एबीएन डेस्क। ओमिक्रोन के गहराते अंकित के बीच बच्चों के कोरोना टीकाकरण को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही 12 से 18 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण के लिए रास्ता साफ हो गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि कोविड के नये अति संक्रामक रूप ओमिक्रॉन के रोगियों के इलाज के लिए वही प्रक्रिया अपनायी जाएगी जो डेल्टा समेत कोरोना वायरस संक्रमण के अन्य रूपों में रही है।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव राजेश भूषण, नीति आयोग में स्वास्थ्य सदस्य डॉ वीके पॉल और डॉ भार्गव ने कहा कि देश में ओमिक्रॉन की बढ़त को रोकने के लिए सभी कदम उठाये जा रहे हैं। विदेशों से आने वाले लोगों को कड़ी निगरानी और छानबीन के प्रक्रिया से गुजारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन का रूप तेजी से फैलता है और गंभीर रुप नहीं ले रहा है। ओमिक्रॉन से पीड़ति लोगों के इलाज के लिए वही प्रक्रिया अपनायी जाएगी जो डेल्टा समेत कोरोना वायरस के अन्य रूपों से संक्रमित मरीजों के इलाज में लागू की गयी है। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन से प्रभावित देशों में मरीजों को ऑक्सीजन देने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। भूषण ने कहा कि विदेशों से आये 121 लोग ओमिक्रॉन से संक्रमित पाये गये हैं। इनमें 91 प्रतिशत लोगों का कोविड टीकाकरण पूरा हो चुका था और तीन ने बूस्टर डोज भी ली थी। दो प्रतिशत को कोविड टीके की एक खुराक मिल चुकी थी और सात ने कोविड टीका नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि कोविड टीके से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है लेकिन यह संक्रमित नहीं होने की गारंटी नहीं है। संक्रमण से बचने के लिए कोविड मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। स्वास्थ्य सचिव ने सतकर्ता और सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि ओमिक्रॉन का संक्रमण 108 देशों में फैल चुका है और अभी तक कुल एक लाख 51 हजार 368 मामले आ चुके हैं। कुल 26 लोगों की मृत्यु हुई है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से बताया कि यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका में कोविड संक्रमण बढ़ रही है जबकि एशिया में यह घट रहा है। देश में केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और मिजोरम में पिछले सप्ताह के दौरान सर्वाधिक मामले सामने आये हैं। देश के 22 जिलों में संक्रमण की स्थिति चिंताजनक है। भूषण ने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। देश में 89 प्रतिशत पात्र आबादी को कोविड टीके की पहली खुराक और 61 प्रतिशत को दोनों खुराक लगायी जा चुकी है। पूरे देश भर में 18 लाख 10 हजार 83 कोविड बिस्तर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा चार लाख 94 हजार 314 ऑक्सीजन युक्त बिस्तर और एक लाख 39 हजार 300 आईसीयू बिस्तर तैयार किये गये हैं। बच्चों के लिए अलग व्यवस्था की गयी है। इस श्रेणी में 24 हजार 57 आईसीयू बिस्तर और 64 हजार 796 गैर आईसीयू बिस्तर तैयार हो चुके हैं। देश में कुल चिकित्सा ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता 15 हजार 836 टन प्रतिदिन है।
एबीएन डेस्क। भारत में सदियों से संपूर्ण स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशेषज्ञ आयुर्वेद को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जड़ी-बूटियों और औषधियों का सेवन करके न सिर्फ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जा सकता है, साथ ही कई तरह की गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में भी औषधियों को विशेष लाभदायक माना जाता है। विशेषकर कोरोना के इस दौर में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए औषधियों का सेवन करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इम्युनिटी को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े और औषधियों के सेवन को स्वास्थ्य विशेषज्ञ लाभदायक मानते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली स्वाभाविक रूप से रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों से हमारी रक्षा करती है, लेकिन अगर प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो हमें संक्रमण होने का खतरा अधिक हो सकता है। कई सारे हर्ब्स में ऐसे प्राकृतिक गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ावा दे सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे ही तीन औषधियों के बारे में जानते हैं, जिनका रोजाना सेवन करना सेहत के लिए विशेष लाभदायक हो सकता है। भारत ही नहीं मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई हिस्सों में पाई जाने वाली औषधि अश्वगंधा को वर्षों से तमाम तरह