टीम एबीएन, रांची। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग में सोमवार को नर्सिंग संस्थानों को मान्यता प्रदान करने को लेकर निष्पादन समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने की। बैठक में डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव सीमा कुमारी उदयपुरी, उपसचिव ध्रुव प्रसाद सहित विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में राज्य के 61 नर्सिंग कॉलेजों द्वारा एनओसी के लिए दिये गये आवेदनों पर विस्तार से चर्चा की गयी। इन आवेदनों पर सरकार के निर्णय के अनुमोदन के उपरांत सुयोग्य पाये जाने वाले संस्थान को एनओसी दिया जायेगा। अपर मुख्य सचिव ने काउंसिल की बैठक 15 दिनों के भीतर आयोजित करने का निर्देश दिया।
अपर मुख्य सचिव ने कॉलेजों की आधारभूत सुविधाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों से पूछा कि संबंधित संस्थान अपनी जमीन पर संचालित हैं या लीज पर, कितनी जमीन उपलब्ध है, कितने कमरे हैं तथा कॉलेज नया है या पहले से संचालित है। उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों के लिए जमीन की रसीद और शहरी क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स की स्थिति की भी जांच की जाये।
बैठक में उन्होंने कहा कि यदि किसी कॉलेज को पहले से मौका दिया गया है, तो उसे अब तक अपना भवन निर्माण कर लेना चाहिए था। ऐसे मामलों में लीज या किराये की व्यवस्था की नवीनीकरण स्थिति की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।
अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले कॉलेजों पर अधिकतम जुर्माना लगाया जायेगा। विभाग द्वारा तैयार चार्ट में विभिन्न कमियों के आधार पर जुर्माने की राशि तय की गयी है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई कॉलेज लगातार तीन वर्षों से एडमिशन ले रहा है लेकिन नॉर्म्स का पालन नहीं कर रहा, तो ऐसे संस्थानों के निलंबन पर भी विचार किया जाना चाहिए। ऐसे कॉलेजों को शो-कॉज नोटिस जारी करने और फिलहाल एडमिशन रोकने का निर्देश दिया गया।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी कॉलेज को एनओसी देने से पहले अनिवार्य रूप से निरीक्षण किया जाए। निरीक्षण के दौरान चार अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिनमें संबंधित जिले के सिविल सर्जन, रजिस्ट्रार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और एडिशनल कलेक्टर शामिल होंगे। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी निरीक्षण की फोटो आॅनलाइन अपलोड की जाएं और निरीक्षण में संबंधित अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये।
नर्सिंग छात्रों के बेहतर प्रशिक्षण के लिए कॉलेजों को सरकारी या निजी अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) से जोड़ने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही मॉडल के तौर पर कम से कम पांच सीएचसी में तत्काल नर्सिंग की कक्षाएं शुरू करने का भी निर्देश दिया गया, ताकि भविष्य में इस व्यवस्था का विस्तार किया जा सके।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि अब आफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किये जायें और पूरी प्रक्रिया को आनलाइन किया जाये। उन्होंने सभी कॉलेजों में फैकल्टी का एचआर आनलाइन प्रदर्शित करने, बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने, तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि जिन कॉलेजों को फिलहाल एनओसी के लिए योग्य नहीं पाया गया है, वे अपनी कमियां दूर कर विभाग को सूचित करें, ताकि बाद में उन पर भी विचार किया जा सके।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास। दिल्ली के ली मेरिडीयन होटल जनपथ में प्रतिष्ठित चिकित्सक एस के दास और शिवानी झा को आईओजी डॉ० सत्योपाल अवार्डस से पुरस्कृत किया। इस कार्यक्रम में देश और विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सको का जमघट हुआ।
सेमिनार में पुरस्कृत और सम्मानित अन्य ख्यातिनाम डॉक्टरो में डॉक्टर नरेंद्र मल्होत्रा, डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा, डॉक्टर ऋषिकेश पई सहित पूर्व वियाडा अध्यक्ष सह प्रसिद्ध समाजसेवी विजय झा आदि शामिल थे ।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज स्टेट टास्क फोर्स (टीकाकरण) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक में एनएचएम के एमडी शशि प्रकाश झा, पुलिस विभाग की ओर से एसके झा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि टीकाकरण के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया को मजबूत किया जाये तथा एक पीएमयू का गठन किया जाये, ताकि कोई भी लाभार्थी टीकाकरण से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि जो भी लाभार्थी टीकाकरण से छूट जायें, उनका फोन के माध्यम से फॉलोअप किया जाये। इस कार्य के लिए एएनएम द्वारा व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर वस्तुस्थिति का आकलन किया जायेगा। साथ ही एआई के माध्यम से कॉल सेंटर स्थापित कर कम मैनपावर में अधिक प्रभावी ढंग से फॉलोअप करने का निर्देश दिया गया।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जहां भी टीकाकरण में गैप हो, उसे चिन्हित कर भरने का प्रयास किया जाये। किसी भी कर्मी के लापरवाही बरतने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया। बैठक में चंदनकियारी से संबंधित एक प्रकरण सामने आया, जिसमें एक डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप की जानकारी दी गयी। इस पर जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
