एबीएन डेस्क। भारत में एक दिन में कोरोना वायरस के 33,750 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,49,22,882 हो गई। वहीं, 123 और लोगों की संक्रमण से मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 4,81,893 हो गई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सोमवार सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में covid-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 1,45,582 हो गई है। यह संक्रमित मामलों का 0.42 प्रतिशत है। दैनिक संक्रमण दर 3.84 प्रतिशत हो गई है। covid के नए रूप ओमिक्रॉन से 23 राज्यों में 1700 व्यक्ति संक्रमित पाए गए हैं जिनमें महाराष्ट्र में सर्वाधिक 510, दिल्ली में 351 और केरल में 156 मामले हैं। ओमिक्रॉन के संक्रमण से 639 व्यक्ति उबर चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि इसी अवधि में 10846 लोग कोविड से मुक्त हुए हैं। अभी तक कुल तीन करोड़ 42 लाख 95 हजार 407 लोग कोविड से उबर चुके हैं। स्वस्थ होने की दर 98.20 प्रतिशत है। 145.68 करोड़ से ज्यादा लोगों को लगी वैक्सीन : पिछले 24 घंटे में देशभर में 23 लाख से अधिक कोविड टीके लगाए गए हैं। इसके साथ ही कुल टीकाकरण 145.68 करोड़ से अधिक हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को यहां बताया कि पिछले 24 घंटे में देश में 23 लाख 30 हजार 706 कोविड टीके लगाए गए हैं। इसके साथ ही सोमवार सुबह 7 बजे तक 145 करोड़ 68 लाख 89 हजार 306 कोविड टीके दिए जा चुके हैं।
नई दिल्ली। भारत में कोरोना के जो केस बढ़ रहे हैं वे ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण ही बढ़ रहे होंगे। हम इस बारे में एक्सपेक्ट कर रहे थे। ओमिक्रॉन के आने के बाद केस तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि इसका डबलिंग टाइम दो से तीन दिन के बीच है। यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने NDTV के साथ विशेष बातचीत में कही। सौम्या ने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से संबंधित तीन पहलू हैं। पहली बात तो यह कि यह ज्यादा संक्रामक है। डेल्टा वैरिएंट की तुलना में यह करीब चार गुना ज्यादा संक्रामक है। ऐसे में लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी होगी। यदि कोई संक्रमित, दूसरे से मिलेगा। वैसे भी यह शादी-पार्टी का टाइम है, ऐसी स्थिति में बीमारी फैलने का जोखिम ज्यादा रहेगा। दूसरी बात जिसे उत्साहवर्धन माना जा सकता है, वह यह कि इस वैरिएंट के कारण लोग गंभीर रूप से बीमार नहीं हो रहे। डेल्टा वैरिएंट के कारण जहां ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती करने (करीब एक चौथाई) की नौबत आ रही थी वहीं ओमिक्रॉन में ऐसा नहीं है। ओमिक्रॉन से प्रभावित 100 में से केवल पांच लोगों को ही अस्पताल दाखिल होने की नौबत आ रही और इन पांच लोगों में भी लक्षण कम हैं। सौम्या ने बताया तीसरा पहलू यह कि हम ओमिक्रॉन वैरिएंट पर वैक्सीन के असर को देख रहे हैं। वैक्सीन बीमार होने से तो बचा रहा है। भले ही यह संक्रमित होने से नहीं बचाती लेकिन बीमार होने से बचाती है। ऐसे में जिन्होंने वैक्सीन के डोज नहीं लिए, वे जल्द लगवाएं। यह ओमिक्रॉन से सुरक्षा प्रदान करेगा, लेकिन साथ में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग भी जरूरी है। एक अन्य सवाल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चीफ साइंटिस्ट ने माना कि जीनोम स्वीक्वेंसिंग का रिजल्ट आने में वक्त लगता है। उन्होंने कहा कि जितने ज्यादा टेस्ट किए जाएंगे उतने ही मामलों की संख्या बढ़ेगी। जिन देश में टेस्टिंग ज्यादा हो रही, वहां केस ज्यादा आ रहे। जीनोम सीक्वेंसिंग का ट्रेंड हम देख सकते हैं। हर केस की जीनोम सीक्वेंसिंग की जरूरत नहीं है। वायरस तो वही है और इसके प्रिवेशन मैथर्ड्स भी वहीं हैं। अब दवाएं भी तलाशी गई है लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। जिस