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Published / 2026-01-20 21:14:22
फाइलेरिया उन्मूलन के लिए झारखंड सरकार का मिशन मोड अभियान, एमडीए-2026 की व्यापक तैयारी

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में फाइलेरिया यानी हाथीपांव उन्मूलन को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में नेपाल हाउस स्थित अपर मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में स्टेट टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आहूत बैठक में 10 फरवरी 2026 से शुरू होने वाले मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम की रणनीति, चुनौतियों और विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। 

बैठक में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम पर भी चर्चा की गयी। इस बैठक में अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा, उप निदेशक डॉ लाल माझी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, विश्व स्वास्थ्य संगठन और पीरामल स्वास्थ्य के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। 

फाइलेरिया का बढ़ता बोझ, उन्मूलन की चुनौती  

बैठक में प्रस्तुति के क्रम में बताया गया कि फाइलेरिया एक गंभीर परजीवी रोग है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलता है। दुनिया के 72 देश लिम्फेटिक फाइलेरिया से प्रभावित हैं, जहां 88.8 करोड़ लोग जोखिम में हैं। भारत में अब तक लगभग 6 लाख लिम्फोडेमा और 2 लाख हाइड्रोसील मरीज चिह्नित किये गये हैं।  

झारखंड में 57,436 लिम्फोडेमा मरीज पंजीकृत किए जा चुके हैं। राज्य में फाइलेरिया के उन्मूलन को लेकर सरकार ने इसे मिशन मोड में चलाने का निर्णय लिया है। 

एमडीए-2026: लक्ष्य और कवरेज 

10 फरवरी 2026 से राज्य के 14 जिलों—बोकारो, देवघर, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, कोडरमा, लोहरदगा, पाकुड़, रामगढ़, रांची, साहेबगंज और सिमडेगा के 87 चिह्नित प्रखंडों के 14,496 गांवों में एमडीए कार्यक्रम संचालित किया जायेगा। इसके अंतर्गत लगभग 1.75 करोड़ आबादी को फाइलेरिया रोधी दवाएं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में सेवन कराने का लक्ष्य रखा गया है। 

झारखंड की पहल 

इस क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई पहल शुरू की हैं। लिम्फोडेमा मरीजों के उपचार हेतु 215 कार्यशील एमएमडीपी क्लिनिक हैं जहां समुचित इलाज मिल सकेगा। 5053 मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया है और 1714 हाई-प्रायोरिटी गांव चिह्नित किये गये हैं। पंचायत स्तर पर 230 एमडीए मिशन स्क्वाड का गठन किया गया है और 289 सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी इसमें होगी। बेहतर मानिटरिंग के लिए राज्य मुख्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की गयी है, जहां गूगल शीट के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है।

जन आंदोलन बनाने की अपील 

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एमडीए के दौरान केवल दवा वितरण नहीं, बल्कि दवा सेवन सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि यदि समुदाय के सभी पात्र लोग लगातार 5 वर्षों तक वर्ष में एक बार दवा का सेवन करें, तो झारखंड से फाइलेरिया का उन्मूलन संभव है। उन्होंने सभी विभागों से इसे जन आंदोलन के रूप में लेने और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से समुदाय को जागरूक करने की अपील की।

Published / 2026-01-15 22:57:28
निपाह वायरस को लेकर अलर्ट मोड में झारखंड

  • निपाह वायरस को लेकर झारखंड अलर्ट मोड में, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने निपाह वायरस संक्रमण को लेकर राज्य भर में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के मामलों की पुष्टि के बाद झारखंड में भी एहतियात बरतना आवश्यक है।

वर्तमान में राज्य में निपाह वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन संभावित जोखिम को देखते हुए निगरानी और तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निपाह वायरस के लक्षणों जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, मानसिक भ्रम, दौरे या बेहोशी के मामलों पर विशेष निगरानी रखने को कहा है।

साथ ही पश्चिम बंगाल से आए व्यक्तियों की ट्रैवल हिस्ट्री के आधार पर स्क्रीनिंग, सर्विलांस और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश में संक्रमण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन, संदिग्ध मामलों के नमूनों की जांच निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कराने और राज्य व जिला सर्विलांस इकाई को त्वरित सूचना देने को कहा गया है।

आम जनता को जागरूक करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गिरे हुए या आंशिक रूप से खाए गए फलों का सेवन न करने, कच्चा खजूर रस न पीने, बीमार व्यक्ति से अनावश्यक संपर्क से बचने और लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करने की अपील की है। साथ ही अफवाहों से बचने और केवल सरकारी सूचना स्रोतों पर भरोसा करने को कहा गया है।

Published / 2026-01-09 18:05:27
सरायकेला मेडिकल कॉलेज का सीएम हेमंत सोरेन ने किया उद्घाटन