समुदाय के साथ बेहतर संवाद के लिए प्रत्येक जिले में प्रतिष्ठित चिकित्सकों द्वारा मासिक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित करने का निर्देश दिया गया। अभियान की सफलता के लिए आईसीडीएस, पंचायती राज, शिक्षा, आईपीआरडी, कल्याण विभाग एवं पुलिस विभाग के सहयोग पर जोर दिया गया।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने हेतु विभिन्न एनजीओ का सहयोग लिया जाये। इसमें रोटरी क्लब जैसे प्रतिष्ठित संगठनों को भी शामिल किया जायेगा, ताकि एचपीवी वैक्सीन सभी पात्र किशोरियों तक अनिवार्य रूप से पहुंचायी जा सके।
राज्य में 28 फरवरी 2026 को एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत 14 वर्ष से अधिक एवं 15 वर्ष से कम आयु की लगभग 4 लाख किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि एचपीवी टीकाकरण अभियान को मिशन मोड में चलाते हुए हर पात्र किशोरी तक टीका पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के रांची सदर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक बड़ी चिकित्सीय सफलता हासिल की है। 54 वर्षीय मरीज के गर्दन और पीठ के (सर्वाइको-डार्सल) हिस्से में 17 साल से बढ़ रहे लगभग 5 किलोग्राम वजन के ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया गया।
मरीज लंबे समय से गर्दन में सूजन, भारीपन और तेज दर्द से परेशान थे। ट्यूमर इतना बड़ा हो गया था कि मरीज का सिर झुकाना, बैठना और सामान्य तरीके से सोना भी मुश्किल हो गया था। मरीज कई बड़े अस्पतालों में सलाह ले चुके थे, लेकिन सर्जरी का उच्च जोखिम होने के कारण इलाज संभव नहीं हो पाया था।
यह जटिल आपरेशन न्यूरोसर्जन डॉ. विकास कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने किया। सर्जरी के दौरान रक्तस्राव, नसों और मांसपेशियों की सुरक्षा और त्वचा पुनर्निर्माण जैसी कई चुनौतियां थीं। टीम ने सावधानीपूर्वक योजना और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर ट्यूमर को पूरी तरह निकालने में सफलता पायी। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. निरज, डॉ. वसुंधा, डॉ. ज्योतिका और डॉ. अंचल शामिल थीं। आपरेशन थिएटर स्टाफ में संजू, नूर, मंटू और सरिता सुरेश ने भी अहम योगदान दिया।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वह जल्दी स्वस्थ हो रहा है। इस सफलता पर सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि यह जिले के लिए गर्व की बात है। उप अधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने भी कहा कि यह सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की क्षमता को दर्शाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। योगासन भारत, जो युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से अनुबंधित राष्ट्रीय खेल महासंघ है, द्वारा हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गीता ज्ञान संस्थान में आयोजित पांच दिवसीय नेशनल योगासन जज ट्रेनिंग प्रोग्राम का सफलतापूर्वक एवं भव्य समापन हुआ।
8 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक चले इस सघन प्रशिक्षण शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने योगासन खेल के वैश्विक मानकों, तकनीकी नियमों एवं निर्णायक की बारीकियों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से देश को 157 नए प्रशिक्षित एवं प्रमाणित तकनीकी जज प्राप्त हुए। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ 8 फरवरी को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर वीरेंद्र पाल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि योगासन को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में सशक्त बनाने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष एवं निष्पक्ष जजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जज का निर्णय खिलाड़ी के भविष्य की दिशा निर्धारित करता है, अत: इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं।
12 फरवरी को समापन समारोह में हरियाणा योग आयोग के चेयरमैन एवं वर्ल्ड योगासन तथा योगासन भारत के महासचिव डॉ. जयदीप आर्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सफल प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा, प्रधानमंत्री के प्रयासों से योगासन आज एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित हो चुका है। योगासन भारत का उद्देश्य ऐसे निर्णायक तैयार करना है जो निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। किसी भी खेल में निष्पक्षता ही उसकी आत्मा होती है।
