैप्सूल को लगभग 10 किलोमीटर की ऊंचाई और ध्वनि के वेग से 1.2 गुना अधिक वेग तक ले गयी। उसी समय क्रू मॉड्यूल को रॉकेट प्रणाली के एक सेट का उपयोग करके मूल वाहन से बाहर निकाल गया और बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित लैंडिंग के लिए एक अलग प्रक्षेपवक्र के माध्यम से ले जाया गया।
एबीएन नॉलेज डेस्क। नवरात्र के ये भी तीन चरण हैं : नवपत्रिका, जयश्री और विग्रह /मूर्ति/ सन्निधि, यह जौ जव/ जयन्ती (बार्ली) है इसकी आयुर्वेद में बड़ी महता है। इसे फेंकें नहीं, इसकी जड़ सहित बालु मिट्टी से दशमी को उखाड़ें और पानी में धो दें। फिर सुखा दें और ड्राई करें। फिर पाउडर बना लें और दो चम्मच सुबह शाम खायें। ये बार्ली पेड़ी पाउडर 2000 रुपये प्रति किलो बाजार में बिकता है।
जयन्ती जव का वह रुप है जो नौ दिनों का अंकुरित बीज और पौधा है। इसे नवरात्रि में बालु मिट्टी में कलश के नीचे रखा जाता है। इसे पहले दिन साफ कर धोकर बालु में मिलाते हैं। फिर इसे बालू में डालकर इसपर बालू में बीच में गड्ढा कर कलश रखा जाता है। विधान तो तांबा या पीतल रखने का है, पर मिट्टी कलश भी रखते हैं।
रोज इसमें गंगा जल, पंचामृत, सर्वोषधि, महोषधि का जल डाला जाता है और इसमें दुर्गा देवी की पूजा की जाती है। इसी आदिशक्ति की जिसने ब्रह्मांड का निर्माण किया है। महाविष्फोट से इसके साथ ही नव दुर्गा शक्ति की आराधना, पंचदेव (जो प्रकृति के पांच तत्वों के प्रतीक हैं) इनकी अराधना की जाती है।
दुर्गा सप्तशती के पाठ से उच्चरित ध्वनि, घंटा की ध्वनि इस जौ (बार्ली) के नव अंकुरित पौधों में प्रवाहित होती है। इसमें इतनी ऊर्जा होती है कि दशमी के दिन दाहिने कान पर रखने से ही यजमान का कल्याण करती है। तो इसके सेवन से अंदाज लगायें कितनी ऊर्जा शरीर में जायेगी।
इसमें कौन-कौन से विटामिन-खनिज हैं, जो आदिकाल से हमारे पूर्वज इस जयंती को हर घर में सालों भर संजोकर रखते थे और स्वास्थ्य संबंधी लाभ के लिए चूर्ण के रूप में पान करते थे। परंतु अज्ञानता में हम नदी में बहा रहे हैं और पर्यावरण को पीड़ित कर रहे हैं।
जयंती का स्वरस 20 मिली और सुखाकर पाउडर बनाकर एक चम्मच सुबह-शाम खाली पेट लेने से असाध्य रोगों में अत्यंत लाभकारी है। इसे ग्रीन ब्लड भी कह सकते हैं, जो एंटी आॅक्सीडेंट से भरपूर है। इसके सेवन से विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी5 प्रचुर मात्रा में मिलती है। इसके रस के सेवन से आयरन की कमी दूर होती है। साथ ही अनिद्रा, एसिडिटी, अपच, गैस, पेट फूलना, जोड़ों के दर्द, आम वात, गठिया, त्वचा के रोग, धातु रोग, स्त्री और पुरुष दोनों में लाभकारी होता है। बालों का झड़ना, मधुमेह, मोटापा, थायराइड, त्वचा की झुर्रियों में भी लाभदायक है और ये एंटी एजिंग है। मतलब बुढ़ापे को दूर करता है। आंखों की रोशनी अगर कम हो रही हो, तो इसका सेवन लगातार करने से अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। इसके रस के कुल्ला करने से दांतों के पायरिया और मुंह के छालों में भी लाभकारी है। कुल मिलाकर ये जयंती अमृत तुल्य है। - डा. पीएन पाण्डेय, दक्ष आयुर्वेद, रांची।
एबीएन नॉलेज डेस्क। अक्टूबर का महीने बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस महीने साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 14 अक्टूबर दिन शनिवार को आश्विन अमावस्या के दिन कन्या राशि और चित्रा नक्षत्र में लगेगा।
इस दिन सर्व पितृ अमावस्या भी है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में गिना जाता है और इसे आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा। यह ग्रहण 14 अक्टूबर को रात 08 बजकर 34 मिनट से शुरू होगा और रात 02 बजकर 25 मिनट पर समाप्त हो जायेगा।
यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल नहीं माना जायेगा। यह ग्रहण कन्या राशि और चित्रा नक्षत्र में होगा। लेकिन इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव राशि चक्र की सभी 12 राशियों पर पड़ेगा।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस. सोमनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनके चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान ने वह काम कर दिया है जो इससे किए जाने की अपेक्षा की गयी थी और यदि यह वर्तमान निष्क्रिय अवस्था (स्लीप मोड) से सक्रिय होने में विफल रहता है तो भी कोई समस्या नहीं होगी।
वह गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर दर्शन करने गये थे और इसके बाद यहां संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी अब एक्सपीओसैट या एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह प्रक्षेपण के लिए तैयारी कर रही है और यह प्रक्षेपण नवंबर या दिसंबर में किया जा सकता है।
चंद्रमा पर वर्तमान में प्रज्ञान के सुप्तावस्था या निष्क्रिय अवस्था में होने की स्थिति पर इसरो प्रमुख ने कहा कि चंद्रमा पर तापमान शून्य से लगभग 200 डिग्री सेल्सियस नीचे जाने पर अत्यधिक प्रतिकूल मौसम के कारण इसके इलेक्ट्रॉनिक सर्किट यदि क्षतिग्रस्त नहीं हुए हैं, तो यह फिर से सक्रिय हो जायेगा। उन्होंने कहा कि यदि यह सक्रिय नहीं हुआ तो भी ठीक है क्योंकि रोवर ने वह काम कर दिया है जो इससे करने की अपेक्षा की गयी थी।
इसरो ने पिछले सप्ताह कहा था कि चंद्रमा पर सुबह होने के साथ ही चंद्रयान-3 के सौर ऊर्जा से संचालित लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के साथ संपर्क स्थापित कर इन्हें फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रहा है ताकि वे वैज्ञानिक प्रयासों को जारी रख सकें। चंद्रमा पर रात होने से पहले, लैंडर और रोवर दोनों क्रमशः चार और दो सितंबर को निष्क्रिय अवस्था में चले गये थे।
सोमनाथ ने आगामी मिशन के बारे में कहा कि इसरो अब एक्सपीओसैट या एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह के लिए तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा- यह एक्सपोसैट तैयार है और इसे हमारे पीएसएलवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया जायेगा। हमने अभी तक किसी तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन इसका प्रक्षेपण नवंबर या दिसंबर में किया जा सकता है।
सोमनाथ ने कहा कि एक और मिशन इन्सैट-3डीएस की भी तैयारी है, जो एक जलवायु उपग्रह है और जिसे दिसंबर में प्रक्षेपित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि फिर हम एसएसएलवी डी3 का प्रक्षेपण करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं यह हमारा लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान है। यह तीसरा प्रक्षेपण है।
यह प्रक्षेपण नवंबर या दिसंबर में किया जायेगा। इसके बाद नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार या निसार की बारी आयेगी। इसे अगले साल फरवरी में प्रक्षेपित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन के परीक्षण यान डी1 का प्रक्षेपण अक्टूबर में किया जायेगा।
एबीएन नॉलेज डेस्क। आज गूगल 25 साल का हो गया है, जिसे सेलिब्रेट करने के लिए एक खास तरह का डूडल तैयार किया गया है। इसमें आप Google को G25gle के तौर पर देख सकते हैं। इन 25 सालों में Google ने खुद इंटरनेट की दुनिया के सबसे बड़े नाम के तौर पर पेश किया।