एबीएन न्यूज नेटवर्क, सरायकेला। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर में नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संस्थान की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए भविष्य बदलने वाला कदम बताया। 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज का दिन कोल्हान के लिए ऐतिहासिक है। सरायकेला में उच्च स्तरीय मेडिकल कॉलेज का सपना अब हकीकत बन गया है। यह संस्थान न केवल शिक्षा प्रदान करेगा बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज की सेवा के लिए योग्य डॉक्टर तैयार करेगा। 

उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्तमान में 10 मेडिकल कॉलेज हैं, और सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्षों में इसे 20 तक बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि चाईबासा, कोडरमा और बोकारो में सरकारी मेडिकल कॉलेजों का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है। 

मुख्यमंत्री ने मेडिकल स्टूडेंट्स को भरोसा दिलाया कि उन्हें संस्थान से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी और समय-समय पर वे संस्थान से संपर्क बनाए रखेंगे ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र में और सुधार किया जा सके।

Published / 2026-01-07 21:42:27
रांची : गांधीनगर सीसीएल अस्पताल में नि:शुल्क हृदय रोग जांच शिविर 9 को

टीम एबीएन, रांची। रांची के कांके रोड स्थित सीसीएल के केंद्रीय अस्पताल, गांधीनगर में शुक्रवार, 09 जनवरी 2026 को नि:शुल्क हृदय रोग जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर सुबह 9 बजे से शुरू होगा। 

इस शिविर में मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ राजीव राठी (सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट) मरीजों की जांच करेंगे और जरूरी चिकित्सीय सलाह देंगे। 

हृदय से संबंधित किसी भी समस्या से पीड़ित मरीज इस नि:शुल्क शिविर का लाभ ले सकते हैं। जिन मरीजों के पास पहले से इलाज या जांच से जुड़े कागजात हैं, वे उन्हें साथ लेकर आयें, ताकि सही सलाह दी जा सके। 

सीसीएल समय-समय पर देश के जाने-माने विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाकर ऐसे स्वास्थ्य शिविर आयोजित करता है। इसका उद्देश्य यह है कि जरूरतमंद लोगों को गंभीर बीमारियों के आधुनिक इलाज की सुविधा उनके घर के पास ही मिल सके और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

Published / 2026-01-03 20:36:50
रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी ने पकड़ा जोर

रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की दिशा में बड़ा कदम, 9 जनवरी को एडवायजरी कमेटी की अहम बैठक 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गयी है। इसके साथ ही भविष्य में राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी चरणबद्ध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। 

इस संबंध में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के उप सचिव ध्रुव प्रसाद ने पत्रांक 1 (13) के माध्यम से संबंधित विभागों को पत्र जारी किया है। इसके तहत 9 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 11:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलायी गयी है। 

यह बैठक अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के कार्यालय कक्ष में आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग करेंगे। 

बैठक में फिलहाल रांची के दो अस्पतालों, राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) एवं राज हॉस्पिटल, रांची को किडनी ट्रांसप्लांट हेतु पंजीकरण एवं लाइसेंस प्रदान किए जाने पर विचार किया जायेगा। 

स्वास्थ्य विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति से पूर्व निदेशक-प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति का गठन किया जाता है। यह समिति संबंधित अस्पताल का स्थल निरीक्षण कर वहां उपलब्ध बुनियादी ढांचे, विशेषज्ञ फैकल्टी, नेफ्रोलॉजी एवं यूरोलॉजी सेवाएं, आपरेशन थिएटर, आईसीयू, ब्लड बैंक सहित अन्य आवश्यक संसाधनों का विस्तृत आकलन करती है। निरीक्षण के उपरांत समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है। 

तकनीकी समिति की रिपोर्ट के आधार पर एडवायजरी कमिटी यह निर्णय लेती है कि संबंधित अस्पताल सभी निर्धारित मानकों एवं अर्हताओं को पूरा करता है या नहीं। मानकों की पूर्ति होने की स्थिति में अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में अंतिम निर्णय लेकर किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस जारी किया जाता है। 

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने से राज्य के किडनी रोगियों को इलाज के लिए बाहर के राज्यों में जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी तथा झारखंड में उन्नत चिकित्सा सेवाओं को नया आयाम मिलेगा।

Published / 2025-12-31 20:32:28
दर्द निवारक दवा निमेसुलाइड के उत्पादन पर सरकार का बैन

सरकार ने दर्द निवारक दवा निमेसुलाइड के उत्पादन पर लगाया बैन, सभी ओरल दवाओं की बिक्री पर भी रोक 