नेशनल योगासना जज योगाचार्य महेश पाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस राष्ट्रीय शिविर की तकनीकी देखरेख योगासन भारत के कोषाध्यक्ष एवं तकनीकी निदेशक रचित कौशिक ने की। कार्यक्रम के सफल संचालन में हरियाणा योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव डॉ. युद्धवीर, योगासन भारत के कार्यालय प्रबंधक राम चावला तथा विभिन्न राज्यों से पधारे रिसोर्स पर्सन्स का विशेष योगदान रहा। सभी प्रतिभागियों ने राज्य स्तरीय सूर्यनमस्कार अभियान के समापन समारोह में भी सहभागिता की, जिसमें उन्हें योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से जजों की लिखित एवं व्यावहारिक परीक्षा भी ली गई। पावन एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न इस कार्यक्रम ने भारतीय योगासन खेल के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक सशक्त एवं मजबूत नींव स्थापित की है। अंत में डॉ युद्धवीर ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
टीम एबीएन, रांची। दिनांक 10 फरवरी 2026 को आहूत राज्य सूचीबद्धता समिति की बैठक में समिति के सभी सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बैठक की अध्यक्षता झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने की। बैठक में सूचीबद्ध निजी अस्पतालों से संबंधित विभिन्न मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
तकनीकी समस्या अथवा मानवीय भूल के कारण एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपडेट किये गये कुछ विद्ड्रॉल रिक्वेस्ट के संबंध में अस्पतालों के ईमेल एवं संबंधित जिला सिविल सर्जन की अनुशंसा के आधार पर चार अस्पतालों के रिक्वेस्ट को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
इनमें हजारीबाग का न्यू झारखंड नर्सिंग होम, पूर्वी सिंहभूम का टाटा मोटर्स हॉस्पिटल प्लांट, पलामू का श्री नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल तथा पलामू का मय्यन बाबू अस्पताल शामिल हैं।
बैठक में यह भी पाया गया कि कई सूचीबद्ध निजी अस्पतालों द्वारा एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपग्रेड रिक्वेस्ट के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की गाइडलाइन एवं दिशा-निदेर्शों के अनुरूप आवश्यक वैधानिक लाइसेंस एवं दस्तावेज अपलोड नहीं किये गये हैं।
विशेष रूप से रांची म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, डीआरडीए अथवा बीडीओ द्वारा अनुमोदित बिल्डिंग प्लान से संबंधित दस्तावेजों की अनुपलब्धता सामने आयी। साथ ही, अस्पतालों द्वारा आउटसोर्स की गयी सुविधाओं जैसे फार्मेसी, ब्लड बैंक और रेडियोलॉजिकल सुविधाएं (एक्स-रे, सीटी स्कैन) के लिए स्टांप पेपर पर इकरारनामा तथा संबंधित वैधानिक लाइसेंस जैसे फामेर्सी लाइसेंस, ब्लड बैंक लाइसेंस एवं एईआरबी सर्टिफिकेट को एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इन कमियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व में लिए गए निर्णयों के आधार पर तीन सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के अपग्रेडेशन रिक्वेस्ट के अनुमोदन पर रोक लगाने का फैसला किया गया। इसके अलावा, जिन अस्पतालों ने सीटीई, सीटीओ और फायर सेफ्टी एनओसी के लिए आवेदन किया है, उनकी सूची झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड एवं फायर सेफ्टी आफिस के नोडल अधिकारियों को भेजने का निर्णय भी लिया गया।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन के बिना किसी भी डॉक्टर या स्पेशलिस्ट को जोड़ने की अनुमति नहीं होगी। सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के लिए एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट होना अनिवार्य कर दिया गया है।
इन निर्णयों से राज्य में आयुष्मान भारत-मुख्य मंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना एवं अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
टीम एबीएन, रांची। रांची जिले में फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन के उद्देश्य से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए-26) अभियान का आयोजन 10 फरवरी से 25 फरवरी तक किया जाएगा। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ। प्रभात कुमार ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर अभियान की विस्तृत जानकारी दी और इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
सिविल सर्जन ने बताया कि यह अभियान रांची जिले के कांके, सोनाहातू और तमाड़ प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत कुल 5,57,970 लक्षित जनसंख्या को फाइलेरिया रोधी दवाएं डीईसी और अल्बेंडाजोल का सेवन कराया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम आयु के बच्चों और अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी। अभियान के पहले दिन 10 फरवरी को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक भवनों में बूथ लगाकर लोगों को दवा खिलाई जाएगी।