तरह से सरकार ने कहा पैनिक न करें और जो उपाय पता हैं, उन्हें आजमाएं। मास्क पहने, बीमार हैं तो घर में रहे और भीड़भाड़ में न जाएं। क्या कोरोना की तीसरी लहर में हम आ गए है, इसके जवाब में सौम्या ने कहा कि इस बारे में आने वाले कुछ दिनों में पता लगेगा लेकिन अन्य देशों के ट्रेंड को देखें तो ऐसा कहा जा सकता है, हमें तैयारी करके रखनी होगी। भारत में वैक्सीनेशन के सवाल पर कहा कि 50 फीसदी आबादी को फुली वैक्सीनेटे करना अच्छा टूल है। अलग-अलग वैक्सीन बने यह अच्छी बात है। ऐसे लोग जिनके संक्रमण की जद में आने की ज्यादा आशंका है, उनका टीकाकरण करना होगा। जल्द से जल्द दूसरा डोज देने और उम्रदराज लोगों को बूस्टर डोज पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बोझ बढ़ने की डब्ल्यूएचओ की चेतावनी को लेकर उन्होंने कहा कि डेल्टा वैरिएंट भी भी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अगर कोरोना के कारण बहुत ज्यादा संक्रमित हुए तो हेल्थ स्ट्रक्चर पर बोझ पड़ सकता है। हमें इसके लिए तैयारी करके रखनी होगी।
एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ पहला स्वदेशी टीका कोवाक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने गुरुवार को एलान किया कि बच्चों के मामले में उसके बीबीवी 152 (कोवाक्सिन) टीका दूसरे और तीसरे चरण के अध्ययन में सुरक्षित और बेहतर प्रतिरक्षा उपलब्ध कराने वाला साबित हुआ है। कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इसने दो से 18 साल की आयु के स्वस्थ बच्चों और किशोरों में कोवाक्सिन से संबंधित सुरक्षा, प्रतिक्रिया और प्रतिरक्षण क्षमता का आकलन करने के लिए दूसरे और तीसरे चरण का बहुकेंद्रीय अध्ययन किया था। कंपनी ने इस डाटा को उत्साजनक बताया है। भारत बायोटेक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने कहा कि बच्चों में कोवाक्सिन का चिकित्सकीय परीक्षण का डाटा बहुत उत्साहजनक है। उन्होंने आगे कहा कि हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि यह टीका बच्चों में सुरक्षा और प्रतिरक्षा क्षमता के लिहाज से बेहतर साबित हुआ है। कृष्णा एला ने कहा कि हमने अब वयस्कों और बच्चों के लिए एक प्रभावी और सुरक्षित कोरोना रोधी टीका विकसित करने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। विज्ञप्ति में बताया गया है कि इन टीके के चिकित्सकीय परीक्षणों के दौरान किसी तरह की गंभीर प्रतिकूल घटना की जानकारी नहीं मिली। बता दें कि भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने बीते दिनों 12 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए कोरोना टीके की अनुमति दे दी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बच्चों के टीकाकरण को लेकर दिशानिर्देशों के अनुसार बच्चों को केवल कोवाक्सिन टीके की खुराक दी लगाई जाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन एक बार फिर कोविड महामारी के फैलने की आशंका बढ़ गई है। इस बीच दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि ओमीक्रोन हल्का संक्रमण है तो ऑक्सीजन की आवश्यकता इतनी अधिक नहीं हो सकती है। मैं सभी से दवाओं की जमाखोरी से बचने का अनुरोध करूंगा। हम मामलों में किसी भी वृद्धि का प्रबंधन करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं। डॉ गुलेरिया ने एक वीडियो संदेश में कहा कि भारत की बड़ी आबादी को कोविडरोधी टीका लगाया जा चुका है, फिर भी हम बढ़ते मामलों को लेकर सतर्क हैं। इसलिए, हमारे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें, जिसमें मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और भीड़ वाली जगहों से बचना शामिल है, ताकि इसके प्रसार को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि महामारी अभी खत्म नहीं हुई। हमें खुद को बचाना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि टीकाकरण या प्राकृतिक संक्रमण के कारण लोगों में एंटीबॉडी विकसित हुई है।