एबीएन हेल्थ डेस्क। कार ने दर्द निवारक दवा निमेसुलाइड के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही, निमेसुलाइड की ऐसी सभी खाने वाली (ओरल) दवाओं की बिक्री और वितरण भी प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिनमें 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा होती है। यह प्रतिबंध 1940 के औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 26ए के तहत ड्रग्स तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श के बाद लगाया गया है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि 100 मिलीग्राम से अधिक डोज वाली निमेसुलाइड दवाओं के इस्तेमाल से मानव स्वास्थ्य को जोखिम हो सकता है और इनके सुरक्षित विकल्प पहले से मौजूद हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसको लेकर 29 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की। 

मंत्रालय ने बताया कि निइमेसुलाइड की 100 मिलीग्राम से ज्यादा मात्रा वाली ओरल दवाएं मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम हो सकती हैं, जबकि इसके सुरक्षित विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। इसी वजह से जनहित में यह कदम उठाया गया है। सरकार ने स्पष्ट कहा कि यह प्रतिबंध औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत लगाया गया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 

इसके तहत देश में निमेसुलाइड की तय मात्रा से अधिक वाली ओरल दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण पूरी तरह बंद रहेगा। इससे पहले मंत्रालय ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 में संशोधन का मसौदा भी जारी किया था और इस पर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गये थे। 

तय समय के भीतर मिले सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार ने यह अंतिम फैसला लिया। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है और दवाओं के इस्तेमाल में किसी भी संभावित खतरे को रोकने के मकसद से उठाया गया है।

Published / 2025-12-29 18:31:58
डायबिटीज : शरीर में चुपके से बढ़नेवाली बीमारी

  • शरीर में चुपके से बढ़ती है डायबिटीज की बीमारी, ये तीन टेस्ट बनेंगे आपकी सेहत का कवच 
  • कुछ जरूरी जांचों से शुगर की समस्या को समय रहते पकड़ा जा सकता है
  • अगर माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों में किसी को हाई शुगर की समस्या रही हो ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह ही जाती है

एबीएन हेल्थ डेस्क। डायबिटीज यानी ब्लड शुगर बढ़े रहने की समस्या सभी उम्र के लोगों में आम होती जा रही है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण होने वाली ये समस्या अब 20 से कम आयु वालों को भी अपना शिकार बनाती जा रही है। जिन लोगों के परिवार में जैसे माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों में किसी को हाई शुगर की समस्या रही हो ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह ही जाती है।  

डायबिटीज को लेकर चिंता की बात यह है कि शुरुआती स्थिति में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं, कि लोग समय पर बीमारी की पहचान नहीं कर पाते। अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहता है तो इसके कारण धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है। 

डॉक्टर कहते हैं, अगर समय रहते शुगर को नियंत्रित करने के उपाय कर लिये जायें, तो यह कई गंभीर जटिलताओं से बचाव हो सकता है। पर इसके लिए जरूरी है कि आपको अपनी बीमारी के बारे में पता हो। डॉक्टर कहते हैं, अगर समय रहते कुछ जांच करा लिए जाएं तो इससे बहुत आसानी से स्पष्ट हो सकता है कि आपको डायबिटीज है या नहीं? या फिर इसका खतरा तो नहीं है? 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 

बातचीत में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ वसीम गौहरी कहते हैं, समय पर डायबिटीज की पहचान मौजूदा समय में बहुत जरूरी है क्योंकि ये बीमारी भारतीय आबादी में तेज रफ्तार से बढ़ती जा रही है। डायबिटीज का समय पर इलाज शुरू करने के लिए कुछ जरूरी टेस्ट सभी लोगों को करा लेने चाहिए। 

अगर आपको डायबिटीज का शक है या परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की दिक्कत रही है तो समय रहते अपनी जांच जरूर करायें। कुछ जरूरी जांचों से शुगर की समस्या को समय रहते पकड़ा जा सकता है। फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट, पोस्ट प्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट और एचबीए1सी टेस्ट से शरीर में शुगर की स्थिति का सही आकलन होता है।

Published / 2025-12-18 23:32:36
आयुष्मान भारत को हम पोर्टल पर अपडेट करने का निर्देश

  • आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना पर नामकुम में एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित

टीम एबीएन, रांची। आज नामकुम स्थित आरसीएच कैंपस में आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के पांच जिलों के सभी निजी एवं सरकारी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के जीएम प्रवीण चंद्र मिश्रा के संबोधन के साथ हुआ। इसके पश्चात अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह ने एचईएम पोर्टल पर अस्पतालों के अपग्रेडेशन की जिलावार समीक्षा की तथा सभी अस्पतालों को टीएमएस 2.0 में लंबित अपडेट शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये।