के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है। शरीर के दर्द और सूजन को कम करने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए इसका सेवन करना लाभदायक हो सकता है। यह जड़ी-बूटी एक प्रकार की एडाप्टोजेन भी मानी जाती है जो तनाव को प्रबंधित करने और अनिद्रा को दूर करने में भी मदद करती है। तुलसी का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ सांस की बीमारियों को दूर रखने के लिए भी लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक इस जड़ी-बूटी का सेवन करके कई तरह के संक्रमण से बचने, चिंता, तनाव और थकान जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है। तुलसी, छाती में जमाव से राहत प्रदान करने में भी मदद करती है। इस जड़ी-बूटी में कई एंटीआॅक्सिडेंट और शरीर को डिटॉक्स करने की भी क्षमता होती है। आंवले के सेवन से शरीर के लिए कई फायदे होते हैं। यह जड़ी-बूटी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से राहत प्रदान करती है। लिवर, हृदय, मस्तिष्क और फेफड़ों सहित महत्वपूर्ण अंगों के स्वस्थ कामकाज के साथ शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ावा देने में भी आंवला के सेवन को विशेष लाभकारी माना जाता है। आंवला में विटामिन सी, अमीनो एसिड, पेक्टिन जैसे पोषक तत्व भी होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और कई तरह की बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है।
एबीएन डेस्क। देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। केंद्र ने राज्यों को इस बारे में सतर्क रहने को कहा है। वहीं अककटर के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने भी ओमिक्रॉन को लेकर चेताया है। डॉ गुलेरिया ने कहा कि अब तक मिले डाटा के अनुसार ओमिक्रॉन में हल्की बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं, इसमें गंभीर बीमारी के लक्षण अभी नहीं हैं। डॉ गुलेरिया ने कहा कि इसको जानने के लिए अभी और डाटा चाहिए, जैसे-जैसे मामले बढ़ेंगे हमें इसके लक्षणों के बारे में और जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि गुलेरिया ने कहा कि ओमिक्रॉन ज्यादा संक्रामक है और दो चीजें बहुत जरूरी हैं- एक वैक्सीन की डोज लगाना। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगाई है उन्हें आगे आकर वैक्सीन की डोज लगानी चाहिए और दूसरा है कोविड नियमों का पालन करना चाहिए। वहीं नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने कहा कि अभी जो स्थिति है उसमें कोई बदलाव नहीं है। वायरस हमेशा शुरूआती चरणों में हल्के लक्षणों के साथ आता है और धीरे-धीरे बढ़ता है, हम इस पर नजर बनाए हुए हैं। बता दें कि इससे पहले मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों को चिट्ठी लिखकर जांच में तेजी लाने और वॉर रूम एक्टिव करने के साथ ही कहा कि अगर जरूरत पड़े तो राज्य नाइट कर्फ्यू लगा सकते हैं।
एबीएन डेस्क। देश की प्रमुख बायोटेक्नोलॉजी कंपनी भारत बायोटेक ने अपने नाक से लिए जाने वाले कोविड रोधी टीके की बूस्टर खुराक के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए डीजीसीआई के पास आवेदन किया है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह बूस्टर खुराक उन लोगों को दी जा सकेगी जिन्होंने कोवाक्सिन या कोविशील्ड टीका लगवाया है। देश में इस समय कोरोना वायरस के नए और अधिक संक्रामक ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा मंडरा रहा है। देश में संक्रमण के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं और आशंका जताई जा रही है कि अगले साल फरवरी तक देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर आ सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नाक से दिया जाने वाला टीका ओमिक्रॉन वैरिएंट से सुरक्षा दे सकता है। नए वैरिएंट्स के लिए टीकों को बेहतर किया जा सकता है: एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट से सुरक्षा के लिए वर्तमान टीकों में कुछ बदलाव किया जा सकता है। उनकी यह टिप्पणी ओमिक्रॉन से खतरे की आशंकाओं के बीच आएगी। उन्होंने कहा कि हमारे पास दूसरी पीढ़ी के टीके होंगे। यह कुछ ऐसा है जो हमें दिमाग में रखना चाहिए। मौजूदा टीके प्रभावी हैं लेकिन नए वैरिएंट के मामले में इम्युनिटी कम हो जाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरस का ओमिक्रोन स्वरूप, डेल्टा और कोविड-19 के मूल स्वरूप की तुलना में 70 गुना तेजी से संक्रमित करता है लेकिन इससे होने वाले रोग की गंभीरता काफी कम है। एक अध्ययन में यह कहा गया है। अध्ययन में इस बारे में प्रथम सूचना दी गई है कि ओमिक्रोन स्वरूप किस तरह से मानव के श्वसन तंत्र को संक्रमित करता है। हांगकांग विश्वविद्यालय के अनुसंधानकतार्ओं ने पाया कि ओमीक्रोन, डेल्टा और मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में 