आज बच्चा-बच्चा गूगल का नाम जानत है। ये अब महज एक सर्च इंजन से कई ज्यादा बढ़कर लोगों की जरूरत बन गया है, मगर क्या आप जानते हैं कि गूगल का असल नाम Google था ही नहीं...। जी हां...।
ये तो महज एक गलती थी, जिसे बाद में कभी सुधारा ही नहीं गया। असल में 1998 से शुरू हुआ गूगल, पहले BackRub नाम से शुरू किया जाना था। उस वक्त इसके दोनों फाउंडर लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन, अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे थे। दोनों ने मिलकर इस सर्च इंजन को तैयार किया और 4 सितंबर 1998 को इसकी शुरुआत कर दी।
हालांकि तब के BackRub (आज Google) को जब रजिस्टर कराने की बारी आयी, तो दोनों ने इसका नाम GOOGOL रखने का फैसला किया, जो एक गणित टर्म है, जिसका अर्थ है 1 और 00 यानी 100. मगर सबसे बड़ी गलती यहीं हुई, दरअसल रजिस्ट्रेशन के दौरान गलती से GOOGOL का नाम Google कर दिया गया।
कुछ समय के लिए लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन इसे लेकर परेशान हुए, मगर फिर उन्हें समझ आया कि गूगल बोलने में काफी आसान है, साथ ही ये लोगों के जुबान पर जल्दी चढ़ता है और लंबे समय तक याद रहता है, लिहाजा इसका नहीं गूगल ही रहने देने का फैसला किया गया।
एबीएन नॉलेज डेस्क। चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद के साउथ पोल पर हैं। पिछले 4 सितंबर को ही इसरो ने इन्हें स्विच ऑफ कर दिया था, ताकि चांद पर नयी सुबह होने पर इनसे फिर काम लिया जा सके, शुक्रवार को इसरो ने लगातार सिग्नल भेजे, लेकिन अभी तक लैंडर और रोवर ने इन्हें रिसीव नहीं किया है।
चंद्रयान-3 मिशन का अगला पड़ाव इसरो के लिए मुश्किल भरा नजर आ रहा है। चांद की सतह पर सो रहे लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान अब तक जाग नहीं सके हैं।
शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर से इसे लगातार वेकअप सिग्नल भेजे गये, लेकिन अभी तक इन सिग्नलों को रिसीव नहीं किया गया है। इसरो ने हार न मानने की बात कही है और इस बात का ऐलान किया है कि वह लगातार कोशिश में जुटा रहेगा।
चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर ने चांद पर पूरा एक दिन बिताया। इस दौरान विक्रम और प्रज्ञान के साथ गये पेलोड ने इसरो तक चांद की सतह के बारे में कई जानकारियां भेजीं।
इसरो वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रयान-3 मिशन का उद्देश्य पूरा हो चुका है। अब कोशिश ये है कि विक्रम और प्रज्ञान को एक बार फिर जगाकर अतिरिक्त जानकारियां जुटायी जायें, जिससे आने वाले चंद्र मिशनों में लाभ मिले।
हालांकि अभी ये कोशिश सफल होते नहीं दिख रही है। चांद पर एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है। 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम ने चांद के साउथ पोल पर सफल लैंडिंग कर ली थी।
उसके बाद से तकरीबन 11 दिन तक रोवर ने चांद की सतह से खनिजों, भूकंपीय गतिविधियों और प्लाज्मा के बारे में कई अहम जानकारियां इसरो को उपलब्ध करायी। इस मिशन को 7 सितंबर तक के लिए डिजाइन किया गया था।
हालांकि 3 दिन पहले ही इसरो ने विक्रम और लैंडर को स्विच ऑफ कर दिया था, ताकि इसमें बैटरी बाकी रहे और 14 दिन की रात के बाद जब चांद पर फिर सवेरा हो, तो इन्हें फिर एक्टिव कर दिया जाये। शुक्रवार को इसरो ने यही कोशिश की, जो नाकाम रही।
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