कार्यक्रम के दौरान झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की वरिष्ठ परामर्शी श्रीमती श्वेता कुमारी ने एचईएम पोर्टल से संबंधित विस्तृत जानकारी दी, वहीं वरिष्ठ परामर्शी विश्वजीत ने नाफू से जुड़े मामलों पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ परामर्शी अंशु कुमार सिंह ने स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए अस्पतालों के इंपैनलमेंट प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया।

झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश झा ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े ए टू जेड पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए अस्पतालों से अपील की कि वे राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाएं ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने एबीडीएम कार्यक्रम की भी विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक श्री हरीश तिवारी ने अपने मधुर गायन से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की ए टू जेड स्वास्थ्य सेवाओं की सूची, अब एक ही छत के नीचे मिलेंगी ये सुविधाएं।

झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभागने राज्य के नागरिकों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की एक व्यापक ए टू जेड सूची जारी की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली मुफ्त व रियायती सुविधाओं के प्रति जागरूक करना है।इस सूची में बच्चों के स्वास्थ्य से लेकर बुजुर्गों की देखभाल तक, कुल 26 श्रेणियों में सेवाओं को वगीर्कृत किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं की ए टू जेड हेल्थ सर्विसेज

  • ए - आयुष्मान एवं आभा कार्ड : आयुष्मान कार्ड, अबुआ स्वास्थ्य कार्ड और आभा आईडी कार्ड बनाने की सुविधा।
  • बी - दृष्टि दोष नियंत्रण : मोतियाबिंद का इलाज और मुफ्त चश्मा वितरण।
  • सी - बाल स्वास्थ्य : बच्चों के लिए विशेष बाल रोग सेवाएं।
  • डी - डायलिसिस : किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस कार्यक्रम।
  • ई - ईएनटी एवं ई-रक्तकोष : नाक, कान, गला जांच और रक्त की उपलब्धता हेतु ई-रक्तकोष।
  • एफ - परिवार नियोजन : परिवार नियोजन और फॉलो-अप कार्यक्रम।
  • जी - वृद्धजन सेवा : बुजुर्गों के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं। (प्रत्येक तृतीय शनिवार को विशेष शिविर)।
  • एच - होम्योपैथी एवं यूनानी: वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों द्वारा उपचार।
  • आई - आयोडीन अल्पता: घेंघा रोग और आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों की जांच।
  • जे - जननी सुरक्षा योजना : गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए मुफ्त सेवाएं।
  • के- किडनी रोग: गुर्दा रोगों की पहचान और उपचार।
  • एल - कुष्ठ उन्मूलन: कुष्ठ रोग की मुफ्त जांच और दवाएं।
  • एम - मलेरिया एवं मानसिक स्वास्थ्य: मलेरिया जांच और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श।
  • एन - पोषण एवं शिक्षा: महिलाओं के लिए पोषण परामर्श और गैर-संचारी रोगों की जानकारी।
    ओ- प्रसूति एवं स्त्री रोग: महिलाओं के लिए विशेषज्ञ स्त्री रोग सेवाएं।
  • पी - संक्रामक रोग बचाव: मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, दिमागी बुखार और डायरिया से बचाव हेतु निवारक कार्यक्रम।
  • क्यू- गुणवत्तापूर्ण सेवाएं: मानकों के अनुरूप उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं।
  • आर - रेफरल सेवाएं: सांप के काटने, कुष्ठ रोग और अन्य गंभीर स्थितियों में रेफरल सुविधा।
  • एस- स्क्रीनिंग (जांच): बीपी, शुगर, एनीमिया, कैंसर, दांत और नाक-कान-गला की नियमित जांच।
  • टी - टीबी मुक्त झारखंड: क्षय रोग के लिए मुफ्त जांच और इलाज।
  • यू - शहरी स्वास्थ्य: शहरी क्षेत्रों के लिए विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम।
  • वी - टीकाकरण एवं यू: बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण और आनलाइन रिकॉर्ड।
  • डब्ल्यू - महिला स्वास्थ्य: महिलाओं के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर।
  • एक्स-रे और ईसीजी: जिला अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों  पर जांच की सुविधा।
  • वाई - योग: प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर योग अभ्यास।
  • जैड - कैंप तैयारी: स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में शून्य त्रुटि सुनिश्चित करना।

विभाग द्वारा जारी इस सूची में 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग द्वारा 6 जनवरी से 10 जनवरी के बीच विशेष स्वास्थ्य गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा।

सरकार की इस पहल से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मरीजों को यह समझने में आसानी होगी कि वे अपनी बीमारी के अनुसार किस केंद्र पर जाएं। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि नागरिक इन सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठायें।

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