इसके बाद 11 फरवरी से 25 फरवरी तक स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर शेष लक्षित आबादी को दवा का सेवन कराएंगे। इसके लिए जिले में कुल 619 बूथ बनाए गए हैं, जहां 1238 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर तैनात किए गए हैं। अभियान की निगरानी के लिए 106 सुपरवाइजरों की भी व्यवस्था की गई है।
सिविल सर्जन ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है, ताकि शत-प्रतिशत लक्षित आबादी दवा का सेवन करे। इसके लिए विभिन्न विभागों से भी सहयोग लिया जा रहा है और लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा जरूरी
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक वेक्टर जनित बीमारी है, जो गंदे पानी में पनपने वाले संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन इससे शरीर में स्थायी विकृति और दिव्यांगता हो सकती है। इसलिए एमडीए अभियान के दौरान सभी पात्र व्यक्तियों के लिए दवा का सेवन करना आवश्यक है।
दवा सेवन को लेकर अपील और सावधानी
सिविल सर्जन ने बताया कि दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों को दवा अवश्य खिलाएं। इस अवसर पर मलेरिया पदाधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी भी मौजूद रहे।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नई दिल्ली के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी गयासुद्दीन अहमद ने झारखंड सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी अध्यक्ष छवि रंजन, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा, वरिष्ठ परामर्शी सुनील प्रसाद सिंह, विश्वजीत प्रसाद, वैभव राय सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में योजना की समग्र प्रगति पर चर्चा करते हुए कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने बताया कि झारखंड में लाखों परिवार इस योजना के अंतर्गत आच्छादित हैं और करोड़ों लाभुकों को माध्यमिक एवं तृतीयक स्तर की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी एवं निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जहां हजारों प्रकार के उपचार पैकेजों के माध्यम से गंभीर से गंभीर बीमारियों का नि:शुल्क इलाज संभव हो पाया है। समीक्षा के दौरान पोर्टेबिलिटी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
इसमें यह सामने आया कि झारखंड के मरीज इलाज के लिए किन-किन अन्य राज्यों में अधिक जाते हैं, किन अस्पतालों में बाह्य-राज्य मरीजों का दबाव ज्यादा है और कौन-से उपचार पैकेजों में पोर्टेबिलिटी के मामले सर्वाधिक हैं। कार्यकारी निदेशक ने कहा कि इन आंकड़ों से राज्य में ही उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
निजी अस्पतालों में रोगवार पैकेज उपयोग पर चर्चा के दौरान कार्यकारी निदेशक द्वारा जानकारी दी गई कि कुछ विशिष्ट बीमारियों में दावों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। वहीं सरकारी अस्पतालों में जिलावार पैकेज उपयोग की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह आकलन किया गया कि किन जिलों में उपचार सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को बाहर न जाना पड़े।
बैठक में 30 दिनों के भीतर पुन: भर्ती से जुड़े मामलों का भी विस्तार से विश्लेषण किया गया। इसमें उन अस्पतालों और पैकेजों की पहचान की गई जहां री-एडमिशन के मामले अधिक सामने आये हैं। इस पर उपचार की गुणवत्ता, फॉलो-अप व्यवस्था और मानक उपचार प्रोटोकॉल के पालन को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा तकनीकी प्रणाली और डेटा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। टीएमएस और राज्य डेटा वेयरहाउस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह रेखांकित किया गया कि पैकेज के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विश्लेषण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यकारी निदेशक ने बताया कि संदिग्ध दावे और बार-बार होने वाली अनियमितताओं की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार से 275 करोड़ रुपये तथा केंद्र सरकार से 178 करोड़ रुपये की राशि झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी को प्राप्त हो चुकी है, जिससे योजना के सुचारु संचालन और दावों के समयबद्ध भुगतान को मजबूती मिली है।
समीक्षा बैठक के अंत में श्री गयासुद्दीन अहमद ने केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय को और मजबूत करने, आईटी सिस्टम को सुदृढ़ करने तथा निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को और पारदर्शी, प्रभावी एवं लाभुक-केंद्रित बनाया जा सकेगा।
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