एबीएन डेस्क। ओमिक्रोन के गहराते अंकित के बीच बच्चों के कोरोना टीकाकरण को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही 12 से 18 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण के लिए रास्ता साफ हो गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि कोविड के नये अति संक्रामक रूप ओमिक्रॉन के रोगियों के इलाज के लिए वही प्रक्रिया अपनायी जाएगी जो डेल्टा समेत कोरोना वायरस संक्रमण के अन्य रूपों में रही है।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव राजेश भूषण, नीति आयोग में स्वास्थ्य सदस्य डॉ वीके पॉल और डॉ भार्गव ने कहा कि देश में ओमिक्रॉन की बढ़त को रोकने के लिए सभी कदम उठाये जा रहे हैं। विदेशों से आने वाले लोगों को कड़ी निगरानी और छानबीन के प्रक्रिया से गुजारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन का रूप तेजी से फैलता है और गंभीर रुप नहीं ले रहा है। ओमिक्रॉन से पीड़ति लोगों के इलाज के लिए वही प्रक्रिया अपनायी जाएगी जो डेल्टा समेत कोरोना वायरस के अन्य रूपों से संक्रमित मरीजों के इलाज में लागू की गयी है। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन से प्रभावित देशों में मरीजों को ऑक्सीजन देने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। भूषण ने कहा कि विदेशों से आये 121 लोग ओमिक्रॉन से संक्रमित पाये गये हैं। इनमें 91 प्रतिशत लोगों का कोविड टीकाकरण पूरा हो चुका था और तीन ने बूस्टर डोज भी ली थी। दो प्रतिशत को कोविड टीके की एक खुराक मिल चुकी थी और सात ने कोविड टीका नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि कोविड टीके से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है लेकिन यह संक्रमित नहीं होने की गारंटी नहीं है। संक्रमण से बचने के लिए कोविड मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। स्वास्थ्य सचिव ने सतकर्ता और सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि ओमिक्रॉन का संक्रमण 108 देशों में फैल चुका है और अभी तक कुल एक लाख 51 हजार 368 मामले आ चुके हैं। कुल 26 लोगों की मृत्यु हुई है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से बताया कि यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका में कोविड संक्रमण बढ़ रही है जबकि एशिया में यह घट रहा है। देश में केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और मिजोरम में पिछले सप्ताह के दौरान सर्वाधिक मामले सामने आये हैं। देश के 22 जिलों में संक्रमण की स्थिति चिंताजनक है। भूषण ने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। देश में 89 प्रतिशत पात्र आबादी को कोविड टीके की पहली खुराक और 61 प्रतिशत को दोनों खुराक लगायी जा चुकी है। पूरे देश भर में 18 लाख 10 हजार 83 कोविड बिस्तर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा चार लाख 94 हजार 314 ऑक्सीजन युक्त बिस्तर और एक लाख 39 हजार 300 आईसीयू बिस्तर तैयार किये गये हैं। बच्चों के लिए अलग व्यवस्था की गयी है। इस श्रेणी में 24 हजार 57 आईसीयू बिस्तर और 64 हजार 796 गैर आईसीयू बिस्तर तैयार हो चुके हैं। देश में कुल चिकित्सा ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता 15 हजार 836 टन प्रतिदिन है।
एबीएन डेस्क। भारत में सदियों से संपूर्ण स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशेषज्ञ आयुर्वेद को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जड़ी-बूटियों और औषधियों का सेवन करके न सिर्फ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जा सकता है, साथ ही कई तरह की गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में भी औषधियों को विशेष लाभदायक माना जाता है। विशेषकर कोरोना के इस दौर में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए औषधियों का सेवन करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इम्युनिटी