70 गुना तेजी से संक्रमित करता है। अध्ययन से यह भी प्रदर्शित होता है कि फेफड़े में ओमीक्रोन से संक्रमण मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में काफी कम है, जिससे रोग की गंभीरता कम होने का संकेत मिलता है। अनुसंधानकतार्ओं ने ओमीक्रोन का अलग तरह से संचरण होने और इससे होने वाले रोग की गंभीरता सार्स-कोवी-2 के अन्य स्वरूपों से भिन्न रहने को समझने के लिए एक्स-वीवो कल्चर का उपयोग किया। यह पद्धति फेफड़े के इलाज के लिए फेफड़े से निकाले गये उत्तक का उपयोग करती है। हांगकांग विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर माइकल चान ची वाई और उनकी टीम ने ओमीक्रोन को अन्य स्वरूपों से सफलतापूर्वक अलग किया तथा अन्य स्वरूप से होने वाले संक्रमण की तुलना मूल सार्स-कोवी-2 से की। टीम ने पाया कि ओमिक्रोन मानव में मूल सार्स-कोवी-2 और डेल्टा स्वरूप की तुलना में कहीं अधिक तेजी से प्रतिकृति बनाता है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि संक्रमण के 24 घंटे बाद ओमिक्रोन स्वरूप ने डेल्टा और मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में करीब 70 गुना अधिक प्रतिकृति बनाई। हालांकि, ओमिक्रोन ने मानव के फेफड़े की कोशिका में मूल सार्स-कोवी-2 वायरस की तुलना में 10 गुना से भी कम प्रतिकृति बनाई, जिससे पता चलता है कि इससे होने वाले रोग की गंभीरता कम है। चान ने एक बयान में कहा कि यह जिक्र करना जरूरी है कि मानव में रोग की गंभीरता न सिर्फ वायरस की प्रतिकृति द्वारा निर्धारित होती है बल्कि संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिरक्षा से भी निर्धारित होती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओमिक्रॉन को लेकर दुनियाभर में डर के साथ संक्रमण भी तेजी से फैलता जा रहा है। बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि प्रारंभिक साक्ष्य बताते हैं कि कोविड-19 के टीके ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कम असरदार हो सकते हैं। टीके की दोनों खुराक के बावजूद शख्स में कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक है। डब्ल्यूएचओ ने अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में कहा कि ओमिक्रॉन वैक्सीन या कोरोना संक्रमण से ठीक होकर शरीर में पैदा होने वाली एंटीबॉडी से कम प्रभावी नहीं हो सकता है। हालांकि अभी डब्ल्यूएचओ का ये भी कहना है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट को अभी बेहतर ढंग से समझने के लिए अधिक डाटा की आवश्यकता है। इससे पहले डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने मंगलवार को एक आॅनलाइन ब्रीफिंग में की गई टिप्पणी के अनुसार, कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन चिंता का विषय है। कोरोना के अन्य वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन ज्यादा संक्रामक और जोखिमभरा है। अप्रैल में डेल्टा संस्करण को चिंता के एक प्रकार के रूप में वगीर्कृत किए जाने के बाद पहली बार जीआइएसएआइडी वैश्विक विज्ञान डेटाबेस पर पंजीकृत डेल्टा अनुक्रमों का प्रतिशत इस सप्ताह चिंता के अन्य रूपों की तुलना में कम हो गया है।
गढ़वा। सदर अस्पताल के सामने स्थित चैधरी जेनरल एंड लकवा हॉस्पिटल परिसर में हृदय, मधुमेह, नस एवं लकवा रोग विशेषज्ञ डॉ पीके वर्मा ने लगभग 45 मरीजों की स्वास्थ्य जांच कर उचित परामर्श दिया। जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, माइग्रेन, पैरालाइसिस, साइटिका, गठिया, लंबर एंड सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, जोड़ों में दर्द, छाती में दर्द, नींद न आना, घबराहट, गैस्ट्राइटिस जैसी कई विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीज शामिल थे। मौके पर डॉ वर्मा ने कहा कि एक खास बीमारी बेल पाल्सी अर्थात फेशियल पैरालिसिस (लकवा के कारण चेहरा टेढ़ा होना) है जिसका खतरा ठंड में ज्यादा होता है। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज के मरीजों और गर्भवती महिलाओं में बेल्स पाल्सी का जोखिम अधिक होता है। परिवार में पहले से किसी को है तो अन्य सदस्यों को भी हो सकती है। अगर सही समय पर यानी साढ़े चार घण्टों के अंदर इलाज शुरू हो जाये तो पूरी तरह ठीक हो जाती है। बीमारियों से बचने के लिए ठंड से बचने की जरूरत है, गर्म पानी एवं भोजन का सेवन करें, गर्म कपड़े पहने। हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ कुलदेव चैधरी ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हूं। जिला मुख्यालय में पंचकर्म एवं लकवा हॉस्पिटल खुलने से मरीजों को काफी लाभ मिल रहा है। मौके पर संजय दुबे, शिवकुमार दूदून, बिस्मिला अंसारी, फैयाज अंसारी, रीना गुप्ता, अंजली कुमारी, प्रियंका यादव, अमरजीत चैधरी आदि लोग उपस्थित थे।
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