को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े और औषधियों के सेवन को स्वास्थ्य विशेषज्ञ लाभदायक मानते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली स्वाभाविक रूप से रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों से हमारी रक्षा करती है, लेकिन अगर प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो हमें संक्रमण होने का खतरा अधिक हो सकता है। कई सारे हर्ब्स में ऐसे प्राकृतिक गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ावा दे सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे ही तीन औषधियों के बारे में जानते हैं, जिनका रोजाना सेवन करना सेहत के लिए विशेष लाभदायक हो सकता है। भारत ही नहीं मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई हिस्सों में पाई जाने वाली औषधि अश्वगंधा को वर्षों से तमाम तरह के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है। शरीर के दर्द और सूजन को कम करने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए इसका सेवन करना लाभदायक हो सकता है। यह जड़ी-बूटी एक प्रकार की एडाप्टोजेन भी मानी जाती है जो तनाव को प्रबंधित करने और अनिद्रा को दूर करने में भी मदद करती है। तुलसी का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ सांस की बीमारियों को दूर रखने के लिए भी लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक इस जड़ी-बूटी का सेवन करके कई तरह के संक्रमण से बचने, चिंता, तनाव और थकान जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है। तुलसी, छाती में जमाव से राहत प्रदान करने में भी मदद करती है। इस जड़ी-बूटी में कई एंटीआॅक्सिडेंट और शरीर को डिटॉक्स करने की भी क्षमता होती है। आंवले के सेवन से शरीर के लिए कई फायदे होते हैं। यह जड़ी-बूटी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से राहत प्रदान करती है। लिवर, हृदय, मस्तिष्क और फेफड़ों सहित महत्वपूर्ण अंगों के स्वस्थ कामकाज के साथ शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ावा देने में भी आंवला के सेवन को विशेष लाभकारी माना जाता है। आंवला में विटामिन सी, अमीनो एसिड, पेक्टिन जैसे पोषक तत्व भी होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और कई तरह की बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है।
एबीएन डेस्क। देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। केंद्र ने राज्यों को इस बारे में सतर्क रहने को कहा है। वहीं अककटर के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने भी ओमिक्रॉन को लेकर चेताया है। डॉ गुलेरिया ने कहा कि अब तक मिले डाटा के अनुसार ओमिक्रॉन में हल्की बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं, इसमें गंभीर बीमारी के लक्षण अभी नहीं हैं। डॉ गुलेरिया ने कहा कि इसको जानने के लिए अभी और डाटा चाहिए, जैसे-जैसे मामले बढ़ेंगे हमें इसके लक्षणों के बारे में और जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि गुलेरिया ने कहा कि ओमिक्रॉन ज्यादा संक्रामक है और दो चीजें बहुत जरूरी हैं- एक वैक्सीन की डोज लगाना। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगाई है उन्हें आगे आकर वैक्सीन की डोज लगानी चाहिए और दूसरा है कोविड नियमों का पालन करना चाहिए। वहीं नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने कहा कि अभी जो स्थिति है उसमें कोई बदलाव नहीं है। वायरस हमेशा शुरूआती चरणों में हल्के लक्षणों के साथ आता है और धीरे-धीरे बढ़ता है, हम इस पर नजर बनाए हुए हैं। बता दें कि इससे पहले मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों को चिट्ठी लिखकर जांच में तेजी लाने और वॉर रूम एक्टिव करने के साथ ही कहा कि अगर जरूरत पड़े तो राज्य नाइट कर्फ्यू लगा सकते हैं।
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